उत्तराखंड के राजकीय प्रतीक
उत्तराखंड के राजकीय चिन्ह, राजभाषाओं, राज्य वृक्ष, पुष्प, पक्षी, पशु, तितली, खेल, वाद्य यंत्र, राज्य गीत और राज्य मछली के परीक्षा-उपयोगी नोट्स।
01 राजकीय चिन्ह
उत्तराखण्ड राज्य का आधिकारिक राजकीय चिन्ह
- आकार
- हीराकार (Diamond-shaped)
- पर्वत
- हिमालय की तीन पर्वत चोटियाँ
- जल
- पर्वतों के नीचे चार जलधाराएँ
- शीर्ष
- भारत का राष्ट्रीय प्रतीक — अशोक स्तंभ के सिंह
- आदर्श वाक्य
- “सत्यमेव जयते”
02 उत्तराखण्ड की राजभाषाएँ
- प्रथम राजभाषा
- हिन्दी
- द्वितीय राजभाषा
- संस्कृत
- दर्जा
- 2010 में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा
उत्तराखण्ड संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा देने वाला देश का पहला राज्य है।
03 राज्य वृक्ष — बुरांश
Rhododendron arboreum · सदाबहार पर्वतीय वृक्ष
- वैज्ञानिक नाम
- Rhododendron arboreum
- प्राकृतिक आवास ऊंचाई
- 1,500–4,000 मीटर
- वृक्ष की ऊंचाई
- 20–25 फीट
ऊंचाई के अनुसार फूलों का रंग
- 1,500–2,500 मीटर: लाल (Red)।
- 2,500–3,000 मीटर: गुलाबी (Pink), जैसे मुनस्यारी क्षेत्र।
- 3,000 मीटर से अधिक: सफेद (White)।
प्रमुख विशेषताएं
- सदाबहार पर्वतीय वृक्ष है; मैदानी क्षेत्रों में नहीं उगता।
- लकड़ी मुलायम होती है और ईंधन के रूप में प्रयुक्त होती है।
- पत्तियां मोटी होती हैं तथा खाद एवं कम्पोस्ट बनाने में प्रयुक्त होती हैं।
उपयोग
- औषधीय फूलों का रस हृदय रोग (Heart Disease) में लाभकारी माना जाता है।
- फूलों से डाई अर्थात प्राकृतिक रंग भी बनाया जाता है।
पुष्पन काल
- मकर संक्रांति के बाद फूल आना शुरू होते हैं।
- बैसाखी तक पूर्ण खिलाव (Full Bloom) होता है।
- गर्मी बढ़ने के साथ फूल सूखने लगते हैं।
- वन अधिनियम (Forest Act) 1974 के तहत अवैध कटाई रोकने हेतु इसे संरक्षित वृक्ष घोषित किया गया।
- बुरांश नेपाल का राष्ट्रीय पुष्प तथा हिमाचल प्रदेश और नागालैंड का राज्य पुष्प भी है।
04 राज्य पुष्प — ब्रह्मकमल
Saussurea obvallata · उच्च हिमालयी पुष्प
- वैज्ञानिक नाम
- Saussurea obvallata
- परिवार
- Asteraceae (ऐस्टरेसी)
- आवास
- उच्च हिमालयी क्षेत्र, लगभग 12,000–15,000 फीट / 3,500–4,800 मीटर
- पौधे की ऊंचाई
- 70–80 सेमी
- पुष्पन काल
- जुलाई से सितंबर
प्रमुख वितरण क्षेत्र
- वैली ऑफ फ्लावर्स
- केदारनाथ
- शिवलिंग बेस
- पिंडारी ग्लेशियर
उत्तराखंड की प्रमुख प्रजातियां
- फेनकमल: सॉसुरिया सिम्पसोनियाना।
- कस्तूरी कमल: सॉसुरिया गॉसिपिफोरा।
वितरण एवं विशेषताएं
- उत्तराखंड में कुल 24 प्रजातियां पाई जाती हैं।
- विश्व स्तर पर कुल लगभग 300 प्रजातियां पाई जाती हैं।
- बैंगनी रंग के फूल पीली पत्तियों (bracts) पर गुच्छों में लगते हैं और अत्यंत सुगंधित होते हैं।
- वेदों में ब्रह्मकमल का उल्लेख मिलता है।
- स्थानीय नाम ‘कौल पद्म’ है।
- महाभारत के वनपर्व में इसे ‘सौगन्धिक पुष्प’ कहा गया है।
- केदारनाथ में भगवान शिव को विशेष ‘प्रसाद’ के रूप में अर्पित किया जाता है।
