उत्तराखंड इतिहास · UKPSC / UKSSSC

पृथक उत्तराखंड
राज्य आंदोलन

1938 से 1995 तक के सम्पूर्ण आंदोलन का कालखंडवार मास्टर नोट्स — परीक्षा के जाल, क्रोनोलॉजी तालिका, रक्तरंजित संघर्ष के शहीद और मुख्य व्यक्तित्वों सहित।

📅
57
वर्षों का इतिहास
🏛️
5
ऐतिहासिक चरण
👤
20+
प्रमुख व्यक्तित्व
⚠️
8
परीक्षा के जाल
चरण १ · 1938 – 1957

🌱 प्रारंभिक चरण और वैचारिक बीज

पहली बार पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को राष्ट्रीय मंच पर उठाया गया।

5-6 मई 1938 कांग्रेस का श्रीनगर अधिवेशन
  • मुख्य अतिथि: जवाहरलाल नेहरू और विजय लक्ष्मी पंडित
  • अध्यक्ष: प्रताप सिंह नेगी (आचार्य नरेंद्र देव की अनुपस्थिति के कारण)
  • महत्व: इसी अधिवेशन में पहली बार श्रीदेव सुमन द्वारा पर्वतीय क्षेत्र के लिए पृथक अधिकारों की मांग रखी गई।
  • श्रीनगर अधिवेशन से प्रेरित होकर श्रीदेव सुमन ने दिल्ली में इसकी स्थापना की।
  • 1939 में नाम बदलकर 'हिमालय सेवा संघ' कर दिया गया।
  • अध्यक्षता: बद्रीदत्त पांडे
  • उत्तरांचल के पर्वतीय भू-भाग को विशेष वर्ग में रखने और पृथक राज्य की मांग रखी गई।

इस समिति का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को मिलाकर एक वृहत हिमालयी राज्य बनाना था।

  • कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव पी.सी. जोशी ने सरकार के समक्ष पृथक राज्य का प्रस्ताव रखा।
  • वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने भी जवाहरलाल नेहरू के समक्ष यह मांग उठाई।
  • टिहरी के सांसद (8 बार निर्वाचित) मानवेंद्र शाह ने पृथक पूर्ण राज्य की माँग उठाई।
  • 1962 में भारत-चीन युद्ध के कारण राष्ट्रीय हित को देखते हुए यह माँग वापस ले ली गई।
चरण २ · 1967 – 1976

🏛️ पर्वतीय राज्य परिषद व सरकार के प्रयास

1967 में रामनगर से उठी पर्वतीय राज्य परिषद की आवाज़ और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रशासनिक प्रयास।

  • स्थान: रामनगर
  • अध्यक्ष: दयाकृष्ण पांडे
  • उपाध्यक्ष: गोविंद सिंह मेहरा
  • महासचिव: नारायण दत्त सुंदरियाल
यू.पी. सरकार के प्रयास — 1968–1976

उ.प्र. सरकार द्वारा पर्वतीय विकास विभाग की स्थापना — पर्वतीय क्षेत्र के लिए प्रशासनिक कार्य हेतु।

उ.प्र. सरकार द्वारा पर्वतीय विकास परिषद का गठन — पर्वतीय क्षेत्र के लिए नीतियाँ बनाना उद्देश्य।

1971 📌 पर्वतीय विकास निगम — स्थापना व विघटन
  • स्थापना वर्ष: 1971  |  मुख्यालय: नैनीताल  |  मुख्यमंत्री: कमलपति त्रिपाठी
  • 1975: मुख्यालय नैनीताल से देहरादून स्थानांतरित — मुख्यमंत्री: हेमवती नंदन बहुगुणा
  • 1975: मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी द्वारा पर्वतीय विकास निगम का विघटन किया गया।
📅 31 मार्च 1976 विघटन के बाद दो नए निगम ★ परीक्षा में बार-बार
कुमाऊँ
कुमाऊँ मंडल विकास निगम
मुख्यालय — नैनीताल
गढ़वाल
गढ़वाल मंडल विकास निगम
मुख्यालय — पौड़ी
चरण ३ · 1970 – 1984

⚡ क्षेत्रीय संगठन व उत्तराखंड क्रांति दल

क्षेत्रीय आंदोलन संगठनों के उभार से लेकर UKD के गठन तक — आंदोलन को मिली नई राजनीतिक दिशा।

CPI के महासचिव पूरन चंद्र जोशी द्वारा कुमाऊँ राष्ट्रीय मोर्चा की स्थापना।

  • स्थान: नैनीताल
  • 1973 में 'दिल्ली चलो' का नारा दिया।
  • बद्रीनाथ के विधायक प्रताप सिंह नेगी के नेतृत्व में दिल्ली की पदयात्रा।

शमशेर सिंह बिष्ट द्वारा पर्वतीय युवा मोर्चा की स्थापना।

  • 1976: उत्तरांचल युवा परिषद का गठन।
  • 1978: इस संगठन ने संसद का घेराव किया।
  • त्रेपन सिंह नेगी के नेतृत्व में दिल्ली में रैली।
  • तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को ज्ञापन सौंपा गया।
24-25 जुलाई 1979 ⭐ उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) का गठन
  • स्थान: मसूरी
  • प्रथम अध्यक्ष: डॉ. डी.डी. पंत (तत्कालीन कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति)
  • संस्थापक सदस्य: इंद्रमणि बडोनी (उत्तराखंड के गांधी), काशी सिंह ऐरी, दिवाकर भट्ट, बिपिन चंद्र त्रिपाठी
  • लक्ष्य: 8 पर्वतीय जिलों को मिलाकर एक पृथक राज्य की स्थापना (वर्तमान 13 जिले नहीं)

