📊 Master Cheat Sheet

⚡ 30-Second Revision

3 युद्ध → 1775-82 | 1803-05 | 1817-18 | GG: Warren Hastings → Wellesley → Lord Hastings | अंत: पेशवाई समाप्त (1818), बाजीराव II को बिठूर निर्वासन

तीनों युद्धों का सार एक ही जगह। परीक्षा से पहले यह टेबल ज़रूर देखें।

📋 तीनों युद्धों की तुलनात्मक तालिका

युद्ध / काल Governor General मुख्य कारण (Trigger) प्रमुख संधियां परिणाम
प्रथम
1775–1782
वारेन हेस्टिंग्स राघोबा विवाद + बंबई प्रेसीडेंसी की महत्वाकांक्षा सूरत (1775), पुरंदर (1776), बड़गांव (1779), साल्बाई (1782) यथास्थिति। 20 वर्ष की शांति
द्वितीय
1803–1805
लॉर्ड वेलेज़ली बेसिन संधि + मराठा गृहयुद्ध बेसिन (1802), देवगांव, सुरजी-अंजनगांव, राजघाट दिल्ली-आगरा पर अंग्रेजी कब्जा। मुगल अंग्रेजों के संरक्षण में
तृतीय
1817–1818
लॉर्ड हेस्टिंग्स पिंडारी दमन + गंगाधर शास्त्री हत्या पूना, ग्वालियर, मंदसौर पेशवाई समाप्त। बाजीराव II → बिठूर। मराठा साम्राज्य का अंत
🔤 MNEMONIC: तीन GG याद करें
"Wait, Wellesley Haste करो" → Warren Hastings → Wellesley → (Lord) Hastings
या: W–W–H (Warring Wolves Hunt) → युद्ध 1, 2, 3 के GG
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MOST ASKED IN EXAMS

1) साल्बाई संधि (1782) → कितने साल की शांति? → 20 वर्ष | 2) बेसिन संधि → "Subsidiary Alliance" किसने स्वीकार की? → पेशवा बाजीराव II | 3) तृतीय युद्ध → GG = लॉर्ड हेस्टिंग्स (वारेन हेस्टिंग्स ≠) | 4) पेशवाई कब समाप्त? → 1818

🌍 पृष्ठभूमि: यह युद्ध क्यों हुए?

⚡ Root Cause Analysis

मराठा साम्राज्य भारत का सबसे बड़ा शक्ति था। अंग्रेजों के लिए भारत पर पूर्ण नियंत्रण तब तक असंभव था जब तक मराठे स्वतंत्र थे। तीनों युद्ध दरअसल इसी एक लक्ष्य के अलग-अलग चरण थे।

🏛️ मराठा संघ: शक्ति और कमज़ोरी

मराठा कोई एक राजा का राज नहीं था — यह पेशवा की अध्यक्षता में 5 प्रमुख शक्तियों का संघ था:

पेशवा (पूना)
प्रधानमंत्री → वास्तविक प्रमुख
छत्रपति का नाममात्र का पद; पेशवा ही असली शासक थे।
भोंसले (नागपुर)
छत्रपति का वंश
शिवाजी का मूल राजघराना; बेरार और विदर्भ पर नियंत्रण।
सिंधिया (ग्वालियर)
उत्तर भारत के शासक
दिल्ली तक पहुंच; मुगलों के वास्तविक संरक्षक। सबसे शक्तिशाली मराठा सरदार।
होल्कर (इंदौर)
मध्य भारत
मालवा और राजस्थान पर प्रभाव। अंग्रेजों को द्वितीय युद्ध में चुनौती दी।
गायकवाड़ (बड़ौदा)
गुजरात
सबसे पहले अंग्रेजी सहायक संधि स्वीकार करने वाले। तृतीय युद्ध में तटस्थ।
🔑 Key Insight: मराठों की सबसे बड़ी कमज़ोरी यह थी कि ये पांचों शक्तियां आपस में ही लड़ती रहती थीं। अंग्रेजों ने "Divide and Rule" की नीति से एक-एक को अलग करके हराया।

