पुर्तगाली: भारत में पहला यूरोपीय अध्याय
1498 से 1739 तक — मसालों की खोज से वास्तविक उपनिवेश तक, और फिर डच-अंग्रेज़ों के हाथों धीमे पतन तक का पूरा इतिहास, परीक्षा-दृष्टि से।
पृष्ठभूमि और समुद्री मार्गों की खोज
कारण
1453 ई. में ऑटोमन तुर्कों ने कुस्तुनतुनिया (Constantinople) पर अधिकार कर लिया और यूरोप से भारत आने वाले स्थल मार्ग को बंद कर दिया। इस कारण नए समुद्री मार्गों की खोज अनिवार्य हो गई।PYQ
कोलंबस (1492)
स्पेन का नाविक क्रिस्टोफर कोलंबस भारत की खोज में निकला, लेकिन रास्ता भटक कर उसने अमेरिका की खोज कर दी।
वास्कोडिगामा का आगमन
प्रारंभिक अभियान
- वास्कोडिगामा 1497 में पुर्तगाल से निकला और 'आशा अंतरीप' (Cape of Good Hope) होते हुए भारत की ओर बढ़ा।
- रास्ते में उसे अब्दुल मजीद नामक गुजराती नाविक मिला, जिसकी सहायता से 17 मई 1498 को वह कालीकट के कप्पाडाउ (Kappad) बंदरगाह पहुँचा।PYQ
- कालीकट के हिंदू शासक जमोरिन (Zamorin) ने उसका स्वागत किया।
- वापसी में ले गए मसालों (विशेषकर काली मिर्च) को 60 गुना मुनाफे पर बेचा गया।
वास्कोडिगामा की 3 भारत यात्राएं
- 1498 — पहली बार खोज करते हुए।
- 1502 — दूसरी बार व्यापारी के रूप में।
- 1524 — पुर्तगाली वायसराय के रूप में (इसी वर्ष कोचीन में मृत्यु)।
इस्तादो दा इंडिया व दूसरा अभियान
- पुर्तगाली व्यापारिक कंपनी को 'इस्तादो दा इंडिया' (स्थापना 1498) नाम दिया गया।
- पेड्रो अल्वारेस कैब्राल के नेतृत्व में 1500 ई. में दूसरा अभियान आया, जिसने अरबों को पराजित किया और कोचीन-कन्नूर के शासकों से मित्रता की।
- 1503 (कोचीन) — पहली पुर्तगाली फैक्ट्री (अल्बुकर्क का सैन्य योगदान)।
- 1505 (कन्नूर) — दूसरी फैक्ट्री/किला, फ्रांसिस्को डी अल्मेडा द्वारा।
प्रमुख वायसराय — फ्रांसिस्को डी अल्मेडा
अल्मेडा (1505–1509) — प्रथम वायसराय
भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय
इन्होंने ब्लू वाटर पॉलिसी अपनाई — भूमि विस्तार के बजाय हिंद महासागर के व्यापारिक मार्गों पर एकाधिकार स्थापित करना इसका उद्देश्य था।दीव का युद्ध (1509) — गुजरात, मिस्र (मामलुक) व तुर्कों (ऑटोमन) की संयुक्त मुस्लिम नौसेना को पराजित कर समुद्र पर वर्चस्व स्थापित किया।PYQ
अफोंसो डी अल्बुकर्क
द्वितीय वायसराय (1509–1515)
इसे भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का 'वास्तविक संस्थापक' (Real Founder) माना जाता है।PYQ
साम्राज्य विस्तार
- 1510 — गोवा (बीजापुर के यूसुफ आदिल शाह को हराकर — पहला क्षेत्रीय अधिग्रहण)
- 1511 — मलक्का (दक्षिण-पूर्व एशिया का व्यापारिक केंद्र)
- 1515 — हॉर्मुज (फारस की खाड़ी का बंदरगाह)
स्थायी राज्य की नीतियां
