फ्रांसीसी क्रांति और नेपोलियन
मुख्य विषय: क्रांति के कारण, 1789 की प्रमुख घटनाएँ, चार राजनीतिक चरण, दास प्रथा, नेपोलियन का साम्राज्य और क्रांति की वैश्विक विरासत।
01 क्रांति के प्रमुख कारण
फ्रांसीसी क्रांति राजा लुई XVI के शासनकाल में हुई। उस समय पुरातन व्यवस्था के अंतर्गत सामंती विशेषाधिकार, असमान कर-प्रणाली और निरंकुश राजतंत्र प्रभावी थे।
सामाजिक असमानता: तीन एस्टेट
| एस्टेट | वर्ग | सामाजिक स्थिति और कर |
|---|---|---|
| प्रथम एस्टेट | पादरी वर्ग | विशेषाधिकार प्राप्त था। चर्च राज्य के सामान्य प्रत्यक्ष करों से काफी हद तक मुक्त था और राजा को स्वैच्छिक अनुदान देता था। |
| द्वितीय एस्टेट | कुलीन वर्ग | उच्च पद और सामंती अधिकार प्राप्त थे। अनेक प्रमुख करों, विशेषकर टैले, से छूट थी; सभी करों से पूर्ण मुक्ति नहीं थी। |
| तृतीय एस्टेट | बुर्जुआ, किसान, कारीगर, मजदूर और पेशेवर | विशेषाधिकार विहीन विशाल बहुमत था। राज्य और सामंती देयों का मुख्य भार इसी वर्ग पर पड़ता था। |
- टैले: यह मुख्यतः भूमि और आय से जुड़ा प्रत्यक्ष राजकीय कर था, जिसका भार सामान्य जनता पर पड़ता था।
- मतदान की समस्या: प्रत्येक एस्टेट को एक मत मिलने से प्रथम और द्वितीय एस्टेट मिलकर तृतीय एस्टेट को पराजित कर सकते थे।
आर्थिक दुर्दशा
- प्रारंभिक वृद्धि: 18वीं सदी के मध्य में कृषि, व्यापार और उद्योग का विस्तार हुआ, पर लाभ समान रूप से वितरित नहीं हुआ।
- युद्धों का भार: सप्तवर्षीय युद्ध और अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी से राजकोषीय ऋण बहुत बढ़ गया।
- 1770 के बाद: ऋण, खराब फसल, महँगी रोटी और बेरोजगारी ने संकट को तीव्र किया।
- लिव्रे: यह पुरातन फ्रांस की मुद्रा और लेखा-इकाई थी। इसे 1795 में दशमलव आधारित फ्रांक ने प्रतिस्थापित किया, 1794 में नहीं।
राजनीतिक निरंकुशता
- बूर्बों शासक: लुई XIV, लुई XV और लुई XVI के काल में राजसत्ता अत्यधिक केंद्रीकृत रही।
- लुई XIV: उसने वर्साय को राजदरबार और शासन का केंद्र बनाया, महल का व्यापक विस्तार कराया और प्रसिद्ध शीशमहल बनवाया। “मैं ही राज्य हूँ” कथन उससे जोड़ा जाता है, किंतु इसका शब्दशः प्रमाण विवादित है।
- लुई XVI: वह 1774 में सिंहासन पर बैठा। उसकी पत्नी मैरी एंटोनेट ऑस्ट्रियाई राजकुमारी थी।
- लोकप्रिय किंतु अप्रमाणित कथन: “रोटी नहीं है तो केक खाएँ” प्रायः मैरी एंटोनेट से जोड़ा जाता है, पर इसके विश्वसनीय ऐतिहासिक प्रमाण नहीं हैं।
- वर्साय दरबार: अत्यधिक खर्च और अभिजात जीवन-शैली ने राजतंत्र के प्रति असंतोष बढ़ाया।
दार्शनिकों का योगदान
| विचारक | प्रमुख रचना | मुख्य विचार |
|---|---|---|
| रूसो | द सोशल कॉन्ट्रैक्ट | जन-संप्रभुता और सामान्य इच्छा। प्रसिद्ध पंक्ति: मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ है, पर सर्वत्र जंजीरों में जकड़ा है। |
| मॉन्टेस्क्यू | द स्पिरिट ऑफ द लॉज़ | तानाशाही रोकने के लिए शक्ति-पृथक्करण का सिद्धांत। |
