वारेन हेस्टिंग्स
द्वैध शासन के अंत से रेगुलेटिंग एक्ट, न्यायिक प्रयोग, राजस्व सुधार, युद्धों और महाभियोग तक—मूल नोट्स की पूर्ण अध्ययन सामग्री।
प्रशासनिक एवं राजनीतिक सुधार
द्वैध शासन की समाप्ति (1772)
कार्रवाई: कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स के निर्देशानुसार हेस्टिंग्स ने द्वैध शासन को तत्काल समाप्त किया।
प्रभाव: कंपनी ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा के प्रशासन (निजामत) और राजस्व (दीवानी) दोनों का प्रत्यक्ष उत्तरदायित्व ले लिया।
राजधानी और सत्ता का केंद्रीकरण
राजकीय कोषागार (Treasury) को मुर्शिदाबाद से स्थानांतरित कर कलकत्ता लाया गया। कलकत्ता आधिकारिक रूप से ब्रिटिश शक्ति की राजधानी बन गया।
रेगुलेटिंग एक्ट 1773 (The Regulating Act)
- 'गवर्नर ऑफ बंगाल' को अपग्रेड कर 'गवर्नर-जनरल ऑफ बंगाल' किया गया।
- वारेन हेस्टिंग्स इस पद पर आसीन होने वाले प्रथम अधिकारी बने।
- बॉम्बे और मद्रास प्रेसीडेंसी को युद्ध, शांति और विदेशी संधियों में बंगाल के अधीन किया गया।
कार्यकारी परिषद (Executive Council) — 4 सदस्य
| सदस्य | भूमिका |
|---|---|
| फिलिप फ्रांसिस | गवर्नर-जनरल का प्रमुख आलोचक एवं विरोधी |
| जॉन क्लेवरिंग | विरोधी गुट |
| जॉर्ज मॉनसन | विरोधी गुट |
| रिचर्ड बारवेल | परिषद में हेस्टिंग्स का एकमात्र समर्थक |
वीटो बनाम कास्टिंग वोट
हेस्टिंग्स के पास परिषद के निर्णयों को निरस्त करने की वीटो शक्ति नहीं थी। निर्णय बहुमत से होते थे। केवल मतों की बराबरी (Tie) की स्थिति में उसे निर्णायक मत (Casting Vote) का अधिकार था।
आर्थिक एवं भू-राजस्व सुधार
राजस्व बोर्ड की स्थापना (Board of Revenue)
राजस्व मामलों की सर्वोच्च देखरेख के लिए कलकत्ता में 'राजस्व बोर्ड' (Board of Revenue) का गठन किया गया। पूरा राजस्व प्रशासन अब सीधे कंपनी के ब्रिटिश अधिकारियों के नियंत्रण में आ गया।
1772कलेक्टर पद का सृजन
- प्रत्येक जिले में राजस्व संग्रहण हेतु ब्रिटिश अधिकारी नियुक्त — नाम: कलेक्टर।
- शुरुआत में कलेक्टर का एकमात्र काम राजस्व संग्रहण था — कोई न्यायिक शक्ति नहीं।
भू-राजस्व व्यवस्था के तीन प्रयोग
- तरीका: भू-राजस्व वसूलने के लिए नीलामी (Auction) की व्यवस्था। सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को 5 साल के लिए उस क्षेत्र से लगान वसूलने का ठेका (Ijaradari)।
- परिणाम (विफलता): ठेकेदारों ने जमीन के लिए अवास्तविक बोलियां लगाईं, किसानों का भयानक शोषण किया।
- पंचवर्षीय व्यवस्था के फेल होने के बाद बदलाव।
- अब ठेके हर साल नीलाम किए जाने लगे।
- पुराने जमींदारों को बोली लगाने में प्राथमिकता (Preference) दी जाने लगी।
ज़मींदार की स्थिति
हेस्टिंग्स की राजस्व व्यवस्था में जमींदारों को भूमि का 'मालिक' नहीं माना गया था। वे केवल कर वसूलने वाले 'ठेकेदार' (Tax Collectors) थे। यह कॉर्नवालिस ने 1793 में बदला।
