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यूरोपियों का भारत आगमन · भाग 1

पुर्तगाली: भारत में पहला यूरोपीय अध्याय

1498 से 1739 तक — मसालों की खोज से वास्तविक उपनिवेश तक, और फिर डच-अंग्रेज़ों के हाथों धीमे पतन तक का पूरा इतिहास, परीक्षा-दृष्टि से।

1498
कालीकट आगमन
1510
गोवा अधिग्रहण
1961
गोवा मुक्ति
7
प्रमुख वायसराय
01

पृष्ठभूमि और समुद्री मार्गों की खोज

कारण

1453 ई. में ऑटोमन तुर्कों ने कुस्तुनतुनिया (Constantinople) पर अधिकार कर लिया और यूरोप से भारत आने वाले स्थल मार्ग को बंद कर दिया। इस कारण नए समुद्री मार्गों की खोज अनिवार्य हो गई।PYQ

कोलंबस (1492)

स्पेन का नाविक क्रिस्टोफर कोलंबस भारत की खोज में निकला, लेकिन रास्ता भटक कर उसने अमेरिका की खोज कर दी।

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वास्कोडिगामा का आगमन

प्रारंभिक अभियान

  • वास्कोडिगामा 1497 में पुर्तगाल से निकला और 'आशा अंतरीप' (Cape of Good Hope) होते हुए भारत की ओर बढ़ा।
  • रास्ते में उसे अब्दुल मजीद नामक गुजराती नाविक मिला, जिसकी सहायता से 17 मई 1498 को वह कालीकट के कप्पाडाउ (Kappad) बंदरगाह पहुँचा।PYQ
  • कालीकट के हिंदू शासक जमोरिन (Zamorin) ने उसका स्वागत किया।
  • वापसी में ले गए मसालों (विशेषकर काली मिर्च) को 60 गुना मुनाफे पर बेचा गया।

वास्कोडिगामा की 3 भारत यात्राएं

  • 1498 — पहली बार खोज करते हुए।
  • 1502 — दूसरी बार व्यापारी के रूप में।
  • 1524 — पुर्तगाली वायसराय के रूप में (इसी वर्ष कोचीन में मृत्यु)।

इस्तादो दा इंडिया व दूसरा अभियान

  • पुर्तगाली व्यापारिक कंपनी को 'इस्तादो दा इंडिया' (स्थापना 1498) नाम दिया गया।
  • पेड्रो अल्वारेस कैब्राल के नेतृत्व में 1500 ई. में दूसरा अभियान आया, जिसने अरबों को पराजित किया और कोचीन-कन्नूर के शासकों से मित्रता की।
  • 1503 (कोचीन) — पहली पुर्तगाली फैक्ट्री (अल्बुकर्क का सैन्य योगदान)।
  • 1505 (कन्नूर) — दूसरी फैक्ट्री/किला, फ्रांसिस्को डी अल्मेडा द्वारा।
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प्रमुख वायसराय — फ्रांसिस्को डी अल्मेडा

अल्मेडा (1505–1509) — प्रथम वायसराय

भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय

इन्होंने ब्लू वाटर पॉलिसी अपनाई — भूमि विस्तार के बजाय हिंद महासागर के व्यापारिक मार्गों पर एकाधिकार स्थापित करना इसका उद्देश्य था।

दीव का युद्ध (1509) — गुजरात, मिस्र (मामलुक) व तुर्कों (ऑटोमन) की संयुक्त मुस्लिम नौसेना को पराजित कर समुद्र पर वर्चस्व स्थापित किया।PYQ

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अफोंसो डी अल्बुकर्क

द्वितीय वायसराय (1509–1515)

इसे भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का 'वास्तविक संस्थापक' (Real Founder) माना जाता है।PYQ

साम्राज्य विस्तार

  • 1510 — गोवा (बीजापुर के यूसुफ आदिल शाह को हराकर — पहला क्षेत्रीय अधिग्रहण)
  • 1511 — मलक्का (दक्षिण-पूर्व एशिया का व्यापारिक केंद्र)
  • 1515 — हॉर्मुज (फारस की खाड़ी का बंदरगाह)