📅 1761 — पानीपत की तीसरी लड़ाई: मराठों का पहला बड़ा झटका

आंग्ल-मराठा युद्धों को समझने के लिए यह context ज़रूरी है।

  • 1761 में अहमद शाह अब्दाली (दुर्रानी) ने पानीपत में मराठों को कुचल दिया।
  • पेशवा विश्वासराव और मराठा सेनापति विश्वासरावभाऊ साहेब मारे गए।
  • इस हार ने मराठों को इतना कमज़ोर कर दिया कि वे उत्तर भारत से लगभग बाहर हो गए।
  • लेकिन महादजी सिंधिया ने 1771-1788 के बीच मराठा शक्ति को दोबारा उठाया और दिल्ली तक वापस पहुंचे।
🎯 UPSC/State PCS Angle: पानीपत 1761 → मराठों का पतन शुरू। अंग्रेजों का उदय शुरू। यही वह खालीपन था जिसे भरने की होड़ शुरू हुई।

🏛️ 'Subsidiary Alliance' (सहायक संधि): अंग्रेजों का सबसे घातक हथियार

💡 यह क्या था और इतना खतरनाक क्यों था?

लॉर्ड वेलेज़ली ने यह system बनाया। Indian राजा को अंग्रेजी फौज रखनी होती थी → उसका खर्च Indian राजा उठाए → राजा गरीब हो जाए → अंग्रेजों पर depend हो जाए → स्वतंत्रता खत्म।

  • शर्तें: राजा के दरबार में एक ब्रिटिश रेजिडेंट रहेगा।
  • राजा अपनी कोई स्वतंत्र विदेश नीति नहीं बना सकता।
  • ब्रिटिश सेना की कीमत देने के लिए अपने राज्य की ज़मीन देनी होगी।
  • सबसे पहले किसने स्वीकार किया? हैदराबाद के निज़ाम (1798)
  • मराठों में सबसे पहले: पेशवा बाजीराव II (बेसिन, 1802)
⚠️
COMMON CONFUSION

सहायक संधि = Subsidiary Alliance (वेलेज़ली की policy) | सहयोगी संधि अलग होती है। Examiner अक्सर "किसने accept किया" पूछते हैं।

⚔️ प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1775–1782)

GG: वारेन हेस्टिंग्स | बंबई GG: हॉर्नबी

⚡ Quick Summary

कारण: राघोबा का पेशवा बनने के लिए अंग्रेजों से साँठगाँठ | बड़गांव (1779): अंग्रेजों की शर्मनाक हार | साल्बाई (1782): 20 वर्ष की शांति (मध्यस्थ: महादजी सिंधिया)

💡 यह युद्ध क्यों हुआ? (Root Cause Analysis)

1772 में माधवराव प्रथम (महान मराठा पेशवा जिसने मराठा शक्ति की खोई प्रतिष्ठा वापस लाई थी) की मृत्यु हो गई। उनके चाचा राघोबा को पेशवा बनना था लेकिन नाना फड़नवीस ने रोक दिया। यह 'परिवार का झगड़ा' धीरे-धीरे अंतर्राष्ट्रीय युद्ध बन गया।

👥 Key Players: कौन कौन था?

राघोबा (रघुनाथ राव)
उम्मीदवार पेशवा — खलनायक
अपने भतीजे नारायणराव की हत्या करवाई। अंग्रेजों से मिलकर गद्दी पाने की कोशिश की। मराठों को अंग्रेजों के हवाले करने का मुख्य कारण।
नाना फड़नवीस
मराठा चाणक्य — नायक
'बाराभाई काउंसिल' के सूत्रधार। 1800 तक मराठा हितों की रक्षा करते रहे। उनकी मृत्यु के बाद ही मराठा साम्राज्य बिखरने लगा।
महादजी सिंधिया
महान सेनापति — पानीपत 1761 का survivor
पानीपत में घायल होकर बचा। बाद में उत्तर भारत दोबारा जीता। प्रथम युद्ध में बड़गांव (1779) की जीत दिलाई और साल्बाई (1782) में मध्यस्थ बना।
वारेन हेस्टिंग्स
Governor General
बंबई प्रेसीडेंसी की मनमानी से परेशान था। पुरंदर संधि (1776) से सूरत संधि रद्द की लेकिन लंदन के दबाव में युद्ध जारी रखना पड़ा।

