आधुनिक भारत · Governor-General Series · 09

लॉर्ड विलियम बेंटिक

सती और ठगी के दमन से चार्टर एक्ट 1833, विधि आयोग, अंग्रेजी शिक्षा, आर्थिक सुधार और कूटनीति तक की पूर्ण अध्ययन सामग्री।

कार्यकाल1828–1835
सती उन्मूलन1829
चार्टर एक्ट1833
शिक्षा निर्णय1835
01

वैचारिक पृष्ठभूमि

बेंटिक को समझने की दो कुंजियाँ
उपयोगितावाद (Utilitarianism)

जेरेमी बेंथम के सिद्धांत "अधिकतम लोगों को अधिकतम सुख" का कट्टर समर्थक। इसीलिए बेंटिक ने युद्ध नहीं, शांति और समाज सुधार को प्राथमिकता दी।

वेल्लोर का दाग (1806)

मद्रास गवर्नर के रूप में 1806 के सिपाही विद्रोह को न रोक पाने के कारण अपमानजनक तरीके से हटाया गया। 1828 में छवि सुधारने के लिए भारत लौटा।

पुनरावर्तन
02

महान सामाजिक सुधार

चरण 1 / 4

सती प्रथा उन्मूलन — सबसे बड़ा सुधार
पृष्ठभूमि
राजा राममोहन राय की भूमिका

राजा राममोहन राय अपने समाचार पत्र 'संवाद कौमुदी' के माध्यम से वर्षों से इस कुप्रथा के खिलाफ लड़ रहे थे। उन्होंने शास्त्रों का हवाला देकर सिद्ध किया कि यह धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि हत्या है।

दिसंबर 1829
रेगुलेशन XVII — ऐतिहासिक कानून
  • सती प्रथा को 'मानव हत्या' (Culpable Homicide) घोषित किया गया।
  • प्रारम्भ में केवल बंगाल प्रेसीडेंसी में लागू।
  • 1830 में मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में भी विस्तारित।
मेमोरी लिंक: बेंटिक ने देरी क्यों की?

1806 के वेल्लोर विद्रोह में सैनिकों के 'धर्म' से छेड़छाड़ का आरोप लग चुका था। इसलिए बेंटिक को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप का डर था। जब तक उसे राजा राममोहन राय का मजबूत भारतीय जन-समर्थन नहीं मिला, उसने हाथ नहीं डाला। यही 'भारतीय ढाल' ने बेंटिक को इतना बड़ा कानून पास करने की हिम्मत दी।

ठगी दमन — 1830

ठग कौन थे? हिंदू और मुस्लिम लुटेरों के संगठित गिरोह जो देवी काली की पूजा करते थे। ये यात्रियों के गले में पीला रूमाल (फंदा) डालकर हत्या करते थे।

कार्रवाई: बेंटिक ने कर्नल विलियम स्लीमैन को नियुक्त किया।

परिणाम: 1830-1837 के बीच लगभग 1500 ठगों को गिरफ्तार कर फाँसी या कालापानी दिया गया।

मेमोरी लिंक: असली कारण क्या था?

अंग्रेज अचानक यात्रियों की जान के लिए चिंतित नहीं हुए। ठगों ने व्यापारिक रास्ते (Commercial Highways) असुरक्षित कर दिए थे। रास्तों की सुरक्षा के बिना टैक्स नहीं बढ़ सकता था'आर्थिक सुरक्षा' ही असली कारण था।

शिशु वध पर रोक

राजपूताना और बनारस के राजपूतों व जाटों में दहेज से बचने के लिए जन्म लेते ही कन्या को अफीम देकर मारने की प्रथा थी। बेंटिक ने 1795 और 1804 के पुराने नियमों को सख्ती से लागू करवाकर इसे 'हत्या' की श्रेणी में डाला।

UPPCS Trap: सती प्रथा कब कहाँ लागू?
  • दिसंबर 1829 → केवल बंगाल प्रेसीडेंसी में
  • 1830 → मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में भी
  • रेगुलेशन नंबर → XVII (17)
पुनरावर्तन
03

प्रशासनिक महा-सुधार

चरण 2 / 4

1833 का चार्टर अधिनियम — Master Topic
सार: पूर्ण केंद्रीयकरण (Absolute Centralization)

ब्रिटिश संसद द्वारा पारित यह अधिनियम भारत में पूर्ण केंद्रीयकरण का सबसे बड़ा कदम था।

प्रावधानविवरण
'भारत का गवर्नर-जनरल' बंगाल के गवर्नर-जनरल का पद बदलकर 'भारत का गवर्नर-जनरल' किया गया। बेंटिक प्रथम बना।
आगरा प्रेसीडेंसी बंगाल को विभाजित कर आगरा प्रेसीडेंसी बनाने का प्रावधान किया गया, लेकिन यह लागू नहीं हुआ; 1834 में क्षेत्र को उत्तर-पश्चिमी प्रांत के रूप में संगठित किया गया।
व्यापारिक एकाधिकार समाप्त चाय और चीन के व्यापार का शेष एकाधिकार भी समाप्त। EIC अब केवल प्रशासनिक संस्था
विधायिका का संकेंद्रण मद्रास और बंबई से कानून बनाने की शक्ति छीनी। पूरे भारत के लिए केवल GG + परिषद ही कानून बनाएगी।
धारा 87 (Section 87) सरकारी नौकरी में धर्म, जन्मस्थान, वंश या रंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं।
दास प्रथा का अंत GG को दास प्रथा समाप्त करने का निर्देश। (कानूनी रूप से 1843 में एलनबरो द्वारा)
मेमोरी लिंक: धारा 87 क्यों?