05 राज्य पक्षी — हिमालयी मोनाल
Lophophorus impejanus · हिमालय का मयूर
- वैज्ञानिक नाम
- Lophophorus impejanus
- राज्य प्रतीक दर्जा
- वर्ष 2001
- परिवार
- फासियानिडे · तीतर परिवार
- आवास ऊंचाई
- 2,500–4,500 मीटर
- प्रिय भोजन
- आलू
- नेपाल में
- राष्ट्रीय पक्षी · डाँफे
स्थानीय एवं अन्य नाम
- उत्तराखंड: मुनाल, मन्याल, मोनाल।
- कश्मीर: सुनाल।
- सिक्किम: चामदोंग।
नर और मादा की पहचान
नर मोनाल
- स्थानीय नाम—मोनाल।
- नीले, हरे, लाल और तांबे रंग के चमकदार पंख होते हैं।
- सिर पर मोर जैसी चमकीली हरी कलगी होती है।
मादा मोनाल
- स्थानीय नाम—मुनाली या डफिया।
- भूरा-कत्थई रंग तथा सफेद-काली धारियां होती हैं।
- नर जैसी चमकीली हरी कलगी नहीं होती।
- गले पर सफेद धब्बा होता है।
- साधारण रंग अंडे सेते समय चट्टानों और सूखी पत्तियों के बीच छलावरण देता है।
आवास एवं प्रमुख क्षेत्र
- ऊंचाई: 2,500–4,500 मीटर के उच्च हिमालयी क्षेत्र।
- वनस्पति: ओक (बांज), बुरांश और देवदार के घने वन।
- खुला आवास: उच्च हिमालयी बुग्याल।
- कुमाऊं: पिथौरागढ़ का मुनस्यारी क्षेत्र और अस्कोट WLS।
- गढ़वाल: केदारनाथ WLS की केदार घाटी, तुंगनाथ और मदमहेश्वर।
- अन्य प्रमुख क्षेत्र: नंदा देवी बायोस्फीयर रिज़र्व।
मोनाल गणना 2008
- उत्तराखंड वन्यजीव संरक्षण बोर्ड की गणना में राज्य में कुल 919 मोनाल दर्ज किए गए।
- सर्वाधिक 367 मोनाल केदार घाटी में दर्ज किए गए।
आहार एवं खुदाई
- आहार में कंद-मूल, बीज, फल-फूल और कीड़े-मकोड़े शामिल हैं।
- मोनाल सर्वाहारी है।
- प्रिय भोजन आलू है।
- मजबूत पंजों से मिट्टी खोदकर कंद-मूल निकालता है।
- खुदाई के कारण उच्च हिमालयी क्षेत्रों की आलू फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।
प्रजनन तंत्र
- तिनकों का पारंपरिक घोंसला नहीं बनाता।
- चट्टानों के छेद, बड़े वृक्ष-कोटर या प्राकृतिक गुफाओं में अंडे देता है।
- प्रजनन काल: अप्रैल से अगस्त।
- एक बार में 4–6 अंडे देता है।
- ऊष्मायन अवधि: लगभग 27–29 दिन।
- अंडे सेने की अवधि में नर मादा की सुरक्षा करता है।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल है; शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध और कड़ी सजा का प्रावधान है।
- IUCN रेड लिस्ट: संकटमुक्त (Least Concern)।
- सामान्य नाम: हिमालयी मोनाल / हिमालय का मयूर।
- नेपाल का राष्ट्रीय पक्षी: डाँफे।
06 राज्य पशु — कस्तूरी मृग
Moschus chrysogaster · Himalayan Musk Deer
- वैज्ञानिक नाम
- Moschus chrysogaster
- राज्य प्रतीक दर्जा
- वर्ष 2001
- परिवार
- मस्किडे (Moschidae)
- आवास ऊंचाई
- 3,600–4,400 मीटर
- स्थानीय नाम
- कस्तूरा
- प्रिय भोजन
- केदारपाती
उत्तराखंड में प्रमुख विस्तार
- केदारनाथ
- फूलों की घाटी
- उत्तरकाशी
- पिथौरागढ़ का अस्कोट क्षेत्र
पहचान
- सामान्य नाम: कस्तूरी मृग / Himalayan Musk Deer।
- स्थानीय नाम: कस्तूरा।
- राज्य में कस्तूरी मृग की 4 प्रजातियां पायी जाती हैं।
- उत्तराखंड में मुख्य प्रजाति: Moschus chrysogaster।
