कवि एवं रचनाकार — हिंदी नोट्स
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हिंदी साहित्य का इतिहास

छायावाद और भक्तिकाल के प्रमुख कवि — जीवन, रचनाएँ, पंक्तियाँ, फ्लैशकार्ड और क्विज़ सब एक साथ।

🃏 Active Recall Flashcards ✍️ पंक्ति-अर्थ 🧠 मेमोरी ट्रिक्स ❓ क्विज़
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छायावाद काल

1918 – 1938 ई. · प्रवर्तक: जयशंकर प्रसाद · चार स्तंभ
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याद करने की ट्रिक — चार स्तंभ "प्र-नि-पं-म"प्रसाद · निराला · पंत · हादेवी
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तुलनात्मक तालिका — चारों स्तंभ

एक नज़र में · परीक्षा में सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले तथ्य
तथ्य जयशंकर प्रसाद निराला सुमित्रानंदन पंत महादेवी वर्मा
जन्म 1889, काशी 1899, मेदिनीपुर (बंगाल) 1900, कौसानी (उत्तराखंड) 1907, फर्रुखाबाद (UP)
मृत्यु 1937 (TB) 1961, इलाहाबाद 1977, इलाहाबाद 1987, इलाहाबाद
बचपन का नाम झारखंडी / कलाधर सूर्यकांत त्रिपाठी गुँसाई दत्त
प्रमुख उपाधि छायावाद का प्रवर्तक/ब्रह्मा महाप्राण (गंगाप्रसाद पांडेय) प्रकृति के सुकुमार कवि आधुनिक मीरा
प्रथम काव्य संग्रह कानन कुसुम (1913) अनामिका (1923) वीणा (1918) नीहार (1930)
महाकाव्य / श्रेष्ठ कृति कामायनी (1935) राम की शक्तिपूजा, सरोज स्मृति लोकायतन (महाकाव्य) यामा (ज्ञानपीठ विजेता)
ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं (1937 में निधन) नहीं (1961 में निधन) 1968 — चिदंबरा 1982 — यामा
साहित्य अकादमी 1960 — कला व बूढ़ा चाँद 1956 — यामा
प्रथम कहानी / संग्रह 'ग्राम' (1911) / छाया (हिंदी का प्रथम) प्रथम संग्रह: लिली (1934) 'अतीत के चलचित्र' (गद्य)
मुक्त छंद / विशेषता छायावाद का आरंभकर्ता मुक्त छंद के प्रवर्तक प्रकृति-प्रेम, तीन काल वेदना-विरह, रहस्यवाद
दर्शन / प्रभाव शैव — प्रत्यभिज्ञा दर्शन मार्क्सवाद + मानवतावाद अरविंद दर्शन रहस्यवाद (Mysticism)
पत्रिका संपादन इन्दु (1909) मतवाला, समन्वय, सुधा
✍️
जयशंकर प्रसाद
छायावाद के प्रवर्तक · ब्रह्मा · हिंदी ऐतिहासिक नाटकों के सम्राट
छायावाद प्रवर्तक शैव दर्शन नाटककार उपन्यासकार कहानीकार
जन्म
30 जनवरी 1889 ई., काशी (वाराणसी)
मृत्यु
15 नवंबर 1937 ई. (क्षय रोग/TB)
परिवार / घराना
'सुँघनी साहू' घराना (काशी का प्रसिद्ध वैश्य परिवार)
पिता
बाबू देवकी प्रसाद
दर्शन
शैव — प्रत्यभिज्ञा दर्शन (आनंदवाद व समरसतावाद)
पत्रिका संपादन
'इन्दु' मासिक (1909 ई.) — भांजे अम्बिकाप्रसाद गुप्त के साथ
उपनाम एवं उपाधियाँ
🖊️ कलाधर — शुरुआती ब्रजभाषा कविताओं का उपनाम
👦 झारखंडी — बचपन का स्थानीय नाम
🌅 छायावाद का प्रवर्तक — इलाचंद्र जोशी व गणपति चंद्र गुप्त द्वारा
🔱 छायावाद का ब्रह्मा — कृष्णदेव झारी द्वारा प्रदत्त
👑 हिंदी ऐतिहासिक नाटकों का सम्राट
⛰️ आधुनिक कविता के सुमेरु
काव्य रचनाएँ
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ट्रिक — काव्य क्रम (झरना से कामायनी तक) रना → आँसू → हर → कामायनी
📜 ब्रजभाषा की रचनाएँ
चित्राधार ⭐ (आरंभिक ब्रजभाषा संग्रह)
📌 'चित्राधार' में 'अयोध्या का उद्धार' और 'वन मिलन' प्रमुख कविताएँ हैं।
🖋️ खड़ी बोली काव्य संग्रह (कालक्रम)
1913 ई.
कानन कुसुम — खड़ी बोली का प्रथम काव्य संग्रह
1913 ई.
करुणालय — हिंदी का प्रथम गीति-नाट्य (Musical Play)
1914 ई.
प्रेम पथिक — पहले ब्रजभाषा में, बाद में खड़ी बोली अनुवाद
1914 ई.
महाराणा का महत्त्व — ऐतिहासिक गौरव गान
1918 ई.
झरना — "छायावाद की प्रथम प्रयोगशाला" — छायावाद का विधिवत आरंभ
1925 ई.
आँसू — 133 छंदों का विरह काव्य (आनंद/सखी छंद) — 'हिंदी का मेघदूत'
1933 ई.
लहर — मुक्तक प्रगीतों (Lyrical poems) का उत्कृष्ट संग्रह
🏔️ महाकाव्य: कामायनी (1935 ई.)
📖शांतिप्रिय द्विवेदी — "छायावाद का उपनिषद"
📖डॉ. नगेंद्र — "मानव चेतना के विकास का महाकाव्य"
📖सुमित्रानंदन पंत — "हिंदी में ताजमहल के समान"
नाटक
🎭 प्रमुख नाटक (कालक्रम)
1910 ई.
सज्जन — प्रथम नाटक
1912–13 ई.
कल्याणी परिणय · प्रायश्चित
1915 ई.
राज्यश्रीप्रथम ऐतिहासिक नाटक
1921–22 ई.
विशाख · अजातशत्रु
1926 ई.
जनमेजय का नागयज्ञ
1927 ई.
कामना — प्रतीकात्मक ('प्रबोध चंद्रोदय' की भाँति)
1928 ई.
स्कंदगुप्त — हूणों का आक्रमण (देवसेना, विजया)
1930 ई.
एक घूँटहिंदी की प्रथम एकांकी
1931 ई.
चंद्रगुप्त — राष्ट्र निर्माण (चाणक्य, कार्नेलिया, अलका)
1933 ई.
ध्रुवस्वामिनीअंतिम नाटक; नारी सशक्तिकरण, अनमेल विवाह, पुनर्विवाह
कहानियाँ एवं उपन्यास
📚 कहानी संग्रह (5 संग्रह)
प्रथम कहानी
'ग्राम' (1911 ई., 'इन्दु' पत्रिका)
अंतिम कहानी
सालवती
1912 ई.
छायाहिंदी का प्रथम कहानी संग्रह
1926 ई.
प्रतिध्वनि
1928 ई.
आकाशदीप (चम्पा और बुद्धगुप्त)
1931 ई.
आँधी
1936 ई.
इंद्रजाल
📌 प्रसिद्ध कहानियाँ: पुरस्कार (मधुलिका+अरुण) · आकाशदीप · गुण्डा (नन्हकू सिंह) · ममता · छोटा जादूगर · बिसाती
📖 उपन्यास (3 उपन्यास)
1929 ई.
कंकाल — यथार्थवादी; धर्म-पाखंड, अवैध संतान, समाज का खोखलापन
1934 ई.
तितली — ग्रामीण जीवन, आदर्शोन्मुख यथार्थवाद
1936 ई.
इरावती — ऐतिहासिक (शुंग काल) · अपूर्ण (निधन के कारण अधूरा रहा)
प्रमुख पंक्तियाँ (परीक्षा उपयोगी)
"बीती विभावरी जाग री, अम्बर पनघट में डुबो रही, तारा घट उषा नागरी।"
प्रकृति का सजीव मानवीकरण — उषा (भोर) एक नागरी (शहरी स्त्री) की तरह आकाश-रूपी पनघट से तारों को डुबो रही है।
📚 'लहर' संग्रह से
"नारी! तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास-रजत-नग पगतल में।"
नारी को 'श्रद्धा' के रूप में आदर्श रूप में प्रस्तुत किया — कामायनी की नायिका श्रद्धा का परिचय।
📚 'कामायनी' — 'लज्जा' सर्ग
"अरुण यह मधुमय देश हमारा..."
विदेशी पात्र कार्नेलिया का भारत-प्रेम गीत — भारत की महानता का चित्रण।
📚 नाटक 'चंद्रगुप्त' से
"आह वेदना मिली विदाई! मैंने भ्रमवश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई।"
देवसेना का विदाई गीत — जीवन भर की पीड़ा और निराशा का मार्मिक चित्रण।
📚 नाटक 'स्कंदगुप्त' से
🃏 Active Recall — फ्लैशकार्ड
प्रसाद · जीवन परिचय
जयशंकर प्रसाद का जन्म कब-कहाँ हुआ? उपनाम 'कलाधर' और 'झारखंडी' क्यों थे?
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✓ उत्तर
जन्म: 30 जनवरी 1889 ई., काशी | कलाधर — ब्रजभाषा कविता का उपनाम | झारखंडी — बचपन का स्थानीय नाम | मृत्यु: 15 नवंबर 1937 (TB)
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प्रसाद · प्रथम रचनाएँ (परीक्षा में बार-बार!)
हिंदी का प्रथम कहानी संग्रह कौन सा है? प्रथम गीति-नाट्य? प्रथम एकांकी?
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✓ उत्तर
प्रथम कहानी संग्रह → छाया (1912) | प्रथम गीति-नाट्य → करुणालय (1913) | प्रथम एकांकी → एक घूँट (1930) | प्रथम ऐतिहासिक नाटक → राज्यश्री (1915)
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प्रसाद · कामायनी
कामायनी के बारे में शांतिप्रिय द्विवेदी, डॉ. नगेंद्र और पंत ने क्या कहा?
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✓ उत्तर
द्विवेदी → "छायावाद का उपनिषद" | नगेंद्र → "मानव चेतना के विकास का महाकाव्य" | पंत → "हिंदी में ताजमहल के समान"
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प्रसाद · उपन्यास
प्रसाद के तीन उपन्यास कौन से हैं? कौन सा अपूर्ण रहा और क्यों?
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✓ उत्तर — ट्रिक: क-ति-इ
कंकाल (1929) · तितली (1934) · इरावती (1936) | इरावती अपूर्ण रहा क्योंकि प्रसाद जी का 1937 में निधन हो गया।
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प्रसाद · 'आँसू' काव्य
'आँसू' (1925) को 'हिंदी का मेघदूत' क्यों कहते हैं? इसमें कुल कितने छंद हैं?
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✓ उत्तर
133 छंद (आनंद/सखी छंद) का विरह काव्य है। स्मृति/विरह भाव होने से 'हिंदी का मेघदूत' कहा जाता है। 'झरना' (1918) को "छायावाद की प्रथम प्रयोगशाला" कहते हैं।
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प्रसाद · नाटक पात्र
स्कंदगुप्त और चंद्रगुप्त नाटकों के प्रमुख पात्र कौन-कौन हैं?
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✓ उत्तर
स्कंदगुप्त (1928) → देवसेना, विजया — हूणों का आक्रमण | चंद्रगुप्त (1931) → चाणक्य, कार्नेलिया (विदेशी; "अरुण यह मधुमय देश"), अलका — राष्ट्र निर्माण
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सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
महाप्राण · मुक्त छंद के प्रवर्तक · क्रांतिकारी कवि · वसंत का अग्रदूत
छायावाद प्रगतिवाद मुक्त छंद विद्रोही
जन्म
21 फरवरी 1899 ई., महिषादल रियासत (मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल)
मूल निवास
गढ़ाकोला, उन्नाव (उत्तर प्रदेश)
पिता / पत्नी
पंडित रामसहाय त्रिपाठी / मनोहरा देवी
पुत्री
सरोज — असामयिक निधन पर 'सरोज-स्मृति' (हिंदी का सर्वश्रेष्ठ शोक-गीत)
मृत्यु
15 अक्टूबर 1961 ई., इलाहाबाद/प्रयागराज
पत्रिका संपादन
समन्वय · मतवाला (कलकत्ता) · सुधा (लखनऊ)
उपाधियाँ (किसने दी — परीक्षा में बार-बार!)
महाप्राण — गंगाप्रसाद पांडेय द्वारा
✒️मुक्त छंद के प्रवर्तक (रबर/केंचुआ छंद) — मात्रा व वर्ण-बंधन से हिंदी को मुक्ति दिलाई
🌸वसंत का अग्रदूत — सुमित्रानंदन पंत द्वारा (वसंत पंचमी को जन्म)
🔥ओज और औदात्य का कवि — आचार्य रामविलास शर्मा द्वारा
⚔️क्रांतिकारी व विद्रोही कवि — सामाजिक रूढ़ियों के प्रखर विरोध के कारण
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ट्रिक — 'मतवाला' से 'निराला' 'मतवाला' पत्रिका के नाम पर ही इन्होंने उपनाम 'निराला' रखा था।
काव्य संग्रह (कालक्रम)
📜 छायावाद से यथार्थवाद तक — प्रमुख संग्रह
1923 ई.
अनामिका (प्रथम)प्रथम काव्य संग्रह; हिंदी में मुक्त छंद (Free Verse) की शुरुआत
1930 ई.
परिमल — छायावादी और प्रगतिवादी मिश्रण; जूही की कली · भिक्षुक · विधवा · बादल राग · संध्या सुंदरी
1936 ई.
गीतिका — पूरी तरह संगीतात्मक और लयात्मक गीतों का संग्रह
1938 ई.
अनामिका (द्वितीय)सर्वाधिक महत्वपूर्ण संग्रह; 'राम की शक्तिपूजा' · 'सरोज स्मृति' · 'वह तोड़ती पत्थर'
1938 ई.
तुलसीदास — खंडकाव्य; संत तुलसीदास के मानसिक-आध्यात्मिक विकास का चित्रण
1942 ई.
कुकुरमुत्ता — पूँजीवाद (गुलाब) पर तीखा समाजवादी व्यंग्य; शोषित (कुकुरमुत्ता) का समर्थन
1943 ई.
अणिमा — भाषा सरल; दार्शनिक और आध्यात्मिक शांति की ओर झुकाव
1946 ई.
बेला — उर्दू गज़ल और फारसी काव्य शैलियों का प्रभाव | नये पत्ते — सामाजिक यथार्थ ('वह तोड़ती पत्थर')
1950 ई.
अर्चना — पूरी तरह भक्तिपरक, प्रार्थना और स्तुति के गीत
1953 ई.
आराधना — उत्तर-काल के आध्यात्मिक और ईश्वर-वंदना के गीत
1954 ई.
गीत गुंज — जीवन के अंतिम वर्षों में लिखा गया लघु गीत संग्रह
1969 ई.
सांध्य काकलीमरणोपरांत (Posthumous) प्रकाशित अंतिम संग्रह
ऐतिहासिक कविताएँ (Masterpieces)
🌟 महत्वपूर्ण कविताएँ
जूही की कली (1916)
प्रथम कविता + मुक्त छंद का पहला उदाहरण | 1916 में द्विवेदी ने 'अश्लील' बताकर 'सरस्वती' में छापने से मना किया
सरोज स्मृति (1935)
18 वर्षीय पुत्री के निधन पर | हिंदी का प्रथम एवं सर्वश्रेष्ठ शोक-गीत (Elegy)
राम की शक्तिपूजा (1936)
आधार: बांग्ला 'कृत्तिवास रामायण' | राम के भीतर मानवीय द्वंद्व और शक्ति की मौलिक कल्पना
बादल राग
6 खंडों में | 'बादल' = क्रांतिकारी — शोषकों को नष्ट कर किसानों को राहत
अंतिम कविता (1961)
"पत्रात्कंठित जीवन का विष बुझा हुआ है।" — 'सांध्य काकली' में संकलित
कहानी संग्रह एवं उपन्यास
📘 कहानी संग्रह
