जॉन एडम्स & लॉर्ड एमहर्स्ट — त्वरित संदर्भ
| विषय | तथ्य | Tag |
|---|---|---|
| Licensing Regulation | 1823 — Press को License लेना अनिवार्य किया | TRAP |
| मिरात-उल-अखबार | राजा राममोहन राय की फ़ारसी पत्रिका — बंद करवाई | PYQ |
| विरोधाभास | हेस्टिंग्स ने 1818 में Pre-censorship हटाई → एडम्स ने 1823 में नई पाबंदी लगाई | TRAP |
| आगे क्या? | 1835 में चार्ल्स मेटकाफ ने Licensing Regulation हटाया → "Liberator of Press" | Link |
| विषय | तथ्य | Tag |
|---|---|---|
| बर्मा का विस्तार | 1813 में मणिपुर और 1822 में असम पर कब्ज़ा | PYQ |
| Trigger Point | शहापुरी द्वीप (Shapuree Island) — नाफ नदी के पास — 1823 में बर्मी कब्ज़ा | TRAP |
| युद्ध घोषणा | 1824 | Fact |
| ब्रिटिश जनरल | आर्चीबाल्ड कैंपबेल (Archibald Campbell) | PYQ |
| पहला कब्ज़ा | रंगून (Rangoon) बंदरगाह — समुद्री मार्ग से | Fact |
| बर्मी सेनापति | महा बंडूला (Maha Bandula) | PYQ |
| बंडूला की मृत्यु | अप्रैल 1825, दानाब्यू का युद्ध (Battle of Danubyu) — तोप का गोला | TRAP |
| Deep Fact | गोलियों से नहीं, मलेरिया और पेचिश से ज्यादा सैनिक मरे | Deep |
| संधि नाम | यंडाबू की संधि (Treaty of Yandabo) | PYQ |
| संधि तारीख | 24 फरवरी 1826 | TRAP |
| संधि स्थान | यंडाबू गाँव — बर्मी राजधानी अवा (Ava) से 45 मील दूर | Fact |
| बर्मी राजा | बागीदॉ (Bagyidaw) | Fact |
| क्षेत्र मिले | अराकान + तेनासेरिम (तटीय प्रांत) | PYQ |
| दावा छोड़ा | असम + कछार + जयंतिया पर बर्मी दावा समाप्त | PYQ |
| युद्ध हर्जाना | 1 करोड़ रुपये (1 मिलियन पाउंड) | PYQ |
| Resident कहाँ | बर्मी राजधानी अवा (Ava) में | Fact |
| असम का भविष्य | यहीं से असम ब्रिटिश प्रभाव में → चाय बागानों की नींव | Mains |
| विषय | तथ्य | Tag |
|---|---|---|
| विद्रोह वर्ष | नवंबर 1824 | PYQ |
| स्थान | बैरकपुर छावनी, कलकत्ता के पास | PYQ |
| विद्रोही रेजीमेंट | 47वीं नेटिव इन्फैंट्री (47th Native Infantry) | TRAP |
| धार्मिक कारण | समुद्र पार = कालापानी → धर्म/जाति भ्रष्ट | PYQ |
| आर्थिक कारण | भत्ता (Bhatta) नहीं मिला | Fact |
| दमनकर्ता | जनरल पैगेट (General Paget) | Fact |
| दमन की क्रूरता | निहत्थे सिपाहियों पर तोपखाने से गोलाबारी + फाँसी | Deep |
| रेजीमेंट का हश्र | 47वीं रेजीमेंट हमेशा के लिए भंग (Disband) | PYQ |
| 1857 Link | मंगल पांडे ने इसी बैरकपुर छावनी से 1857 क्रांति का बिगुल बजाया | TRAP |
| भरतपुर — पहला हमला | 1805 में जनरल लेक (Lord Lake) — 4 महीने बाद भी असफल | PYQ |
| भरतपुर — विवाद 1825 | दुर्जन शाल ने गद्दी पर कब्ज़ा → ब्रिटिश ने बलवंत सिंह का पक्ष लिया | Fact |
| भरतपुर विजेता | लॉर्ड कॉम्बरमेयर (Lord Combermere) — बारूदी सुरंगें | PYQ |
| भरतपुर विजय वर्ष | जनवरी 1826 | Fact |
| महत्व | बर्मा युद्ध से गई ब्रिटिश Military Prestige पुनः स्थापित | Mains |
- नेपोलियन के डर से कठोर Pre-censorship — छापने से पहले सरकार को दिखाना।
