भारतीय भूगोल · नदी तंत्र

भारत की पूर्ववाहिनी नदियाँ

हुगली–दामोदर से पेन्नार तक हर नदी तंत्र को उद्गम, प्रवाह, सहायक नदियों, परियोजनाओं और तटीय संबंधों के क्रम में पढ़ें। शीर्षक और अलग-अलग बिंदु मूल अध्ययन नोट्स की तरह रखे गए हैं।

7 नदी तंत्र9 अध्ययन खंडUKPSC · UKSSSC · State PCS

हुगली–दामोदर नदी तंत्र

हुगली नदी: प्रवाह और तट

प्रकृति एवं उद्गम
भागीरथी–हुगली गंगा की पश्चिमी वितरिका (distributary) है।
जल आपूर्ति
फरक्का बैराज की फीडर कैनाल से भागीरथी–हुगली में जल पहुँचता है।
संबंधित नदियाँ
अजय, जलांगी और दामोदर।
तटीय नगर
कोलकाता (पश्चिम बंगाल) — हुगली के तट पर।

बंदरगाह और पोत निर्माण

  • श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट (Kolkata Port) — पश्चिम बंगाल:
    • हुगली पर भारत का प्रमुख नदीय बंदरगाह।
    • भारत के सबसे पुराने आधुनिक बंदरगाहों में एक; “Gateway of Eastern India” कहलाता है।
  • गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) — कोलकाता, पश्चिम बंगाल:
    • हुगली तट का प्रमुख पोत-निर्माण केंद्र।
    • भारतीय नौसेना और तटरक्षक के लिए युद्धपोत बनाता है।
  • हल्दिया डॉक परिसर — पश्चिम बंगाल:
    • हुगली–हल्दी संगम क्षेत्र में कोलकाता पोर्ट के सहायक डॉक के रूप में विकसित।
    • प्रमुख कार्गो: पेट्रोलियम, कोयला, लौह-अयस्क, उर्वरक, जूट एवं जूट उत्पाद।
    • जूट और जूट उत्पादों के व्यापार तथा निर्यात से विशेष रूप से जुड़ा है।

मुहाना क्षेत्र एवं द्वीप

  • सागर द्वीप: हुगली के मुहाने के निकट, पश्चिम बंगाल।
  • न्यू मूर / साउथ तलपट्टी द्वीप: भारत–बांग्लादेश समुद्री सीमा क्षेत्र का पूर्व द्वीप; तटीय अपरदन के बाद अब जल के ऊपर स्थायी भूभाग के रूप में नहीं दिखता।

बांग्लादेश में गंगा–ब्रह्मपुत्र प्रवाह प्रतिरूप

  • गंगा → पद्मा
  • ब्रह्मपुत्र → जमुना
  • पद्मा + जमुना → पद्मा
  • पद्मा + मेघना → मेघना
  • मेघना → बंगाल की खाड़ी

दामोदर नदी

  • उद्गम: छोटानागपुर पठार (झारखंड)।
  • प्रवाह मार्ग: झारखंड → पश्चिम बंगाल → हुगली नदी (मुहाना)।
  • भू-आकृति:
    • भ्रंश घाटी (Rift Valley) से होकर बहती है।
    • यह घाटी छोटानागपुर पठार को दो भागों में बाँटती है:
      • उत्तर: हजारीबाग पठार
      • दक्षिण: राँची पठार
  • उपनाम व आर्थिक महत्त्व:
    • ऐतिहासिक रूप से “बंगाल का शोक” कहा जाता था।
    • प्रमुख कोयला व भारी औद्योगिक संकुल होने से दामोदर घाटी को “भारत का रूर” कहा जाता है।