लिली (1934) ⭐ प्रथम सखी (1935) → बाद में 'चतुरी चमार' सुकुल की बीवी (1941) चतुरी चमार (1945) ⭐ दलित विमर्श देवी (1948)
📗 उपन्यास
1931 ई.
अप्सराप्रथम उपन्यास; सामाजिक रूढ़ियों और अभिजात्य वर्ग सुधार की कथा
1933 ई.
अलका — ग्रामीण जीवन; जमींदारों द्वारा किसानों के शोषण और सुधारवाद
1936 ई.
प्रभावती — ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित | निरुपमा — नारी शिक्षा, आर्थिक स्वावलंबन, वैवाहिक समस्याएँ
1939 ई.
कुल्ली भाटजीवनीपरक (Biographical) उपन्यास; जातिवाद और सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार
1942 ई.
बिल्लेसुर बकरिहा — ग्रामीण निम्न-मध्यमवर्गीय चरित्र का व्यंग्यात्मक रेखाचित्र; रूढ़ियाँ तोड़कर बकरी चराता ब्राह्मण
1946 ई.
चोटी की पकड़ — स्वतंत्रता-पूर्व के सामाजिक और आर्थिक यथार्थ का चित्रण
अपूर्ण
काले कारनामे — व्यवस्था के भ्रष्टाचार पर प्रहार करता अधूरा उपन्यास | चमेली · इन्दुलेखा
✍️ निबंध, आलोचना एवं पत्रिका संपादन
निबंध
प्रबंध पद्म · प्रबंध प्रतिमा · चाबुक — तीखे और व्यंग्यात्मक गद्य के लिए प्रसिद्ध
आलोचना
चयन और संग्रह — मुक्त छंद के समर्थन और काव्य-शिल्प पर विचार
संपादन
'समन्वय' और 'मतवाला' (कलकत्ता) पत्रिकाओं का संपादन किया | 'मतवाला' से ही 'निराला' उपनाम मिला
📖 20 प्रमुख कविताएँ — संपूर्ण पंक्तियाँ (परीक्षा मास्टर संकलन)
01
राम की शक्तिपूजा
मूल भाव: आंतरिक संघर्ष, निराशा पर विजय और सत्य की स्थापना के लिए शक्ति की साधना
1. राम की निराशा और हताशा का भाव: अन्याय जिधर है, उधर शक्ति, कपि-दर्प-दलित-बल-विगलित-विक्रमी-सम-नत, हत-लक्ष्मण-मुक्त-कर-रावण-प्रणत-प्रचुर-पुरस्कृत, वह कृद्ध-युद्ध-ललकार-रहा, वह ऋद्ध-युद्ध-कर-रहा," 2. राम का आत्म-संघर्ष (सबसे प्रसिद्ध पंक्ति): "धिक् जीवन को जो पाता ही आया है विरोध, धिक् साधन जिसके लिए सदा ही किया शोध।" 3. शक्ति की पूजा का अंतिम संकल्प: "होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन! कह महाशक्ति राम के वदन में हुई लीन।"
📚 संग्रह: अनामिका (द्वितीय, 1938)
02
सरोज स्मृति
मूल भाव: हिंदी साहित्य का प्रथम श्रेष्ठ 'शोक-गीत' (Elegy); पुत्री की मृत्यु पर पिता का विलाप
दुःख ही जीवन की कथा रही,क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!" धन्ये! मैं पिता निरर्थक था, कुछ भी तेरे हित कर न सका।
📚 संग्रह: अनामिका (द्वितीय, 1938) | हिंदी का सर्वश्रेष्ठ शोक-गीत — 18 वर्षीय पुत्री के निधन पर (1935)
03
वह तोड़ती पत्थर
मूल भाव: यथार्थवादी चित्रण; सर्वहारा/मजदूर वर्ग का शोषण और वर्ग-विभेद
वह तोड़ती पत्थर; देखा उसे मैंने इलाहाबाद के पथ पर- वह तोड़ती पत्थर। कोई न छायादार पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार; श्याम तन, भर बँधा यौवन! नत नयन, प्रिय-कर्म-रत मन, गुरु हथौड़ा हाथ, करती बार-बार प्रहार:- सामने तरु-मालिका अट्टालिका, प्राकार। चढ़ रही थी धूप; गर्मियों के दिन, दिवा का तमतमाता रूप;
📚 संग्रह: नये पत्ते (1946) | इलाहाबाद की एक पत्थर तोड़ती मजदूर महिला का यथार्थ चित्रण
04
भिक्षुक
मूल भाव: गरीबी, भुखमरी और असहाय वर्ग के प्रति गहरी मानवीय सहानुभूति
वह आता- दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता। पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक, चल रहा लकुटिया टेक, मुट्ठी भर दाने को- भूख मिटाने को। मुँह फटी पुरानी झोली का फैलाता- दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता। साथ दो बच्चे भी हैं सदा हाथ फैलाए, बाएँ से वे मलते हुए पेट को चलते, और दाहिना दया-दृष्टि-पाने की ओर बढ़ाए। चाट रहे जूठी पत्तल वे कभी सड़क पर खड़े हुए।
📚 संग्रह: परिमल (1930)
05
कुकुरमुत्ता
मूल भाव: सर्वहारा वर्ग (कुकुरमुत्ता/मशरूम) द्वारा शोषक/पूंजीपति वर्ग (गुलाब) पर तीखा व्यंग्य
अबे, सुन बे, गुलाब, भूल मत जो पाई खुशबू, रंगो-आब, खून चूसा खाद का तूने अशिष्ट, डाल पर इतराता है कैपिटलिस्ट! कितनों को तूने बनाया है गुलाम, माली कर रखा, सहाया जाड़ा-घाम। बार-बार उस पर तूने हुक्म चलाया, अपना ही रोब हर जगह जमाया। पर याद रख, दिन बदलने वाले हैं, पूँजीपतियों के पैर उखड़ने वाले हैं। कुकुरमुत्ता ही अब हर जगह छाएगा, तेरा यह रंग-रूप धरा रह जाएगा।
📚 संग्रह: कुकुरमुत्ता (1942) | मार्क्सवादी विचारधारा का प्रतीकात्मक व्यंग्य काव्य
06
जूही की कली
मूल भाव: प्रकृति का श्रृंगारिक मानवीकरण; पवन और कली के माध्यम से प्रेम की अभिव्यक्ति
विजन-वन-वल्लरी पर सोती थी सुहाग-भरी-स्नेह-स्वप्न-मग्न- अमल कोमल तन्तु तरुणी-जूही की कली, दृग बन्द किये, शिथिल-पत्रांक में, वासन्ती निशा थी; विरह-विधुर-प्रिया-संग-छोड़ किसी दूर देश में था पवन। जिसे कहते हैं मलय-अनिल। आई याद चाँदनी की अलक-कुल-प्रिया की, याद आई वह सुंदर रूप-राशि, फिर क्या, पवन चला वेग से, उड़ते हुए पत्तों को पार कर, पहुँचा वह उस विजन कुंज में।
📚 रचना: 1916 | संग्रह: परिमल (1930) | ⚠️ महावीर प्रसाद द्विवेदी ने 'सरस्वती' में छापने से 'अश्लील' बताकर मना किया था | निराला की प्रथम कविता और मुक्त छंद का पहला उदाहरण
07
उत्साह
मूल भाव: बादलों का 'आह्वान गीत'; क्रांति, नई ऊर्जा और नवजीवन का प्रतीक
बादल, गरजो! घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ! ललित ललित, काले घुँघराले, बाल कल्पना के-से पाले, विद्युत छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले! वज्र छिपा, नूतन कविता, फिर भर दो— बादल, गरजो! विकल विकल, उन्मन थे उन्मन विश्व के निदाघ के सकल जन, आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन! तप्त धरा, जल से फिर शीतल कर दो—बादल, गरजो!
📚 संग्रह: अनामिका (द्वितीय, 1938) | बादल = क्रांति और नवजीवन का प्रतीक
08
अट नहीं रही है
मूल भाव: फागुन (बसंत ऋतु) के प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा और असीम चित्रण
अट नहीं रही है आभा फागुन की तन सट नहीं रही है। कहीं साँस लेते हो, घर घर भर देते हो, उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो, आँख हटाता हूँ तो हट नहीं रही है। पत्तों से लदी डाल कहीं हरी, कहीं लाल, कहीं पड़ी है उर में मंद-गंध-पुष्प-माल।
📚 संग्रह: नये पत्ते (1946) | फागुन के सौंदर्य का ऐसा वर्णन कि आँखें हटाए नहीं हटतीं
09
बादल राग
मूल भाव: बादलों को क्रांतिदूत मानकर शोषितों के उद्धार के लिए पुकार (6 खंडों में)
>तिरती है समीर-सागर पर, अस्थिर सुख पर दुख की छाया, जग में जल हैप्लव प्लावित माया। यह तेरी रण-तरी, भरी आकांक्षाओं से घन! भेरी-गर्जन से सजजित, मदित-मृत-खेतों में रुधिर-प्लावित-जन-मन के खेत!" "अशनि-पात से सापित उन्नत शत-शत वीर, क्षत-विक्षत हत अचल-शरीर। गगन-स्पर्शी स्पर्धा धीर! हँसते हैं छोटे पौधे लघु भार, शस्य-अपार, हिल-हिल, खिल-खिल, हाथ हिलाते, तुझे बुलाते, विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते।
📚 संग्रह: परिमल (1930) | 6 खंडों में रचित | बादल = क्रांतिकारी — शोषकों को नष्ट कर किसानों को राहत
10
ध्वनि
मूल भाव: युवा पीढ़ी को संदेश; जीवन के प्रति आशावाद और जिजीविषा का संचार
अभी न होगा मेरा अन्त, अभी-अभी ही तो आया है मेरे वन में मृदुल वसन्त- अभी न होगा मेरा अन्त। हरे-हरे ये पात, डालियाँ, कलियाँ कोमल गात। मैं ही अपना स्वप्न-मृदुल-कर, फेरूँगा निद्रित कलियों पर, जगा एक प्रत्यूष मनोहर। पुष्प-पुष्प से तन्द्रालस लालसा खींच लूँगा मैं, अपने नव जीवन का अमृत सहर्ष सींच दूँगा मैं, द्वार दिखा दूँगा फिर उनको, हैं जो मेरे जहाँ अनन्त।
📚 संग्रह: अनामिका (द्वितीय, 1938) | जीवन का उत्साह और प्रकृति-प्रेम का सम्मिश्रण
11
वर दे, वीणावादिनि वर दे!
मूल भाव: माँ सरस्वती की प्रसिद्ध वंदना; अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर नए ज्ञान और स्वतंत्रता की कामना
वर दे, वीणावादिनि वर दे! प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव भारत में भर दे! काट अंध-उर के बंधन-स्तर बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर, कलुष-भेद-तम-हर प्रकाश भर। जगमग जग कर दे! नव गति, नव लय, ताल-छंद नव, नवल कंठ, नव जलद-मन्द्र रव, नव नभ के नव विहग-वृंद को, नव पर, नव स्वर दे! वर दे, वीणावादिनि वर दे!
📚 प्रसिद्ध सरस्वती-वंदना | भारत की स्वतंत्रता और नवजागरण की प्रार्थना
🃏 Active Recall — फ्लैशकार्ड
निराला · उपाधियाँ (किसने दी?)
'महाप्राण', 'वसंत का अग्रदूत' और 'ओज-औदात्य का कवि' — किसने किसे कहा?
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✓ उत्तर
महाप्राण → गंगाप्रसाद पांडेय | वसंत का अग्रदूत → सुमित्रानंदन पंत | ओज और औदात्य → आचार्य रामविलास शर्मा
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निराला · प्रथम रचनाएँ
निराला की प्रथम कविता, प्रथम काव्य संग्रह और प्रथम कहानी संग्रह कौन से हैं?
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✓ उत्तर
प्रथम कविता → जूही की कली (1916, मुक्त छंद का पहला उदाहरण) | प्रथम काव्य संग्रह → अनामिका (1923) | प्रथम कहानी संग्रह → लिली (1934)
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निराला · शोक-गीत
'सरोज स्मृति' क्यों लिखी गई? इसे हिंदी साहित्य में क्या स्थान प्राप्त है?
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✓ उत्तर
18 वर्षीय पुत्री सरोज के असामयिक निधन पर (1935) | हिंदी साहित्य का प्रथम एवं सर्वश्रेष्ठ शोक-गीत (Elegy) | 'अनामिका' द्वितीय संस्करण (1938) में संकलित
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निराला · उपन्यास
निराला का आत्मकथात्मक उपन्यास कौन सा है? 'बिल्लेसुर बकरिहा' की कथावस्तु क्या है?
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✓ उत्तर
आत्मकथात्मक → कुल्ली भाट (1939) | बिल्लेसुर बकरिहा — एक संघर्षशील ब्राह्मण युवक जो सामाजिक रूढ़ियाँ तोड़कर बकरी चराने का काम अपनाता है — व्यंग्यात्मक
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निराला · 'निराला' नाम की उत्पत्ति
सूर्यकांत त्रिपाठी ने 'निराला' उपनाम कैसे रखा? 'जूही की कली' के बारे में क्या विवाद था?
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✓ उत्तर
'मतवाला' पत्रिका (कलकत्ता) के नाम पर 'निराला' उपनाम रखा | जूही की कली (1916) — महावीर प्रसाद द्विवेदी ने 'अश्लील' बताकर 'सरस्वती' पत्रिका में छापने से मना किया था
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निराला · 'राम की शक्तिपूजा'
'राम की शक्तिपूजा' का मूल आधार क्या है? इसकी विशेषता क्या है?
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✓ उत्तर
मूल आधार: बांग्ला भाषा की कृत्तिवास रामायण | विशेषता: राम के भीतर का मानवीय द्वंद्व और शक्ति की मौलिक कल्पना | 'अनामिका' द्वितीय संस्करण (1938) में संकलित
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🌿
सुमित्रानंदन पंत
प्रकृति के सुकुमार कवि · छायावाद के स्तंभ
छायावाद प्रगतीवाद अरविंद दर्शन ज्ञानपीठ विजेता
जन्म
1900 ई., कौसानी (उत्तराखंड)
पिता / माता
गंगादत्त पंत / सरस्वती देवी
बचपन का नाम
गुँसाई दत्त
शिक्षा
काशी + इलाहाबाद; 1921 में गाँधी से प्रभावित होकर छोड़ी
उपाधियाँ
🌳 प्रकृति के सुकुमार कवि
🎨 प्रकृति के चितेरे
पुरस्कार
1960 साहित्य अकादमी — "कला व बूढ़ा चाँद" के लिए
1961 पद्म भूषण
1968 🏆 ज्ञानपीठ पुरस्कार — "चिदंबरा" के लिए
काव्य-विकास की तीन अवस्थाएँ
💡
ट्रिक: तीन चरण = "छा-प्र-अ" छायावाद → प्रगतीवाद → रविंद दर्शन
🌸 छायावाद काल की रचनाएँ
उच्छ्वास ग्रंथि वीणा ⭐ (प्रथम संग्रह) पल्लव ⭐ (नौका विहार · परिवर्तन) गुंजन
📌 गिरजे का घंटा — पंत जी की प्रथम कविता है। यह सन् 1916 में प्रकाशित हुई थी।
📌 वीणा = पंत जी का प्रथम काव्य संग्रह है।
📌 पल्लव में 'नौका विहार' व 'परिवर्तन' प्रमुख कविताएँ हैं।
⚙️ प्रगतीवाद काल की रचनाएँ
