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उत्तराखंड की नदियाँ

River Systems of Uttarakhand — विस्तृत नोट्स

5 नदी तंत्र
1 पूर्ण नोट्स
4 शीघ्र आने वाले
📍 कुमाऊं क्षेत्र — पिथौरागढ़ & चंपावत

Kaali / Sharada River System

काली नदी तंत्र (शारदा नदी)

कुल लंबाई (उत्तराखंड)
252 किमी
उद्गम स्थल
कालापानी, व्यास आश्रम के समीप — 3,600 मी., पिथौरागढ़
प्रवाह जिले (उत्तराखंड)
केवल पिथौरागढ़ & चंपावत
मैदानी नाम
शारदा (टनकपुर / बनबसा और खटीमा क्षेत्र के बाद)
अंतर्राष्ट्रीय भूमिका
भारत (उत्तराखंड) – नेपाल सीमा रेखा
पौराणिक नाम
श्यामा नदी (स्कंद पुराण, मानसखंड)
🌊
काली नदी — विस्तृत परिचय Main River Introduction

काली नदी कुमाऊं क्षेत्र की सबसे प्रमुख और उत्तराखंड की सबसे लंबी नदी (252 किलोमीटर) है। यह भारत (उत्तराखंड) और नेपाल के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा का निर्धारण करती है।

सटीक उद्गम: पिथौरागढ़ जिले के सुदूर उत्तर-पूर्व में 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कालापानी (व्यास आश्रम के समीप) के झरनों से।

ऐतिहासिक विवाद: 1816 की सुगौली संधि के तहत इसे सीमा माना गया, लेकिन नेपाल इसका उद्गम लिम्पियाधुरा (कुठी यांग्ती का उद्गम स्थल) मानता है।

पौराणिक महत्त्व: स्कंद पुराण के मानसखंड में इसे 'श्यामा नदी' कहा गया है। विशेष तथ्य — इसका जल देवताओं को अर्पित नहीं किया जाता।

मैदानी प्रवेश व नाम परिवर्तन: पहाड़ों से उतरकर टनकपुर (बनबसा) और खटीमा क्षेत्र से होते हुए जब यह मैदानी भागों में प्रवेश करती है, तो इसे शारदा कहा जाता है। खटीमा में स्थित लोहियाहेड पावर हाउस (41.4 MW) इसी शारदा नहर प्रणाली पर स्थित राज्य की पुरानी परियोजनाओं में से एक है।

प्रवाह क्षेत्र: उत्तराखंड में यह मुख्य रूप से केवल दो जिलों — पिथौरागढ़ और चंपावत — में बहती है।

⚖️ सुगौली संधि (1816)

इस संधि के तहत काली नदी को भारत-नेपाल की अंतर्राष्ट्रीय सीमा माना गया। नेपाल का दावा लिम्पियाधुरा तक है (कुठी यांग्ती का उद्गम), जबकि भारत कालापानी को मानता है।

📖 पौराणिक विशेषता

स्कंद पुराण के मानसखंड में 'श्यामा नदी' कहा गया। यह एकमात्र प्रमुख नदी है जिसका जल देवताओं को अर्पित नहीं किया जाता।

⚡ शारदा नाम कब?

टनकपुर (बनबसा) और खटीमा के बाद मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करने पर काली को 'शारदा' कहते हैं। लोहियाहेड पावर हाउस (41.4 MW) इसी पर है।

🗺️ प्रवाह क्षेत्र

उत्तराखंड में यह केवल दो जिलों में बहती है — पिथौरागढ़ और चंपावत। अन्य कोई जिला नहीं।