📜 S-P-W-S: चार संधियों का क्रम

TRICK / MNEMONIC
"Surat, Purandar, Wadgaon (Badgaon), Salbai" → SURAT PURE WATER (FOR) SALE
1775 सूरत की संधि — राघोबा की गुलामी
  • राघोबा + बंबई प्रेसीडेंसी के बीच।
  • अंग्रेजों ने 2500 सैनिक दिए पेशवा बनाने के लिए।
  • बदले में: सालसेट, बेसिन, बंदरगाह राजस्व अंग्रेजों को।
📌 नया तथ्य: यह संधि कलकत्ता काउंसिल की मंज़ूरी के बिना की गई थी — यही बड़ा विवाद था। वारेन हेस्टिंग्स ने इसे अधिकृत नहीं माना था।
1776 पुरंदर की संधि — हेस्टिंग्स का सुधार
  • हेस्टिंग्स ने सूरत संधि रद्द कर दी। कर्नल अप्टन को नाना फड़नवीस के पास भेजा।
  • राघोबा को 3 लाख रुपये वार्षिक पेंशन, लेकिन पेशवाई नहीं।
  • नाना फड़नवीस ने शांति स्वीकार की लेकिन बाद में संधि तोड़ दी।
📌 नया तथ्य: मराठों ने 1777 में फ्रांसीसियों को बंदरगाह देने की पेशकश की — इससे भड़के अंग्रेजों ने युद्ध फिर शुरू किया। यही असली कारण था।
1779 बड़गांव की संधि — अंग्रेजों का सबसे बड़ा अपमान
  • महादजी सिंधिया की 'स्कोर्च्ड-अर्थ' रणनीति से अंग्रेजी सेना की रसद काट दी गई।
  • अंग्रेज कर्नल कारनेक की सेना को आत्मसमर्पण करना पड़ा।
  • शर्तें: 1773 के बाद जीती हुई सारी ज़मीन वापस + अंग्रेजी बंधक मराठों के पास।
📌 नया तथ्य (PYQ Angle): बड़गांव इकलौती ऐसी संधि थी जहाँ अंग्रेज हारकर संधि करने पर मजबूर हुए थे। बाद में हेस्टिंग्स ने इसे 'अपमानजनक' बताकर रद्द कर दिया और युद्ध जारी रखा।
1782 साल्बाई की संधि — 20 साल की शांति
  • मध्यस्थ: महादजी सिंधिया | ब्रिटिश प्रतिनिधि: डेविड एंडरसन
  • माधवराव II को पेशवा मान लिया। राघोबा को किनारे किया।
  • सालसेट अंग्रेजों के पास रही। बाकी सब वापस।
  • दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के दुश्मनों की मदद न करने का वादा किया।
🎯 Strategic Importance: साल्बाई की संधि के 20 साल की शांति में अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान (1799) को हराया और हैदराबाद को सहायक संधि में बांधा। मराठे तमाशबीन बने रहे — यही उनकी सबसे बड़ी गलती थी।
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PHASE 1 KEY FACTS FOR EXAM

✓ बड़गांव = अंग्रेजों की एकमात्र हार जहाँ संधि पर हस्ताक्षर हुए | ✓ साल्बाई मध्यस्थ = महादजी सिंधिया | ✓ सालसेट द्वीप पूरे युद्ध में अंग्रेजों के पास रहा | ✓ पुरंदर (1776) = SURAT TREATY रद्द की

