अफ्रीका महाद्वीप
नामकरण से लेकर अक्षांश रेखाओं, जलसंधियों, द्वीपों, पर्वतों और भ्रंश घाटी तक — अफ्रीका महाद्वीप के हर उस बिंदु का संकलन जो सरकारी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।
01 बेसिक जानकारी एवं विभिन्न नाम
- अफ्रीका, एशिया के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है।
- यह क्षेत्रफल और जनसंख्या — दोनों ही दृष्टि से दूसरे स्थान पर है।
उपनाम
- अंध महाद्वीप: इसके दुर्गम मरुस्थलों, घने जंगलों और बीमारियों के कारण 19वीं सदी तक बाहरी दुनिया (विशेषकर यूरोप) के लिए इसका भीतरी भाग अज्ञात था।
- पठारी महाद्वीप: इसका अधिकांश भू-भाग एक विशाल पठार है।
- मानव जाति का पालना: जीवाश्म विज्ञानियों के अनुसार, सबसे पहले मानव (होमो सेपियंस) की उत्पत्ति और विकास इसी महाद्वीप पर हुआ था।
02 राजनैतिक स्थिति — क्षेत्रफल और जनसंख्या
- अफ्रीका में कुल 54 मान्यता प्राप्त देश हैं, जो किसी भी महाद्वीप में सबसे अधिक हैं।
- क्षेत्रफल में सबसे बड़ा देश: अल्जीरिया।
- 2011 में सूडान के विभाजन से पहले, सूडान सबसे बड़ा देश था।
- जनसंख्या में सबसे बड़ा देश: नाइजीरिया।
- नाइजीरिया को 'तेल ताड़ का देश' भी कहा जाता है।
03 भौगोलिक स्थिति एवं महत्वपूर्ण अक्षांश
अफ्रीका विश्व का एकमात्र ऐसा महाद्वीप है जिससे होकर पृथ्वी की तीन सबसे प्रमुख अक्षांश रेखाएँ गुजरती हैं।
कर्क रेखा
यह उत्तरी अफ्रीका (सहारा मरुस्थल) के 7 देशों से गुजरती है। पश्चिम से पूर्व क्रम:
- पश्चिमी सहारा
- मॉरिटानिया
- माली
- अल्जीरिया
- नाइजर
- लीबिया
- मिस्र
भूमध्य रेखा
यह महाद्वीप के लगभग मध्य (कांगो बेसिन, विक्टोरिया झील) के 7 देशों से गुजरती है। पश्चिम से पूर्व क्रम:
- साओ टोम और प्रिंसिपे
- गैबॉन
- कांगो गणराज्य
- डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो
- युगांडा
- केन्या
- सोमालिया
मकर रेखा
यह दक्षिणी अफ्रीका (कालाहारी मरुस्थल) के 5 देशों से गुजरती है। पश्चिम से पूर्व क्रम:
- नामीबिया
- बोत्सवाना
- दक्षिण अफ्रीका
- मोजाम्बिक
- मेडागास्कर
प्रधान याम्योत्तर / ग्रीनविच रेखा
यह रेखा पश्चिमी अफ्रीका के 5 देशों से होकर गुजरती है। उत्तर से दक्षिण क्रम:
- अल्जीरिया
- माली
- बुर्किना फासो
- टोगो
- घाना
- भूमध्य रेखा (0° अक्षांश) और ग्रीनविच रेखा (0° देशांतर) दोनों एक-दूसरे को अफ्रीका के पश्चिमी तट पर गिनी की खाड़ी में काटती हैं।
04 प्रमुख जलसंधियां
| जलसंधि | किन्हें अलग करती है | किन्हें जोड़ती है |
|---|---|---|
| जिब्राल्टर | अफ्रीका (मोरक्को) एवं यूरोप (स्पेन) को | भूमध्य सागर एवं अटलांटिक महासागर को |
| बाब-अल-मंडेब | अफ्रीका (जिबूती/इरिट्रिया) एवं एशिया (यमन) को | लाल सागर एवं अदन की खाड़ी को |
| मोजाम्बिक चैनल | मेडागास्कर एवं मुख्य भूमि (मोजाम्बिक) को | हिंद महासागर के दो हिस्सों को |
- बाब-अल-मंडेब को अरबी में 'आंसुओं का द्वार' कहा जाता है, क्योंकि यहाँ समुद्री यात्रा बहुत खतरनाक होती थी।
05 प्रमुख द्वीप
यहाँ महासागर और देश के अधिकार के आधार पर बाँटकर आपके टू-द-पॉइंट नोट्स दिए गए हैं। यह बिना टेबल के बिल्कुल स्पष्ट फॉर्मेट है:
हिंद महासागर के द्वीप
स्वतंत्र द्वीप देश
- सेशेल्स: क्षेत्रफल और जनसंख्या—दोनों में यह अफ्रीका का सबसे छोटा देश है।
- कोमोरोस: सुगंधित पौधों की खेती के कारण इसे 'इत्र के द्वीप' भी कहा जाता है।
- मेडागास्कर: अफ्रीका का सबसे बड़ा और विश्व का चौथा सबसे बड़ा द्वीप है। मकर रेखा इसके दक्षिणी भाग से गुजरती है। यह मुख्य भूमि से मोजाम्बिक चैनल द्वारा अलग होता है।
- मॉरीशस: यह विलुप्त हो चुके प्रसिद्ध 'डोडो' पक्षी का एकमात्र प्राकृतिक आवास था।
अन्य देशों के अधीन द्वीप
- ज़ंजीबार और पेंबा: यह तंजानिया के अधीन हैं। यह विश्व के 90% लौंग उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं, इसलिए इन्हें "स्पाइस आइलैंड्स" कहा जाता है।
- रियूनियन: यह फ्रांस के अधीन है (फ्रांस का ओवरसीज़ टेरिटरी)।
अटलांटिक महासागर के द्वीप
स्वतंत्र द्वीप देश
- साओ टोमे और प्रिंसिपे: परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भूमध्य रेखा इसके ठीक ऊपर से गुजरती है।
- केप वर्डे: यह अफ्रीका के पश्चिमी तट (सेनेगल के पास) स्थित एक ज्वालामुखीय द्वीपसमूह है।
अन्य देशों के अधीन द्वीप
