📊 Master Cheat Sheet — चारों युद्ध

⚡ 30-Second Revision

4 युद्ध → 1767-69 | 1780-84 | 1790-92 | 1799 | हैदर अली (पहले 2) → टीपू (अगले 2) | अंतिम 2 में टीपू की हार | 1799 में टीपू शहीद

परीक्षा से ठीक पहले इस Master Table से Revision करें। प्रत्येक तथ्य परीक्षा में पूछा जाने योग्य है।

📋 चारों युद्धों की तुलनात्मक तालिका

युद्धवर्षगवर्नर जनरलमैसूर का नेतृत्वतत्कालीन कारणसमाप्ति संधिपरिणाम
प्रथम 1767–1769 लॉर्ड वेरेलस्ट हैदर अली निज़ाम-EIC गठबंधन + मालाबार विवाद मद्रास की संधि (4 अप्रैल 1769) बराबरी — अंग्रेजों की किरकिरी
द्वितीय 1780–1784 वारेन हेस्टिंग्स हैदर अली → टीपू सुल्तान माहे पर कब्ज़ा + संधि उल्लंघन मंगलौर की संधि (मार्च 1784) Status Quo — अंग्रेजों के लिए शर्मनाक
तृतीय 1790–1792 लॉर्ड कॉर्नवालिस टीपू सुल्तान त्रावणकोर पर टीपू का हमला श्रीरंगपट्टम की संधि (18 मार्च 1792) टीपू की बड़ी हार — आधा राज्य गया
चतुर्थ 1799 लॉर्ड वेलेज़ली टीपू सुल्तान नेपोलियन से दोस्ती + Subsidiary Alliance से इनकार कोई संधि नहीं — टीपू शहीद मैसूर का पतन — टीपू की वीरगति

⚡ Key Battles — परीक्षा के लिए अनिवार्य

युद्ध का नामवर्षअंग्रेज कमांडरमैसूर पक्षपरिणाम
चंगामा का युद्ध1767कर्नल स्मिथहैदर + निज़ामअंग्रेज भारी क्षति
त्रिचिनोपोली का युद्ध1767कर्नल स्मिथहैदर + निज़ामहैदर की वापसी
पोलिलूर का युद्धसितंबर 1780कर्नल बेली (बंदी)टीपू/हैदरमैसूर की शानदार जीत
पोर्टो नोवोजुलाई 1781सर आयर कूटहैदर अलीहैदर पराजित
अर्नी का युद्ध1781सर आयर कूटहैदर अलीहैदर पराजित
कुम्बकोणम/अन्नागुड़ीफरवरी 1782ब्रेथवेट (बंदी)टीपू सुल्तानटीपू की जीत
बंगलौर पर कब्ज़ा1791लॉर्ड कॉर्नवालिसटीपूटीपू पराजित
श्रीरंगपट्टम का अंतिम युद्ध4 मई 1799जनरल हैरिस + आर्थर वेलेज़लीटीपू सुल्तानटीपू शहीद

👥 प्रमुख व्यक्तित्व

व्यक्तित्वभूमिकाप्रमुख योगदान/पहचान
हैदर अलीमैसूर का वास्तविक शासकमूलतः वाडेयार सेना में साधारण सिपाही → Dalavayi (सेनापति) → वास्तविक शासक। अनपढ़ किंतु सैन्य प्रतिभाशाली।
टीपू सुल्तान'शेर-ए-मैसूर'Mysorean Rockets का प्रयोग, Jacobin Club का सदस्य, Liberty Tree लगाया, फ्रांसीसी समर्थक।
सर आयर कूटअंग्रेज सेनापतिपोर्टो नोवो (1781) में हैदर को हराया। वेलेज़ली नहीं, कूट था।
लॉर्ड कॉर्नवालिसG.G. — तृतीय युद्धयॉर्कटाउन (1781) में अमेरिका से हार। भारत में टीपू को हराकर इज़्ज़त बचाई।
लॉर्ड वेलेज़लीG.G. — चतुर्थ युद्धSubsidiary Alliance का जनक। उर्फ 'Sepoy Lord'। भाई आर्थर वेलेज़ली भी युद्ध में था।
मीर सादिकटीपू का विश्वासघाती मंत्रीचतुर्थ युद्ध में अंग्रेजों का पक्ष लेकर किले का द्वार खोला। टीपू की हार का कारण।

प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध (1767 – 1769)

👤 G.G.: लॉर्ड हैरी वेरेलस्ट | मद्रास गवर्नर: लॉर्ड लॉसन बॉटेतोर्ट

⚡ Quick Summary

हैदर अली ने अंग्रेजों के त्रिगुट को तोड़ा → मद्रास तक पहुँचा → अंग्रेजों को शांति माँगनी पड़ी → मद्रास संधि (1769) — Status Quo

🌍 वैश्विक परिप्रेक्ष्य: प्लासी (1757) और बक्सर (1764) के बाद अंग्रेज बंगाल में सुदृढ़ हो चुके थे और दक्षिण भारत में आधिपत्य स्थापित करने हेतु प्रयासरत थे। हैदर अली एक अनपढ़ किंतु असाधारण सैन्य प्रतिभा-सम्पन्न व्यक्ति था जिसने वाडेयार राजाओं के अधीन साधारण घुड़सवार सैनिक के रूप में अपनी सेवा प्रारंभ की थी।

🔍 हैदर अली का उदय — पृष्ठभूमि

हैदर अली ने मैसूर राज्य में वाडेयार राजा चिक्का कृष्णराज वाडेयार द्वितीय के अधीन एक घुड़सवार सैनिक के रूप में सेवा प्रारम्भ की। अपनी असाधारण सैन्य प्रतिभा के बल पर वह क्रमशः Dalavayi (सेनापति), तत्पश्चात् मुख्यमंत्री और अंततः 1761 में मैसूर का वास्तविक शासक बन गया। फ्रांसीसी सहयोग से उसने दिंडिगुल (Dindigul) में एक आधुनिक शस्त्रागार स्थापित किया।