🔥 द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1803–1805)

तत्कालीन GG: लॉर्ड वेलेज़ली | ब्रिटिश नीति: साम्राज्यवादी विस्तार एवं 'सहायक संधि' का आक्रामक प्रयोग

⚡ Quick Summary

कारण: बेसिन संधि (1802) में पेशवा का सहायक संधि स्वीकारना | असाय (1803): आर्थर वेलेज़ली की जीत | परिणाम: दिल्ली-आगरा पर अंग्रेजी कब्जा, मुगल अंग्रेजों के संरक्षण में

🌍 पृष्ठभूमि एवं तात्कालिक कारण

यूरोप में नेपोलियन के बढ़ते प्रभाव के कारण अंग्रेजों को भारत में फ्रांसीसी-मराठा गठजोड़ का गहरा भय था। 1800 ई. में नाना फड़नवीस की मृत्यु के साथ ही मराठा संघ को एकजुट रखने वाली अंतिम कड़ी टूट गई और मराठा सरदारों (होल्कर, सिंधिया और पेशवा) के बीच वर्चस्व का हिंसक संघर्ष शुरू हो गया।

अप्रैल 1801 में पेशवा बाजीराव द्वितीय ने दौलतराव सिंधिया के उकसावे में आकर यशवंतराव होल्कर के भाई विठोजी होल्कर को मृत्युदंड दे दिया। प्रतिशोध स्वरूप, अक्टूबर 1802 में हड़पसर (पुणे) के युद्ध में होल्कर ने पेशवा एवं सिंधिया की संयुक्त सेना को पराजित कर पुणे पर अधिकार कर लिया।

📜 प्रमुख युद्ध एवं संधियां (Mnemonic: B-D-S-R)

MNEMONIC
"Baad Dekhna Sarkar Roi" → Basein, Devgaon, Surji-Anjangaon, Rajghat

युद्ध के दौरान मराठा सरदारों ने एकजुट होकर लड़ने की बजाय अलग-अलग युद्ध किया, जिसका अंग्रेजों ने पूरा लाभ उठाया। कालक्रम के अनुसार इस संघर्ष और संधियों का विवरण इस प्रकार है:

31 दिसं 1802 1. बेसिन की संधि — पेशवा बाजीराव द्वितीय

होल्कर से पराजित होकर पेशवा बाजीराव द्वितीय ने भागकर अंग्रेजों के पास बेसिन (वसई) में आश्रय लिया और इस संधि पर हस्ताक्षर किए। मराठा सरदारों (सिंधिया और भोंसले) ने इसे राष्ट्रीय सम्मान का घोर अपमान माना, जिससे मुख्य युद्ध की शुरुआत हुई।

प्रमुख शर्तें:
  • पेशवा के दरबार में 6,000 ब्रिटिश सैनिकों की स्थायी तैनाती की जाएगी।
  • सेना के खर्च के लिए 26 लाख रुपये वार्षिक आय वाले क्षेत्र (सूरत सहित) अंग्रेजों को सौंपे गए।
  • पेशवा अंग्रेजों की अनुमति के बिना किसी भी अन्य शक्ति से युद्ध या संधि नहीं करेगा और न ही किसी यूरोपीय (खासकर फ्रांसीसी) को नौकरी पर रखेगा।
📜 विश्लेषण: इतिहासकार सिडनी ओवेन के अनुसार, "इस संधि ने प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से भारत का साम्राज्य अंग्रेजों के हाथों में सौंप दिया।"
17 दिसं 1803 2. भोंसले का संघर्ष एवं देवगांव की संधि

मराठा सम्मान की रक्षा के लिए सिंधिया और भोंसले की संयुक्त सेना ने अंग्रेजों को चुनौती दी। सितंबर 1803 में असाय (Assaye) के युद्ध में मेजर जनरल आर्थर वेलेज़ली ने मराठों को पराजित किया (वेलेज़ली ने इसे अपने सैन्य जीवन की 'वाटरलू' से भी अधिक कठिन लड़ाई बताया था)। इसके बाद नवंबर 1803 में अरगांव (Argaon) के युद्ध में भोंसले की निर्णायक हार हुई, जिसके बाद रघूजी भोंसले द्वितीय को यह संधि करनी पड़ी।

