सार-पत्र · Folio 0

1-मिनट मास्टर सार-पत्र

लॉर्ड कॉर्नवालिस — भारत में सुव्यवस्थित ब्रिटिश प्रशासन का वास्तुकार। "सिविल सेवा का जनक" और "स्थायी बंदोबस्त का प्रणेता"। कार्यकाल: 1786–1793 (प्रथम) और 1805 (द्वितीय — मृत्यु तक)।
क्षेत्र मुख्य कदम वर्ष परीक्षा ट्रैप
संवैधानिक 1786 का अधिनियम — वीटो + Commander-in-Chief 1786 पहला GG जिसके पास वीटो AND सेनापति दोनों
सिविल सेवा निजी व्यापार बंद; कलेक्टर वेतन 1500₹+1%; यूरोपीयकरण 1793 भारतीयों पर £500/वर्ष से अधिक वेतन पर रोक
पुलिस थाना-दरोगा प्रणाली; SP पद सृजन 1793 ज़मींदारों के पुलिस अधिकार पूर्णतः समाप्त
न्यायपालिका कॉर्नवालिस कोड; शक्तियों का पृथक्करण; Circuit Courts 1793 कोड का मसौदा = सर जॉर्ज बार्लो
भू-राजस्व स्थायी बंदोबस्त (1793); सूर्यास्त कानून (1794) 1793 / 1794 योजना = जॉन शोर; लागू = कॉर्नवालिस
युद्ध तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध; त्रिगुट बनाया 1790–1792 श्रीरंगपट्टनम संधि — टीपू के 2 बेटे बंधक
समाधि ट्रैप: कॉर्नवालिस की मृत्यु उसके द्वितीय कार्यकाल (1805) में भारत में हुई। उसकी समाधि उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर में है — भारत में किसी भी गवर्नर-जनरल की एकमात्र समाधि
अध्याय १ · Folio I

केंद्रीकरण, सिविल सेवा एवं पुलिस प्रशासन

🏛️ संस्थागत निर्माण (Institutional Building)
🎯 कॉर्नवालिस का मुख्य एजेंडा: हेस्टिंग्स ने जो नींव रखी थी, उस पर सुव्यवस्थित, पेशेवर और आधुनिक प्रशासनिक ढांचा खड़ा करना। मुख्य सिद्धांत: संस्थागत निर्माण और शक्तियों का पृथक्करण

📜 1786 का अधिनियम — सत्ता का एकाधिकार

पृष्ठभूमि: कॉर्नवालिस ने यॉर्कटाउन (1781) की पराजय के बावजूद भारत का गवर्नर-जनरल बनना केवल दो विशिष्ट शर्तों पर स्वीकार किया।

✅ शर्त 1 — वीटो शक्ति

अपनी कार्यकारी परिषद (Executive Council) के निर्णयों को निरस्त करने की वीटो शक्ति — जो हेस्टिंग्स के पास नहीं थी।

✅ शर्त 2 — Commander-in-Chief

ब्रिटिश सेना के मुख्य सेनापति का पद। कॉर्नवालिस प्रथम GG था जिसके पास नागरिक और सैन्य दोनों सर्वोच्च शक्तियां थीं।

👔 सिविल सेवा सुधार — "भारत में सिविल सेवा का जनक"

भ्रष्टाचार पर वार निजी व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध
  • कंपनी के अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले व्यक्तिगत व्यापार पर सख्त पाबंदी।
  • 'उपहार' (Presents) स्वीकार करना पूरी तरह बंद।
ऐतिहासिक वेतन वृद्धि भ्रष्टाचार की जड़ काटना
  • जिला कलेक्टर का वेतन: 1500 रुपये प्रतिमाह + जिले के कुल राजस्व संग्रहण का 1% कमीशन
  • यह तत्कालीन विश्व में सर्वाधिक सरकारी वेतन था।
नस्लवादी नीति प्रशासन का यूरोपीयकरण
  • कॉर्नवालिस की धारणा: "हिंदुस्तान का हर मूल निवासी भ्रष्ट है।"
  • किसी भी भारतीय को £500 प्रतिवर्ष से अधिक वेतन वाले उच्च पदों पर नियुक्त करने पर रोक।
विश्लेषण ट्रैप: कॉर्नवालिस ने कार्यपालिका और न्यायपालिका अवश्य पृथक की, परंतु न्यायपालिका का पूरी तरह यूरोपीयकरण कर दिया। भारतीय केवल सबसे निचले 'मुंसिफ' के पद तक सीमित रह गए।

