लॉर्ड एलनबरो
| विषय | तथ्य | Tag |
|---|---|---|
| पूरा नाम | Edward Law, 1st Earl of Ellenborough | Identity |
| कार्यकाल | 1842–1844 (केवल 2 वर्ष) | Core |
| पूर्ववर्ती GG | लॉर्ड ऑकलैंड (Disgrace में वापस बुलाया) | Link |
| उत्तरवर्ती GG | लॉर्ड हार्डिंग प्रथम | Link |
| मुख्य कार्य 1 | प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध का औपचारिक समापन (1842) | Core |
| मुख्य कार्य 2 | सिंध का विलय — अगस्त 1843 | VVIP |
| मुख्य कार्य 3 | दास प्रथा उन्मूलन — Act V of 1843 | Reform |
| अंत | Court of Directors ने अगस्त 1844 में Recall किया | Recall |
| UPSC Trap | Peccavi = "मैंने पाप किया है / I have sinned (Sindh)" | Wordplay |
प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध में ब्रिटिश सेना के भयानक संहार (16,000 की मौत, केवल Dr. William Brydon ज़िंदा लौटे) से London में Court of Directors सदमे में था। ऑकलैंड को Disgrace में वापस बुलाया गया।
एलनबरो को एक ही काम दिया गया था: अफगानिस्तान से ब्रिटिश सेना की "सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी" (Honorable Extraction) सुनिश्चित करो — लेकिन 'हारे हुए' दिखे बिना।
- एलनबरो जानता था कि सीधे वापस लौटना = अंग्रेजों की हार मानना।
- इसलिए उसने 'Policy of Retribution' (प्रतिशोध की नीति) अपनाई।
- जनरल पोलक (General Pollock) और जनरल नॉट (General Nott) को काबुल पर दोबारा हमले का आदेश।
- ब्रिटिश सेना ने काबुल के ऐतिहासिक 'चार छत्ता' (Char Chatta) बाज़ार को बारूद से उड़ा दिया।
- यह बाज़ार मुग़ल काल में अली मर्दान खान द्वारा बनवाया गया था।
- यहीं पर बर्न्स और मैकनॉटन के कटे सिर टांगे गए थे — अंग्रेजों ने इसका बदला इस क्रूरता से लिया।
- इसके बाद 1842 में प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध का औपचारिक समापन घोषित किया।
- शाह शुजा (जिसे ऑकलैंड ने बैठाया था) की 1842 में अफगानों ने हत्या कर दी थी।
- एलनबरो ने उसी दोस्त मुहम्मद को अफगानिस्तान वापस आने दिया जिसे ऑकलैंड ने हटाया था।
- यह ऑकलैंड की Forward Policy का पूर्ण पराभव था।
एलनबरो ने जनरल नॉट को आदेश दिया: अफगानिस्तान से लौटते समय गजनी में महमूद गजनवी के मकबरे से वे चंदन के दरवाज़े लाओ, जिनके बारे में मान्यता थी कि गजनवी उन्हें 11वीं सदी में सोमनाथ मंदिर (गुजरात) से लूटकर ले गया था।
एलनबरो ने भारत के हिंदू राजाओं को "Proclamation of the Gates" पत्र लिखा — कहा कि हिंदुओं के 800 साल पुराने अपमान का बदला ले लिया। यह पूरी तरह Appeasement और हिंदू-मुस्लिम में फूट डालने की चाल थी।
- जांच में पता चला: दरवाज़े देवदार की लकड़ी के थे, चंदन के नहीं।
- उन पर नक्काशी इस्लामी शैली की थी — यानी वे सोमनाथ के थे ही नहीं!