| वॉल्टेयर | लेटर्स ऑन द इंग्लिश | चर्च के भ्रष्टाचार, धार्मिक असहिष्णुता और निरंकुशता की आलोचना। उससे “सौ चूहों की अपेक्षा एक सिंह का शासन उत्तम है” कथन भी जोड़ा जाता है। |
| दिदरो | विश्वकोश | ज्ञान, विज्ञान और तर्कशीलता का प्रसार। |
02 तत्कालीन कारण और क्रांति का आरंभ
- 5 मई 1789: नए करों और वित्तीय संकट पर विचार के लिए वर्साय में एस्टेट्स-जनरल की बैठक आरंभ हुई।
- चैम्बर के आधार पर मतदान: पादरी और कुलीन वर्ग प्रत्येक एस्टेट को एक मत देना चाहते थे।
- सदस्य के आधार पर मतदान: तृतीय एस्टेट प्रत्येक प्रतिनिधि को एक मत देने की माँग कर रहा था।
- जून 1789: माँग अस्वीकार होने पर तृतीय एस्टेट ने स्वयं को राष्ट्रीय सभा घोषित किया।
- टेनिस कोर्ट शपथ: प्रतिनिधियों ने संविधान बनने तक अलग न होने का संकल्प लिया।
क्रम याद रखें: एस्टेट्स-जनरल → राष्ट्रीय सभा → टेनिस कोर्ट शपथ → बास्तील का पतन।
03 क्रांति के चार प्रमुख चरण
चरण 1: संवैधानिक राजतंत्र (1789–1792)
- नेतृत्व: मध्यम वर्ग के नेतृत्व और किसानों तथा शहरी निम्न वर्ग के दबाव में परिवर्तन आगे बढ़ा।
- 14 जुलाई 1789: निरंकुशता के प्रतीक बास्तील दुर्ग-जेल का पतन हुआ। फ्रांस इस दिन राष्ट्रीय दिवस मनाता है।
- 4 अगस्त 1789: सामंती विशेषाधिकार समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
- 26 अगस्त 1789: मानव और नागरिक अधिकारों की घोषणा स्वीकार हुई। इसमें स्वतंत्रता, समानता और जन-संप्रभुता को आधार बनाया गया।
- 1791: प्रथम लिखित संविधान ने संवैधानिक राजतंत्र स्थापित किया, पर मताधिकार संपत्ति और कर-योग्यता से जुड़ा रहा।
चरण 2: उग्र गणतंत्रवाद और आतंक (1792–1794)
- 21 सितंबर 1792: एक-सदनीय राष्ट्रीय कन्वेंशन ने राजतंत्र समाप्त किया। अगले दिन से गणतंत्र का वर्ष प्रथम माना गया।
- जिरोंदिन: अपेक्षाकृत उदार और मध्यमपंथी गणतांत्रिक समूह।
- जैकोबिन: उग्र गणतांत्रिक समूह, जिसे पेरिस के साँ-क्यूलोत और जनसमूहों का समर्थन मिला।
- लुई XVI: देशद्रोह का दोषी ठहराकर 1793 में मृत्युदंड दिया गया।
- आतंक का शासन: रोबेस्पिएर और सार्वजनिक सुरक्षा समिति के अधीन केंद्रीकृत आपात शासन चला। इसे आधुनिक तानाशाही का “पहला उदाहरण” कहना अतिरंजित होगा।
- सामाजिक कार्यक्रम: मूल्य नियंत्रण और 1793 के संविधान में सार्वभौमिक पुरुष मताधिकार, शिक्षा तथा सहायता के अधिकारों की कल्पना की गई; युद्धकाल में संविधान लागू नहीं हुआ।
- दास प्रथा: राष्ट्रीय कन्वेंशन ने फ्रांसीसी उपनिवेशों में 1794 में दास प्रथा समाप्त की।
चरण 3: डायरेक्टरी (1795–1799)
- थर्मिडोरियन प्रतिक्रिया: 1794 में रोबेस्पिएर का पतन और मृत्युदंड हुआ।
- नई व्यवस्था: सत्ता मध्यम वर्ग के हाथों में लौटी; सीमित मताधिकार और दो-सदनीय विधानमंडल स्थापित हुआ।
- कार्यपालिका: पाँच निदेशकों की डायरेक्टरी बनाई गई। भ्रष्टाचार, आर्थिक संकट और सेना पर निर्भरता से यह कमजोर रही।
