हिंदी साहित्य का इतिहास
छायावाद और भक्तिकाल के प्रमुख कवि — जीवन, रचनाएँ, पंक्तियाँ, फ्लैशकार्ड और क्विज़ सब एक साथ।
छायावाद काल
तुलनात्मक तालिका — चारों स्तंभ
| तथ्य | जयशंकर प्रसाद | निराला | सुमित्रानंदन पंत | महादेवी वर्मा |
|---|---|---|---|---|
| जन्म | 1889, काशी | 1899, मेदिनीपुर (बंगाल) | 1900, कौसानी (उत्तराखंड) | 1907, फर्रुखाबाद (UP) |
| मृत्यु | 1937 (TB) | 1961, इलाहाबाद | 1977, इलाहाबाद | 1987, इलाहाबाद |
| बचपन का नाम | झारखंडी / कलाधर | सूर्यकांत त्रिपाठी | गुँसाई दत्त | — |
| प्रमुख उपाधि | छायावाद का प्रवर्तक/ब्रह्मा | महाप्राण (गंगाप्रसाद पांडेय) | प्रकृति के सुकुमार कवि | आधुनिक मीरा |
| प्रथम काव्य संग्रह | कानन कुसुम (1913) | अनामिका (1923) | वीणा (1918) | नीहार (1930) |
| महाकाव्य / श्रेष्ठ कृति | कामायनी (1935) | राम की शक्तिपूजा, सरोज स्मृति | लोकायतन (महाकाव्य) | यामा (ज्ञानपीठ विजेता) |
| ज्ञानपीठ पुरस्कार | नहीं (1937 में निधन) | नहीं (1961 में निधन) | 1968 — चिदंबरा | 1982 — यामा |
| साहित्य अकादमी | — | — | 1960 — कला व बूढ़ा चाँद | 1956 — यामा |
| प्रथम कहानी / संग्रह | 'ग्राम' (1911) / छाया (हिंदी का प्रथम) | प्रथम संग्रह: लिली (1934) | — | 'अतीत के चलचित्र' (गद्य) |
| मुक्त छंद / विशेषता | छायावाद का आरंभकर्ता | मुक्त छंद के प्रवर्तक | प्रकृति-प्रेम, तीन काल | वेदना-विरह, रहस्यवाद |
| दर्शन / प्रभाव | शैव — प्रत्यभिज्ञा दर्शन | मार्क्सवाद + मानवतावाद | अरविंद दर्शन | रहस्यवाद (Mysticism) |
| पत्रिका संपादन | इन्दु (1909) | मतवाला, समन्वय, सुधा | — | — |
📌 पल्लव में 'नौका विहार' व 'परिवर्तन' प्रमुख कविताएँ हैं।
📌 रूपाभ पत्रिका (1938) — पंत जी द्वारा संपादित प्रगतिशील साहित्यिक पत्रिका। इसमें मार्क्सवादी-प्रगतिशील विचारों का प्रसार हुआ।
📌 आकाशवाणी — 1957 ई. में All India Radio का नाम बदलकर 'आकाशवाणी' रखा गया। यह नाम सुमित्रानंदन पंत के सुझाव पर स्वीकार किया गया।
1961 — पद्म भूषण
1968 — ज्ञानपीठ → चिदंबरा
प्रगतिवाद → युगांत, ग्राम्या (भारतमाता)
अरविंद दर्शन → चिदंबरा, कला व बूढ़ा चाँद
काव्य नाटक: ज्योत्स्ना, रजत शिखर, शिल्पी, गिरजे का घंटा
उपन्यास: हार · बुराँस
हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वती — सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
छायावाद की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री — हजारी प्रसाद द्विवेदी
1979 — साहित्य अकादमी फेलोशिप (प्रथम महिला)
1982 — ज्ञानपीठ → 'यामा' पर
1988 — पद्म विभूषण
नीहार ⭐ (प्रथम) + रश्मि + नीरजा + सांध्यगीत
बाकी रचनाएँ: दीपशिखा, अग्निरेखा, सप्तपर्णा, प्रथम आयाम
संस्मरण: पथ के साथी · मेरा परिवार
निबंध: शृंखला की कड़ियाँ (महिला समस्याएँ)
पिता: गोविंद प्रसाद वर्मा | माता: हेमरानी
विवाह: 1916 ई. (मात्र 9 वर्ष की आयु में) — गृहस्थ जीवन कभी स्वीकार नहीं किया
पद: प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्य व कुलपति
संपादन: 'चाँद' पत्रिका
प्रभाव: बौद्ध धर्म + महात्मा गाँधी
भक्तिकाल
🔥 निर्गुण धारा
- ज्ञानाश्रयी शाखा — कबीर
- प्रेमाश्रयी शाखा — सूफी कवि
🏹 सगुण धारा
- रामभक्ति शाखा — तुलसीदास
- कृष्णभक्ति शाखा — सूरदास, मीरा, रसखान
पालक माता-पिता: नीमा-नीरू (जुलाहे)
पत्नी: लोई | पुत्र: कमाल | पुत्री: कमाली
गुरु: स्वामी रामानंद | समकालीन: सिकंदर लोदी