UKD के पहले विधायक के रूप में जसवंत सिंह बिष्ट रानीखेत (अल्मोड़ा) से UKD के चुनाव चिन्ह पर जीते।

चरण ४ · 1987 – 1993

🔥 आंदोलन का सक्रियतम दौर — राष्ट्रीय मान्यता की ओर

1987 आंदोलन का सबसे सक्रिय वर्ष। इसी दौर में पहली बार एक राष्ट्रीय दल ने पृथक राज्य की मांग को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया।

1987 ★ सक्रियतम वर्ष 5 प्रमुख घटनाएं — UKD, संसद, बंद, धरना, भाजपा 5 घटनाएं
23 अप्रैल 1987
संसद में 'पत्र बम'
UKD के तत्कालीन उपाध्यक्ष त्रिवेंद्र पंवार ने संसद भवन के अंदर पृथक राज्य की मांग के पर्चे (लेटर बम) फेंके।
1987 (विभाजन)
UKD का विभाजन
वैचारिक मतभेदों के चलते UKD दो धड़ों में बंट गया। सबसे शक्तिशाली धड़े का नेतृत्व काशी सिंह ऐरी को मिला।
9 सितंबर 1987
ऐतिहासिक उत्तराखंड बंद
UKD के नेतृत्व में पूरे पर्वतीय क्षेत्र में ऐतिहासिक 'उत्तराखंड बंद' का आयोजन।
23 नवंबर 1987
बोट क्लब धरना, दिल्ली
UKD द्वारा दिल्ली के बोट क्लब पर विशाल धरना। हरिद्वार क्षेत्र को उत्तराखंड में मिलाने की आधिकारिक सिफारिश।
1987 (अल्मोड़ा)
भाजपा का अल्मोड़ा अधिवेशन
लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में — पृथक राज्य की मांग स्वीकार की गई।
ऐतिहासिक महत्व
यह पहली बार था जब किसी राष्ट्रीय दल (भाजपा) ने उत्तराखंड राज्य की मांग को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया।

सोबन सिंह जीना के नेतृत्व में 'उत्तरांचल उत्थान परिषद' का गठन।

सभी बिखरे हुए संगठनों को मिलाकर 'उत्तरांचल संयुक्त संघर्ष समिति' का गठन।

UKD के विधायक जसवंत सिंह बिष्ट ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में पृथक राज्य की मांग का पहला आधिकारिक विधायी प्रस्ताव रखा।

  • उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने पृथक राज्य गठन का प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा।
  • प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार ने प्रस्ताव ठुकरा दिया।

1993 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने Manifesto में पृथक राज्य को प्रमुखता से शामिल किया।

चरण ५ · 1994

🏛️ रमाशंकर कौशिक समिति (1994)

मुलायम सिंह यादव सरकार द्वारा गठित 6-सदस्यीय कैबिनेट उप-समिति, जिसने पृथक राज्य की व्यापक रूपरेखा तैयार की।

4 जनवरी 1994 समिति का गठन — परिचय व संरचना
  • गठनकर्ता: मुलायम सिंह यादव सरकार (उ.प्र.)
  • प्रकृति: आधिकारिक कैबिनेट उप-समिति — 6 सदस्यीय
  • अध्यक्ष: रमाशंकर कौशिक (तत्कालीन नगर विकास मंत्री)
  • संयोजक/सचिव: डॉ. आर. एस. टोलिया (IAS अधिकारी)
  • कुल बैठकें: 5 — लखनऊ, अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल, काशीपुर, और पुनः लखनऊ

समिति ने 356 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। यह बड़थ्वाल समिति की रिपोर्ट (13 अप्रैल 1994) के बाद आई।

उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल द्वारा कौशिक समिति की सिफारिशें 10 अगस्त 1994 को आधिकारिक रूप से स्वीकार।

📌 नोट: प्रारंभिक सहमति की तिथि 21 जून 1994 भी मिलती है, लेकिन पूर्ण मंजूरी अगस्त में हुई।
24 अगस्त 1994 ⭐ यूपी विधानसभा + विधान परिषद — सर्वसम्मत संकल्प

उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद दोनों ने सर्वसम्मति से अलग राज्य निर्माण का संकल्प पारित कर केंद्र सरकार को भेजा।

📌 मुख्य सिफारिशें
8 जिलों का फॉर्मूला
नए राज्य में केवल तत्कालीन 8 पर्वतीय जिले शामिल करने की सिफारिश।
  • 🔹 गढ़वाल के 5 जिले: देहरादून, पौड़ी, टिहरी, चमोली, उत्तरकाशी
  • 🔹 कुमाऊं के 3 जिले: नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़
3 प्रशासनिक मंडल
बेहतर प्रशासन के लिए नए राज्य में 3 मंडल (Divisions) बनाने का सुझाव।
राजधानी — गैरसैंण ⭐
भौगोलिक केंद्र होने के कारण गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की स्पष्ट सिफारिश।
चरण ५ · 1994

📋 विनोद बड़थ्वाल समिति (1994)

मुलायम सिंह यादव द्वारा गठित गैर-आधिकारिक राजनीतिक अध्ययन समिति, जिसने राज्य की आंतरिक संरचना का खाका खींचा।

1994 समिति का गठन — परिचय व प्रकृति
  • गठनकर्ता: मुलायम सिंह यादव (पार्टी स्तर पर)
  • अध्यक्ष: विनोद बड़थ्वाल (वरिष्ठ समाजवादी नेता)
  • प्रकृति: गैर-आधिकारिक / राजनीतिक अध्ययन समिति
  • उद्देश्य: राज्य के भीतर राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व का खाका
13 अप्रैल 1994 ⭐ रिपोर्ट — कौशिक समिति से पहले!