अन्य आर्थिक सुधार
दस्तक (Dastak) का अंत
कंपनी के अधिकारियों द्वारा निजी व्यापार के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फ्री पास' (दस्तक) पर पूरी तरह रोक — भ्रष्टाचार कम हुआ।
कस्टम हाउसों का पुनर्गठन
छोटे जमींदारी चुंगी नाकों को बंद कर केवल 5 प्रमुख कस्टम हाउस — कलकत्ता, हुगली, मुर्शिदाबाद, ढाका और पटना। सभी वस्तुओं पर 2.5% एकसमान कर।
न्यायिक सुधार एवं कानूनों का संकलन
1772 का न्यायिक प्लान — जिला स्तरीय अदालतें
| अदालत | अधिकार क्षेत्र | पीठासीन न्यायाधीश | लागू कानून |
|---|---|---|---|
| जिला दीवानी अदालत (Civil Court) | संपत्ति, विवाह, उत्तराधिकार, कर्ज़ | अंग्रेज़ कलेक्टर | हिंदुओं → हिंदू कानून; मुसलमानों → मुस्लिम कानून |
| जिला फौजदारी अदालत (Criminal Court) | हत्या, चोरी, डकैती | भारतीय काज़ी और मुफ्ती (कलेक्टर की निगरानी में) | सभी पर (हिंदू/मुस्लिम) मुस्लिम आपराधिक कानून |
आपराधिक न्याय
हेस्टिंग्स ने फौजदारी मामलों में ब्रिटिश कानून नहीं थोपा। उसने इस्लामिक क्रिमिनल लॉ जारी रखा — जिसे बाद में कॉर्नवालिस ने बदला।
अपीलीय अदालतें — कलकत्ता (Appellate Courts)
सदर दीवानी अदालत
नागरिक मामलों की अपील। प्रमुख: गवर्नर-जनरल और उसकी परिषद।
सदर निजामत अदालत
आपराधिक मामलों की अपील। एक भारतीय अधिकारी 'दरोगा-ए-अदालत' के अधीन, नवाब द्वारा नियुक्त।
सुप्रीम कोर्ट और विवाद
- रेगुलेटिंग एक्ट 1773 के तहत स्थापना।
- प्रथम मुख्य न्यायाधीश: सर एलीजाह इम्पे (Sir Elijah Impey)।
- 3 अन्य जज: चैंबर्स, लेमेस्टर, हाइड।
- नंद कुमार ने हेस्टिंग्स पर रिश्वत का आरोप लगाया था।
- हेस्टिंग्स ने मुख्य न्यायाधीश एलीजाह इम्पे (अपने दोस्त) के साथ मिलकर नंद कुमार पर जालसाजी (Forgery) का झूठा मुकदमा चलवाया और उसे फाँसी दे दी।
- समस्या: GG और सुप्रीम कोर्ट में 'असली बॉस कौन' पर झगड़ा।
- समाधान: संसद ने GG और परिषद को उनके 'आधिकारिक कार्यों' के लिए सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से मुक्त कर दिया।
कानूनों का संकलन (Codification of Laws)
| ग्रंथ | वर्ष | अनुवादक / कार्य |
|---|---|---|
| A Code of Gentoo Laws | 1776 | 11 हिंदू पंडितों के संस्कृत कानूनों का अंग्रेजी अनुवाद — नथानिएल ब्रासी हालहेड (N.B. Halhed) |
| मुस्लिम आपराधिक कानून का आधार | — | औरंगज़ेब के समय का फतवा-ए-आलमगिरी |
सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं बौद्धिक विकास
प्रमुख शैक्षणिक संस्थान
- संस्थापक: वारेन हेस्टिंग्स।
- ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में स्थापित पहला शैक्षणिक संस्थान।
- उद्देश्य: अरबी, फारसी और मुस्लिम कानूनों का अध्ययन ताकि ब्रिटिश फौजदारी अदालतों के लिए योग्य मुफ्ती/काज़ी मिल सकें।