- रंग: भूरा; शरीर पर काले और पीले धब्बे पाए जाते हैं।
शारीरिक संरचना
- सींग नहीं होते। नर के ऊपरी जबड़े के दो बड़े कैनाइन दांत बाहर निकले होते हैं, जो आत्मरक्षा में सहायक हैं।
- पिछले पैर अगले पैरों से लंबे होते हैं, इसलिए ढलान और बर्फ पर दौड़ने में सहायता मिलती है।
- औसत जीवनकाल: लगभग 20 वर्ष।
- ऊंचाई: लगभग 20 इंच।
- वजन: लगभग 10–20 किग्रा।
- गर्भधारण अवधि: लगभग 6 माह।
कस्तूरी की प्राप्ति एवं संरचना
- कस्तूरी केवल नर में पाई जाती है; मादा में नहीं पाई जाती।
- यह नाभि और जननांग के बीच स्थित विशेष ग्रंथि में बनती है।
- उत्पादन एक वर्ष से अधिक आयु के नर में शुरू होता है।
- मुख्य सुगंधित घटक मस्कॉन (Muscone) है।
- परीक्षा-प्रचलित मात्रा: वयस्क नर से लगभग 30–45 ग्राम।
उपयोग
- आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा में उपयोग होता है।
- दमा, मिर्गी और हृदय रोग की पारंपरिक औषधियों में प्रयोग किया जाता है।
- महंगे इत्र और सुगंध निर्माण में उपयोग होता है।
आवास एवं भोजन
- 3,600–4,400 मीटर के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है।
- मुख्य आहार: हिमालयी वनस्पतियां।
- प्रिय भोजन: केदारपाती (Kedar Patri)।
- केदारनाथ, फूलों की घाटी, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के अस्कोट क्षेत्र में प्रमुख उपस्थिति है।
प्रमुख संरक्षण प्रयास
- केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य
चमोली व रुद्रप्रयाग में 975.20 वर्ग किमी। कस्तूरी मृग संरक्षण के कारण इसे ‘केदारनाथ मस्क डिअर सैंक्चुअरी’ भी कहा जाता है।
- महरुड़ी कस्तूरी मृग अनुसंधान केंद्र
वर्तमान स्थान बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों की सीमा पर है। उद्देश्य—वैज्ञानिक अध्ययन एवं संरक्षण।
- कांचुला खर्क प्रजनन एवं संरक्षण केंद्र
चमोली जिले में स्थापित।
- अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य
स्थान—पिथौरागढ़। परीक्षा-प्रचलित तथ्य: राज्य में कस्तूरी मृगों की सर्वाधिक संख्या।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल है और उच्चतम कानूनी सुरक्षा प्राप्त है।
- IUCN रेड लिस्ट: संकटग्रस्त (Endangered)।
- मुख्य खतरा कस्तूरी की अंतर्राष्ट्रीय मांग के कारण अवैध शिकार तथा आवास-क्षरण है।
- 2005 की गणना: उत्तराखंड में 279 कस्तूरी मृग थे।
- परीक्षा-प्रचलित वर्ष: महरूड़ी केंद्र के लिए 1974।
07 राजकीय तितली — कॉमन पीकॉक
Papilio polyctor · वूली-ब्रांडेड पीकॉक
- घोषणा
- 7 नवंबर 2016
- वैज्ञानिक नाम
- Papilio polyctor
- पुराना परीक्षा-नाम
- Papilio bianor polyctor
- स्थानीय नाम
- लोग्मोर / लोग मोर
- ऊंचाई
- लगभग 2,100 मीटर / 7,000 फीट तक
- औसत जीवनकाल
- 30–35 दिन
नाम एवं वर्गीकरण
2016 की अधिसूचना और पुरानी परीक्षा-सामग्री में इसे कॉमन पीकॉक कहा गया। अद्यतन वर्गीकरण में उत्तराखंड की यह तितली वूली-ब्रांडेड पीकॉक (Papilio polyctor) मानी जाती है।
आवास एवं जीवन चक्र