स्थायी राज्य की नीतियां

  • विवाह नीति — सैनिकों का भारतीय महिलाओं से विवाह
  • सती प्रथा पर रोक — इसलिए 'राजा राममोहन राय का पूर्वगामी' कहा जाता हैPYQ
  • सेना भर्ती — भारतीय (विशेषकर खत्री) सैनिक शामिल किए
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नीनो डी कुन्हा व मार्टिन डिसूजा

वायसरायकालप्रमुख कार्य
नीनो डी कुन्हा1529–1538
  • 1530 — राजधानी कोचीन से गोवा स्थानांतरित।
  • बंगाल के महमूद शाह से अनुमति लेकर चटगांव व सतगांव में व्यापारिक कोठियां खोलीं (1530)।
  • हुगली (1534-35) में भी बस्तियां बसाईं।
  • 1535 — दीव पर अधिकार (बहादुर शाह की मुग़ल हुमायूँ से डर का फायदा उठाकर; 1534 में बेसिन भी लिया)।
मार्टिन अफोंसो डिसूजा1542–1545 इनके समय संत फ्रांसिस्को जेवियर (St. Francis Xavier) भारत आए — ईसाई धर्म प्रचार हेतु।PYQ

हुगली का पतन (1632)

  • पुर्तगालियों ने बंगाल में समुद्री लूटपाट, जबरन धर्म परिवर्तन व दास व्यापार शुरू कर दिया था।
  • क्रोधित मुग़ल बादशाह शाहजहाँ के आदेश पर बंगाल सूबेदार कासिम खान ने 1632 में हुगली पर हमला किया।
  • पुर्तगालियों को वहाँ से खदेड़ दिया गया और हजारों को बंदी बनाया गया।
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कार्टाज़-आर्मेडा-काफिला व्यवस्था

पुर्तगाली खुद को 'सागर के स्वामी' (Lords of the Sea) कहते थे और हिंद महासागर पर एकाधिकार बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था लागू की।

कार्टाज़ (Permit)

किसी भी भारतीय/अरबी जहाज को अरब सागर में व्यापार हेतु पुर्तगालियों से पास लेना अनिवार्य था। यहाँ तक कि मुग़ल बादशाह अकबर को भी अपने जहाज भेजने हेतु कार्टाज़ लेना पड़ता था।PYQ

व्यापारिक पाबंदियां

गैर-पुर्तगाली जहाजों को समुद्र में काली मिर्च और गोला-बारूद ले जाने की सख्त मनाही थी।

काफिला (Cafila)

स्थानीय व्यापारिक जहाजों को समूह (काफिले) में चलना होता था।

आर्मेडा (Armada)

सशस्त्र समुद्री बेड़ा काफिले के साथ चलता था — असली मकसद नियम-उल्लंघन व बिना कार्टाज़ व्यापार पर नज़र रखना था।

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पुर्तगालियों के पतन के कारण

1. धार्मिक असहिष्णुता — गोवा इंक्विजिशन

1560 में गोवा में इंक्विजिशन (धार्मिक न्यायालय) की स्थापना हुई — ईसाई बनने के बाद भी छुपकर हिंदू/इस्लाम धर्म पालन करने वालों को कड़ी सज़ा देने हेतु। जबरन धर्म परिवर्तन व मंदिर तोड़ने से जनता का विश्वास खो दिया।

2. विजयनगर साम्राज्य का पतन (1565)

  • पुर्तगालियों का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार विजयनगर था (अरबी घोड़ों का व्यापार)।
  • तालीकोटा के युद्ध (1565) में विजयनगर के पतन से सबसे बड़ा बाज़ार खत्म हो गया।

3. ब्राज़ील की खोज (1500)

कैब्राल द्वारा ब्राज़ील की खोज के बाद पुर्तगाल का ध्यान भारत से हटकर ब्राज़ील की तरफ चला गया।

4. स्पेन-पुर्तगाल विलय (1580–1640)