प्रमुख सहायक नदियाँ, बाँध एवं बहुउद्देशीय परियोजनाएँ

  • दामोदर घाटी के प्रमुख बाँध और बैराज:
    • बराकर नदी (दामोदर की प्रमुख सहायक):
      • तिलैया बाँध — झारखंड
      • मैथन बाँध — झारखंड
    • कोनार नदी: कोनार बाँध — झारखंड।
    • दामोदर मुख्य धारा:
      • पंचेत बाँध — झारखंड–पश्चिम बंगाल सीमा
      • तेनुघाट बाँध — झारखंड
      • दुर्गापुर बैराज — पश्चिम बंगाल
    • DVC के चार प्रमुख बाँध: तिलैया, कोनार, मैथन और पंचेत; तेनुघाट इनमें शामिल नहीं है।
  • प्रमुख औद्योगिक केंद्र:
    • बोकारो — झारखंड: दामोदर घाटी का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र।
    • दुर्गापुर — पश्चिम बंगाल: दामोदर तट पर औद्योगिक नगर।
खंड 1 / 8

सुवर्णरेखा नदी

उद्गम एवं प्रवाह

  • उद्गम: राँची के निकट राँची पठार (झारखंड); इस पठार की प्रमुख पूर्ववाहिनी नदी।
  • प्रवाह मार्ग: झारखंड → पश्चिम बंगाल → ओडिशा → बंगाल की खाड़ी।
    • निचले प्रवाह में पश्चिम बंगाल–ओडिशा सीमा के निकट बहती है।
  • प्रमुख जलप्रपात: हुंडरू जलप्रपात मुख्य धारा पर।

सहायक नदी एवं औद्योगिक नगर

  • खरकई नदी: सुवर्णरेखा की प्रमुख सहायक नदी।
  • जमशेदपुर — झारखंड: सुवर्णरेखा–खरकई संगम पर स्थित।
    • टाटा स्टील (पूर्व TISCO) इसी संगम क्षेत्र से जुड़ा है।

तटीय मैदान विभाजन

  • उत्तर: बंगाल (बंगा) का तटीय भाग।
  • दक्षिण: उत्कल तटीय मैदान (ओडिशा); आगे चिल्का झील क्षेत्र तक विस्तार।
खंड 2 / 8

ब्राह्मणी–बैतरणी नदी तंत्र

ब्राह्मणी नदी

  • निर्माण एवं उद्गम: शंख और दक्षिण कोयल नदियों के मिलने से बनती है।
    • दक्षिण कोयल: राँची पठार क्षेत्र (झारखंड) से निकलती है।
    • संगम स्थल: वेदव्यास, राउरकेला के निकट (ओडिशा)।
  • शंख नदी:
    • मंदिरा बाँध — ओडिशा: इसके जलाशय से राउरकेला स्टील प्लांट को औद्योगिक जल मिलता है।
  • ब्राह्मणी मुख्य धारा:
    • राउरकेला — ओडिशा: प्रमुख लौह–इस्पात औद्योगिक केंद्र।
    • रेंगाली बाँध — ओडिशा: प्रमुख बहुउद्देशीय बाँध।
    • आगे ओडिशा के तटीय मैदान में डेल्टा बनाती है।

बैतरणी नदी

  • प्रकृति: स्वतंत्र नदी; ब्राह्मणी की सहायक नहीं है।
  • उद्गम: गोनासिका क्षेत्र, क्योंझर पहाड़ियाँ (ओडिशा)।
  • भू-आर्थिक संदर्भ: क्योंझर प्रमुख लौह-अयस्क क्षेत्र है।
  • निचला प्रवाह: ब्राह्मणी के साथ विस्तृत डेल्टाई–मुहाना पारिस्थितिकी बनाती है।

तटीय एवं सामरिक स्थल

  • धामरा — ओडिशा: ब्राह्मणी–बैतरणी मुहाना क्षेत्र के निकट प्रमुख बंदरगाह।
  • डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप — ओडिशा: पूर्व नाम व्हीलर द्वीप; DRDO का सामरिक मिसाइल परीक्षण केंद्र।
  • भितरकनिका — ओडिशा: भारत का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र।
    • खारे पानी के मगरमच्छों के लिए प्रसिद्ध।
  • गहिरमाथा मरीन सैंक्चुअरी — ओडिशा: ओलिव रिडले कछुओं के सामूहिक घोंसलों (arribada) के लिए प्रसिद्ध।

