संधि — हिंदी व्याकरण
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हिंदी व्याकरण · स्वर संधि · व्यंजन संधि · विसर्ग संधि

संधि / सन्धि

दो वर्णों के मेल (योग) के कारण होने वाले बदलाव को संधि कहा जाता है। सम् + धि — यह स्वयं व्यंजन संधि का एक उदाहरण है।

स्वर संधि व्यंजन संधि विसर्ग संधि 5 उपभेद
सम् + धि
संधि / सन्धि
व्यंजन संधि (उदाहरण)
परिभाषा

दो वर्णों के मेल (योग) के कारण होने वाले बदलाव को संधि कहा जाता है।

📝

ध्यान दें: पान + वाला → पानवाला — यहाँ संधि ❌ है, यह केवल संयोग ✔ है। संधि में दोनों वर्णों में से किसी एक में परिवर्तन होता है।

प्रधान संधि

बदलाव प्रथम पद के अंतिम वर्ण द्वितीय पद के प्रथम वर्ण में होता है।

गौण संधि

बदलाव किसी अन्य वर्ण में होता है, प्रथम/द्वितीय पद के वर्णों में नहीं।

🗂️

संधि के प्रकार

तीन मुख्य भेद · पाँच स्वर-उपभेद
स्वर संधि के पाँच प्रकार 5 भेद
1दीर्घ संधि
2गुण संधि
3वृद्धि संधि
4यण संधि
5अयादि संधि
पहचान — त्वरित संदर्भ QUICK REF
दीर्घ
आ · ई · ऊ
समान स्वर मिलने पर
दीर्घ स्वर बनता है
गुण
ए · ओ · अर्
अ/आ + इ/ई/उ/ऊ/ऋ
से मिलने पर बनता है
वृद्धि
ऐ · औ
अ/आ + ए/ऐ/ओ/औ
से मिलने पर बनता है
यण
त्य · स्व · त्र
य/व/र से पहले
आधा वर्ण (हलन्त)
अयादि
नयन · पावन
य/व से पहले
पूरा वर्ण — अय/आय/अव/आव

दीर्घ स्वर संधि

अ/आ + अ/आ = आ · इ/ई + इ/ई = ई · उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ
नियम

अ/आ, इ/ई, उ/ऊ का समान स्वर से योग हो तो ये अपने दीर्घ स्वर में बदल जाते हैं। (ऋ + ऋ → ऋ)

