European Powers · 02

भारत में डच

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पृष्ठभूमि व प्रथम आगमन

डच कौन थे?

  • डच = हॉलैंड / नीदरलैंड के निवासी।
  • पुर्तगालियों के बाद भारत पहुँचने वाली दूसरी यूरोपीय शक्ति
  • मुख्य उद्देश्य — मसालों और सूती वस्त्रों का व्यापार।

प्रथम डच नागरिक — कार्नीएलिस डी हाउटमैन

  • पूर्व की यात्रा करने वाला पहला डच नागरिक
  • 1596 ई. में सुमात्रा और बैंटम (इंडोनेशिया) पहुँचा।
  • यह घटना मुग़ल सम्राट अकबर के शासनकाल (1556–1605) में हुई।
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VOC — कंपनी की स्थापना

यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC)

  • स्थापना वर्ष — 1602 ई.
  • पूरा नाम — Vereenigde Oost-Indische Compagnie (VOC)
  • विभिन्न डच व्यापारिक कंपनियों को मिलाकर एक बनाई गई।

कंपनी को मिले अधिकार (चार्टर)

  • 21 वर्ष के लिए व्यापारिक एकाधिकार।
  • युद्ध करने, संधि करने और किले बनाने का परमिट।
  • अधिकार देने वाली — हॉलैंड की सरकार
🗓 स्थापना: 1602
📜 चार्टर: 21 वर्ष
⚔️ युद्ध + किला बनाने का अधिकार
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भारत में प्रारंभिक फैक्ट्रियां

📌 फैक्ट्री = व्यापारिक गोदाम / माल इकट्ठा करने का केंद्र

क्रमस्थानवर्षविशेषता
प्रथम मसूलीपट्नम 1605 ई.
  • आंध्र प्रदेश में — भारत की पहली डच फैक्ट्री
  • अनुमति — गोलकुंडा के सुल्तान मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने दी।
  • मुख्य व्यापार — नील।
द्वितीय पेटापुली 1606 ई.
  • आंध्र प्रदेश — जिसे निज़ामपट्टनम भी कहते हैं।
  • मसूलीपट्नम के तुरंत बाद स्थापित।
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पुलीकट — डच मुख्यालय

पुलीकट सेटलमेंट (1610 ई.)

  • स्थापना — 1610 ई. में।
  • संधि — चंद्रगिरी के राजा वेंकटपति राय द्वितीय के साथ।
  • यह केवल फैक्ट्री नहीं — भारत में डचों का मुख्य प्रशासनिक केंद्र बना।

टकसाल

  • पुलीकट में डचों ने अपनी टकसाल स्थापित की।
  • यहाँ प्रसिद्ध स्वर्ण सिक्के ढाले जाते थे।
  • इन सिक्कों को 'पैगोडा' कहा जाता है।

सेटलमेंट बनाम फैक्ट्री

  • फैक्ट्री — केवल माल का गोदाम।
  • सेटलमेंट — अधिकारी निवास + किलेबंदी + प्रशासन।
  • पुलीकट = डचों का सबसे महत्वपूर्ण सेटलमेंट
📍 पुलीकट — 1610
🪙 पैगोडा सिक्के यहीं ढाले
🤝 वेंकटपति राय द्वितीय से संधि
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व्यापारिक विस्तार (1605–1663)

दक्षिण-पूर्व एशिया

  • 1605 — पुर्तगालियों को हराकर अंबियाना (इंडोनेशिया) पर कब्ज़ा।
  • लौंग-जायफल के मसाला द्वीपों पर नियंत्रण।
  • 1658 — श्रीलंका (सीलोन) पर पूर्ण अधिकार।

भारत में नई कोठियां

  • 1616 — सूरत (गुजरात) में व्यापारिक कोठी।
  • 1627 — पीपली (बंगाल) में पहली बंगाल कोठी।
  • 1663 — कोचीन (केरल) पर अधिकार — पुर्तगालियों को बड़ा झटका।

चिंसुरा — बंगाल का गढ़ (1653)

  • बंगाल में चिंसुरा को मुख्य बस्ती बनाया।
  • यहाँ 'फोर्ट गुस्तावस' नामक किला बनाया।
  • बंगाल में डच गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया।
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व्यापार व प्रमुख योगदान

मुख्य निर्यात वस्तुएं

  • नील — मसूलीपट्नम से।
  • सूती वस्त्र — सबसे प्राथमिक व्यापार।
  • मसाले — लौंग, जायफल, काली मिर्च।
  • रेशम — बंगाल और चिंसुरा से।