संबंधित पहाड़ियाँ और भू-आकृतिक कड़ियाँ

  • पर्वत एवं पहाड़ियाँ — ओडिशा:
    • गढ़जात पहाड़ियाँ
    • क्योंझर पहाड़ियाँ
    • सिमलीपाल मैसिफ
    • मलयगिरि श्रेणी
    • कोरापुट–कालाहांडी उच्चभूमि
    • महेंद्रगिरि चोटी
  • देवमाली: कोरापुट जिले में ओडिशा की सर्वोच्च पर्वत चोटी।
  • भू-आकृतिक अंतर्संबंध:
    • गोनासिका → क्योंझर पहाड़ियाँ → बैतरणी का उद्गम।
    • क्योंझर–बादामपहाड़–गुरुमहिसानी → प्रमुख लौह-अयस्क पेटी।
    • मयूरभंज क्षेत्र → सिमलीपाल मैसिफ।
    • कोरापुट → देवमाली।
खंड 3 / 8

महानदी नदी तंत्र

उद्गम एवं प्रवाह

  • उद्गम: सिहावा पहाड़ियाँ, धमतरी जिला (छत्तीसगढ़)।
  • प्रवाह मार्ग: मुख्यतः छत्तीसगढ़ → ओडिशा → बंगाल की खाड़ी।

सहायक नदियाँ

  • बाएँ तट:
    • शिवनाथ (सियोनाथ): भिलाई औद्योगिक क्षेत्र (छत्तीसगढ़) इसी बेसिन से संबद्ध है।
    • हसदेव
    • मांड
    • इब
  • दाएँ तट:
    • जोंक
    • ओंग
    • तेल

प्रमुख बाँध एवं परियोजनाएँ

  • दुधावा बाँध: महानदी — छत्तीसगढ़।
  • गंगरेल बाँध (पं. रविशंकर सागर): महानदी — छत्तीसगढ़।
  • हीराकुंड बाँध: महानदी — ओडिशा।
    • भारत का सबसे लंबा प्रमुख मिट्टी का बाँध; विश्व के सबसे लंबे earthen dams में भी गिना जाता है।

गॉर्ज, अभयारण्य एवं वितरिकाएँ

  • सतकोसिया गॉर्ज — ओडिशा: महानदी द्वारा निर्मित गहरी घाटी।
    • टीकरपड़ा: महानदी तट पर; घड़ियाल संरक्षण परियोजना के लिए प्रसिद्ध।
    • संबद्ध क्षेत्र: सतकोसिया टाइगर रिजर्व / गॉर्ज अभयारण्य।
  • डेल्टा एवं वितरिकाएँ:
    • ओडिशा के तटीय मैदान में विस्तृत डेल्टा; कटक डेल्टा शीर्ष पर स्थित है।
    • दया और भार्गवी: डेल्टा-शाखा प्रणाली से जुड़ी नदियाँ; दोनों चिल्का झील (ओडिशा) में गिरती हैं।

पारादीप बंदरगाह — ओडिशा

  • महानदी डेल्टा/मुहाने के निकट प्रमुख बंदरगाह।
  • लौह-अयस्क निर्यात, विशेषतः जापान से व्यापारिक संबंध।
  • खनिज पृष्ठप्रदेश: क्योंझर–बादामपहाड़–गुरुमहिसानी।
  • बैलाडीला — छत्तीसगढ़: विशाखापत्तनम बंदरगाह से संबंधित है, पारादीप से नहीं।
खंड 4 / 8

प्रायद्वीपीय नदियों का उत्तर से दक्षिण क्रम

हुगली–दामोदरसुवर्णरेखाब्राह्मणी–बैतरणीमहानदीगोदावरी

गोदावरी नदी तंत्र

गोदावरी नदी तंत्र—प्रमुख सहायक नदियाँ, जयकवाड़ी, श्रीराम सागर, कालेश्वरम, पोलावरम, निजाम सागर, चित्रकोट जलप्रपात और कोरिंगा सहित मानचित्र
गोदावरी नदी तंत्र एवं प्रमुख सहायक नदियाँ · बड़ा देखने के लिए मानचित्र खोलें

उद्गम, प्रवाह एवं उपनाम

  • उद्गम: त्र्यंबकेश्वर, नासिक (महाराष्ट्र) — पश्चिमी घाट।
  • प्रवाह मार्ग: महाराष्ट्र → तेलंगाना → आंध्र प्रदेश → बंगाल की खाड़ी।
    • कुछ भाग में छत्तीसगढ़ की दक्षिणी सीमा को स्पर्श करती है।
  • उपनाम: “दक्षिण गंगा” और “वृद्ध गंगा”।