युगांत युगवाणी ग्राम्या ⭐ (भारतमाता) स्वर्ण किरण स्वर्ण धूलि
📌 ग्राम्या में 'भारत माता ग्रामवासिनी' प्रमुख कविता है।
🕉️ अरविंद दर्शन काल
उत्तरा अतिमा कला व बूढ़ा चाँद ⭐ (साहित्य अकादमी 1960) चिदंबरा ⭐ (ज्ञानपीठ 1968) युगपथ
📌 नोट: 'लोकायतन' और 'सत्यकाम' महाकाव्य हैं — काव्य संग्रह नहीं। देखें नीचे 'अन्य विधाएँ'।
अन्य विधाएँ
🎭 काव्य नाटक
ज्योत्स्ना रजत शिखर शिल्पी
📜 महाकाव्य
लोकायतन ⭐ (सोवियत लैंड पुरस्कार) सत्यकाम
📖 उपन्यास
हार बुराँस
परीक्षा उपयोगी विशेष तथ्य
🌸 खादी का फूल — पंत की प्रसिद्ध कविता जिसमें गाँधीवादी विचारधारा और स्वदेशी चेतना को काव्यात्मक रूप दिया गया है।
📰 रूपाभ पत्रिका (1938) — पंत द्वारा संपादित प्रगतिशील साहित्यिक पत्रिका; मार्क्सवादी-प्रगतिशील विचारों का प्रसार।
📻 आकाशवाणी — 1957 ई. में All India Radio का नाम 'आकाशवाणी' रखा गया। यह नाम सुमित्रानंदन पंत के सुझाव पर स्वीकार किया गया।
🃏 Active Recall — फ्लैशकार्ड (क्लिक करें पलटने के लिए)
पंत · जीवन परिचय
पंत जी का जन्म कब-कहाँ हुआ? बचपन का नाम क्या था और 1921 में पढ़ाई क्यों छोड़ी?
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर
जन्म: 1900 ई., कौसानी (उत्तराखंड) | बचपन का नाम: गुँसाई दत्त | पिता: गंगादत्त पंत | 1921 में महात्मा गाँधी से प्रभावित होकर असहयोग आंदोलन में पढ़ाई छोड़ी।
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पंत · उपाधि
सुमित्रानंदन पंत को कौन-कौन सी प्रमुख उपाधियाँ दी गई हैं?
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर
प्रकृति के सुकुमार कविप्रकृति के चितेरे — दोनों उपाधियाँ उनके प्रकृति-प्रेम को इंगित करती हैं।
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पंत · पुरस्कार (परीक्षा में बार-बार!)
पंत को तीनों पुरस्कार कब-किस रचना पर मिले? (साहित्य अकादमी, पद्म भूषण, ज्ञानपीठ)
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✓ उत्तर — ट्रिक: 60·61·68
1960 — साहित्य अकादमी → कला व बूढ़ा चाँद
1961 — पद्म भूषण
1968 — ज्ञानपीठ → चिदंबरा
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पंत · प्रथम संग्रह + छायावाद रचनाएँ
पंत का प्रथम काव्य संग्रह कौन सा है? छायावाद काल की 5 रचनाएँ बताएँ।
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर
प्रथम संग्रह: वीणा ⭐ | छायावाद: उच्छ्वास, ग्रंथि, वीणा, पल्लव, गुंजन | 'पल्लव' में प्रमुख कविताएँ: नौका विहार + परिवर्तन
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पंत · काव्य-विकास के तीन काल
पंत के काव्य-विकास के तीन चरण कौन से हैं? प्रत्येक काल की 2-2 रचनाएँ बताएँ।
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर — ट्रिक: छा-प्र-अ
छायावाद → वीणा, पल्लव
प्रगतिवाद → युगांत, ग्राम्या (भारतमाता)
अरविंद दर्शन → चिदंबरा, कला व बूढ़ा चाँद
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पंत · महाकाव्य + अन्य विधाएँ
पंत के दोनों महाकाव्य कौन से हैं? किसे सोवियत लैंड पुरस्कार मिला? उनका एकमात्र उपन्यास?
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर
महाकाव्य: लोकायतन ⭐ (सोवियत लैंड पुरस्कार) + सत्यकाम
काव्य नाटक: ज्योत्स्ना, रजत शिखर, शिल्पी
उपन्यास: हार · बुराँस
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✍️ प्रमुख पंक्तियाँ और अर्थ
"भारत माता ग्रामवासिनी"
भारत की वास्तविक आत्मा उसके गाँवों में बसती है, शहरों में नहीं। प्रगतीवादी सोच का प्रतीक।
📌 ग्राम्या — प्रगतीवाद काल
"वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान"
संसार की पहली कविता का जन्म गहरे दुख या विरह से हुआ होगा। हृदय की वेदना ही गीत बनकर फूटती है।
📌 छायावाद काल
"छोड़ द्रुमों की मृदु छाया, तोड़ प्रकृति से भी माया"
कवि का प्रकृति से इतना गहरा मोह है कि वे पेड़ों की कोमल छाया और प्रकृति का मोह नहीं छोड़ सकते।
📌 प्रकृति-प्रेम — छायावाद
"कहो तुम रूपसि कौन, व्योम से उतर रही चुपचाप"
प्रकृति का मानवीकरण — शाम को आकाश से उतरती रोशनी को एक सुंदर नायिका के रूप में देखा गया।
"खुल गए छंद के बंध"
आधुनिक कविता अब पुराने छंद-नियमों की बंदिशों से मुक्त हो गई है — यही छायावाद की विशेषता है।
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महादेवी वर्मा
आधुनिक मीरा · छायावाद की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री
छायावाद ज्ञानपीठ विजेता आधुनिक मीरा नारी-विमर्श
जन्म
26 मार्च 1907 ई., फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश
मृत्यु
11 सितंबर 1987 ई., इलाहाबाद
माता / पिता
हेमरानी देवी / गोविंद प्रसाद वर्मा
विवाह
1916 (9 वर्ष की आयु में, डॉ. स्वरूप नारायण वर्मा से) — गृहस्थ जीवन कभी स्वीकार नहीं किया
प्रभाव
बौद्ध धर्म + महात्मा गाँधी
शिक्षा / कार्य
इलाहाबाद विवि. (M.A. संस्कृत) → प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्य व कुलपति
संपादन
'चाँद' पत्रिका (हिंदी की प्रसिद्ध महिला पत्रिका)
संस्था
साहित्यकार संसद (प्रयाग) — संकटग्रस्त लेखकों की सहायता हेतु स्थापित
उपाधियाँ — किसने दीं?
🪷
आधुनिक मीरा
🛕
"हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वती"सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा
👑
"छायावाद की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री"हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा
पुरस्कार — क्रम से याद करें
💡
ट्रिक: 56 · 79 · 82 · 88 पद्म भूषण → साहित्य फेलो → ज्ञानपीठ → पद्म विभूषण
1956 पद्म भूषण
1979 साहित्य अकादमी फेलोशिप — प्रथम महिला प्राप्तकर्ता
1982 🏆 ज्ञानपीठ पुरस्कार — 'यामा' के लिए
1988 पद्म विभूषण — मरणोपरांत (Posthumously)
काव्य संग्रह — और 'यामा' का रहस्य
💡
ट्रिक: "नी-र-नी-सां" = यामा नीहार · श्मि · नीरजा · सांध्यगीत — इन चारों का संकलन = यामा 🏆 (ज्ञानपीठ विजेता)
🪷 यामा-चतुष्टय — चारों मूल संग्रह (1930–1936)
नीहार ⭐ (1930 — प्रथम) रश्मि (1932) नीरजा (1934) सांध्यगीत (1936)
  • 📌नीहार (1930) — महादेवी जी का प्रथम काव्य संग्रह
  • 📌रश्मि (1932) — आध्यात्मिक व दार्शनिक चेतना
  • 📌नीरजा (1934) — इसके लिए इन्हें 'सकसेरिया पुरस्कार' मिला था
  • 📌सांध्यगीत (1936) — आत्मा-परमात्मा मिलन के गीत
🏆 यामा (1940) — ज्ञानपीठ विजेता संकलन
यामा 🏆 (नीहार + रश्मि + नीरजा + सांध्यगीत)
  • 📌यामा = उपरोक्त चारों संग्रहों का संयुक्त संकलन (1940)
  • 📌इसी कृति के लिए 1982 में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ
अन्य काव्य रचनाएँ
दीपशिखा (1942) सप्तपर्णा (1960) अग्निरेखा (1990)
  • 📌दीपशिखा (1942) — रहस्यवाद की पराकाष्ठा
  • 📌सप्तपर्णा (1960) — अनूदित (Translated) कृति; ऋग्वेद, रामायण व बौद्ध थेरगाथाओं का हिंदी पद्यानुवाद
  • 📌अग्निरेखा (1990) — मरणोपरांत (Posthumously) प्रकाशित, अंतिम काव्य संग्रह
गद्य रचनाएँ
🖼️ रेखाचित्र (Sketches)
अतीत के चलचित्र (1941) स्मृति की रेखाएँ (1943)
  • 📌अतीत के चलचित्र — समाज के शोषित व गरीब पात्रों (रामा, बिन्दा, सबिया) का वास्तविक चित्रण
  • 📌स्मृति की रेखाएँ — आम जीवन से आए पात्रों के मार्मिक रेखाचित्र (भक्तिन, चीनी युवक आदि)
📚 संस्मरण (Memoirs)
पथ के साथी (1956) मेरा परिवार (1972) मेरे बचपन के दिन
  • 📌पथ के साथी — समकालीन साहित्यकारों (टैगोर, मैथिलीशरण गुप्त, प्रसाद, निराला, पंत, सुभद्रा) के संस्मरण
  • 📌मेरा परिवार⚠️ परीक्षा अलर्ट: 'गिल्लू'🐿️ (गिलहरी) की प्रसिद्ध कहानी इसी में है
    पालतू पशु-पक्षी: नीलकंठ (मोर) · गौरा (गाय) · सोना (हिरणी) · दुर्मुख (खरगोश) · गिल्लू (गिलहरी)
  • 📌मेरे बचपन के दिन — स्कूली शिक्षा व सुभद्रा कुमारी चौहान के साथ प्रारंभिक मित्रता के संस्मरण
📝 निबंध व आलोचना (Essays & Critiques)
शृंखला की कड़ियाँ (1942) क्षणदा (1956) साहित्यकार की आस्था (1962) संकल्पिता (1969)
  • 📌शृंखला की कड़ियाँमहिला समस्याओं व नारी सशक्तीकरण पर; हिंदी का प्रमुख नारीवादी (Feminist) ग्रंथ
  • 📌क्षणदा — ललित निबंधों का संग्रह
  • 📌संकल्पिता — भाषणों व सांस्कृतिक निबंधों का संकलन
🃏 Active Recall — फ्लैशकार्ड
महादेवी · उपाधियाँ — किसने दीं? (परीक्षा में ★★★)
महादेवी वर्मा को तीनों उपाधियाँ किसने दीं? — आधुनिक मीरा, हिंदी मंदिर की सरस्वती, छायावाद की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री।
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर
आधुनिक मीरा — (स्वयंसिद्ध उपाधि)
हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वतीसूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
छायावाद की सर्वश्रेष्ठ कवयित्रीहजारी प्रसाद द्विवेदी
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महादेवी · पुरस्कार क्रम (परीक्षा में ★★★)
महादेवी वर्मा को चारों पुरस्कार कब-कब मिले? (1956 से 1988 तक क्रम में बताएँ)
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर — ट्रिक: 56·79·82·88
1956 — पद्म भूषण
1979 — साहित्य अकादमी फेलोशिप (प्रथम महिला)
1982 — ज्ञानपीठ → 'यामा' पर
1988 — पद्म विभूषण (मरणोपरांत)
वापस ↩
महादेवी · यामा का रहस्य (परीक्षा में ★★★)
'यामा' क्या है? इसमें कौन से चार संग्रह हैं? प्रथम काव्य रचना कौन सी थी?
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर — ट्रिक: नी-र-नी-सां
यामा = चार संग्रहों का संकलन (1940):
नीहार (1930) ⭐ (प्रथम) + रश्मि (1932) + नीरजा (1934) + सांध्यगीत (1936)
अन्य रचनाएँ: दीपशिखा (1942), सप्तपर्णा (1960 — अनूदित), अग्निरेखा (1990 — मरणोपरांत)
नीरजा के लिए सकसेरिया पुरस्कार भी मिला था।
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महादेवी · गद्य रचनाएँ (परीक्षा में ★★)
महादेवी की रेखाचित्र + संस्मरण + निबंध रचनाएँ बताएँ। 'गिल्लू' किसमें है?
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर
रेखाचित्र: अतीत के चलचित्र · स्मृति की रेखाएँ
संस्मरण: पथ के साथी · मेरा परिवार (गिल्लू🐿️ — यहाँ है, रेखाचित्र में नहीं!) · मेरे बचपन के दिन
निबंध: शृंखला की कड़ियाँ (नारी सशक्तीकरण) · क्षणदा · संकल्पिता
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महादेवी · जीवन परिचय
महादेवी वर्मा का जन्म कब-कहाँ? विवाह कब और किस आयु में? उनके पिता-माता?
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर
जन्म: 26 मार्च 1907 ई., फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश
मृत्यु: 11 सितंबर 1987 ई., इलाहाबाद
पिता: गोविंद प्रसाद वर्मा | माता: हेमरानी देवी
विवाह: 1916 ई. (मात्र 9 वर्ष की आयु में) — गृहस्थ जीवन कभी स्वीकार नहीं किया
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महादेवी · शिक्षा + संपादन
महादेवी वर्मा ने किस विश्वविद्यालय से पढ़ाई की? वे कहाँ की प्रधानाचार्य बनीं? किस पत्रिका का संपादन किया?
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर
शिक्षा: इलाहाबाद विश्वविद्यालय (M.A. संस्कृत)
पद: प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्य व कुलपति
संपादन: 'चाँद' पत्रिका
संस्था: साहित्यकार संसद (प्रयाग) — संकटग्रस्त लेखकों हेतु
प्रभाव: बौद्ध धर्म + महात्मा गाँधी
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✍️ प्रमुख पंक्तियाँ और अर्थ
"मैं नीर भरी दुख की बदली"
कवयित्री स्वयं को आंसुओं से भरी दुख की बदली (बादल) मानती हैं — विरह और करुणा से भरा जीवन, दूसरों के लिए बरसकर मिट जाने को तैयार।
📌 सांध्यगीत → यामा में संकलित
"तुमको पीड़ा में ढूंढा, तुमको मिलेगी पीड़ा"
मैंने ईश्वर को पीड़ा और विरह में पाया है। जो भी उसे खोजेगा, उसे भी इस तपस्या से गुजरना होगा।
✦ ✦ ✦
🪔

