🏛️ Governor-General of Bengal  |  5th in Series

सर जॉन शोर

भू-राजस्व विशेषज्ञ जिसने स्थायी बंदोबस्त का मसौदा तैयार किया, अहस्तक्षेप की नीति अपनाई — और अपनी ही नीति का अपवाद बन गया।

1793
नियुक्ति वर्ष
1798
कार्यकाल समाप्त
5 वर्ष
कार्यकाल
1793
चार्टर एक्ट
📊 1-Minute Master Cheat Sheet
सर जॉन शोर — भू-राजस्व विशेषज्ञ और स्थायी बंदोबस्त के असली मसौदाकार। उनका कार्यकाल 1793–1798 था। उनकी पहचान है: अहस्तक्षेप नीति + खर्डा विवाद + अवध हस्तक्षेप (विरोधाभास)।
क्षेत्रमुख्य घटना/नीतिवर्षपरीक्षा ट्रैप
पहचानबोर्ड ऑफ रेवेन्यू अध्यक्ष → GG1793भू-राजस्व विशेषज्ञ थे
स्थायी बंदोबस्तमसौदा शोर ने बनाया; 10 साल का प्रस्ताव दिया1793मसौदाकार = शोर, पर श्रेय = कॉर्नवालिस को
चार्टर एक्टकंपनी का 20 साल एकाधिकार बढ़ा; GG शक्ति विस्तार1793Board of Control का वेतन भारतीय राजस्व से
अहस्तक्षेपपिट्स इंडिया एक्ट की नीति का पालन1793-98वेलेज़ली ने बाद में इसे बदला
खर्डा 1795निज़ाम को मदद देने से इनकार → मराठों से हारमार्च 1795फ्रांसीसी 'रेमंड' का आगमन
अवध हस्तक्षेपवज़ीर अली हटाकर सआदत अली खान बैठाया1797-98अहस्तक्षेप नीति का विरोधाभास
🎯 परीक्षा की दृष्टि से Top 3: (1) स्थायी बंदोबस्त का असली मसौदाकार = जॉन शोर (2) खर्डा 1795 = निज़ाम की हार, फ्रांसीसी प्रभाव बढ़ा (3) अहस्तक्षेप नीति का अपवाद = अवध

👤 पृष्ठभूमि — जॉन शोर कौन थे?

🌍 Global Context (1793): फ्रांसीसी क्रांति चरम पर थी। नेपोलियन उभर रहा था। कंपनी वेलेज़ली से पहले युद्धों से बचना चाहती थी।
🧑‍💼 करियर की यात्रा
1751जन्म — लंदन
  • सर जॉन शोर का जन्म 1751 में हुआ।
  • 1769 में ईस्ट इंडिया कंपनी के Writer (लेखक) के रूप में भारत आए।
1789बोर्ड ऑफ रेवेन्यू — अध्यक्ष
  • बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (Board of Revenue) के अध्यक्ष के रूप में भू-राजस्व विशेषज्ञता हासिल की।
  • Permanent Settlement का Blueprint तैयार किया।
🎯 Exam Trap: स्थायी बंदोबस्त (1793) का श्रेय कॉर्नवालिस को जाता है, लेकिन असली मसौदाकार जॉन शोर थे।
अक्टूबर 1793Governor-General नियुक्त
  • लॉर्ड कॉर्नवालिस के बाद GG बने — पहले Indian Civil Service अधिकारी जो GG बने।
  • पिट्स इंडिया एक्ट की नीति में विश्वास: अहस्तक्षेप (Non-Intervention)

🏛️ भू-राजस्व नीति — स्थायी बंदोबस्त विवाद

शोर-ग्रांट विवाद (Shore-Grant Debate) — परीक्षा में बार-बार पूछा जाने वाला टॉपिक।
🔥 शोर-ग्रांट विवाद (Shore-Grant Debate)
❌ जेम्स ग्रांट का तर्क
  • भूमि का असली मालिक राज्य/कंपनी है
  • ज़मींदार केवल कर वसूलने वाले एजेंट हैं
  • राज्य जब चाहे उन्हें हटा सकता है
✅ शोर का तर्क (जीता)
  • ऐतिहासिक रूप से ज़मींदार ही असली मालिक हैं
  • राज्य का अधिकार केवल निश्चित राजस्व तक
  • कॉर्नवालिस ने शोर का तर्क माना
⚠️ शोर की असफलता

शोर ने भूमि को ज़मींदारों की मानी, लेकिन वह इसे 10 वर्षीय (Decennial) बंदोबस्त बनाना चाहते थे। कॉर्नवालिस ने इसे Permanent (स्थायी) कर दिया — जो भारतीय किसानों के लिए बड़ी त्रासदी बनी।

📜 चार्टर एक्ट 1793

शोर के कार्यकाल की सबसे प्रमुख वैधानिक घटना।
📋 मुख्य प्रावधान
प्रावधान 1व्यापारिक एकाधिकार
  • कंपनी के भारत व्यापार एकाधिकार को अगले 20 वर्ष के लिए बढ़ाया गया।
प्रावधान 2लिखित कानून अनिवार्य
  • सभी नियम व कानून लिखित रूप में होंगे।
  • न्यायालयों को इन्हीं लिखित कानूनों से न्याय करना होगा।
प्रावधान 3Board of Control का वेतन
  • Board of Control के सदस्यों का वेतन अब भारतीय राजस्व से दिया जाएगा।
  • यह व्यवस्था 1919 तक चली।
⚠️ Exam Trap