1833 में जब कंपनी का व्यापार छिन गया और वह केवल प्रशासन चलाने लगी — पूरे भारत का प्रशासन चलाने के लिए सस्ते कर्मचारियों की जरूरत थी। इंग्लैंड से अंग्रेज लाना महंगा था। इसलिए खर्च कम करने के लिए भारतीयों को नौकरी देने का वादा किया गया।

मेमोरी लिंक: विधि आयोग क्यों?

1833 के एक्ट ने एक शासक बनाया → इसलिए एक कानून भी चाहिए था। 'एक देश, एक कानून' की जरूरत ने ही मैकाले के विधि आयोग को जन्म दिया।

प्रथम विधि आयोग — 1834

1833 के एक्ट के तहत भारत के बिखरे कानूनों को संहिताबद्ध (Codify) करने के लिए विधि आयोग बना।

प्रथम अध्यक्ष: लॉर्ड मैकाले

इसी आयोग की मेहनत से बाद में भारतीय दंड संहिता (IPC) का जन्म हुआ।

न्यायिक सुधार
फारसी भाषा समाप्त

मुगलों के समय से चली आ रही फारसी अदालती भाषा हटाई। निचली अदालतों में स्थानीय भाषाएं और सर्वोच्च न्यायालय में अंग्रेजी

सर्किट कोर्ट्स समाप्त

कॉर्नवालिस द्वारा स्थापित भ्रमणशील अदालतें बंद। अधिकार जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टरों को दिए।

भारतीयों को उच्च पद
न्यायपालिका में
'सदर अमीन' का पद
राजस्व में
डिप्टी कलेक्टर
प्रशासन में
डिप्टी मजिस्ट्रेट
पुनरावर्तन
04

शिक्षा नीति एवं आर्थिक सुधार

चरण 3 / 4

आंग्ल-प्राच्य विवाद का अंत
प्राच्यवादी (Orientalists)
  • संस्कृत और अरबी भाषा में शिक्षा
  • पारंपरिक भारतीय ज्ञान का संरक्षण
  • प्रमुख: H.T. Prinsep, H.H. Wilson
आंग्लवादी (Anglicists)
  • अंग्रेजी में पश्चिमी विज्ञान
  • आधुनिक शिक्षा पर जोर
  • प्रमुख: लॉर्ड मैकाले, Elphinstone
2 फरवरी 1835
मैकाले का स्मरण-पत्र (Macaulay's Minute)

मैकाले ने भारतीय साहित्य का घोर अपमान करते हुए लिखा: "यूरोप के एक अच्छे पुस्तकालय की केवल एक अलमारी, भारत और अरब के संपूर्ण साहित्य के बराबर है।"

7 मार्च 1835
बेंटिक का ऐतिहासिक प्रस्ताव
  • अंग्रेजी को उच्च शिक्षा का आधिकारिक माध्यम घोषित।
  • सरकार का सारा फंड अब केवल अंग्रेजी शिक्षा पर।
  • 1835 में कलकत्ता में भारत का प्रथम मेडिकल कॉलेज स्थापित।
अधोमुखी निस्यंदन सिद्धांत (Downward Filtration Theory)

केवल उच्च वर्ग के एक छोटे समूह को अंग्रेजी पढ़ाओ — "खून और रंग से भारतीय, लेकिन पसंद, विचार और बुद्धि से अंग्रेज।" उम्मीद: यह ज्ञान छन-छन कर (Filter होकर) नीचे आम जनता तक पहुँचेगा।

मेमोरी लिंक: आगे क्या हुआ?

फिल्ट्रेशन थ्योरी पूरी तरह फेल हुई — उच्च वर्ग ने ज्ञान नीचे नहीं पहुँचाया। ठीक 19 साल बाद (1854) लॉर्ड डलहौजी के समय 'वुड का डिस्पैच' आया, जिसने मैकाले की थ्योरी को नकार कर आम जनता को मातृभाषा में शिक्षा देने का आदेश दिया।

महालवाड़ी संशोधन — रेगुलेशन IX (1833)

समस्या: 1822 में होल्ट मैकेंजी की महालवाड़ी व्यवस्था में लगान 80% तक लगा दिया गया था — किसान बर्बाद हो रहे थे।