पंचमेल खिचड़ी → डॉ. श्याम सुंदर दास
वाणी का डिक्टेटर → हजारी प्रसाद द्विवेदी
साखी (साक्षी) → दोहा + सोरठा
सबद (शब्द/गुरु मंत्र) → गेय पद
रमैनी (रामायण) → चौपाई + दोहा
कबीर → हजारी प्रसाद द्विवेदी
कबीर परिचय → अनंतदास (सबसे पुराना ग्रंथ — सिकंदर लोदी संघर्ष का वर्णन)
विशेषता ①: निरक्षर थे — "मसि कागद छुयो नहीं"
विशेषता ②: समन्वयवादी — हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश
② निर्गुण राम — दशरथ पुत्र नहीं, निराकार ब्रह्म
③ गुरु महिमा — "सतगुरु है रंगरेज"
📌 भ्रमरगीत — उद्धव को 'भ्रमर' (भौंरे) से संबोधित करते हुए गोपियों के विरह-गीत। यह 'सूरसागर' का ही एक भाग है।
📌 नल-दमयन्ती — महाभारतकालीन कथा पर आधारित; कृष्ण-भक्ति से भिन्न रचना। ब्याहलो — अप्राप्य ग्रन्थ; इसके अन्तिम पद में सूरदास ने अपना वंशवृक्ष वर्णित किया है।
पिता: रामदास | गुरु: वल्लभाचार्य
भाषा: ब्रज भाषा
समकालीन: अकबर
② पुष्टिमार्ग का जहाज
③ हिंदी साहित्य का सूर्य
④ अष्टछाप के सर्वश्रेष्ठ कवि
संप्रदाय: वल्लभ संप्रदाय (पुष्टिमार्ग)
भ्रमरगीत = उद्धव को 'भ्रमर' कहकर गोपियों के विरह-गीत = सूरसागर का ही भाग
📌 हजारी प्रसाद द्विवेदी → ब्रजभाषा का प्रथम कवि
विजय: सगुण प्रेम-भक्ति की निर्गुण ज्ञान पर जीत
① "मैया मोरी, मैं नहि माखन खायो" (झूठ)
② "मैया कबहिं बढ़ेगी चोटी" (जिज्ञासा)
③ "मैया हौं न चरैहो गाय" (शिकायत)
धारा: सगुण धारा — कृष्णभक्ति शाखा
अष्टछाप = वल्लभाचार्य + विट्ठलनाथ द्वारा मान्यताप्राप्त 8 कृष्णभक्त कवियों का समूह — सूरदास सर्वश्रेष्ठ
मधुकर कहि समुझाय सौंह दै, बूझति साँच, न हाँसी॥
को है जनक, कौन है जननी, कौन नारि, को दासी?"
ज्यौं गूँगै मीठे फल कौ रस, अंतरगत हीं भावै॥
परम स्वाद सबहीं जु निरंतर, अमित तोष उपजावै।"
तुलसीदास ने स्वयं लिखा — "संवत सोरह सौ इकतीसा। करउँ कथा हरिपद धरि सीसा।।"
📌 हनुमान बाहुक — तुलसीदास ने बाहु (भुजा) के रोग से मुक्ति के लिए रचा; यह मुक्तक काव्य है और अवधी भाषा में लिखा गया है।
📌 वैराग्य संदीपनी — 48 दोहे-सोरठे + 14 चौपाई; विषय: वैराग्योपदेश, सन्तों के लक्षण और शान्ति-निर्देश। भाषा: अवधी मिश्रित ब्रजभाषा। रचनाकाल संवत् 1614। तुलसी की ख्याति के पाँच प्रमुख आधारों में शामिल।
📌 रामाज्ञा प्रश्नावली — एक ज्योतिष ग्रन्थ है जिसमें शकुन-अपशकुन और रामायण-कथा के आधार पर भविष्य-विचार किया गया है। रचनाकाल संवत् 1621।
② कलिकाल का वाल्मीकि
③ मानस का हंस — अमृतलाल नागर (उपन्यास)
④ कवि शिरोमणि
⑤ लोकनायक
शासक: मुगल सम्राट अकबर (1556–1605)
तुलसी ने लिखा: "संवत सोरह सौ इकतीसा।"
📌 मीराबाई ने कोई प्रबंधकाव्य नहीं लिखा — इनके स्फुट (फुटकर) पदों को बाद में संकलित किया गया। मीरा पदावली का सर्वप्रसिद्ध संपादन परशुराम चतुर्वेदी ने किया है।
📌 गीतगोविंद की टीका — जयदेव के प्रसिद्ध ग्रंथ 'गीतगोविंद' पर आधारित।
जन्म: 1498 ई., कुड़की (मेड़ता, राजस्थान)
गुरु: संत रैदास
पति: कुंवर भोजराज (महाराणा सांगा के पुत्र)
मृत्यु: 1546 ई., द्वारका
भाव: माधुर्य भाव (कांता/दाम्पत्य) — कृष्ण को पति मानकर
भाषा: राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा
संपादन: परशुराम चतुर्वेदी
काव्य-रूप: मुक्तक, गेय पद (स्फुट पद)
"इन मुसलमान हरिजनन पर, कोटिन हिंदू वारिए।"
अर्थात — ऐसे मुस्लिम हरि-भक्तों पर करोड़ों हिंदुओं को भी न्योछावर किया जा सकता है।
जन्म: 1548 ई., पिहानी (हरदोई, उ.प्र.)