📌 युद्ध के बहुआयामी कारण

कारण 1ब्रिटिश-निज़ाम गठबंधन और उत्तरी सरकार विवाद
  • अंग्रेजों ने उत्तरी सरकार (Northern Circars) पाने के लिए नवंबर 1766 में निज़ाम आसफ जाह द्वितीय से संधि की — बदले में निज़ाम को हैदर अली से सुरक्षा का वचन + 7 लाख रुपये या सैन्य सहायता
  • हैदर अली ने बार-बार अंग्रेजों को गठबंधन का प्रस्ताव दिया — अंग्रेजों ने निज़ाम-संधि के विरुद्ध बताकर अस्वीकार किया।
कारण 2मालाबार तट पर व्यापारिक प्रतिस्पर्धा
  • हैदर अली ने मालाबार तट पर अधिकार कर लिया → अंग्रेजों का बहुमूल्य मसाला-व्यापार बाधित।
कारण 3फ्रांसीसी सम्पर्क से भय
  • हैदर की सेना को फ्रांसीसियों ने आधुनिक यूरोपीय सैन्य-पद्धति में प्रशिक्षित किया — दिंडिगुल में आधुनिक शस्त्रागार।
  • अंग्रेजों को फ्रांसीसी-मैसूर धुरी से दक्षिण भारत में गंभीर संकट का भय।
कारण 4 ⚡अर्कॉट विवाद — तात्कालिक कारण
  • अंग्रेजों के मित्र मुहम्मद अली खान वल्लाजाह (नवाब ऑफ अर्कॉट/कार्नेटिक) का हैदर से क्षेत्रीय विवाद।
  • हैदर ने नवाब के भाई महफ़ूज़ खान एवं चंदा साहब के पुत्र राजा साहब को शरण दे रखी थी।
  • हैदर वेल्लोर में अंग्रेजी किले की स्थापना से भी रुष्ट था।

🤝 गठबंधन का खेल — त्रिगुट बना और टूटा

यह युद्ध का सबसे महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक अध्याय है। अंग्रेजों ने निज़ाम + मराठे + EIC का त्रिगुट बनाया — हैदर ने इसे तोड़कर अपने पक्ष में कर लिया।

चरण 1अंग्रेजों का त्रिगुट — निज़ाम + मराठे + EIC
  • मराठे: जनवरी 1767 में पेशवा माधवराव I ने उत्तरी मैसूर पर आक्रमण किया — तुंगभद्रा नदी तक पहुँचे।
  • निज़ाम: नवंबर 1766 की ब्रिटिश-निज़ाम संधि के तहत निज़ाम ने दो ब्रिटिश बटालियनों के साथ मैसूर पर चढ़ाई की।
  • EIC: कर्नल जोसेफ स्मिथ के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना — तीनों मिलकर हैदर को घेरना चाहते थे।
चरण 2हैदर का मास्टरस्ट्रोक — त्रिगुट तोड़ा
  • मराठों को तटस्थ किया: हैदर ने मराठों को 35 लाख रुपये दिए (आधा तुरंत, बाकी के लिए कोलार गिरवी) → मराठे मार्च 1767 तक वापस।
  • निज़ाम को अपने साथ मिलाया: गुप्त संधि की शर्तें: हैदर निज़ाम को 18 लाख रुपये देगा + निज़ाम टीपू सुल्तान को कर्नाटक का नवाब मानेगा (विजय के बाद)।
  • परिणाम: हैदर + निज़ाम की संयुक्त सेना (70,000) ने अंग्रेजों के विरुद्ध अभियान शुरू किया।
🎯 कूटनीतिक पराक्रम: शत्रु के त्रिगुट को तोड़कर उसी के दो सदस्यों को अपनी तरफ कर लेना — यह हैदर अली की असाधारण कूटनीतिक प्रतिभा का प्रमाण था।

⚔️ युद्ध का क्रम — प्रमुख सैन्य घटनाएँ

सितंबर 1767चंगामा का युद्ध — हैदर+निज़ाम का पहला हमला
  • हैदर+निज़ाम की संयुक्त सेना (70,000) ने चंगामा (Changama) में कर्नल स्मिथ (7,000) पर हमला किया।
  • अंग्रेजी सेना को भारी क्षति — किंतु कर्नल स्मिथ डटा रहा।
सितंबर 1767तिरुवन्नमलई का युद्ध — निज़ाम का मनोबल टूटा
  • कर्नल स्मिथ ने तिरुवन्नमलई (Tiruvannamalai) में हैदर + निज़ाम की संयुक्त सेना को पराजित किया।
  • इस पराजय से निज़ाम का मनोबल टूट गया — उसने हैदर का साथ छोड़ना शुरू किया।
⚠️ PYQ ट्रैप: चंगामा में हैदर+निज़ाम ने अंग्रेजों पर हमला किया (हैदर का मामूली advantage) — तिरुवन्नमलई में कर्नल स्मिथ ने हैदर+निज़ाम को हराया। दोनों एक ही माह (सितंबर 1767) में, लेकिन परिणाम विपरीत।
23 फरवरी 1768निज़ाम का विश्वासघात — हैदर पूरी तरह अकेला
  • अंग्रेजों ने हैदराबाद पर आक्रमण की धमकी दी → निज़ाम घबराया।
  • 23 फरवरी 1768 को निज़ाम ने अंग्रेजों से नई संधि की — हैदर को विद्रोही और हड़पकर्ता (usurper) घोषित किया, और उन्हें मैसूर की दीवानी दे दी।
  • यह हैदर के साथ सबसे बड़ा कूटनीतिक धोखा था। अब हैदर पूर्णतः अकेला था।
मार्च 1769हैदर मद्रास के द्वार पर! — ऐतिहासिक लज्जा
  • मित्रविहीन होने के बावजूद हैदर अली ने हार नहीं मानी। उसने मंगलौर पर विजय प्राप्त की और सीधे मद्रास की प्राचीर के समक्ष पहुँच गया।
  • मद्रास में पूर्ण दहशत — मद्रास लगभग निरस्त्र था, सारी सेना हैदर की मुख्य सेना को रोकने में लगी थी।
🚨 ऐतिहासिक लज्जा: अंग्रेजों को स्वयं हैदर के पास जाकर शान्ति-संधि की भिक्षा माँगनी पड़ी। एक अनपढ़ भारतीय शासक ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को घुटने टेकने पर विवश किया।
4 अप्रैल 1769मद्रास की संधि (Treaty of Madras)
  • हस्ताक्षरकर्ता: हैदर अली और EIC (लॉर्ड वेरेलस्ट के प्रतिनिधि)
  • शर्त 1: दोनों पक्षों द्वारा परस्पर विजित प्रदेशों की वापसी (Status quo ante bellum)।
  • शर्त 2: युद्धबंदियों का आदान-प्रदान
  • शर्त 3 (सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण — द्वितीय युद्ध की जड़): यदि कोई तृतीय पक्ष हैदर पर आक्रमण करे, तो अंग्रेज उसकी सहायता करेंगे। → 1771 में मराठों के हमले पर अंग्रेजों ने यह वचन तोड़ा।
👑 जॉर्ज III का नाम संधि में क्यों? (PYQ Angle)
हैदर अली EIC को 'व्यापारी निकाय' मानता था, संप्रभु शासक नहीं। उसे डर था कि कंपनी के अधिकारी मुनाफे के लिए संधि तोड़ देंगे। इसलिए उसने ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज III का नाम शामिल कराया ताकि यह 'दो संप्रभु राज्यों' के बीच का अंतरराष्ट्रीय समझौता दिखे — कंपनी के भ्रष्टाचार से बचने का चतुर दांव।
परिणाम का सार: युद्ध अनिर्णायक रहा। व्यावहारिक दृष्टि से यह अंग्रेजों की नैतिक पराजय थी — एक भारतीय शासक ने ब्रिटिश सत्ता को शांति-भिक्षा माँगने पर विवश किया।