मुख्य धारा पर प्रमुख जल परियोजनाएँ

  • जयकवाड़ी बाँध: गोदावरी — महाराष्ट्र।
  • श्रीराम सागर परियोजना (SRSP): गोदावरी — तेलंगाना।
  • कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना — तेलंगाना: गोदावरी पर आधारित वृहद परियोजना।
    • प्रमुख बैराज: मेदिगड्डा, अन्नाराम और सुंडिला।
  • पोलावरम परियोजना — आंध्र प्रदेश: गोदावरी पर राष्ट्रीय परियोजना।
    • उद्देश्य: गोदावरी के अधिशेष जल को कृष्णा बेसिन में स्थानांतरित करना।

बाएँ तट की प्रमुख सहायक नदियाँ

  • पूर्णा: गोदावरी की बाएँ तट की सहायक नदी।
    • दुधना नदी पूर्णा में मिलती है।
  • प्राणहिता: गोदावरी की सबसे बड़ी सहायक नदी।
    • पेनगंगा → वर्धा में समाहित होती है।
    • वर्धा + वैनगंगा → प्राणहिता।
    • प्राणहिता आगे गोदावरी की मुख्य धारा में मिलती है।
  • इंद्रावती:
    • उद्गम: कालाहांडी क्षेत्र, ओडिशा।
    • प्रवाह: दंडकारण्य/बस्तर पठार, छत्तीसगढ़।
    • चित्रकोट जलप्रपात — छत्तीसगढ़: इंद्रावती पर; घोड़े की नाल जैसे आकार के कारण “भारत का नियाग्रा” कहलाता है।
  • सबरी: सिलेरू–मचकुंड तंत्र इसके बेसिन का भाग है।
    • जलापुट बाँध: मचकुंड नदी — ओडिशा–आंध्र प्रदेश सीमा।
    • बलीमेला परियोजना: सिलेरू नदी — ओडिशा।
    • ऊपरी और निचली सिलेरू परियोजनाएँ: सिलेरू नदी — आंध्र प्रदेश।

दाएँ तट की प्रमुख सहायक नदियाँ

  • प्रवरा:
    • उद्गम: कलसुबाई–रतनगढ़ क्षेत्र, महाराष्ट्र।
    • बाँध: विल्सन/भंडारदरा बाँध — महाराष्ट्र।
  • मंजरा:
    • प्रवाह: महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना।
    • बाँध: निजाम सागर — तेलंगाना।
  • मनेर (Manair) — तेलंगाना:
    • बाँध: लोअर मनेर बाँध — तेलंगाना।
    • संबंधित नगर: करीमनगर।

भू-आकृतिक, तटीय एवं पारिस्थितिक लक्षण

  • पापीकोंडा पहाड़ियाँ — आंध्र प्रदेश: निचली गोदावरी पूर्वी घाट की इन पहाड़ियों को काटकर संकरी, गहरी घाटी बनाती है।
  • डेल्टा एवं प्रमुख वितरिकाएँ: आंध्र प्रदेश में गोदावरी दो प्रमुख शाखाओं में विभाजित होती है।
    • गौतमी गोदावरी
    • वशिष्ठ गोदावरी
  • कोलेरू झील — आंध्र प्रदेश: गोदावरी और कृष्णा डेल्टाओं के बीच स्थित प्राकृतिक मीठे पानी की झील।
  • काकीनाडा तटीय क्षेत्र — आंध्र प्रदेश:
    • होप द्वीप: गोदावरी डेल्टा के निकट बालू का स्पिट; काकीनाडा खाड़ी/बंदरगाह के लिए प्राकृतिक ब्रेकवाटर। यह तट को चक्रवातों और तीव्र तरंगों से बचाता है।
    • कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य: गोदावरी डेल्टा के मैंग्रोव; सुंदरबन के बाद भारत के दूसरे सबसे बड़े मैंग्रोव विस्तारों में गिना जाता है।
खंड 5 / 8