पुर्तगाल पर स्पेन का कब्ज़ा रहा, जिससे स्पेन के दुश्मन (डच व अंग्रेज़) पुर्तगाल के भी दुश्मन बन गए और भारत में हमले तेज़ हुए।PYQ

5. प्रशासनिक भ्रष्टाचार व संसाधनों की कमी

पुर्तगाल एक छोटा देश था जिसके पास साम्राज्य संभालने हेतु धन व सैन्य बल की भारी कमी थी; अधिकारी निजी व्यापार में लगे थे।

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पतन की समय-रेखा

1580
पुर्तगाल-स्पेन विलय (Iberian Union)

फिलिप द्वितीय का अधिकार — 1640 तक चला। ब्रिटेन व हॉलैंड स्वाभाविक दुश्मन बन गए।

1588
'अजेय बेड़े' (Spanish Armada) की हार

ब्रिटिश नौसेना ने हराया — पुर्तगाली नौसैनिक शक्ति को गहरा धक्का।

1612
स्वाली का युद्ध (Battle of Swally)

कैप्टन थॉमस बेस्ट ने सूरत के पास पुर्तगाली नौसेना को हराया — अंग्रेज़ों का प्रभाव बढ़ा।PYQ

1630
मैड्रिड की संधि

इंग्लैंड-स्पेन शांति संधि; आगे 1635 में गोवा समझौता।

1632
हुगली का पतन

कासिम खान ने शाहजहाँ के आदेश पर हुगली पर हमला किया।

1640
स्पेन से पुर्तगाल की आज़ादी

आज़ाद तो हुआ, पर 60 वर्षों का नुकसान भर नहीं सका।

1641
मलक्का पर डचों का कब्ज़ा

हॉलैंड ने प्रमुख व्यापारिक केंद्र छीना।

1661
बंबई का दहेज़

राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रैगेंज़ा का विवाह चार्ल्स द्वितीय से; बंबई द्वीप अंग्रेज़ों को दहेज़ में।PYQ

1663
कोचीन पर डचों का कब्ज़ा

मालाबार तट पर पुर्तगाली वर्चस्व पूरी तरह खत्म।

1739
मराठों से हार

चिमाजी अप्पा (बाजीराव प्रथम के भाई) ने साल्सेट व बेसिन (वसई) छीना।PYQ

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भारत पर पुर्तगालियों का प्रभाव

कृषि व नई फसलें

तंबाकू, आलू, पपीता, अनानास, मक्का, बादाम, संतरा, लाल मिर्च, लीची, काजू, टमाटर, मूंगफली, शकरकंद, अमरूद।

'अल्फांसो आम' पुर्तगालियों की देन है — नाम वायसराय अफोंसो डी अल्बुकर्क के नाम पर रखा गया।PYQ

तकनीक व प्रिंटिंग प्रेस

1556 — गोवा में पहली प्रिंटिंग प्रेस; 1557 पहली किताब; 1563 में गार्सिया दा ओर्टा की भारतीय जड़ी-बूटियों पर पहली वैज्ञानिक किताब।

गैलियन शैली जहाज निर्माण, यांत्रिक घड़ियाँ व मानचित्र कला (कंपास) का प्रसार।

स्थापत्य व कला

'इंडो-गोथिक' शैली (ऊँचे मेहराब, बड़ी खिड़कियां) की शुरुआत; पश्चिमी तट पर मिश्रित संस्कृति (Luso-Indian Culture)।

व्यापारिक प्रभाव

भारत-जापान सीधा समुद्री व्यापार मार्ग शुरू किया (सूती वस्त्र ↔ तांबा-चांदी)। 'क्रूज़ाडो' (Cruzado) सिक्के चलाए।