- विवाह नीति — सैनिकों का भारतीय महिलाओं से विवाह
- सती प्रथा पर रोक — इसलिए 'राजा राममोहन राय का पूर्वगामी' कहा जाता हैPYQ
- सेना भर्ती — भारतीय (विशेषकर खत्री) सैनिक शामिल किए
नीनो डी कुन्हा व मार्टिन डिसूजा
| वायसराय | काल | प्रमुख कार्य |
|---|---|---|
| नीनो डी कुन्हा | 1529–1538 |
|
| मार्टिन अफोंसो डिसूजा | 1542–1545 | इनके समय संत फ्रांसिस्को जेवियर (St. Francis Xavier) भारत आए — ईसाई धर्म प्रचार हेतु।PYQ |
हुगली का पतन (1632)
- पुर्तगालियों ने बंगाल में समुद्री लूटपाट, जबरन धर्म परिवर्तन व दास व्यापार शुरू कर दिया था।
- क्रोधित मुग़ल बादशाह शाहजहाँ के आदेश पर बंगाल सूबेदार कासिम खान ने 1632 में हुगली पर हमला किया।
- पुर्तगालियों को वहाँ से खदेड़ दिया गया और हजारों को बंदी बनाया गया।
कार्टाज़-आर्मेडा-काफिला व्यवस्था
पुर्तगाली खुद को 'सागर के स्वामी' (Lords of the Sea) कहते थे और हिंद महासागर पर एकाधिकार बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था लागू की।
कार्टाज़ (Permit)
किसी भी भारतीय/अरबी जहाज को अरब सागर में व्यापार हेतु पुर्तगालियों से पास लेना अनिवार्य था। यहाँ तक कि मुग़ल बादशाह अकबर को भी अपने जहाज भेजने हेतु कार्टाज़ लेना पड़ता था।PYQ
व्यापारिक पाबंदियां
गैर-पुर्तगाली जहाजों को समुद्र में काली मिर्च और गोला-बारूद ले जाने की सख्त मनाही थी।
काफिला (Cafila)
स्थानीय व्यापारिक जहाजों को समूह (काफिले) में चलना होता था।
आर्मेडा (Armada)
सशस्त्र समुद्री बेड़ा काफिले के साथ चलता था — असली मकसद नियम-उल्लंघन व बिना कार्टाज़ व्यापार पर नज़र रखना था।
पुर्तगालियों के पतन के कारण
1. धार्मिक असहिष्णुता — गोवा इंक्विजिशन
1560 में गोवा में इंक्विजिशन (धार्मिक न्यायालय) की स्थापना हुई — ईसाई बनने के बाद भी छुपकर हिंदू/इस्लाम धर्म पालन करने वालों को कड़ी सज़ा देने हेतु। जबरन धर्म परिवर्तन व मंदिर तोड़ने से जनता का विश्वास खो दिया।
2. विजयनगर साम्राज्य का पतन (1565)
- पुर्तगालियों का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार विजयनगर था (अरबी घोड़ों का व्यापार)।
- तालीकोटा के युद्ध (1565) में विजयनगर के पतन से सबसे बड़ा बाज़ार खत्म हो गया।
3. ब्राज़ील की खोज (1500)
कैब्राल द्वारा ब्राज़ील की खोज के बाद पुर्तगाल का ध्यान भारत से हटकर ब्राज़ील की तरफ चला गया।
4. स्पेन-पुर्तगाल विलय (1580–1640)
पुर्तगाल पर स्पेन का कब्ज़ा रहा, जिससे स्पेन के दुश्मन (डच व अंग्रेज़) पुर्तगाल के भी दुश्मन बन गए और भारत में हमले तेज़ हुए।PYQ
5. प्रशासनिक भ्रष्टाचार व संसाधनों की कमी
पुर्तगाल एक छोटा देश था जिसके पास साम्राज्य संभालने हेतु धन व सैन्य बल की भारी कमी थी; अधिकारी निजी व्यापार में लगे थे।