📌 ऐतिहासिक महत्त्व — परीक्षा की दृष्टि से

यह एकमात्र आंग्ल-मैसूर युद्ध था जिसमें अंग्रेज घुटने टेककर शांति माँगने विवश हुए। हैदर अली ने सिद्ध किया कि कूटनीति और सैन्य गतिशीलता से अंग्रेजों के त्रिगुट को भी तोड़ा जा सकता है। इसने मैसूर को दक्षिण भारत की सर्वाधिक शक्तिशाली क्षेत्रीय सत्ता के रूप में प्रतिष्ठित किया।

द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1780 – 1784)

👤 G.G.: वारेन हेस्टिंग्स | मद्रास गवर्नर (संधि): लॉर्ड मैकार्टनी

⚡ Quick Summary

तात्कालिक कारण: माहे पर ब्रिटिश कब्ज़ा (1779) | हैदर की मृत्यु: 7 दिसंबर 1782 | संधि: मंगलौर (1784) — Status Quo, हेस्टिंग्स के हस्ताक्षर नहीं

🌍 वैश्विक परिप्रेक्ष्य: अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम (1775–83) के दौरान फ्रांस अमेरिका में भी अंग्रेजों से युद्धरत था और भारत में हैदर अली को हथियार एवं सैन्य प्रशिक्षण प्रदान कर रहा था। यह युद्ध वस्तुतः एक अन्तर्राष्ट्रीय संघर्ष का भारतीय रंगमंच था।

🔍 पृष्ठभूमि और वास्तविक कारण

कारण 1मद्रास संधि (1769) का घोर उल्लंघन
  • 1771 में जब मराठों ने हैदर अली पर आक्रमण किया, तो अंग्रेजों ने मद्रास संधि की पारस्परिक सहायता की शर्त का उल्लंघन करते हुए कोई सैन्य सहायता नहीं प्रदान की।
  • इस धोखे से हैदर अली को अत्यंत क्रोध हुआ और वह अंग्रेजों को कभी भी विश्वसनीय नहीं मानने का निश्चय कर चुका था।
कारण 2फ्रांसीसी सम्पर्क और वैश्विक संघर्ष
  • फ्रांसीसियों ने हैदर अली की सेना को आधुनिक यूरोपीय युद्धपद्धति में प्रशिक्षित किया और उसे उन्नत हथियारों की आपूर्ति की।
  • अमेरिकी संग्राम में व्यस्त अंग्रेज भारत में फ्रांसीसी-मैसूर अक्ष को समाप्त करना चाहते थे।
कारण 3 (तात्कालिक)माहे (Mahe) पर ब्रिटिश अधिकरण — सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण
  • मालाबार तट पर स्थित माहे (Mahe) एक फ्रांसीसी उपनिवेश था जो हैदर अली के राज्य की सीमा के अन्तर्गत और उसके संरक्षण (Protectorate) में था।
  • मार्च 1779 में अंग्रेजों ने हैदर की अनुमति के बिना माहे पर आक्रमण करके उस पर अधिकार कर लिया।
  • यह हैदर अली के स्वाभिमान और सम्प्रभुता पर प्रत्यक्ष आघात था। उसने युद्ध की घोषणा कर दी।
⚠️ परीक्षा बिन्दु: माहे पर कब्ज़ा द्वितीय युद्ध का Trigger Point (तात्कालिक कारण) था। मद्रास संधि उल्लंघन पूर्ववर्ती कारण था।

🤝 हैदर अली का महागठबंधन (Grand Triple Alliance)

हैदर अली सुस्पष्ट रूप से जानता था कि अकेले वह अंग्रेजों को परास्त नहीं कर सकता। अतः उसने कुशल कूटनीति द्वारा निज़ाम (हैदराबाद) + मराठे + मैसूर का एक शक्तिशाली महागठबंधन निर्मित किया।

गठबंधन में
हैदर अली + निज़ाम + मराठे
हैदर की सेना
80,000 सैनिक + 100 तोपें
आक्रमण वर्ष
जुलाई 1780
लक्ष्य
कर्नाटक (Carnatic)