अ/आ + अ/आ
हिम + आलय = हिमालय
इ/ई + इ/ई
कवि + ईश = कवीश
उ/ऊ + उ/ऊ
भानु + उदय = भानूदय
🅐 अ/आ + अ/आ = आ अ+अ, अ+आ, आ+अ, आ+आ → आ
शब्दविच्छेदविश्लेषण
हिमालयहिम + आलयहिम का अंत = , आलय का आरम्भ = अ + आ = आ
रामायणराम + अयनराम का अंत = , अयन का आरम्भ = अ + अ = आ
कारावासकारा + आवासकारा का अंत = , आवास का आरम्भ = आ + आ = आ
पुस्तकालयपुस्तक + आलयपुस्तक का अंत = , आलय का आरम्भ = अ + आ = आ
नयनाभिरामनयन + अभिरामनयन का अंत = , अभिराम का आरम्भ = अ + अ = आ
हिमांशुहिम + अंशुहिम का अंत = , अंशु का आरम्भ = अ + अ = आ
वीरांगनावीर + अंगनावीर का अंत = , अंगना का आरम्भ = अ + अ = आ
वार्तालापवार्ता + आलापवार्ता का अंत = , आलाप का आरम्भ = आ + आ = आ
परमाणुपरम + अणुपरम का अंत = , अणु का आरम्भ = अ + अ = आ
रेखांशरेखा + अंशरेखा का अंत = , अंश का आरम्भ = आ + अ = आ
पितृणपितृ + ऋणपितृ का अंत = , ऋण का आरम्भ = ऋ + ऋ = ऋ
सीमान्तसीम + अन्तसीम का अंत = , अन्त का आरम्भ = अ + अ = आ
चराचरचर + अचरचर का अंत = , अचर का आरम्भ = अ + अ = आ
रत्नावलीरत्न + आवलीरत्न का अंत = , आवली का आरम्भ = अ + आ = आ
गीतावलीगीत + आवलीगीत का अंत = , आवली का आरम्भ = अ + आ = आ
कुशासनकुश + आसनकुश का अंत = , आसन का आरम्भ = अ + आ = आ
🅘 इ/ई + इ/ई = ई इ+इ, इ+ई, ई+इ, ई+ई → ई
'इ': इच्छा इष्ट इन्द्र 'ई': ईश ईश्वर ईक्षा ईप्सा ईशान ईर्षा
शब्दविच्छेदविश्लेषण
कवीन्द्रकवि + इन्द्रकवि का अंत = , इन्द्र का आरम्भ = इ + इ = ई
कवीशकवि + ईशकवि का अंत = , ईश का आरम्भ = इ + ई = ई
रवीन्द्ररवि + इन्द्ररवि का अंत = , इन्द्र का आरम्भ = इ + इ = ई
गिरीशगिरि + ईशगिरि का अंत = , ईश का आरम्भ = इ + ई = ई
परीक्षापरि + ईक्षापरि का अंत = , ईक्षा का आरम्भ = इ + ई = ई
अतीन्द्रियअति + इन्द्रियअति का अंत = , इन्द्रिय का आरम्भ = इ + इ = ई
महतीच्छामहती + इच्छामहती का अंत = , इच्छा का आरम्भ = ई + इ = ई
फणीश्वरफणी + ईश्वरफणी का अंत = , ईश्वर का आरम्भ = ई + ई = ई
क्षितीशक्षिति + ईशक्षिति का अंत = , ईश का आरम्भ = इ + ई = ई
श्रीशश्री + ईशश्री का अंत = , ईश का आरम्भ = ई + ई = ई
नारीशनारी + ईशनारी का अंत = , ईश का आरम्भ = ई + ई = ई
फणीशफणी + ईशफणी का अंत = , ईश का आरम्भ = ई + ई = ई
परीक्षणपरि + ईक्षणपरि का अंत = , ईक्षण का आरम्भ = इ + ई = ई
🅤 उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ उ+उ, उ+ऊ, ऊ+उ, ऊ+ऊ → ऊ
'उ': उत्तर उत्तम उक्ति उपरांत उद्धार 'ऊ': ऊष्मा ऊर्जा ऊर्ध्व ऊर्मि ऊढ़ा
शब्दविच्छेदविश्लेषण
भानूदयभानु + उदयभानु का अंत = , उदय का आरम्भ = उ + उ = ऊ
धातूष्माधातु + ऊष्माधातु का अंत = , ऊष्मा का आरम्भ = उ + ऊ = ऊ
सिंधूर्मिसिंधु + ऊर्मिसिंधु का अंत = , ऊर्मि का आरम्भ = उ + ऊ = ऊ
लघूत्तरलघु + उत्तरलघु का अंत = , उत्तर का आरम्भ = उ + उ = ऊ
भूर्जाभू + ऊर्जाभू का अंत = , ऊर्जा का आरम्भ = ऊ + ऊ = ऊ
भूद्धारभू + उद्धारभू का अंत = , उद्धार का आरम्भ = ऊ + उ = ऊ
वधूक्तिवधू + उक्तिवधू का अंत = , उक्ति का आरम्भ = ऊ + उ = ऊ
मृत्यूपरांतमृत्यु + उपरांतमृत्यु का अंत = , उपरांत का आरम्भ = उ + उ = ऊ
चमूत्तमचमू + उत्तमचमू का अंत = , उत्तम का आरम्भ = ऊ + उ = ऊ
सरयूर्मिसरयू + ऊर्मिसरयू का अंत = , ऊर्मि का आरम्भ = ऊ + ऊ = ऊ
चमूर्जाचमू + ऊर्जाचमू का अंत = , ऊर्जा का आरम्भ = ऊ + ऊ = ऊ
सूक्तिसु + उक्तिसु का अंत = , उक्ति का आरम्भ = उ + उ = ऊ
बहुद्देश्यीयबहु + उद्देशीयबहु का अंत = , उद्देशीय का आरम्भ = उ + उ = ऊ
स्वयंभूदयस्वयंभू + उदयस्वयंभू का अंत = , उदय का आरम्भ = ऊ + उ = ऊ
⚠️

