भारतीय भूगोल · नदी तंत्र
भारत की पूर्ववाहिनी नदियाँ
हुगली–दामोदर से पेन्नार तक हर नदी तंत्र को उद्गम, प्रवाह, सहायक नदियों, परियोजनाओं और तटीय संबंधों के क्रम में पढ़ें। शीर्षक और अलग-अलग बिंदु मूल अध्ययन नोट्स की तरह रखे गए हैं।
हुगली–दामोदर नदी तंत्र
हुगली नदी: प्रवाह और तट
- प्रकृति एवं उद्गम
- भागीरथी–हुगली गंगा की पश्चिमी वितरिका (distributary) है।
- जल आपूर्ति
- फरक्का बैराज की फीडर कैनाल से भागीरथी–हुगली में जल पहुँचता है।
- संबंधित नदियाँ
- अजय, जलांगी और दामोदर।
- तटीय नगर
- कोलकाता (पश्चिम बंगाल) — हुगली के तट पर।
बंदरगाह और पोत निर्माण
- श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट (Kolkata Port) — पश्चिम बंगाल:
- हुगली पर भारत का प्रमुख नदीय बंदरगाह।
- भारत के सबसे पुराने आधुनिक बंदरगाहों में एक; “Gateway of Eastern India” कहलाता है।
- गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) — कोलकाता, पश्चिम बंगाल:
- हुगली तट का प्रमुख पोत-निर्माण केंद्र।
- भारतीय नौसेना और तटरक्षक के लिए युद्धपोत बनाता है।
- हल्दिया डॉक परिसर — पश्चिम बंगाल:
- हुगली–हल्दी संगम क्षेत्र में कोलकाता पोर्ट के सहायक डॉक के रूप में विकसित।
- प्रमुख कार्गो: पेट्रोलियम, कोयला, लौह-अयस्क, उर्वरक, जूट एवं जूट उत्पाद।
- जूट और जूट उत्पादों के व्यापार तथा निर्यात से विशेष रूप से जुड़ा है।
मुहाना क्षेत्र एवं द्वीप
- सागर द्वीप: हुगली के मुहाने के निकट, पश्चिम बंगाल।
- न्यू मूर / साउथ तलपट्टी द्वीप: भारत–बांग्लादेश समुद्री सीमा क्षेत्र का पूर्व द्वीप; तटीय अपरदन के बाद अब जल के ऊपर स्थायी भूभाग के रूप में नहीं दिखता।
बांग्लादेश में गंगा–ब्रह्मपुत्र प्रवाह प्रतिरूप
- गंगा → पद्मा
- ब्रह्मपुत्र → जमुना
- पद्मा + जमुना → पद्मा
- पद्मा + मेघना → मेघना
- मेघना → बंगाल की खाड़ी
दामोदर नदी
- उद्गम: छोटानागपुर पठार (झारखंड)।
- प्रवाह मार्ग: झारखंड → पश्चिम बंगाल → हुगली नदी (मुहाना)।
- भू-आकृति:
- भ्रंश घाटी (Rift Valley) से होकर बहती है।
- यह घाटी छोटानागपुर पठार को दो भागों में बाँटती है:
- उत्तर: हजारीबाग पठार
- दक्षिण: राँची पठार
- उपनाम व आर्थिक महत्त्व:
- ऐतिहासिक रूप से “बंगाल का शोक” कहा जाता था।
- प्रमुख कोयला व भारी औद्योगिक संकुल होने से दामोदर घाटी को “भारत का रूर” कहा जाता है।
प्रमुख सहायक नदियाँ, बाँध एवं बहुउद्देशीय परियोजनाएँ
- दामोदर घाटी के प्रमुख बाँध और बैराज:
- बराकर नदी (दामोदर की प्रमुख सहायक):
- तिलैया बाँध — झारखंड
- मैथन बाँध — झारखंड
- कोनार नदी: कोनार बाँध — झारखंड।
