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यूरोपियों का भारत आगमन · अंग्रेज़ भाग

अंग्रेज़: भारत में व्यापारिक साम्राज्य की नींव

1583 से 1717 तक — अकबर के दरबार में पहले अन्वेषकों के आगमन से लेकर फर्रुखसियर के 'मैग्ना कार्टा' फरमान तक, ईस्ट इंडिया कंपनी के क्रमिक विस्तार की पूरी कहानी, परीक्षा-दृष्टि से।

1600
कंपनी स्थापना
1613
सूरत स्थायी फैक्ट्री
1690
कलकत्ता की नींव
1717
मैग्ना कार्टा फरमान
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प्रारंभिक यात्री व कंपनी की स्थापना

अकबर के काल के प्रारंभिक ब्रिटिश आगंतुक

  • रॉल्फ फिच (Ralph Fitch) 1583-91 में अकबर के दरबार में (गुजरात अधिकार के दौरान) भारत आया था।
  • फादर स्टीफंस (Father Stephens) 1589 में भारत आने वाला प्रथम ब्रिटिश पादरी था।
  • जॉन मिल्डेनहॉल (John Mildenhall) 1599 में स्थल मार्ग से भारत आने वाला प्रथम ब्रिटिश था।

ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना

  • महारानी एलिज़ाबेथ-I ने 31-12-1600 को 217 लोगों के समूह को 15 वर्षों के लिए पूर्वी एशिया के साथ व्यापार का अधिकार पत्र (चार्टर) प्रदान किया।PYQ
  • कंपनी के संचालन हेतु 26 लोगों का एक पैनल (Board of Directors) बनाया गया।
  • महारानी एलिज़ाबेथ-I की मृत्यु के बाद, सम्राट जेम्स-I ने इस अधिकार पत्र को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया।
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मुग़ल दरबार में प्रारंभिक प्रयास

कैप्टन हॉकिन्स का आगमन (1608)

  • 'हेक्टर' नामक जलपोत से (साथ में विलियम कीलिंग के नेतृत्व वाला 'रेड ड्रैगन' जहाज़ भी था) कैप्टन हॉकिन्स सम्राट जेम्स-I का पत्र लेकर जहाँगीर के दरबार में पहुँचा।
  • हॉकिन्स तुर्की और फारसी भाषा का विशेषज्ञ था; जहाँगीर ने उसे 'इंग्लिश खान' की उपाधि और 400 का मनसब प्रदान किया।
  • पुर्तगालियों के विरोध के कारण हॉकिन्स व्यापारिक फरमान लेने में असफल रहा और 1611 में वापस लौट गया।

स्वाली का युद्ध व सूरत फैक्ट्री

  • कैप्टन हिप्पोन (Captain Hippon) 1611 में 'ग्लोब' जहाज़ से भारत आया और मसूलीपट्नम में अंग्रेजों की पहली अस्थायी फैक्ट्री स्थापित की।
  • 1612 — स्वाली का युद्ध: अंग्रेज़ अधिकारी थॉमस बेस्ट ने पुर्तगालियों को पराजित किया, जिससे जहाँगीर बहुत प्रभावित हुआ।PYQ
  • 1613: जहाँगीर के फरमान द्वारा सूरत में अंग्रेजों की पहली स्थायी फैक्ट्री स्थापित करने की अनुमति मिली।

सर थॉमस रो (1615-18)

  • सर थॉमस रो सम्राट जेम्स-I के पहले आधिकारिक राजदूत के रूप में जहाँगीर के दरबार में आया।
  • 1616 में वह अजमेर के मैगज़ीन दुर्ग में जहाँगीर से मिला।
  • एडवर्ड टेरी (Edward Terry), जो थॉमस रो का पादरी था, ने "पूर्वी द्वीपों की यात्रा" नामक पुस्तक लिखी।
  • 1619: अंग्रेजों ने आगरा, अहमदाबाद और भड़ौच में भी अपनी फैक्ट्रियां स्थापित कर लीं।
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प्रमुख अंग्रेज़ अधिकारी — एक नज़र में