⚔️ युद्ध का क्रम — प्रमुख सैन्य-कूटनीतिक घटनाएँ

जुलाई 1780हैदर का प्रलयंकारी आक्रमण
  • हैदर अली ने 80,000 सैनिकों और 100 तोपों के साथ कर्नाटक पर धावा बोल दिया।
  • उसने अंग्रेज सेनापति कर्नल बेली (Colonel William Baillie) को पोलिलूर (Pollilur) के युद्ध (सितंबर 1780) में बुरी तरह पराजित किया। बेली को बंदी बना लिया गया।
  • कर्नाटक की राजधानी अर्कॉट (Arcot) पर हैदर ने कब्ज़ा कर लिया। मद्रास में अंग्रेज दहशत में थे।
🚀 Mysorean Rockets — ऐतिहासिक तकनीक: पोलिलूर के युद्ध में टीपू/हैदर ने लोहे के नलियों वाले Mysorean Rockets का प्रयोग किया जो अंग्रेजों ने पहले कभी नहीं देखे थे। इनकी मारक क्षमता 2 किलोमीटर तक थी। बाद में इन्हीं से प्रेरणा लेकर अंग्रेजों ने Congreve Rocket बनाया।
1781वारेन हेस्टिंग्स का कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक — त्रिगुट को तोड़ा
  • निज़ाम को तोड़ा: हेस्टिंग्स ने निज़ाम को गुंटूर (Guntur) का विवादित क्षेत्र वापस देकर उसे हैदर के गठबंधन से अलग कर दिया।
  • मराठों को तोड़ा: महादजी सिंधिया (Mahadji Sindhia) की मध्यस्थता से मराठों के साथ साल्बाई की संधि (Treaty of Salbai, 1782) सम्पन्न की। मराठे युद्ध से बाहर हो गए।
  • परिणाम: हैदर अली अब कूटनीतिक रूप से पूर्णतः एकाकी पड़ गया, तथापि उसने हार नहीं मानी।
जुलाई 1781पोर्टो नोवो का निर्णायक युद्ध — हैदर की पराजय
  • हेस्टिंग्स ने अपने सर्वाधिक अनुभवी सेनापति सर आयर कूट (Sir Eyre Coote) को मद्रास भेजा।
  • पोर्टो नोवो (Porto Novo) के युद्ध में सर आयर कूट ने हैदर अली को निर्णायक पराजय दी।
  • इसके पश्चात् अर्नी (Arni) और शोलिंगुर (Sholingur, नवंबर 1781) के युद्धों में भी हैदर पराजित हुआ।
⚠️ परीक्षा बिन्दु: पोर्टो नोवो में हैदर को पराजित करने वाला सर आयर कूट था — वारेन हेस्टिंग्स नहीं! हेस्टिंग्स कलकत्ता में कूटनीति संचालित कर रहे थे।
फरवरी 1782कुम्बकोणम — टीपू की जीत, ब्रेथवेट बंदी
  • टीपू सुल्तान ने कुम्बकोणम (Kumbakonam)/ अन्नागुड़ी के युद्ध में अंग्रेज सेनापति कर्नल ब्रेथवेट (Colonel Braithwaite) को पराजित कर उसे बंदी बना लिया।
  • इस युद्ध में मैसूर के Mysorean Rockets का पुनः प्रभावी प्रयोग हुआ।
7 दिसंबर 1782हैदर अली की मृत्यु — युद्ध का महत्त्वपूर्ण मोड़
  • युद्ध के मध्य में ही हैदर अली की कैंसर (Cancer) से मृत्यु हो गई।
  • उनके पुत्र टीपू सुल्तान ने सैन्य नेतृत्व ग्रहण किया और अगले 2 वर्षों तक युद्ध जारी रखा।
  • टीपू ने 1783 में अंग्रेज ब्रिगेडियर मैथ्यूज (Matthews) को भी बंदी बनाया।
मार्च 1784मंगलौर की संधि (Treaty of Mangalore)
  • हस्ताक्षरकर्ता: टीपू सुल्तान एवं मद्रास के गवर्नर लॉर्ड मैकार्टनी (Lord Macartney)
  • शर्तें: दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के अधिकृत प्रदेश और युद्धबंदी वापस किए। पुनः Status Quo (यथापूर्व स्थिति) बहाल हुई।
  • यह किसी भारतीय शासक के साथ अंग्रेजों की अंतिम संधि जो समकक्ष आधार पर सम्पन्न हुई — मतलब अंग्रेज हारे नहीं जीते भी नहीं।
🚨 हेस्टिंग्स का क्रोध: वारेन हेस्टिंग्स इस संधि के घोर विरोधी थे। उन्होंने मैकार्टनी की कड़ी भर्त्सना की — "यह शान्ति नहीं, अपितु एक अपमानजनक युद्धविराम है!" इसलिए संधि पर हेस्टिंग्स के हस्ताक्षर नहीं हैं।

🐯 टीपू सुल्तान — व्यक्तित्व, प्रशासन एवं सुधार

📌 तृतीय एवं चतुर्थ युद्ध की गहरी समझ के लिए अनिवार्य पृष्ठभूमि

⚡ Quick Summary

उपाधियाँ: शेर-ए-मैसूर, नागरिक टीपू, सुल्तान | मुद्रा: अहमदी, फारूकी (सोना), इमामी (चाँदी) | सुधार: रेशम उद्योग, रैयतवाड़ी, नौसेना बोर्ड (1796), Mysorean Rockets

🎯 परीक्षा की दृष्टि: टीपू सुल्तान की उपाधियाँ, मुद्रा प्रणाली, धार्मिक नीति, प्रशासनिक एवं सैन्य सुधार — ये तथ्य UPSC, State PSC एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं।

👑 उपाधियाँ एवं पहचान (Titles & Identity)

उपाधि 1शेर-ए-मैसूर (Tiger of Mysore)
  • अपनी अदम्य वीरता के कारण टीपू को शेर-ए-मैसूर की उपाधि मिली।
  • इसका राज्य-चिह्न बाघ (Tiger) था — झंडे, हथियारों और सिंहासन पर बाघ की आकृति उकेरी जाती थी।
उपाधि 2नागरिक टीपू (Citizen Tipu / Citoyen Tipoo)
  • टीपू फ्रांसीसी क्रांति से अत्यधिक प्रभावित था। उसने जैकोबिन क्लब (Jacobin Club) की सदस्यता ग्रहण की।
  • उसने स्वयं को 'नागरिक टीपू' (Citoyen Tipoo) कहलाना पसंद किया — फ्रांसीसी प्रजातांत्रिक परम्परा के अनुरूप।
  • श्रीरंगपट्टम में Liberty Tree (स्वतंत्रता-वृक्ष) लगाया — फ्रांसीसी क्रांति के प्रतीक के रूप में।
उपाधि 3सुल्तान की विधिवत उपाधि
  • टीपू ने खलीफा से मान्यता (सनद) प्राप्त कर विधिवत 'सुल्तान' की उपाधि धारण की।
ब्रिटिश दृष्टिकोण
अंग्रेज इसे 'सीधा-साधा दैत्य' (Straightforward Tyrant) कहते थे — क्योंकि यह उनके साम्राज्यवादी विस्तार में सबसे बड़ी बाधा था।
थॉमस मुनरो का कथन
गवर्नर थॉमस मुनरो ने टीपू सुल्तान को 'अशांत आत्मा' (Restless Spirit) कहा था।

🪙 मुद्रा प्रणाली (Currency System)

टीपू सुल्तान ने एक स्वतंत्र शासक के रूप में अपने नाम के सिक्के चलवाए।

धातुसिक्के का नामविशेष तथ्य
सोना (Gold) अहमदी (Ahmadi) एवं फारूकी (Faruqi) परीक्षा में दोनों नाम पूछे जाते हैं
चाँदी (Silver) इमामी (Imami)
💡 हैदर अली का धर्मनिरपेक्ष प्रमाण: टीपू के पिता हैदर अली ने अपने सिक्कों पर शिव-पार्वती की आकृतियाँ अंकित करवाई थीं — यह मैसूर राज्य की धार्मिक सहिष्णुता (Secularism) का उल्लेखनीय प्रमाण है।