पतन की समय-रेखा
पुर्तगाल-स्पेन विलय (Iberian Union)
फिलिप द्वितीय का अधिकार — 1640 तक चला। ब्रिटेन व हॉलैंड स्वाभाविक दुश्मन बन गए।
'अजेय बेड़े' (Spanish Armada) की हार
ब्रिटिश नौसेना ने हराया — पुर्तगाली नौसैनिक शक्ति को गहरा धक्का।
स्वाली का युद्ध (Battle of Swally)
कैप्टन थॉमस बेस्ट ने सूरत के पास पुर्तगाली नौसेना को हराया — अंग्रेज़ों का प्रभाव बढ़ा।PYQ
मैड्रिड की संधि
इंग्लैंड-स्पेन शांति संधि; आगे 1635 में गोवा समझौता।
हुगली का पतन
कासिम खान ने शाहजहाँ के आदेश पर हुगली पर हमला किया।
स्पेन से पुर्तगाल की आज़ादी
आज़ाद तो हुआ, पर 60 वर्षों का नुकसान भर नहीं सका।
मलक्का पर डचों का कब्ज़ा
हॉलैंड ने प्रमुख व्यापारिक केंद्र छीना।
बंबई का दहेज़
राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रैगेंज़ा का विवाह चार्ल्स द्वितीय से; बंबई द्वीप अंग्रेज़ों को दहेज़ में।PYQ
कोचीन पर डचों का कब्ज़ा
मालाबार तट पर पुर्तगाली वर्चस्व पूरी तरह खत्म।
मराठों से हार
चिमाजी अप्पा (बाजीराव प्रथम के भाई) ने साल्सेट व बेसिन (वसई) छीना।PYQ
भारत पर पुर्तगालियों का प्रभाव
कृषि व नई फसलें
तंबाकू, आलू, पपीता, अनानास, मक्का, बादाम, संतरा, लाल मिर्च, लीची, काजू, टमाटर, मूंगफली, शकरकंद, अमरूद।
'अल्फांसो आम' पुर्तगालियों की देन है — नाम वायसराय अफोंसो डी अल्बुकर्क के नाम पर रखा गया।PYQ
तकनीक व प्रिंटिंग प्रेस
1556 — गोवा में पहली प्रिंटिंग प्रेस; 1557 पहली किताब; 1563 में गार्सिया दा ओर्टा की भारतीय जड़ी-बूटियों पर पहली वैज्ञानिक किताब।
गैलियन शैली जहाज निर्माण, यांत्रिक घड़ियाँ व मानचित्र कला (कंपास) का प्रसार।
स्थापत्य व कला
'इंडो-गोथिक' शैली (ऊँचे मेहराब, बड़ी खिड़कियां) की शुरुआत; पश्चिमी तट पर मिश्रित संस्कृति (Luso-Indian Culture)।
व्यापारिक प्रभाव
भारत-जापान सीधा समुद्री व्यापार मार्ग शुरू किया (सूती वस्त्र ↔ तांबा-चांदी)। 'क्रूज़ाडो' (Cruzado) सिक्के चलाए।
सेल्फ-टेस्ट मास्टर टेबल
| वर्ष | घटना | महत्व |
|---|---|---|
| 1453 | ऑटोमन तुर्कों का कुस्तुनतुनिया पर अधिकार | स्थल मार्ग बंद — समुद्री मार्ग खोज अनिवार्य |
| 1492 | कोलंबस की यात्रा | भारत खोजते हुए अमेरिका की खोज |
| 1498 | वास्कोडिगामा का कालीकट आगमन | कप्पाडाउ बंदरगाह, जमोरिन का स्वागत |
| 1498 | 'इस्तादो दा इंडिया' की स्थापना | पुर्तगाली व्यापारिक कंपनी |
| 1500 | कैब्राल का दूसरा अभियान | अरबों को पराजित, कोचीन-कन्नूर से मित्रता; ब्राज़ील की खोज |
| 1502 | वास्कोडिगामा की दूसरी यात्रा | व्यापारी के रूप में भारत आगमन |
