संधि / सन्धि
दो वर्णों के मेल (योग) के कारण होने वाले बदलाव को संधि कहा जाता है। सम् + धि — यह स्वयं व्यंजन संधि का एक उदाहरण है।
दो वर्णों के मेल (योग) के कारण होने वाले बदलाव को संधि कहा जाता है।
ध्यान दें: पान + वाला → पानवाला — यहाँ संधि ❌ है, यह केवल संयोग ✔ है। संधि में दोनों वर्णों में से किसी एक में परिवर्तन होता है।
बदलाव प्रथम पद के अंतिम वर्ण व द्वितीय पद के प्रथम वर्ण में होता है।
बदलाव किसी अन्य वर्ण में होता है, प्रथम/द्वितीय पद के वर्णों में नहीं।
संधि के प्रकार
स्वर संधि
जब दो स्वर मिलकर एक नया स्वर बनाते हैं।
व्यंजन संधि
स्वर+व्यंजन, व्यंजन+स्वर, व्यंजन+व्यंजन के मेल से।
विसर्ग संधि
जब विसर्ग (:) का स्वर या व्यंजन से मेल हो।
दीर्घ स्वर बनता है
से मिलने पर बनता है
से मिलने पर बनता है
आधा वर्ण (हलन्त)
पूरा वर्ण — अय/आय/अव/आव
दीर्घ स्वर संधि
अ/आ, इ/ई, उ/ऊ का समान स्वर से योग हो तो ये अपने दीर्घ स्वर में बदल जाते हैं। (ऋ + ऋ → ऋ)
| शब्द | विच्छेद | विश्लेषण |
|---|---|---|
| हिमालय | हिम + आलय | हिम का अंत = अ, आलय का आरम्भ = आ → अ + आ = आ |
| रामायण | राम + अयन | राम का अंत = अ, अयन का आरम्भ = अ → अ + अ = आ |
| कारावास | कारा + आवास | कारा का अंत = आ, आवास का आरम्भ = आ → आ + आ = आ |
| पुस्तकालय | पुस्तक + आलय | पुस्तक का अंत = अ, आलय का आरम्भ = आ → अ + आ = आ |
| नयनाभिराम | नयन + अभिराम | नयन का अंत = अ, अभिराम का आरम्भ = अ → अ + अ = आ |
| हिमांशु | हिम + अंशु | हिम का अंत = अ, अंशु का आरम्भ = अ → अ + अ = आ |
| वीरांगना | वीर + अंगना | वीर का अंत = अ, अंगना का आरम्भ = अ → अ + अ = आ |
| वार्तालाप | वार्ता + आलाप | वार्ता का अंत = आ, आलाप का आरम्भ = आ → आ + आ = आ |
| परमाणु | परम + अणु | परम का अंत = अ, अणु का आरम्भ = अ → अ + अ = आ |
| रेखांश | रेखा + अंश | रेखा का अंत = आ, अंश का आरम्भ = अ → आ + अ = आ |
| पितृण | पितृ + ऋण | पितृ का अंत = ऋ, ऋण का आरम्भ = ऋ → ऋ + ऋ = ऋ |
| सीमान्त | सीम + अन्त | सीम का अंत = अ, अन्त का आरम्भ = अ → अ + अ = आ |
| चराचर | चर + अचर | चर का अंत = अ, अचर का आरम्भ = अ → अ + अ = आ |
| रत्नावली | रत्न + आवली | रत्न का अंत = अ, आवली का आरम्भ = आ → अ + आ = आ |
| गीतावली | गीत + आवली | गीत का अंत = अ, आवली का आरम्भ = आ → अ + आ = आ |
| कुशासन | कुश + आसन | कुश का अंत = अ, आसन का आरम्भ = आ → अ + आ = आ |
| शब्द | विच्छेद | विश्लेषण |
|---|---|---|
| कवीन्द्र | कवि + इन्द्र | कवि का अंत = इ, इन्द्र का आरम्भ = इ → इ + इ = ई |
| कवीश | कवि + ईश | कवि का अंत = इ, ईश का आरम्भ = ई → इ + ई = ई |
| रवीन्द्र | रवि + इन्द्र | रवि का अंत = इ, इन्द्र का आरम्भ = इ → इ + इ = ई |