समाधान: बेंटिक ने रॉबर्ट मार्टिन बर्ड को नियुक्त किया।

UPPCS Fact: मार्टिन बर्ड की उपलब्धि
  • पहली बार खेतों के नक्शे और खसरे/खतौनी तैयार करवाए।
  • लगान 80% से घटाकर 66% किया।
  • उपाधि: "उत्तर भारत में भू-राजस्व का जनक"
आर्थिक सुधार
अफीम व्यापार नियमन

मालवा की अफीम का निर्यात केवल बंबई बंदरगाह से ही होगा — भारी ट्रांजिट ड्यूटी लगाई।

भत्तों में कटौती (Half-Bhatta)

सेना और नागरिक अधिकारियों के भत्ते आधे किए। परिणाम: 1 मिलियन £ घाटा → 1.5 मिलियन £ मुनाफा।

मेमोरी लिंक: भत्ते काटने से आर्थिक असंतोष सुलगता रहा — यह 1857 की क्रांति के सैन्य कारणों में से एक बना।

पुनरावर्तन
05

कूटनीति एवं रियासतों का विलय

चरण 4 / 4

रूसी खतरे से निपटने की नीति

1830 के दशक में अंग्रेजों को डर था कि रूस मध्य एशिया से अफगानिस्तान के रास्ते भारत पर हमला कर सकता है।

रोपड़ की संधि (1831)

अक्टूबर 1831 में सतलज नदी के किनारे 'रोपड़' (पंजाब) में महाराजा रणजीत सिंह से मुलाकात। 'शाश्वत मित्रता' की संधि — पंजाब को रूस के खिलाफ 'बफर स्टेट' की तरह इस्तेमाल करना।

सिंध संधि (1832)

कर्नल हेनरी पॉटिंगर को सिंध भेजा। सिंधु नदी को ब्रिटिश नावों और व्यापार के लिए खोला ताकि मध्य एशिया तक माल बेचा जा सके।

मेमोरी लिंक: बेंटिक के बाद क्या हुआ?

बेंटिक ने रूस के डर से शांतिपूर्ण संधियाँ करके काम चला लिया। लेकिन उसके बाद आने वाला 'लॉर्ड ऑकलैंड' इसी रूसी खौफ में अफगानिस्तान पर हमला कर देगा — प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध — जो अंग्रेजों के लिए खूनी तबाही साबित होगा।

कुशासन के नाम पर विलय
रियासतवर्षआधारविशेष तथ्य
मैसूर 1831 राजा कृष्णराज वाडियार III पर कुशासन का आरोप कमिश्नर: मार्क कब्बन। 1881 में लॉर्ड रिपन ने वापस किया।
कछार (Cachar) 1832 राजा गोविंद चंद्र की उत्तराधिकारी के बिना हत्या असम के पास स्थित राज्य।
कुर्ग (Coorg) 1834 राजा वीर राजेंद्र की क्रूरता और कुशासन UPPCS Fact: इसके बाद बड़े पैमाने पर कॉफी बागान विकसित हुए।
जयंतिया (Jaintia) 1835 राजा नरबलि प्रथा रोकने में नाकाम असम क्षेत्र।
मेमोरी लिंक: मैसूर → अवध का रास्ता

बेंटिक ने 1831 में 'कुशासन' के बहाने का आविष्कार किया। ठीक इसी बहाने का उपयोग लॉर्ड डलहौजी करेगा 1856 में — नवाब वाजिद अली शाह से अवध छीनने के लिए — जो 1857 की क्रांति का सबसे बड़ा कारण बनेगा।

मेमोरी लिंक: मैसूर की वापसी

1831 में लिया मैसूर उन दुर्लभ मामलों में से है जो पलट दिया गया। ठीक 50 साल बाद 1881 में सबसे उदार वायसराय लॉर्ड रिपन ने मैसूर वाडियार वंश को वापस लौटाया — Rendition of Mysore

बेंटिक का अंत

मार्च 1835 में खराब स्वास्थ्य के कारण लॉर्ड विलियम बेंटिक ने इस्तीफा दे दिया और इंग्लैंड लौट गया।

पुनरावर्तन
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अंतिम सार-सारणी

परीक्षा-प्राथमिकता — Key Facts
विषयपरीक्षा-योग्य तथ्य
पहचानकार्यकाल 1828–1835; चार्टर एक्ट 1833 के बाद भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल
सती उन्मूलनरेगुलेशन XVII, 1829 — राजा राममोहन राय का प्रमुख समर्थन
ठगी दमनकर्नल विलियम स्लीमैन के नेतृत्व में
चार्टर एक्ट 1833कंपनी का व्यापार समाप्त; विधायी केंद्रीयकरण; आगरा प्रेसीडेंसी का अप्रयुक्त प्रावधान
प्रथम विधि आयोग1834 — अध्यक्ष लॉर्ड मैकाले
अंग्रेजी शिक्षामैकाले मिनट: 2 फरवरी 1835; बेंटिक प्रस्ताव: 7 मार्च 1835
न्यायिक सुधारसर्किट कोर्ट समाप्त; निचली अदालतों में स्थानीय भाषाएँ
महालवाड़ी सुधाररेगुलेशन IX, 1833 — रॉबर्ट मार्टिन बर्ड
पुनरावर्तन