🏛️ Acting Governor-General | एकमात्र कार्यवाहक GG
सर जॉर्ज बार्लो
एकमात्र Acting GG जिसे लंदन ने स्थायी GG मानने से इनकार किया। वेल्लोर विद्रोह (1806) — भारत का पहला सिपाही विद्रोह — इनके कार्यकाल की अमिट पहचान है।
1805
नियुक्ति वर्ष
1807
कार्यकाल समाप्त
2 वर्ष
कार्यकाल
1806
वेल्लोर विद्रोह
📊 1-Minute Master Cheat Sheet
| क्षेत्र | मुख्य घटना/नीति | वर्ष | परीक्षा ट्रैप |
|---|---|---|---|
| पहचान | Acting GG — कॉर्नवालिस की मृत्यु के बाद स्वतः नियुक्त | अक्टूबर 1805 | स्थायी GG नहीं — लंदन ने मिंटो को भेजा |
| पूर्व योगदान | कॉर्नवालिस कोड (1793) का मसौदा तैयार किया | 1793 | मसौदाकार = बार्लो; श्रेय = कॉर्नवालिस को |
| विदेश नीति | राजघाट संधि — होल्कर से शांति; Subsidiary Alliance रद्द | 1805 | वेलेज़ली की नीति का U-Turn |
| वेल्लोर विद्रोह | भारत का पहला सिपाही विद्रोह — 1857 से 51 साल पहले | 10 जुलाई 1806 | दबाया: कर्नल गिलेस्पी; कुछ घंटों में |
| परिणाम | धार्मिक आदेश वापस; मद्रास गवर्नर बनाया | 1807 | GG से हटाए नहीं; मद्रास भेजे गए |
🎯 Top 3 Exam Facts: (1) वेल्लोर विद्रोह = 1857 से पहले का पहला संगठित सिपाही विद्रोह (2) बार्लो = एकमात्र Acting GG जिसे स्थायी दर्जा नहीं मिला (3) कॉर्नवालिस कोड का असली मसौदाकार = जॉर्ज बार्लो
👤 पृष्ठभूमि — बार्लो कौन थे?
🧑💼 करियर की यात्रा
1762जन्म — इंग्लैंड
- सर जॉर्ज हिलारो बार्लो का जन्म 1762 में हुआ।
- 1778 में कंपनी के Writer के रूप में भारत आए — Civil Service से शुरुआत।
1793कॉर्नवालिस कोड का असली मसौदाकार
- प्रसिद्ध कॉर्नवालिस कोड (1793) का विस्तृत मसौदा बार्लो ने तैयार किया।
- न्यायिक, प्रशासनिक और पुलिस सुधारों का यह लिखित संग्रह था।
🎯 Exam Trap: कॉर्नवालिस कोड का श्रेय कॉर्नवालिस को, पर असली Draftsman = जॉर्ज बार्लो। UPSC/PCS में बार-बार पूछा जाता है।
अक्टूबर 1805Acting GG — कॉर्नवालिस की मृत्यु के बाद
- कॉर्नवालिस की 5 अक्टूबर 1805 को गाज़ीपुर में मृत्यु।
- परिषद के वरिष्ठ सदस्य के रूप में बार्लो स्वतः Acting GG बन गए।
- Court of Directors ने स्थायी GG का दर्जा देने से मना किया → लॉर्ड मिंटो प्रथम नियुक्त।
⚠️ परीक्षा ट्रैप
बार्लो इकलौते Acting GG थे जिन्हें लंदन ने कभी स्थायी GG नहीं माना।
🗺️ विदेश नीति — Non-Intervention U-Turn
📜 राजघाट की संधि (Treaty of Rajghat — 1805)
1805होल्कर से शांति — जसवंत राव होल्कर
- जनरल लेक भरतपुर किला नहीं जीत पाया — ब्रिटिश प्रतिष्ठा को झटका।
- बार्लो ने होल्कर के साथ राजघाट संधि (1805) से युद्ध खत्म किया।
- शर्त: चंबल नदी के उत्तर का क्षेत्र अंग्रेजों को; होल्कर को बाकी वापस।
1806Subsidiary Alliances का परित्याग
- नई Subsidiary Alliances करने से परहेज।
- फारस और अफगानिस्तान से वेलेज़ली-काल की संधियाँ रद्द कीं।
⚠️ Exam Trap — बार्लो बनाम वेलेज़ली