🚔 पुलिस प्रशासन का आधुनिकीकरण

पहला कदम ज़मींदारों के पुलिस अधिकारों की समाप्ति
  • पूर्व में शांति-व्यवस्था का उत्तरदायित्व स्थानीय ज़मींदारों का था।
  • कॉर्नवालिस ने उनसे यह अधिकार पूर्णतः छीन लिया।
नई व्यवस्था थाना एवं दरोगा प्रणाली
  • जिले को 400 वर्ग मील के क्षेत्राधिकारों में विभाजित कर 'थानों' (Police Stations) की स्थापना।
  • प्रत्येक थाने का प्रभारी एक भारतीय अधिकारी — 'दरोगा' (Daroga)
  • दरोगा सीधे ब्रिटिश मजिस्ट्रेट के प्रति उत्तरदायी।
  • नवीन पद सृजन: 'पुलिस अधीक्षक' (SP — Superintendent of Police) — ज़िला स्तरीय पुलिस पर्यवेक्षण।
अध्याय २ · Folio II

न्यायपालिका का पुनर्गठन एवं 'कॉर्नवालिस कोड'

⚖️ Separation of Powers — 1793
🎯 हेस्टिंग्स की सबसे बड़ी त्रुटि का सुधार: राजस्व संग्रहण (Executive) और न्यायिक प्रशासन (Judiciary) — दोनों जिला कलेक्टर के पास थीं। कॉर्नवालिस ने इन्हें पूर्णतः पृथक कर दिया।

🏛️ शक्तियों का पृथक्करण

ज़िला कलेक्टर से सभी प्रकार की न्यायिक (दीवानी) और मजिस्ट्रेट शक्तियां वापस ले ली गईं। न्यायदान हेतु पृथक 'ज़िला न्यायाधीश' (District Judge) का पद सृजित हुआ।

📜 कॉर्नवालिस कोड (1793)

यह कोड कॉर्नवालिस के सुधारों का लिखित वैधानिक दस्तावेज़ था।

✅ प्रारूपकार (Draftsman)

कोड का मूल मसौदा सर जॉर्ज बार्लो (Sir George Barlow) ने तैयार किया।

✅ कानून की सर्वोच्चता

ऐतिहासिक सिद्धांत: 'सरकार अदालतों से ऊपर नहीं है।' कंपनी के राजस्व अधिकारी भी दीवानी अदालतों के प्रति उत्तरदायी।

⚖️ दीवानी अदालतों का पदानुक्रम (Hierarchy of Civil Courts)

अदालत न्यायाधीश का प्रकार अधिकार / सीमा विशेष तथ्य
मुंसिफ की अदालत भारतीय न्यायाधीश 50 तक के विवाद निश्चित वेतन नहीं — मुकदमों के मूल्य पर कमीशन
रजिस्ट्रार की अदालत यूरोपीय न्यायाधीश 200 तक
ज़िला दीवानी अदालत ज़िला न्यायाधीश (यूरोपीय) उच्चतर मामले कलेक्टर से न्यायिक अधिकार अलग
प्रांतीय अपील अदालतें यूरोपीय न्यायाधीश ज़िला अदालतों के विरुद्ध अपील 4 स्थान: कलकत्ता, ढाका, मुर्शिदाबाद, पटना
सदर दीवानी अदालत गवर्नर-जनरल और परिषद सर्वोच्च (भारत में) कलकत्ता में स्थित
प्रिवी काउंसिल लंदन £1000 (₹5000) से अधिक की अंतिम अपील King-in-Council, लंदन

यूरोपीय नागरिक — विशेष अधिकार

यूरोपीय नागरिकों को ज़िला/प्रांतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र से मुक्त रखा गया। उन पर मुकदमा केवल कलकत्ता सुप्रीम कोर्ट में चल सकता था।

🔨 फौजदारी प्रशासन — इस्लामी कानून में क्रांतिकारी संशोधन

नई अदालतें भ्रमणकारी (Circuit) अदालतें
  • काज़ियों और मुफ़्तियों के स्थान पर यूरोपीय न्यायाधीशों वाली 4 सर्किट कोर्ट स्थापित।
  • ये अदालतें ज़िलों में भ्रमण करती थीं।
कानूनी सुधार इरादा (Intent) बनाम हथियार (Weapon)
  • हत्या के मामलों में प्रयुक्त हथियार (तलवार या लाठी) के बजाय अपराधी के इरादे (Motive) को दंड का आधार बनाया।
ऐतिहासिक रक्त-मूल्य (Blood Money) की समाप्ति
  • नया सिद्धांत: 'हत्या एक व्यक्तिगत अपराध नहीं, राज्य (State) के विरुद्ध अपराध है।'
  • क्षमादान का अधिकार केवल राज्य को — पीड़ित के परिवार को नहीं।
मानवीय साक्ष्य और दंड में सुधार
  • गैर-मुस्लिमों की गवाही को पूर्ण मान्यता।
  • अंग-भंग (Mutilation) जैसी बर्बर सजाओं को समाप्त कर कारावास की व्यवस्था।

