भोटिया जनजाति
उच्च हिमालयी सीमांत क्षेत्रों की प्रमुख जनजाति—उपसमूह व घाटियाँ, मौसमी आवास, विवाह, प्रमाणित वेशभूषा-आभूषण, देवी-देवता, संस्कार और पारंपरिक व्यापार-प्रथाओं का क्रमबद्ध अध्ययन।
01 परिचय एवं उत्पत्ति
- वंशीय पहचान
- यह किरात वंशीय जनजाति है।
- मानव-समूह
- मंगोलॉयड मानव प्रजाति से संबंधित।
- एटकिन्सन का मत
- इतिहासकार एटकिन्सन इन्हें ‘हुणिया’ जाति से संबंधित मानते हैं।
- आत्म-पहचान
- भोटिया लोग स्वयं को ‘खस राजपूत’ मानते हैं।
- जीवन-शैली
- पशुपालक और अर्द्धघुमंतू (Semi-nomadic)।
- प्रमुख निवास
- महान हिमालय में इनकी सर्वाधिक आबादी निवास करती है।
- शिक्षा
- यह राज्य की सर्वाधिक शिक्षित जनजाति है।
02 प्रमुख उपजातियाँ एवं निवास क्षेत्र
चमोली जिला
- नीति घाटी
- तोलछा जनजाति
- माणा घाटी
- मारछा जनजाति
पिथौरागढ़ जिला
- जौहार घाटी
- शौका (जौहारी) जनजाति
- दारमा · व्यास · चौंदास
- रंग जनजाति
उत्तरकाशी जिला
- जाड़ुंग गाँव / नेलांग घाटी
- जाड़ उपजाति
03 जाड़ उपजाति के विशेष तथ्य
- वंश
- ये स्वयं को ‘जनक’ का वंशज मानते हैं।
- धर्म
- बौद्ध धर्म; इनके धार्मिक प्रमुख या पुजारी को ‘लामा’ कहते हैं।
- भाषा
- ‘रोम्बा’ — तिब्बती भाषा से मिलती-जुलती।
- विपत्ति के समय पूजा
- तिब्बती देवी-देवताओं ‘फैला व घूरमा’ की पूजा करते हैं।
लोहसर
नववर्ष पर मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार।
04 सामाजिक व्यवस्था एवं निवास
समाज
यह एक पितृसत्तात्मक समाज है।
संपत्ति
संपत्ति का विभाजन पिता के जीवित रहते ही कर दिया जाता है।
सगे-संबंधी
सगे-संबंधियों को ‘स्वारा’ कहा जाता है।
मौसमी आवास
05 विवाह प्रथाएँ एवं सामाजिक संस्थाएँ
रंग-बंग प्रथा
युवा गृह — विवाह पूर्व की सामाजिक संस्था। गाँव के बाहर बने अलग घर में अविवाहित युवक-युवतियाँ रात में एकत्रित होते थे।
विवाह की शब्दावली
- थौची
- सगाई (Engagement) की रस्म।
- दामी
- विवाह (Marriage) की मुख्य रस्म।
पारंपरिक विवाह के प्रकार
गन्धर्व · अँचल · सरोल विवाहभोटिया समाज में मुख्य रूप से प्रचलित रहे हैं; सरोल विवाह विशेषकर शौका जनजाति में।
वर्तमान विवाह प्रथाएँ — बारात के आधार पर
- तत्सत
- वर स्वयं बारात लेकर लड़की के घर जाता है।
- दमोला
- वर नहीं जाता; केवल बाराती लड़की के घर जाते हैं।
पौणा नृत्य
विवाह के शुभ अवसर पर हाथ में रूमाल लेकर किया जाने वाला पारंपरिक युद्ध (Martial) नृत्य।
06 वेशभूषा एवं आभूषण