🛕 धार्मिक नीति एवं सहिष्णुता

तथ्य 1श्रृंगेरी मठ का पुनर्निर्माण
  • मराठों के आक्रमण से क्षतिग्रस्त श्रृंगेरी मठ के पुनर्निर्माण और देवी सरस्वती (शारदा) की मूर्ति की पुनर्स्थापना के लिए टीपू ने स्वयं धन भिजवाया।
  • यह उसकी वास्तविक धर्मनिरपेक्षता का ऐतिहासिक साक्ष्य है।
तथ्य 2श्रीरंगपट्टनम दुर्ग के मंदिरों का संरक्षण
  • किले के भीतर स्थित श्री रंगनाथस्वामी मंदिर एवं नरसिंह मंदिर का टीपू ने पूर्ण संरक्षण किया।

📅 कैलेंडर एवं भाषा सुधार

सुधार 1मौलूदी कैलेंडर (Mauludi Calendar)
  • टीपू ने चंद्र-सौर (Luni-solar) प्रणाली पर आधारित एक नया कैलेंडर जारी किया।
  • इसे 'मौलूदी कैलेंडर' (Mauludi Calendar) कहा जाता था।
सुधार 2वर्ष व महीनों का अरबी नामकरण
  • पारम्परिक प्रणाली के स्थान पर वर्ष और महीनों के नाम अरबी भाषा में लिखे जाने की शुरुआत की।

🏛️ प्रशासनिक एवं कूटनीतिक सुधार

सुधार 1पाश्चात्य प्रशासनिक व्यवस्था — प्रथम भारतीय शासक
  • टीपू सुल्तान भारत का प्रथम शासक था जिसने अपनी प्रशासनिक एवं सैन्य व्यवस्था को यूरोपीय (पाश्चात्य) तर्ज़ पर आधुनिक बनाया।
सुधार 2अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति — विदेशों में राजदूत
  • अंग्रेजों के विरुद्ध समर्थन जुटाने हेतु टीपू ने फ्रांस, तुर्की (Ottoman Empire), ईरान एवं मॉरीशस (Isle de France) में अपने राजदूत भेजे।
सुधार 3प्रांतीय विभाजन — आसफी टुकड़ी (Asafi Tukdi)
  • टीपू ने अपने साम्राज्य को प्रांतों में विभाजित किया, जिन्हें 'आसफी टुकड़ी' (Asafi Tukdi) कहा जाता था।
  • प्रत्येक प्रांत का प्रमुख 'आसफ' कहलाता था।

🌾 आर्थिक एवं कृषि सुधार

सुधार 1रेशम उद्योग (Sericulture) — कर्नाटक को केंद्र बनाया
  • टीपू ने कर्नाटक (मैसूर) को रेशम उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाया।
  • विशेष रूप से बंगाल से शहतूत (Mulberry) की खेती और रेशम के कीड़े मँगवाए।
🌿 परीक्षा बिन्दु: आज भी कर्नाटक भारत का सर्वाधिक रेशम उत्पादक राज्य है — इसकी नींव टीपू सुल्तान के Sericulture सुधारों ने रखी।
सुधार 2जमींदारी प्रथा का अंत — रैयतवाड़ी की दिशा में
  • टीपू ने जमींदारों / पॉलीगारों की मध्यस्थता समाप्त की और किसानों से सीधा सम्पर्क स्थापित किया।
  • इस प्रकार एक प्रकार की रैयतवाड़ी व्यवस्था लागू की — यह अपने समय से आगे का विचार था।
सुधार 3तकावी ऋण (Taccavi Loans) एवं राज्य एकाधिकार
  • कृषि को प्रोत्साहन देने हेतु किसानों को सीधे तकावी ऋण (कृषि ऋण) प्रदान किए।
  • एक वाणिज्यिक बोर्ड (Board of Trade) का गठन किया।
  • काली मिर्च, नमक एवं चंदन (Sandalwood) के लाभदायक व्यापार पर राज्य का एकाधिकार (State Monopoly) स्थापित किया।
सुधार 4भू-राजस्व व्यवस्था का वैज्ञानिक आधार
  • भूमि की उर्वरता और सिंचाई सुविधाओं के आधार पर कर 1/3 से 1/2 भाग तक निर्धारित किया गया।

⚓ सैन्य एवं नौसेना आधुनिकीकरण

सुधार 1नौसेना बोर्ड (Board of Admiralty) — 1796 ई.
  • समुद्री सुरक्षा सुदृढ़ करने हेतु टीपू ने 1796 ई. में नौसेना बोर्ड (Board of Admiralty) का गठन किया।
सुधार 2डॉकयार्ड (Dockyards) — तीन प्रमुख बंदरगाह
  • जहाज़-निर्माण और नौसेना के लिए मंगलौर (Mangalore), वाजिदाबाद एवं मौलिदाबाद (Molidabad) में डॉकयार्ड स्थापित किए।
⚠️ PYQ बिन्दु: नौसेना बोर्ड की स्थापना वर्ष 1796 ई. और तीनों डॉकयार्ड के नाम — ये परीक्षाओं में सीधे पूछे जाते हैं।
सुधार 3फ्रांसीसी सहयोग — Lieutenant Ripaud
  • सेना को प्रशिक्षित करने और जैकोबिन क्लब की स्थापना में सहयोग के लिए फ्रांसीसी अधिकारी रिपो (Lieutenant Ripaud) को अपनी सेना में महत्त्वपूर्ण स्थान दिया।

💬 टीपू सुल्तान के प्रसिद्ध कथन (Famous Quotes — परीक्षा अनिवार्य)

कथन 1 — नौसेना की शक्ति पर
"मैं अंग्रेजों के साधनों को थल से तो समाप्त कर सकता हूँ, परंतु समुद्र को सुखा नहीं सकता।"
→ अंग्रेजों की शक्तिशाली नौसेना के सन्दर्भ में
कथन 2 — वीरता पर
"भेड़ की तरह एक लंबा जीवन (100 वर्ष) जीने से कहीं अच्छा है कि एक दिन शेर की तरह जिया जाए।"
4 मई 1799 की शहादत का पूर्वाभास

तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1790 – 1792)

👤 G.G.: लॉर्ड चार्ल्स कॉर्नवालिस | प्रथम चरण सेनापति: जनरल मेडोज़

⚡ Quick Summary

तात्कालिक कारण: त्रावणकोर पर टीपू का हमला | संधि: श्रीरंगपट्टम (18 मार्च 1792) | टीपू खो बैठा: आधा राज्य + 3 करोड़ रुपये + 2 पुत्र बंधक

🌍 वैश्विक परिप्रेक्ष्य: यह वही कॉर्नवालिस है जो 1781 में अमेरिका के यॉर्कटाउन (Yorktown) में वाशिंगटन की सेना के सामने आत्मसमर्पण कर चुका था। भारत उसके लिए प्रतिष्ठा पुनर्स्थापित करने का अवसर था। फ्रांसीसी क्रांति (1789) के कारण फ्रांस आंतरिक उथल-पुथल में व्यस्त था।