- सेंट हेलेना: यह ब्रिटेन के अधीन है। इतिहास में इसे इसलिए जाना जाता है क्योंकि नेपोलियन बोनापार्ट को यहीं निर्वासित किया गया था।
- कैनरी द्वीप: यह स्पेन के अधीन है (मोरक्को के पश्चिमी तट के पास)।
- मडेइरा द्वीप: यह पुर्तगाल के अधीन है।
- बायोको द्वीप: यह अफ्रीकी देश इक्वेटोरियल गिनी के अधीन है। सबसे खास बात यह है कि देश की राजधानी मलाबो मुख्य अफ्रीकी भूमि पर न होकर इसी द्वीप पर स्थित है।
06 भौगोलिक सीमांत — सीमाएं, हॉर्न ऑफ अफ्रीका एवं प्रमुख केप
महाद्वीप की सीमाएं
- उत्तर: भूमध्य सागर — यह अफ्रीका को यूरोप से अलग करता है।
- उत्तर-पूर्व: लाल सागर, स्वेज नहर और अदन की खाड़ी — ये अफ्रीका को एशिया से अलग करते हैं।
- पूर्व: हिंद महासागर।
- पश्चिम: अटलांटिक महासागर।
- दक्षिण: दक्षिणी महासागर — जहाँ हिंद और अटलांटिक महासागर का जल मिलता है।
- अफ्रीका चार ओर से जल से घिरा है, लेकिन यह उत्तर-पूर्व में स्वेज स्थलडमरूमध्य के माध्यम से एशिया (सिनाई प्रायद्वीप) से भौतिक रूप से जुड़ा हुआ था, जिसे काटकर स्वेज नहर बनाई गई।
हॉर्न ऑफ अफ्रीका
- यह अफ्रीका का सबसे पूर्वी विस्तार (सींग के आकार का) है।
- इसमें 4 देश शामिल हैं — याद रखने की ट्रिक: SEED।
- S — सोमालिया
- E — इथियोपिया — कॉफी का मूल स्थान इथियोपिया को माना जाता है।
- E — इरिट्रिया
- D — जिबूती
केप ऑफ गुड होप
- यह अफ्रीका के सुदूर दक्षिण (दक्षिण अफ्रीका देश) में स्थित एक चट्टानी हेडलैंड है।
- इसकी खोज बार्टोलोमु डियाज़ ने की थी।
- वास्को डी गामा भारत आने के लिए इसी मार्ग से होकर गुजरा था।
केप अगुलहास
- यह अफ्रीका महाद्वीप का सबसे दक्षिणी बिंदु है।
- यह अटलांटिक और हिंद महासागर की सीमा निर्धारित करता है।
- तुगेला जलप्रपात। : दक्षिण अफ्रीका में स्थित प्रमुख जलप्रपात है
07 प्रमुख पर्वत, ज्वालामुखी, पठार, भ्रंश घाटी व मरुस्थल
प्रमुख पर्वत
- एटलस पर्वत: यह अफ्रीका का एकमात्र प्रमुख वलित पर्वत है।
- स्थिति — उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका (मोरक्को, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया)।
- सबसे ऊँची चोटी — माउंट टूबकल।
- ड्रेकेंसबर्ग पर्वत: यह दक्षिण अफ्रीका के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित एक विशाल कगार है।
- माउंट केन्या: यह केन्या में स्थित है।
- यह अफ्रीका की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है।
प्रमुख ज्वालामुखी
- माउंट किलिमंजारो: यह तंजानिया में स्थित है।
- यह एक मृत ज्वालामुखी है।
- यह अफ्रीका की सबसे ऊँची चोटी (5,895 मी.) है।
- भूमध्य रेखा के बहुत करीब होने के बावजूद इसकी चोटी हमेशा बर्फ से ढकी रहती है।
- माउंट कैमरून: यह पश्चिमी अफ्रीका का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।
- माउंट नीरागोंगो: यह DRC में स्थित अत्यधिक सक्रिय ज्वालामुखी है।
- यह अपनी विशाल 'लावा झील' के लिए जाना जाता है।
प्रमुख पठार
- इथियोपियन उच्चभूमि: अफ्रीका का पूर्वी हिस्सा, जिसे 'रूफ ऑफ अफ्रीका' कहा जाता है।
- यहीं से ब्लू नील नदी निकलती है।
- कटंगा का पठार: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में स्थित है।
- यह अपने विशाल तांबा और यूरेनियम भंडारों के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
- जोस का पठार: नाइजीरिया के मध्य में स्थित है।
- यह टिन खनन के लिए जाना जाता है।
- करू का पठार: दक्षिण अफ्रीका में स्थित एक अर्ध-मरुस्थलीय पठार है।
महान भ्रंश घाटी
- यह सीरिया (एशिया) से शुरू होकर लाल सागर होते हुए मोजाम्बिक (अफ्रीका) तक फैली है।
- इसकी कुल लंबाई लगभग 6,000 किमी है।
- पृथ्वी की प्लेटों के खिसकने से इसका निर्माण हुआ है।
- अफ्रीका की अधिकांश लंबी और गहरी झीलें (जैसे तांगानिका, मलावी) इसी भ्रंश घाटी के अंदर स्थित हैं।
- विक्टोरिया झील इस महान भ्रंश घाटी का हिस्सा नहीं है।
प्रमुख मरुस्थल एवं सहेल
अफ्रीका के तीनों प्रमुख मरुस्थल अलग-अलग भौगोलिक कारणों से बने हैं — परीक्षा में इनका 'निर्माण का कारण' सबसे ज़्यादा पूछा जाता है।
1. सहारा मरुस्थल
- स्थिति: उत्तरी अफ्रीका (लगभग 11 देशों में विस्तार)। यह विश्व का सबसे बड़ा गर्म मरुस्थल है।
- सहेल: सहारा के ठीक दक्षिण में एक अर्द्ध-शुष्क संक्रमण पट्टी है, जो मरुस्थल को सवाना से अलग करती है।