पूर्ण शर्तें:
  • अंग्रेजों को कटक (ओडिशा), बालासोर और वर्धा नदी के पश्चिम का क्षेत्र (बेरार) प्राप्त हुआ।
  • भोंसले ने अपने दरबार में एक ब्रिटिश रेजीडेंट (माउंटस्टुअर्ट एल्फिंस्टन) रखना स्वीकार किया।
  • भोंसले ने हैदराबाद के निज़ाम के विरुद्ध अपने सभी दावों (चौथ आदि) को त्याग दिया और आपसी विवादों में अंग्रेजों की मध्यस्थता स्वीकार कर ली।
  • अंग्रेजों की सहमति के बिना किसी भी यूरोपीय या अमेरिकी को सेवा में न रखने का वचन दिया।
🎯 सामरिक महत्व: कटक की प्राप्ति से अंग्रेजों का बंगाल और मद्रास प्रेसीडेंसी के मध्य सीधा भू-संपर्क (Land Route) स्थापित हो गया।
30 दिसं 1803 3. सिंधिया का संघर्ष एवं सुरजी-अंजनगांव की संधि

भोंसले की हार के साथ ही, उत्तरी मोर्चे पर नवंबर 1803 में लासवाड़ी (Laswari) और दिल्ली के युद्ध में जनरल जेरार्ड लेक (General Gerard Lake) ने सिंधिया की फ्रांसीसी प्रशिक्षित सेना को पूरी तरह नष्ट कर दिया। विवश होकर दौलतराव सिंधिया को यह अपमानजनक संधि करनी पड़ी।

पूर्ण शर्तें:
  • अंग्रेजों को गंगा-यमुना दोआब, दिल्ली, आगरा, बुंदेलखंड के कुछ हिस्से, भड़ौच और अहमदनगर का किला प्राप्त हुआ।
  • सिंधिया के दरबार में एक ब्रिटिश रेजीडेंट (सर जॉन मैल्कम) की नियुक्ति की गई।
  • सिंधिया ने पेशवा, निज़ाम और गायकवाड़ पर अपने सभी दावों को औपचारिक रूप से छोड़ दिया।
  • अपनी सेना से सभी फ्रांसीसी अधिकारियों (जैसे डे बोइन और पेरॉन) को बर्खास्त कर दिया।
🔥 मुगल सम्राट पर नियंत्रण (PYQ Hot Fact): दिल्ली पर अधिकार के बाद मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय मराठों के संरक्षण से निकलकर सीधे अंग्रेजों के संरक्षण (Pensioner) में आ गया। इससे अंग्रेजों को संपूर्ण उत्तर भारत में वैधानिक सत्ता (Legitimacy) प्राप्त हो गई।
📌 नोट: 27 फरवरी 1804 को सिंधिया ने बुरहानपुर की संधि (Treaty of Burhanpur) के तहत औपचारिक रूप से अपनी रक्षा के लिए ब्रिटिश सेना रखना भी स्वीकार कर लिया।
24 दिसं 1805 4. होल्कर का संघर्ष एवं राजघाट की संधि

जब सिंधिया और भोंसले लड़ रहे थे, तब यशवंतराव होल्कर तटस्थ रहा। बाद में उसने 1804 में डीग (Deeg) के युद्ध में अंग्रेजों का सामना किया। होल्कर ने भागकर भरतपुर (जाट राजा रणजीत सिंह) के यहाँ शरण ली। जनरल लेक ने भरतपुर के किले की घेरेबंदी (1805) की, लेकिन 4 बार हमला करने के बावजूद वह किले को जीत नहीं पाया। यह ब्रिटिश इतिहास की एक बड़ी शर्मनाक विफलता थी।