- Pre-censorship समाप्त। Vernacular पत्रिकाओं को समर्थन।
- Licensing Regulation 1823 — Press को License लेना अनिवार्य।
- राजा राममोहन राय की मिरात-उल-अखबार (फ़ारसी) बंद।
- Licensing Regulation हटाया।
- मेटकाफ को "Liberator of Press" कहा जाता है।
1823 — Licensing Regulation & मिरात-उल-अखबार
✅ 1818 की स्थिति (हेस्टिंग्स के बाद)
हेस्टिंग्स ने 1818 में Pre-censorship समाप्त की थी।
संपादकों को छापने से पहले सरकार को दिखाने की बाध्यता खत्म।
Vernacular (स्थानीय भाषा) पत्रिकाओं को समर्थन।
❌ 1823 में जॉन एडम्स ने पलटा
Licensing Regulation 1823 लागू किया।
हर अखबार/पत्रिका को License लेना अनिवार्य।
सरकार को पसंद न आए → License रद्द।
यह हेस्टिंग्स की नीति का पूर्ण विरोधाभास था।
- नाम का अर्थ: "समाचारों का दर्पण" (Mirror of News)
- भाषा: फ़ारसी (Persian)
- संस्थापक: राजा राममोहन राय — भारतीय सामाजिक सुधार आंदोलन के जनक।
- यह भारत में प्रकाशित होने वाली प्रथम प्रमुख फ़ारसी पत्रिकाओं में से एक थी।
- जॉन एडम्स के Licensing Regulation के तहत मिरात-उल-अखबार को बंद करवाया गया।
- राजा राममोहन राय ने License लेने से इनकार किया — सिद्धांत पर अडिग रहे।
- उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में Petition दाखिल की — इतिहास की पहली Press freedom petition।
⏳ Press Timeline — याद रखो
1799: वेलेज़ली → Pre-censorship लागू
1818: हेस्टिंग्स → Pre-censorship हटाई
1823: जॉन एडम्स → Licensing Regulation → मिरात-उल-अखबार बंद
1835: चार्ल्स मेटकाफ → Licensing Reg. हटाई → "Liberator of Press"
प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध (1824–1826) और यंडाबू की संधि
- बर्मी साम्राज्य पश्चिम की ओर फैल रहा था।
- मणिपुर (1813) बर्मा के अधीन।
- बर्मी सेना ने असम (1822) पर भी अधिकार किया।
- अब बर्मा की सीमा सीधे ब्रिटिश बंगाल प्रेसीडेंसी (सिलहट) से टकराने लगी।
- 🚨 Trigger Point: बर्मी सेना ने शहापुरी द्वीप (Shapuree Island) पर कब्ज़ा किया।
- यह द्वीप नाफ नदी (Naf River) के पास — चटगाँव (बंगाल) और अराकान (बर्मा) की सीमा पर।
- ब्रिटिश गार्ड्स को भगाया → एमहर्स्ट ने इसे बर्दाश्त नहीं किया।
- 1824 में युद्ध की घोषणा।
🇬🇧 ब्रिटिश पक्ष
सेनापति: जनरल आर्चीबाल्ड कैंपबेल (Archibald Campbell)
रणनीति: समुद्री मार्ग से हमला → रंगून पर कब्ज़ा।
बड़ी समस्या: बीमारियाँ — मलेरिया और पेचिश (Dysentery) से गोलियों से ज्यादा सैनिक मरे।
🇲🇲 बर्मी पक्ष
महान सेनापति: महा बंडूला (Maha Bandula)
युद्धकौशल: अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी।
मृत्यु: अप्रैल 1825, दानाब्यू के युद्ध (Battle of Danubyu) में — तोप का गोला लगा।
💀 Deep Fact — बीमारी ने जीती लड़ाई
इस युद्ध में अंग्रेज सैनिकों की मृत्यु गोलियों से कम, मलेरिया और पेचिश से ज्यादा हुई। उष्णकटिबंधीय (Tropical) जंगलों में ब्रिटिश सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा। यह युद्ध ब्रिटिश इतिहास के सबसे मँहगे और विनाशकारी युद्धों में से एक था।
📍 संधि क्यों और कहाँ?