नामकाल / वर्षप्रमुख कार्य
कैप्टन हॉकिन्स1608-11
  • जहाँगीर के दरबार में सम्राट जेम्स-I का पत्र लेकर पहुँचा
  • 'इंग्लिश खान' की उपाधि व 400 का मनसब पाया
सर थॉमस रो1615-18
  • पहला आधिकारिक ब्रिटिश राजदूत
  • 1616 में अजमेर में जहाँगीर से भेंट
जॉब चार्नॉक1686-1690
  • बंगाल में शाइस्ता खान से टकराव (1686)
  • 1690 में सुतानुती में व्यापारिक केंद्र स्थापित — कलकत्ता की नींव
चार्ल्स आयर1700 से
  • फोर्ट विलियम के प्रथम गवर्नर
  • बंगाल को मद्रास प्रेसीडेंसी से पृथक किया गया
जेराल्ड ऑन्गियर1669-77
  • आधुनिक बंबई का संस्थापक माना जाता है
  • बंदरगाह व टकसाल का निर्माण, बंबई की किलेबंदी
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दक्षिण भारत व बंगाल में विस्तार

गोलकुंडा का सुनहरा फरमान (1632)

गोलकुंडा के सुल्तान अब्दुल्ला कुतुब शाह ने 500 पैगोडा वार्षिक कर के बदले अंग्रेजों को राज्य के सभी बंदरगाहों पर मुक्त व्यापार की अनुमति दी।

मद्रास व फोर्ट सेंट जॉर्ज

  • फ्रांसिस डे ने 1639 में चंद्रगिरी के शासक वेंकट दर्मला से मद्रास को पट्टे पर लिया — इसे आधुनिक मद्रास का संस्थापक माना जाता है।
  • 1641: मद्रास में 'फोर्ट सेंट जॉर्ज' की स्थापना हुई, जो भारत में अंग्रेजों का प्रथम किला था।PYQ

बंगाल में प्रवेश — 'निशान' (1651)

  • अंग्रेज़ डॉक्टर बाउटन द्वारा बंगाल के सूबेदार शाहशुजा के हरम की स्त्री का इलाज किया गया।
  • इसके बदले अंग्रेजों को 3000 रुपये वार्षिक भुगतान पर बंगाल में व्यापारिक छूट मिली, जिसे "निशान" कहा गया।
  • 1651 ई. में कैप्टन ब्रिजमैन (Captain Bridgman) के नेतृत्व में हुगली में अंग्रेजों की पहली कोठी स्थापित हुई।
    • इसके बाद पटना, कासिमबाजार और राजमहल में स्थापना हुई।
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बंबई का दहेज़ व आधुनिक बंबई की नींव

बंबई दहेज़ में मिली (1661)

  • पुर्तगाली राजकुमारी कैथरीन और ब्रिटिश राजकुमार चार्ल्स-II का विवाह हुआ, जिसमें बंबई (Bombay) अंग्रेजों को दहेज में मिला।
  • 1668 में ब्रिटिश क्राउन ने 10 पाउंड वार्षिक किराए पर बंबई कंपनी को हस्तांतरित कर दिया।

जेराल्ड ऑन्गियर — आधुनिक बंबई का संस्थापक

जेराल्ड ऑन्गियर (1669-77) को आधुनिक बंबई का संस्थापक माना जाता है। उसने मुंबई में बंदरगाह व टकसाल का निर्माण करवाया और बंबई की किलेबंदी की।

शिवाजी राज्याभिषेक व मुख्यालय स्थानांतरण

  • 1674: रायगढ़ में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक में हेनरी ऑक्सिडेन ने अंग्रेज़ प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया।
  • 1687: कंपनी ने अपना मुख्यालय सूरत से हटाकर बंबई में स्थापित कर लिया।
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औरंगजेब व आंग्ल-मुगल युद्ध

प्रथम आंग्ल-मुग़ल युद्ध / चाइल्ड्स वॉर (1686-1690)