📉 वेलेज़ली की वापसी: लगातार युद्धों और भरतपुर की विफलता के कारण कंपनी का खर्च 5 करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जिससे 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' ने वेलेज़ली को वापस लंदन बुला लिया।
संधि की शर्तें:
  • नए गवर्नर-जनरल सर जॉर्ज बार्लो (Sir George Barlow) ने होल्कर के साथ 'राजघाट की संधि' की।
  • इसके तहत चंबल नदी के उत्तर का भाग अंग्रेजों के पास रहा।
  • होल्कर द्वारा राजपूताना के मामलों में हस्तक्षेप न करने के वादे पर उसे उसके शेष इलाके वापस लौटा दिए गए और शांति स्थापित की गई।

💀 तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1817–1818)

GG: लॉर्ड हेस्टिंग्स ⚠️ (वारेन हेस्टिंग्स नहीं)

⚡ Quick Summary

कारण: पिंडारी दमन का बहाना + गंगाधर शास्त्री हत्या | महिदपुर (1817): होल्कर की हार | परिणाम: पेशवाई समाप्त, बाजीराव II को बिठूर निर्वासन (नाना साहेब का 1857 से संबंध)

💡 यह युद्ध क्यों हुआ? (Immediate + Deep Causes)

Deep Cause: मराठे बेसिन संधि से बदले की फ़िराक में थे। पेशवा बाजीराव II अपनी खोई प्रतिष्ठा वापस चाहता था।

Immediate Cause: लॉर्ड हेस्टिंग्स ने पिंडारियों के दमन का बहाना बनाकर 1,13,000 सैनिकों की विशाल सेना तैनात की। पेशवा समझ गया कि यह उसके खिलाफ भी है। गंगाधर शास्त्री (गायकवाड़ का राजदूत, अंग्रेजों के संरक्षण में) की त्र्यंबकजी डेंगले ने हत्या कर दी। ब्रिटिश रेजिडेंट एल्फिंस्टन ने पेशवा को अपमानित करके जबरन 'पूना संधि' थोपी। पेशवा ने बदले में ब्रिटिश रेजिडेंसी जला दी।

🏴‍☠️ पिंडारी: कौन थे ये लोग?

  • ये मराठा सेना के अनियमित और बिना वेतन के सैनिक थे जो युद्ध में लूट से कमाते थे।
  • शांतिकाल में ये लुटेरे बन जाते थे — मध्य भारत, राजस्थान, और मद्रास तक छापे मारते थे।
  • प्रमुख नेता: चीतू, करीम खान, वासिल मुहम्मद
  • अंग्रेजों ने इन्हें 'खतरा' बताकर मराठों पर हमले का जस्टिफिकेशन बनाया।
📌 नया तथ्य: चीतू (सबसे खतरनाक पिंडारी) युद्ध में नहीं मारा गया — वह जंगल में भागा और जंगली बाघ ने उसे मार दिया। यह ऐतिहासिक रूप से दर्ज है।