- प्रथम प्रमुख (Head): मुजा-उद-दीन।
- संस्थापक: सर विलियम जोंस (Sir William Jones)।
- हेस्टिंग्स ने पूर्ण संरक्षण दिया किंतु अध्यक्ष पद अस्वीकार कर दिया।
- प्रकाशन: 'एशियाटिक रिसर्चेस' (Asiatic Researches)।
संस्कृत कॉलेज
बनारस संस्कृत कॉलेज (1791) की स्थापना जोनाथन डंकन (Jonathan Duncan) ने की थी। उस समय गवर्नर-जनरल लॉर्ड कॉर्नवालिस था, हेस्टिंग्स नहीं।
भारतीय साहित्य के अनुवाद (Translations)
| ग्रंथ | वर्ष | अनुवादक | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| श्रीमद्भगवद्गीता | 1785 | Charles Wilkins | गीता का प्रथम अंग्रेजी अनुवाद। प्रस्तावना स्वयं हेस्टिंग्स ने लिखी। |
| हितोपदेश | 1787 | Charles Wilkins | — |
| अभिज्ञान शाकुंतलम | 1789 | Sir William Jones | संस्कृत नाटक का यूरोपीय भाषा में पहला अनुवाद |
| मनुस्मृति (A Digest of Hindu Law) | 1794 | Sir William Jones | प्राचीन भारतीय कानूनी प्रणाली का व्यवस्थित संकलन |
| आईन-ए-अकबरी | — | फ्रांसिस ग्लैडविन (Francis Gladwin) | अबुल फज़ल की प्रसिद्ध पुस्तक |
| प्रथम बांग्ला व्याकरण | 1778 | N.B. Halhed | आधुनिक बांग्ला भाषा अध्ययन की नींव |
"भारतीयों की भाषा, धर्म और रीति-रिवाज़ों को जाने बिना उन पर शासन करना असंभव है — यह ज्ञान ही स्थायी प्रभुत्व की कुंजी है।"
भारत का पहला समाचार पत्र
आयरिश नागरिक जेम्स ऑगस्टस हिक्की (James Augustus Hicky) ने कलकत्ता से देश के पहले अखबार की शुरुआत की। हिक्की ने 29 जनवरी 1780 को "हिक्कीज़ बंगाल गज़ेट" प्रकाशित किया — भारत और एशिया का पहला मुद्रित समाचार पत्र।
भौगोलिक सर्वेक्षण
हेस्टिंग्स ने मेजर जेम्स रेनेल (Major James Rennell) को बंगाल का 'सर्वेयर जनरल' नियुक्त किया। रेनेल ने 1782 में "मैप ऑफ हिंदुस्तान" प्रकाशित किया — भारत का पहला प्रामाणिक भौगोलिक नक्शा।
विदेशी नीति, युद्ध और कूटनीति
बनारस की संधि (1773) — पैसों और सुरक्षा का जुगाड़
- रॉबर्ट क्लाइव ने मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय को 'इलाहाबाद' और 'कड़ा' और 26 लाख पेंशन दी थी।
- 1771 में शाह आलम मराठा सरदार महादजी सिंधिया की शरण में चला गया।
- हेस्टिंग्स ने 26 लाख पेंशन रोकी और इलाहाबाद/कड़ा वापस छीने।
- हेस्टिंग्स ने अवध के नवाब शुजा-उद-दौला के साथ बनारस में बैठक की।
- इलाहाबाद और कड़ा नवाब को 50 लाख रुपये में बेचे।
- ब्रिटिश सेना अवध में रखी जाएगी (नवाब की रक्षा के लिए) — पर पूरा खर्च नवाब उठाएगा। → रिंग फेंस नीति की शुरुआत।
रुहेला युद्ध (1774) — भाड़े पर ब्रिटिश सेना
रुहेला सरदार हाफिज रहमत खान ने अवध के नवाब से मदद मांगी और 40 लाख रुपये देने का वादा किया (मराठों के विरुद्ध)। मराठे वापस गए लेकिन हाफिज ने पैसे नहीं दिए।