नोट: वधूल्लास → वधू + उल्लास — यह व्यंजन संधि का अपवाद/नोट है।

गुण स्वर संधि

अ/आ + इ/ई = ए · अ/आ + उ/ऊ = ओ · अ/आ + ऋ = अर्
नियम

यदि अ/आ का योग इ/ई, उ/ऊ, ऋ से हो तो वे क्रमशः ए, ओअर् में बदल जाते हैं।

अ/आ + इ/ई
नर + ईश = नरेश
अ/आ + उ/ऊ
पर + उपकार = परोपकार
अ/आ + ऋ
अर्
महा + ऋषि = महर्षि
📘 अ/आ + इ/ई = ए → ए
शब्दविच्छेदविश्लेषण
नरेन्द्रनर + इन्द्रनर का अंत = , इन्द्र का आरम्भ = अ + इ = ए
नरेशनर + ईशनर का अंत = , ईश का आरम्भ = अ + ई = ए
सोमेश्वरसोम + ईश्वरसोम का अंत = , ईश्वर का आरम्भ = अ + ई = ए
ज्ञानेशज्ञान + ईशज्ञान का अंत = , ईश का आरम्भ = अ + ई = ए
राकेशराका + ईशराका का अंत = , ईश का आरम्भ = आ + ई = ए
परेशपर + ईशपर का अंत = , ईश का आरम्भ = अ + ई = ए
📗 अ/आ + उ/ऊ = ओ → ओ
शब्दविच्छेद
परोपकारपर + उपकार
सूर्योदयसूर्य + उदय
महोत्सवमहा + उत्सव
गंगोर्मिगंगा + ऊर्मि
नवोढानव + ऊढा
वार्षिकोत्सववार्षिक + उत्सव
समुद्रोर्मिसमुद्र + ऊर्मि
सोदाहरणस + उदाहरण
सांगोपांगस + अंग + उपांग
प्राप्तोदकप्राप्त + उदक
📝

नोट: यथोचित → यथा + उचित (गुण संधि) — यथौचित्य → यथा + औचित्य (वृद्धि संधि) से अलग है।

अ/आ + ऋ = अर् Imp → अर्
शब्दविच्छेदविश्लेषण
महर्षिमहा + ऋषिमहा का अंत = , ऋषि का आरम्भ = आ + ऋ = अर्
राजर्षिराजा + ऋषिराजा का अंत = , ऋषि का आरम्भ = आ + ऋ = अर्
देवर्षिदेव + ऋषिदेव का अंत = , ऋषि का आरम्भ = अ + ऋ = अर्
ब्रह्मर्षिब्रह्म + ऋषिब्रह्म का अंत = , ऋषि का आरम्भ = अ + ऋ = अर्
ग्रीष्मर्तुग्रीष्म + ऋतुग्रीष्म का अंत = , ऋतु का आरम्भ = अ + ऋ = अर्
वर्षर्तुवर्षा + ऋतुवर्षा का अंत = , ऋतु का आरम्भ = आ + ऋ = अर्
शीतर्तुशीत + ऋतुशीत का अंत = , ऋतु का आरम्भ = अ + ऋ = अर्
कण्वर्षिकण्व + ऋषिकण्व का अंत = , ऋषि का आरम्भ = अ + ऋ = अर्
उत्तमर्णउत्तम + ऋणउत्तम का अंत = , ऋण का आरम्भ = अ + ऋ = अर्
महर्णमहा + ऋणमहा का अंत = , ऋण का आरम्भ = आ + ऋ = अर्