उत्तरी सरकार तट एवं विशाखापत्तनम संकुल

उत्तरी सरकार तट

  • अवस्थिति: पूर्वी तटीय मैदान का आंध्र प्रदेश वाला उत्तरी भाग।
  • उत्तर से दक्षिण प्रमुख स्थल:
विशाखापत्तनमकाकीनाडागोदावरी डेल्टाकोलेरू झीलकृष्णा डेल्टा

विशाखापत्तनम: तटीय एवं सामरिक विशेषताएँ

  • विशाखापत्तनम पोर्ट — आंध्र प्रदेश:
    • गहरा, स्थल-रुद्ध (land-locked) और प्राकृतिक रूप से सुरक्षित प्रमुख बंदरगाह।
    • डॉल्फिन्स नोज़: पहाड़ी अंतरीप, जो समुद्री हवाओं और तूफानों से सुरक्षा देता है।
  • खनिज निर्यात:
    • बैलाडीला (छत्तीसगढ़) के उच्च कोटि के लौह-अयस्क का निर्यात विशाखापत्तनम बंदरगाह से जापान और दक्षिण कोरिया को किया जाता है।
    • पारादीप का खनिज पृष्ठप्रदेश क्योंझर क्षेत्र है; उसे बैलाडीला से न मिलाएँ।
  • उद्योग एवं नौसैनिक प्रतिष्ठान:
    • हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL): विशाखापत्तनम में प्रमुख पोत निर्माण केंद्र।
    • पूर्वी नौसेना कमान: मुख्यालय विशाखापत्तनम।
    • प्रोजेक्ट वर्षा / INS Varsha: विशाखापत्तनम के निकट रामबिल्ली (आंध्र प्रदेश) में विकसित की जा रही रणनीतिक परमाणु पनडुब्बी बेस परियोजना; इसे पहले से चालू बेस न समझें।
खंड 6 / 8

कृष्णा नदी तंत्र

कृष्णा नदी तंत्र—भीमा, मूसी, मुनेरू, कोयना, घाटप्रभा, मालप्रभा, तुंगभद्रा तथा प्रमुख बाँध और नगर
कृष्णा नदी तंत्र, सहायक नदियाँ एवं प्रमुख परियोजनाएँ · बड़ा देखने के लिए मानचित्र खोलें

1. उद्गम एवं प्रवाह प्रतिरूप

  • उद्गम: महाबलेश्वर (महाराष्ट्र), पश्चिमी घाट।
  • प्रवाह दिशा: पश्चिमी घाट से पूर्व की ओर।
  • प्रवाह मार्ग: महाराष्ट्र → कर्नाटक → तेलंगाना–आंध्र प्रदेश सीमा क्षेत्र → आंध्र प्रदेश।
  • मुहाना: बंगाल की खाड़ी; आंध्र प्रदेश के तटीय मैदान में विस्तृत डेल्टा।
  • प्रमुख तटीय नगर: अमरावती और विजयवाड़ा — आंध्र प्रदेश।

2. बाएँ तट की प्रमुख सहायक नदियाँ

भीमा नदी

  • उद्गम: भीमाशंकर, पश्चिमी घाट (महाराष्ट्र)।
  • महत्त्व: कृष्णा की सबसे लंबी प्रमुख सहायक नदी।
  • संगम: आगे कर्नाटक में कृष्णा से मिलती है।
  • भीमा की सहायक नदियाँ:
    • मूला–मूठा: पुणे (महाराष्ट्र) इस तंत्र पर है।
    • नीरा: भीमा की दाएँ तट की सहायक।
    • सीना: भीमा की बाएँ तट की सहायक।

मूसी नदी

  • अवस्थिति: कृष्णा की बाएँ तट की प्रमुख सहायक नदी।
  • तटीय नगर: हैदराबाद — तेलंगाना।
  • जलाशय: उस्मान सागर — मूसी नदी, तेलंगाना।

मुनेरू नदी

  • कृष्णा की प्रमुख बाएँ तट की सहायक नदी।
  • तेलंगाना से बहकर आंध्र प्रदेश में कृष्णा से मिलती है।