हेस्टिंग्स का एक्शन: 40 लाख के लालच में कर्नल चैंपियन को ब्रिटिश सेना लेकर रुहेलखंड पर हमला करने भेजा। हाफिज रहमत खान लड़ते हुए मारा गया। रुहेलखंड अवध में मिला दिया गया।
ब्रिटेन में आलोचना
हेस्टिंग्स की ब्रिटेन में आलोचना हुई कि उसने ब्रिटिश सेना को 'भाड़े के गुंडों' की तरह इस्तेमाल किया।
फैज़ाबाद की संधि (1775) — बनारस पर कब्ज़ा
1775 में अवध के नवाब शुजा-उद-दौला की मौत। नए नवाब आसफ-उद-दौला पर दबाव डालकर नई संधि थोपी गई।
प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1775-1782) — 7 साल का फसाद
"SURAT PURE WATER (FOR) SALE"
सूरत (1775) → पुरंदर (1776) → बड़गाँव (1779) → साल्बाई (1782)
- पेशवा नारायणराव की हत्या के बाद गद्दी के लालच में राघोबा (रघुनाथराव) ने बंबई के अंग्रेजों से हाथ मिला लिया।
- शर्तें: अंग्रेजों ने राघोबा को पेशवा बनाने के लिए 2,500 सैनिक दिए। बदले में राघोबा ने सालसेट, बेसिन (वसई) और बंदरगाहों का राजस्व अंग्रेजों को सौंपा।
- बंबई प्रेसीडेंसी ने यह संधि हेस्टिंग्स (कलकत्ता काउंसिल) से बिना पूछे की — हेस्टिंग्स ने इसे अधिकृत नहीं माना। यहीं से युद्ध की नींव पड़ी।
- हेस्टिंग्स ने बंबई के फैसले को असंवैधानिक बताकर सूरत की संधि रद्द कर दी।
- कलकत्ता से कर्नल अप्टन को पुणे दरबार (नाना फड़नवीस) के पास शांति के लिए भेजा।
- शर्तें: राघोबा को पेशवाई नहीं मिलेगी — बल्कि 3 लाख रुपये की वार्षिक पेंशन देकर किनारे कर दिया जाएगा।
- युद्ध दोबारा क्यों? 1777 में नाना फड़नवीस ने फ्रांसीसियों को पश्चिमी तट पर बंदरगाह देने की पेशकश की → भड़के अंग्रेजों ने संधि तोड़ी।
- बंबई प्रेसीडेंसी ने राघोबा के समर्थन में फिर हमला किया — मराठों ने बुरी तरह घेरा।
- रणनीति: महादजी सिंधिया की Scorched-Earth रणनीति — रास्ते के कुएँ में जहर, फसलें जलाईं → अंग्रेजी रसद पूरी तरह कटी।
- शर्तें: कर्नल कारनेक की सेना को आत्मसमर्पण करना पड़ा। 1773 के बाद जीती हुई सारी ज़मीन मराठों को वापस। अंग्रेजी अधिकारी बंधक।
- हेस्टिंग्स ने बड़गाँव की बेइज्जती मानने से साफ इनकार — संधि रद्द, पलटवार।
- कर्नल गोडार्ड — शानदार मार्च करते हुए फरवरी 1780 में अहमदाबाद जीता।
- कैप्टन पोफम — अगस्त 1780 में साहसिक छापामार हमले में अभेद्य ग्वालियर का किला फतह।
- नतीजा: महादजी सिंधिया पर भारी मनोवैज्ञानिक और सैन्य दबाव।
- दोनों पक्ष थके (अंग्रेज अमेरिका में उलझे, मराठे भी थके)।
- मध्यस्थता: महादजी सिंधिया। ब्रिटिश प्रतिनिधि: डेविड एंडरसन।
- शर्तें: शिशु माधवराव II वैध पेशवा। राघोबा हमेशा के लिए पेंशन पर। यथास्थिति — सालसेट अंग्रेजों के पास, बाकी मराठों को वापस।
- दोनों ने एक-दूसरे के दुश्मनों की मदद न करने का वादा किया।
PYQ ट्रैप — बड़गाँव की संधि (1779)
यह इकलौती ऐसी संधि थी जहाँ अंग्रेज पूरी तरह हारकर संधि करने पर मजबूर हुए — ब्रिटिश इतिहास में अपने आप में अनोखा।