| गिरीश | गिरि + ईश | गिरि का अंत = इ, ईश का आरम्भ = ई → इ + ई = ई |
| परीक्षा | परि + ईक्षा | परि का अंत = इ, ईक्षा का आरम्भ = ई → इ + ई = ई |
| अतीन्द्रिय | अति + इन्द्रिय | अति का अंत = इ, इन्द्रिय का आरम्भ = इ → इ + इ = ई |
| महतीच्छा | महती + इच्छा | महती का अंत = ई, इच्छा का आरम्भ = इ → ई + इ = ई |
| फणीश्वर | फणी + ईश्वर | फणी का अंत = ई, ईश्वर का आरम्भ = ई → ई + ई = ई |
| क्षितीश | क्षिति + ईश | क्षिति का अंत = इ, ईश का आरम्भ = ई → इ + ई = ई |
| श्रीश | श्री + ईश | श्री का अंत = ई, ईश का आरम्भ = ई → ई + ई = ई |
| नारीश | नारी + ईश | नारी का अंत = ई, ईश का आरम्भ = ई → ई + ई = ई |
| फणीश | फणी + ईश | फणी का अंत = ई, ईश का आरम्भ = ई → ई + ई = ई |
| परीक्षण | परि + ईक्षण | परि का अंत = इ, ईक्षण का आरम्भ = ई → इ + ई = ई |
| शब्द | विच्छेद | विश्लेषण |
|---|---|---|
| भानूदय | भानु + उदय | भानु का अंत = उ, उदय का आरम्भ = उ → उ + उ = ऊ |
| धातूष्मा | धातु + ऊष्मा | धातु का अंत = उ, ऊष्मा का आरम्भ = ऊ → उ + ऊ = ऊ |
| सिंधूर्मि | सिंधु + ऊर्मि | सिंधु का अंत = उ, ऊर्मि का आरम्भ = ऊ → उ + ऊ = ऊ |
| लघूत्तर | लघु + उत्तर | लघु का अंत = उ, उत्तर का आरम्भ = उ → उ + उ = ऊ |
| भूर्जा | भू + ऊर्जा | भू का अंत = ऊ, ऊर्जा का आरम्भ = ऊ → ऊ + ऊ = ऊ |
| भूद्धार | भू + उद्धार | भू का अंत = ऊ, उद्धार का आरम्भ = उ → ऊ + उ = ऊ |
| वधूक्ति | वधू + उक्ति | वधू का अंत = ऊ, उक्ति का आरम्भ = उ → ऊ + उ = ऊ |
| मृत्यूपरांत | मृत्यु + उपरांत | मृत्यु का अंत = उ, उपरांत का आरम्भ = उ → उ + उ = ऊ |
| चमूत्तम | चमू + उत्तम | चमू का अंत = ऊ, उत्तम का आरम्भ = उ → ऊ + उ = ऊ |
| सरयूर्मि | सरयू + ऊर्मि | सरयू का अंत = ऊ, ऊर्मि का आरम्भ = ऊ → ऊ + ऊ = ऊ |
| चमूर्जा | चमू + ऊर्जा | चमू का अंत = ऊ, ऊर्जा का आरम्भ = ऊ → ऊ + ऊ = ऊ |
| सूक्ति | सु + उक्ति | सु का अंत = उ, उक्ति का आरम्भ = उ → उ + उ = ऊ |
| बहुद्देश्यीय | बहु + उद्देशीय | बहु का अंत = उ, उद्देशीय का आरम्भ = उ → उ + उ = ऊ |
| स्वयंभूदय | स्वयंभू + उदय | स्वयंभू का अंत = ऊ, उदय का आरम्भ = उ → ऊ + उ = ऊ |
नोट: वधूल्लास → वधू + उल्लास — यह व्यंजन संधि का अपवाद/नोट है।
गुण स्वर संधि
यदि अ/आ का योग इ/ई, उ/ऊ, ऋ से हो तो वे क्रमशः ए, ओ व अर् में बदल जाते हैं।
| शब्द | विच्छेद | विश्लेषण |
|---|---|---|
| नरेन्द्र | नर + इन्द्र | नर का अंत = अ, इन्द्र का आरम्भ = इ → अ + इ = ए |
| नरेश | नर + ईश | नर का अंत = अ, ईश का आरम्भ = ई → अ + ई = ए |
| सोमेश्वर | सोम + ईश्वर | सोम का अंत = अ, ईश्वर का आरम्भ = ई → अ + ई = ए |