3. दाएँ तट की प्रमुख सहायक नदियाँ

कोयना नदी

  • उद्गम: पश्चिमी घाट, महाराष्ट्र।
  • परियोजना: कोयना बाँध — कोयना नदी, महाराष्ट्र।
  • जलाशय: शिवसागर झील।

अन्य प्रमुख दाएँ तट की सहायक नदियाँ

  • वारणा
  • पंचगंगा
  • दूधगंगा

घाटप्रभा नदी

  • उद्गम: पश्चिमी घाट।
  • प्रवाह: महाराष्ट्र–कर्नाटक क्षेत्र।
  • प्रमुख परियोजना: हिडकल बाँध — घाटप्रभा नदी, कर्नाटक।

मालप्रभा नदी

  • उद्गम: चोरला घाट, पश्चिमी घाट।
  • प्रवाह: मुख्यतः कर्नाटक।
  • महत्त्व: कृष्णा की प्रमुख दाएँ तट की सहायक नदी।

4. तुंगभद्रा नदी तंत्र

  • महत्त्व: कृष्णा की प्रमुख एवं सबसे महत्वपूर्ण दाएँ तट की सहायक नदी।
  • निर्माण (संयुक्त धारा): तुंगा + भद्रा।
    • उद्गम: दोनों नदियाँ गंगामूला–वराह पर्वत, कुद्रेमुख क्षेत्र (कर्नाटक) से निकलती हैं।
    • संगम: कूडली (शिवमोग्गा के निकट, कर्नाटक) में मिलकर तुंगभद्रा बनाती हैं।
  • प्रमुख परियोजना: तुंगभद्रा बाँध — तुंगभद्रा नदी, कर्नाटक।
  • ऐतिहासिक नगर: हम्पी — तुंगभद्रा के तट पर, कर्नाटक।
  • संगम: आगे चलकर तुंगभद्रा कृष्णा नदी में मिलती है।

5. कृष्णा की मुख्य धारा पर प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाएँ

  • अलमट्टी बाँध: कृष्णा नदी — कर्नाटक।
  • श्रीशैलम परियोजना: कृष्णा नदी — आंध्र प्रदेश–तेलंगाना सीमा क्षेत्र।
  • नागार्जुन सागर बाँध: कृष्णा नदी — आंध्र प्रदेश–तेलंगाना सीमा क्षेत्र।
  • प्रकाशम बैराज: कृष्णा नदी, विजयवाड़ा — आंध्र प्रदेश।

6. नल्लमाला पहाड़ियाँ एवं भू-आकृतिक लक्षण

  • पर्वतीय प्रवाह: कृष्णा का निचला प्रवाह पूर्वी घाट की नल्लमाला पहाड़ियों के मध्य से गुजरता है।
  • गॉर्ज: यहाँ कृष्णा अत्यंत गहरी घाटी बनाती है।
  • श्रीशैलम — आंध्र प्रदेश: नल्लमाला क्षेत्र में कृष्णा के तट पर स्थित तीर्थ स्थल।

7. कृष्णा डेल्टा एवं तटीय विभाजन

  • डेल्टा: कृष्णा आंध्र प्रदेश के तटीय मैदान में विस्तृत उपजाऊ डेल्टा बनाती है।
  • डेल्टा शीर्ष नगर: विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश), जहाँ प्रकाशम बैराज है।
  • कोलेरू झील — आंध्र प्रदेश: कृष्णा और गोदावरी डेल्टाओं के बीच प्राकृतिक मीठे पानी की झील।
  • तटीय सीमांकन:
    • उत्तरी सरकार तट: इसका दक्षिणी विस्तार कृष्णा डेल्टा तक माना जाता है।
    • कोरोमंडल तट: कृष्णा डेल्टा के दक्षिण से कन्याकुमारी तक का पूर्वी तटीय भाग।

8. संबंधित भौतिक एवं भौगोलिक स्थल

  • नल्लमाला पहाड़ियाँ: पूर्वी घाट का भाग; कृष्णा का निचला प्रवाह इनसे होकर गुजरता है और श्रीशैलम इसी क्षेत्र में है।
  • भोर घाट — महाराष्ट्र: मुंबई–पुणे मार्ग पर पश्चिमी घाट (सह्याद्रि) का महत्वपूर्ण पर्वतीय दर्रा।
खंड 7 / 8