रिपोर्ट 13 अप्रैल 1994 को सौंपी — कौशिक समिति (5 मई 1994) से पहले।

परीक्षा बिंदु
बड़थ्वाल समिति → 13 अप्रैल 1994  |  कौशिक समिति → 5 मई 1994
📌 मुख्य सिफारिशें
16 जिलों का फॉर्मूला
पहाड़ों की दुर्गमता को देखते हुए 8 बड़े जिलों को पुनर्गठित कर 16 छोटे जिले बनाने की सिफारिश।
(कौशिक समिति ने 8 जिले सुझाए — तुलनात्मक परीक्षा बिंदु)
75–80 विधानसभा सीटें
तत्कालीन 19 सीटों को नाकाफी बताते हुए 75–80 सीटों का प्रस्ताव।
(परिसीमन के बाद लगभग 70 सीटें बनीं।)
विधान परिषद — 25 सीटें
द्विसदनीय व्यवस्था की वकालत — 25 सदस्यीय विधान परिषद का सुझाव।
राजधानी — गैरसैंण ⭐
जनभावनाओं और भौगोलिक संतुलन के आधार पर गैरसैंण का समर्थन।
⚡ दोनों समितियों की तुलना
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बिंदुकौशिक समितिबड़थ्वाल समिति
प्रकृतिआधिकारिक कैबिनेट उप-समितिगैर-आधिकारिक / राजनीतिक
रिपोर्ट तिथि5 मई 199413 अप्रैल 1994
अध्यक्षरमाशंकर कौशिकविनोद बड़थ्वाल
जिले8 जिले16 जिले
विधानसभा सीटेंउल्लेख नहीं75–80 सीटें
विधान परिषदउल्लेख नहीं25 सदस्य
राजधानीगैरसैंणगैरसैंण
चरण ६ · जून 1994 – नवंबर 1995

🔴 रक्तरंजित संघर्ष — आंदोलन का चरमोत्कर्ष

नई आरक्षण नीति के विरोध से भड़की 'अगस्त क्रांति', खटीमा–मसूरी गोलीकांड, रामपुर तिराहा कांड और श्रीयंत्र टापू दमन — यह कालखंड आंदोलन का सबसे निर्णायक और रक्तरंजित अध्याय है।