चरण 4: प्रजातंत्र की आड़ में तानाशाही (1799–1814)
- 1799: 18 ब्रूमेयर के तख्तापलट से डायरेक्टरी समाप्त हुई और नेपोलियन प्रथम कॉन्सुल बना।
- एडमंड बर्क: उसने आशंका व्यक्त की थी कि क्रांतिकारी अस्थिरता अंततः किसी लोकप्रिय सैन्य नेता को सत्ता दे सकती है।
04 नेपोलियन: जीवन और साम्राज्य
प्रारंभिक जीवन और सत्ता में उदय
- जन्म: 15 अगस्त 1769 को कोर्सिका के अजासियो में हुआ। पिता का नाम कार्लो बोनापार्ट था।
- सैन्य शिक्षा: उसने फ्रांस के ब्रिएन सैनिक विद्यालय और बाद में पेरिस के सैनिक विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की; ब्रिटेन में नहीं।
- इटली अभियान: 1796 से उसके सफल अभियानों ने उत्तरी इटली में ऑस्ट्रियाई प्रभाव को गंभीर रूप से कमजोर किया।
- सत्ता क्रम: 1799 में प्रथम कॉन्सुल, 1802 में आजीवन कॉन्सुल और 1804 में फ्रांसीसियों का सम्राट बना।
- उपनाम: उसे “लिटल कॉरपोरल” कहा गया और उसके प्रशासनिक सुधारों के कारण “आधुनिक फ्रांस का निर्माता” भी कहा जाता है।
- विवाह: जोजेफीन से विवाह-विच्छेद के बाद उसने ऑस्ट्रिया की आर्चडचेस मैरी लुईज से विवाह किया।
साम्राज्य विस्तार
| श्रेणी | प्रमुख क्षेत्र | स्थिति |
|---|---|---|
| प्रत्यक्ष नियंत्रण | फ्रांस, बेल्जियम, पीडमॉंट और बाद में हॉलैंड तथा उत्तरी इटली के भाग | फ्रांसीसी साम्राज्य में मिलाए गए क्षेत्र; सीमाएँ समय के साथ बदलती रहीं। |
| आश्रित राज्य | स्पेन, वेस्टफेलिया, वारसा की डची, इटली का राज्य और राइन परिसंघ | नेपोलियन के संबंधियों, सहयोगियों या फ्रांसीसी संरक्षण में संचालित। |
| बदलते सहयोगी | ऑस्ट्रिया, रूस और प्रशा | ये स्थायी मित्र नहीं थे; युद्ध और संधियों के अनुसार संबंध बदलते रहे। |
- टिलसिट की संधियाँ, 1807: रूस और प्रशा के साथ समझौतों के बाद महाद्वीपीय यूरोप में नेपोलियन का प्रभाव चरम पर पहुँचा।
- पुर्तगाल: यह आश्रित राज्य नहीं बना; महाद्वीपीय व्यवस्था न मानने पर फ्रांसीसी आक्रमण और प्रायद्वीपीय युद्ध का क्षेत्र बना।
05 नेपोलियन के कार्य और पतन
प्रमुख कार्य
- सामंती व्यवस्था: फ्रांसीसी नियंत्रण वाले अनेक यूरोपीय क्षेत्रों में सामंती विशेषाधिकारों को हटाया गया; पूरे यूरोप से तत्काल और पूर्ण अंत नहीं हुआ।
- नेपोलियन संहिता, 1804: एक समान नागरिक कानून, संपत्ति का अधिकार और कानून के समक्ष पुरुष नागरिकों की समानता स्थापित की। महिलाओं पर पितृसत्तात्मक नियंत्रण बना रहा।
- चर्च: 1801 के कॉनकॉर्डेट से चर्च और राज्य के संबंध व्यवस्थित हुए, पर प्रशासन पर राज्य का नियंत्रण मजबूत रहा।
- बैंक ऑफ फ्रांस: स्थापना 1800 में हुई।
- महाद्वीपीय व्यवस्था: ब्रिटेन के व्यापार का बहिष्कार कर उसे आर्थिक रूप से कमजोर करने का प्रयास किया गया।
- “बनियों का देश”: यह कथन नेपोलियन से जोड़ा जाता है, पर “दुकानदारों का राष्ट्र” जैसा विचार उससे पहले एडम स्मिथ के लेखन में मिलता है।