भक्तिकाल

1375 – 1700 ई. · वर्गीकरण: आचार्य रामचंद्र शुक्ल

🔥 निर्गुण धारा

  • ज्ञानाश्रयी शाखा — कबीर
  • प्रेमाश्रयी शाखा — सूफी कवि

🏹 सगुण धारा

  • रामभक्ति शाखा — तुलसीदास
  • कृष्णभक्ति शाखा — सूरदास, मीरा, रसखान
🪔
कबीर
निर्गुण धारा — ज्ञानाश्रयी शाखा · समाज-सुधारक कवि
निर्गुण सधुक्कड़ी जुलाहा बीजक
जन्म / मृत्यु
1398 ई. (काशी) / 1518 ई. (मगहर)
माता / पिता
नीमा / नीरू (जुलाहा पालनकर्ता)
पत्नी / संतान
लोई / कमाल (पुत्र) · कमाली (पुत्री)
गुरु / शासक
स्वामी रामानंद / सिकंदर लोदी (समकालीन)
भाषा पर विद्वानों के मत — परीक्षा में अक्सर आता है!
💡
ट्रिक: "शुक्ल-दास-द्विवेदी" = "सध-खिच-डिक्ट" रामचंद्र शुक्ल → सधुक्कड़ी | श्याम सुंदर दास → पंचमेल खिचड़ी | हजारी प्रसाद द्विवेदी → वाणी का डिक्टेटर
बीजक — तीन भाग (संकलन: धर्मदास, 1464 ई.)
📜 साखी · सबद · रमैनी — विस्तार से
साखी (अर्थ: साक्षी/Witness)
छंद: दोहा + सोरठा | भाषा: सधुक्कड़ी + पंजाबी मिली खड़ी बोली
सबद (अर्थ: शब्द/गुरु मंत्र)
गेय पद (गाने योग्य) | भाषा: ब्रज + पूर्वी बोली
रमैनी (अर्थ: रामायण)
छंद: चौपाई + दोहा (अंत में दोहा) | भाषा: ब्रज + पूर्वी बोली
📚 अन्य संबंधित ग्रंथ
📖 कबीर पर लिखे गए प्रमुख ग्रंथ
कबीर ग्रंथावली
डॉ. श्याम सुंदर दास — (जिन्होंने भाषा को 'पंचमेल खिचड़ी' कहा)
कबीर
हजारी प्रसाद द्विवेदी — (जिन्होंने 'वाणी का डिक्टेटर' कहा)
कबीर परिचय
अनंतदास — कबीर के जीवन पर सबसे पुराना ग्रंथ; इसमें कबीर व सिकंदर लोदी के संघर्ष का वर्णन है।
🃏 Active Recall — फ्लैशकार्ड
कबीर · जीवन परिचय (परीक्षा में ★★★)
कबीर का जन्म-मृत्यु कब-कहाँ? माता-पिता, पत्नी, गुरु और समकालीन शासक?
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर
जन्म: 1398 ई., काशी | मृत्यु: 1518 ई., मगहर
पालक माता-पिता: नीमा-नीरू (जुलाहे)
पत्नी: लोई | पुत्र: कमाल | पुत्री: कमाली
गुरु: स्वामी रामानंद | समकालीन: सिकंदर लोदी
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कबीर · भाषा — तीनों विद्वानों के मत (परीक्षा में ★★★)
कबीर की भाषा को 'सधुक्कड़ी', 'पंचमेल खिचड़ी' और 'वाणी का डिक्टेटर' — किसने-किसने कहा?
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर — ट्रिक: शुक्ल-दास-द्विवेदी = सध-खिच-डिक्ट
सधुक्कड़ी → आचार्य रामचंद्र शुक्ल
पंचमेल खिचड़ी → डॉ. श्याम सुंदर दास
वाणी का डिक्टेटर → हजारी प्रसाद द्विवेदी
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कबीर · बीजक (परीक्षा में ★★★)
बीजक का संकलन किसने-कब किया? तीनों भागों के नाम, अर्थ और छंद बताएँ।
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✓ उत्तर
संकलन: धर्मदास (1464 ई.)
साखी (साक्षी) → दोहा + सोरठा
सबद (शब्द/गुरु मंत्र) → गेय पद
रमैनी (रामायण) → चौपाई + दोहा
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कबीर · कबीर पर ग्रंथ (परीक्षा में ★★)
कबीर पर लिखे तीन महत्वपूर्ण ग्रंथ और उनके लेखक? कबीर के जीवन पर सबसे पुराना ग्रंथ?
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर
कबीर ग्रंथावली → डॉ. श्याम सुंदर दास
कबीर → हजारी प्रसाद द्विवेदी
कबीर परिचयअनंतदास (सबसे पुराना ग्रंथ — सिकंदर लोदी संघर्ष का वर्णन)
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कबीर · साहित्यिक विशेषता
कबीर की दो सबसे बड़ी साहित्यिक विशेषताएँ क्या हैं? वे किस धारा और किस शाखा के कवि हैं?
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✓ उत्तर
धारा: निर्गुण धारा — ज्ञानाश्रयी शाखा
विशेषता ①: निरक्षर थे — "मसि कागद छुयो नहीं"
विशेषता ②: समन्वयवादी — हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश
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कबीर · दर्शन (परीक्षा में ★★)
कबीर की भक्ति में कौन से मुख्य दार्शनिक विचार मिलते हैं? उनका राम किस प्रकार का है?
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर
अद्वैत दर्शन — "जल में कुंभ, कुंभ में जल" (आत्मा=परमात्मा)
निर्गुण राम — दशरथ पुत्र नहीं, निराकार ब्रह्म
गुरु महिमा — "सतगुरु है रंगरेज"
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✍️ प्रमुख पंक्तियाँ और अर्थ
"मोको कहाँ ढूँढे बंदे मैं तो तेरे पास में..."
ईश्वर कहता है — तू मुझे मंदिर-मस्जिद में क्यों खोजता है? मैं तो तेरे अपने हृदय में मौजूद हूँ।
📌 निर्गुण भक्ति — आत्मा में परमात्मा
"जल में कुंभ, कुंभ में जल है, बाहर भीतर पानी, फूटा कुंभ जल जलहि समाना"
अद्वैत दर्शन — घड़ा (शरीर) और पानी (आत्मा-परमात्मा) एक ही हैं। घड़े के फूटने पर (मृत्यु के बाद) आत्मा परमात्मा में मिल जाती है।
"गंगा में नहाए कहो तो नर तरिए, मछली न तरी जाको पानी में घर है"
बाहरी आडंबर पर व्यंग्य — यदि गंगा नहाने से मोक्ष होता तो मछली को पहले मोक्ष मिलता। मन की शुद्धि जरूरी है।
"माला तो कर में फिरै, जीभ फिरै मुख माहिं, मनुआ तो चहुँ दिसि फिरै, यह तो सुमिरन नाहिं"
दिखावटी भक्ति पर व्यंग्य — हाथ में माला, मुँह से राम-राम, लेकिन मन भटक रहा है — यह सच्ची भक्ति नहीं है।
"मेरा तेरा मनुआ कैसे एक होवे रे? मैं कहता आँखिन देखी, तू कहता कागद की लेखी"
मैं अनुभव से सीखा सत्य बोलता हूँ और तुम किताबी ज्ञान — इसलिए हम दोनों की सोच कभी एक नहीं हो सकती।
"माया महाठगिनी हम जानी, त्रिगुन फाँस लिए कर डोलै, बोलै मधुरी बानी"
माया बहुत बड़ी ठग है — सत्व, रज, तम के तीन जालों में फंसाती है और मीठी बातों से ईश्वर से दूर करती है।
"सुखिया सब संसार है, खावे और सोवे, दुखिया दास कबीर है जागे अरु रोवे"
अज्ञानी लोग खाने-सोने में सुखी हैं, लेकिन ज्ञानी कबीर संसार की नश्वरता को देखकर दुखी हैं और रात-रात भर जागते हैं।
"सतगुरु है रंगरेज, चुनर मोरी रंग डारी..."
सच्चे गुरु ने मेरी आत्मा रूपी चुनरी को ज्ञान और भक्ति के पक्के रंग में रंग दिया है।
"लाली मेरे लाल की, जित देखूँ तित लाल। लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल।"
ईश्वरीय प्रेम हर जगह व्याप्त है। जब मैं उस प्रेम को महसूस करने गई, तो मैं स्वयं भी उसी रंग में रंग गई — आत्मा का परमात्मा में विलय।
"आँखड़िया झाँई पड़ी, पंथ निहारि-निहारि, जीभड़िया छाला पड़्या, राम पुकारि-पुकारि"
ईश्वर का रास्ता देखते-देखते आँखों के आगे अंधेरा छा गया और उनका नाम पुकारते-पुकारते जीभ में छाले पड़ गए — गहरी विरह वेदना का चित्रण।
📌 विरह भक्ति — बीजक
"मैं राम का कुतिया मोतिया मेरा नाम, गले राम की जेवड़ी, जित खैंचे तित जाऊँ"
कबीर स्वयं को परमात्मा का वफादार सेवक मानते हैं — जैसे गले में जंजीर बँधा कुत्ता मालिक के अधीन होता है, वैसे ही वे पूरी तरह ईश्वर के अधीन हैं।
📌 दास्य भाव — कबीर की विनम्रता
"दुलहिन गावहु मंगलाचार, हम घर आए राजा राम भरतार"
आत्मा रूपी दुल्हन कहती है — खुशी के गीत गाओ, क्योंकि मेरे स्वामी (परमात्मा) घर आ गए हैं। आत्मा-परमात्मा के मिलन का आनंदमय चित्र।
📌 मिलन भाव — सबद
"दशरथ सुत तिहुँ लोक बखाना, राम नाम का मरम है आना"
दशरथ पुत्र सगुण राम को तो सब जानते और पूजते हैं, लेकिन मेरे निर्गुण राम का रहस्य उससे बिल्कुल अलग और गहरा है — सगुण-निर्गुण का भेद।
📌 निर्गुण राम — ज्ञानाश्रयी शाखा
"काहे री नलिनी तू कुम्हलानी, तेरे ही नालि तू कुम्हलानी"
हे कमलिनी (आत्मा)! तू क्यों मुरझा रही है? तेरी जड़ें तो उस जल (परमात्मा) में ही हैं — आत्मा को परमात्मा में ही आश्रय खोजना चाहिए।
"हमन है इश्क़ मस्ताना, हमन को होशियारी क्या। रहे आजाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या।"
हम ईश्वर के प्रेम में मस्त फकीर हैं — हमें इस दुनिया की चालाकी और मोह-माया से कोई लेना-देना नहीं। फकीरी का उद्घोष।
📌 वैराग्य — कबीर का फकीरी स्वभाव
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🦚
सूरदास
वात्सल्य रस के सम्राट · सगुण — कृष्ण भक्ति शाखा
वात्सल्य रस ब्रज भाषा सूरसागर अष्टछाप
जन्म
1478 ई., सीही (दिल्ली के निकट)
पिता / गुरु
रामदास / वल्लभाचार्य
समकालीन शासक
अकबर
भाषा
ब्रज भाषा
उपाधियाँ
👑 वात्सल्य रस का सम्राट
पुष्टिमार्ग का जहाज
☀️ हिंदी साहित्य का सूर्य
🏆 अष्टछाप के सर्वश्रेष्ठ कवि
रचनाएँ
सूरसागर ⭐ (प्रमुख) सूरसारावली साहित्य लहरी गोवर्धनलीला भ्रमरगीत ⭐ (सूरसागर का भाग) सूर पचीसी नल-दमयन्ती ब्याहलो