- दामोदर मुख्य धारा:
- पंचेत बाँध — झारखंड–पश्चिम बंगाल सीमा
- तेनुघाट बाँध — झारखंड
- दुर्गापुर बैराज — पश्चिम बंगाल
- DVC के चार प्रमुख बाँध: तिलैया, कोनार, मैथन और पंचेत; तेनुघाट इनमें शामिल नहीं है।
- बराकर नदी (दामोदर की प्रमुख सहायक):
- प्रमुख औद्योगिक केंद्र:
- बोकारो — झारखंड: दामोदर घाटी का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र।
- दुर्गापुर — पश्चिम बंगाल: दामोदर तट पर औद्योगिक नगर।
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सुवर्णरेखा नदी
उद्गम एवं प्रवाह
- उद्गम: राँची के निकट राँची पठार (झारखंड); इस पठार की प्रमुख पूर्ववाहिनी नदी।
- प्रवाह मार्ग: झारखंड → पश्चिम बंगाल → ओडिशा → बंगाल की खाड़ी।
- निचले प्रवाह में पश्चिम बंगाल–ओडिशा सीमा के निकट बहती है।
- प्रमुख जलप्रपात: हुंडरू जलप्रपात मुख्य धारा पर।
सहायक नदी एवं औद्योगिक नगर
- खरकई नदी: सुवर्णरेखा की प्रमुख सहायक नदी।
- जमशेदपुर — झारखंड: सुवर्णरेखा–खरकई संगम पर स्थित।
- टाटा स्टील (पूर्व TISCO) इसी संगम क्षेत्र से जुड़ा है।
तटीय मैदान विभाजन
- उत्तर: बंगाल (बंगा) का तटीय भाग।
- दक्षिण: उत्कल तटीय मैदान (ओडिशा); आगे चिल्का झील क्षेत्र तक विस्तार।
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ब्राह्मणी–बैतरणी नदी तंत्र
ब्राह्मणी नदी
- निर्माण एवं उद्गम: शंख और दक्षिण कोयल नदियों के मिलने से बनती है।
- दक्षिण कोयल: राँची पठार क्षेत्र (झारखंड) से निकलती है।
- संगम स्थल: वेदव्यास, राउरकेला के निकट (ओडिशा)।
- शंख नदी:
- मंदिरा बाँध — ओडिशा: इसके जलाशय से राउरकेला स्टील प्लांट को औद्योगिक जल मिलता है।
- ब्राह्मणी मुख्य धारा:
- राउरकेला — ओडिशा: प्रमुख लौह–इस्पात औद्योगिक केंद्र।
- रेंगाली बाँध — ओडिशा: प्रमुख बहुउद्देशीय बाँध।
- आगे ओडिशा के तटीय मैदान में डेल्टा बनाती है।
बैतरणी नदी
- प्रकृति: स्वतंत्र नदी; ब्राह्मणी की सहायक नहीं है।
- उद्गम: गोनासिका क्षेत्र, क्योंझर पहाड़ियाँ (ओडिशा)।
- भू-आर्थिक संदर्भ: क्योंझर प्रमुख लौह-अयस्क क्षेत्र है।
- निचला प्रवाह: ब्राह्मणी के साथ विस्तृत डेल्टाई–मुहाना पारिस्थितिकी बनाती है।
तटीय एवं सामरिक स्थल
- धामरा — ओडिशा: ब्राह्मणी–बैतरणी मुहाना क्षेत्र के निकट प्रमुख बंदरगाह।
- डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप — ओडिशा: पूर्व नाम व्हीलर द्वीप; DRDO का सामरिक मिसाइल परीक्षण केंद्र।
- भितरकनिका — ओडिशा: भारत का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र।
- खारे पानी के मगरमच्छों के लिए प्रसिद्ध।