रणनीतिक महत्व — साल्बाई की असली कीमत
अंग्रेजों का मास्टरस्ट्रोक: 20 साल के 'टेंशन-फ्री' समय में अंग्रेजों ने पूरा फोकस दक्षिण पर लगाया → 1799 में टीपू सुल्तान खत्म, हैदराबाद निज़ाम सहायक संधि में बंधा।
मराठों की सबसे बड़ी भूल: इस शांति के दौरान मराठे आपस में (सिंधिया, होल्कर, भोंसले) लड़ते रहे। जब अंग्रेज वापस मुड़े (द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध), तब तक मराठे अकेले पड़ चुके थे।
द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1780-1784) — हैदर अली का कहर
- 1771 में जब मराठों ने हैदर पर आक्रमण किया, अंग्रेजों ने पारस्परिक सहायता की शर्त तोड़ते हुए कोई मदद नहीं दी।
- इस धोखे से हैदर ने निश्चय किया कि अंग्रेज कभी विश्वसनीय नहीं हो सकते।
- फ्रांसीसियों ने हैदर की सेना को आधुनिक यूरोपीय युद्धपद्धति में प्रशिक्षित किया और उन्नत हथियार दिए।
- अंग्रेज भारत में फ्रांसीसी-मैसूर अक्ष को खत्म करना चाहते थे।
- मालाबार तट पर माहे — फ्रांसीसी उपनिवेश, हैदर अली के संरक्षण (Protectorate) में।
- मार्च 1779 में अंग्रेजों ने हैदर की अनुमति के बिना माहे पर अधिकार कर लिया।
- यह हैदर की सम्प्रभुता पर प्रत्यक्ष आघात था → युद्ध की घोषणा।
- हैदर ने 80,000 सैनिकों + 100 तोपों के साथ कर्नाटक पर धावा बोला।
- पोलिलूर के युद्ध (सितंबर 1780): अंग्रेज सेनापति कर्नल बेली (Baillie) बुरी तरह पराजित, बंदी बनाया।
- कर्नाटक की राजधानी अर्कॉट (Arcot) पर हैदर का कब्ज़ा। मद्रास में दहशत।
- निज़ाम को तोड़ा: विवादित क्षेत्र गुंटूर (Guntur) वापस देकर निज़ाम को गठबंधन से अलग किया।
- मराठों को तोड़ा: महादजी सिंधिया की मध्यस्थता से साल्बाई संधि (1782) → मराठे युद्ध से बाहर।
- परिणाम: हैदर अली कूटनीतिक रूप से पूर्णतः एकाकी — फिर भी उसने हार नहीं मानी।
- हेस्टिंग्स ने सर्वाधिक अनुभवी सेनापति सर आयर कूट (Sir Eyre Coote) को मद्रास भेजा।
- पोर्टो नोवो में हैदर को निर्णायक पराजय। इसके बाद अर्नी और शोलिंगुर (नवंबर 1781) में भी हार।
- टीपू सुल्तान ने कुम्बकोणम में अंग्रेज सेनापति कर्नल ब्रेथवेट (Braithwaite) को पराजित कर बंदी बनाया।
- Mysorean Rockets का पुनः प्रभावी प्रयोग।
- युद्ध के बीच ही हैदर अली की कैंसर से मृत्यु।
- पुत्र टीपू सुल्तान ने नेतृत्व ग्रहण किया — अगले 2 वर्ष युद्ध जारी।
- 1783 में टीपू ने अंग्रेज ब्रिगेडियर मैथ्यूज (Matthews) को भी बंदी बनाया।
- हस्ताक्षरकर्ता: टीपू सुल्तान और मद्रास के गवर्नर लॉर्ड मैकार्टनी।
- शर्तें: दोनों पक्षों ने अधिकृत प्रदेश और युद्धबंदी वापस किए। Status Quo (यथापूर्व) बहाल।
- किसी भारतीय शासक के साथ अंग्रेजों की अंतिम समकक्ष संधि — अंग्रेज न हारे, न जीते।
दो PYQ ट्रैप — ध्यान से!