⚖️ वैधिक पेशे का विनियमन (Legal Profession)

केवल मान्यता प्राप्त और लाइसेंस-धारक वकीलों को न्यायालय में पैरवी की अनुमति। वकीलों की फीस सरकार द्वारा निर्धारित।

अध्याय ३ · Folio III

भू-राजस्व सुधार एवं 'स्थायी बंदोबस्त' (1793)

🌾 Permanent Settlement — 22 मार्च 1793
🎯 आदेश: कॉर्नवालिस को लंदन (Board of Control) से स्पष्ट निर्देश था — भू-राजस्व की ऐसी स्थायी व्यवस्था बनाओ जिससे कंपनी की आय निश्चित हो और कृषि का पतन रुक सके। हेस्टिंग्स की इजारेदारी प्रथा पूरी तरह विफल हो चुकी थी।

🏛️ वैचारिक पृष्ठभूमि — महान त्रिकोणीय बहस

विचारक मत (Who owns land?) अवधि
जेम्स ग्रांट भूमि का मालिक राज्य (State) है। ज़मींदार केवल कर-संग्राहक। राज्य जब चाहे ज़मींदारी छीन सके
सर जॉन शोर भूमि का मालिक ज़मींदार है — राज्य नहीं। 10 वर्ष (Decennial) के लिए समझौता
कॉर्नवालिस जॉन शोर का विचार माना — ज़मींदार मालिक। हमेशा के लिए (Permanent)
परीक्षा ट्रैप: "स्थायी बंदोबस्त की योजना (Plan) मुख्यतः किसने बनाई?" → सर जॉन शोर। कॉर्नवालिस ने केवल इसे 'स्थायी' रूप दिया और लागू किया।

📋 व्यवस्था के मुख्य प्रावधान

1790 → 22 मार्च 1793 कालक्रम
  • 1790 में 10 वर्ष के लिए प्रारंभ।
  • 22 मार्च 1793 को आधिकारिक रूप से 'स्थायी' (Permanent) घोषित।
स्वामित्व भूमि का वंशानुगत स्वामित्व
  • ज़मींदारों को भूमि का स्थायी और वंशानुगत (Hereditary) स्वामी माना गया।
  • किसानों (रैयतों) के पारंपरिक अधिकार छीने गए — वे अपनी ज़मीन पर केवल 'किरायेदार' (Tenants) बन गए।
राजस्व बँटवारा 10/11 और 1/11 का फॉर्मूला
  • ज़मींदार किसानों से जो लगान वसूलता था, उसका:
  • 10/11 भाग (लगभग 89%) → कंपनी के खजाने में।
  • 1/11 भाग (लगभग 11%) → ज़मींदार के पारिश्रमिक और खर्च हेतु।
  • कंपनी का हिस्सा हमेशा के लिए 'फिक्स' — भविष्य में कोई वृद्धि नहीं। पूरा भविष्य का मुनाफा ज़मींदार का

🌅 सूर्यास्त कानून (Sunset Clause — 1794)

वर्ष: स्थायी बंदोबस्त = 1793, सूर्यास्त कानून = 1794

यदि किसी ज़मींदार ने पूर्व-निर्धारित तिथि के 'सूर्यास्त' (Sunset) तक कंपनी का राजस्व जमा नहीं किया → ज़मींदारी तुरंत ज़ब्त और नीलाम। (शुरुआत में कई पुराने ज़मींदारों की ज़मींदारी छिन गई।)

🗺️ भौगोलिक विस्तार

यह व्यवस्था ब्रिटिश भारत के कुल क्षेत्रफल के केवल लगभग 19% भाग पर लागू थी।

मुख्य केंद्र

बंगाल, बिहार और उड़ीसा

उत्तर भारत

उत्तर प्रदेश का केवल वाराणसी (बनारस) खंड

दक्षिण भारत

मद्रास के उत्तरी ज़िले (Northern Circars)

भौगोलिक ट्रैप

कथन: "स्थायी बंदोबस्त संपूर्ण उत्तर भारत में लागू था।" → पूरी तरह गलत। उत्तर प्रदेश में यह केवल 'बनारस खंड' तक सीमित था — अवध या पश्चिमी यूपी में नहीं।

📊 सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

अनुपस्थित ज़मींदारी (Absentee Landlordism)

ज़मींदार गाँव छोड़ शहरों में विलासिता का जीवन जीने लगे। किसानों से कर वसूलने के लिए बिचौलियों (Middlemen/पट्टेदारों) की लंबी श्रृंखला — चरम शोषण।

कंपनी को दीर्घकालिक घाटा

शुरू में आय निश्चित हुई, परंतु भविष्य में कृषि और कीमतें बढ़ने पर पूरा मुनाफा ज़मींदारों ने खाया — कंपनी को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं।