- निर्माण का कारण: उत्तर-पश्चिमी तट पर बहने वाली 'कनारी ठंडी जलधारा' हवा की नमी खत्म कर देती है, जो इस मरुस्थल के निर्माण का मुख्य भौगोलिक कारण है।
- जनजातियां: यहाँ 'तुआरेग' और 'बद्दू' जैसी खानाबदोश जनजातियां पाई जाती हैं।
2. कालाहारी मरुस्थल
- स्थिति: दक्षिणी अफ्रीका (मुख्यतः बोत्सवाना, और कुछ हिस्सा नामीबिया व दक्षिण अफ्रीका)।
- विशेषता: यह पूर्ण मरुस्थल न होकर एक अर्द्ध-मरुस्थल है। यहाँ की मूल जनजाति 'बुशमैन' है। यह क्षेत्र शुतुरमुर्ग के लिए भी प्रसिद्ध है।
- ओकावांगो डेल्टा: इसी मरुस्थल के किनारे बोत्सवाना में ओकावांगो नदी पानी फैलाकर एक विशाल दलदल बनाती है, जो विश्व का सबसे बड़ा अंतर्देशीय डेल्टा है।
3. नामिब मरुस्थल
- स्थिति: नामीबिया का पश्चिमी तट। इसे विश्व का सबसे पुराना मरुस्थल माना जाता है।
- निर्माण का कारण: दक्षिण-पश्चिमी तट पर बहने वाली 'बेंगुएला ठंडी जलधारा' के कारण यह तटीय मरुस्थल बना है।
08 अफ्रीका की प्रमुख नदियाँ
अफ्रीका महाद्वीप की अधिकांश बड़ी नदियाँ मध्य अफ्रीका की उच्चभूमियों और झील-क्षेत्रों से निकलती हैं तथा अलग-अलग दिशाओं में बहकर तीन अलग-अलग महासागरों में गिरती हैं। इनमें से कई नदियाँ अपने जल-विद्युत भंडार, अक्षांश रेखाओं से जुड़े रोचक तथ्यों और भू-राजनीतिक विवादों के कारण परीक्षाओं में बार-बार पूछी जाती हैं।
लंबाई के आधार पर क्रम
- नील नदी — विश्व की सबसे लंबी नदी (लगभग 6,650 किमी)।
- कांगो नदी — नील के बाद अफ्रीका की दूसरी सबसे लंबी नदी।
- नाइजर नदी — अफ्रीका की तीसरी सबसे लंबी नदी।
- जांबेजी नदी — अफ्रीका की चौथी सबसे लंबी नदी।
एक नज़र में तुलना
| नदी | उद्गम | लंबाई | गिरती है | प्रमुख विशेषताएं |
|---|---|---|---|---|
| नील | विक्टोरिया झील (श्वेत नील) व ताना झील (नील नील) | ~6,650 किमी | भूमध्य सागर | • विश्व की सबसे लंबी नदी • खारतूम (सूडान) में श्वेत व नील नील का संगम • 11 देशों से होकर बहती है • असवान बांध — लेक नासर (मिस्र) |
| कांगो | लुलाबा-चम्बेसी | ~4,700 किमी | अटलांटिक महासागर | • भूमध्य रेखा को दो बार पार करने वाली एकमात्र नदी • विश्व की सबसे गहरी नदी • अफ्रीका की दूसरी सबसे लंबी नदी • पहले 'जायरे नदी' कहलाती थी |
| नाइजर | फूटा जलॉन पठार (गिनी) | ~4,180 किमी | गिनी की खाड़ी (अटलांटिक) | • 'तेल नदी' के नाम से प्रसिद्ध (पाम ऑयल व पेट्रोलियम) • अफ्रीका की तीसरी सबसे लंबी नदी • बूमरैंग आकार में बहती है • माली में 'अंतर्देशीय डेल्टा' बनाती है |
| वोल्टा | ब्लैक-व्हाइट-रेड वोल्टा का संगम (बुर्किना फासो) | ~1,600 किमी | गिनी की खाड़ी (अटलांटिक) | • वोल्टा झील — क्षेत्रफल में विश्व की सबसे बड़ी कृत्रिम झील • अकोसोम्बो बांध (घाना) से झील बनी • मुख्यतः घाना व बुर्किना फासो में प्रवाहित |
| जांबेजी | जाम्बिया (कालेने पहाड़ियाँ) | ~2,700 किमी | हिंद महासागर (मोजाम्बिक चैनल) | • विक्टोरिया जलप्रपात (जाम्बिया-जिम्बाब्वे सीमा) • कारीबा बांध — लेक करीबा (जल आयतन में सबसे बड़ी कृत्रिम झील) • काहोरा बासा बांध व झील (मोजाम्बिक) |
| लिम्पोपो | हाईवेल्ड (दक्षिण अफ्रीका) | ~1,750 किमी | हिंद महासागर | • मकर रेखा को दो बार पार करने वाली एकमात्र नदी • दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना व जिम्बाब्वे की सीमा बनाती है |
| ऑरेंज | दक्षिण अफ्रीका (मुख्यतः केप-नॉर्थ व फ्री स्टेट) | ~2,200 किमी | अटलांटिक महासागर | • दक्षिणी अफ्रीका की प्रमुख नदी • गरिएप बांध — ऑरेंज नदी पर स्थित • प्रमुखतः दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से होकर बहती है |
लंबाई के आंकड़े अनुमानित हैं — परीक्षा में क्रम याद रखना महत्वपूर्ण है, सटीक आंकड़ा नहीं।
- अक्षांश रेखा को दो बार काटने वाली नदियाँ — भूमध्य रेखा को "कांगो" और मकर रेखा को "लिम्पोपो" पार करती है।
नील नदी तंत्र
नील नदी विश्व की सबसे लंबी नदी (लगभग 6,650 किमी) है। इसका अपवाह तंत्र 11 अफ्रीकी देशों में फैला है। यह मुख्य रूप से दो प्रमुख धाराओं — श्वेत नील और नीली नील — के मिलने से बनती है।
उद्गम और प्रमुख धाराएँ
श्वेत नील
- उद्गम: इसका उद्गम अफ्रीका की सबसे बड़ी विक्टोरिया झील से होता है।