- गहिरमाथा मरीन सैंक्चुअरी — ओडिशा: ओलिव रिडले कछुओं के सामूहिक घोंसलों (arribada) के लिए प्रसिद्ध।
संबंधित पहाड़ियाँ और भू-आकृतिक कड़ियाँ
- पर्वत एवं पहाड़ियाँ — ओडिशा:
- गढ़जात पहाड़ियाँ
- क्योंझर पहाड़ियाँ
- सिमलीपाल मैसिफ
- मलयगिरि श्रेणी
- कोरापुट–कालाहांडी उच्चभूमि
- महेंद्रगिरि चोटी
- देवमाली: कोरापुट जिले में ओडिशा की सर्वोच्च पर्वत चोटी।
- भू-आकृतिक अंतर्संबंध:
- गोनासिका → क्योंझर पहाड़ियाँ → बैतरणी का उद्गम।
- क्योंझर–बादामपहाड़–गुरुमहिसानी → प्रमुख लौह-अयस्क पेटी।
- मयूरभंज क्षेत्र → सिमलीपाल मैसिफ।
- कोरापुट → देवमाली।
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महानदी नदी तंत्र
उद्गम एवं प्रवाह
- उद्गम: सिहावा पहाड़ियाँ, धमतरी जिला (छत्तीसगढ़)।
- प्रवाह मार्ग: मुख्यतः छत्तीसगढ़ → ओडिशा → बंगाल की खाड़ी।
सहायक नदियाँ
- बाएँ तट:
- शिवनाथ (सियोनाथ): भिलाई औद्योगिक क्षेत्र (छत्तीसगढ़) इसी बेसिन से संबद्ध है।
- हसदेव
- मांड
- इब
- दाएँ तट:
- जोंक
- ओंग
- तेल
प्रमुख बाँध एवं परियोजनाएँ
- दुधावा बाँध: महानदी — छत्तीसगढ़।
- गंगरेल बाँध (पं. रविशंकर सागर): महानदी — छत्तीसगढ़।
- हीराकुंड बाँध: महानदी — ओडिशा।
- भारत का सबसे लंबा प्रमुख मिट्टी का बाँध; विश्व के सबसे लंबे earthen dams में भी गिना जाता है।
गॉर्ज, अभयारण्य एवं वितरिकाएँ
- सतकोसिया गॉर्ज — ओडिशा: महानदी द्वारा निर्मित गहरी घाटी।
- टीकरपड़ा: महानदी तट पर; घड़ियाल संरक्षण परियोजना के लिए प्रसिद्ध।
- संबद्ध क्षेत्र: सतकोसिया टाइगर रिजर्व / गॉर्ज अभयारण्य।
- डेल्टा एवं वितरिकाएँ:
- ओडिशा के तटीय मैदान में विस्तृत डेल्टा; कटक डेल्टा शीर्ष पर स्थित है।
- दया और भार्गवी: डेल्टा-शाखा प्रणाली से जुड़ी नदियाँ; दोनों चिल्का झील (ओडिशा) में गिरती हैं।
पारादीप बंदरगाह — ओडिशा
- महानदी डेल्टा/मुहाने के निकट प्रमुख बंदरगाह।
- लौह-अयस्क निर्यात, विशेषतः जापान से व्यापारिक संबंध।
- खनिज पृष्ठप्रदेश: क्योंझर–बादामपहाड़–गुरुमहिसानी।
- बैलाडीला — छत्तीसगढ़: विशाखापत्तनम बंदरगाह से संबंधित है, पारादीप से नहीं।
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प्रायद्वीपीय नदियों का उत्तर से दक्षिण क्रम
हुगली–दामोदरसुवर्णरेखाब्राह्मणी–बैतरणीमहानदीगोदावरी
गोदावरी नदी तंत्र
उद्गम, प्रवाह एवं उपनाम
- उद्गम: त्र्यंबकेश्वर, नासिक (महाराष्ट्र) — पश्चिमी घाट।
- प्रवाह मार्ग: महाराष्ट्र → तेलंगाना → आंध्र प्रदेश → बंगाल की खाड़ी।
- कुछ भाग में छत्तीसगढ़ की दक्षिणी सीमा को स्पर्श करती है।
- उपनाम: “दक्षिण गंगा” और “वृद्ध गंगा”।