ट्रैप 1: पोर्टो नोवो में हैदर को हराने वाला सर आयर कूट था — वारेन हेस्टिंग्स नहीं! हेस्टिंग्स कलकत्ता में कूटनीति संचालित कर रहा था।
ट्रैप 2: मंगलौर संधि पर हस्ताक्षर किए लॉर्ड मैकार्टनी ने — हेस्टिंग्स ने नहीं। हेस्टिंग्स इस संधि के घोर विरोधी थे: "यह शान्ति नहीं, अपितु एक अपमानजनक युद्धविराम है!"
हेस्टिंग्स का महाभियोग (Impeachment)
1785 में भारत से वापस लौटने के बाद हेस्टिंग्स पर ब्रिटिश संसद में महाभियोग चलाया गया। मुख्य आरोप थे — नंद कुमार की न्यायिक हत्या, रुहेला युद्ध, और राजा चेत सिंह से जबरदस्ती।
अंतिम सार-सारणी
| वर्ष | नाम / घटना | कार्य / विवरण |
|---|---|---|
| प्रशासनिक एवं राजनीतिक सुधार | ||
| 1772 | वारेन हेस्टिंग्स | बंगाल का गवर्नर नियुक्त; द्वैध शासन (Dual Government) समाप्त किया |
| 1773 | रेगुलेटिंग एक्ट | पद उन्नत — 'गवर्नर' से 'गवर्नर-जनरल'; हेस्टिंग्स प्रथम गवर्नर-जनरल बने |
| आर्थिक एवं भू-राजस्व सुधार | ||
| 1772 | कलेक्टर पद | प्रत्येक जिले में राजस्व संग्रहण हेतु सृजित (शुरुआत में कोई न्यायिक शक्ति नहीं) |
| 1772 | इजारेदारी प्रथा | पंचवर्षीय बंदोबस्त — नीलामी द्वारा राजस्व ठेका (विफल रहा) |
| 1777 | एकवर्षीय बंदोबस्त | वार्षिक नीलामी लागू; पुराने जमींदारों को बोली में प्राथमिकता |
| न्यायिक सुधार एवं कानूनों का संकलन | ||
| 1774 | कलकत्ता सुप्रीम कोर्ट | स्थापना; प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलीजाह इम्पे |
| 1775 | नंद कुमार की फाँसी | 'प्रथम न्यायिक हत्या' — जालसाजी के झूठे मुकदमे में फाँसी |
| 1776 | A Code of Gentoo Laws | N.B. हालहेड द्वारा हिंदू कानूनों का अंग्रेजी अनुवाद |
| 1781 | Act of Settlement | GG व परिषद को आधिकारिक कार्यों में सुप्रीम कोर्ट के अधिकार-क्षेत्र से मुक्ति |
| सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं बौद्धिक विकास | ||
| 1778 | प्रथम बांग्ला व्याकरण | N.B. हालहेड द्वारा रचित |
| 1780 | हिक्कीज़ बंगाल गज़ेट | जेम्स ऑगस्टस हिक्की द्वारा शुरू; भारत-एशिया का पहला मुद्रित समाचार पत्र (29 जनवरी) |
| 1781 | कलकत्ता मदरसा | हेस्टिंग्स द्वारा स्थापित — ब्रिटिश भारत का पहला शैक्षणिक संस्थान |
| 1782 | मैप ऑफ हिंदुस्तान | मेजर जेम्स रेनेल द्वारा प्रकाशित — भारत का पहला प्रामाणिक नक्शा |