📌 भ्रमरगीत — उद्धव को 'भ्रमर' (भौंरे) से संबोधित करते हुए गोपियों के विरह-गीत। यह 'सूरसागर' का ही एक भाग है।

📌 नल-दमयन्ती — महाभारतकालीन कथा पर आधारित; कृष्ण-भक्ति से भिन्न रचना। ब्याहलो — अप्राप्य ग्रन्थ; इसके अन्तिम पद में सूरदास ने अपना वंशवृक्ष वर्णित किया है।

💡
परीक्षा नोट: हजारी प्रसाद द्विवेदी ने सूरदास को ब्रजभाषा का प्रथम कवि माना है। (आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इन्हें 'वात्सल्य रस का सम्राट' कहा।)
🃏 Active Recall — फ्लैशकार्ड
सूरदास · जीवन परिचय (परीक्षा में ★★★)
सूरदास का जन्म कब-कहाँ? पिता, गुरु, भाषा और समकालीन शासक कौन थे?
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✓ उत्तर
जन्म: 1478 ई., सीही (दिल्ली के निकट)
पिता: रामदास | गुरु: वल्लभाचार्य
भाषा: ब्रज भाषा
समकालीन: अकबर
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सूरदास · उपाधियाँ (परीक्षा में ★★★)
सूरदास की चारों प्रमुख उपाधियाँ बताएँ। वे किस संप्रदाय के कवि हैं?
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वात्सल्य रस का सम्राट
पुष्टिमार्ग का जहाज
हिंदी साहित्य का सूर्य
अष्टछाप के सर्वश्रेष्ठ कवि
संप्रदाय: वल्लभ संप्रदाय (पुष्टिमार्ग)
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सूरदास · रचनाएँ (परीक्षा में ★★★)
सूरदास की प्रमुख रचनाएँ कौन सी हैं? भ्रमरगीत क्या है — और यह किसका भाग है?
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प्रमुख: सूरसागर ⭐, सूरसारावली, साहित्य लहरी, गोवर्धनलीला, सूर पचीसी, नल-दमयन्ती, ब्याहलो
भ्रमरगीत = उद्धव को 'भ्रमर' कहकर गोपियों के विरह-गीत = सूरसागर का ही भाग
📌 हजारी प्रसाद द्विवेदी → ब्रजभाषा का प्रथम कवि
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सूरदास · उद्धव-गोपी (परीक्षा में ★★)
भ्रमरगीत में गोपियाँ उद्धव को क्या तर्क देती हैं? इसमें कौन सी भक्ति की जीत दिखाई गई?
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गोपियाँ: "एक ही मन था, वह कृष्ण के साथ गया — निर्गुण की आराधना किस मन से करें?"
विजय: सगुण प्रेम-भक्ति की निर्गुण ज्ञान पर जीत
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सूरदास · वात्सल्य रस (परीक्षा में ★★)
'वात्सल्य रस का सम्राट' क्यों कहा जाता है? बाल-लीला की 3 प्रसिद्ध पंक्तियाँ?
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बाल कृष्ण का सर्वश्रेष्ठ मनोवैज्ञानिक चित्रण:
① "मैया मोरी, मैं नहि माखन खायो" (झूठ)
② "मैया कबहिं बढ़ेगी चोटी" (जिज्ञासा)
③ "मैया हौं न चरैहो गाय" (शिकायत)
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सूरदास · साहित्यिक स्थान (परीक्षा में ★★)
सूरदास किस काल, किस धारा और किस शाखा के कवि हैं? अष्टछाप क्या है?
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काल: भक्तिकाल (1375-1700)
धारा: सगुण धारा — कृष्णभक्ति शाखा
अष्टछाप = वल्लभाचार्य + विट्ठलनाथ द्वारा मान्यताप्राप्त 8 कृष्णभक्त कवियों का समूह — सूरदास सर्वश्रेष्ठ
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✍️ प्रमुख पंक्तियाँ — उद्धव-गोपी संवाद
"उधो, मन न भए दस बीस। एक हुतो सो गयो स्याम संग, को अवराधे ईस।"
हे उद्धव! हमारे पास दस-बीस मन नहीं हैं — एक मन था, वह कृष्ण के साथ चला गया। अब तुम्हारे निर्गुण ईश्वर की आराधना किस मन से करें?
"आयो घोष बड़ो व्यापारी, लादि खेप गुन ज्ञान योग की, ब्रज में आनि उतारी"
गोपियाँ व्यंग्य करती हैं — एक बड़ा व्यापारी (उद्धव) आया है जो प्रेम के बदले ज्ञान-योग का भारी सामान बेचने आया है।
"निसिदिन बरसत नैन हमारे। सदा रहित पावस ऋतु हम पै, जब ते स्याम सिधारे।"
कृष्ण के जाने के बाद हमारी आँखें दिन-रात रोती हैं — जैसे हमारे जीवन में सदा वर्षा ऋतु ही छाई रहती है।
✍️ बाल-लीला — वात्सल्य वर्णन
"मैया मोरी, मैं नहि माखन खायो"
बाल कृष्ण मासूमियत से झूठ बोलते हैं — माँ, मैंने मक्खन नहीं खाया! यह बाल-मनोविज्ञान का अनुपम चित्रण है।
"मैया कबहिं बढ़ेगी चोटी..."
कृष्ण की जिज्ञासा — माँ कहती थी दूध पीने से चोटी बड़ी होगी, मैं इतने दिन से दूध पी रहा हूँ — चोटी कब बड़ी होगी?
"मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायौ..."
कृष्ण भाई बलराम (दाऊ) की शिकायत करते हैं कि दाऊ कहता है "तू यशोदा का सगा बेटा नहीं, खरीदा हुआ है" — बाल-शिकायत का सजीव चित्र।
"निरगुन कौन देस कौ बासी?
मधुकर कहि समुझाय सौंह दै, बूझति साँच, न हाँसी॥
को है जनक, कौन है जननी, कौन नारि, को दासी?"
गोपियाँ उद्धव (भ्रमर) से कसम देकर पूछती हैं — तुम्हारा 'निर्गुण ईश्वर' आखिर किस देश का रहने वाला है? हम कोई हंसी-मजाक नहीं कर रहीं, सच-सच बताओ। उस ईश्वर का पिता कौन है? उसकी माता कौन है? उसकी पत्नी और दासियाँ कौन हैं? जिसका कोई रंग-रूप और परिवार ही नहीं है, उससे प्रेम कैसे किया जा सकता है? यह निर्गुण पर सगुण का करारा व्यंग्य है।
📌 भ्रमरगीत — उद्धव-गोपी संवाद
"अविगत गति कछु कहत न आवै。
ज्यौं गूँगै मीठे फल कौ रस, अंतरगत हीं भावै॥
परम स्वाद सबहीं जु निरंतर, अमित तोष उपजावै।"
उस अदृश्य और निराकार ईश्वर की स्थिति के बारे में कुछ भी कहते नहीं बनता। उसकी अनुभूति बिल्कुल वैसी ही है, जैसे कोई गूंगा व्यक्ति किसी मीठे फल को खाए, तो उसे उसका असीम आनंद भीतर ही भीतर महसूस होता है, पर वह उस स्वाद को शब्दों में किसी को बता नहीं सकता। इसीलिए निराकार की उपासना अत्यंत कठिन है।
📌 भ्रमरगीत — निर्गुण की अवर्णनीयता पर व्यंग्य
"जसोदा हरि पालने झुलावै..."
माता यशोदा बाल कृष्ण को पालने में झुलाते हुए लोरी गा रही हैं — वात्सल्य रस का अनुपम चित्रण।
📌 सूरसागर — बाल-लीला
"मैया री, मोहिं माखन भावै"
कृष्ण की जिद — माँ, मुझे तो बस मक्खन ही अच्छा लगता है! बाल-हठ और स्वाभाविक बाल-मनोविज्ञान का प्रामाणिक वर्णन।
"मैया हौं, न चरैहो गाय..."
बाल कृष्ण शिकायत करते हैं — माँ, मैं अब गाय चराने नहीं जाऊँगा, सब ग्वाले मुझसे ही सारा काम करवाते हैं।
"सिखवत चलत जसोदा मैया..."
माता यशोदा बाल कृष्ण को उँगली पकड़कर चलना सिखा रही हैं — वात्सल्य रस की परम कोमल अभिव्यक्ति।
✍️ विनय व भक्ति पद
"चरन कमल बंदौ हरि राई, जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै, अंधे को सब कछु दरसाई"
भगवान के चरण कमलों की वंदना — जिनकी कृपा से लंगड़ा पहाड़ लाँघ सकता है और अंधे को सब दिखाई देने लगता है। प्रभु-महिमा का गान।
📌 सूरसागर — विनय पद
"भरोसो दृढ़ इन चरनन कैरो..."
सूरदास कहते हैं — मुझे तो बस अपने भगवान के चरणों का ही अटूट भरोसा है — दास्य भाव की पूर्ण अभिव्यक्ति।
"मो सम कौन कुटिल खल कामी..."
सूरदास अपनी दीनता दिखाते हैं — हे प्रभु, मेरे समान कोई दुष्ट और पापी नहीं है — विनय पद का दास्य भाव।
"स्वान-पूँछ कोटिक जो लागै, सूधि न काहू करी"
जैसे कुत्ते की पूँछ करोड़ों बार प्रयास करने पर भी सीधी नहीं होती — वैसे ही दुष्ट का स्वभाव कभी नहीं बदलता। लोकोक्ति शैली में नीति-वचन।
"माधौ जू गोपीनाथ कहावत..."
हे माधव! आप 'गोपीनाथ' (गोपियों के स्वामी) कहलाते हैं — फिर भी हम गोपियों को छोड़कर मथुरा चले गए। विरह में व्यंग्यात्मक आक्षेप।
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तुलसीदास
सगुण — रामभक्ति शाखा · दास्य भाव · रामचरितमानस रचयिता
रामभक्ति दास्य भाव अवधी + ब्रज कलिकाल का वाल्मीकि
जन्म / मृत्यु
1532 ई. / 1623 ई. (काशी, अस्सी घाट)
गुरु / पत्नी
नरहरिदास / रत्नावली
वैराग्य का कारण
पत्नी की फटकार — "लाज न लागत आपको..."
समकालीन
अकबर + जहाँगीर (दोनों)
भक्ति मार्ग
दास्य भाव (ईश्वर के दास)
उपाधियाँ / उपनाम
📜 कलिकाल का वाल्मीकि
🎶 अनुप्रास का बादशाह
🏆 हिंदी का जातीय कवि — आचार्य रामचंद्र शुक्ल
🦢 मानस का हंस — अमृतलाल नागर के उपन्यास का शीर्षक
👑 कवि शिरोमणि
🌍 लोकनायक
रचनाएँ — भाषा के अनुसार
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ट्रिक: अवधी = "राम-राम-बरवै-जानकी-पार्वती-हनुमान" रामचरितमानस · रामलला नहछू · बरवै रामायण · जानकी मंगल · पार्वती मंगल · हनुमान चालीसा
📅
रामचरितमानस रचना-काल: 1574 ई. (विक्रमी संवत् 1631) — अयोध्या में आरम्भ। उस समय मुगल सम्राट अकबर का शासन था (1556–1605)।
तुलसीदास ने स्वयं लिखा — "संवत सोरह सौ इकतीसा। करउँ कथा हरिपद धरि सीसा।।"
🏔️ अवधी भाषा में रचनाएँ
रामचरितमानस ⭐ रामलला नहछू बरवै रामायण जानकी मंगल पार्वती मंगल हनुमान चालीसा ⭐ हनुमान बाहुक ⭐

📌 हनुमान बाहुक — तुलसीदास ने बाहु (भुजा) के रोग से मुक्ति के लिए रचा; यह मुक्तक काव्य है और अवधी भाषा में लिखा गया है।

🌸 ब्रज भाषा में रचनाएँ
कवितावली ⭐ गीतावली दोहावली श्रीकृष्ण गीतावली विनय पत्रिका ⭐ वैराग्य संदीपनी ⭐ रामाज्ञा प्रश्नावली ⭐

📌 वैराग्य संदीपनी — 48 दोहे-सोरठे + 14 चौपाई; विषय: वैराग्योपदेश, सन्तों के लक्षण और शान्ति-निर्देश। भाषा: अवधी मिश्रित ब्रजभाषा। रचनाकाल संवत् 1614। तुलसी की ख्याति के पाँच प्रमुख आधारों में शामिल।

📌 रामाज्ञा प्रश्नावली — एक ज्योतिष ग्रन्थ है जिसमें शकुन-अपशकुन और रामायण-कथा के आधार पर भविष्य-विचार किया गया है। रचनाकाल संवत् 1621।