मुख्य धारा पर प्रमुख जल परियोजनाएँ
- जयकवाड़ी बाँध: गोदावरी — महाराष्ट्र।
- श्रीराम सागर परियोजना (SRSP): गोदावरी — तेलंगाना।
- कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना — तेलंगाना: गोदावरी पर आधारित वृहद परियोजना।
- प्रमुख बैराज: मेदिगड्डा, अन्नाराम और सुंडिला।
- पोलावरम परियोजना — आंध्र प्रदेश: गोदावरी पर राष्ट्रीय परियोजना।
- उद्देश्य: गोदावरी के अधिशेष जल को कृष्णा बेसिन में स्थानांतरित करना।
बाएँ तट की प्रमुख सहायक नदियाँ
- पूर्णा: गोदावरी की बाएँ तट की सहायक नदी।
- दुधना नदी पूर्णा में मिलती है।
- प्राणहिता: गोदावरी की सबसे बड़ी सहायक नदी।
- पेनगंगा → वर्धा में समाहित होती है।
- वर्धा + वैनगंगा → प्राणहिता।
- प्राणहिता आगे गोदावरी की मुख्य धारा में मिलती है।
- इंद्रावती:
- उद्गम: कालाहांडी क्षेत्र, ओडिशा।
- प्रवाह: दंडकारण्य/बस्तर पठार, छत्तीसगढ़।
- चित्रकोट जलप्रपात — छत्तीसगढ़: इंद्रावती पर; घोड़े की नाल जैसे आकार के कारण “भारत का नियाग्रा” कहलाता है।
- सबरी: सिलेरू–मचकुंड तंत्र इसके बेसिन का भाग है।
- जलापुट बाँध: मचकुंड नदी — ओडिशा–आंध्र प्रदेश सीमा।
- बलीमेला परियोजना: सिलेरू नदी — ओडिशा।
- ऊपरी और निचली सिलेरू परियोजनाएँ: सिलेरू नदी — आंध्र प्रदेश।
दाएँ तट की प्रमुख सहायक नदियाँ
- प्रवरा:
- उद्गम: कलसुबाई–रतनगढ़ क्षेत्र, महाराष्ट्र।
- बाँध: विल्सन/भंडारदरा बाँध — महाराष्ट्र।
- मंजरा:
- प्रवाह: महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना।
- बाँध: निजाम सागर — तेलंगाना।
- मनेर (Manair) — तेलंगाना:
- बाँध: लोअर मनेर बाँध — तेलंगाना।
- संबंधित नगर: करीमनगर।
भू-आकृतिक, तटीय एवं पारिस्थितिक लक्षण
- पापीकोंडा पहाड़ियाँ — आंध्र प्रदेश: निचली गोदावरी पूर्वी घाट की इन पहाड़ियों को काटकर संकरी, गहरी घाटी बनाती है।
- डेल्टा एवं प्रमुख वितरिकाएँ: आंध्र प्रदेश में गोदावरी दो प्रमुख शाखाओं में विभाजित होती है।
- गौतमी गोदावरी
- वशिष्ठ गोदावरी
- कोलेरू झील — आंध्र प्रदेश: गोदावरी और कृष्णा डेल्टाओं के बीच स्थित प्राकृतिक मीठे पानी की झील।
- काकीनाडा तटीय क्षेत्र — आंध्र प्रदेश:
- होप द्वीप: गोदावरी डेल्टा के निकट बालू का स्पिट; काकीनाडा खाड़ी/बंदरगाह के लिए प्राकृतिक ब्रेकवाटर। यह तट को चक्रवातों और तीव्र तरंगों से बचाता है।
- कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य: गोदावरी डेल्टा के मैंग्रोव; सुंदरबन के बाद भारत के दूसरे सबसे बड़े मैंग्रोव विस्तारों में गिना जाता है।
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उत्तरी सरकार तट एवं विशाखापत्तनम संकुल
