यूरोप में पुनर्जागरण एवं धर्म सुधार
मुख्य विषय: मध्यकालीन यूरोप से आधुनिक यूरोप की ओर बदलाव, पुनर्जागरण (Renaissance) एवं धर्म सुधार।
01 अध्याय 1: मध्यकालीन यूरोप की पृष्ठभूमि
मध्यकालीन यूरोप मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन व्यवस्थाओं पर आधारित था:
1. सर्वव्यापी चर्च व्यवस्था
- ईसा मसीह: इन्होंने शुरुआत में कठोर कर्मकांडों का विरोध किया था और आंतरिक पवित्रता पर जोर दिया था।
- प्रारंभिक विचारक (5वीं सदी): सेंट पॉल और सेंट ऑगस्टीन ने यह विचार दिया कि ईश्वर में आस्था ही मानव मुक्ति का एकमात्र मार्ग है।
- मध्यकालीन दार्शनिक (13वीं सदी): पीटर लोम्बार्ड और थॉमस एक्विनास ने दर्शन को बदला। इन्होंने स्पष्ट किया कि मुक्ति के लिए अच्छे कर्म और चर्च के रीति-रिवाजों का पालन आवश्यक है।
- परिणाम: इस विचारधारा से पुरोहितवाद और संस्कारवाद का जन्म हुआ। आम जनता को मुक्ति पाने के लिए पादरियों और चर्च के नियमों का कड़ाई से पालन करना पड़ता था।
- सत्ता का केंद्र: इस सर्वव्यापी चर्च व्यवस्था का मुख्यालय रोम में था।
2. पश्चिमी रोमन साम्राज्य
- प्रमुख वंश एवं शासक: कैरोलिंजियन वंश के प्रमुख शासक शार्लेमेन थे।
- पोप व सत्ता का गठबंधन: वर्ष 800 ई. में पोप ने शार्लेमेन को “पवित्र रोमन सम्राट” की उपाधि दी। इस घटना ने यह सिद्ध किया कि राजाओं को सत्ता की वैधता चर्च से ही मिलती है।
3. सामंतवाद
- परिभाषा: यह भूमि के स्वामित्व पर आधारित एक विकेंद्रीकृत व्यवस्था थी।
- संरचना: इस व्यवस्था में सामंत, राजा और आम प्रजा/किसानों के बीच मध्यस्थ का काम करते थे।
- प्रभाव: इसने किसानों को भूमि से बांध कर रखा और मध्यकाल में मजबूत राष्ट्र-राज्यों के उदय को रोके रखा।
02 अध्याय 2: आधुनिक यूरोप का उदय
आधुनिक युग की शुरुआत तीन प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं/क्रांतियों से मानी जाती है:
1. भौगोलिक खोज व व्यावसायिक क्रांति
- निर्णायक मोड़ (1453 ई.): उस्मानी तुर्कों ने कुस्तुनतुनिया (आधुनिक इस्तांबुल) पर कब्ज़ा कर लिया।
- व्यापारिक प्रभाव: इसके कारण यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले पारंपरिक जमीनी व्यापारिक मार्ग पूरी तरह बंद हो गए।
- व्यावसायिक क्रांति का जन्म: एशियाई मसालों और रेशम तक पहुँचने के लिए यूरोपीय देशों को नए समुद्री मार्गों की खोज करनी पड़ी, जिसने एक बड़ी व्यावसायिक क्रांति को जन्म दिया।
2. धर्म सुधार आंदोलन (Reformation)
यह कैथोलिक चर्च के भ्रष्टाचार और पोप के असीमित अधिकारों के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन था।
- प्रोटेस्टेंट आंदोलन: वर्ष 1517 में जर्मनी के विटेनबर्ग शहर से मार्टिन लूथर के नेतृत्व में इसकी शुरुआत हुई। इन्होंने चर्च की भ्रष्ट व्यवस्था और पोप के एकाधिकार को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया।
- प्रति-धर्म सुधार: यह कैथोलिक चर्च के अंदर का ही एक आंदोलन था, जिसका मुख्य उद्देश्य अपनी आंतरिक कमियों को सुधारना और प्रोटेस्टेंट आंदोलन के प्रभाव को रोकना था।
3. वाणिज्यवाद (Mercantilism)
- परिभाषा: यह एक प्रमुख आर्थिक सिद्धांत था जिसका मानना था कि किसी भी राष्ट्र की शक्ति उसके पास मौजूद धन (विशेषकर सोना और चाँदी) पर निर्भर करती है।
- मुख्य सिद्धांत: व्यापार संतुलन बनाए रखने के लिए निर्यात को अधिकतम और आयात को न्यूनतम करना। इसी नीति ने आगे चलकर यूरोपीय उपनिवेशवाद को भारी बढ़ावा दिया।
03 अध्याय 3: पुनर्जागरण (The Renaissance)
परिचय: पुनर्जागरण का शाब्दिक अर्थ है “फिर से जागना” या पुनर्जन्म। इसका काल 14वीं सदी से 17वीं सदी तक माना जाता है।
पुनर्जागरण की प्रमुख विशेषताएँ