- लॉर्ड मैकाले ने इसे "मूर्खता की विजय" (A triumph of stupidity) कहा।
- ब्रिटिश संसद में भारी आलोचना हुई।
- दरवाज़े आज भी आगरा किले के एक गोदाम में पड़े हैं।
अफगानिस्तान की इस शर्मनाक विफलता ने अंग्रेजों को सबक दिया। एलनबरो के बाद से जो नई नीति अपनाई गई, उसे आगे चलकर जॉन लॉरेंस ने 'Masterly Inactivity' (कुशल अकर्मण्यता) नाम दिया — जब तक अफगानिस्तान हमला न करे, उसके मामलों में दखल मत दो।
अफगानिस्तान में हार के बाद ब्रिटिश सेना की 'अजेयता' का भ्रम टूट गया था। एलनबरो यह अपमान किसी भी कीमत पर मिटाना चाहता था। सिंधु नदी (Indus River) पर व्यापारिक एकाधिकार भी लक्ष्य था।
- एलनबरो ने नैतिकतावादी मेजर जेम्स आउट्रम (James Outram) को हटाया।
- सर चार्ल्स नेपियर को पूर्ण सैन्य और राजनीतिक शक्तियां दी गईं।
- नेपियर ने सिंध के अमीरों (बलोच शासकों) पर संधि तोड़ने का झूठा आरोप लगाया।
- सिंध के अमीरों की पहली बड़ी पराजय। नेपियर की सेना की निर्णायक जीत।
- अमीरों की दूसरी और अंतिम पराजय।
- सिंध पूरी तरह ब्रिटिश के अधीन। अगस्त 1843 में बंबई प्रेसीडेंसी में औपचारिक विलय।
नेपियर ने अपनी डायरी में लिखा: "हमें सिंध पर कब्ज़ा करने का कोई अधिकार नहीं है, फिर भी हम ऐसा करेंगे, क्योंकि यह एक बहुत ही लाभदायक Piece of Rascality होगी।"
इतिहासकार कहते हैं: "सिंध का विलय उसी तरह था जैसे किसी गुंडे (अफगान) से पिटने के बाद, व्यक्ति घर आकर अपनी कमज़ोर पत्नी (सिंध) पर भड़ास निकाल दे।" अंग्रेजों ने अपनी 'अजेयता' वापस पाने के लिए ही सिंध को शिकार बनाया।
चार्ल्स नेपियर ने सिंध में आयरिश कॉन्स्टेबुलरी (Irish Constabulary) की तर्ज पर पुलिस व्यवस्था स्थापित की — यह भारत में आधुनिक पुलिस प्रणाली का पहला सफल प्रयोग था।
1843 में ग्वालियर में जनकोजी राव सिंधिया की मृत्यु के बाद अल्पवयस्क जयाजीराव सिंधिया गद्दी पर बैठे। एलनबरो को डर था कि ग्वालियर की 40,000 की फ्रांसीसी-प्रशिक्षित सेना कहीं पंजाब के सिखों से हाथ न मिला ले।
29 दिसंबर 1843 को एक ही दिन दो अलग-अलग स्थानों पर युद्ध हुए: महाराजपुर + पुन्नियार। मराठा सेना बहादुरी से लड़ी लेकिन हार गई। ग्वालियर की सेना घटाकर 9,000 की गई और Council of Regency के तहत अंग्रेज नियंत्रण स्थापित हुआ।
1833 के Charter Act में केवल दास प्रथा समाप्त करने का आदेश (Directive) दिया गया था। उसे ज़मीन पर कानूनी अपराध बनाने का काम 10 साल बाद एलनबरो ने किया।
- ❌ गलत: "दास प्रथा 1833 के एक्ट में ही खत्म हो गई थी।"
- ✅ सही: 1833 = केवल Directive (आदेश)। 1843 का Act V = इसे कानूनी अपराध (Crime) बनाया।
- 👤 किसने किया: लॉर्ड एलनबरो ने Act V of 1843 पारित किया।
एलनबरो ने सरकारी राजस्व के लिए चलाई जाने वाली State Lotteries को अनैतिक मानकर पूरी तरह बंद किया।
Court of Directors ने अपनी विशेष शक्ति का प्रयोग करके एलनबरो को अगस्त 1844 में पद से हटाया। कारण: बिना अनुमति सिंध और ग्वालियर पर आक्रमण।
सोमनाथ के दरवाज़ों का नाटक कोई धार्मिक श्रद्धा नहीं था। अफगान युद्ध में जनहानि के बाद एलनबरो भारतीय सेना (बहुसंख्यक हिंदू सिपाही) का मनोबल बढ़ाना और मुसलमानों के खिलाफ भड़काना चाहता था। यह 1857 से बहुत पहले 'Divide and Rule' का सूक्ष्म प्रयोग था।