उत्तरी सरकार तट
- अवस्थिति: पूर्वी तटीय मैदान का आंध्र प्रदेश वाला उत्तरी भाग।
- उत्तर से दक्षिण प्रमुख स्थल:
विशाखापत्तनमकाकीनाडागोदावरी डेल्टाकोलेरू झीलकृष्णा डेल्टा
विशाखापत्तनम: तटीय एवं सामरिक विशेषताएँ
- विशाखापत्तनम पोर्ट — आंध्र प्रदेश:
- गहरा, स्थल-रुद्ध (land-locked) और प्राकृतिक रूप से सुरक्षित प्रमुख बंदरगाह।
- डॉल्फिन्स नोज़: पहाड़ी अंतरीप, जो समुद्री हवाओं और तूफानों से सुरक्षा देता है।
- खनिज निर्यात:
- बैलाडीला (छत्तीसगढ़) के उच्च कोटि के लौह-अयस्क का निर्यात विशाखापत्तनम बंदरगाह से जापान और दक्षिण कोरिया को किया जाता है।
- पारादीप का खनिज पृष्ठप्रदेश क्योंझर क्षेत्र है; उसे बैलाडीला से न मिलाएँ।
- उद्योग एवं नौसैनिक प्रतिष्ठान:
- हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL): विशाखापत्तनम में प्रमुख पोत निर्माण केंद्र।
- पूर्वी नौसेना कमान: मुख्यालय विशाखापत्तनम।
- प्रोजेक्ट वर्षा / INS Varsha: विशाखापत्तनम के निकट रामबिल्ली (आंध्र प्रदेश) में विकसित की जा रही रणनीतिक परमाणु पनडुब्बी बेस परियोजना; इसे पहले से चालू बेस न समझें।
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कृष्णा नदी तंत्र
1. उद्गम एवं प्रवाह प्रतिरूप
- उद्गम: महाबलेश्वर (महाराष्ट्र), पश्चिमी घाट।
- प्रवाह दिशा: पश्चिमी घाट से पूर्व की ओर।
- प्रवाह मार्ग: महाराष्ट्र → कर्नाटक → तेलंगाना–आंध्र प्रदेश सीमा क्षेत्र → आंध्र प्रदेश।
- मुहाना: बंगाल की खाड़ी; आंध्र प्रदेश के तटीय मैदान में विस्तृत डेल्टा।
- प्रमुख तटीय नगर: अमरावती और विजयवाड़ा — आंध्र प्रदेश।
2. बाएँ तट की प्रमुख सहायक नदियाँ
भीमा नदी
- उद्गम: भीमाशंकर, पश्चिमी घाट (महाराष्ट्र)।
- महत्त्व: कृष्णा की सबसे लंबी प्रमुख सहायक नदी।
- संगम: आगे कर्नाटक में कृष्णा से मिलती है।
- भीमा की सहायक नदियाँ:
- मूला–मूठा: पुणे (महाराष्ट्र) इस तंत्र पर है।
- नीरा: भीमा की दाएँ तट की सहायक।
- सीना: भीमा की बाएँ तट की सहायक।
मूसी नदी
- अवस्थिति: कृष्णा की बाएँ तट की प्रमुख सहायक नदी।
- तटीय नगर: हैदराबाद — तेलंगाना।
- जलाशय: उस्मान सागर — मूसी नदी, तेलंगाना।
मुनेरू नदी
- कृष्णा की प्रमुख बाएँ तट की सहायक नदी।
- तेलंगाना से बहकर आंध्र प्रदेश में कृष्णा से मिलती है।
3. दाएँ तट की प्रमुख सहायक नदियाँ
कोयना नदी
- उद्गम: पश्चिमी घाट, महाराष्ट्र।
- परियोजना: कोयना बाँध — कोयना नदी, महाराष्ट्र।
- जलाशय: शिवसागर झील।
अन्य प्रमुख दाएँ तट की सहायक नदियाँ
- वारणा
- पंचगंगा
- दूधगंगा