उपखंड A · आरक्षण विरोध (जून–अगस्त 1994)
17 जून 1994 ⚡ आरक्षण शासनादेश — आंदोलन की चिंगारी
  • जारीकर्ता: मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (उ.प्र. सरकार)
  • आरक्षण का ढांचा: SC = 21%  |  OBC = 27%  |  ST = 2%  |  कुल = 50%
  • विरोध का कारण: 8 पर्वतीय जिलों में OBC आबादी मात्र 2–3% थी, जबकि 27% सीटें उनके लिए आरक्षित — पहाड़ी युवाओं के लिए नौकरियाँ व शिक्षण संस्थान लगभग बंद।
  • नारा: "उत्तराखंड लेके रहेंगे, आरक्षण वापस करो।"
📌 नोट: कुछ स्रोतों में लागू करने की तिथि 21 जून 1994 भी मिलती है।
2 अगस्त 1994 इंद्रमणि बडोनी का आमरण अनशन — पौड़ी
  • अनशनकारी: स्व. इंद्रमणि बडोनी — 'उत्तराखंड के गांधी'
  • स्थान: पौड़ी
  • 7–8 अगस्त मध्यरात्रि: प्रशासन ने बलपूर्वक बडोनी जी को उठाया और सहारनपुर / मेरठ जेल में स्थानांतरित किया।
8 अगस्त 1994 🔴 पौड़ी गोलीकांड — 'अगस्त क्रांति'
  • बडोनी जी की गिरफ्तारी के विरोध में पौड़ी में उग्र रैली।
  • पुलिस की अंधाधुंध फायरिंग में जीत बहादुर गुरुंग शहीद हो गए।
  • इस घटना के बाद भड़के जन-आक्रोश को इतिहास में 'अगस्त क्रांति' कहा गया।
उपखंड B · रक्तरंजित सितंबर (1–15 सितंबर 1994)
1 सितंबर 1994 🔴 खटीमा कांड — 7 शहीद · 'काला दिवस' S. श्रीवास्तव समिति
  • स्थान: खटीमा, ऊधमसिंह नगर
  • भूतपूर्व सैनिकों और छात्रों के शांतिपूर्ण जुलूस पर पुलिस फायरिंग।
🩸 7 वीर शहीद — खटीमा
1
भगवान सिंह सिरारी
2
प्रताप सिंह
3
सलीम अहमद
4
गोपीचंद
5
धर्मानंद भट्ट
6
परमजीत सिंह
7
राम सिंह
⚖️ जांच समिति: S. श्रीवास्तव समिति
🔴 यह दिन राज्य में 'काला दिवस' (Black Day) के रूप में मनाया जाता है।
2 सितंबर 1994 🔴 मसूरी कांड — 6 शहीद + DSP · झूलाघर मुरलीधर समिति
  • स्थान: झूलाघर, मसूरी
  • खटीमा कांड के विरोध में मौन जुलूस पर पुलिस फायरिंग।
  • विशेष: भीड़ और पुलिस की झड़प में DSP उमाकांत त्रिपाठी की भी मृत्यु हुई।
🩸 6 वीर शहीद — मसूरी ★ प्रथम महिला शहीद
1
हंसा धनाई
★ प्रथम महिला शहीद
2
बेलमती चौहान
★ द्वितीय महिला शहीद
3
बलबीर सिंह नेगी
4
धनपत सिंह
5
मदन मोहन ममगाईं
6
राय सिंह बंगारी
⚖️ जांच समिति: मुरलीधर समिति
  • स्थान: बाटाघाटा — मसूरी के पास संकरे मार्ग पर।
  • प्रदर्शनकारियों पर पुलिस का लाठीचार्ज। भगदड़ में कई लोग गहरी खाई में गिरकर घायल।
उपखंड C · रामपुर तिराहा — सबसे काला अध्याय (2 अक्टूबर 1994)
2 अक्टूबर 1994 🔴 रामपुर तिराहा / मुजफ्फरनगर कांड CBI जांच
  • पृष्ठभूमि: खटीमा–मसूरी कांड के विरोध में हजारों आंदोलनकारी गांधी जयंती (2 अक्टूबर) को दिल्ली के लाल किले पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए बसों से जा रहे थे।
  • घटना: 1–2 अक्टूबर की मध्यरात्रि को मुलायम सिंह यादव सरकार के निर्देश पर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर PAC और पुलिस ने निहत्थे लोगों पर फायरिंग की। महिलाओं के साथ अमानवीय बर्बरता।
  • जांच: इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप पर CBI जांच करवाई गई।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टिप्पणी: इस घटना को "सभ्य समाज पर कलंक" और "क्रूर शासक की क्रूर साजिश" कहा गया।
🩸 7 वीर शहीद — रामपुर तिराहा
1
रवीन्द्र सिंह रावत
2
राजेश लखेड़ा
3
सूर्यप्रकाश थपलियाल
4
अशोक कुमार कश्यप
5
सत्येन्द्र चौहान
6
गिरीश भद्री
7
वीरेन्द्र शर्मा
उपखंड D · संगठनात्मक व राजनीतिक मोर्चा (सितंबर 1994 – जून 1995)
  • खटीमा–मसूरी कांड के बाद आंदोलन को युवा नेतृत्व देने हेतु छात्र युवा संघर्ष समिति का गठन।
  • स्थान: रामनगर (नैनीताल)।
7 दिसंबर 1994 दिल्ली महारैली + संविधान बचाओ यात्रा दो समांतर घटनाएँ
घटना 1 · 7 दिसंबर 1994
उत्तरांचल प्रदेश संघर्ष समिति
मेजर जनरल (से.नि.) बी.सी. खंडूड़ी के नेतृत्व में दिल्ली में विशाल महारैली।
घटना 2 · 7 दिसं 94 – 25 जन 95
उत्तरांचल आंदोलन संचालन समिति
संविधान बचाओ यात्रा — उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) से राष्ट्रपति भवन तक।
  • आंदोलन के दबाव, मुजफ्फरनगर कांड की बदनामी और गेस्ट हाउस कांड के बाद मुलायम सिंह यादव की सरकार गिरी।
  • 3 जून 1995 को सुश्री मायावती उत्तर प्रदेश की नई मुख्यमंत्री बनीं।
उपखंड E · श्रीयंत्र टापू कांड (10 नवंबर 1995)
10 नवंबर 1995 🔴 श्रीयंत्र टापू कांड — 2 शहीद
  • स्थान: अलकनंदा नदी के मध्य 'श्रीयंत्र टापू' — श्रीनगर, पौड़ी गढ़वाल
  • मायावती सरकार के बाद भी राज्य न मिलने पर आंदोलनकारी टापू पर आमरण अनशन पर बैठे।
  • पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया और अनशनकारियों के टेंट नदी में फेंके।
🩸 2 वीर शहीद — श्रीयंत्र टापू
1
यशोधर बेंजवाल
2
राजेश रावत
परीक्षा जाल: यशोधर बेंजवाल = श्रीयंत्र टापू (1995) — मुजफ्फरनगर कांड से न जोड़ें।
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तिथिघटनाशहीद / मुख्य तथ्य
17 जून 1994आरक्षण शासनादेशSC 21%, OBC 27%, ST 2% — मुलायम सिंह यादव
2 अगस्त 1994आमरण अनशन — पौड़ीइंद्रमणि बडोनी ('उत्तराखंड के गांधी')
8 अगस्त 1994पौड़ी गोलीकांड — 'अगस्त क्रांति'जीत बहादुर गुरुंग शहीद
1 सितंबर 1994खटीमा कांड — 'काला दिवस'7 शहीद · S. श्रीवास्तव समिति
2 सितंबर 1994मसूरी कांड — झूलाघर6 शहीद (हंसा धनाई, बेलमती चौहान सहित) + DSP उमाकांत त्रिपाठी · मुरलीधर समिति
15 सितंबर 1994बाटाघाटा कांडमसूरी के पास लाठीचार्ज, खाई में गिरे प्रदर्शनकारी
18 सितंबर 1994छात्र युवा संघर्ष समितिरामनगर (नैनीताल) में गठन
2 अक्टूबर 1994रामपुर तिराहा / मुजफ्फरनगर कांड7 शहीद · CBI जांच · "सभ्य समाज पर कलंक"
7 दिसंबर 1994दिल्ली महारैलीउत्तरांचल प्रदेश संघर्ष समिति (बी.सी. खंडूड़ी)
7 दिसं 94 – 25 जन 95संविधान बचाओ यात्राउत्तरांचल आंदोलन संचालन समिति (SC → राष्ट्रपति भवन)
3 जून 1995उ.प्र. सत्ता परिवर्तनमुलायम आउट → मायावती मुख्यमंत्री
10 नवंबर 1995श्रीयंत्र टापू कांड — पौड़ी गढ़वालयशोधर बेंजवाल और राजेश रावत शहीद · नदी = अलकनंदा
संपूर्ण मास्टर नोट्स