इस काल में मध्यकालीन रूढ़ियों को तोड़कर नई सोच का विकास हुआ:
- नवाचार: कला, साहित्य, और विज्ञान के क्षेत्र में नए प्रयोग शुरू हुए।
- सांस्कृतिक प्रगति: यूरोप में अभूतपूर्व सांस्कृतिक और धार्मिक प्रगति हुई।
- मानववाद व व्यक्तिवाद: पारलौकिक दुनिया के बजाय इस दुनिया और मनुष्य पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- धर्मनिरपेक्षता: एक धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण का उदय हुआ, जिसमें भ्रष्ट पादरियों की खुलकर आलोचना की गई।
- तर्कवाद: तर्कवाद का जन्म हुआ, जहाँ हर पुरानी मान्यता को तर्क और विज्ञान की कसौटी पर परखा जाने लगा।
- राजनीतिक चेतना: राजनीति के क्षेत्र में धर्म के प्रभाव को कम करके एक नवीन चेतना का विकास किया गया।
04 अध्याय 4: परीक्षा उपयोगी अति महत्वपूर्ण तथ्य (वर्गीकृत सारणियाँ)
1. पुनर्जागरण के विचारक एवं प्रमुख साहित्य
- उद्गम स्थल: पुनर्जागरण का प्रारंभ इटली के फ्लोरेंस शहर से माना जाता है (फ्लोरेंस शहर अर्नो नदी के तट पर स्थित है)।
| विचारक / लेखक | उपाधि / विशेषता | प्रमुख रचना / पुस्तक | मुख्य विषय-वस्तु |
|---|---|---|---|
| दांते | पुनर्जागरण का अग्रदूत | डिवाइन कॉमेडी, न्यू लाइफ | ‘डिवाइन कॉमेडी’ में स्वर्ग और नरक की काल्पनिक यात्रा का वर्णन है। |
| पेट्रार्क | मानववाद का संस्थापक | अफ्रीका | यह एक प्रसिद्ध लैटिन महाकाव्य है। |
| बोकेशियो | इटालियन गद्य का जनक | डेकामेरॉन | यह 100 कहानियों का एक बहुत प्रसिद्ध संग्रह है। |
| मैकियावेली | आधुनिक राजनीति विज्ञान के जनक | द प्रिंस | नये राज्य का स्वरूप और यथार्थवादी राजनीति का वर्णन। |
| टॉमस मूर | यूटोपिया | एक ‘आदर्श समाज’ की कल्पना की गई है। | |
| इरासमस | द प्रेज ऑफ फॉली | ||
| विलियम शेक्सपियर | रोमियो एंड जूलियट | ||
| एडम स्मिथ | द वेल्थ ऑफ नेशंस | आधुनिक अर्थशास्त्र से संबंधित प्रमुख पुस्तक। |
2. पुनर्जागरण काल के प्रमुख कलाकार
| कलाकार | उपाधि / विशेषता | प्रमुख चित्र / कृतियाँ |
|---|---|---|
| लियोनार्डो दा विंची | रेनेसां मैन (पुनर्जागरण का प्रतीक) | द लास्ट सपर, मोनालिसा |
| माइकल एंजेलो | द लास्ट जजमेंट, द फॉल ऑफ मैन (भित्ति चित्र) | |
| राफेल | मैडोना (ईसा मसीह की माँ का जीवंत चित्र) | |
| जियाटो | चित्रकला का जनक | इन्होंने ही सबसे पहले चित्रों में यथार्थवाद और गहराई लानी शुरू की थी। |
(नोट: लियोनार्डो दा विंची एक बहुमुखी प्रतिभा वाले व्यक्ति थे, जो चित्रकार, मूर्तिकार और वैज्ञानिक भी थे।)
3. धर्म सुधार एवं राजनीतिक सिद्धांत के महत्वपूर्ण तथ्य
- मार्टिन लूथर: धर्म सुधार आंदोलन के प्रवर्तक (जर्मनी)। इन्होंने ही बाइबिल का जर्मन भाषा में अनुवाद किया था।
- जॉन विकलिफ: इन्हें धर्म सुधार आंदोलन का ‘प्रातःकालीन तारा’ कहा जाता है।
- मोंटेस्क्यू: इन्होंने ‘शक्ति पृथक्करण का सिद्धांत’ दिया था (कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका को अलग रखने का विचार)।
4. विज्ञान का विकास और भौगोलिक खोजें
- रोजर बेकन: इन्हें प्रयोगात्मक विज्ञान का जनक माना जाता है।
- कॉपरनिकस: इन्होंने सबसे पहले इस पुरानी मान्यता का खंडन किया कि पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में है (सूर्य केंद्रित ब्रह्मांड का सिद्धांत)।
- गैलीलियो: दूरबीन का उपयोग करने वाले इस वैज्ञानिक ने कॉपरनिकस के सिद्धांतों का पुरजोर समर्थन किया।
- केप्लर: इन्होंने ग्रहीय गति का नियम दिया और सिद्ध किया कि सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं।
- मैगलन: समुद्री मार्ग से पूरी दुनिया का चक्कर लगाने वाला पहला व्यक्ति। इन्होंने ही ‘प्रशांत महासागर’ का नामकरण भी किया था।