डचों की सबसे बड़ी देन

  • भारत को वस्त्र निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने का श्रेय।
  • मसालों की जगह भारतीय सूती वस्त्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
  • व्यापक समुद्री नेटवर्क — एशिया से यूरोप तक।
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डचों के पतन के कारण

1. बेदरा का युद्ध (1759) — निर्णायक पराजय

  • स्थान — बेदरा / बिदेरा, बंगाल।
  • विरोधी — रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में अंग्रेज़ी सेना।
  • परिणाम — डच बुरी तरह पराजित; भारत में सैन्य शक्ति हमेशा के लिए समाप्त।

2. अंग्रेज़ों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा

  • अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में तेज़ी से पैर जमाए
  • अंग्रेज़ों ने व्यापार के साथ राजनीतिक शक्ति भी बढ़ाई।
  • डच केवल व्यापार तक सीमित रहे — राजनीतिक नियंत्रण में पिछड़े।

3. इंडोनेशिया पर केंद्रित रहे

  • डच की मुख्य रुचि भारत से अधिक इंडोनेशिया (मसाला द्वीप) में थी।
  • भारत में पूर्ण ध्यान और संसाधन नहीं दिए।

4. नेपोलियन युद्धों का प्रभाव

  • यूरोप में नेपोलियन के उदय से नीदरलैंड की शक्ति कमज़ोर हुई।
  • VOC को 1799 ई. में आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया गया।
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डच भारत — समय-रेखा

1596
कार्नीएलिस डी हाउटमैन — पूर्व की ओर

पहला डच नागरिक; सुमात्रा और बैंटम (इंडोनेशिया) पहुँचा। अकबर का शासनकाल।

1602
VOC की स्थापना

हॉलैंड सरकार का चार्टर — 21 वर्ष का एकाधिकार; युद्ध + किला + संधि के अधिकार।

1605
मसूलीपट्नम — पहली भारतीय फैक्ट्री

गोलकुंडा सुल्तान से अनुमति; नील व्यापार का केंद्र। इसी साल इंडोनेशिया में पुर्तगालियों को हराया।

1606
पेटापुली (निज़ामपट्टनम) — दूसरी फैक्ट्री

आंध्र प्रदेश में डचों की दूसरी व्यापारिक कोठी।

1610
पुलीकट — भारत में डच मुख्यालय

वेंकटपति राय द्वितीय से संधि। पैगोडा स्वर्ण सिक्के यहीं ढाले गए।

1616
सूरत में कोठी

गुजरात के सूरत में महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र स्थापित।

1627
बंगाल में प्रवेश — पीपली

बंगाल की पहली डच कोठी पीपली में।

1653
चिंसुरा — फोर्ट गुस्तावस

बंगाल में सबसे प्रमुख डच बस्ती; फोर्ट गुस्तावस का निर्माण।

1658
श्रीलंका पर अधिकार

पुर्तगालियों को हराकर सीलोन के व्यापार पर पूर्ण नियंत्रण।

1663
कोचीन पर अधिकार

केरल के कोचीन से पुर्तगालियों को खदेड़ा — मालाबार में वर्चस्व।

1759
बेदरा का युद्ध — डचों का अंत

रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में अंग्रेज़ों ने डचों को करारी हार दी। भारत में डच शक्ति समाप्त।

1799
VOC का औपचारिक विघटन

नेपोलियन युद्धों की पृष्ठभूमि में VOC को आधिकारिक रूप से बंद किया गया।

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सेल्फ-टेस्ट मास्टर टेबल

वर्षघटनामहत्व / स्मरण बिंदु
1596कार्नीएलिस डी हाउटमैनपहला डच; सुमात्रा-बैंटम पहुँचा
1602VOC की स्थापना21 वर्ष एकाधिकार; हॉलैंड सरकार चार्टर
1605मसूलीपट्नम — प्रथम फैक्ट्रीगोलकुंडा सुल्तान की अनुमति; नील व्यापार
1606पेटापुली — द्वितीय फैक्ट्रीआंध्र प्रदेश; निज़ामपट्टनम
1610पुलीकट सेटलमेंटडच HQ; पैगोडा सिक्के; वेंकटपति राय
1616सूरत कोठीगुजरात में व्यापारिक विस्तार
1627पीपली — बंगाल में प्रवेशबंगाल की पहली डच कोठी
1653चिंसुरा + फोर्ट गुस्तावसबंगाल में प्रमुख डच गढ़
1658श्रीलंका पर अधिकारपुर्तगालियों को हराया
1663कोचीन पर अधिकारमालाबार में पुर्तगाली वर्चस्व खत्म
1759बेदरा का युद्धरॉबर्ट क्लाइव; डच शक्ति समाप्त
1799VOC का विघटननेपोलियन युद्धों के बाद औपचारिक अंत
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