गुरु: गोस्वामी विट्ठलनाथ (वल्लभाचार्य के पुत्र)
समाधि: महाबन (मथुरा)
भाषा: शुद्ध ब्रजभाषा | छंद: सवैया
भारतेंदु: "इन मुसलमान हरिजनन पर, कोटिन हिंदू वारिए।"
प्रेम वाटिका (1614) — 53 दोहे ⭐
दानलीला — 11 दोहे
अष्टयाम — कृष्ण की आठों पहर की दिनचर्या
उत्तराखंड के रचनाकार
साहित्यिक नाम: शैलेश मटियानी
मुंबई के मजदूर जीवन पर आधारित
बिहार सरकार द्वारा प्रदत्त
मन्नू भंडारी → 'महाभोज' = उपन्यास व नाटक
⚠️ परीक्षा में अक्सर भ्रम होता है!
जन्म स्थान: बाड़ेछीना, अल्मोड़ा
मृत्यु: 24 अप्रैल 2001
उत्कृष्ट सरकारी शिक्षकों को दिया जाता है
आंदोलन: नई कहानी आंदोलन
मृत्यु: 2022
विषय: जातिगत भेदभाव
कोसी नदी की पृष्ठभूमि में विरह-प्रेम का चित्रण
विशेष: चिल्ड्रंस फिल्म सोसायटी द्वारा बाल फिल्म का निर्माण
1995 — साहित्य भूषण सम्मान
1997 — पहल सम्मान
2003–04 — मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार
शब्द चित्र / संस्मरण: स्मृति के रंग
अन्य रचनाकार
एक दिन प्रेमचंद कायाकल्प उपन्यास पढ़ रहे थे तभी बेटी निर्मला आई और बोली, "पिताजी आपने प्रेमाश्रम से जो गोदान में दिया था वह ससुराल वालों ने गबन कर लिया। अब सिर्फ मंगलसूत्र बचा है। मैंने प्रतिज्ञा ली कि उस सदन (सेवा सदन) में नहीं जाऊंगी।" तब प्रेमचंद बोले — "बेटी यह अहंकार ठीक नहीं, ससुराल तेरी कर्मभूमि है और यह तेरी रंगभूमि।"
⭐ मंगलसूत्र — अधूरा उपन्यास, बेटे अमृत राय ने पूरा किया।
⭐ मानसरोवर — प्रेमचंद की कहानियों का 8 भागों में प्रकाशित संकलन।
प्रेमचंद पूस की रात में पंच परमेश्वर को दो बैलों की कहानी सुना रहे थे। बड़े भाई साहब आए — जिनके साथ बचपन में गिल्ली डंडा खेलते थे, अब वे नमक का दरोगा बने और बड़े घर की बेटी से शादी हुई। भाई बोले — "बूढ़ी काकी का दूध का दाम चुकाने का वक्त है, उनकी सौत ने शराब की दुकान के सामने छोड़ दिया।" दोनों काकी को घर लाए। अगले दिन ईदगाह पर बैंक का दिवाला लेकर सूरदास की झोपड़ी गिफ्ट की। काकी बोलीं — "मरूं तो कफन भी तू लाना।" फिर गुप्त धन के बारे में बताया।
- हिंदी की पहली कहानी — सौत (प्रेमचंद)
- प्रेमचंद की अंतिम कहानी — कफन
- मंगलसूत्र — अधूरा उपन्यास, बेटे अमृत राय ने पूरा किया
- मानसरोवर — कहानी संकलन, 8 भाग
2. उपन्यास सम्राट
3. कहानी सम्राट
4. कलम का सिपाही
5. कलम का मजदूर
हिंदी की प्रथम कहानी: सौत (प्रेमचंद)
उर्दू पत्रिका: जमाना
कलम का मज़दूर — मदन गोपाल
अनुवाद का सही नाम 'पतलून पहिना बादल' है — 'पहना' नहीं। (रूसी कवि मायकोव्स्की की कविता का अनुवाद)
रूसी कवि मायकोव्स्की की कविता का हिंदी अनुवाद। सही नाम 'पहिना' है, 'पहना' नहीं।
⚠️ सही: 'पहिना' — गलत: 'पहना'
⚠️ 'एक दिन पेड़ बोलेंगे' — गलत है