  • विवाद की जड़ (औरंगजेब का 1680 का फरमान): अंग्रेजों पर कुल 3.5% कर (2% चुंगी + 1.5% जज़िया) लगाया गया।
  • अंग्रेजों की आक्रामक नीति: कंपनी के डायरेक्टर सर "जोशिया चाइल्ड" की फॉरवर्ड पॉलिसी (व्यापार की रक्षा सैन्य बल से करना) के तहत "हुगली की किलेबंदी" और मुग़ल जहाजों की लूट की गई।
  • प्रमुख संघर्ष व हार:
    • बंगाल मोर्चा (1686): जॉब चार्नॉक और निकलसन ने हुगली लूटा। मुग़ल सूबेदार शाइस्ता खान ने पलटवार कर अंग्रेजों को हुगली से खदेड़ दिया, जिसके बाद अंग्रेजों को एक दलदली और ज्वार-ग्रस्त द्वीप (फुलटा) पर शरण लेनी पड़ी।
    • पश्चिमी मोर्चा (1689): जॉन चाइल्ड ने हज यात्रियों के जहाज बंधक बनाए। जवाब में मुग़ल नौसेनापति सीदी याकूत ने बंबई पर कब्ज़ा कर अंग्रेजों को किले में कैद कर दिया।
  • परिणाम और संधि: अंग्रेजों का पूर्ण आत्मसमर्पण हुआ — उन्हें औरंगजेब के दरबार में ज़मीन पर लेटकर माफ़ी मांगनी पड़ी। 1.5 लाख रुपये हर्जाना देने के बाद उन्हें पुनः व्यापारिक अधिकार प्राप्त हुए।PYQ

सुतानुती की स्थापना व राहत

  • 1690: जॉब चार्नॉक ने सुतानुती में एक व्यापारिक केंद्र स्थापित किया, जो कलकत्ता की नींव बना।
  • 1691: औरंगजेब ने (बंगाल के सूबेदार इब्राहिम खां के माध्यम से) 3000 रुपये वार्षिक के बदले अंग्रेजों को सीमा शुल्क से मुक्ति दे दी।
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नई कंपनियों का गठन

प्रतिद्वंद्वी कंपनी का उदय और एकीकरण (1694-1702)

  • एकाधिकार (Monopoly) की समाप्ति:
    • 1600 ई. में महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम के चार्टर से पुरानी ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में व्यापार का एकाधिकार (monopoly) मिला था।
    • 1694 में ब्रिटिश संसद ने प्रस्ताव पास कर यह एकाधिकार समाप्त कर दिया।
    • अब किसी भी ब्रिटिश नागरिक को भारत के साथ व्यापार करने की छूट मिल गई।
  • नई कंपनी का जन्म: इस छूट का फायदा उठाकर ब्रिटेन में एक नई कंपनी बनी — "English Company Trading to the East"
  • एकीकरण (Merger): पुरानी और नई कंपनी के बीच भयंकर प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई, जिससे दोनों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
  • The United Company (1702-1708):
    • 1702 में दोनों कंपनियों ने विलय (merger) का फैसला किया।
    • नई संयुक्त कंपनी अस्तित्व में आई, जिसका नाम था "The United Company of Merchants of England Trading to the East Indies"
  • PYQ फैक्ट: 1833 के चार्टर एक्ट तक कंपनी का यही लंबा आधिकारिक नाम रहा।
  • 1833 में इसे छोटा करके 'ईस्ट इंडिया कंपनी' कर दिया गया।PYQ

ज़मींदारी अधिकार: व्यापारियों से भू-स्वामी बनना (1698)