📌 युद्ध के बहुआयामी कारण

कारण 1मंगलौर संधि की शर्तों का उल्लंघन
  • टीपू सुल्तान ने मंगलौर संधि (1784) की शर्त के अनुसार ब्रिटिश युद्धबंदियों को मुक्त करने से इनकार कर दिया।
  • उसने मंगलौर संधि को अपमानजनक मानते हुए पुनः युद्ध का संकल्प लिया था।
कारण 2टीपू की विदेश नीति — फ्रांस और तुर्की से सहायता का प्रयास
  • टीपू ने 1789 में फ्रांस एवं तुर्की (Ottoman Empire) में अपने राजदूत भेजे और सैन्य गठबंधन का अनुरोध किया।
  • यह अंग्रेजों के लिए एक गंभीर खतरे का संकेत था। कॉर्नवालिस ने इसे युद्ध के औचित्य के रूप में प्रस्तुत किया।
कारण 3 (तात्कालिक)त्रावणकोर पर आक्रमण — सबसे महत्त्वपूर्ण
  • त्रावणकोर (Travancore) के राजा ने कोचीन (Cochin) के डचों से जालकोट्टा और कन्नानोर के किले खरीदे थे।
  • ये किले पूर्व में कोचीन का भाग थे जो टीपू को कर देता था — टीपू ने इसे अपनी प्रभुसत्ता का अतिक्रमण माना।
  • दिसंबर 1789 में टीपू ने नेडुमकोट्टा (Nedumkotta) — त्रावणकोर की सुदृढ़ रक्षापंक्ति — पर आक्रमण कर दिया।
  • चूँकि त्रावणकोर अंग्रेजों का संरक्षित राज्य (Protected State) था, कॉर्नवालिस ने इसे अंग्रेजों पर आक्रमण माना और युद्ध घोषित किया।
🌶️ महत्त्वपूर्ण तथ्य: त्रावणकोर ईस्ट इंडिया कंपनी को काली मिर्च (Pepper) की आपूर्ति का एकमात्र प्रमुख स्रोत था। टीपू का शत्रु मालाबार से निष्कासित राजाओं को भी त्रावणकोर ने शरण दी थी।

⚔️ युद्ध का क्रम — दो चरण

1790 (प्रथम चरण)जनरल मेडोज़ की विफलता — टीपू भारी पड़ा
  • कॉर्नवालिस ने प्रथम चरण में जनरल मेडोज़ (General Medows) को सेना का नेतृत्व सौंपा।
  • टीपू ने मेडोज़ की सेना को पराजित किया और कर्नाटक में घुसकर लूटपाट की।
  • टीपू ने पॉण्डिचेरी (Pondicherry) में फ्रांसीसी प्रतिनिधियों से सहायता माँगी किंतु फ्रांसीसी क्रांति (1789) में व्यस्त होने के कारण उसे कोई मदद नहीं मिली।
  • इस विफलता के पश्चात् मेडोज़ ने मद्रास में कमान कॉर्नवालिस को सौंप दी।
1791 (द्वितीय चरण)कॉर्नवालिस का निर्णायक अभियान — बंगलौर विजय
  • कॉर्नवालिस ने स्वयं एक विशाल सेना का नेतृत्व करते हुए अम्बूर, वेल्लोर और बंगलौर (Bangalore) पर कब्ज़ा किया।
  • कॉर्नवालिस का कूटनीतिक त्रिगुट: अंग्रेज + निज़ाम + मराठे — टीपू तीनों ओर से घिरा।
  • निज़ाम की सेना (नेतृत्व: महाबत जंग) ने उत्तर से तथा मराठा सेना (नेतृत्व: हर्री पंत, 25,000 घुड़सवार + 5,000 पैदल) ने पूना से अभियान किया।
  • कॉर्नवालिस श्रीरंगपट्टम के निकट पहुँचा। टीपू पराजित होने पर विवश हुआ।
महत्त्वपूर्ण: कॉर्नवालिस और मेडोज़ दोनों अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में एक-साथ लड़ चुके थे — यह उनका व्यक्तिगत सम्बन्ध था।
18 मार्च 1792श्रीरंगपट्टम की संधि (Treaty of Seringapatam)
  • भूमि-अधिसमर्पण: टीपू को अपना लगभग आधा राज्य तीनों विजेताओं में विभाजित करना पड़ा।
    • अंग्रेजों को: बारामहल, डिंडिगुल, मालाबार, कूर्ग
    • निज़ाम को: कृष्णा नदी के दक्षिण का क्षेत्र
    • मराठों को: तुंगभद्रा नदी एवं उसकी सहायक नदियों के आसपास के क्षेत्र
  • युद्ध-क्षतिपूर्ति: 3 करोड़ रुपये का भुगतान।
  • बंधक (Hostages): 26 फरवरी 1792 को टीपू के दो पुत्रों — अब्दुल खालिक और मुइज़ुद्दीन — को कॉर्नवालिस के पास बंधक के रूप में सौंपा गया। राशि का आधा भुगतान होने पर उन्हें वापस किया गया।
💔 टीपू की व्यथा: अपने पुत्रों को बंधक के रूप में जाते देख टीपू ने कहा था — "मैसूर के शेर की एक दिन की ज़िंदगी उस सियार की हज़ार साल की ज़िंदगी से बेहतर है।"

📌 तृतीय युद्ध का ऐतिहासिक महत्त्व

तृतीय युद्ध ने मैसूर की शक्ति को निर्णायक रूप से क्षीण कर दिया। टीपू ने आधा राज्य खोया, 3 करोड़ रुपये दिए और अपने पुत्रों को बंधक बनते देखा। किंतु वह टूटा नहीं — उसने चतुर्थ युद्ध की तैयारी प्रारम्भ कर दी।

चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध (1799)

👤 G.G.: लॉर्ड वेलेज़ली (उपनाम: 'Sepoy Lord') | सेनापति: जनरल जॉर्ज हैरिस

⚡ Quick Summary

कारण: नेपोलियन-टीपू पत्राचार + Subsidiary Alliance से इनकार | मीर सादिक का विश्वासघात | टीपू शहीद: 4 मई 1799 | मैसूर → वाडेयार III (Princely State)