Board of Control का वेतन British Treasury से नहीं बल्कि Indian Revenues से — यह बार-बार पूछा जाता है।

प्रावधान 4GG की विशेष शक्ति
  • GG को परिषद के निर्णय रद्द करने की शक्ति — जो पहले केवल कॉर्नवालिस (1786) को थी — अब सभी भविष्य के GG को दी गई।

🕊️ अहस्तक्षेप की नीति — Policy of Non-Intervention

1784 के पिट्स इंडिया एक्ट में निर्देश था: भारतीय राज्यों के आपसी युद्धों से बचो, तटस्थता बनाए रखो। शोर ने इसे शाब्दिक रूप से लागू किया।
🔍 नीति का स्वरूप

जॉन शोर ने पिट्स इंडिया एक्ट (1784) की भावना के अनुसार भारतीय राज्यों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया।

✅ क्या किया

युद्धों से बचा; तटस्थता बनाए रखी; कंपनी का खर्च कम किया।

❌ परिणाम

खर्डा में निज़ाम की हार; फ्रांसीसी प्रभाव बढ़ा; अंग्रेजी प्रतिष्ठा घटी।

🎯 Key Link: शोर की Non-Intervention नीति ने ही लॉर्ड वेलेज़ली को Subsidiary Alliance की आक्रामक नीति अपनाने का बहाना दिया।

⚔️ खर्डा का युद्ध — मार्च 1795

यह शोर की Non-Intervention नीति का सबसे विवादास्पद और दूरगामी परिणाम था।
📖 युद्ध की पृष्ठभूमि
पृष्ठभूमिमराठों और निज़ाम में विवाद
  • मराठों और हैदराबाद के निज़ाम के बीच चौथसरदेशमुखी वसूली का विवाद।
  • निज़ाम ने Triple Alliance (1790) का हवाला देकर अंग्रेजों से सैन्य मदद मांगी।
शोर का इनकारअहस्तक्षेप नीति लागू
  • शोर ने अहस्तक्षेप नीति का तर्क देकर मदद करने से स्पष्ट इनकार किया।
मार्च 1795खर्डा युद्ध — निज़ाम की करारी हार
  • नाना फड़नवीस के नेतृत्व में मराठों ने निज़ाम को बुरी तरह पराजित किया।
  • निज़ाम को भारी हर्जाना और बड़ा क्षेत्र मराठों को देना पड़ा।
💥 दूरगामी परिणाम — Exam Must Know

निज़ाम अंग्रेजों से नाराज़ हुआ और उसने फ्रांसीसी अधिकारी 'रेमंड' (Raymond) को सेना प्रशिक्षित करने के लिए नियुक्त किया। इससे दक्षिण भारत में फ्रांसीसी प्रभाव पुनः बढ़ गया — यही वेलेज़ली की Subsidiary Alliance की पृष्ठभूमि बनी।

🏰 अवध में हस्तक्षेप — विरोधाभास 1797

यह शोर की अपनी ही अहस्तक्षेप नीति का सबसे बड़ा अपवाद और विरोधाभास था।
📖 घटनाक्रम
1797नवाब आसफ-उद-दौला की मृत्यु
  • अवध के नवाब आसफ-उद-दौला की 1797 में मृत्यु।
  • उसका कथित पुत्र वज़ीर अली गद्दी पर बैठा — अंग्रेजों ने प्रारंभ में मान्यता दी।
हस्तक्षेपशोर ने वज़ीर अली को हटाया
  • वज़ीर अली ब्रिटिश-विरोधी था। शोर ने उसे वैध पुत्र नहीं घोषित किया।
  • शोर स्वयं लखनऊ जाकर वज़ीर अली को गद्दी से हटाया।
1798नई संधि — सआदत अली खान
  • सआदत अली खान द्वितीय (आसफ-उद-दौला का भाई) को अवध का नया नवाब बनाया।
  • शर्तें: इलाहाबाद किला अंग्रेजों को; ब्रिटिश सेना के लिए subsidy बढ़ाई; वज़ीर अली को बनारस भेजा।
🔑 परीक्षा का सोने का सवाल

शोर की Non-Intervention नीति का एकमात्र अपवाद = अवध। और यही उनकी सबसे बड़ी विरोधाभासी (Contradictory) नीति मानी जाती है।

📉 शोर की विदाई — 1798

बंगाल सेना के यूरोपीय अधिकारियों ने भत्तों की कटौती और पदोन्नति में अनियमितता का विरोध किया। शोर ने उनकी मांगें मान लीं — यह लंदन को कमज़ोरी लगी।

⚠️ नतीजा

Court of Directors ने शोर को 1798 में वापस बुला लिया और लॉर्ड वेलेज़ली को GG नियुक्त किया।

🎯 One-Liners & Previous Year Questions

सर जॉन शोर से UPSC, UPPSC, MPPSC, SSC में पूछे जाने वाले मुख्य प्रश्न।