वृद्धि संधि

अ/आ + ए/ऐ = ऐ · अ/आ + ओ/औ = औ
नियम

यदि अ/आ के साथ ए/ऐओ/औ का योग हो तो यह क्रमशः तथा में बदल जाते हैं।

अ/आ + ए/ऐ
मत + ऐक्य = मतैक्य
अ/आ + ओ/औ
महा + औषधि = महौषधि
📕 अ/आ + ए/ऐ = ऐ ऐश्वर्य · ऐच्छिक · ऐक्य
शब्दविच्छेदविश्लेषण
एकैकएक + एकएक का अंत = , एक का आरम्भ = अ + ए = ऐ
मतैक्यमत + ऐक्यमत का अंत = , ऐक्य का आरम्भ = अ + ऐ = ऐ
धनैश्वर्यधन + ऐश्वर्यधन का अंत = , ऐश्वर्य का आरम्भ = अ + ऐ = ऐ
तथैवतथा + एवतथा का अंत = , एव का आरम्भ = आ + ए = ऐ
महैश्वर्यमहा + ऐश्वर्यमहा का अंत = , ऐश्वर्य का आरम्भ = आ + ऐ = ऐ
गंगैश्वर्यगंगा + ऐश्वर्यगंगा का अंत = , ऐश्वर्य का आरम्भ = आ + ऐ = ऐ
लोकैश्वर्यलोक + ऐश्वर्यलोक का अंत = , ऐश्वर्य का आरम्भ = अ + ऐ = ऐ
सहसैवसहसा + एवसहसा का अंत = , एव का आरम्भ = आ + ए = ऐ
पुत्रैषणापुत्र + एषणापुत्र का अंत = , एषणा का आरम्भ = अ + ए = ऐ
📙 अ/आ + ओ/औ = औ औदार्य · औत्सुक्य
शब्दविच्छेद
प्रौद्योगिकप्र + औद्योगिक
पूर्वोपनिवेशिकपूर्व + औपनिवेशिक
महौषधिमहा + औषधि
महौदार्यमहा + औदार्य
महौत्सुक्यमहा + औत्सुक्य
यथौचित्ययथा + औचित्य
जलौकजल + ओक

यण संधि

इ/ई → य् · उ/ऊ → व् · ऋ → र् (भिन्न स्वर के साथ)
नियम

यदि इ/ई, उ/ऊ के साथ असमान स्वर का योग हो तो इ/ई → य्, उ/ऊ → व्, ऋ → र् में बदल जाते हैं तथा असमान स्वर की मात्रा लगा दी जाती है।