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सेल्फ-टेस्ट मास्टर टेबल

वर्षघटनामहत्व
1453ऑटोमन तुर्कों का कुस्तुनतुनिया पर अधिकारस्थल मार्ग बंद — समुद्री मार्ग खोज अनिवार्य
1492कोलंबस की यात्राभारत खोजते हुए अमेरिका की खोज
1498वास्कोडिगामा का कालीकट आगमनकप्पाडाउ बंदरगाह, जमोरिन का स्वागत
1498'इस्तादो दा इंडिया' की स्थापनापुर्तगाली व्यापारिक कंपनी
1500कैब्राल का दूसरा अभियानअरबों को पराजित, कोचीन-कन्नूर से मित्रता; ब्राज़ील की खोज
1502वास्कोडिगामा की दूसरी यात्राव्यापारी के रूप में भारत आगमन
1503कोचीन में पहली फैक्ट्रीअल्बुकर्क का सैन्य योगदान
1505कन्नूर में दूसरी फैक्ट्री/किलाफ्रांसिस्को डी अल्मेडा द्वारा स्थापित
1505फ्रांसिस्को डी अल्मेडा — प्रथम वायसरायब्लू वाटर पॉलिसी (1505–1509)
1509दीव का युद्धगुजरात-मिस्र-तुर्क संयुक्त मुस्लिम नौसेना पराजित
1509अफोंसो डी अल्बुकर्क — द्वितीय वायसरायपुर्तगाली साम्राज्य का 'वास्तविक संस्थापक' (1509–1515)
1510गोवा पर अधिकारयूसुफ आदिल शाह को हराकर — पहला क्षेत्रीय अधिग्रहण
1511मलक्का पर अधिकारदक्षिण-पूर्व एशिया का व्यापारिक केंद्र
1515हॉर्मुज पर अधिकारफारस की खाड़ी का रणनीतिक बंदरगाह
1524वास्कोडिगामा की तीसरी यात्रावायसराय के रूप में; कोचीन में मृत्यु
1529नीनो डी कुन्हा वायसराय बनाकार्यकाल 1529–1538
1530राजधानी कोचीन से गोवा स्थानांतरितनीनो डी कुन्हा द्वारा
1530चटगांव व सतगांव में कोठियांबंगाल के महमूद शाह से अनुमति लेकर
1534बेसिन पर अधिकारबहादुर शाह की मदद के बहाने
1534-35हुगली में बस्तीनीनो डी कुन्हा द्वारा
1535दीव पर अधिकारबहादुर शाह के मुग़ल हुमायूँ से डर का फायदा उठाकर
1542मार्टिन अफोंसो डिसूजा वायसराय बनाकार्यकाल 1542–1545; संत फ्रांसिस्को जेवियर का आगमन
1556गोवा में प्रिंटिंग प्रेसभारत की पहली प्रिंटिंग प्रेस
1557पहली किताब छपीगोवा प्रिंटिंग प्रेस से
1560गोवा इंक्विजिशन स्थापनाधार्मिक असहिष्णुता का प्रतीक
1563गार्सिया दा ओर्टा की किताब छपीभारतीय जड़ी-बूटियों पर पहली वैज्ञानिक किताब
1565तालीकोटा युद्धविजयनगर पतन — सबसे बड़ा बाज़ार खत्म
1580पुर्तगाल-स्पेन विलय (Iberian Union)फिलिप द्वितीय का अधिकार; 1640 तक चला
1588'अजेय बेड़े' (Spanish Armada) की हारब्रिटिश नौसेना से हार — नौसैनिक शक्ति को धक्का
1612स्वाली का युद्धथॉमस बेस्ट की जीत — अंग्रेज़ प्रभाव शुरू
1630मैड्रिड की संधिइंग्लैंड-स्पेन शांति संधि
1632हुगली का पतनकासिम खान का आक्रमण (शाहजहाँ के आदेश पर)
1635गोवा समझौतामैड्रिड संधि के बाद
1640स्पेन से पुर्तगाल की आज़ादी60 वर्षों का नुकसान भर नहीं सका
1641मलक्का पर डचों का कब्ज़ाहॉलैंड ने प्रमुख व्यापारिक केंद्र छीना
1661बंबई का दहेज़कैथरीन-चार्ल्स द्वितीय विवाह; बंबई द्वीप अंग्रेज़ों को
1663कोचीन पर डच कब्ज़ामालाबार में वर्चस्व समाप्त
1739मराठों से हारचिमाजी अप्पा — साल्सेट, बेसिन (वसई) छीना
UttarPath Study Notes · पुर्तगाली भारत में · Estado da India