अध्याय ४ · Folio IV

कूटनीति एवं तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1790-1792)

⚔️ त्रिगुट बनाम टीपू सुल्तान
🎯 परिस्थिति: दक्षिण भारत में टीपू सुल्तान फ्रांसीसियों के साथ मिलकर अंग्रेजों को भारत से निकालने की योजना बना रहा था। कॉर्नवालिस समझ चुका था कि युद्ध अपरिहार्य (Inevitable) है।

🏰 युद्ध का तात्कालिक कारण — त्रावणकोर विवाद

पृष्ठभूमि डच किलों का विवाद
  • त्रावणकोर का राजा = अंग्रेजों का पुराना मित्र और संरक्षित
  • त्रावणकोर ने कोचीन में डचों से 'क्रैंगानोर' और 'आयाकोट्टा' किले खरीदे।
  • टीपू का दावा: ये किले कोचीन के नवाब के हैं जो टीपू को कर (Tribute) देता है।
अप्रैल 1789 युद्ध का आरंभ
  • टीपू सुल्तान ने त्रावणकोर पर आक्रमण किया।
  • कॉर्नवालिस ने इसे 'ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी पर आक्रमण' मानकर युद्ध घोषित किया।

🤝 कॉर्नवालिस का कूटनीतिक त्रिगुट (Triple Alliance — 1790)

द्वितीय मैसूर युद्ध में हैदर अली ने अंग्रेजों के खिलाफ त्रिगुट बनाया था। कॉर्नवालिस ने पासा पलट दिया:

🇬🇧 अंग्रेज़

सेनापति: कॉर्नवालिस स्वयं

⚔️ मराठा

1790 में संधि — टीपू के राज्य का लालच देकर

👑 निज़ाम (हैदराबाद)

1790 में संधि — टीपू के राज्य का लालच देकर

परिणाम: युद्ध बना — अंग्रेज + मराठा + निज़ाम बनाम अकेला टीपू सुल्तान

⚔️ युद्ध का घटनाक्रम

1790 प्रथम चरण — जनरल मेडोज़ की विफलता
  • जनरल मेडोज़ (General Medows) के नेतृत्व में आक्रमण।
  • टीपू ने ब्रिटिश सेना को बुरी तरह छकाया और पीछे धकेला।
1791 कॉर्नवालिस का सीधा हस्तक्षेप
  • कॉर्नवालिस ने स्वयं GG और मुख्य सेनापति के रूप में सेना की कमान ली — इतिहास में दुर्लभ घटना।
  • 1791 में बैंगलोर पर कब्ज़ा।
फरवरी 1792 श्रीरंगपट्टनम का घेराव
  • कॉर्नवालिस + मराठा + निज़ाम की संयुक्त सेना ने टीपू की राजधानी श्रीरंगपट्टनम को चारों तरफ से घेरा।
  • टीपू ने हार निश्चित देखकर संधि के लिए घुटने टेके

📜 श्रीरंगपट्टनम की संधि (Treaty of Srirangapatna — 1792)

शर्त विवरण
राज्य का विभाजन टीपू का आधा राज्य अंग्रेजों और सहयोगियों को दिया गया।
अंग्रेजों का हिस्सा मालाबार तट, डिंडीगुल (Dindigul) और बारामहल (Baramahal) — सबसे लाभप्रद क्षेत्र (मालाबार = काली मिर्च व्यापार)।
मराठों का हिस्सा तुंगभद्रा नदी के उत्तर का क्षेत्र।
निज़ाम का हिस्सा कृष्णा और पेन्नार नदियों के बीच का क्षेत्र।
युद्ध हर्जाना टीपू पर 3 करोड़ रुपये का जुर्माना।
बंधक पुत्र टीपू के दो नाबालिग बेटे — अब्दुल खालिक और मुइज़ुद्दीन — गारंटी हेतु बंधक बनाए।

💬 कॉर्नवालिस का ऐतिहासिक और प्रसिद्ध कथन

"हमने अपने मित्रों को अधिक शक्तिशाली बनाए बिना ही, अपने शत्रु को प्रभावी ढंग से पंगु कर दिया है।"

"We have crippled our enemy effectively without making our friends too formidable."

— कॉर्नवालिस, बोर्ड ऑफ कंट्रोल को पत्र, 1792
अर्थ (UPSC मुख्य परीक्षा का क्लासिक प्रश्न): कॉर्नवालिस ने जानबूझकर मराठों और निज़ाम को कम उपजाऊ और कम सामरिक महत्व के क्षेत्र दिए — ताकि वे भविष्य में अंग्रेजों के लिए खतरा न बनें। टीपू का आधा राज्य छीनकर उसकी कमर तोड़ दी — लेकिन मित्रों को भी ज़्यादा ताकत नहीं दी।