- हिमालयी क्षेत्रों में लगभग 7,000 फीट की ऊंचाई तक पाई जाती है।
- टिमरू की पत्तियों पर अंडे देती है।
- टिमरू इसका प्रमुख पोषक एवं आश्रय पौधा है।
उत्तराखंड का पहला तितली पार्क
- स्थान: लच्छीवाला, देहरादून।
- शिवालिक तितली पार्क का उद्घाटन अक्टूबर 2016 में हुआ।
- 1996 में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में “भारत की सबसे सुंदर तितली” के रूप में उल्लेखित।
- मोर के पंखों जैसे हरे-नीले रंग के कारण इसका नाम कॉमन पीकॉक पड़ा।
08 राजकीय खेल — फुटबॉल
उत्तराखंड का राजकीय खेल।
- घोषणा वर्ष
- 2011
- घोषणा काल
- मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’
09 राजकीय वाद्य यंत्र — ढोल
उत्तराखंड का राजकीय वाद्य यंत्र।
- घोषणा वर्ष
- 2015 · हरीश रावत सरकार
- समिति अध्यक्ष
- जुगल किशोर
- समिति सचिव
- योगेश भंडारी
- परीक्षा में नाम
- “भंडारी समिति”
बनावट
- बाहरी खोल: तांबा, पीतल या चांदी।
- दोनों सिरे: बकरे की खाल से मढ़े जाते हैं।
ताल एवं वादन
- लगभग 22 प्रकार के ताल।
- प्रमुख ताल—नौबत, निमाणी, बड़ेत और धुइयां।
सांस्कृतिक महत्व
- मांगलिक कार्य, जागर और पांडव नृत्य का प्रमुख वाद्य।
- ढोल सागर: वादन-नियम, ताल और आध्यात्मिक महत्व की मौखिक ज्ञान-परंपरा।
परंपरा
- वादक समुदाय: दास / औजी।
- प्रमुख ज्ञाता: उत्तम दास।
10 राज्य गीत — उत्तराखण्ड देवभूमि मातृभूमि
‘उत्तराखण्ड देवभूमि मातृभूमि’
- राज्य गीत का दर्जा
- 6 फरवरी 2016
- गीतकार
- हेमन्त बिष्ट
- संगीत
- नरेन्द्र सिंह नेगी
- गायक
- नरेन्द्र सिंह नेगी एवं अनुराधा निराला
- भाषाएँ
- हिन्दी, गढ़वाली एवं कुमाऊँनी
- अवधि
- लगभग 9 मिनट
प्रारंभिक पंक्ति
“उत्तराखण्ड देवभूमि मातृभूमि, शत-शत वंदन अभिनंदन”
चयन संबंधी तथ्य
- राज्य गीत के चयन हेतु 2015 में समिति गठित की गई।
- समिति अध्यक्ष: लक्ष्मण सिंह बटरोही।
11 राज्य मछली — गोल्डन महाशीर
Golden Mahseer / हिमालयी महाशीर
- वैज्ञानिक नाम
- Tor putitora
- पहचान
- Sport / Game Fish के रूप में प्रसिद्ध
- प्राकृतिक आवास
- तेज बहाव वाली हिमालयी नदियाँ
प्रमुख वितरण
- भारत: सिंधु, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र।
- उत्तराखण्ड: गंगा, रामगंगा, काली एवं नयार नदी तंत्र।
संरक्षण संबंधी तथ्य
- ICAR–Directorate of Coldwater Fisheries Research, भीमताल महाशीर के संरक्षण एवं प्रजनन पर कार्य करता है।
- सतपुली–नयार क्षेत्र महाशीर संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
12 राजकीय प्रतीकों की ऊंचाई तुलना
यहाँ ऊंचाई से आशय समुद्र तल से प्राकृतिक आवास या वितरण की ऊंचाई है। यह प्रतीक की शारीरिक ऊंचाई नहीं है।
| नाम | वैज्ञानिक नाम | ऊंचाई |
|---|---|---|
| राज्य वृक्ष — बुरांश | Rhododendron arboreum | 1,500–4,000 मीटर |
| राज्य पुष्प — ब्रह्मकमल | Saussurea obvallata | 3,500–4,800 मीटर |
| राज्य पक्षी — हिमालयी मोनाल | Lophophorus impejanus | 2,500–4,500 मीटर |
| राज्य पशु — कस्तूरी मृग | Moschus chrysogaster | 3,600–4,400 मीटर |