पेन्नार नदी एवं संबंधित तटीय भूगोल

1. उद्गम एवं प्रवाह प्रतिरूप

  • उद्गम: नंदी पहाड़ियाँ, चिकबल्लापुर/कोलार क्षेत्र (कर्नाटक)।
  • प्रवाह दिशा एवं मार्ग: कर्नाटक → आंध्र प्रदेश → बंगाल की खाड़ी।
  • तटीय/प्रमुख नगर: नेल्लोर — पेन्नार के निचले प्रवाह क्षेत्र में तट पर स्थित प्रमुख नगर (आंध्र प्रदेश)।

2. प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाएँ एवं गॉर्ज

  • सोमासिला बाँध: पेन्नार नदी, नेल्लोर जिला (आंध्र प्रदेश)।
  • गंडिकोटा परियोजना: पेन्नार नदी, कडप्पा जिला (आंध्र प्रदेश)।
  • गंडिकोटा गॉर्ज:
    • पेन्नार यहाँ एर्रामाला पहाड़ियों को काटकर गहरी और संकरी घाटी बनाती है।
    • लाल बलुआ पत्थर की संरचना के कारण इसे “भारत का ग्रैंड कैनियन” कहा जाता है।

3. संबंधित प्रमुख पहाड़ियाँ (पूर्वी घाट)

  • एर्रामाला पहाड़ियाँ: गंडिकोटा गॉर्ज इसी शृंखला के मध्य स्थित है — आंध्र प्रदेश।
  • नल्लमाला पहाड़ियाँ: पेन्नार बेसिन के उत्तरी विस्तार से संबंधित — आंध्र प्रदेश।
  • वेलीकोंडा पहाड़ियाँ: पेन्नार बेसिन के पूर्वी सीमांत पर — आंध्र प्रदेश।
  • पालकोंडा एवं शेषाचलम तंत्र:
    • शेषाचलम पहाड़ियाँ: तिरुमला–तिरुपति क्षेत्र (आंध्र प्रदेश); बायोस्फीयर रिजर्व और लाल चंदन (Red Sanders) के लिए प्रसिद्ध।
    • नागरी पहाड़ियाँ: तिरुपति (आंध्र प्रदेश) एवं तमिलनाडु सीमा क्षेत्र में।

4. पुलिकट झील–श्रीहरिकोटा संकुल

पुलिकट झील

  • अवस्थिति: आंध्र प्रदेश–तमिलनाडु सीमा पर फैली हुई।
  • प्रकृति: खारे/लवणीय जल की लैगून (brackish-water lagoon)।
  • महत्त्व: चिल्का झील (ओडिशा) के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून।

श्रीहरिकोटा द्वीप

  • अवस्थिति: तिरुपति जिले, आंध्र प्रदेश में स्पिट/बैरियर द्वीप; यह क्षेत्र पहले नेल्लोर जिले में था।
  • भौगोलिक भूमिका: पुलिकट झील को बंगाल की खाड़ी से अलग करता है।
  • अंतरिक्ष केंद्र: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) यहीं है; यह ISRO का प्राथमिक उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र है।

5. कोरोमंडल तट के प्रमुख बंदरगाह

कामराजार पोर्ट (पूर्व नाम: एन्नोर पोर्ट)

  • अवस्थिति: चेन्नई के उत्तर में, तमिलनाडु।
  • प्रशासनिक पहचान: भारत का पहला निगमित प्रमुख बंदरगाह (First Corporatized Major Port)।
  • मूल कार्य: तमिलनाडु के ताप विद्युत संयंत्रों के लिए थर्मल कोयला सँभालने हेतु विकसित।

चेन्नई पोर्ट

  • प्रकृति: तमिलनाडु में पूर्वी तट का कृत्रिम बंदरगाह; पूर्वी तट का सबसे पुराना कृत्रिम बंदरगाह।
  • व्यापार: अग्रणी कंटेनर बंदरगाह; 2024–25 में प्रमुख बंदरगाहों के कंटेनर ट्रैफिक (TEU) में JNPA के बाद दूसरा स्थान।