| 1503 | कोचीन में पहली फैक्ट्री | अल्बुकर्क का सैन्य योगदान |
| 1505 | कन्नूर में दूसरी फैक्ट्री/किला | फ्रांसिस्को डी अल्मेडा द्वारा स्थापित |
| 1505 | फ्रांसिस्को डी अल्मेडा — प्रथम वायसराय | ब्लू वाटर पॉलिसी (1505–1509) |
| 1509 | दीव का युद्ध | गुजरात-मिस्र-तुर्क संयुक्त मुस्लिम नौसेना पराजित |
| 1509 | अफोंसो डी अल्बुकर्क — द्वितीय वायसराय | पुर्तगाली साम्राज्य का 'वास्तविक संस्थापक' (1509–1515) |
| 1510 | गोवा पर अधिकार | यूसुफ आदिल शाह को हराकर — पहला क्षेत्रीय अधिग्रहण |
| 1511 | मलक्का पर अधिकार | दक्षिण-पूर्व एशिया का व्यापारिक केंद्र |
| 1515 | हॉर्मुज पर अधिकार | फारस की खाड़ी का रणनीतिक बंदरगाह |
| 1524 | वास्कोडिगामा की तीसरी यात्रा | वायसराय के रूप में; कोचीन में मृत्यु |
| 1529 | नीनो डी कुन्हा वायसराय बना | कार्यकाल 1529–1538 |
| 1530 | राजधानी कोचीन से गोवा स्थानांतरित | नीनो डी कुन्हा द्वारा |
| 1530 | चटगांव व सतगांव में कोठियां | बंगाल के महमूद शाह से अनुमति लेकर |
| 1534 | बेसिन पर अधिकार | बहादुर शाह की मदद के बहाने |
| 1534-35 | हुगली में बस्ती | नीनो डी कुन्हा द्वारा |
| 1535 | दीव पर अधिकार | बहादुर शाह के मुग़ल हुमायूँ से डर का फायदा उठाकर |
| 1542 | मार्टिन अफोंसो डिसूजा वायसराय बना | कार्यकाल 1542–1545; संत फ्रांसिस्को जेवियर का आगमन |
| 1556 | गोवा में प्रिंटिंग प्रेस | भारत की पहली प्रिंटिंग प्रेस |
| 1557 | पहली किताब छपी | गोवा प्रिंटिंग प्रेस से |
| 1560 | गोवा इंक्विजिशन स्थापना | धार्मिक असहिष्णुता का प्रतीक |
| 1563 | गार्सिया दा ओर्टा की किताब छपी | भारतीय जड़ी-बूटियों पर पहली वैज्ञानिक किताब |
| 1565 | तालीकोटा युद्ध | विजयनगर पतन — सबसे बड़ा बाज़ार खत्म |
| 1580 | पुर्तगाल-स्पेन विलय (Iberian Union) | फिलिप द्वितीय का अधिकार; 1640 तक चला |
| 1588 | 'अजेय बेड़े' (Spanish Armada) की हार | ब्रिटिश नौसेना से हार — नौसैनिक शक्ति को धक्का |
| 1612 | स्वाली का युद्ध | थॉमस बेस्ट की जीत — अंग्रेज़ प्रभाव शुरू |
| 1630 | मैड्रिड की संधि | इंग्लैंड-स्पेन शांति संधि |
| 1632 | हुगली का पतन | कासिम खान का आक्रमण (शाहजहाँ के आदेश पर) |
| 1635 | गोवा समझौता | मैड्रिड संधि के बाद |
| 1640 | स्पेन से पुर्तगाल की आज़ादी | 60 वर्षों का नुकसान भर नहीं सका |
| 1641 | मलक्का पर डचों का कब्ज़ा | हॉलैंड ने प्रमुख व्यापारिक केंद्र छीना |
| 1661 | बंबई का दहेज़ | कैथरीन-चार्ल्स द्वितीय विवाह; बंबई द्वीप अंग्रेज़ों को |
| 1663 | कोचीन पर डच कब्ज़ा | मालाबार में वर्चस्व समाप्त |
| 1739 | मराठों से हार | चिमाजी अप्पा — साल्सेट, बेसिन (वसई) छीना |