🃏 Active Recall — फ्लैशकार्ड
तुलसी · उपनाम (परीक्षा में ★★★)
"तुलसीदास के प्रमुख उपनाम / उपाधियाँ कौन-कौन सी हैं? किसने क्या कहा?"
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✓ उत्तर
हिंदी का जातीय कवि — रामचंद्र शुक्ल
कलिकाल का वाल्मीकि
मानस का हंस — अमृतलाल नागर (उपन्यास)
कवि शिरोमणि
लोकनायक
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तुलसी · रामचरितमानस काल
"रामचरितमानस कब लिखी गई? उस समय भारत पर किसका शासन था?"
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रचना-काल: 1574 ई. (विक्रमी संवत् 1631), अयोध्या में आरम्भ
शासक: मुगल सम्राट अकबर (1556–1605)
तुलसी ने लिखा: "संवत सोरह सौ इकतीसा।"
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तुलसी · वैराग्य
"तुलसीदास को वैराग्य का मार्ग किसने और किस फटकार से दिखाया?"
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✓ उत्तर
पत्नी रत्नावली की फटकार — "लाज न लागत आपको..." — ने उन्हें सांसारिक मोह छोड़कर राम भक्ति की ओर मोड़ दिया।
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तुलसी · भाषा
"रामचरितमानस किस भाषा में लिखी? और विनय पत्रिका किस भाषा में?"
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✓ उत्तर
रामचरितमानस → अवधी भाषा | विनय पत्रिका → ब्रज भाषा | तुलसी ने दोनों भाषाओं में लिखा — यही उनकी विशेषता है।
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तुलसी · समकालीन
"तुलसीदास किन दो मुगल शासकों के समकालीन थे? मृत्यु कहाँ हुई?"
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✓ उत्तर
समकालीन: अकबर + जहाँगीर (दोनों) | मृत्यु: 1623 ई., काशी के अस्सी घाट पर।
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✍️ प्रमुख पंक्तियाँ और अर्थ
"परहित सरिस धर्म नहीं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।"
परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं। दूसरों को दुःख देना सबसे बड़ा पाप है। — तुलसी का नैतिक सूत्र।
📌 रामचरितमानस
"सिया राममय सब जग जानी, करहुँ प्रनाम जोरि जुग पानी"
संपूर्ण जगत में सीता-राम का स्वरूप देखकर दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ। — सर्वेश्वरवाद का भाव।
"राम सों बड़ो है कौन मोसों कौन छोटो। राम सो खरो कौन मोसो खोटो।"
राम से बड़ा कोई नहीं, मुझ (तुलसी) से छोटा कोई नहीं। राम जैसा सच्चा (खरा) कोई नहीं, मेरे जैसा पापी (खोटा) कोई नहीं।
📌 विनय पत्रिका — दास्य भाव
"ईश्वर अंस जीव अविनाशी। चेतन अमल सहज सुख राशी।"
जीव (आत्मा) ईश्वर का अंश है, इसलिए अविनाशी है — चेतन, पवित्र और सुख का भंडार।
📌 रामचरितमानस
"का बरखा जब कृषि सुखानी, समय चूकि पुनि का पछतानी"
जब फसल सूख गई तो बारिश का क्या फायदा? सही अवसर निकल जाने के बाद पछताना बेकार है — समय का महत्व।
"गोरख जगायो जोग, भगति भगायो लोग"
गोरखनाथ ने योग-मार्ग का इतना कठिन प्रचार किया कि लोगों ने सहज भक्ति-मार्ग से मुँह मोड़ लिया — नाथ संप्रदाय पर व्यंग्य।
"केसव कहि न जाए का कहिये, देखत तव रचना विचित्र अति समुझि मनहिं मन रहिये"
हे केशव! आपकी इस विचित्र रचना (संसार) को देखकर कुछ कहते नहीं बनता — बस मन ही मन समझकर हैरान रहना पड़ता है।
📌 रामचरितमानस
"खेती न किसान को, भिखारी को न भीख..."
कलयुग की भयावह गरीबी का वर्णन — किसान के पास खेती नहीं, भिखारी को भीख नहीं — समाज की दुर्दशा पर तुलसी का यथार्थ चित्रण।
📌 कवितावली — कलयुग-वर्णन
"हे खग हे मृग मधुकर श्रेनी, तुम देखी सीता मृगनयनी"
सीता-हरण के बाद भगवान राम वन में पशु-पक्षियों से पूछते हैं कि क्या तुमने हिरण जैसी आँखों वाली मेरी सीता को देखा है? — वियोग-श्रृंगार का हृदयस्पर्शी प्रसंग।
📌 रामचरितमानस — अरण्यकाण्ड
"ढोल गंवार सूद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी"
ढोल, अज्ञानी, शूद्र, पशु और नारी — इन सभी को विशेष देख-रेख और अनुशासन की आवश्यकता होती है। (प्रसंग: समुद्र का कथन, रामचरितमानस — सुंदरकाण्ड)
📌 रामचरितमानस — सुंदरकाण्ड (समुद्र का वचन)
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🪕
मीराबाई
माधुर्य भाव की भक्त · सगुण — कृष्णभक्ति शाखा · प्रेम की दीवानी
माधुर्य भाव राजस्थानी ब्रजभाषा मीरा पदावली कृष्णभक्ति
जन्म / मृत्यु
1498 ई., कुड़की (मेड़ता, राजस्थान) / 1546 ई., द्वारका (गुजरात)
बचपन का नाम ★
पेमल — UKSSSC परीक्षा के लिए अति महत्त्वपूर्ण
पति
कुंवर भोजराज (महाराणा सांगा के ज्येष्ठ पुत्र) — विवाह के ~7 वर्ष बाद निधन
गुरु
संत रैदास (रविदास)
भक्ति का भाव
माधुर्य भाव (कांता भाव / दाम्पत्य भाव) — कृष्ण को पति/प्रियतम मानकर उपासना
भाषा
राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा (+ गुजराती व खड़ी बोली का पुट)
काव्य रूप
मुक्तक, गेय पद (स्फुट पद)
📌
गुरु प्रमाण: "गुरु मिलिया रैदास जी, दीन्ही ज्ञान की गुटकी" — इस पंक्ति से सिद्ध होता है कि मीराबाई संत रैदास को अपना गुरु मानती थीं।
उपाधियाँ / उपनाम
👑 राजस्थान की राधा
🌊 मरु-मंदाकिनी (मरुस्थल की मंदाकिनी)
💫 प्रेम की दीवानी
रचनाएँ
मीरा पदावली ⭐ (सर्वप्रमुख) नरसी जी का मायरा गीतगोविंद की टीका राग गोविंद राग सोरठ के पद मीराबाई की मलार गरबा गीत रुक्मिणी मंगल

📌 मीराबाई ने कोई प्रबंधकाव्य नहीं लिखा — इनके स्फुट (फुटकर) पदों को बाद में संकलित किया गया। मीरा पदावली का सर्वप्रसिद्ध संपादन परशुराम चतुर्वेदी ने किया है।
📌 गीतगोविंद की टीका — जयदेव के प्रसिद्ध ग्रंथ 'गीतगोविंद' पर आधारित।

🃏 Active Recall — फ्लैशकार्ड
मीरा · जीवन परिचय (परीक्षा में ★★★)
मीराबाई का बचपन का नाम, जन्म-स्थान, गुरु, पति और मृत्यु-स्थान बताएँ।
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✓ उत्तर
बचपन का नाम: पेमल ★
जन्म: 1498 ई., कुड़की (मेड़ता, राजस्थान)
गुरु: संत रैदास
पति: कुंवर भोजराज (महाराणा सांगा के पुत्र)
मृत्यु: 1546 ई., द्वारका
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मीरा · उपाधि + भाव + भाषा (परीक्षा में ★★★)
मीराबाई की तीन उपाधियाँ, भक्ति का भाव और भाषा क्या है?
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उपाधि: राजस्थान की राधा · मरु-मंदाकिनी · प्रेम की दीवानी
भाव: माधुर्य भाव (कांता/दाम्पत्य) — कृष्ण को पति मानकर
भाषा: राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा
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मीरा · रचनाएँ (परीक्षा में ★★★)
मीराबाई की प्रमुख रचनाएँ? मीरा पदावली का संपादन किसने किया?
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✓ उत्तर
प्रमुख: मीरा पदावली ⭐, नरसी जी का मायरा, गीतगोविंद की टीका, राग गोविंद, रुक्मिणी मंगल, गरबा गीत
संपादन: परशुराम चतुर्वेदी
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मीरा · साहित्यिक विशेषता (परीक्षा में ★★)
मीरा का काव्य किस विद्रोह का प्रतीक है? काव्य-रूप क्या है?
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✓ उत्तर
विद्रोह: सामंती समाज, पर्दा-प्रथा, रूढ़िवादी राजपूत परंपराओं के विरुद्ध — राजमहल छोड़कर कीर्तन किया
काव्य-रूप: मुक्तक, गेय पद (स्फुट पद)
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✍️ प्रमुख पंक्तियाँ और भावार्थ
"मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई। जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।"
गोवर्धन पर्वत धारण करने वाले और मोर मुकुट पहनने वाले श्रीकृष्ण ही मेरे एकमात्र पति और रक्षक हैं — अन्य कोई नहीं। मीरा की अटल कृष्ण-निष्ठा का सर्वश्रेष्ठ प्रतीक।
"अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोई। अब तो बेल फैल गई, आनंद फल होई।"
मैंने विरह के आँसुओं से सींचकर कृष्ण-प्रेम की बेल बोई है — अब उसमें ईश्वरीय आनंद रूपी फल लगने लगे हैं। विरह से मिलन की यात्रा का काव्यात्मक चित्र।
"पायो जी मैंने राम रतन धन पायो। वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो।"
गुरु रैदास की कृपा से मैंने ईश्वर के नाम का अनमोल रत्न-धन प्राप्त कर लिया है। गुरु-महिमा और नाम-भक्ति का सुंदर संगम।
"हेरी म्हा तो दरद दिवाणी, म्हारो दरद न जाणै कोय। घायल री गत घायल जाणै, हिबड़ो अगण संजोय।"
मैं कृष्ण के प्रेम-दर्द में दीवानी हूँ — मेरी पीड़ा कोई नहीं जानता। जैसे घायल की पीड़ा घायल ही समझता है, वैसे ही मेरे हृदय की आग केवल मैं जानती हूँ। राजस्थानी भाषा में विरह की सशक्त अभिव्यक्ति।
"बसो मेरे नैनन में नंदलाल। मोहिनी मूरति, साँवरि सूरति, नैना बने विसाल।"
हे नंदलाल! आपकी मोहिनी मूरत, साँवली सूरत और विशाल नेत्र — सदा मेरी आँखों में बसे रहें। दृश्य-काव्य और माधुर्य भाव का सुंदर उदाहरण।
"पग घुँघरू बाँध मीरा नाची रे। मैं तो मेरे नारायण की आपहि हो गई दासी रे।"
लोक-लाज छोड़कर पैरों में घुँघरू बाँधकर कृष्ण-प्रेम में नाच रही हूँ और स्वयं नारायण की दासी बन गई हूँ। सामाजिक विद्रोह और समर्पण का सशक्त चित्र।
"विष का प्याला राणा भेज्या, पीवत मीरा हाँसी रे।"
मेवाड़ के राणा द्वारा भेजा गया विष का प्याला भी मीरा ने प्रभु का चरणामृत समझकर हँसते-हँसते पी लिया। ईश्वर-भक्ति में अभय और समर्पण की पराकाष्ठा।
"माई री मैं तो लियो गोविंदो मोल।"
हे माँ! मैंने अपने गोविंद (कृष्ण) को अपना सर्वस्व देकर मोल ले लिया है — अर्थात पूरी तरह अपना बना लिया है। पूर्ण आत्मसमर्पण की अभिव्यक्ति।
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रसखान
रस की खान · सगुण — कृष्णभक्ति शाखा · सवैया छंद के सम्राट
ब्रज भाषा सवैया छंद सुजान रसखान मुस्लिम कृष्णभक्त
मूल नाम ★
सैयद इब्राहीम
जन्म / मृत्यु
1548 ई., पिहानी (हरदोई, उ.प्र.) / 1628 ई., वृंदावन (मथुरा)
समाधि
महाबन (मथुरा)
गुरु
गोस्वामी विट्ठलनाथ (वल्लभाचार्य के पुत्र) — वल्लभ संप्रदाय में दीक्षा
भाषा
ब्रजभाषा
प्रिय छंद
सवैया
उपाधियाँ / उपनाम व महत्त्वपूर्ण कथन
💎 रस की खान — भक्ति और शृंगार रस से परिपूर्ण काव्य के कारण यही नाम प्रसिद्ध हुआ
📜
भारतेंदु हरिश्चंद्र का प्रसिद्ध कथन (PCS के लिए अति महत्त्वपूर्ण ★★★):
"इन मुसलमान हरिजनन पर, कोटिन हिंदू वारिए।"
अर्थात — ऐसे मुस्लिम हरि-भक्तों पर करोड़ों हिंदुओं को भी न्योछावर किया जा सकता है।
प्रमुख रचनाएँ
सुजान रसखान ⭐ (सर्वप्रमुख — 139 सवैये व कवित्त) प्रेम वाटिका ⭐ (1614 ई. — 53 दोहे) दानलीला (11 दोहे) अष्टयाम
🃏 Active Recall — फ्लैशकार्ड
रसखान · जीवन परिचय (परीक्षा में ★★★)
रसखान का मूल नाम, जन्म-स्थान, गुरु और समाधि-स्थल बताएँ।
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✓ उत्तर
मूल नाम: सैयद इब्राहीम ★
जन्म: 1548 ई., पिहानी (हरदोई, उ.प्र.)
गुरु: गोस्वामी विट्ठलनाथ (वल्लभाचार्य के पुत्र)
समाधि: महाबन (मथुरा)
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रसखान · उपाधि + भाषा + छंद (परीक्षा में ★★★)
रसखान की उपाधियाँ, भाषा और प्रिय छंद कौन-सा था? भारतेंदु ने क्या कहा?
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर
उपाधि: रस की खान · पीयूष-वर्षी कवि
भाषा: शुद्ध ब्रजभाषा | छंद: सवैया
भारतेंदु: "इन मुसलमान हरिजनन पर, कोटिन हिंदू वारिए।"
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रसखान · रचनाएँ (परीक्षा में ★★★)
रसखान की चारों प्रमुख रचनाएँ बताएँ — उनमें छंद और दोहों की संख्या क्या है?
क्लिक करें ↩
✓ उत्तर
सुजान रसखान — 139 सवैये व कवित्त ⭐
प्रेम वाटिका (1614) — 53 दोहे ⭐
दानलीला — 11 दोहे
अष्टयाम — कृष्ण की आठों पहर की दिनचर्या
वापस ↩
✍️ प्रमुख पंक्तियाँ और भावार्थ
"मानुष हौं तो वही रसखानि बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन। जो पसु हौं तो कहा बसु मेरो चरौं नित नंद की धेनु मँझारन।"
यदि मनुष्य बनाओ तो गोकुल के ग्वालों के बीच बसाना। यदि पशु बनाओ तो नंद की गायों के बीच चरने वाली गाय बनाना। — ब्रज-प्रेम की तीव्र लालसा।
📌 सुजान रसखान
"पाहन हौं तो वही गिरि को जो कियो हरिछत्र पुरंदर धारन। जो खग हौं तो बसेरो करौं मिलि कालिंदी-कूल-कदंब की डारन।"
यदि पत्थर बनाओ तो उसी गोवर्धन पर्वत का पत्थर जिसे कृष्ण ने इंद्र (पुरंदर) का मान तोड़ने को उठाया। यदि पक्षी बनाओ तो यमुना तट के कदंब की डाल पर बसेरा हो।
📌 सुजान रसखान
"या लकुटी अरु कामरिया पर राज तिहूँ पुर को तजि डारौं। आठहुँ सिद्धि नवो निधि के सुख नंद की गाइ चराइ बिसारौं।"
कृष्ण की उस लाठी (लकुटी) और काली कमली के बदले तीनों लोकों का राज छोड़ने को तैयार हूँ। नंद की गायें चराने का सुख आठों सिद्धियों और नौ निधियों से भी बढ़कर है।
📌 सुजान रसखान
"धूरि भरे अति सोहत स्याम जू, तैसी बनी सिर सुंदर चोटी। खेलत खात फिरैं अँगना, पग पैंजनी बाजति, पीरी कछोटी।"
धूल से सने बाल-कृष्ण अत्यंत सुशोभित लग रहे हैं — सुंदर चोटी, पीली धोती (कछोटी) और पैरों में पायल (पैंजनी) बजाते हुए आंगन में खेलते-खाते घूम रहे हैं। वात्सल्य रस का मनमोहक चित्र।
📌 सुजान रसखान
"सेस गनेस महेस दिनेस सुरेसहु जाहि निरंतर गावैं। ताहि अहीर की छोहरियाँ, छछिया भरि छाछ पै नाच नचावैं।"
जिसे शेषनाग, गणेश, शिव, सूर्य और इंद्र भी निरंतर गाते हैं, उसी कृष्ण को गोकुल की अहीर लड़कियाँ एक छोटी कटोरी छाछ के लालच में अपने इशारों पर नचा रही हैं। — सगुण भक्ति की श्रेष्ठता का सशक्त उदाहरण।
📌 सुजान रसखान
🏔️

