विश्व इतिहास · फ्रांस

फ्रांसीसी क्रांति और नेपोलियन

मुख्य विषय: क्रांति के कारण, 1789 की प्रमुख घटनाएँ, चार राजनीतिक चरण, दास प्रथा, नेपोलियन का साम्राज्य और क्रांति की वैश्विक विरासत।

6 सेक्शन ~40 मिनट 28 प्रश्न

01 क्रांति के प्रमुख कारण

फ्रांसीसी क्रांति राजा लुई XVI के शासनकाल में हुई। उस समय पुरातन व्यवस्था के अंतर्गत सामंती विशेषाधिकार, असमान कर-प्रणाली और निरंकुश राजतंत्र प्रभावी थे।

सामाजिक असमानता: तीन एस्टेट

एस्टेटवर्गसामाजिक स्थिति और कर
प्रथम एस्टेटपादरी वर्गविशेषाधिकार प्राप्त था। चर्च राज्य के सामान्य प्रत्यक्ष करों से काफी हद तक मुक्त था और राजा को स्वैच्छिक अनुदान देता था।
द्वितीय एस्टेटकुलीन वर्गउच्च पद और सामंती अधिकार प्राप्त थे। अनेक प्रमुख करों, विशेषकर टैले, से छूट थी; सभी करों से पूर्ण मुक्ति नहीं थी।
तृतीय एस्टेटबुर्जुआ, किसान, कारीगर, मजदूर और पेशेवरविशेषाधिकार विहीन विशाल बहुमत था। राज्य और सामंती देयों का मुख्य भार इसी वर्ग पर पड़ता था।
  • मतदान की समस्या: प्रत्येक एस्टेट को एक मत मिलने से प्रथम और द्वितीय एस्टेट मिलकर तृतीय एस्टेट को पराजित कर सकते थे।

आर्थिक दुर्दशा

  • प्रारंभिक वृद्धि: 18वीं सदी के मध्य में कृषि, व्यापार और उद्योग का विस्तार हुआ, पर लाभ समान रूप से वितरित नहीं हुआ।
  • 1770 के बाद: ऋण, खराब फसल, महँगी रोटी और बेरोजगारी ने संकट को तीव्र किया।
  • युद्धों का भार: सप्तवर्षीय युद्ध और अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी से राजकोषीय ऋण बहुत बढ़ गया।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • लुई XVI के प्रमुख वित्तमंत्री: तुर्गो, नेकर और कैलोन।
  • लिव्रे: पुरातन फ्रांस की मुद्रा एवं लेखा-इकाई; 1795 में दशमलव प्रणाली पर आधारित फ्रांक ने इसका स्थान लिया

फ्रांसीसी कर-व्यवस्था

  1. टाइड: चर्च को दिया जाने वाला कर; कृषि उपज का लगभग 1/10 भाग
  2. टाइल: प्रमुख प्रत्यक्ष कर, मुख्यतः भूमि/संपत्ति पर लगाया जाता था।
  3. गैबेल: नमक कर

राजनीतिक निरंकुशता

  • बूर्बों शासक: लुई XIV, लुई XV और लुई XVI के काल में राजसत्ता अत्यधिक केंद्रीकृत रही।
  • लुई XIV: उसका प्रसिद्ध कथन माना जाता है — “मैं ही राज्य हूँ, और मेरे शब्द ही कानून हैं।”
  • लुई XVI: वह 1774 में सिंहासन पर बैठा। उसके शासनकाल में 1789 में फ्रांसीसी क्रांति शुरू हुई और 1793 में उसे मृत्युदंड दिया गया।
  • वर्साय दरबार: अत्यधिक खर्च और अभिजात जीवन-शैली ने राजतंत्र के प्रति असंतोष बढ़ाया।

दार्शनिकों का योगदान

विचारकप्रमुख रचनामुख्य विचार
जॉन लॉकटू ट्रीटीज़ ऑफ गवर्नमेंटप्राकृतिक अधिकार; शासन की वैधता जनता की सहमति से।
रूसोद सोशल कॉन्ट्रैक्टजन-संप्रभुता और सामान्य इच्छा। प्रसिद्ध पंक्ति: मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ है, पर सर्वत्र जंजीरों में जकड़ा है।
मॉन्टेस्क्यूद स्पिरिट ऑफ द लॉज़तानाशाही रोकने के लिए शक्ति-पृथक्करण का सिद्धांत।
वॉल्टेयरलेटर्स ऑन द इंग्लिशचर्च के भ्रष्टाचार, धार्मिक असहिष्णुता और निरंकुशता की आलोचना। उससे “सौ चूहों की अपेक्षा एक सिंह का शासन उत्तम है” कथन भी जोड़ा जाता है।
दिदरोविश्वकोशज्ञान, विज्ञान और तर्कशीलता का प्रसार।