महत्वपूर्ण विरोधाभास: नेपोलियन क्रांति से उभरा और कानूनी समानता फैलायी, पर उसने प्रेस पर नियंत्रण लगाया, राजनीतिक स्वतंत्रता सीमित की और राष्ट्रवाद को साम्राज्य विस्तार का साधन बनाया।
- दास प्रथा की वापसी: 1794 की समाप्ति को बोनापार्ट की सरकार ने 1802 में पलट दिया।
- आर्थिक समानता: कानूनी समानता के बावजूद संपत्ति और आर्थिक विषमता बनी रही।
- कर: अप्रत्यक्ष कर और केंद्रीकृत राजस्व व्यवस्था फिर मजबूत की गई।
प्रमुख युद्ध और पतन
- नील नदी का युद्ध, 1798: एडमिरल नेल्सन के नेतृत्व में ब्रिटिश नौसेना ने फ्रांसीसी बेड़े को पराजित किया।
- 21 अक्टूबर 1805: ट्राफलगर के नौसैनिक युद्ध में ब्रिटिश विजय ने समुद्र पर फ्रांसीसी चुनौती कमजोर कर दी।
- रूस अभियान, 1812: लंबी आपूर्ति रेखा, रूसी पीछे हटने की नीति, भूख और कठोर मौसम ने फ्रांसीसी सेना को नष्टप्राय कर दिया।
- लाइपज़िग, 1813: “राष्ट्रों के युद्ध” में निर्णायक पराजय हुई। 1814 में पदत्याग के बाद नेपोलियन को एल्बा निर्वासित किया गया।
- 18 जून 1815: वाटरलू में अंतिम पराजय हुई। इसके बाद उसे सेंट हेलेना भेजा गया, जहाँ 1821 में उसकी मृत्यु हुई।
- विएना कांग्रेस, 1814–1815: यूरोप में शक्ति-संतुलन और राजवंशीय पुनर्स्थापना के आधार पर नई व्यवस्था बनाई गई।
06 क्रांति की वैश्विक देन
- स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व: यह क्रांतिकारी आदर्श आधुनिक लोकतांत्रिक और नागरिक आंदोलनों का प्रमुख आधार बना।
- वामपंथ और दक्षिणपंथ: राष्ट्रीय सभा में बैठने की व्यवस्था से आधुनिक राजनीतिक शब्दावली विकसित हुई।
- मार्सिलेज: क्लोद-जोजेफ रूजे द लिल ने 1792 में यह युद्ध-गीत लिखा। मार्सेई के स्वयंसेवकों द्वारा गाए जाने से इसे “ला मार्सिलेज” नाम मिला और बाद में यह फ्रांस का राष्ट्रगान बना।
- जन-संप्रभुता: शासन की वैधता को राजा के दैवी अधिकार के बजाय राष्ट्र और नागरिकों से जोड़ने का विचार मजबूत हुआ।
- जनमत-संग्रह: क्रांतिकारी और नेपोलियन काल में जनमत-संग्रह का राजनीतिक वैधता के लिए व्यापक प्रयोग हुआ।
- अनिवार्य सैन्य भर्ती: राष्ट्र की रक्षा के लिए व्यापक नागरिक सेना और “राष्ट्र के लिए युद्ध” की अवधारणा विकसित हुई।
- दशमलव माप-तौल: क्रांतिकारी फ्रांस ने मीट्रिक प्रणाली को संस्थागत रूप दिया, जिसने आधुनिक अंतरराष्ट्रीय माप-व्यवस्था को प्रभावित किया।
- राष्ट्रवाद: क्रांति और नेपोलियन युद्धों ने यूरोप में राजनीतिक राष्ट्रवाद फैलाया। हर्डर का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद इससे पहले विकसित जर्मन बौद्धिक धारा थी, इसलिए उसे सीधे फ्रांसीसी क्रांति की देन नहीं कहा जाना चाहिए।
- दास प्रथा का अंतिम उन्मूलन: 1794 की पहली समाप्ति को 1802 में पलट दिया गया; फ्रांसीसी उपनिवेशों में दास प्रथा का अंतिम उन्मूलन 1848 में हुआ।
अध्याय अभ्यास परीक्षा
28 प्रश्नों से घटनाक्रम, विचारक, राजनीतिक चरण और नेपोलियन का पुनराभ्यास करें।