| ज्ञानेश | ज्ञान + ईश | ज्ञान का अंत = अ, ईश का आरम्भ = ई → अ + ई = ए |
| राकेश | राका + ईश | राका का अंत = आ, ईश का आरम्भ = ई → आ + ई = ए |
| परेश | पर + ईश | पर का अंत = अ, ईश का आरम्भ = ई → अ + ई = ए |
| शब्द | विच्छेद |
|---|---|
| परोपकार | पर + उपकार |
| सूर्योदय | सूर्य + उदय |
| महोत्सव | महा + उत्सव |
| गंगोर्मि | गंगा + ऊर्मि |
| नवोढा | नव + ऊढा |
| वार्षिकोत्सव | वार्षिक + उत्सव |
| समुद्रोर्मि | समुद्र + ऊर्मि |
| सोदाहरण | स + उदाहरण |
| सांगोपांग | स + अंग + उपांग |
| प्राप्तोदक | प्राप्त + उदक |
नोट: यथोचित → यथा + उचित (गुण संधि) — यथौचित्य → यथा + औचित्य (वृद्धि संधि) से अलग है।
| शब्द | विच्छेद | विश्लेषण |
|---|---|---|
| महर्षि | महा + ऋषि | महा का अंत = आ, ऋषि का आरम्भ = ऋ → आ + ऋ = अर् |
| राजर्षि | राजा + ऋषि | राजा का अंत = आ, ऋषि का आरम्भ = ऋ → आ + ऋ = अर् |
| देवर्षि | देव + ऋषि | देव का अंत = अ, ऋषि का आरम्भ = ऋ → अ + ऋ = अर् |
| ब्रह्मर्षि | ब्रह्म + ऋषि | ब्रह्म का अंत = अ, ऋषि का आरम्भ = ऋ → अ + ऋ = अर् |
| ग्रीष्मर्तु | ग्रीष्म + ऋतु | ग्रीष्म का अंत = अ, ऋतु का आरम्भ = ऋ → अ + ऋ = अर् |
| वर्षर्तु | वर्षा + ऋतु | वर्षा का अंत = आ, ऋतु का आरम्भ = ऋ → आ + ऋ = अर् |
| शीतर्तु | शीत + ऋतु | शीत का अंत = अ, ऋतु का आरम्भ = ऋ → अ + ऋ = अर् |
| कण्वर्षि | कण्व + ऋषि | कण्व का अंत = अ, ऋषि का आरम्भ = ऋ → अ + ऋ = अर् |
| उत्तमर्ण | उत्तम + ऋण | उत्तम का अंत = अ, ऋण का आरम्भ = ऋ → अ + ऋ = अर् |
| महर्ण | महा + ऋण | महा का अंत = आ, ऋण का आरम्भ = ऋ → आ + ऋ = अर् |
वृद्धि संधि
यदि अ/आ के साथ ए/ऐ व ओ/औ का योग हो तो यह क्रमशः ऐ तथा औ में बदल जाते हैं।
| शब्द | विच्छेद | विश्लेषण |
|---|---|---|
| एकैक | एक + एक | एक का अंत = अ, एक का आरम्भ = ए → अ + ए = ऐ |
| मतैक्य | मत + ऐक्य | मत का अंत = अ, ऐक्य का आरम्भ = ऐ → अ + ऐ = ऐ |
| धनैश्वर्य | धन + ऐश्वर्य | धन का अंत = अ, ऐश्वर्य का आरम्भ = ऐ → अ + ऐ = ऐ |
| तथैव | तथा + एव | तथा का अंत = आ, एव का आरम्भ = ए → आ + ए = ऐ |
| महैश्वर्य | महा + ऐश्वर्य | महा का अंत = आ, ऐश्वर्य का आरम्भ = ऐ → आ + ऐ = ऐ |
| गंगैश्वर्य | गंगा + ऐश्वर्य | गंगा का अंत = आ, ऐश्वर्य का आरम्भ = ऐ → आ + ऐ = ऐ |
| लोकैश्वर्य | लोक + ऐश्वर्य | लोक का अंत = अ, ऐश्वर्य का आरम्भ = ऐ → अ + ऐ = ऐ |
| सहसैव | सहसा + एव | सहसा का अंत = आ, एव का आरम्भ = ए → आ + ए = ऐ |
| पुत्रैषणा | पुत्र + एषणा | पुत्र का अंत = अ, एषणा का आरम्भ = ए → अ + ए = ऐ |
| शब्द | विच्छेद |
|---|---|
| प्रौद्योगिक | प्र + औद्योगिक |
| पूर्वोपनिवेशिक | पूर्व + औपनिवेशिक |
| महौषधि | महा + औषधि |