🌍 वैश्विक परिप्रेक्ष्य: नेपोलियन बोनापार्ट यूरोप में तूफान बन चुका था। 1798 में उसने मिस्र (Egypt) पर आक्रमण किया था। टीपू और नेपोलियन के बीच पत्राचार अंग्रेजों के लिए अस्तित्वगत खतरा था। किन्तु नील नदी के युद्ध (Battle of the Nile, 1798) में नेल्सन ने फ्रांसीसी नौसेना को ध्वस्त कर दिया।

📌 युद्ध के बहुआयामी कारण

कारण 1नेपोलियन-टीपू पत्राचार — सर्वाधिक गंभीर कारण
  • टीपू ने फ्रांसीसी डायरेक्टरी (French Directory) एवं नेपोलियन को पत्र लिखकर सैन्य गठबंधन का अनुरोध किया।
  • उसने Isle de France (मॉरीशस) के फ्रांसीसी गवर्नर तथा अफगानिस्तान और अरब में भी गठबंधन हेतु राजदूत भेजे।
  • टीपू ने Jacobin Club की सदस्यता ग्रहण की और श्रीरंगपट्टम में Liberty Tree लगाया।
  • उसने अपने को 'Citoyen Tipoo' (नागरिक टीपू) कहा।
कारण 2सहायक संधि (Subsidiary Alliance) से इनकार
  • वेलेज़ली ने टीपू के समक्ष सहायक संधि (Subsidiary Alliance) स्वीकार करने की माँग रखी।
  • टीपू ने स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया। यह उसकी प्रभुसत्ता और स्वाभिमान का प्रश्न था।
🦁 टीपू का प्रसिद्ध कथन: "Better to die like a soldier than to live a miserable dependent on the infidels." (अविश्वासियों पर निर्भर रहकर दयनीय जीवन जीने से एक सैनिक की भाँति मरना श्रेयस्कर है।)
कारण 31796 में वाडेयार राजकुमार का दावा अस्वीकार
  • 1796 में वाडेयार वंश के हिंदू राजा की मृत्यु हो गई। टीपू ने उनके अल्पवयस्क पुत्र का राज्याभिषेक करने से इनकार कर दिया और स्वयं को मैसूर का सुल्तान घोषित कर दिया।
  • यह अंग्रेजों को मैसूर पर आक्रमण का एक और बहाना प्रदान कर गया।
कारण 4वेलेज़ली का आक्रामक साम्राज्यवाद
  • वेलेज़ली की 'Subsidiary Alliance' नीति का उद्देश्य समस्त भारत को अंग्रेजी प्रभाव में लाना था।
  • टीपू का स्वतंत्र मैसूर इस योजना में सर्वाधिक बाधक था — अतः उसे समूल नष्ट करना आवश्यक था।
  • वेलेज़ली ने टीपू पर झूठे आरोप भी लगाए। टीपू के स्पष्टीकरण को उसने अस्वीकार कर दिया।

🤝 वेलेज़ली का महागठबंधन

वेलेज़ली ने टीपू के विरुद्ध वही रणनीति अपनाई जो कॉर्नवालिस ने अपनाई थी। उसने निज़ाम + मराठे + अंग्रेज का त्रिगुट बनाया।

युद्ध प्रारम्भ
17 अप्रैल 1799
मुख्य सेनापति
जनरल जॉर्ज हैरिस
महत्त्वपूर्ण सहयोगी
आर्थर वेलेज़ली
बलों का अनुपात
4:1 — मैसूर के विरुद्ध

⚔️ श्रीरंगपट्टम का अंतिम युद्ध — एक वीरगाथा

अप्रैल 1799श्रीरंगपट्टम की घेराबंदी
  • जनरल हैरिस की मुख्य सेना ने पूर्व से, आर्थर वेलेज़ली (Arthur Wellesley) — भावी ड्यूक ऑफ वेलिंगटन — की सेना ने पश्चिम से, निज़ाम एवं मराठों ने उत्तर से आक्रमण किया।
  • टीपू की सेना संख्या और संसाधन दोनों में अत्यंत अल्प थी।
मीर सादिक का विश्वासघातटीपू की पराजय का प्रमुख कारण
  • टीपू के मंत्री मीर सादिक (Mir Sadiq) ने अंग्रेजों से गुप्त समझौता कर लिया था।
  • अंतिम युद्ध के समय उसने किले का एक महत्त्वपूर्ण जल-द्वार (Water Gate) खोल दिया और अपनी सेना को पीछे हटा लिया।
  • इसी विश्वासघात से अंग्रेज किले में प्रवेश कर पाए।
🚨 टीपू की व्यथा: कहा जाता है कि टीपू को अंत तक मीर सादिक के विश्वासघात का पता नहीं चला था।
4 मई 1799टीपू सुल्तान की शहादत
  • टीपू सुल्तान ने किले के वाटर गेट (Water Gate) के निकट अंतिम श्वास तक युद्ध किया।
  • उसके शव के चारों ओर अनेक ब्रिटिश सैनिकों के शव भी पाए गए — यह उसके असाधारण साहस का प्रमाण था।
  • वेलेज़ली ने टीपू की मृत्यु पर कहा — "आज भारत हमारा है!"
🦁 Mechanical Tiger (यांत्रिक बाघ): टीपू की पहचान थी उसका Mechanical Tiger — एक यांत्रिक खिलौना जिसमें एक बाघ एक अंग्रेज सैनिक को दबाए हुए था। श्रीरंगपट्टम की लूट में यह भी ले जाया गया। यह आज लंदन के Victoria & Albert Museum में प्रदर्शित है।

📋 युद्धोत्तर परिणाम — मैसूर का भाग्य

भूमि विभाजनमैसूर का विभाजन
  • अंग्रेजों को: कन्नड़ (Kanara), वायनाड (Wayanad), कोयंबटूर (Coimbatore), दर्वार और श्रीरंगपट्टम
  • निज़ाम को: कृष्णा नदी और तुंगभद्रा के बीच का क्षेत्र
  • मराठों को: उत्तरी मैसूर के कुछ भाग
वाडेयार राजवंश की पुनर्स्थापनाकठपुतली राजा
  • अंग्रेजों ने वाडेयार वंश के बालक कृष्णराज वाडेयार III को मैसूर की गद्दी पर बैठाया।
  • किंतु उन्हें सहायक संधि (Subsidiary Alliance) स्वीकार करनी पड़ी।
  • मैसूर में एक ब्रिटिश रेजिडेंट नियुक्त किया गया। मैसूर एक Princely State (देशी रियासत) बन गया जो 1947 तक चली।
टीपू के परिवार का भविष्यनिर्वासन
  • टीपू के परिवार को अंग्रेजों ने वेल्लोर (Vellore) में नज़रबंद किया।
  • टीपू का खजाना, पुस्तकालय एवं प्रसिद्ध Mechanical Tiger लूट लिए गए।