- यह दक्षिण से उत्तर की ओर युगांडा और दक्षिण सूडान होते हुए बहती है।
- आकार: यह अफ्रीका की सबसे बड़ी तथा उत्तरी अमेरिका की 'सुपीरियर झील' के बाद विश्व की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है।
- सीमावर्ती देश: इसकी सीमा तीन देशों से लगती है — तंजानिया, युगांडा और केन्या (याद रखने की ट्रिक: TUK)।
- महत्वपूर्ण अक्षांश: भूमध्य रेखा इस झील के मध्य से होकर गुजरती है।
- भौगोलिक अपवाद: अफ्रीका की अधिकांश झीलों (जैसे तांगानिका, मलावी) के विपरीत, विक्टोरिया झील महान भ्रंश घाटी का हिस्सा नहीं है — यह दो भ्रंश घाटियों के बीच एक उथले बेसिन में स्थित है।
नीली नील
- उद्गम: इसका उद्गम इथियोपिया की उच्चभूमि में स्थित ताना झील से होता है।
- जल की मात्रा: नील नदी में 80% से अधिक जल और उपजाऊ गाद नीली नील द्वारा ही लाई जाती है।
संगम
श्वेत नील और नीली नील दोनों नदियाँ सूडान की राजधानी खारतूम में आपस में मिलती हैं। इसी संगम के बाद संयुक्त धारा को 'नील नदी' कहा जाता है।
बहाव की दिशा और मुहाना
- दिशा: यह नदी विषुवतीय क्षेत्र (दक्षिण) से शुरू होकर सहारा मरुस्थल को पार करते हुए उत्तर की ओर बहती है।
- मुहाना: यह मिस्र में भूमध्य सागर में गिरती है।
- डेल्टा: मुहाने पर यह एक विशाल चापाकार डेल्टा बनाती है — विश्व प्रसिद्ध बंदरगाह सिकंदरिया इसी डेल्टा पर स्थित है।
प्रमुख बांध और कृत्रिम झीलें
UKPSC परीक्षाओं में इन जलविद्युत परियोजनाओं और उनसे जुड़े भू-राजनीतिक विवादों से सीधे प्रश्न बनते हैं:
आसवान बांध
- यह मिस्र में नील नदी पर स्थित सबसे महत्वपूर्ण बांध है।
- यह मिस्र की कृषि और बिजली का मुख्य आधार है।
- नासेर झील: आसवान बांध के पीछे बनी यह एक विशाल कृत्रिम झील है, जो मिस्र और सूडान की सीमा पर स्थित है।
- कर्क रेखा नासेर झील से होकर गुजरती है।
ग्रैंड इथियोपियन रेनेसां डैम
- यह बांध इथियोपिया में नीली नील नदी पर निर्माणाधीन/संचालित है।
- यह अफ्रीका की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है।
- इसके कारण इथियोपिया, सूडान और मिस्र के बीच नील नदी के जल बँटवारे को लेकर भारी विवाद है।
परीक्षा उपयोगी अन्य उच्च-उपज तथ्य
- नील घाटी और कृषि: मिस्र में कपास की खेती मुख्यतः नील नदी घाटी और डेल्टा क्षेत्र में की जाती है।
- हेरोडोटस का कथन: प्रसिद्ध यूनानी इतिहासकार हेरोडोटस ने कहा था — "मिस्र नील नदी का वरदान है"।
- तटीय शहर: मिस्र की राजधानी काहिरा और सूडान की राजधानी खारतूम नील नदी के तट पर ही बसे हैं।
- लंबाई बनाम आयतन: नील नदी लंबाई के आधार पर विश्व में प्रथम स्थान पर है, परंतु जल के आयतन और चौड़ाई के आधार पर दक्षिण अमेरिका की अमेज़ॅन नदी विश्व की सबसे बड़ी नदी है।
कांगो (ज़ैरे) नदी तंत्र
कांगो नदी अफ्रीका की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है। इसकी भौगोलिक स्थिति और विशेषताओं से परीक्षाओं में सीधे और बहुत सटीक प्रश्न बनते हैं।
बेसिक एवं सबसे महत्वपूर्ण तथ्य
- पुराना नाम: इसका ऐतिहासिक नाम ज़ैरे नदी है।
- भूमध्य रेखा: यह विश्व की एकमात्र नदी है जो भूमध्य रेखा (0° अक्षांश) को दो बार पार करती है — यह प्रश्न परीक्षाओं में सबसे ज्यादा पूछा जाता है।
- गहराई: यह विश्व की सबसे गहरी नदी है (कुछ स्थानों पर इसकी गहराई 220 मीटर से अधिक है)।
- आयतन और चौड़ाई: जल के आयतन के हिसाब से अमेज़ॅन नदी के बाद यह विश्व की दूसरी सबसे बड़ी नदी है।
- लंबाई: नील नदी के बाद यह अफ्रीका की दूसरी सबसे लंबी नदी है।
प्रमुख सहायक नदियाँ
- कसाई नदी: यह कांगो की सबसे महत्वपूर्ण सहायक नदी है।
- परीक्षा बिंदु: कसाई नदी का बेसिन अपने हीरे के विशाल भंडारों के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
प्रमुख जलप्रपात और बांध
जलप्रपात
- लिविंगस्टोन जलप्रपात: नदी के निचले हिस्से में स्थित विश्व के सबसे विशाल और तेज़ जलप्रपातों की एक श्रृंखला है।
- बोयोमा जलप्रपात: इसका पुराना नाम 'स्टेनली जलप्रपात' था — यह नदी के ऊपरी हिस्से में स्थित है।
बांध
- इंगा बांध: यह DRC में कांगो नदी पर स्थित है।
- यहाँ 'ग्रैंड इंगा प्रोजेक्ट' प्रस्तावित है, जिसके पूरा होने पर यह विश्व का सबसे बड़ा जलविद्युत संयंत्र बन जाएगा (चीन के थ्री गॉर्जेस डैम से भी बड़ा)।
मानव भूगोल एवं पर्यावरण