ब्रिटिश सेना बर्मी राजधानी अवा (Ava) से मात्र 45 मील दूर यंडाबू गाँव पहुँच गई। घबराकर बर्मा के राजा बागीदॉ (Bagyidaw) ने यह अपमानजनक संधि स्वीकार की।
🚨 Date TRAP: संधि की सटीक तारीख = 24 फरवरी 1826
- बर्मा ने अपने दो महत्वपूर्ण तटीय प्रांत — अराकान (Arakan) और तेनासेरिम (Tenasserim) — ब्रिटिश को सौंपे।
- ये बर्मा के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से अत्यंत मूल्यवान थे।
- बर्मा ने असम, कछार (Cachar) और जयंतिया (Jaintia) पर से दावा हमेशा के लिए छोड़ा।
- 🚨 Mains Fact: यहीं से असम आधिकारिक रूप से ब्रिटिश प्रभाव में आया → बाद में चाय बागान (Tea Plantations) की नींव पड़ी।
- बर्मा को 1 करोड़ रुपये (उस समय 1 मिलियन पाउंड) की भारी राशि हर्जाने में देनी पड़ी।
- बर्मी राजधानी अवा (Ava) में एक ब्रिटिश Resident की नियुक्ति स्वीकार की।
- ताकि अंग्रेजों की सदा नज़र बनी रहे।
Arakan + Tenasserim (तटीय प्रांत दिए) → Three states dawa choda (असम+कछार+जयंतिया) → Rupee indemnity (1 crore) → Indore… नहीं — India Resident in Ava
🍵 असम → चाय बागान
यंडाबू से असम ब्रिटिश हाथ में → 1840s में चाय बागानों की शुरुआत। आज भी असम भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक।
🌊 तटीय प्रांत
अराकान + तेनासेरिम = बंगाल की खाड़ी पर रणनीतिक नियंत्रण। व्यापार और नौसेना दोनों के लिए।
💸 भारी कीमत
इस युद्ध पर अंग्रेजों का खर्च बर्मा से मिले हर्जाने से कहीं ज्यादा था। बीमारियों से जन-धन हानि।
बैरकपुर का विद्रोह (1824) और भरतपुर की विजय (1826)
📌 स्थान और संदर्भ
स्थान: बैरकपुर छावनी (Barrackpore Cantonment) — कलकत्ता के पास।
समय: नवंबर 1824
यह वेल्लोर विद्रोह (1806) के बाद दूसरा सबसे बड़ा सिपाही विद्रोह था।
📌 विद्रोही रेजीमेंट
47वीं नेटिव इन्फैंट्री (47th Native Infantry)
आदेश: समुद्री मार्ग से बर्मा जाओ।
जवाब: इनकार! — परेड ग्राउंड पर हथियार डाल दिए।
- उस समय हिंदू धर्म में मान्यता: समुद्र पार करना = कालापानी = धर्म और जाति भ्रष्ट।
- सिपाहियों ने समुद्री मार्ग से बर्मा जाने को धर्म के विरुद्ध माना।
- विदेशी धरती पर लड़ने के लिए अतिरिक्त भत्ता (Bhatta/Allowance) मिलना चाहिए था।
- अंग्रेज सरकार ने यह देने से इनकार किया।
💀 क्रूर दमन — जनरल पैगेट
जनरल पैगेट (General Paget) ने सिपाहियों की बात सुनने के बजाय तोपखाने से गोलाबारी का आदेश दिया।
परिणाम: सैकड़ों निहत्थे सिपाही मारे गए + अनेकों को फाँसी पर लटकाया + 47वीं रेजीमेंट हमेशा के लिए भंग (Disband)।
बैरकपुर छावनी ने 1824 का ज़ख्म नहीं भूला। 33 साल बाद — 1857 में मंगल पांडे ने इसी बैरकपुर छावनी से ब्रिटिश अफ़सर पर हमला करके प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजाया।
1806 (वेल्लोर) → 1824 (बैरकपुर) → 1857 (बैरकपुर/मेरठ) — तीनों की श्रृंखला परीक्षा में बहुत पूछी जाती है।
- लॉर्ड वेलेज़ली के समय में जनरल लेक (Lord Lake) ने भरतपुर किले पर 4 महीने हमला किया।
- परिणाम: पूर्णतः विफल। किला जीता नहीं जा सका।
- मिथक बना: "भरतपुर का किला अजेय (Impregnable) है!" — पूरे भारत में।
- भरतपुर में उत्तराधिकार संकट: दुर्जन शाल ने गद्दी पर कब्ज़ा किया।
- वैध उत्तराधिकारी: बलवंत सिंह।
- अंग्रेजों ने बलवंत सिंह के पक्ष में हस्तक्षेप का निर्णय लिया — यही बहाना था।
- एमहर्स्ट ने Commander-in-Chief लॉर्ड कॉम्बरमेयर (Lord Combermere) को भेजा।
- हथियार: भारी तोपखाना + बारूदी सुरंगें (mines)।
- परिणाम: जनवरी 1826 में "अजेय" दुर्ग की दीवारें उड़ा दी गईं → किला जीत लिया।
(1) भारतीय राजाओं की आखिरी उम्मीद टूटी — कोई किला अंग्रेजी तोपखाने से सुरक्षित नहीं।
(2) बर्मा युद्ध से जो ब्रिटिश Military Prestige गई थी, वह फिर से स्थापित हो गई।
| पहलू | बैरकपुर (1824) | भरतपुर (1826) |
|---|---|---|
| प्रकार | सिपाही विद्रोह — दमन | भारतीय किले पर विजय |
| GG | लॉर्ड एमहर्स्ट | लॉर्ड एमहर्स्ट |
| ब्रिटिश नेता | जनरल पैगेट | लॉर्ड कॉम्बरमेयर |
| परिणाम British के लिए | Internal Military trust खोया | Military Prestige पुनः स्थापित |
| 1857 link | मंगल पांडे — बैरकपुर | मिथक टूटा → राजा हताश |
| पहले भी हुआ था? | हाँ — वेल्लोर 1806 | हाँ — लेक 1805 में हारे |