🚨 परीक्षा के उच्च-महत्त्व वाले ट्रैप्स & PYQ

ये वे बिन्दु हैं जहाँ UPSC / State PSC परीक्षाएँ बार-बार भ्रमित करने का प्रयास करती हैं। इन्हें सावधानीपूर्वक स्मरण करें।
🚨 ट्रैप 1 — प्रथम युद्ध का परिणाम
❓ "प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध में अंग्रेजों ने हैदर अली को हराया।" — सत्य या असत्य?
✅ पूर्णतः असत्य। प्रथम युद्ध में हैदर अली ने अंग्रेजों को मद्रास तक खदेड़ दिया और अंग्रेजों को स्वयं हैदर के पास जाकर मद्रास की संधि (1769) पर हस्ताक्षर करने पड़े। यह अंग्रेजों की नैतिक पराजय थी।
🚨 ट्रैप 2 — द्वितीय युद्ध का तात्कालिक कारण
❓ द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध का 'Trigger Point' (तात्कालिक कारण) क्या था?
माहे (Mahe) की फ्रांसीसी बस्ती पर ब्रिटिश अधिकरण (मार्च 1779)। यद्यपि मद्रास संधि का उल्लंघन (1771) पृष्ठभूमि-कारण था, किंतु तात्कालिक कारण माहे पर कब्ज़ा था।
🚨 ट्रैप 3 — पोर्टो नोवो का सेनापति
❓ पोर्टो नोवो (1781) के युद्ध में हैदर अली को किसने पराजित किया?
सर आयर कूट (Sir Eyre Coote) ने — वारेन हेस्टिंग्स ने नहीं। हेस्टिंग्स कलकत्ता में बैठकर कूटनीति संचालित कर रहे थे।
🚨 ट्रैप 4 — मंगलौर की संधि के हस्ताक्षरकर्ता
❓ "मंगलौर की संधि (1784) पर वारेन हेस्टिंग्स ने हस्ताक्षर किए।" — सत्य या असत्य?
✅ पूर्णतः असत्य। संधि पर टीपू सुल्तान और मद्रास के गवर्नर लॉर्ड मैकार्टनी के हस्ताक्षर हुए। हेस्टिंग्स इस संधि के घोर विरोधी थे।
🚨 ट्रैप 5 — अमेरिकी संग्राम और भारत
❓ भारत के किस युद्ध पर अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम (1775-83) का प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा?
द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1780-84) — क्योंकि फ्रांस, अमेरिका में भी अंग्रेजों से युद्धरत था और भारत में हैदर को सैन्य सहायता दे रहा था।
🚨 ट्रैप 6 — तृतीय युद्ध का प्रथम चरण सेनापति
❓ तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के प्रथम चरण में कौन सा ब्रिटिश सेनापति पराजित हुआ?
जनरल मेडोज़ (General Medows) — जो 1790 में टीपू से हार गए। इसके बाद कॉर्नवालिस ने स्वयं कमान सँभाली।
🚨 ट्रैप 7 — श्रीरंगपट्टम संधि (1792) की सम्पूर्ण शर्तें
❓ तृतीय युद्ध में टीपू ने क्या-क्या खोया?
1) लगभग आधा राज्य (बारामहल, डिंडिगुल, मालाबार, कूर्ग — अंग्रेज; कृष्णा क्षेत्र — निज़ाम; तुंगभद्रा क्षेत्र — मराठे) 2) 3 करोड़ रुपये युद्ध-क्षतिपूर्ति 3) दो पुत्र बंधक (26 फरवरी 1792 को सुपुर्द)। केवल "आधा राज्य" लिखना अधूरा उत्तर है।
🚨 ट्रैप 8 — टीपू की शहादत की सटीक तिथि
❓ टीपू सुल्तान की मृत्यु कब और कहाँ हुई?
4 मई 1799 को श्रीरंगपट्टम (Seringapatam) के किले के वाटर गेट (Water Gate) के निकट युद्ध करते हुए। यह चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध था।
🚨 ट्रैप 9 — कॉर्नवालिस और यॉर्कटाउन
❓ तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के G.G. कौन थे और उनकी अमेरिका में क्या भूमिका थी?
लॉर्ड कॉर्नवालिस — जो 1781 में अमेरिकी यॉर्कटाउन (Yorktown) में जॉर्ज वाशिंगटन के सामने आत्मसमर्पण कर चुके थे। भारत में उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा पुनर्स्थापित की।
🚨 ट्रैप 10 — टीपू के विश्वासघाती मंत्री
❓ चतुर्थ युद्ध में किसने टीपू के साथ विश्वासघात किया?
मीर सादिक (Mir Sadiq) — जिसने अंग्रेजों से गुप्त समझौता करके किले का जल-द्वार खोल दिया और अपनी सेना को पीछे हटा लिया।
🚨 ट्रैप 11 — Mysorean Rockets
❓ Mysorean Rockets किस युद्ध में प्रमुखता से प्रयुक्त हुए और इनकी विशेषता क्या थी?
पोलिलूर (1780) और कुम्बकोणम (1782) में। विशेषता: लोहे की नलियों में प्रणोदक भरे थे → 2 किमी तक मारक क्षमता। बाद में इन्हीं से अंग्रेजों ने Congreve Rocket बनाया।
🚨 ट्रैप 12 — चतुर्थ युद्ध के बाद मैसूर
❓ चतुर्थ युद्ध के बाद मैसूर को किसे दिया गया और किन शर्तों पर?
वाडेयार वंश के कृष्णराज वाडेयार III को मैसूर की गद्दी दी गई, किंतु उन्हें सहायक संधि (Subsidiary Alliance) स्वीकार करनी पड़ी। मैसूर 1947 तक एक Princely State रही।

✅ सभी संधियाँ — अंतिम सार-तालिका

युद्धसंधितिथिहस्ताक्षरकर्तापरिणाम
प्रथममद्रास की संधि4 अप्रैल 1769हैदर अली + EIC (वेरेलस्ट)Status Quo — अंग्रेजों की नैतिक हार
द्वितीयमंगलौर की संधिमार्च 1784टीपू + लॉर्ड मैकार्टनीStatus Quo — हेस्टिंग्स के हस्ताक्षर नहीं
तृतीयश्रीरंगपट्टम की संधि18 मार्च 1792टीपू + कॉर्नवालिसआधा राज्य + 3 करोड़ + 2 पुत्र बंधक
चतुर्थकोई संधि नहीं4 मई 1799टीपू शहीद — मैसूर अंग्रेजी आधिपत्य में