वेलेज़ली = Subsidiary Alliance का प्रचार; बार्लो = Subsidiary Alliance का परित्याग। यह U-Turn बार-बार पूछा जाता है।
📊 नीति का समग्र मूल्यांकन
✅ फायदे
- कंपनी के खजाने में राहत
- नए युद्धों से बचाव
- होल्कर से शांति
❌ नुकसान
- भारतीय राजाओं ने कमज़ोरी समझा
- फ्रांसीसी खतरा बना रहा
- मिंटो को बाद में सुधारना पड़ा
🔥 वेल्लोर विद्रोह — 10 जुलाई 1806
🔍 विद्रोह के कारण — धर्म पर चोट
कारण 1नई सैन्य टोपी (Round Hat) का विवाद
- मद्रास सेना के कमांडर सर जॉन क्रैडॉक ने नई गोल टोपी (Round Hat) पहनने का आदेश दिया।
- हिंदू सिपाहियों को लगा: ईसाई धर्म की पहचान है।
- मुस्लिम सिपाहियों को भी आपत्ति: पगड़ी (Turban) की परंपरा के विरुद्ध।
कारण 2तिलक और दाढ़ी पर प्रतिबंध
- हिंदू सिपाहियों के माथे पर तिलक (Caste Marks) पर रोक।
- मुस्लिम सिपाहियों की दाढ़ी और मूंछ पर नए नियम।
- दोनों समुदायों में धर्म परिवर्तन का भय।
कारण 3टीपू सुल्तान के पुत्रों की उपस्थिति
- टीपू के बेटों को वेल्लोर किले में नज़रबंद रखा गया था।
- उन्होंने असंतुष्ट सिपाहियों को भड़काया और संगठित किया।
- विद्रोह में किले पर टीपू का झंडा फहराया गया।
🎯 Key Connection: टीपू के बेटों की उपस्थिति ने इसे राजनीतिक रंग भी दिया — 1857 का पूर्वाभास।
⚔️ विद्रोह — 10 जुलाई 1806
भोर 2 बजेअचानक विद्रोह
- वेल्लोर किले में 1500 भारतीय सिपाहियों ने विद्रोह किया।
- 200 से अधिक ब्रिटिश सैनिक मारे गए — अनेक सोते हुए।
दमनकर्नल गिलेस्पी का आगमन
- कर्नल रॉबर्ट रोलो गिलेस्पी ने अर्काट से घुड़सवार सेना लेकर कुछ घंटों में विद्रोह दबाया।
- 800 से अधिक विद्रोही सिपाही मारे गए।
📋 1806 बनाम 1857 — तुलना
| पहलू | वेल्लोर 1806 | 1857 महाविद्रोह |
|---|---|---|
| स्थान | वेल्लोर किला, तमिलनाडु | मेरठ से शुरू — All India |
| कारण | टोपी, तिलक-दाढ़ी + टीपू के बेटे | चर्बी वाले कारतूस + अन्य |
| विस्तार | Local | National Level |
| दमनकर्ता | कर्नल गिलेस्पी | जनरल नील, हैवलॉक |
| समय | कुछ घंटे | 14 महीने (1857-58) |
🔑 ऐतिहासिक महत्व
यह साबित हुआ कि सिपाहियों की धार्मिक भावनाओं से छेड़छाड़ खतरनाक है। इसी सबक को 1857 में अंग्रेजों ने नज़रअंदाज़ किया।
⚖️ घरेलू नीति — Caretaker Administration
📜 वित्तीय संयम — Retrenchment Policy
- वेलेज़ली के काल में युद्ध व्यय अत्यधिक बढ़ गया था।
- नए युद्धों पर पूर्णतः रोक लगाई।
- Subsidiary Alliances के तहत खर्च कम करने के प्रयास।
🔑 बार्लो का कुल मूल्यांकन
✅ क्या सही किया
- कंपनी खर्च में कमी
- युद्धों से विराम
- विद्रोह दबाकर स्थिरता
- कॉर्नवालिस कोड का योगदान
❌ क्या गलत हुआ
- गैर-हस्तक्षेप = कमज़ोरी का संदेश
- वेल्लोर की पूर्व चेतावनियाँ नज़रअंदाज
- भारतीय राजाओं का भरोसा घटा
🎯 UPSC Mains Angle: बार्लो एक transition figure थे — वेलेज़ली की आक्रामकता और मिंटो की सतर्क कूटनीति के बीच की कड़ी। सबसे बड़ी विरासत: वेल्लोर विद्रोह (1806) — 1857 का पूर्वाभास।