⚡ पहचान
  • य, व, र के आगे आधा वर्ण — यण संधि
  • त्र = त् + र (ऋ → र् वाले शब्दों में)
🔹 इ/ई + असमान स्वर = य् + मात्रा इ/ई → य्
शब्दविच्छेदविश्लेषण
अत्याचारअति + आचारअति का अंत = , आचार का आरम्भ = इ → य्अत्याचार
अध्यात्मअधि + आत्मअधि का अंत = , आत्म का आरम्भ = इ → य्अध्यात्म
अत्यधिकअति + अधिकअति का अंत = , अधिक का आरम्भ = इ → य्अत्यधिक
यद्यपियदि + अपियदि का अंत = , अपि का आरम्भ = इ → य्यद्यपि
प्रत्युपकारप्रति + उपकारप्रति का अंत = , उपकार का आरम्भ = इ → य् → प्रत्युपकार
न्यूननि + ऊननि का अंत = , ऊन का आरम्भ = इ → य् → न्यून
व्यूहवि + ऊहवि का अंत = , ऊह का आरम्भ = इ → य् → व्यूह
प्रत्येकप्रति + एकप्रति का अंत = , एक का आरम्भ = इ → य् → प्रत्येक
देव्यागमनदेवी + आगमनदेवी का अंत = , आगमन का आरम्भ = ई → य् → देव्यागमन
व्यंजनवि + अंजनवि का अंत = , अंजन का आरम्भ = इ → य् → व्यंजन
व्यायामवि + आयामवि का अंत = , आयाम का आरम्भ = इ → य् → व्यायाम
पर्यटनपरि + अटनपरि का अंत = , अटन का आरम्भ = इ → य् → पर्यटन
अध्येषणाअधि + एषणाअधि का अंत = , एषणा का आरम्भ = इ → य् → अध्येषणा
व्याधिवि + आधिवि का अंत = , आधि का आरम्भ = इ → य् → व्याधि
🔸 उ/ऊ + असमान स्वर = व् + मात्रा उ/ऊ → व्
शब्दविच्छेदविश्लेषण
मन्वन्तरमनु + अन्तरमनु का अंत = , अन्तर का आरम्भ = उ → व्मन्वन्तर
स्वच्छसु + अच्छसु का अंत = , अच्छ का आरम्भ = उ → व् → स्वच्छ
गुर्वासनगुरु + आसनगुरु का अंत = , आसन का आरम्भ = उ → व्गुर्वासन
वध्वाचरणवधू + आचरणवधू का अंत = , आचरण का आरम्भ = ऊ → व् → वध्वाचरण
स्वल्पसु + अल्पसु का अंत = , अल्प का आरम्भ = उ → व् → स्वल्प
अन्वयअनु + अयअनु का अंत = , अय का आरम्भ = उ → व् → अन्वय
स्वागतसु + आगतसु का अंत = , आगत का आरम्भ = उ → व् → स्वागत
अन्वितअनु + इतअनु का अंत = , इत का आरम्भ = उ → व् → अन्वित
अन्वीक्षणअनु + ईक्षणअनु का अंत = , ईक्षण का आरम्भ = उ → व् → अन्वीक्षण
धात्विकधातु + इकधातु का अंत = , इक का आरम्भ = उ → व् → धात्विक
ऋ + असमान स्वर = र् + मात्रा (त्र) Important ऋ → र् (त्र)
पहचान
  • त्र = त् + र — यह ऋ → र् की पहचान है।
शब्दविच्छेदविश्लेषण
मात्रादेशमातृ + आदेशमातृ का अंत = , आदेश का आरम्भ = ऋ → र् → मात्र + आदेश
पित्राज्ञापितृ + आज्ञापितृ का अंत = , आज्ञा का आरम्भ = ऋ → र् → पित्र + आज्ञा
पितृच्छापितृ + इच्छापितृ का अंत = , इच्छा का आरम्भ = ऋ → र् → पित्र + इच्छा
पित्रर्थपितृ + अर्थपितृ का अंत = , अर्थ का आरम्भ = ऋ → र् → पित्रर्थ
मात्रर्थमातृ + अर्थमातृ का अंत = , अर्थ का आरम्भ = ऋ → र् → मात्रर्थ
मात्रानन्दमातृ + आनन्दमातृ का अंत = , आनन्द का आरम्भ = ऋ → र् → मात्रानन्द
मात्रुपदेशमातृ + उपदेशमातृ का अंत = , उपदेश का आरम्भ = ऋ → र् → मात्र + उपदेश = मात्रुपदेश
पित्रनुमतिपितृ + अनुमतिपितृ का अंत = , अनुमति का आरम्भ = ऋ → र् → पित्रनुमति

अयादि संधि

ए→अय् · ऐ→आय् · ओ→अव् · औ→आव् (+ भिन्न स्वर)
नियम (अय् + आदि)

ए/ऐ/ओ/औ स्वरों का मेल किसी भी अन्य स्वर से हो तो उनका रूप बदलता है।

ए + स्वर
अय्
ने + अन = नयन
ऐ + स्वर
आय्
गै + अन = गायन
ओ + स्वर
अव्
पो + अन = पवन
औ + स्वर
आव्
पौ + अन = पावन
⚡ पहचान — यण vs अयादि
  • यण: य/व/र से पहले आधा वर्ण (जैसे: अत्याचार)
  • अयादि: य/व से पहले पूर्ण वर्ण — अ/आ स्वर के साथ (जैसे: नन, गन)
विच्छेद का तरीका

आय् → य् से पूर्व वर्ण पर 'ऐ' मात्रा + य पर उपस्थित स्वर के साथ दूसरा वर्ण
अय् → य् से पूर्व वर्ण पर 'ए' मात्रा + य पर उपस्थित स्वर के साथ दूसरा वर्ण
अव् → व से पूर्व वर्ण पर 'ओ' मात्रा + व पर उपस्थित स्वर के साथ दूसरा वर्ण
आव् → व से पूर्व वर्ण पर 'औ' मात्रा + व पर उपस्थित स्वर के साथ दूसरा वर्ण