- कांगो वर्षावन: अमेज़ॅन के बाद यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय वर्षावन है — इसे 'पृथ्वी का दूसरा फेफड़ा' भी कहा जाता है।
पिग्मी जनजाति
- कांगो बेसिन के घने जंगलों में पिग्मी नामक शिकारी-संग्राहक जनजाति निवास करती है।
- इनका कद बहुत छोटा होता है।
- जंगली जानवरों और कीचड़ से बचने के लिए ये अपने घर पेड़ों पर बनाते हैं।
नाइजर नदी
नाइजर नदी नील और कांगो के बाद अफ्रीका की तीसरी सबसे लंबी नदी है। यह पश्चिमी अफ्रीका की सबसे प्रमुख नदी है।
- उद्गम: इसका उद्गम गिनी देश में स्थित फूटा जलॉन पठार से होता है।
- अंतर्देशीय डेल्टा: माली देश में यह नदी मरुस्थलीय क्षेत्र में एक विशाल 'अंतर्देशीय डेल्टा' का निर्माण करती है।
- बहाव और मुहाना: यह गिनी, माली, नाइजर और नाइजीरिया से होते हुए गिनी की खाड़ी में गिरती है।
- उपनाम: इसे 'तेल नदी' कहा जाता है।
- इसके मुहाने (नाइजर डेल्टा) के पास पाम ऑयल का भारी व्यापार होता है।
- यहाँ पेट्रोलियम के भी विशाल भंडार हैं।
वोल्टा नदी
यह पश्चिमी अफ्रीका (मुख्यतः घाना) की एक बहुत महत्वपूर्ण नदी प्रणाली है।
निर्माण एवं बहाव
- निर्माण: यह बुर्किना फासो से निकलने वाली तीन नदियों — ब्लैक वोल्टा, व्हाइट वोल्टा और रेड वोल्टा — के संगम से बनती है।
- मुहाना: यह दक्षिण की ओर बहकर गिनी की खाड़ी में गिरती है।
अकोसोम्बो बांध एवं वोल्टा झील
- अकोसोम्बो बांध: घाना में वोल्टा नदी पर बनाया गया यह प्रसिद्ध बांध है।
- वोल्टा झील: अकोसोम्बो बांध के कारण बनी यह झील पृष्ठीय क्षेत्रफल के आधार पर विश्व की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है।
- यह घाना के एक बहुत बड़े हिस्से को कवर करती है।
जांबेजी नदी
यह अफ्रीका की चौथी सबसे लंबी नदी और हिंद महासागर में गिरने वाली अफ्रीका की सबसे बड़ी नदी है।
उद्गम और बहाव
यह जाम्बिया से निकलती है और जाम्बिया-जिम्बाब्वे के बीच एक लंबी प्राकृतिक सीमा बनाते हुए, मोजाम्बिक देश से होकर हिंद महासागर (मोजाम्बिक चैनल) में गिरती है।
विक्टोरिया जलप्रपात
- यह जांबेजी नदी पर (जाम्बिया और जिम्बाब्वे की सीमा पर) स्थित विश्व का सबसे चौड़ा और प्रसिद्ध जलप्रपात है।
- स्थानीय भाषा में इसे 'मोसी-ओवा-तुन्या' कहा जाता है, जिसका अर्थ है "धुआँ जो गरजता है"।
प्रमुख बांध
करीबा बांध
- यह जाम्बिया और जिम्बाब्वे की सीमा पर स्थित है।
- इसके पीछे बनी करीबा झील, जल के आयतन के आधार पर विश्व की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है।
- वोल्टा झील — क्षेत्रफल में सबसे बड़ी कृत्रिम झील; करीबा झील — जल आयतन में सबसे बड़ी कृत्रिम झील। दोनों को गड़बड़ाएं नहीं।
लिम्पोपो नदी
दक्षिणी अफ्रीका की यह नदी अपनी एक विशेष भौगोलिक विशेषता के कारण परीक्षाओं का सबसे पसंदीदा प्रश्न है।
उद्गम एवं बहाव
- उद्गम: यह दक्षिण अफ्रीका के 'हाईवेल्ड' क्षेत्र से निकलती है।
- आकार: यह नदी अंग्रेजी के 'U' अक्षर के आकार में बहती है।
- सीमाएं: यह पहले दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना के बीच, और फिर दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे के बीच प्राकृतिक सीमा बनाती है।
- मुहाना: यह मोजाम्बिक से होते हुए हिंद महासागर में गिरती है।
- लिम्पोपो विश्व की एकमात्र ऐसी नदी है जो मकर रेखा को दो बार पार करती है (काटती है)।
- याद रखने का तरीका — भूमध्य रेखा को "कांगो" और मकर रेखा को "लिम्पोपो" पार करती है।
उपनाम
इस नदी में मगरमच्छों की विशाल आबादी पाई जाती है, इसलिए इसे 'घड़ियाल नदी' भी कहा जाता है।
ऑरेंज नदी
ऑरेंज नदी दक्षिणी अफ्रीका की एक प्रमुख नदी है। यह क्षेत्र की महत्वपूर्ण नदी प्रणालियों में से एक मानी जाती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- स्थान: यह दक्षिणी अफ्रीका की प्रमुख नदी है।
- गरिएप बांध: गरिएप बाँध ऑरेंज नदी पर स्थित है।
- बहाव: यह दक्षिण अफ्रीका से होकर बहते हुए अटलांटिक महासागर की ओर जाती है।
09 अफ्रीका की प्रमुख झीलें
अफ्रीका की अधिकतर बड़ी झीलें महान भ्रंश घाटी से जुड़ी हैं, सिवाय विक्टोरिया झील के। परीक्षाओं में इन झीलों का उत्तर से दक्षिण क्रम, उनकी सीमाएं और उनसे जुड़े 'अति महत्वपूर्ण' तथ्य बार-बार पूछे जाते हैं।
महान भ्रंश घाटी की झीलें (उत्तर से दक्षिण का सटीक क्रम)