  • यह घटना बंगाल में अंग्रेजों के लिए टर्निंग पॉइंट थी — अब वे केवल व्यापारी नहीं रहे, बल्कि उनके पास अपनी ज़मीन और राजस्व (Revenue) भी आ गया।
  • पृष्ठभूमि (किलेबंदी का बहाना):
    • 1696 में बर्दवान के ज़मींदार शोभा सिंह ने विद्रोह कर दिया।
    • इस विद्रोह से सुरक्षा का बहाना बनाकर अंग्रेजों ने सुतानुती की अपनी कोठी की किलेबंदी शुरू कर दी।
  • अज़ीम-उश-शान का फरमान: 1698 में बंगाल के सूबेदार अज़ीम-उश-शान (मुग़ल सम्राट औरंगजेब का पोता) ने अंग्रेजों को तीन गाँवों की ज़मींदारी (राजस्व वसूलने का अधिकार) दे दी:
    • सुतानुती
    • कलकत्ता
    • गोविंदपुर
  • ऐतिहासिक परिणाम (कलकत्ता का जन्म): इन्हीं तीन गाँवों को मिलाकर आधुनिक कलकत्ता शहर का निर्माण हुआ।
  • इसी ज़मींदारी वाले क्षेत्र में अंग्रेजों ने अपनी किलेबंद बस्ती बनाई, जिसे 1700 ई. में फोर्ट विलियम नाम दिया गया।
  • प्रथम गवर्नर: फोर्ट विलियम के प्रथम गवर्नर सर चार्ल्स आयर थे।
  • प्रशासनिक परिवर्तन: बंगाल को मद्रास प्रेसीडेंसी से पूर्णतः पृथक कर एक स्वतंत्र प्रेसीडेंसी के रूप में स्थापित किया गया।
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स्वायत्त राज्यों का उदय

स्वायत्त राज्यों का उदय (औरंगजेब की मृत्यु 1707 के बाद)

वर्षशासकराज्य
1717मुर्शिद कुली खानबंगाल का पहला स्वतंत्र शासक
1722सआदत खान (बुरहान उल मुल्क)अवध
1724निज़ाम उल मुल्क (चिन-किलिच खान)हैदराबाद
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1717 का शाही फरमान — मैग्ना कार्टा

जॉन सुरमन मिशन (1715)

जॉन सुरमन (John Surman) के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल फर्रुखसियर के दरबार में पहुँचा, जिसमें हैमिल्टन नामक शल्य चिकित्सक भी शामिल था।

फरमान के प्रावधान

  • 1717: फर्रुखसियर ने अंग्रेजों को एक शाही फरमान जारी किया, जिसे कंपनी का 'मैग्ना कार्टा' कहा जाता है।PYQ
  • कंपनी को 'दस्तक' जारी करने का अधिकार मिला, जिससे चुंगी और सीमा शुल्क की कोई चेकिंग नहीं होती थी।
  • 3000 रुपये वार्षिक के बदले बंगाल में कर-मुक्त व्यापार और कलकत्ता के 38 गाँव किराए पर लेने की अनुमति मिली।
  • 10,000 रुपये वार्षिक के बदले सूरत में भी कर-मुक्त व्यापार की अनुमति मिली।
  • बंबई की टकसाल को मान्यता मिली और वहां के सिक्कों को पूरे मुगल राज्य में चलाने की अनुमति दे दी गई।
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महत्वपूर्ण तथ्य

'जॉन कंपनी'

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को 'जॉन कंपनी' (John Company) भी कहा जाता था।

'इंटरलोपर'

एशिया में मुक्त व्यापार करने वाले अंग्रेज़ व्यापारियों को 'इंटरलोपर' (Interloper) कहा जाता था।

अंतिम मुख्यालय

अंततः ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का मुख्यालय कलकत्ता में स्थापित हुआ।