🟣 ए + स्वर = अय् ने + अन = नयन
शब्दविच्छेदविश्लेषण
नयनने + अनने का स्वर = + अन का आरम्भ = ए → अय्नयन
उदयउदे + अउदे का स्वर = + ए → अय्उदय
संचयसंचे + असंचे का स्वर = + ए → अय्संचय  (या व्यंजन संधि: सम् + चय)
विजयिनीविजे + इनीविजे का स्वर = + इनी का आरम्भ = ए → अय्विजयिनी
जयजे + अजे का स्वर = + ए → अय्जय  ★ Imp
लयले + अले का स्वर = + ए → अय्लय  ★ Imp
विलयविले + अविले का स्वर = + ए → अय्विलय
प्रलयप्रले + अप्रले का स्वर = + ए → अय्प्रलय
🟠 ऐ + स्वर = आय् गै + अक = गायक
शब्दविच्छेदविश्लेषण
गायकगै + अकगै का स्वर = + अक का आरम्भ = ऐ → आय्गायक
गायिकागै + इकागै का स्वर = + इका का आरम्भ = ऐ → आय्गायिका
गायनगै + अनगै का स्वर = + अन का आरम्भ = ऐ → आय्गायन
विधायिकाविधै + इकाविधै का स्वर = + इका का आरम्भ = ऐ → आय्विधायिका

Imp: रामायण → रामै + अण (अयादि) — परंतु प्रथम प्राथमिकता राम + अयन (दीर्घ संधि) है।

🟢 ओ + स्वर = अव् पो + अन = पवन
शब्दविच्छेदविश्लेषण
पवनपो + अनपो का स्वर = + अन का आरम्भ = ओ → अव्पवन
पवित्रपो + इत्रपो का स्वर = + इत्र का आरम्भ = ओ → अव्पवित्र
भवनभो + अनभो का स्वर = + अन का आरम्भ = ओ → अव्भवन
प्रसवप्रसो + अप्रसो का स्वर = + ओ → अव्प्रसव
🔵 औ + स्वर = आव् पौ + अन = पावन
शब्दविच्छेदविश्लेषण
पावनपौ + अनपौ का स्वर = + अन का आरम्भ = औ → आव्पावन
प्रसाविकाप्रसौ + इकाप्रसौ का स्वर = + इका का आरम्भ = औ → आव्प्रसाविका
भावुकभौ + उकभौ का स्वर = + उक का आरम्भ = औ → आव्भावुक
भावनाभौ + अनाभौ का स्वर = + अना का आरम्भ = औ → आव्भावना
धावकधौ + अकधौ का स्वर = + अक का आरम्भ = औ → आव्धावक
⚠️

अपवाद एवं विशेष नियम

स्वर संधि के अपवाद · महत्वपूर्ण विशेष नियम
① वृद्धि संधि के अपवाद
📌

नीचे दिए गए शब्दों का विच्छेद गुण संधि से होता है परंतु संधि वृद्धि मानी जाती है।

प्रौढ़
प्र + ऊढ़ → प् + र् + अ + ऊ + ढ़
गुण नियम से अ + ऊ = ओ होना चाहिए था, परन्तु यहाँ बना → वृद्धि संधि (अपवाद)
प्रौढ़ा
प्र + ऊढ़ा
वृद्धि संधि (अपवाद)
स्वैर
स्व + ईर → स्व का अंत = , ईर का आरम्भ =
गुण नियम से अ + ई = ए होना चाहिए था, परन्तु यहाँ बना → वृद्धि संधि (अपवाद)
स्वैरिणी
स्व + ईरिणी
वृद्धि संधि (अपवाद)
अक्षौहिणी
अक्ष + ऊहिणी
वृद्धि संधि (अपवाद) — वृद्धि: प्रौढ़, प्रौढ़ा, स्वैर, स्वैरिणी, अक्षौहिणी
अपवाद (गुण नहीं): स्वाधीन सुखार्त दुखार्त खरोष्ठ दंतोष्ठ
② गवेन्द्र / गवाक्ष (Special)
गवेन्द्र
गो + इन्द्र → गविन्द्र / गवेन्द्र
अयादि संधि — अपवाद: शब्द का अर्थ समान रहता है। ओ + इ → अव् + इ = गविन्द्र, परंतु गुण रूप गवेन्द्र भी प्रचलित।
गवाक्ष
गो + अक्षि (अक्ष → अक्षि)
अयादि संधि: ओ + अ → अव् + अ = गवाक्ष
③ रामायण — त्रि-संधि विश्लेषण
रामायण में तीन संधियाँ