6. उत्तर से दक्षिण तटीय क्रम

नेल्लोर (पेन्नार)पुलिकट झीलश्रीहरिकोटाकामराजार/एन्नोर पोर्टचेन्नई पोर्ट
खंड 8 / 8

पलार नदी तंत्र

उद्गम एवं प्रवाह प्रतिरूप

  • उद्गम: नंदी पहाड़ियाँ (चिकबल्लापुर/कोलार क्षेत्र, कर्नाटक)।
  • प्रवाह मार्ग: कर्नाटक → आंध्र प्रदेश → तमिलनाडु → बंगाल की खाड़ी।
  • भू-आकृतिक दिशा: तमिलनाडु में जावड़ी पहाड़ियों के उत्तर से होकर पूर्व दिशा में प्रवाहित होती है।
  • मुहाना: तमिलनाडु के तटीय मैदान से होते हुए कोरोमंडल तट पर बंगाल की खाड़ी में विसर्जित होती है।

प्रमुख नगर एवं सामरिक स्थल

  • वेल्लोर: पलार नदी तंत्र से संबंधित ऐतिहासिक एवं प्रमुख औद्योगिक नगर।
  • कांचीपुरम: पलार के निचले जलोढ़ मैदान में स्थित प्रसिद्ध सांस्कृतिक व सिल्क/वस्त्र केंद्र।
  • कल्पक्कम:
    • पलार नदी के मुहाने/निचले तटीय क्षेत्र में अवस्थित।
    • मद्रास परमाणु ऊर्जा स्टेशन (MAPS): भारत के प्रमुख परमाणु ऊर्जा एवं अनुसंधान संयंत्रों में से एक।

संबंधित भौतिक एवं तटीय लक्षण

  • जावड़ी पहाड़ियाँ: पूर्वी घाट की यह श्रृंखला पलार बेसिन के दक्षिणी भाग से सीमा बनाती है।
  • कोरोमंडल तटीय संबंध: पलार का मुहाना कोरोमंडल तट का भाग है।
    • चेन्नई पोर्ट — कृत्रिम बंदरगाह।
    • कामराजार / एन्नोर पोर्ट — पहला निगमित बंदरगाह।
    • पुलिकट झील — खारे पानी की लैगून।
    • श्रीहरिकोटा द्वीप — SDSC-SHAR।
खंड 9 / 10

पोनैयार नदी तंत्र (South Pennar / Thenpennai)

प्रमुख भौगोलिक बिंदु:

  • अन्य नाम: Thenpennai, South Pennar, दक्षिणा पिनाकिनी (Dakshina Pinakini)।
  • उद्गम: कर्नाटक में नंदी पहाड़ियों (चेनोकैशव पर्वत) के दक्षिणी ढलान से।
  • प्रवाह मार्ग:
    • कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु में प्रवेश करती है।
    • तमिलनाडु में यह पूर्वी घाट की विखंडित श्रेणियों—विशेषकर जावड़ी पहाड़ियों (Javadi Hills) और शेवरॉय पहाड़ियों (Shevaroy Hills)—के मध्य/सीमावर्ती भागों को पार करते हुए पूर्व की ओर बहती है।
    • जिंजी पहाड़ियों (Gingee Hills) के दक्षिण से गुजरकर यह तटीय जलोढ़ मैदान में प्रवेश करती है।
  • मुहाना: अंत में पुदुचेरी और कुड्डालोर के निकट कई शाखाओं में बँटकर बंगाल की खाड़ी में विसर्जित हो जाती है।

प्रमुख बाँध एवं बहुउद्देशीय परियोजनाएँ

  • कृष्णागिरि बाँध: पोनैयार नदी, कृष्णागिरि जिला (तमिलनाडु)।
  • साथनूर बाँध: पोनैयार नदी, तिरुवन्नामलाई जिला (तमिलनाडु)।

संबंधित पहाड़ियाँ (Eastern Ghats Uplands)

  • जावड़ी पहाड़ियाँ
  • शेवरॉय पहाड़ियाँ
  • जिंजी पहाड़ियाँ
  • भौगोलिक संबंध: पोनैयार बेसिन पूर्वी घाट की इन विखंडित श्रेणियों के अपवाह तंत्र से प्रत्यक्ष रूप से संबद्ध है।
खंड 10 / 10