उत्तराखंड के रचनाकार

UKPSC · UKSSSC · LT Grade · विशेष अनुभाग
⛰️
उत्तराखंड परीक्षा — विशेष महत्व शैलेश मटियानी उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) के प्रमुख आंचलिक कथाकार हैं। UKPSC/UKSSSC परीक्षाओं में इनसे प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
✍️
शैलेश मटियानी
वास्तविक नाम: रमेश चंद्र सिंह मटियानी · आंचलिक कथाकार
आंचलिक कथाकार कथा शिल्पी भारत का गोर्की कुमाऊँनी साहित्य उत्तराखंड
📅 14 अक्टूबर 1931 – 24 अप्रैल 2001
जन्म स्थान बाड़ेछीना, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)
वास्तविक नाम रमेश चंद्र सिंह मटियानी
जन्म तिथि 14 अक्टूबर 1931
मृत्यु तिथि 24 अप्रैल 2001
प्रमुख उपाधियाँ आंचलिक कथाकार · कथा शिल्पी · भारत का गोर्की
संपादित पत्रिकाएँ विकल्प · जनपक्ष
प्रथम उपन्यास बोरीवली से बोरीबंदर (1959)
प्रथम कहानी संग्रह मेरी 33 कहानियाँ
🏆 पुरस्कार एवं सम्मान
प्रेमचंद पुरस्कार — 'महाभोज' (कहानी) के लिए · उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा
1983 फणीश्वर नाथ रेणु पुरस्कार — 'मुठभेड़' (उपन्यास) के लिए · बिहार सरकार द्वारा
1999 राममनोहर लोहिया साहित्य सम्मान
2000 महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार
2009 शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार — उत्तराखंड सरकार द्वारा उत्कृष्ट शिक्षकों को (उनकी स्मृति में)
⚠️
परीक्षा में भ्रम — ध्यान दें! 'महाभोज' — शैलेश मटियानी की यह एक कहानी है। 'महाभोज' नाम का प्रसिद्ध उपन्यास और नाटक मन्नू भंडारी का है। दोनों को मिलाएं नहीं!
⚠️
'प्रतिपक्ष' पत्रिका — सावधान! कुछ नोट्स में 'प्रतिपक्ष' के साथ मंगलेश डबराल का नाम दिया होता है। मंगलेश डबराल जी ने इस पत्रिका में संपादन सहयोग किया था, लेकिन यह पत्रिका मुख्य रूप से जॉर्ज फर्नांडिस द्वारा निकाली जाती थी।
📖 उपन्यास (Novels)
📌 ग्रुप 1
बावन नदियों का संगम दो बूँद जल भागे हुए लोग कबूतरखाना चंद औरतों का शहर
📌 ग्रुप 2
बर्फ गिर चुकने के बाद अर्द्धकुंभ की यात्रा कोई अजनबी नहीं रामकली हालदार किस्सा नर्मदा बेन गंगूबाई
📌 ग्रुप 3
उगे सूरज की किरण छोटे-छोटे पक्षी माया सरोवर मुख सरोवर के हंस चौथी मुट्ठी एक मूठ सरसों
📌 ग्रुप 4
बोरीवली से बोरीबंदर (1959) — प्रथम मुठभेड़ (रेणु पुरस्कार) बेला हुई अबेर गोपुली गफूरन
📌 ग्रुप 5
जलतरंग सर्पगंधा पुनर्जन्म के बाद आकाश कितना अनंत है चिट्ठीरसैन उत्तरकांड / डेरावाले नागवल्लरी
📚 कहानी संग्रह (Story Collections)
📌 ग्रुप 1 — 'अन्य कहानियाँ' श्रृंखला व प्रथम संग्रह
मेरी 33 कहानियाँ — प्रथम संग्रह मेरी प्रिय कहानियाँ अतीत व अन्य कहानियाँ भविष्य व अन्य कहानियाँ माता व अन्य कहानियाँ अहिंसा व अन्य कहानियाँ पाप मुक्ति और अन्य कहानियाँ
📌 ग्रुप 2 — सफर और परोपकार
सफर पर जाने से पहले दूसरों के लिए महाभोज — कहानी (प्रेमचंद पुरस्कार)
👥 ग्रुप 3 — लोग और चाय-नाश्ता
पोस्टमैन रहमतुल्ला अर्धांगिनी एक कॉप चा: दो खारी बिस्किट
🦅 ग्रुप 4 — भाव, जानवर, प्रकृति और तमाशा
हारा हुआ चील हत्यारे भेड़ और गड़रिए प्यास और पत्थर बर्फ की चट्टानें भविष्य की मिट्टी नाच जमूरे नाच दो दुखों का एक सुख
✏️ निबंध संग्रह (Essay Collections)
📌 ग्रुप 1 — लेखक का नज़रिया (व्यक्तिगत और दार्शनिक)
लेखक की हैसियत से कभी कभार कागज की नाव किसके राम कैसे राम
💡
ट्रिक: "एक लेखक की हैसियत से मैं कभी कभार सोचता हूँ कि यह ज़िंदगी कागज की नाव जैसी है, जिसमें लोग बस इसी बहस में डूबे हैं कि किसके राम कैसे राम हैं।"
📌 ग्रुप 2 — समाज और देश (राष्ट्रीय मुद्दे)
राष्ट्रीयता की चुनोतियाँ जनता और साहित्य मुख्य धारा का सवाल किसे पता है राष्ट्रीय शर्म का मतलब
💡
ट्रिक: "आज जब देश के सामने राष्ट्रीयता की चुनौतियाँ हैं, तब जनता और साहित्य दोनों को जागना होगा। आज मुख्य धारा का सवाल यही है कि इस दौर में किसे पता है राष्ट्रीय शर्म का मतलब?"
🏔️ लोककथा संग्रह (Folklore Collections)
कुमाऊँ की लोक कथाएँ चम्पावत की लोक कथाएँ तराई प्रदेश की लोक कथाएँ
🃏 फ्लैशकार्ड — Active Recall
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शैलेश मटियानी का वास्तविक नाम क्या था?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
रमेश चंद्र सिंह मटियानी
साहित्यिक नाम: शैलेश मटियानी
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शैलेश मटियानी को 'भारत का गोर्की' क्यों कहा जाता है?
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उत्तर · ANSWER
मैक्सिम गोर्की की तरह इन्होंने भी निम्नवर्गीय, उपेक्षित और श्रमिक समाज को अपनी कहानियों और उपन्यासों का केंद्र बनाया। कुमाऊँ के आंचलिक जीवन की यथार्थ अभिव्यक्ति इनकी विशेषता है।
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मटियानी जी का प्रथम उपन्यास कौन सा है और कब प्रकाशित हुआ?
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उत्तर · ANSWER
बोरीवली से बोरीबंदर1959 में प्रकाशित
मुंबई के मजदूर जीवन पर आधारित
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किस उपन्यास के लिए मटियानी को फणीश्वर नाथ रेणु पुरस्कार मिला और किस वर्ष?
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उत्तर · ANSWER
मुठभेड़ उपन्यास के लिए — 1983 में
बिहार सरकार द्वारा प्रदत्त
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'महाभोज' — मटियानी की रचना है या मन्नू भंडारी की? दोनों की विधा बताएँ।
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उत्तर · ANSWER
मटियानी → 'महाभोज' = कहानी (प्रेमचंद पुरस्कार प्राप्त)
मन्नू भंडारी → 'महाभोज' = उपन्यास व नाटक
⚠️ परीक्षा में अक्सर भ्रम होता है!
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शैलेश मटियानी के जन्म और मृत्यु की तिथि तथा जन्म स्थान बताएँ।
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उत्तर · ANSWER
जन्म: 14 अक्टूबर 1931
जन्म स्थान: बाड़ेछीना, अल्मोड़ा
मृत्यु: 24 अप्रैल 2001
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मटियानी जी ने कौन सी दो पत्रिकाओं का संपादन किया?
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उत्तर · ANSWER
विकल्प और जनपक्ष
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2009 में उत्तराखंड सरकार ने मटियानी के नाम पर कौन सा पुरस्कार शुरू किया?
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उत्तर · ANSWER
शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार
उत्कृष्ट सरकारी शिक्षकों को दिया जाता है
📖
शेखर जोशी
नई कहानी आंदोलन · आंचलिक कथाकार · कुमाऊँ का जीवन
नई कहानी आंदोलन कुमाऊँनी जीवन आंचलिक कथाकार उत्तराखंड
📅 1932 (ओलियागाँव, अल्मोड़ा) – 2022
जन्म 1932 ई., ओलियागाँव, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)
मृत्यु 2022 ई.
साहित्यिक आंदोलन नई कहानी आंदोलन (1950–60 दशक)
विधा कहानी, बाल साहित्य, शब्द चित्र / संस्मरण
विशेषता कुमाऊँ की लोक-संवेदना · जातिगत भेदभाव · श्रमिक जीवन
⛰️
UKPSC/UKSSSC परीक्षा — महत्व शेखर जोशी उत्तराखंड (अल्मोड़ा) के प्रमुख 'नई कहानी' आंदोलन के कथाकार हैं। गलता लोहा (जातिगत भेदभाव), कोसी का घटवार, दाज्यू — ये तीन कहानियाँ परीक्षा में सर्वाधिक पूछी जाती हैं।
⭐ अति महत्वपूर्ण कहानियाँ — पात्र व तथ्य
1
गलता लोहा
पात्र: मोहन, master त्रिलोक सिंह, धनराम
विषय: जातिगत भेदभाव पर आधारित
2
कोसी का घटवार
पात्र: गुसाईं और लछमा
विरह व प्रेम का मार्मिक चित्रण · कोसी नदी की पृष्ठभूमि
3
दाज्यू
पात्र: मदन व जगदीश बाबू
चिल्ड्रंस फिल्म सोसायटी द्वारा बाल फिल्म का निर्माण
📚 कहानी संग्रह
📌 ग्रुप 1
मेरा पहाड़ डंगरी वाले साथ के लोग
📌 ग्रुप 2
बच्चे का सपना आदमी का डर बदबू
📌 ग्रुप 3 — प्रमुख कहानियाँ
कोसी का घटवार ⭐ हलवाहा दाज्यू ⭐ नौरंगी बीमार है
✏️ अन्य रचनाएँ
🌱 बाल साहित्य
एक पेड़ की याद
🖼️ शब्द चित्र / संस्मरण
स्मृति के रंग
🏆 पुरस्कार एवं सम्मान
1987 महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार
1995 साहित्य भूषण सम्मान
1997 पहल सम्मान
2003–04 मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार
🃏 फ्लैशकार्ड — Active Recall
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शेखर जोशी का जन्म कब और कहाँ हुआ? उनका संबंध किस साहित्यिक आंदोलन से है?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
1932 · ओलियागाँव, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)
आंदोलन: नई कहानी आंदोलन
मृत्यु: 2022
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'गलता लोहा' कहानी के पात्र और मुख्य विषय क्या है?
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उत्तर · ANSWER
पात्र: मोहन, master त्रिलोक सिंह, धनराम
विषय: जातिगत भेदभाव
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'कोसी का घटवार' कहानी के मुख्य पात्र कौन हैं?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
गुसाईं और लछमा
कोसी नदी की पृष्ठभूमि में विरह-प्रेम का चित्रण
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'दाज्यू' कहानी के पात्र कौन हैं और इससे जुड़ा विशेष तथ्य क्या है?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
पात्र: मदन और जगदीश बाबू
विशेष: चिल्ड्रंस फिल्म सोसायटी द्वारा बाल फिल्म का निर्माण
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शेखर जोशी के पुरस्कार क्रमानुसार बताएँ।
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
1987 — महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार
1995 — साहित्य भूषण सम्मान
1997 — पहल सम्मान
2003–04 — मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार
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शेखर जोशी की बाल साहित्य और संस्मरण विधा की प्रमुख रचनाएँ कौन सी हैं?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
बाल साहित्य: एक पेड़ की याद
शब्द चित्र / संस्मरण: स्मृति के रंग
✒️