घाटप्रभा नदी
- उद्गम: पश्चिमी घाट।
- प्रवाह: महाराष्ट्र–कर्नाटक क्षेत्र।
- प्रमुख परियोजना: हिडकल बाँध — घाटप्रभा नदी, कर्नाटक।
मालप्रभा नदी
- उद्गम: चोरला घाट, पश्चिमी घाट।
- प्रवाह: मुख्यतः कर्नाटक।
- महत्त्व: कृष्णा की प्रमुख दाएँ तट की सहायक नदी।
4. तुंगभद्रा नदी तंत्र
- महत्त्व: कृष्णा की प्रमुख एवं सबसे महत्वपूर्ण दाएँ तट की सहायक नदी।
- निर्माण (संयुक्त धारा): तुंगा + भद्रा।
- उद्गम: दोनों नदियाँ गंगामूला–वराह पर्वत, कुद्रेमुख क्षेत्र (कर्नाटक) से निकलती हैं।
- संगम: कूडली (शिवमोग्गा के निकट, कर्नाटक) में मिलकर तुंगभद्रा बनाती हैं।
- प्रमुख परियोजना: तुंगभद्रा बाँध — तुंगभद्रा नदी, कर्नाटक।
- ऐतिहासिक नगर: हम्पी — तुंगभद्रा के तट पर, कर्नाटक।
- संगम: आगे चलकर तुंगभद्रा कृष्णा नदी में मिलती है।
5. कृष्णा की मुख्य धारा पर प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाएँ
- अलमट्टी बाँध: कृष्णा नदी — कर्नाटक।
- श्रीशैलम परियोजना: कृष्णा नदी — आंध्र प्रदेश–तेलंगाना सीमा क्षेत्र।
- नागार्जुन सागर बाँध: कृष्णा नदी — आंध्र प्रदेश–तेलंगाना सीमा क्षेत्र।
- प्रकाशम बैराज: कृष्णा नदी, विजयवाड़ा — आंध्र प्रदेश।
6. नल्लमाला पहाड़ियाँ एवं भू-आकृतिक लक्षण
- पर्वतीय प्रवाह: कृष्णा का निचला प्रवाह पूर्वी घाट की नल्लमाला पहाड़ियों के मध्य से गुजरता है।
- गॉर्ज: यहाँ कृष्णा अत्यंत गहरी घाटी बनाती है।
- श्रीशैलम — आंध्र प्रदेश: नल्लमाला क्षेत्र में कृष्णा के तट पर स्थित तीर्थ स्थल।
7. कृष्णा डेल्टा एवं तटीय विभाजन
- डेल्टा: कृष्णा आंध्र प्रदेश के तटीय मैदान में विस्तृत उपजाऊ डेल्टा बनाती है।
- डेल्टा शीर्ष नगर: विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश), जहाँ प्रकाशम बैराज है।
- कोलेरू झील — आंध्र प्रदेश: कृष्णा और गोदावरी डेल्टाओं के बीच प्राकृतिक मीठे पानी की झील।
- तटीय सीमांकन:
- उत्तरी सरकार तट: इसका दक्षिणी विस्तार कृष्णा डेल्टा तक माना जाता है।
- कोरोमंडल तट: कृष्णा डेल्टा के दक्षिण से कन्याकुमारी तक का पूर्वी तटीय भाग।
8. संबंधित भौतिक एवं भौगोलिक स्थल
- नल्लमाला पहाड़ियाँ: पूर्वी घाट का भाग; कृष्णा का निचला प्रवाह इनसे होकर गुजरता है और श्रीशैलम इसी क्षेत्र में है।
- भोर घाट — महाराष्ट्र: मुंबई–पुणे मार्ग पर पश्चिमी घाट (सह्याद्रि) का महत्वपूर्ण पर्वतीय दर्रा।
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पेन्नार नदी एवं संबंधित तटीय भूगोल
1. उद्गम एवं प्रवाह प्रतिरूप
- उद्गम: नंदी पहाड़ियाँ, चिकबल्लापुर/कोलार क्षेत्र (कर्नाटक)।
