मुंशी प्रेमचंद
जीवन-परिचय, उपाधियाँ, जीवनियाँ, पत्रिकाएँ, प्रमुख उपन्यास-कहानियाँ और परीक्षा-विशेष तथ्य — क्रमबद्ध revision नोट्स।
व्यक्तिगत परिचय
- मूल नाम
- धनपत राय।
- हिंदी नाम ‘प्रेमचंद’
- ‘ज़माना’ पत्रिका के संपादक दया नारायण निगम ने दिया।
- जन्म
- 1880 ई., वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
- मृत्यु
- 1936 ई., वाराणसी।
- अधूरा उपन्यास
- मंगलसूत्र — उनके बेटे अमृत राय ने पूरा किया।
प्रमुख उपाधियाँ / उपनाम
- भारत का मैक्सिम गोरकीरूसी साहित्यकार मैक्सिम गोरकी से तुलना।
- उपन्यास सम्राट
- कहानी सम्राट
- कलम का सिपाही
- कलम का मजदूर
प्रसिद्ध जीवनियाँ
- कलम का सिपाही
- अमृत राय (प्रेमचंद के बेटे) द्वारा लिखित।
- कलम का मज़दूर
- मदन गोपाल द्वारा लिखित।
प्रमुख पत्रिकाएँ
- माधुरी
- हंस
- मर्यादा
- जमाना
प्रमुख उपन्यास 11 उपन्यास
- कायाकल्प
- निर्मला
- प्रेमाश्रम
- गोदान
- गबन
- मंगलसूत्र
- प्रतिज्ञा
- सेवा सदन
- अहंकार
- कर्मभूमि
- रंगभूमि
याद करने की ट्रिक
एक दिन प्रेमचंद कायाकल्प उपन्यास पढ़ रहे थे तभी बेटी निर्मला आई और बोली, “पिताजी आपने प्रेमाश्रम से जो गोदान में दिया था वह ससुराल वालों ने गबन कर लिया। अब सिर्फ मंगलसूत्र बचा है। मैंने प्रतिज्ञा ली कि उस सदन (सेवा सदन) में नहीं जाऊंगी।” तब प्रेमचंद बोले — “बेटी यह अहंकार ठीक नहीं, ससुराल तेरी कर्मभूमि है और यह तेरी रंगभूमि।”
प्रमुख कहानियाँ 16 कहानियाँ
- पूस की रात
- पंच परमेश्वर
- दो बैलों की कथा
- बड़े भाई साहब
- गिल्ली डंडा
- नमक का दरोगा
- बड़े घर की बेटी
- बूढ़ी काकी
- दूध का दाम
- सौत
- शराब की दुकान
- ईदगाह
- बैंक का दिवाला
- सूरदास की झोपड़ी
- कफन
- गुप्त धन
याद करने की ट्रिक
प्रेमचंद पूस की रात में पंच परमेश्वर को दो बैलों की कथा सुना रहे थे। बड़े भाई साहब आए — जिनके साथ बचपन में गिल्ली डंडा खेलते थे, अब वे नमक का दरोगा बने और बड़े घर की बेटी से शादी हुई। भाई बोले — “बूढ़ी काकी का दूध का दाम चुकाने का वक्त है, उनकी सौत ने शराब की दुकान के सामने छोड़ दिया।” दोनों काकी को घर लाए। अगले दिन ईदगाह पर बैंक का दिवाला लेकर सूरदास की झोपड़ी गिफ्ट की। काकी बोलीं — “मरूं तो कफन भी तू लाना।” फिर गुप्त धन के बारे में बताया।
परीक्षा में याद रखने योग्य विशेष तथ्य
- हिंदी की पहली कहानी
- सौत — प्रेमचंद।
- प्रेमचंद की अंतिम कहानी
- कफन।
- मंगलसूत्र
- अधूरा उपन्यास; बेटे अमृत राय ने पूरा किया।
- मानसरोवर
- प्रेमचंद की कहानियों का संकलन; कुल 8 भागों में प्रकाशित।