(i) राम + अयन → दीर्घ संधि (प्रथम प्राथमिकता ✔)
(ii) रामै + अन → अयादि संधि
(iii) न का ण बनना → व्यंजन संधि

नियम: 'न' वर्ण के बाद बचे हुए शब्द में 'ऋ/र/ष' हो तो न → ण में बदल जाता है। (राम + अयन → बचे शब्द में 'र' उपस्थित → 'न' → 'ण' → रामायण)

④ शब्दांत परिवर्तन Imp

यदि किसी शब्द के अंत में अक्ष, रात्र, निश, इच्छा, अष्ट हो तो वे क्रमशः अक्षि, रात्रि, निशि, इच्छ, अष्टन् में बदल जाते हैं।

शब्दविच्छेदपरिवर्तनसंधि प्रकार
प्रत्यक्षप्रति + अक्षिअक्ष → अक्षियण संधि
नवरात्रनव + रात्रिरात्र → रात्रिदीर्घ संधि
अहर्निशअहर् + निशिनिश → निशि
यथेच्छयथा + इच्छाइच्छा → इच्छ (अंतिम आ का लोप)गुण संधि
स्वच्छसु + अच्छयण संधि
⑤ स्वर का दीर्घीकरण
शब्दविच्छेदनोट
विश्वामित्रविश्व + मित्रविश्व + अमित्र (दीर्घ संधि ❌) → स्वर का दीर्घीकरण ✔
मूसलाधारमूसल + धारस्वर का दीर्घीकरण
प्रभुदयालप्रभु + दयाल
दीनानाथदीन + नाथ
⑥ सारंग / पतंजलि — स्वर/व्यंजन का लोप
सारंग
सार + अंग → 'अ' स्वर का लोप
स्वर-लोप
पतंजलि
पतत् + अंजलि → 'त्' व्यंजन का लोप
व्यंजन-लोप (Important)
⑦ अधरौष्ठ / अधरोष्ठ Important
अधरौष्ठ
अधर + ओष्ठ
वृद्धि संधि (अ + ओ → औ)
अधरोष्ठ
अधर + ओष्ठ
अपवाद रूप
दंतौष्ठ
दंत + ओष्ठ
वृद्धि संधि
दंतोष्ठ
दंत + ओष्ठ
अपवाद रूप
वर्तनी भेद: सर्दी – सरदी गर्मी – गरमी मंदिर – मन्दिर खरोष्ठ = खर + ओष्ठ
🔡

व्यंजन संधि

स्वर+व्यंजन · व्यंजन+स्वर · व्यंजन+व्यंजन
🔡

व्यंजन संधि नोट्स

इस खंड में व्यंजन संधि के सभी नियम, उपभेद और उदाहरण जल्द जोड़े जाएँगे — जब नोट्स उपलब्ध हों।

जल्द आने वाला है
व्यंजन संधि — परिचय

जब स्वर + व्यंजन, व्यंजन + स्वर या व्यंजन + व्यंजन का मेल होने पर परिवर्तन होता है — वह व्यंजन संधि कहलाती है।

उदाहरण: सम् + धि → संधि / सन्धि (जिसका अर्थ यह भी बताता है कि 'संधि' शब्द स्वयं व्यंजन संधि से बना है।)

🌀

विसर्ग संधि

विसर्ग + स्वर · विसर्ग + व्यंजन
🌀

विसर्ग संधि नोट्स

इस खंड में विसर्ग संधि के सभी नियम, उपभेद और उदाहरण जल्द जोड़े जाएँगे — जब नोट्स उपलब्ध हों।

जल्द आने वाला है
विसर्ग संधि — परिचय

जब विसर्ग (:) का स्वर या व्यंजन से मेल होने पर परिवर्तन होता है — वह विसर्ग संधि कहलाती है।

उदाहरण: मनः + रथ → मनोरथ, निः + पाप → निष्पाप