02 तत्कालीन कारण और क्रांति का आरंभ

  • 5 मई 1789: नए करों और वित्तीय संकट पर विचार के लिए वर्साय में एस्टेट्स-जनरल की बैठक आरंभ हुई।
  • चैम्बर के आधार पर मतदान: पादरी और कुलीन वर्ग प्रत्येक एस्टेट को एक मत देना चाहते थे।
  • सदस्य के आधार पर मतदान: तृतीय एस्टेट प्रत्येक प्रतिनिधि को एक मत देने की माँग कर रहा था।
  • 17 जून 1789 — राष्ट्रीय सभा: तृतीय एस्टेट ने स्वयं को राष्ट्रीय सभा घोषित किया।
  • राष्ट्रीय सभा के प्रमुख प्रारंभिक नेता: मिराबो तथा अब्बे सिएयेस ('तृतीय एस्टेट क्या है?')।
  • 20 जून 1789 — टेनिस कोर्ट शपथ: प्रतिनिधियों ने संविधान बनने तक अलग न होने की प्रतिज्ञा की।

क्रम याद रखें: एस्टेट्स-जनरल → राष्ट्रीय सभा → टेनिस कोर्ट शपथ → बास्तील का पतन।

03 क्रांति के चार प्रमुख चरण

चरण 1: संवैधानिक राजतंत्र (1789–1792)

  • नेतृत्व: मध्यम वर्ग के नेतृत्व और किसानों तथा शहरी निम्न वर्ग के दबाव में परिवर्तन आगे बढ़ा।
  • 14 जुलाई 1789: निरंकुशता के प्रतीक बास्तील दुर्ग-जेल का पतन हुआ। फ्रांस इस दिन राष्ट्रीय दिवस मनाता है।
  • 4 अगस्त 1789: सामंती विशेषाधिकार समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
  • 26 अगस्त 1789 — मानव और नागरिक अधिकारों की घोषणा:
    • फ्रांस की नेशनल असेंबली ने इस घोषणा को स्वीकार किया।
    • इसके मुख्य आधार स्वतंत्रता, समानता और जन-संप्रभुता थे।
  • 3 सितंबर 1791 — फ्रांस का प्रथम लिखित संविधान:
    • राजा की शक्तियां सीमित करके संवैधानिक राजतंत्र स्थापित किया गया।
    • सभी नागरिकों को मताधिकार नहीं दिया गया था।
    • सक्रिय नागरिक: 25 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे पुरुष, जो कम-से-कम तीन दिनों की मजदूरी के बराबर प्रत्यक्ष कर चुकाते थे। केवल इन्हें मतदान का अधिकार था।
    • निष्क्रिय नागरिक: महिलाओं और गरीब पुरुषों को मतदान का अधिकार नहीं दिया गया।

चरण 2: उग्र गणतंत्रवाद और आतंक (1792–1794)