महान भ्रंश घाटी की झीलों को उत्तर से दक्षिण के क्रम में याद रखने के लिए यह सूची एकदम सटीक है:
- तुर्काना झील:
- स्थिति: यह भ्रंश घाटी की सबसे उत्तरी प्रमुख झील है (मुख्य रूप से केन्या और इथियोपिया की सीमा पर)।
- इसे 'रुडोल्फ झील' भी कहा जाता है।
- यह विश्व की सबसे बड़ी स्थायी मरुस्थलीय झील है।
- यह विश्व की सबसे बड़ी क्षारीय झील भी है।
- अल्बर्ट झील: युगांडा और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की सीमा पर स्थित है।
- एडवर्ड झील: युगांडा और DRC की सीमा पर स्थित है।
- किवु झील:
- स्थिति: रवांडा और DRC की सीमा पर।
- यह झील अपनी सतह के नीचे मौजूद 'मीथेन गैस' के विशाल भंडारों के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
- इसे 'विस्फोटक झील' भी माना जाता है।
- तांगानिका झील:
- स्थिति: तंजानिया, DRC, बुरुंडी और जाम्बिया की सीमाओं पर।
- यह विश्व की सबसे लंबी झील है।
- यह बैकाल झील (रूस) के बाद विश्व की दूसरी सबसे गहरी झील भी है।
- मलावी या न्यासा झील:
- स्थिति: यह महान भ्रंश घाटी की सबसे दक्षिणी प्रमुख झील है (मलावी, मोजाम्बिक और तंजानिया के बीच)।
- इसे 'कैलेंडर झील' कहा जाता है क्योंकि इसकी लंबाई लगभग 365 मील और चौड़ाई 52 मील है।
- विक्टोरिया झील इन दो भ्रंश घाटियों (पूर्वी व पश्चिमी शाखा) के बीच स्थित है — यह भ्रंश घाटी का हिस्सा नहीं है।
विक्टोरिया झील — परीक्षा उपयोगी तथ्य
- यह अफ्रीका महाद्वीप की सबसे बड़ी झील है।
- यह विश्व की सबसे बड़ी उष्णकटिबंधीय झील भी है।
- कुल क्षेत्रफल के आधार पर यह विश्व की तीसरी सबसे बड़ी झील है।
क्षेत्रफल के आधार पर विश्व की शीर्ष 3 झीलें
| क्रम | झील | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 1 | कैस्पियन सागर | विश्व की सबसे बड़ी झील (खारे पानी की) |
| 2 | सुपीरियर झील | विश्व की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील |
| 3 | विक्टोरिया झील | विश्व की सबसे बड़ी उष्णकटिबंधीय झील |
- मीठे पानी की झीलों में, 'सुपीरियर झील' के बाद यह विश्व में दूसरे स्थान पर आती है।
- इसकी सीमा केवल तीन अफ्रीकी देशों से लगती है — तंजानिया, युगांडा और केन्या।
- अफ्रीका की अन्य प्रमुख झीलों के विपरीत, विक्टोरिया झील महान भ्रंश घाटी का हिस्सा नहीं है।
- यह विश्व की सबसे लंबी नदी प्रणाली की मुख्य धारा, 'श्वेत नील' का उद्गम स्थल है।
कुल क्षेत्रफल के आधार पर
- रैंक 1: कैस्पियन सागर — विश्व की सबसे बड़ी झील (लगभग 371,000 वर्ग किमी)।
- खारे पानी और विशाल आकार के कारण इसे 'सागर' कहा जाता है।
- रैंक 2: सुपीरियर झील — कुल क्षेत्रफल के मामले में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी झील।
मीठे पानी का क्षेत्रफल के आधार पर
- रैंक 1: सुपीरियर झील — विश्व की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील (क्षेत्रफल के अनुसार)।
- स्थिति: अमेरिका और कनाडा की सीमा पर।
- रैंक 2: विक्टोरिया झील — विश्व की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की झील (क्षेत्रफल के अनुसार)।
- स्थिति: अफ्रीका (भूमध्य रेखा इस झील के बीच से गुजरती है)।
कुल आयतन के आधार पर
- रैंक 1: कैस्पियन सागर — पानी के कुल आयतन के अनुसार विश्व की सबसे बड़ी झील।
- रैंक 2: बैकाल झील — कुल आयतन के अनुसार विश्व की दूसरी सबसे बड़ी झील।
मीठे पानी का आयतन के आधार पर
- रैंक 1: बैकाल झील — मीठे पानी के आयतन के अनुसार विश्व की सबसे बड़ी झील।
- स्थिति: रूस।
- विश्व का लगभग 20–22% मीठा पानी अकेले इसी झील में है।
- रैंक 2: तांगानिका झील — मीठे पानी के आयतन के अनुसार विश्व की दूसरी सबसे बड़ी झील।
गहराई के आधार पर
- रैंक 1: बैकाल झील — विश्व की सबसे गहरी झील।
- इसकी अधिकतम गहराई लगभग 1,642 मीटर है।
- रैंक 2: तांगानिका झील — विश्व की दूसरी सबसे गहरी झील।
- इसकी अधिकतम गहराई लगभग 1,470 मीटर है।
लंबाई के आधार पर
- रैंक 1: तांगानिका झील — विश्व की सबसे लंबी मीठे पानी की झील।
- यह लगभग 673 किमी लंबी है।
- स्थिति: चार अफ्रीकी देशों — तंजानिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, बुरुंडी और जाम्बिया — की सीमाओं पर।
- रैंक 2: बैकाल झील — विश्व की दूसरी सबसे लंबी मीठे पानी की झील।
- यह लगभग 636 किमी लंबी है।
लवणता के आधार पर