| महौदार्य | महा + औदार्य |
| महौत्सुक्य | महा + औत्सुक्य |
| यथौचित्य | यथा + औचित्य |
| जलौक | जल + ओक |
यण संधि
यदि इ/ई, उ/ऊ व ऋ के साथ असमान स्वर का योग हो तो इ/ई → य्, उ/ऊ → व्, ऋ → र् में बदल जाते हैं तथा असमान स्वर की मात्रा लगा दी जाती है।
- य, व, र के आगे आधा वर्ण — यण संधि
- त्र = त् + र (ऋ → र् वाले शब्दों में)
| शब्द | विच्छेद | विश्लेषण |
|---|---|---|
| अत्याचार | अति + आचार | अति का अंत = इ, आचार का आरम्भ = आ → इ → य् → अत्याचार |
| अध्यात्म | अधि + आत्म | अधि का अंत = इ, आत्म का आरम्भ = आ → इ → य् → अध्यात्म |
| अत्यधिक | अति + अधिक | अति का अंत = इ, अधिक का आरम्भ = अ → इ → य् → अत्यधिक |
| यद्यपि | यदि + अपि | यदि का अंत = इ, अपि का आरम्भ = अ → इ → य् → यद्यपि |
| प्रत्युपकार | प्रति + उपकार | प्रति का अंत = इ, उपकार का आरम्भ = उ → इ → य् → प्रत्युपकार |
| न्यून | नि + ऊन | नि का अंत = इ, ऊन का आरम्भ = ऊ → इ → य् → न्यून |
| व्यूह | वि + ऊह | वि का अंत = इ, ऊह का आरम्भ = ऊ → इ → य् → व्यूह |
| प्रत्येक | प्रति + एक | प्रति का अंत = इ, एक का आरम्भ = ए → इ → य् → प्रत्येक |
| देव्यागमन | देवी + आगमन | देवी का अंत = ई, आगमन का आरम्भ = आ → ई → य् → देव्यागमन |
| व्यंजन | वि + अंजन | वि का अंत = इ, अंजन का आरम्भ = अ → इ → य् → व्यंजन |
| व्यायाम | वि + आयाम | वि का अंत = इ, आयाम का आरम्भ = आ → इ → य् → व्यायाम |
| पर्यटन | परि + अटन | परि का अंत = इ, अटन का आरम्भ = अ → इ → य् → पर्यटन |
| अध्येषणा | अधि + एषणा | अधि का अंत = इ, एषणा का आरम्भ = ए → इ → य् → अध्येषणा |
| व्याधि | वि + आधि | वि का अंत = इ, आधि का आरम्भ = आ → इ → य् → व्याधि |
| शब्द | विच्छेद | विश्लेषण |
|---|---|---|
| मन्वन्तर | मनु + अन्तर | मनु का अंत = उ, अन्तर का आरम्भ = अ → उ → व् → मन्वन्तर |
| स्वच्छ | सु + अच्छ | सु का अंत = उ, अच्छ का आरम्भ = अ → उ → व् → स्वच्छ |
| गुर्वासन | गुरु + आसन | गुरु का अंत = उ, आसन का आरम्भ = आ → उ → व् → गुर्वासन |
| वध्वाचरण | वधू + आचरण | वधू का अंत = ऊ, आचरण का आरम्भ = आ → ऊ → व् → वध्वाचरण |
| स्वल्प | सु + अल्प | सु का अंत = उ, अल्प का आरम्भ = अ → उ → व् → स्वल्प |
| अन्वय | अनु + अय | अनु का अंत = उ, अय का आरम्भ = अ → उ → व् → अन्वय |
| स्वागत | सु + आगत | सु का अंत = उ, आगत का आरम्भ = आ → उ → व् → स्वागत |
| अन्वित | अनु + इत | अनु का अंत = उ, इत का आरम्भ = इ → उ → व् → अन्वित |
| अन्वीक्षण | अनु + ईक्षण | अनु का अंत = उ, ईक्षण का आरम्भ = ई → उ → व् → अन्वीक्षण |
| धात्विक | धातु + इक | धातु का अंत = उ, इक का आरम्भ = इ → उ → व् → धात्विक |
- त्र = त् + र — यह ऋ → र् की पहचान है।