| 1784 | एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल | सर विलियम जोंस द्वारा स्थापित (15 जनवरी); हेस्टिंग्स ने अध्यक्ष पद ठुकराया |
| 1785 | गीता का अंग्रेजी अनुवाद | चार्ल्स विल्किंस द्वारा; भूमिका स्वयं हेस्टिंग्स ने लिखी |
| 1787 | हितोपदेश का अनुवाद | चार्ल्स विल्किंस द्वारा |
| 1789 | अभिज्ञान शाकुंतलम | सर विलियम जोंस — संस्कृत नाटक का यूरोपीय भाषा में पहला अनुवाद |
| 1794 | मनुस्मृति (A Digest of Hindu Law) | सर विलियम जोंस द्वारा संकलित |
| विदेश नीति, युद्ध एवं कूटनीति | ||
| 1773 | बनारस की संधि | अवध नवाब शुजा-उद-दौला के साथ; 'रिंग फेंस नीति' की शुरुआत |
| 1774 | रुहेला युद्ध | कर्नल चैंपियन का आक्रमण; हाफिज रहमत खान युद्ध में मारा गया |
| 1775 | फैज़ाबाद की संधि | बनारस की ज़मींदारी नवाब से छीन कंपनी को सौंपी गई |
| 1775 | सूरत की संधि | राघोबा-बंबई गठबंधन; प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध की शुरुआत |
| 1776 | पुरंदर की संधि | हेस्टिंग्स ने सूरत संधि रद्द की; राघोबा को पेंशन पर किनारे किया |
| 1779 | बड़गाँव की संधि | अंग्रेजों की सबसे अपमानजनक हार; महादजी सिंधिया की Scorched-Earth रणनीति |
| 1779 | माहे पर ब्रिटिश अधिकार | द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध का तात्कालिक कारण |
| 1780 | पोलिलूर का युद्ध | हैदर अली ने कर्नल बेली को हराया; Mysorean Rockets का प्रथम बड़ा प्रयोग |
| 1780 | गोडार्ड व पोफम का मार्च | अहमदाबाद (गोडार्ड) व ग्वालियर किले (पोफम) की जीत |
| 1781 | त्रिगुट विभाजन कूटनीति | गुंटूर लौटाकर निज़ाम को महागठबंधन (Triple Alliance) से तोड़ा |
| 1781 | पोर्टो नोवो का युद्ध | सर आयर कूट द्वारा हैदर अली की निर्णायक पराजय |
| 1782 | साल्बाई की संधि | मराठों से 20 साल की शांति; मध्यस्थ महादजी सिंधिया |
| 1782 | कुम्बकोणम | टीपू सुल्तान द्वारा कर्नल ब्रेथवेट की पराजय |
| 1782 | हैदर अली की मृत्यु | 7 दिसंबर — कैंसर से मृत्यु; पुत्र टीपू सुल्तान ने नेतृत्व संभाला |
| 1784 | मंगलौर की संधि | टीपू सुल्तान व लॉर्ड मैकार्टनी के मध्य; द्वितीय मैसूर युद्ध समाप्त |
| 1785 | हेस्टिंग्स का प्रत्यागमन | भारत से लंदन वापसी; संसद में महाभियोग की शुरुआत |
| 1795 | महाभियोग में बरी (Acquitted) | एडमंड बर्क द्वारा चलाए 7 वर्षीय मुकदमे का अंत |