- रैंक 1 (परीक्षा उत्तर): वॉन झील — प्रतियोगी परीक्षाओं में इसे विश्व की सर्वाधिक लवणता वाली झील (330‰) माना जाता है।
- परीक्षा में यही उत्तर सही माना जाता है।
- सत्यापित वैज्ञानिक अपडेट: वर्तमान में अंटार्कटिका का 'डॉन जुआन पॉन्ड' और इथियोपिया का 'गैतले तालाब' 430‰+ लवणता के साथ सबसे नमकीन जल निकाय हैं।
- फिर भी, पारंपरिक परीक्षाओं में आज भी वॉन झील ही सही उत्तर माना जाता है।
- रैंक 2: मृत सागर — पारंपरिक डेटा के अनुसार 238‰ लवणता के साथ दूसरी सबसे अधिक लवणता वाली झील है।
- स्थिति: जॉर्डन और इज़राइल के बीच।
ऊंचाई और निचाई के आधार पर विशेष श्रेणियां
- उच्चतम नौगम्य: टिटिकाका झील — यह विश्व में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित झील है जहाँ बड़ी नावें (नौकायन) चलाई जा सकती हैं।
- स्थिति: पेरू और बोलीविया की सीमा पर, एंडीज़ पर्वत में।
- निम्नतम: मृत सागर — यह विश्व की सबसे निचली झील है।
- इसका तट पृथ्वी पर भूमि का सबसे निचला बिंदु है — समुद्र तल से लगभग 430 मीटर नीचे।
10 अफ्रीका के घास के मैदान
अफ्रीका के घास के मैदानों को कांगो बेसिन के घने वर्षावन दो स्पष्ट हिस्सों में बांटते हैं — भूमध्य रेखा के उत्तर व दक्षिण में उष्णकटिबंधीय सवाना, और सुदूर दक्षिण में शीतोष्ण वेल्ड।
1. सवाना
- प्रकार: उष्णकटिबंधीय घास के मैदान — भूमध्य रेखा के पास, कांगो बेसिन के बाहरी घेरे में।
- जलवायु: इसकी सबसे बड़ी विशेषता 'स्पष्ट शुष्क और आर्द्र ऋतु' है। यहाँ केवल गर्मियों में बारिश होती है।
- पारिस्थितिकी: यहाँ की घास लंबी और मोटी (हाथी घास) होती है। विशाल जानवरों (शेर, हाथी, जिराफ) की अधिकता के कारण इसे "विश्व का चिड़ियाघर" कहा जाता है। मसाई जनजाति यहीं निवास करती है।
2. वेल्ड
- प्रकार: शीतोष्ण घास के मैदान — मकर रेखा के दक्षिण में, बिल्कुल दक्षिण अफ्रीका में।
- आर्थिक महत्व: यह क्षेत्र अपनी उन्नत ऊन वाली 'मेरिनो भेड़' के पालन के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
- खनिज संपदा: यह क्षेत्र खनिजों से समृद्ध है। सोने की खदानों के लिए प्रसिद्ध जोहान्सबर्ग और हीरे के लिए प्रसिद्ध किम्बरले इसी वेल्ड क्षेत्र में आते हैं। लिम्पोपो और ऑरेंज नदियां यहीं से बहती हैं।
11 अफ्रीका महाद्वीप: प्रमुख महासागरीय जलधाराएँ
महाद्वीपों के पश्चिमी तटों पर बहने वाली ठंडी जलधाराएँ हवा की नमी को सोख लेती हैं, जिससे बारिश नहीं होती। यही कारण है कि दुनिया के बड़े मरुस्थल महाद्वीपों के पश्चिमी तटों पर ही मिलते हैं।
ठंडी जलधाराएँ — ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर
- बेंगुएला की जलधारा:
- स्थिति: दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका (नामीबिया व दक्षिण अफ्रीका) के तट पर, दक्षिण अटलांटिक महासागर में।
- इसी के कारण अफ्रीका के पश्चिमी तट पर नामिब मरुस्थल और अंदरूनी हिस्से में कालाहारी मरुस्थल का निर्माण हुआ है।
- कनारी की जलधारा:
- स्थिति: उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका (मोरक्को, पश्चिमी सहारा) के तट पर, उत्तरी अटलांटिक महासागर में।
- यह सहारा मरुस्थल के निर्माण और उसके पश्चिमी तट तक विस्तार का सबसे बड़ा भौगोलिक कारण है।
- सोमाली जलधारा:
- स्थिति: पूर्वी अफ्रीका ('हॉर्न ऑफ अफ्रीका' / सोमालिया) के तट पर हिंद महासागर में।
- विशेषता: यह एक अनोखी जलधारा है जो मानसून के अनुसार अपनी दिशा बदलती है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान ठंडे पानी का 'अपवेलिंग' होता है, जिससे यह ठंडी जलधारा बन जाती है और सोमालिया के तट को शुष्क बना देती है।
गर्म जलधाराएँ — भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर
- अगुलहास की जलधारा:
- स्थिति: अफ्रीका के दक्षिण-पूर्वी तट पर हिंद महासागर में।
- यह दक्षिणी गोलार्ध की सबसे तेज़ बहने वाली पश्चिमी सीमावर्ती जलधारा है।
- मोजांबिक की जलधारा: अफ्रीका की मुख्य भूमि और मेडागास्कर द्वीप के बीच 'मोजांबिक चैनल' से बहने वाली हिंद महासागर की गर्म जलधारा है। (यही आगे चलकर अगुलहास जलधारा में मिल जाती है।)
- गिनी की जलधारा: पश्चिमी अफ्रीका में 'गिनी की खाड़ी' के पास बहने वाली भूमध्यरेखीय अटलांटिक महासागर की गर्म जलधारा है।
12 अफ्रीका: स्थानीय हवाएँ और धूल भरी आंधियाँ