अन्य रचनाकार

समकालीन एवं अन्य महत्वपूर्ण रचनाकार
👑
मुंशी प्रेमचंद
उपन्यास सम्राट · कहानी सम्राट · भारत के मैक्सिम गोरकी · कलम का सिपाही
उपन्यासकार कहानीकार आदर्शोन्मुख यथार्थवाद हिंदी-उर्दू UKSSSC / UKPSC स्पेशल
📅 1880 (लम्ही, वाराणसी) – 1936 (वाराणसी)
मूल नाम धनपत राय
हिंदी नाम किसने दिया 'ज़माना' पत्रिका के संपादक दया नारायण निगम ने
जन्म 1880 ई. · लम्ही गाँव, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
मृत्यु 1936 ई. · वाराणसी
विधा उपन्यास, कहानी, नाटक, अनुवाद
अधूरा उपन्यास मंगलसूत्र — बेटे अमृत राय ने पूरा किया
👑 प्रमुख उपाधियाँ / उपनाम
🌍भारत का मैक्सिम गोरकी — रूसी साहित्यकार से तुलना
📚उपन्यास सम्राट
✍️कहानी सम्राट
⚔️कलम का सिपाही
🔨कलम का मजदूर
📖 प्रसिद्ध जीवनियाँ
✍️ कलम का सिपाहीअमृत राय (प्रेमचंद के बेटे) द्वारा लिखी
✍️ कलम का मज़दूरमदन गोपाल द्वारा लिखी
📰 प्रमुख पत्रिकाएँ (संपादन)
माधुरी हंस मर्यादा जमाना (उर्दू पत्रिका)
📚 प्रमुख उपन्यास (11 उपन्यास)
📌 उपन्यास — ट्रिक क्रम में
कायाकल्प निर्मला प्रेमाश्रम गोदान गबन मंगलसूत्र (अधूरा ⭐) प्रतिज्ञा सेवा सदन अहंकार कर्मभूमि रंगभूमि
💡 याद करने की ट्रिक

एक दिन प्रेमचंद कायाकल्प उपन्यास पढ़ रहे थे तभी बेटी निर्मला आई और बोली, "पिताजी आपने प्रेमाश्रम से जो गोदान में दिया था वह ससुराल वालों ने गबन कर लिया। अब सिर्फ मंगलसूत्र बचा है। मैंने प्रतिज्ञा ली कि उस सदन (सेवा सदन) में नहीं जाऊंगी।" तब प्रेमचंद बोले — "बेटी यह अहंकार ठीक नहीं, ससुराल तेरी कर्मभूमि है और यह तेरी रंगभूमि।"

मंगलसूत्र — अधूरा उपन्यास, बेटे अमृत राय ने पूरा किया।

✍️ प्रमुख कहानियाँ (16 कहानियाँ)
📌 कहानियाँ — ट्रिक क्रम में
पूस की रात पंच परमेश्वर दो बैलों की कथा बड़े भाई साहब गिल्ली डंडा नमक का दरोगा बड़े घर की बेटी बूढ़ी काकी दूध का दाम सौत (प्रथम हिंदी कहानी ⭐) शराब की दुकान ईदगाह बैंक का दिवाला सूरदास की झोपड़ी कफन (अंतिम कहानी ⭐) गुप्त धन

मानसरोवर — प्रेमचंद की कहानियों का 8 भागों में प्रकाशित संकलन।

💡 याद करने की ट्रिक

प्रेमचंद पूस की रात में पंच परमेश्वर को दो बैलों की कहानी सुना रहे थे। बड़े भाई साहब आए — जिनके साथ बचपन में गिल्ली डंडा खेलते थे, अब वे नमक का दरोगा बने और बड़े घर की बेटी से शादी हुई। भाई बोले — "बूढ़ी काकी का दूध का दाम चुकाने का वक्त है, उनकी सौत ने शराब की दुकान के सामने छोड़ दिया।" दोनों काकी को घर लाए। अगले दिन ईदगाह पर बैंक का दिवाला लेकर सूरदास की झोपड़ी गिफ्ट की। काकी बोलीं — "मरूं तो कफन भी तू लाना।" फिर गुप्त धन के बारे में बताया।

⚠️
परीक्षा में अवश्य याद रखें
  • हिंदी की पहली कहानीसौत (प्रेमचंद)
  • प्रेमचंद की अंतिम कहानीकफन
  • मंगलसूत्र — अधूरा उपन्यास, बेटे अमृत राय ने पूरा किया
  • मानसरोवर — कहानी संकलन, 8 भाग
🃏 फ्लैशकार्ड — Active Recall
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प्रेमचंद का मूल नाम क्या था और उन्हें 'प्रेमचंद' नाम किसने दिया?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
धनपत राय — 'प्रेमचंद' नाम दया नारायण निगम ('ज़माना' पत्रिका के संपादक) ने दिया
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प्रेमचंद के पाँचों प्रमुख उपनाम बताइए।
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
1. भारत का मैक्सिम गोरकी
2. उपन्यास सम्राट
3. कहानी सम्राट
4. कलम का सिपाही
5. कलम का मजदूर
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प्रेमचंद की अंतिम कहानी कौन सी है? हिंदी की प्रथम कहानी कौन सी मानी जाती है?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
अंतिम कहानी: कफन
हिंदी की प्रथम कहानी: सौत (प्रेमचंद)
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मंगलसूत्र उपन्यास की क्या विशेषता है?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
प्रेमचंद का अधूरा उपन्यास है — बाद में उनके बेटे अमृत राय ने इसे पूरा किया
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मानसरोवर क्या है? इसमें कितने भाग हैं?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
प्रेमचंद की कहानियों का संकलन — कुल 8 भाग
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प्रेमचंद ने किन 4 पत्रिकाओं का संपादन किया? कौन सी उर्दू में थी?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
माधुरी, मर्यादा, हंस, जमाना
उर्दू पत्रिका: जमाना
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'कलम का सिपाही' और 'कलम का मज़दूर' जीवनियाँ किसने लिखीं?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
कलम का सिपाहीअमृत राय (बेटे)
कलम का मज़दूरमदन गोपाल
✍️
राजेश जोशी
जन्म: 1946 · नरसिंहगढ़, मध्यप्रदेश · समकालीन हिंदी कवि
काव्य संग्रह नाटककार अनुवादक साहित्य अकादमी 2002 मध्यप्रदेश
📅 जन्म: 1946 · नरसिंहगढ़, मध्यप्रदेश
जन्म स्थान नरसिंहगढ़, मध्यप्रदेश
जन्म वर्ष 1946
प्रमुख कविता बच्चे काम पर जा रहे हैं (बाल मजदूरी पर)
बाल कविता पानी बरसा
पत्रिकाएँ नया विकल्प · नया ज्ञानोदय
साहित्य अकादमी पुरस्कार 2002 — 'दो पंक्तियों के बीच' (काव्य संग्रह)
2002 साहित्य अकादमी पुरस्कार — काव्य संग्रह 'दो पंक्तियों के बीच' के लिए
⚠️
परीक्षा में भ्रम — ध्यान दें! काव्य संग्रह का सही नाम 'एक दिन बोलेंगे पेड़' है — कुछ नोट्स में 'एक दिन पेड़ बोलेंगे' गलत लिखा होता है।
अनुवाद का सही नाम 'पतलून पहिना बादल' है — 'पहना' नहीं। (रूसी कवि मायकोव्स्की की कविता का अनुवाद)
🎵 (I) काव्य संग्रह
दो पंक्तियों के बीच (साहित्य अकादमी 2002) मिट्टी का चेहरा नेपथ्य में हँसी एक दिन बोलेंगे पेड़ चाँद की वर्तनी
🎭 (II) नाटक
जादू जंगल अच्छे आदमी टंकारा का गाना
📚 (III) कहानियाँ
सोमवार व अन्य कहानियाँ कपिल का पेड़
🌐 (IV) अनुवाद
पतलून पहिना बादल

रूसी कवि मायकोव्स्की की कविता का हिंदी अनुवाद। सही नाम 'पहिना' है, 'पहना' नहीं।

🃏 फ्लैशकार्ड — Active Recall
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राजेश जोशी का जन्म कब और कहाँ हुआ?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
1946 · नरसिंहगढ़, मध्यप्रदेश
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राजेश जोशी को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस रचना पर और किस वर्ष मिला?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
'दो पंक्तियों के बीच' (काव्य संग्रह) — 2002
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'बच्चे काम पर जा रहे हैं' किस विषय पर लिखी गई कविता है?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
बाल मजदूरी पर · राजेश जोशी की प्रमुख कविता
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'पतलून पहिना बादल' किसकी कविता का अनुवाद है?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
रूसी कवि मायकोव्स्की की कविता का हिंदी अनुवाद
⚠️ सही: 'पहिना' — गलत: 'पहना'
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काव्य संग्रह का सही नाम क्या है — 'एक दिन पेड़ बोलेंगे' या 'एक दिन बोलेंगे पेड़'?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
सही नाम: 'एक दिन बोलेंगे पेड़'
⚠️ 'एक दिन पेड़ बोलेंगे' — गलत है
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राजेश जोशी से संबंधित कौन सी दो पत्रिकाएँ हैं?
↺ पलटें
उत्तर · ANSWER
नया विकल्प और नया ज्ञानोदय
🧠

परीक्षा क्विज़

अपनी तैयारी जाँचें — Active Recall
❓ Quick Fire Round
1. 'यामा' को ज्ञानपीठ पुरस्कार कब मिला और यह किन कृतियों का संकलन है?
1979 — नीहार + रश्मि + सांध्यगीत
1982 — नीहार + रश्मि + नीरजा + सांध्यगीत
1968 — नीरजा + दीपशिखा + अग्निरेखा
✓ सही! 1982 में महादेवी वर्मा को 'यामा' (4 संग्रहों का संकलन) पर ज्ञानपीठ मिला।
2. कबीर की भाषा को "वाणी का डिक्टेटर" किसने कहा?
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
डॉ. श्याम सुंदर दास
हजारी प्रसाद द्विवेदी
✓ सही! हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कहा। शुक्ल → सधुक्कड़ी | श्याम सुंदर दास → पंचमेल खिचड़ी।
3. सुमित्रानंदन पंत का प्रथम काव्य संग्रह कौन सा था?
गुंजन
पल्लव
वीणा
✓ सही! वीणा पंत जी का प्रथम काव्य संग्रह है (छायावाद काल)। 'पल्लव' दूसरा प्रमुख संग्रह है जिसमें 'नौका विहार' और 'परिवर्तन' प्रमुख कविताएँ हैं।
4. तुलसीदास ने 'विनय पत्रिका' किस भाषा में लिखी?
अवधी भाषा
ब्रज भाषा
संस्कृत
✓ सही! विनय पत्रिका → ब्रज भाषा। रामचरितमानस → अवधी भाषा।
5. सूरदास के 'भ्रमरगीत' में उद्धव को 'भ्रमर' (भौंरा) क्यों कहा गया?
वे काले रंग के थे इसलिए
वे फूलों के बगीचे में रहते थे
जैसे भौंरा एक फूल से दूसरे फूल पर जाता है, वैसे ही उद्धव ज्ञान का संदेश लेकर ब्रज आए थे — व्यंग्यात्मक संबोधन
✓ सही! गोपियों का भ्रमर (उद्धव) से व्यंग्यात्मक संवाद — निर्गुण ज्ञान बनाम सगुण प्रेम भक्ति।
6. 'बीजक' का संकलन किसने किया था?
स्वामी रामानंद ने
धर्मदास ने, 1464 ई. में
हजारी प्रसाद द्विवेदी ने
✓ सही! कबीर के शिष्य धर्मदास ने 1464 ई. में बीजक संकलित किया। इसके तीन भाग — साखी, सबद, रमैनी।
7. जयशंकर प्रसाद के किस नाटक को हिंदी की प्रथम एकांकी माना जाता है?
राज्यश्री (1915)
ध्रुवस्वामिनी (1933)
एक घूँट (1930)
✓ सही! एक घूँट (1930) हिंदी की प्रथम एकांकी है। 'राज्यश्री' प्रथम ऐतिहासिक नाटक है और 'ध्रुवस्वामिनी' अंतिम नाटक।
8. निराला जी को 'महाप्राण' उपाधि किसने दी और उनका उपनाम 'निराला' किस पत्रिका के नाम पर पड़ा?
रामविलास शर्मा ने दी; 'सरस्वती' पत्रिका पर
गंगाप्रसाद पांडेय ने दी; 'मतवाला' पत्रिका पर
सुमित्रानंदन पंत ने दी; 'समन्वय' पत्रिका पर
✓ सही! महाप्राण → गंगाप्रसाद पांडेय | उपनाम 'निराला' → मतवाला पत्रिका (कलकत्ता) के नाम पर | रामविलास शर्मा ने 'ओज और औदात्य का कवि' और पंत ने 'वसंत का अग्रदूत' कहा।
9. शेखर जोशी की कहानी 'गलता लोहा' किस विषय पर आधारित है और इसके प्रमुख पात्र कौन हैं?
प्रवासी मजदूर जीवन — गुसाईं, लछमा, मदन
जातिगत भेदभाव — मोहन, master त्रिलोक सिंह, धनराम
बाल-श्रम — मदन, जगदीश बाबू, नौरंगी
✓ सही! 'गलता लोहा' जातिगत भेदभाव पर आधारित है। पात्र: मोहन, master त्रिलोक सिंह, धनराम। 'कोसी का घटवार' में गुसाईं-लछमा हैं, और 'दाज्यू' में मदन-जगदीश बाबू।