- प्रवाह दिशा एवं मार्ग: कर्नाटक → आंध्र प्रदेश → बंगाल की खाड़ी।
- तटीय/प्रमुख नगर: नेल्लोर — पेन्नार के निचले प्रवाह क्षेत्र में तट पर स्थित प्रमुख नगर (आंध्र प्रदेश)।
2. प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाएँ एवं गॉर्ज
- सोमासिला बाँध: पेन्नार नदी, नेल्लोर जिला (आंध्र प्रदेश)।
- गंडिकोटा परियोजना: पेन्नार नदी, कडप्पा जिला (आंध्र प्रदेश)।
- गंडिकोटा गॉर्ज:
- पेन्नार यहाँ एर्रामाला पहाड़ियों को काटकर गहरी और संकरी घाटी बनाती है।
- लाल बलुआ पत्थर की संरचना के कारण इसे “भारत का ग्रैंड कैनियन” कहा जाता है।
3. संबंधित प्रमुख पहाड़ियाँ (पूर्वी घाट)
- एर्रामाला पहाड़ियाँ: गंडिकोटा गॉर्ज इसी शृंखला के मध्य स्थित है — आंध्र प्रदेश।
- नल्लमाला पहाड़ियाँ: पेन्नार बेसिन के उत्तरी विस्तार से संबंधित — आंध्र प्रदेश।
- वेलीकोंडा पहाड़ियाँ: पेन्नार बेसिन के पूर्वी सीमांत पर — आंध्र प्रदेश।
- पालकोंडा एवं शेषाचलम तंत्र:
- शेषाचलम पहाड़ियाँ: तिरुमला–तिरुपति क्षेत्र (आंध्र प्रदेश); बायोस्फीयर रिजर्व और लाल चंदन (Red Sanders) के लिए प्रसिद्ध।
- नागरी पहाड़ियाँ: तिरुपति (आंध्र प्रदेश) एवं तमिलनाडु सीमा क्षेत्र में।
4. पुलिकट झील–श्रीहरिकोटा संकुल
पुलिकट झील
- अवस्थिति: आंध्र प्रदेश–तमिलनाडु सीमा पर फैली हुई।
- प्रकृति: खारे/लवणीय जल की लैगून (brackish-water lagoon)।
- महत्त्व: चिल्का झील (ओडिशा) के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून।
श्रीहरिकोटा द्वीप
- अवस्थिति: तिरुपति जिले, आंध्र प्रदेश में स्पिट/बैरियर द्वीप; यह क्षेत्र पहले नेल्लोर जिले में था।
- भौगोलिक भूमिका: पुलिकट झील को बंगाल की खाड़ी से अलग करता है।
- अंतरिक्ष केंद्र: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) यहीं है; यह ISRO का प्राथमिक उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र है।
5. कोरोमंडल तट के प्रमुख बंदरगाह
कामराजार पोर्ट (पूर्व नाम: एन्नोर पोर्ट)
- अवस्थिति: चेन्नई के उत्तर में, तमिलनाडु।
- प्रशासनिक पहचान: भारत का पहला निगमित प्रमुख बंदरगाह (First Corporatized Major Port)।
- मूल कार्य: तमिलनाडु के ताप विद्युत संयंत्रों के लिए थर्मल कोयला सँभालने हेतु विकसित।
चेन्नई पोर्ट
- प्रकृति: तमिलनाडु में पूर्वी तट का कृत्रिम बंदरगाह; पूर्वी तट का सबसे पुराना कृत्रिम बंदरगाह।
- व्यापार: अग्रणी कंटेनर बंदरगाह; 2024–25 में प्रमुख बंदरगाहों के कंटेनर ट्रैफिक (TEU) में JNPA के बाद दूसरा स्थान।
6. उत्तर से दक्षिण तटीय क्रम
नेल्लोर (पेन्नार)पुलिकट झीलश्रीहरिकोटाकामराजार/एन्नोर पोर्टचेन्नई पोर्ट