  • 21 सितंबर 1792: एक-सदनीय राष्ट्रीय कन्वेंशन ने राजतंत्र समाप्त किया। अगले दिन से गणतंत्र का वर्ष प्रथम माना गया।
  • राजनीतिक गुट:
    • जिरोंदिन (Girondins): अपेक्षाकृत उदार, प्रांतीय और मध्यमपंथी गणतांत्रिक समूह।
    • जैकोबिन (Jacobins): उग्र क्रांतिकारी समूह, जिसे पेरिस के निम्न वर्ग साँ-कुलोत्त (Sans-culottes) का व्यापक समर्थन प्राप्त था।
      • साँ-कुलोत्त: फ्रांसीसी क्रांति के समय जैकोबिन क्लब के समर्थक निम्न वर्गों को “बिना घुटने वाले कपड़े पहनने वाले” कहा जाता था।
  • लुई XVI: देशद्रोह का दोषी ठहराकर 1793 में मृत्युदंड दिया गया।
  • आतंक का शासन (1793–1794): रोबेस्पिएर के नेतृत्व में सार्वजनिक सुरक्षा समिति के अधीन केंद्रीकृत आपात शासन चला; 1794 में उसके पतन और मृत्युदंड के साथ इसका अंत हुआ।
  • सामाजिक कार्यक्रम और 1793 का संविधान:
    • मूल्य नियंत्रण: अनाज और आवश्यक वस्तुओं पर अधिकतम मूल्य सीमा लगाई गई।
    • सार्वभौमिक पुरुष मताधिकार: संपत्ति संबंधी योग्यता हटाकर सभी वयस्क पुरुषों को मतदान का अधिकार दिया गया।
    • सामाजिक अधिकार: शिक्षा और रोजगार के अधिकारों की घोषणा की गई।
    • क्रियान्वयन: युद्धकालीन परिस्थितियों के कारण यह संविधान कभी लागू नहीं हो सका।
  • दास प्रथा: राष्ट्रीय कन्वेंशन ने फ्रांसीसी उपनिवेशों में 1794 में दास प्रथा समाप्त की।

चरण 3: डायरेक्टरी (1795–1799)

  • थर्मिडोरियन प्रतिक्रिया: 1794 में रोबेस्पिएर का पतन और मृत्युदंड हुआ।
  • नई राजनीतिक व्यवस्था (1795):
    • सत्ता पुनः संपन्न मध्यम वर्ग के हाथों में आ गई।
    • जैकोबिन काल के सार्वभौमिक पुरुष मताधिकार को हटाकर संपत्ति-आधारित सीमित मताधिकार लागू किया गया।
    • दो-सदनीय विधानमंडल स्थापित किया गया।
  • कार्यपालिका: पाँच निदेशकों की डायरेक्टरी बनाई गई। भ्रष्टाचार, आर्थिक संकट और सेना पर निर्भरता से यह कमजोर रही।

चरण 4: प्रजातंत्र की आड़ में तानाशाही (1799–1814)

  • 9 नवंबर 1799 — 18 ब्रूमेयर का तख्तापलट:
    • नेपोलियन बोनापार्ट ने डायरेक्टरी शासन को उखाड़ फेंका।
    • कॉन्सुलेट व्यवस्था स्थापित हुई और नेपोलियन प्रथम कॉन्सुल बना।
    • यहाँ से गणतंत्र के आवरण में नेपोलियन की व्यक्तिगत सत्ता मजबूत होने लगी।
  • 1804 — नेपोलियन साम्राज्य:
    • नेपोलियन फ्रांस का सम्राट बना।
    • नागरिक संहिता (Napoleonic Code, 1804): कानूनी समानता, निजी संपत्ति और समान नागरिक कानून जैसे कई क्रांतिकारी सुधारों को स्थायी आधार मिला।
    • राजनीतिक परिणाम: प्रेस, अभिव्यक्ति और राजनीतिक स्वतंत्रता पर कठोर नियंत्रण लगाया गया।
  • दार्शनिक दृष्टिकोण — एडमंड बर्क:
    • बर्क ने 1790 में चेतावनी दी थी कि क्रांति की अस्थिरता किसी शक्तिशाली सैन्य नेता को सत्ता तक पहुँचा सकती है। नेपोलियन का उदय इसी संदर्भ में देखा जाता है।

04 नेपोलियन: जीवन और साम्राज्य

प्रारंभिक जीवन और सत्ता में उदय

  • जन्म: 15 अगस्त 1769 को कोर्सिका के अजासियो में हुआ। पिता का नाम कार्लो बोनापार्ट था।
  • इटली अभियान: 1796 से उसके सफल अभियानों ने उत्तरी इटली में ऑस्ट्रियाई प्रभाव को गंभीर रूप से कमजोर किया।
  • सत्ता क्रम: 1799 में प्रथम कॉन्सुल, 1802 में आजीवन कॉन्सुल और 1804 में फ्रांसीसियों का सम्राट बना।
  • उपनाम: उसे “लिटल कॉरपोरल” कहा गया और उसके प्रशासनिक सुधारों के कारण “आधुनिक फ्रांस का निर्माता” भी कहा जाता है।