🗺️
सहायक नदियाँ — उत्तर से दक्षिण Tributaries: North → South
↑ हिमालय / उच्च पर्वत (उत्तर)  ————  तराई / मैदान (दक्षिण) ↓
① कुठी यांग्ती Kuthi Yankti
📍 संगम: गुंजी (3200 मी.)
उद्गमजास्कर श्रेणी में लिम्पियाधुरा (Limpiyadhura) के पास बर्फीले पहाड़ों से
निर्मित घाटीव्यास घाटी
नामकरणकुठी गाँव के नाम पर
सूक्ष्म सहायक नदियाँसंगचुमना (Sangchumna), निरपानी (Nirpani), थुमका (Thumka)
⚠️ परीक्षा बिंदु: लिम्पियाधुरा को नेपाल काली नदी का उद्गम मानता है — यहीं से भारत-नेपाल सीमा विवाद है। कुठी यांग्ती का उद्गम भी यहीं से है।
② पूर्वी धौलीगंगा Eastern Dhauliganga
📍 संगम: तवाघाट
उद्गमपिथौरागढ़ में दारमा पास के समीप गोवान्खा हिमनद (Goankha Garh) से
निर्मित घाटीदारमा घाटी
विशेषताअत्यंत संकरी और दुर्गम घाटी से बहती है
सूक्ष्म सहायक नदियाँलस्सर यांग्ती (Lassar Yankti — सबसे बड़ी), सेला यांग्ती, अंचरी गाड़
🏗️ छिरकिला बाँध (280 MW) — तवाघाट के पास पूर्वी धौलीगंगा पर स्थित है।
③ गोरीगंगा Goriganga
📍 संगम: जौलजीबी
उद्गमकुमाऊं के सबसे बड़े हिमनद — मिलम ग्लेशियर (Milam Glacier) से
निर्मित घाटीजोहार घाटी (गोरी छाल) — ऐतिहासिक घाटी
सूक्ष्म सहायक नदियाँरालम गाड़ (Ralam Garh), मदकनी (Madkani), गोनखा गाड़
संगम स्थल की विशेषताजौलजीबी — भारत-नेपाल सीमा पर स्थित
🎪 जौलजीबी मेला: हर वर्ष 14 नवंबर को जौलजीबी में प्रसिद्ध ऐतिहासिक व्यापारिक मेला लगता है।
④ सरयू नदी तंत्र Saryu River System — काली की सबसे बड़ी सहायक
📍 संगम: पंचेश्वर
उद्गमबागेश्वर में नंदाकोट पर्वत के पास सरमूल (सहस्रधारा) से
लंबाई146 किमी
धार्मिक महत्त्वकुमाऊं की सबसे पवित्र नदी — गंगा के समान मानी जाती है
विशेष स्थानकाली नदी को सर्वाधिक जल देने वाली सहायक — अपने आप में एक पूरा तंत्र
🌿 सरयू की प्रमुख सहायक नदियाँ (सरयू तंत्र)
① गोमती — उद्गम: डेबरा श्रेणी से। संगम: बागेश्वर में सरयू से मिलती है। विशेष: यहीं बागनाथ मंदिर है और प्रसिद्ध उत्तरायणी मेला लगता है।
② पनार — उद्गम: मोतियापाथर से। संगम: काकरीघाट में सरयू से मिलती है।
③ पूर्वी रामगंगा (सरयू की सबसे बड़ी सहायक नदी) — उद्गम: मुनस्यारी तहसील के नामिक (Namik) और पोंटिंग (Ponting) हिमनदों से। लंबाई: 108 किमी। सूक्ष्म सहायक: भुजपत्री गाड़ और गार्गसिया गाड़। संगम: पिथौरागढ़ के पास रामेश्वर नामक प्राचीन शिव मंदिर वाले तीर्थस्थल पर सरयू में विलीन होती है।
🏗️ पंचेश्वर बाँध (5040 MW) — सरयू और काली के संगम पंचेश्वर पर प्रस्तावित। यह भारत-नेपाल की संयुक्त परियोजना है और भारत का सबसे बड़ा प्रस्तावित जल-विद्युत बाँध है।
⑤ लधिया Ladhiya — राज्य सीमा में अंतिम संगम
📍 संगम: चूका (चंपावत)
उद्गमचंपावत और नैनीताल की सीमा पर स्थित गजार ओखलकांडा (Gajar Okhalkanda) के पास से
सूक्ष्म सहायक नदीक्वैराला (Kwarala)
महत्त्वयह उत्तराखंड की सीमा के भीतर काली नदी में मिलने वाली बिल्कुल अंतिम प्रमुख नदी है। इसके बाद काली मैदानी क्षेत्र (तराई) में उतर जाती है।
🏁 अंतिम संगम: चूका के बाद काली / शारदा के रूप में मैदान में प्रवेश कर लेती है — उत्तराखंड राज्य की सीमा समाप्त।
क्विक रिवीजन टेबल उत्तर से दक्षिण संगम क्रम
क्र.सं. मिलने वाली नदी (Tributary) काली से संगम स्थल निर्मित घाटी / विशेषता
1. कुठी यांग्ती गुंजी (3200 मी.) व्यास घाटी — लिम्पियाधुरा विवाद; कुठी गाँव पर नाम
2. पूर्वी धौलीगंगा तवाघाट दारमा घाटी — छिरकिला बाँध (280 MW); संकरी दुर्गम घाटी
3. गोरीगंगा जौलजीबी जोहार घाटी (गोरी छाल) — जौलजीबी व्यापारिक मेला (14 नवंबर); मिलम ग्लेशियर से उद्गम
4. सरयू नदी तंत्र पंचेश्वर कुमाऊं की सबसे पवित्र; सर्वाधिक जल; पंचेश्वर बाँध (5040 MW) प्रस्तावित; सहस्रधारा (146 किमी) से उद्गम
5. लधिया चूका (चंपावत) गजार ओखलकांडा से उद्गम; क्वैराला सहायक; राज्य सीमा में काली का अंतिम संगम
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गंगा नदी तंत्र
नोट्स शीघ्र उपलब्ध होंगे — Coming Soon
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यमुना नदी तंत्र
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पश्चिमी रामगंगा तंत्र & कोसी नदी
नोट्स शीघ्र उपलब्ध होंगे — Coming Soon