अफ्रीका की अधिकांश महत्वपूर्ण स्थानीय हवाएँ सहारा मरुस्थल या आंतरिक पठारी क्षेत्रों से संबंधित हैं। इसलिए इनकी प्रकृति अक्सर गर्म, शुष्क और धूल भरी होती है।
भाग 1: प्रमुख स्थानीय हवाएँ
| पवन का नाम | प्रकृति | प्रभावित क्षेत्र | परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|---|
| हरमट्टन | गर्म और शुष्क | पश्चिमी अफ्रीका — सहारा से गिनी तट की ओर | अति महत्वपूर्ण: इसे "डॉक्टर विंड" कहा जाता है। गिनी तट की उमस भरी जलवायु में यह शुष्क हवा मौसम को अधिक सुहावना और स्वास्थ्यवर्धक बना देती है। |
| सिरोको | गर्म, शुष्क और धूल भरी | सहारा से उत्तर की ओर, भूमध्य सागर पार करके इटली/स्पेन तक | यह सहारा की लाल रेत को उत्तर की ओर ले जाती है। बारिश के साथ यही धूल इटली में गिरती है, इसलिए इसे "रक्त वर्षा" से जोड़ा जाता है। |
| खमसिन | गर्म और शुष्क | मिस्र | यह मिस्र में बहने वाली सिरोको हवा का स्थानीय नाम है। यह वसंत ऋतु में लगभग 50 दिनों तक चलने के लिए प्रसिद्ध है। |
| बर्ग | गर्म और शुष्क | दक्षिण अफ्रीका | यह आंतरिक पठार से तटीय क्षेत्रों की ओर नीचे उतरने वाली हवा है। चिनूक की तरह इसे फॉन प्रकार की हवा माना जाता है। |
भाग 2: सिरोको हवा के अन्य स्थानीय नाम
मिलान करें वाले प्रश्नों में सिरोको हवा के अलग-अलग देशों में प्रचलित स्थानीय नाम बहुत पूछे जाते हैं:
| देश/क्षेत्र | स्थानीय नाम | याद रखने का संकेत |
|---|---|---|
| मिस्र | खमसिन | वसंत ऋतु में लगभग 50 दिनों की गर्म-शुष्क हवा |
| लीबिया | गिबली | सहारा से आने वाली गर्म और धूल भरी हवा |
| ट्यूनीशिया | चिली | सिरोको का स्थानीय नाम |
| स्पेन | लेवेच | भूमध्यसागरीय क्षेत्र में गर्म सहाराई हवा |
- हरमट्टन = डॉक्टर पवन, सिरोको = रक्त वर्षा, और बर्ग = दक्षिण अफ्रीका की फॉन प्रकार की हवा — ये तीन जोड़े सबसे अधिक पूछे जाते हैं।
13 अफ्रीका की प्रमुख जनजातियां
अफ्रीका की जनजातियों को उनके निवास क्षेत्र (मरुस्थल / वर्षावन / सवाना) से जोड़कर याद रखना परीक्षा में सबसे उपयोगी रहता है।
- बुशमैन:
- स्थान: कालाहारी मरुस्थल (मुख्यतः बोत्सवाना)।
- ये लोग मुख्य रूप से आखेटक हैं। दीमक को बड़े चाव से खाते हैं, जिसे "बुशमैन का चावल" कहा जाता है।
- पिग्मी:
- स्थान: कांगो बेसिन (मध्य अफ्रीका के घने विषुवतीय वर्षावन)।
- इनका कद बहुत छोटा (बौना) होता है। जंगली जानवरों और दलदल से बचने के लिए ये अपना घर पेड़ों के ऊपर बनाते हैं।
- मसाई:
- स्थान: पूर्वी अफ्रीका के सवाना घास के मैदान (मुख्य रूप से केन्या और तंजानिया)।
- ये एक लड़ाकू और पशुपालक जनजाति हैं। गाय इनके जीवन का केंद्र है। (इनके घर को 'क्रॉल' कहा जाता है।)
- तुआरेग:
- स्थान: सहारा मरुस्थल (उत्तरी अफ्रीका)।
- ये खानाबदोश लोग हैं। मरुस्थल के कठिन रास्तों की अच्छी जानकारी होने के कारण ये सहारा में व्यापारिक कारवां के मार्गदर्शक के रूप में काम करते हैं।
- बद्दू: उत्तरी अफ्रीका (सहारा) और अरब प्रायद्वीप में पाए जाने वाले, मुख्य रूप से ऊंट पालने वाले खानाबदोश लोग।
- ज़ुलु:
- स्थान: दक्षिण अफ्रीका (क्वाज़ुलु-नटाल प्रांत)।
- यह दक्षिण अफ्रीका का सबसे बड़ा जातीय समूह है। ऐतिहासिक 'ज़ुलु युद्ध' के कारण ये अक्सर इतिहास और भूगोल दोनों में पूछे जाते हैं।
- फुलानी और हौसा:
- स्थान: पश्चिमी अफ्रीका (मुख्यतः नाइजीरिया)।
- फुलानी लोग मुख्य रूप से पशुपालक हैं, जबकि हौसा लोग कृषक हैं। नाइजीरिया की राजनीति में इनका बड़ा प्रभाव है।
- हूतू और तुत्सी:
- स्थान: रवांडा और बुरुंडी (मध्य-पूर्वी अफ्रीका)।
- इन दोनों जनजातियों के बीच हुए ऐतिहासिक जातीय संघर्ष (रवांडा नरसंहार) के कारण आयोग अक्सर इनकी लोकेशन पूछता है।
त्वरित सारणी — जनजाति व निवास क्षेत्र
| जनजाति | निवास क्षेत्र | मुख्य पहचान |
|---|---|---|
| बुशमैन | कालाहारी मरुस्थल | आखेटक, दीमक भक्षी |
| पिग्मी | कांगो बेसिन | बौना कद, वृक्ष-गृह |
| मसाई | पूर्वी अफ्रीकी सवाना | पशुपालक, लड़ाकू |
| तुआरेग | सहारा मरुस्थल | व्यापारिक मार्गदर्शक |
| बद्दू | सहारा व अरब प्रायद्वीप | ऊंट पालक |
| ज़ुलु | दक्षिण अफ्रीका | सबसे बड़ा जातीय समूह |
| फुलानी व हौसा | पश्चिमी अफ्रीका (नाइजीरिया) | पशुपालक व कृषक |
| हूतू व तुत्सी | रवांडा व बुरुंडी | ऐतिहासिक जातीय संघर्ष |