⚔️ प्रमुख युद्ध: 1817-1818

नवंबर 1817 खिड़की का युद्ध → पूना संधि
  • पेशवा बाजीराव II की निर्णायक हार। पूना पर अंग्रेजी कब्जा।
  • पूना संधि: पेशवा ने मराठा संघ की अध्यक्षता हमेशा के लिए छोड़ी।
📌 नया तथ्य: पेशवा का एक जनरल अप्पा साहेब (जो बाद में नागपुर में भी लड़ा) इसी समय भाग गया था।
नवंबर 1817 सीताबर्डी का युद्ध → ग्वालियर संधि
  • अप्पा साहेब (भोंसले, नागपुर) बुरी तरह हारा।
  • भोंसले का नागपुर अंग्रेजों के नियंत्रण में।
  • सिंधिया को पहले ही ग्वालियर संधि (नवंबर 1817) करनी पड़ी — पिंडारियों के खिलाफ साथ देने की शर्त पर।
21 दिसं 1817 महिदपुर का युद्ध → मंदसौर संधि
  • ब्रिटिश जनरल थॉमस हिसलप ने मल्हार राव II (होल्कर) को हराया।
  • 5 जनवरी 1818: मंदसौर की संधि — होल्कर का राजपूताना पर दावा खत्म। नर्मदा नदी का उत्तरी भाग अंग्रेजों को।
जून 1818 पेशवा का आत्मसमर्पण — मराठा साम्राज्य का अंत
  • बाजीराव II ने जनरल माल्कम के सामने आत्मसमर्पण किया।
  • पेशवाई हमेशा के लिए खत्म। पूना पर सीधा ब्रिटिश राज।
  • बाजीराव II को 8 लाख रुपये वार्षिक पेंशन + बिठूर (कानपुर) में निर्वासन।
  • शिवाजी के वंशज प्रताप सिंह को सतारा की कठपुतली गद्दी दी।
📌 नया तथ्य (1857 Connection): बाजीराव II के दत्तक पुत्र नाना साहेब (धोंडू पंत) ने उनकी मृत्यु के बाद पेंशन न मिलने से भड़ककर 1857 के विद्रोह में कानपुर में अंग्रेजों का नरसंहार किया। यह सीधा connection है।

📜 परिणाम और ऐतिहासिक विश्लेषण

⚡ Summary

मराठों की हार के मुख्य कारण: आपसी फूट, पेशवा की कमज़ोरी, और अंग्रेजों की 'Divide and Rule' नीति। बिठूर का निर्वासन सीधे 1857 के विद्रोह से जुड़ा है।

🗺️ तीन युद्धों के बाद अंग्रेजों को क्या मिला?

युद्धअंग्रेजों को मिलामराठों ने खोया
प्रथम (1782) सालसेट, बेसिन कोई बड़ा नुकसान नहीं — यथास्थिति
द्वितीय (1805) दिल्ली, आगरा, उड़ीसा (कटक), दोआब, रोहिलखंड उत्तर भारत में प्रभाव। मुगल रक्षण खोया।
तृतीय (1818) पूना, नागपुर, मध्य भारत का बड़ा हिस्सा पेशवाई समाप्त। स्वतंत्रता खत्म।

❓ मराठे क्यों हारे? (Critical Analysis)

  • आंतरिक फूट: 5 मराठा शक्तियां कभी एकजुट नहीं हुईं। एक लड़ता था, बाकी तमाशा देखते थे।
  • पेशवा की कमज़ोरी: बाजीराव II डरपोक और अयोग्य था। नाना फड़नवीस जैसा कोई काबिल मंत्री नहीं था।
  • Subsidiary Alliance का जाल: एक-एक मराठा शक्ति को अलग करके बांध दिया।
  • Military Technology Gap: अंग्रेजों के पास trained अफसर, discipline और बेहतर artillery थी।
  • Nana Phadnavis का अभाव: 1800 के बाद मराठों में उनके जैसा कोई diplomatic genius नहीं था।

🏛️ 1857 से Connection — Nana Saheb

बिठूर में रहने वाले बाजीराव II के दत्तक पुत्र नाना साहेब (धोंडू पंत) को अंग्रेजों ने पेंशन देने से मना कर दिया। उन्होंने 1857 में कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया। तात्या टोपे उनके साथी थे। मराठा साम्राज्य का अंत और 1857 का विद्रोह सीधे जुड़े हैं।

🎯
UPSC MAINS ANGLE

Anglo-Maratha Wars → Subsidiary Alliance → बाजीराव II → नाना साहेब → 1857 — यह एक continuous chain है जो UPSC Mains में essay/answer के रूप में आ सकती है।

🎯 MCQs & PYQs

35+ प्रश्न: UPSC, State PCS (UKPSC, MPPSC, UPPSC), SSC-CGL, Railways और अन्य परीक्षाओं से संकलित। PYQ = Actual Previously Asked Question.
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