⚖️ विधायी गठन एवं प्रथम प्रशासन (1996–2007)

15 अगस्त 1996 की उद्घोषणा से लेकर 1 जनवरी 2007 के नाम परिवर्तन तक — संवैधानिक प्रक्रिया, अंतरिम विधानसभा और परीक्षा के जाल।

⚖️ राज्य निर्माण की विधायी प्रक्रिया
15 अगस्त 1996
ऐतिहासिक उद्घोषणा — प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा
तत्कालीन प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा (H.D. Deve Gowda) ने लाल किले की प्राचीर से 'उत्तरांचल' राज्य के निर्माण की पहली आधिकारिक घोषणा की।
1998
विधेयक का प्रथम ड्राफ्ट — यूपी विधानसभा के 26 संशोधन
केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी (NDA) सरकार ने ड्राफ्ट तैयार किया। राष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने इसे उत्तर प्रदेश विधानसभा के पास भेजा। यूपी विधानसभा ने 26 संशोधनों (26 Amendments) के साथ वापस भेजा। इसी बीच केंद्र सरकार गिर जाने से विधेयक पारित नहीं हो सका।
27 जुलाई 2000
विधेयक पुनः प्रस्तुत — लोकसभा में
दोबारा वाजपेयी सरकार बनने के बाद 'उत्तर प्रदेश पुनर्गठन विधेयक, 2000' (UP Reorganisation Bill) को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया।
29 जुलाई 2000
जॉर्ज फर्नांडिस समिति का गठन — ऊधमसिंह नगर विवाद
शिरोमणि अकाली दल द्वारा 'ऊधमसिंह नगर' को पर्वतीय राज्य में शामिल करने के विरोध को सुलझाने हेतु तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय समिति बनी। समिति ने ऊधमसिंह नगर को उत्तरांचल में ही रखने की संस्तुति दी।
1 अगस्त 2000
लोकसभा में पारित
जॉर्ज समिति की रिपोर्ट के आधार पर विवाद सुलझने के बाद विधेयक संसद के निचले सदन (Lok Sabha) से पारित हुआ।
10 अगस्त 2000
राज्यसभा में पारित
विधेयक उच्च सदन (Rajya Sabha) से भी निर्विरोध पारित हो गया।
28 अगस्त 2000
राष्ट्रपति की स्वीकृति — के.आर. नारायणन
तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन (K.R. Narayanan) ने विधेयक पर हस्ताक्षर किए। इसी के साथ यह कानूनी रूप से 'अधिनियम (Act)' बन गया।
9 नवंबर 2000
राज्य का विधिवत गठन — भारत का 27वाँ राज्य
'उत्तरांचल' राज्य अस्तित्व में आया। यह भारत का 27वाँ राज्य और हिमालयी राज्यों के क्रम में 11वाँ राज्य बना।
29 दिसंबर 2006
नाम परिवर्तन विधेयक — राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने 'उत्तरांचल (नाम परिवर्तन) अधिनियम 2006' पर हस्ताक्षर किए।
1 जनवरी 2007
नाम परिवर्तन लागू — उत्तरांचल → उत्तराखंड
राज्य का नाम आधिकारिक रूप से 'उत्तरांचल' से बदलकर 'उत्तराखंड' कर दिया गया।
🏛️ प्रथम अंतरिम प्रशासनिक संरचना (9 नवंबर 2000)
📌 राज्य गठन के तुरंत बाद चुनाव संभव नहीं थे, अतः संक्रमण काल के लिए एक अंतरिम विधानसभा (Interim Assembly) का गठन किया गया।
अंतरिम विधानसभा — सदस्य गणित
अविभाजित उत्तर प्रदेश के विधानमंडल में उत्तराखंड क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों को सदस्य बनाया गया:

🔹 यूपी विधानसभा से (MLA): 22 सदस्य
🔹 यूपी विधान परिषद से (MLC): 8 सदस्य (निर्धारित 9 में से 1 पद कार्यकाल पूर्ण होने से रिक्त था)
🔹 कुल सक्रिय सदस्य: 30 सदस्य
प्रथम अंतरिम सरकार — BJP (23/30 सीटें)
🔹 प्रथम राज्यपाल: सुरजीत सिंह बरनाला
🔹 प्रथम मुख्यमंत्री (अंतरिम): नित्यानंद स्वामी
🔹 प्रथम विधानसभा अध्यक्ष: प्रकाश पंत (निर्विरोध चुने गए)
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पद / घटनातथ्य (Fact)विशेष विवरण
उद्घोषणाकर्ताएच.डी. देवेगौड़ा15 अगस्त 1996 (लाल किले से)
26 संशोधनयूपी विधानसभा (1998)ड्राफ्ट वापस करते समय
समितिजॉर्ज फर्नांडिस समिति29 जुलाई 2000 · ऊधमसिंह नगर विवाद
लोकसभा में पारित1 अगस्त 2000
राज्यसभा में पारित10 अगस्त 2000
राष्ट्रपति स्वीकृतिके.आर. नारायणन28 अगस्त 2000
राज्य का क्रम27वाँ (भारत) · 11वाँ (हिमालयी)9 नवंबर 2000
प्रथम राज्यपालसुरजीत सिंह बरनाला
प्रथम CM (अंतरिम)नित्यानंद स्वामीBJP · प्रथम निर्वाचित CM = N.D. तिवारी (2002)
अंतरिम सदस्य30 सदस्य22 (MLA) + 8 (MLC)
प्रथम विधानसभा अध्यक्षप्रकाश पंतनिर्विरोध
नाम परिवर्तन1 जनवरी 2007उत्तरांचल → उत्तराखंड · हस्ताक्षर: 29 दिसं 2006
⚠️ परीक्षा के जाल
जाल #A 1998 का संवैधानिक चरण — 26 संशोधन
  • 🔹 प्रश्न: "यूपी विधानसभा ने पुनर्गठन विधेयक को कितने संशोधनों के साथ वापस भेजा?" → उत्तर: 26 संशोधनों के साथ (1998 में)
जाल #B विधायी तिथियों का सही क्रम (Chronology)
  • 🔹 क्रम रटें: लोकसभा में पेश (27 जुलाई) → जॉर्ज समिति (29 जुलाई) → लोकसभा से पास (1 अगस्त) → राज्यसभा से पास (10 अगस्त) → राष्ट्रपति (28 अगस्त)
जाल #C प्रथम CM बनाम प्रथम निर्वाचित CM
  • 🔹 'अंतरिम / प्रथम' CM → नित्यानंद स्वामी
  • 🔹 'निर्वाचित' (Elected) CM → नारायण दत्त तिवारी (N.D. Tiwari) — 2002 के चुनावों के बाद।
⚡ प्रश्न में 'अंतरिम' और 'निर्वाचित' शब्द पर विशेष ध्यान दें।
जाल #D अंतरिम विधानसभा की सदस्य संख्या — 30 या 31?
  • 🔹 निर्धारित संख्या 31 थी, लेकिन एक MLC का कार्यकाल पूर्ण हो जाने से सक्रिय सदस्य 30 ही थे।
  • 🔹 UKPSC परीक्षा में सही उत्तर 30 को माना जाता है।
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📊 क्रोनोलॉजी तालिका