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पलार नदी तंत्र
उद्गम एवं प्रवाह प्रतिरूप
- उद्गम: नंदी पहाड़ियाँ (चिकबल्लापुर/कोलार क्षेत्र, कर्नाटक)।
- प्रवाह मार्ग: कर्नाटक → आंध्र प्रदेश → तमिलनाडु → बंगाल की खाड़ी।
- भू-आकृतिक दिशा: तमिलनाडु में जावड़ी पहाड़ियों के उत्तर से होकर पूर्व दिशा में प्रवाहित होती है।
- मुहाना: तमिलनाडु के तटीय मैदान से होते हुए कोरोमंडल तट पर बंगाल की खाड़ी में विसर्जित होती है।
प्रमुख नगर एवं सामरिक स्थल
- वेल्लोर: पलार नदी तंत्र से संबंधित ऐतिहासिक एवं प्रमुख औद्योगिक नगर।
- कांचीपुरम: पलार के निचले जलोढ़ मैदान में स्थित प्रसिद्ध सांस्कृतिक व सिल्क/वस्त्र केंद्र।
- कल्पक्कम:
- पलार नदी के मुहाने/निचले तटीय क्षेत्र में अवस्थित।
- मद्रास परमाणु ऊर्जा स्टेशन (MAPS): भारत के प्रमुख परमाणु ऊर्जा एवं अनुसंधान संयंत्रों में से एक।
संबंधित भौतिक एवं तटीय लक्षण
- जावड़ी पहाड़ियाँ: पूर्वी घाट की यह श्रृंखला पलार बेसिन के दक्षिणी भाग से सीमा बनाती है।
- कोरोमंडल तटीय संबंध: पलार का मुहाना कोरोमंडल तट का भाग है।
- चेन्नई पोर्ट — कृत्रिम बंदरगाह।
- कामराजार / एन्नोर पोर्ट — पहला निगमित बंदरगाह।
- पुलिकट झील — खारे पानी की लैगून।
- श्रीहरिकोटा द्वीप — SDSC-SHAR।
खंड 9 / 10
पोनैयार नदी तंत्र (South Pennar / Thenpennai)
प्रमुख भौगोलिक बिंदु:
- अन्य नाम: Thenpennai, South Pennar, दक्षिणा पिनाकिनी (Dakshina Pinakini)।
- उद्गम: कर्नाटक में नंदी पहाड़ियों (चेनोकैशव पर्वत) के दक्षिणी ढलान से।
- प्रवाह मार्ग:
- कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु में प्रवेश करती है।
- तमिलनाडु में यह पूर्वी घाट की विखंडित श्रेणियों—विशेषकर जावड़ी पहाड़ियों (Javadi Hills) और शेवरॉय पहाड़ियों (Shevaroy Hills)—के मध्य/सीमावर्ती भागों को पार करते हुए पूर्व की ओर बहती है।
- जिंजी पहाड़ियों (Gingee Hills) के दक्षिण से गुजरकर यह तटीय जलोढ़ मैदान में प्रवेश करती है।
- मुहाना: अंत में पुदुचेरी और कुड्डालोर के निकट कई शाखाओं में बँटकर बंगाल की खाड़ी में विसर्जित हो जाती है।
प्रमुख बाँध एवं बहुउद्देशीय परियोजनाएँ
- कृष्णागिरि बाँध: पोनैयार नदी, कृष्णागिरि जिला (तमिलनाडु)।
- साथनूर बाँध: पोनैयार नदी, तिरुवन्नामलाई जिला (तमिलनाडु)।
संबंधित पहाड़ियाँ (Eastern Ghats Uplands)
- जावड़ी पहाड़ियाँ
- शेवरॉय पहाड़ियाँ
- जिंजी पहाड़ियाँ
- भौगोलिक संबंध: पोनैयार बेसिन पूर्वी घाट की इन विखंडित श्रेणियों के अपवाह तंत्र से प्रत्यक्ष रूप से संबद्ध है।
खंड 10 / 10