| शब्द | विच्छेद | विश्लेषण |
|---|---|---|
| मात्रादेश | मातृ + आदेश | मातृ का अंत = ऋ, आदेश का आरम्भ = आ → ऋ → र् → मात्र + आदेश |
| पित्राज्ञा | पितृ + आज्ञा | पितृ का अंत = ऋ, आज्ञा का आरम्भ = आ → ऋ → र् → पित्र + आज्ञा |
| पितृच्छा | पितृ + इच्छा | पितृ का अंत = ऋ, इच्छा का आरम्भ = इ → ऋ → र् → पित्र + इच्छा |
| पित्रर्थ | पितृ + अर्थ | पितृ का अंत = ऋ, अर्थ का आरम्भ = अ → ऋ → र् → पित्रर्थ |
| मात्रर्थ | मातृ + अर्थ | मातृ का अंत = ऋ, अर्थ का आरम्भ = अ → ऋ → र् → मात्रर्थ |
| मात्रानन्द | मातृ + आनन्द | मातृ का अंत = ऋ, आनन्द का आरम्भ = आ → ऋ → र् → मात्रानन्द |
| मात्रुपदेश | मातृ + उपदेश | मातृ का अंत = ऋ, उपदेश का आरम्भ = उ → ऋ → र् → मात्र + उपदेश = मात्रुपदेश |
| पित्रनुमति | पितृ + अनुमति | पितृ का अंत = ऋ, अनुमति का आरम्भ = अ → ऋ → र् → पित्रनुमति |
अयादि संधि
ए/ऐ/ओ/औ स्वरों का मेल किसी भी अन्य स्वर से हो तो उनका रूप बदलता है।
- यण: य/व/र से पहले आधा वर्ण (जैसे: अत्याचार)
- अयादि: य/व से पहले पूर्ण वर्ण — अ/आ स्वर के साथ (जैसे: नयन, गयन)
आय् → य् से पूर्व वर्ण पर 'ऐ' मात्रा + य पर उपस्थित स्वर के साथ दूसरा वर्ण
अय् → य् से पूर्व वर्ण पर 'ए' मात्रा + य पर उपस्थित स्वर के साथ दूसरा वर्ण
अव् → व से पूर्व वर्ण पर 'ओ' मात्रा + व पर उपस्थित स्वर के साथ दूसरा वर्ण
आव् → व से पूर्व वर्ण पर 'औ' मात्रा + व पर उपस्थित स्वर के साथ दूसरा वर्ण
| शब्द | विच्छेद | विश्लेषण |
|---|---|---|
| नयन | ने + अन | ने का स्वर = ए + अन का आरम्भ = अ → ए → अय् → नयन |
| उदय | उदे + अ | उदे का स्वर = ए + अ → ए → अय् → उदय |
| संचय | संचे + अ | संचे का स्वर = ए + अ → ए → अय् → संचय (या व्यंजन संधि: सम् + चय) |
| विजयिनी | विजे + इनी | विजे का स्वर = ए + इनी का आरम्भ = इ → ए → अय् → विजयिनी |
| जय | जे + अ | जे का स्वर = ए + अ → ए → अय् → जय ★ Imp |
| लय | ले + अ | ले का स्वर = ए + अ → ए → अय् → लय ★ Imp |
| विलय | विले + अ | विले का स्वर = ए + अ → ए → अय् → विलय |
| प्रलय | प्रले + अ | प्रले का स्वर = ए + अ → ए → अय् → प्रलय |
| शब्द | विच्छेद | विश्लेषण |
|---|---|---|
| गायक | गै + अक | गै का स्वर = ऐ + अक का आरम्भ = अ → ऐ → आय् → गायक |
| गायिका | गै + इका | गै का स्वर = ऐ + इका का आरम्भ = इ → ऐ → आय् → गायिका |
| गायन | गै + अन | गै का स्वर = ऐ + अन का आरम्भ = अ → ऐ → आय् → गायन |
| विधायिका | विधै + इका | विधै का स्वर = ऐ + इका का आरम्भ = इ → ऐ → आय् → विधायिका |
Imp: रामायण → रामै + अण (अयादि) — परंतु प्रथम प्राथमिकता राम + अयन (दीर्घ संधि) है।
| शब्द | विच्छेद | विश्लेषण |