परीक्षा से पहले रिवाइज़ के लिए सभी महत्वपूर्ण वर्ष, घटना और व्यक्तित्व।

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वर्ष / तिथिप्रमुख संगठन / घटनाप्रमुख व्यक्तित्व / तथ्य
📌 चरण १ · 1938–1957 · प्रारंभिक वैचारिक बीज
5–6 मई 1938श्रीनगर कांग्रेस अधिवेशन — पहली बार पृथक राज्य की माँगप्रताप सिंह नेगी (अध्यक्ष); नेहरू, श्रीदेव सुमन
1938गढ़देश सेवा संघ (1939 → हिमालय सेवा संघ)श्रीदेव सुमन (दिल्ली में स्थापना)
1946हल्द्वानी कांग्रेस अधिवेशन — पृथक राज्य की माँगबद्रीदत्त पांडे (अध्यक्षता)
1950पर्वतीय विकास जन समिति — हिमाचल+उत्तराखंड संयुक्त राज्यसंयुक्त हिमालयी राज्य की संकल्पना
1952पृथक राज्य का पहला ज्ञापनपी.सी. जोशी, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली
1957आंदोलन का प्रथम स्थगनमानवेंद्र शाह
📌 चरण २ · 1960–1979 · संगठनात्मक संघर्ष
1967पर्वतीय राज्य परिषद — रामनगर में स्थापनादयाकृष्ण पांडे, गोविंद सिंह मेहरा, N.D. सुंदरियाल
1968पर्वतीय विकास विभाग (उ.प्र. सरकार)उ.प्र. सरकार
1969पर्वतीय विकास परिषद (उ.प्र. सरकार)उ.प्र. सरकार
30 अक्टू. 1970कुमाऊँ राष्ट्रीय मोर्चापूरन चंद्र जोशी (CPI)
1971पर्वतीय विकास निगम (HQ: नैनीताल → देहरादून 1975; विघटन 1975)कमलपति त्रिपाठी (स्थापना) · N.D. तिवारी (विघटन)
1972उत्तरांचल परिषद · 'दिल्ली चलो' (1973)प्रताप सिंह नेगी
1974पर्वतीय युवा मोर्चाशमशेर सिंह बिष्ट
31 मार्च 1976कुमाऊँ + गढ़वाल मंडल विकास निगमउ.प्र. सरकार
1976 / 1978उत्तरांचल युवा परिषद · संसद घेराव (1978)युवा नेतृत्व
23 जुलाई 1979उत्तरांचल राज्य परिषद — मोरारजी देसाई को ज्ञापनत्रेपन सिंह नेगी
24–25 जुलाई 1979⭐ उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) — मसूरी में स्थापनाडॉ. डी.डी. पंत (प्रथम अध्यक्ष); इंद्रमणि बडोनी, काशी सिंह ऐरी, दिवाकर भट्ट, बिपिन त्रिपाठी
📌 चरण ३ · 1980–1986 · UKD की राजनीतिक उपस्थिति
1980UKD की पहली चुनावी जीत — रानीखेत (अल्मोड़ा)जसवंत सिंह बिष्ट
📌 चरण ४ · 1987–1993 · राष्ट्रीय मान्यता की ओर
23 अप्रैल 1987संसद में 'पत्र बम' (लेटर बम) फेंके गएत्रिवेंद्र पंवार (UKD उपाध्यक्ष)
1987UKD का विभाजनसशक्त धड़े का नेतृत्व → काशी सिंह ऐरी
9 सित. 1987ऐतिहासिक उत्तराखंड बंद — पूरा पर्वतीय क्षेत्रUKD नेतृत्व
23 नव. 1987बोट क्लब धरना, दिल्ली · हरिद्वार मिलाने की सिफारिशUKD
1987भाजपा का अल्मोड़ा अधिवेशन — पृथक राज्य स्वीकृत (पहला राष्ट्रीय दल)लालकृष्ण आडवाणी
1988उत्तरांचल उत्थान परिषदसोबन सिंह जीना
1989उत्तरांचल संयुक्त संघर्ष समिति — सभी संगठनों का विलयएकजुट आंदोलन
1990यूपी विधानसभा में पहला विधायी प्रस्तावजसवंत सिंह बिष्ट
12 अग. 1991यूपी सरकार का प्रस्ताव → केंद्र द्वारा अस्वीकृतपी.वी. नरसिम्हा राव (अस्वीकृति)
1993भाजपा के घोषणा पत्र में पृथक राज्य की माँगभाजपा
📌 चरण ५ · 1994–1995 · रक्तरंजित संघर्ष
17 जून 1994आरक्षण शासनादेश — SC 21%, OBC 27%, ST 2% (कुल 50%)मुलायम सिंह यादव
2 अगस्त 1994पौड़ी में आमरण अनशनइंद्रमणि बडोनी ('उत्तराखंड के गांधी')
8 अगस्त 1994पौड़ी गोलीकांड — 'अगस्त क्रांति'जीत बहादुर गुरुंग शहीद
1 सितंबर 1994खटीमा कांड — 'काला दिवस' · S. श्रीवास्तव समिति7 शहीद: भगवान सिंह सिरारी, प्रताप सिंह, सलीम अहमद, गोपीचंद, धर्मानंद भट्ट, परमजीत सिंह, राम सिंह
2 सितंबर 1994मसूरी कांड — झूलाघर · मुरलीधर समिति6 शहीद: हंसा धनाई, बेलमती चौहान, बलबीर सिंह नेगी, धनपत सिंह, मदन मोहन ममगाईं, राय सिंह बंगारी + DSP उमाकांत त्रिपाठी
15 सितंबर 1994बाटाघाटा कांड — मसूरी के पास लाठीचार्जकई प्रदर्शनकारी खाई में गिरे
18 सितंबर 1994छात्र युवा संघर्ष समिति — रामनगर (नैनीताल) में गठनयुवा नेतृत्व
2 अक्टूबर 1994रामपुर तिराहा / मुजफ्फरनगर कांड — CBI जांच · "सभ्य समाज पर कलंक"7 शहीद: रवीन्द्र सिंह रावत, राजेश लखेड़ा, सूर्यप्रकाश थपलियाल, अशोक कुमार कश्यप, सत्येन्द्र चौहान, गिरीश भद्री, वीरेन्द्र शर्मा
7 दिसंबर 1994दिल्ली महारैली — उत्तरांचल प्रदेश संघर्ष समितिबी.सी. खंडूड़ी (मेजर जनरल से.नि.)
7 दिसं 94 – 25 जन 95संविधान बचाओ यात्रा — SC से राष्ट्रपति भवनउत्तरांचल आंदोलन संचालन समिति
3 जून 1995उ.प्र. में सत्ता परिवर्तन — मुलायम आउटमायावती — नई मुख्यमंत्री
10 नवंबर 1995श्रीयंत्र टापू कांड — अलकनंदा नदी, पौड़ी गढ़वालयशोधर बेंजवाल और राजेश रावत शहीद
📌 चरण ६ · 1996–2007 · विधायी गठन एवं प्रथम प्रशासन
15 अगस्त 1996पृथक राज्य की घोषणा — लाल किले सेएच.डी. देवेगौड़ा (प्रधानमंत्री)
1996उत्तर प्रदेश पुनर्गठन विधेयक — ड्राफ्ट तैयारकेंद्र सरकार
1998यूपी विधानसभा ने विधेयक 26 संशोधनों के साथ वापस भेजाउ.प्र. विधानसभा
27 जुलाई 2000लोकसभा में उत्तर प्रदेश पुनर्गठन विधेयक पेशकेंद्र सरकार (NDA · अटल बिहारी वाजपेयी)
29 जुलाई 2000जॉर्ज फर्नांडिस समिति — ऊधमसिंह नगर विवाद सुलझाने हेतु (3 सदस्य)जॉर्ज फर्नांडिस (रक्षा मंत्री) — संस्तुति: ऊधमसिंह नगर उत्तरांचल में
1 अगस्त 2000लोकसभा में विधेयक पारित
10 अगस्त 2000राज्यसभा में विधेयक पारित
28 अगस्त 2000राष्ट्रपति की स्वीकृति — विधेयक अधिनियम बनाके.आर. नारायणन (राष्ट्रपति)
9 नवंबर 2000🎉 उत्तरांचल राज्य का विधिवत गठन — भारत का 27वाँ राज्य, हिमालयी राज्यों में 11वाँअंतरिम विधानसभा: 22 MLA + 8 MLC = 30 सदस्य
9 नवंबर 2000प्रथम राज्यपाल नियुक्तसुरजीत सिंह बरनाला
9 नवंबर 2000प्रथम मुख्यमंत्री (अंतरिम) — BJP · 23/30 सीटेंनित्यानंद स्वामी
9 नवंबर 2000प्रथम विधानसभा अध्यक्ष — निर्विरोध चुने गएप्रकाश पंत
2002प्रथम विधानसभा चुनाव — प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्रीनारायण दत्त तिवारी (N.D. Tiwari) — कांग्रेस
29 दिसंबर 2006नाम परिवर्तन अधिनियम पर हस्ताक्षर — 'उत्तरांचल (नाम परिवर्तन) अधिनियम 2006'डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (राष्ट्रपति)
1 जनवरी 2007नाम परिवर्तन लागू — उत्तरांचल → उत्तराखंडराज्य का आधिकारिक नया नाम
सावधानी