ध्यान रखें: भोटिया समुदाय कई घाटी-आधारित उपसमूहों में विभाजित है; इसलिए वेशभूषा की शब्दावली क्षेत्र और उपसमूह के अनुसार बदलती है। नीचे सामान्य भोटांतिक शब्द और जाड़ भोटिया के क्षेत्रीय शब्द अलग दिए गए हैं।
पुरुष परिधान
रंगा
घुटनों तक पहुँचने वाला ऊनी अंगरखा।
गैजू / खगचसी
चूड़ीदार ऊनी पायजामा।
बाँखे
ऊनी जूते।
महिला परिधान
च्युमाला
महिलाओं का प्रमुख पारंपरिक परिधान।
च्युं
आधी बाँहों का परिधान।
च्यूंकला
सिर पर पहना जाने वाला टोपीनुमा वस्त्र।
ज्यूज्य
कमर में बाँधा / लपेटा जाने वाला लंबा कपड़ा।
प्रमुख आभूषण — ‘साली-पुली’
साली-पुली — भोटांतिक बोली में आभूषणों का सामूहिक नाम।
गले के आभूषण
बलडंगचाँदी के सिक्कों को पिरोकर बनाई गई माला।
खोंगलीगले का आभूषण।
मंसालीलाल मनकों की माला।
सिर के आभूषण
बीरावलीछंकरी वालीपतेली बाली
हाथ के आभूषण
लक्षेपअंगूठी।
जाड़ भोटिया — क्षेत्रीय वेशभूषा
पुरुष
वपकन
ऊनी चोगा।
पैन्तुराण
खाल से बने पारंपरिक जूते; जाड़ पुरुष और महिलाएँ दोनों पहनते हैं।
महिला
कौलक / कोलक (Kolak)
जाड़ महिलाओं का लंबा पारंपरिक चोगा / ढीला कोट।
पेगरी (Pegri)
कौलक / कोलक को कमर पर बाँधने वाला पट्टा / कमरबंद।
केरक
जाड़ महिलाओं द्वारा कमर में लपेटा जाने वाला वस्त्र।
07 खान-पान
- भात / छाकू
- चावल से बना भोजन।
- पूली
- बड़े आकार की रोटी।
ज्या
इनका प्रमुख पेय — वृक्ष की छाल, दूध, मक्खन और नमक से निर्मित।
- छंग
- जौ आदि से निर्मित विशेष प्रकार की पारंपरिक शराब।
08 धर्म एवं देवी-देवता
- मुख्य आराध्य
- भूम्याल देवता।
- पर्वत पूजा
- कैलाश, नंदा देवी, हाथी और द्रोणागिरि पर्वत।
- अन्य देवता
- ग्वाला, बैग, सैम, घैम।
विशिष्ट रक्षक देवता
सामान्य पशुओं के रक्षकसिधवा व विधवा
बुग्यालों में चरने वाले पशुओं के रक्षकघंटाकर्ण — चमोली
खोये हुए पशुओं का पता लगाने वाले देवतासांई
09 प्रमुख संस्कार
3 माह
भूमौ: नवजात बालक के 3 माह का होने के बाद किया जाने वाला संस्कार।
मुंडन
प्रस्थावामों / प्रस्थावोमो: बच्चों का मुंडन संस्कार।
20 वर्ष
बुढ़ानी: बच्चे के 20 वर्ष का होने पर किया जाने वाला संस्कार।
मृतक
ग्वन: मृतक की शांति हेतु किया जाने वाला संस्कार।
10 त्योहार, लोकगीत व अन्य प्रथाएँ
कंडाली / किर्जी उत्सव
शौका जनजाति द्वारा पिथौरागढ़ की चौंदास घाटी में मनाया जाता है।
प्रमुख लोकगीत
- तिमली
- सामाजिक विषय पर आधारित।
- बाजू
- वीर रस प्रधान।
- तुबेरा
- रसिक (Romantic) प्रधान।
- वाद्ययंत्र
- मनोरंजन हेतु ‘हुड़के’ का प्रयोग।
प्रमुख प्रथाएँ
- काटिल विधि
- वनों को साफ करके खेती करना — झूम खेती।
- गम्मया प्रथा
- प्राचीन समय में चीन / तिब्बत से व्यापार करने की प्रथा।