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सेल्फ-टेस्ट मास्टर टेबल

वर्षघटनामहत्व
1583-91रॉल्फ फिच का आगमनअकबर के दरबार में आया प्रथम ब्रिटिश यात्री
1589फादर स्टीफंस का आगमनभारत आने वाला प्रथम ब्रिटिश पादरी
1599जॉन मिल्डेनहॉल का आगमनस्थल मार्ग से भारत आने वाला प्रथम ब्रिटिश
1600ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापनाएलिज़ाबेथ-I द्वारा 15 वर्षीय व्यापारिक चार्टर (217 लोग)
1608कैप्टन हॉकिन्स का आगमनजहाँगीर के दरबार में; 'इंग्लिश खान' की उपाधि मिली
1611कैप्टन हिप्पोन — मसूलीपट्नम फैक्ट्रीअंग्रेजों की पहली अस्थायी फैक्ट्री
1612स्वाली का युद्धथॉमस बेस्ट ने पुर्तगालियों को हराया (जहाँगीर प्रभावित)
1613सूरत में स्थायी फैक्ट्रीजहाँगीर के फरमान से अनुमति (पहली स्थायी फैक्ट्री)
1615-18सर थॉमस रो का दौराजहाँगीर के दरबार में प्रथम आधिकारिक ब्रिटिश राजदूत
1632गोलकुंडा का सुनहरा फरमान500 पैगोडा वार्षिक कर पर मुक्त व्यापार की अनुमति
1639फ्रांसिस डे — मद्रास पट्टे परआधुनिक मद्रास की नींव (चंद्रगिरी के शासक से)
1641फोर्ट सेंट जॉर्ज की स्थापनाभारत में अंग्रेजों का प्रथम किला (मद्रास में)
1651'निशान' — बंगाल में व्यापारिक छूटडॉ. बाउटन द्वारा शाहशुजा की पत्नी के इलाज का बदला
1661बंबई दहेज़ में प्राप्तकैथरीन (पुर्तगाल) व चार्ल्स-II (ब्रिटेन) का विवाह
1668क्राउन ने बंबई कंपनी को सौंपा10 पाउंड वार्षिक किराए पर कंपनी को हस्तांतरित
1669-77जेराल्ड ऑन्गियर का कार्यकालआधुनिक बंबई का संस्थापक (टकसाल व बंदरगाह निर्माण)
1674शिवाजी राज्याभिषेकहेनरी ऑक्सिडेन अंग्रेज़ प्रतिनिधि के रूप में शामिल
1680औरंगजेब का चुंगी व जज़िया कर आदेशअंग्रेजों पर 2% चुंगी + 1.5% जज़िया (कुल 3.5%) लगाया
1686-90प्रथम आंग्ल-मुगल युद्ध (चाइल्ड्स वॉर)अंग्रेजों की हार, सीदी याकूत ने बंबई पर कब्ज़ा, 1.5 लाख हर्जाना
1687मुख्यालय सूरत से बंबई स्थानांतरितकंपनी की रणनीतिक पुनर्गठन
1690जॉब चार्नॉक — सुतानुती में केंद्रकलकत्ता की नींव (औरंगजेब से संधि के बाद)
1691सीमा शुल्क से मुक्तिइब्राहिम खां के माध्यम से 3000 रुपये वार्षिक पर
1694ईस्ट इंडिया कंपनी के एकाधिकार का अंतब्रिटिश संसद द्वारा पारित प्रस्ताव, सभी ब्रिटिश नागरिकों को व्यापार छूट
1698तीन गाँवों की ज़मींदारी अधिकारअज़ीम-उश-शान द्वारा: सुतानुती, कलकत्ता, गोविंदपुर (कलकत्ता निर्माण)
1700फोर्ट विलियम की स्थापनाबंगाल को स्वतंत्र प्रेसीडेंसी घोषित; चार्ल्स आयर प्रथम गवर्नर
1702दोनों कंपनियों का विलय निर्णयपुरानी व नई कंपनी का विलय (The United Company का जन्म)
1708औपचारिक रूप से 'यूनाइटेड कंपनी' गठितआधिकारिक नाम: "United Company of Merchants of England Trading to the East Indies"
1715जॉन सुरमन मिशनफर्रुखसियर के दरबार में शिष्टमंडल (हैमिल्टन - शल्य चिकित्सक)
1717शाही फरमान (मैग्ना कार्टा)दस्तक अधिकार, कर-मुक्त व्यापार, 38 गाँव किराये पर, बंबई टकसाल मान्यता
1722सआदत खान — अवधबुरहान उल मुल्क के नाम से जाना गया (स्वायत्त राज्य)
1724निज़ाम उल मुल्क — हैदराबादचिन-किलिच खान के नाम से जाना गया (स्वायत्त राज्य)
UttarPath Study Notes · अंग्रेज़ी भारत में · East India Company