⚠️ परीक्षा के जाल (Exam Traps)

UKPSC/UKSSSC अक्सर इन बिंदुओं पर अभ्यर्थियों को फंसाते हैं। ध्यान से पढ़ें।

High-Frequency Exam Points
जाल #1 तीन 'उत्तरांचल परिषद' के नाम — तीन अलग संगठन!
  • 🔹 उत्तरांचल परिषद (1972) — प्रताप सिंह नेगी, 'दिल्ली चलो' (1973)
  • 🔹 उत्तरांचल युवा परिषद (1976) — संसद का घेराव (1978)
  • 🔹 उत्तरांचल राज्य परिषद (1979) — त्रेपन सिंह नेगी, मोरारजी ज्ञापन
संसद का घेराव = युवा परिषद (1978) — यह परिषद (1972) ने नहीं किया।
जाल #2 संसद vs विधानसभा — कौन, कब, कहाँ?
  • 🏛️ संसद में लेटर बम → त्रिवेंद्र पंवार (1987)
  • 📋 यूपी विधानसभा में पहला विधायी प्रस्ताव → जसवंत सिंह बिष्ट (1990)
जाल #3 UKD का प्रारंभिक स्वरूप — 8 जिले, 13 नहीं!
स्थापना के समय UKD ने वर्तमान 13 जिलों की नहीं, बल्कि केवल 8 पर्वतीय जिलों को मिलाकर राज्य बनाने की मांग की थी।
जाल #4 दो 'पांडे' — D.K. Pande ≠ D.D. Pant
  • 🔹 दया कृष्ण पांडे (D.K. Pande) → पर्वतीय राज्य परिषद के अध्यक्ष (1967)
  • 🔹 डॉ. डी.डी. पंत (D.D. Pant) → UKD के प्रथम अध्यक्ष (1979)
जाल #5 आरक्षण प्रतिशत का घालमेल — SC/OBC मत उलटें!
आयोग विकल्पों में OBC को 21% और SC को 27% लिख सकता है — यह जाल है।
सही क्रम: SC = 21%  |  OBC = 27%  |  ST = 2%  |  कुल = 50%
जाल #6 महिला शहीद — खटीमा नहीं, मसूरी कांड में!
  • 🔹 हंसा धनाई और बेलमती चौहान → मसूरी कांड (2 सितंबर 1994) — खटीमा नहीं।
  • 🔹 DSP उमाकांत त्रिपाठी की मृत्यु → मसूरी कांड में — खटीमा या मुजफ्फरनगर में नहीं।
  • 🔹 जीत बहादुर गुरुंग → पौड़ी गोलीकांड (8 अगस्त 1994) — सितंबर की घटनाओं से मत जोड़ें।
काला दिवस = खटीमा कांड (1 सितंबर 1994) — 7 शहीद, S. श्रीवास्तव समिति।
जाल #7 दो समितियों के नाम — सूक्ष्म अंतर!
  • 🔹 उत्तरांचल प्रदेश संघर्ष समिति → बी.सी. खंडूड़ी — 7 दिसंबर 1994 को दिल्ली रैली।
  • 🔹 उत्तरांचल आंदोलन संचालन समिति → संविधान बचाओ यात्रा (7 दिसं 94 – 25 जन 95)।
⚡ दोनों समितियाँ 7 दिसंबर 1994 को एक साथ सक्रिय थीं — नाम ध्यान से याद करें।
जाल #8 श्रीयंत्र टापू की भौगोलिक स्थिति
  • 🔹 यशोधर बेंजवाल और राजेश रावत → श्रीयंत्र टापू, 10 नवंबर 1995 — मुजफ्फरनगर से मत जोड़ें।
  • 🔹 श्रीयंत्र टापू परीक्षा में पौड़ी गढ़वाल जिले में माना जाता है। नदी = अलकनंदा