|---|---|---|
| पवन | पो + अन | पो का स्वर = ओ + अन का आरम्भ = अ → ओ → अव् → पवन |
| पवित्र | पो + इत्र | पो का स्वर = ओ + इत्र का आरम्भ = इ → ओ → अव् → पवित्र |
| भवन | भो + अन | भो का स्वर = ओ + अन का आरम्भ = अ → ओ → अव् → भवन |
| प्रसव | प्रसो + अ | प्रसो का स्वर = ओ + अ → ओ → अव् → प्रसव |
| शब्द | विच्छेद | विश्लेषण |
|---|---|---|
| पावन | पौ + अन | पौ का स्वर = औ + अन का आरम्भ = अ → औ → आव् → पावन |
| प्रसाविका | प्रसौ + इका | प्रसौ का स्वर = औ + इका का आरम्भ = इ → औ → आव् → प्रसाविका |
| भावुक | भौ + उक | भौ का स्वर = औ + उक का आरम्भ = उ → औ → आव् → भावुक |
| भावना | भौ + अना | भौ का स्वर = औ + अना का आरम्भ = अ → औ → आव् → भावना |
| धावक | धौ + अक | धौ का स्वर = औ + अक का आरम्भ = अ → औ → आव् → धावक |
अपवाद एवं विशेष नियम
नीचे दिए गए शब्दों का विच्छेद गुण संधि से होता है परंतु संधि वृद्धि मानी जाती है।
(i) राम + अयन → दीर्घ संधि (प्रथम प्राथमिकता ✔)
(ii) रामै + अन → अयादि संधि
(iii) न का ण बनना → व्यंजन संधि
नियम: 'न' वर्ण के बाद बचे हुए शब्द में 'ऋ/र/ष' हो तो न → ण में बदल जाता है।
(राम + अयन → बचे शब्द में 'र' उपस्थित → 'न' → 'ण' → रामायण)
यदि किसी शब्द के अंत में अक्ष, रात्र, निश, इच्छा, अष्ट हो तो वे क्रमशः अक्षि, रात्रि, निशि, इच्छ, अष्टन् में बदल जाते हैं।
| शब्द | विच्छेद | परिवर्तन | संधि प्रकार |
|---|---|---|---|
| प्रत्यक्ष | प्रति + अक्षि | अक्ष → अक्षि | यण संधि |
| नवरात्र | नव + रात्रि | रात्र → रात्रि | दीर्घ संधि |
| अहर्निश | अहर् + निशि | निश → निशि | |
| यथेच्छ | यथा + इच्छा | इच्छा → इच्छ (अंतिम आ का लोप) | गुण संधि |
| स्वच्छ | सु + अच्छ | यण संधि |
| शब्द | विच्छेद | नोट |
|---|---|---|
| विश्वामित्र | विश्व + मित्र | विश्व + अमित्र (दीर्घ संधि ❌) → स्वर का दीर्घीकरण ✔ |
| मूसलाधार | मूसल + धार | स्वर का दीर्घीकरण |
| प्रभुदयाल | प्रभु + दयाल | |
| दीनानाथ | दीन + नाथ |
व्यंजन संधि
व्यंजन संधि नोट्स
इस खंड में व्यंजन संधि के सभी नियम, उपभेद और उदाहरण जल्द जोड़े जाएँगे — जब नोट्स उपलब्ध हों।
जब स्वर + व्यंजन, व्यंजन + स्वर या व्यंजन + व्यंजन का मेल होने पर परिवर्तन होता है — वह व्यंजन संधि कहलाती है।
उदाहरण: सम् + धि → संधि / सन्धि (जिसका अर्थ यह भी बताता है कि 'संधि' शब्द स्वयं व्यंजन संधि से बना है।)
विसर्ग संधि
विसर्ग संधि नोट्स
इस खंड में विसर्ग संधि के सभी नियम, उपभेद और उदाहरण जल्द जोड़े जाएँगे — जब नोट्स उपलब्ध हों।
जब विसर्ग (:) का स्वर या व्यंजन से मेल होने पर परिवर्तन होता है — वह विसर्ग संधि कहलाती है।
उदाहरण: मनः + रथ → मनोरथ, निः + पाप → निष्पाप