साम्राज्य विस्तार

  • प्रत्यक्ष नियंत्रण: फ्रांस, बेल्जियम और उत्तरी इटली के भाग।
  • आश्रित राज्य: स्पेन, वेस्टफेलिया, वारसा की डची और राइन परिसंघ।
  • बदलते सहयोगी: रूस, प्रशा और ऑस्ट्रिया से संबंध युद्ध और संधियों के अनुसार बदलते रहे।
  • टिलसिट की संधियाँ, 1807: रूस और प्रशा के साथ समझौतों के बाद महाद्वीपीय यूरोप में नेपोलियन का प्रभाव चरम पर पहुँचा।

05 चरण 5: नेपोलियन के कार्य और पतन

प्रमुख कार्य एवं नीतियाँ

  • प्रशासनिक एवं आर्थिक सुधार:
    • सामंती व्यवस्था: फ्रांसीसी नियंत्रण वाले अनेक यूरोपीय क्षेत्रों में सामंती विशेषाधिकार हटाए गए।
    • बैंक ऑफ फ्रांस: वित्तीय स्थिरता के लिए 1800 में इसकी स्थापना की गई।
  • नेपोलियन संहिता, 1804:
    • एक समान नागरिक कानून लागू किया गया।
    • संपत्ति के अधिकार को सुरक्षा मिली।
    • कानून के समक्ष पुरुष नागरिकों की समानता स्थापित हुई।
    • पितृसत्तात्मक नियंत्रण: महिलाओं के कानूनी अधिकार सीमित रहे और उन्हें पुरुषों के अधीन रखा गया।
  • आर्थिक नीतियाँ और कर व्यवस्था:
    • केंद्रीकृत राजस्व: अप्रत्यक्ष करों और केंद्रीकृत राजस्व व्यवस्था को फिर मजबूत किया गया।
    • दास प्रथा की वापसी: कन्वेंशन ने 1794 में दास प्रथा समाप्त की थी। नेपोलियन सरकार ने 1802 में औपनिवेशिक दासता को पुनः स्थापित करने की नीति अपनाई।
  • विदेश नीति और विरोधाभास:
    • महाद्वीपीय व्यवस्था (Continental System): ब्रिटिश व्यापार का बहिष्कार करके ब्रिटेन को आर्थिक रूप से कमजोर करने का असफल प्रयास किया गया।
    • महत्वपूर्ण विरोधाभास: नेपोलियन क्रांति से उभरा और उसने कानूनी समानता का विस्तार किया, लेकिन प्रेस पर नियंत्रण लगाया और राजनीतिक स्वतंत्रता सीमित कर दी।
    • उसने राष्ट्रवाद को साम्राज्य विस्तार का साधन बनाया। कानूनी समानता के बावजूद आर्थिक विषमता बनी रही।

प्रमुख युद्ध और पतन — कालानुक्रमिक क्रम

  • 1798 — नील नदी का युद्ध: एडमिरल नेल्सन के नेतृत्व में ब्रिटिश नौसेना ने फ्रांसीसी बेड़े को पराजित किया। यह घटना नेपोलियन के शासक बनने से पहले हुई थी।
  • 21 अक्टूबर 1805 — ट्राफलगर का युद्ध: ब्रिटिश नौसैनिक विजय ने समुद्र पर फ्रांसीसी चुनौती को निर्णायक रूप से कमजोर कर दिया।
  • 1812 — रूस अभियान:
    • रूसी सेना पीछे हटती गई और उपयोगी संसाधनों को नष्ट करती गई।
    • लंबी आपूर्ति रेखा, भूख, बीमारी और कठोर ठंड से फ्रांसीसी सेना नष्टप्राय हो गई।
    • यह अभियान नेपोलियन के पतन का प्रमुख कारण बना।
  • 1813 — लाइपज़िग का युद्ध: इसे “राष्ट्रों का युद्ध” कहा जाता है। इसमें नेपोलियन की निर्णायक पराजय हुई।
  • 1814 — प्रथम पदत्याग: पेरिस पर मित्र राष्ट्रों के कब्जे के बाद नेपोलियन को गद्दी छोड़नी पड़ी। उसे एल्बा द्वीप निर्वासित कर दिया गया।
  • 18 जून 1815 — वाटरलू का युद्ध:
    • एल्बा से लौटकर नेपोलियन लगभग सौ दिनों के लिए फिर शासक बना।
    • वाटरलू में ब्रिटेन, प्रशा और उनके सहयोगियों ने उसे अंतिम रूप से पराजित किया।
  • 1821 — मृत्यु: वाटरलू के बाद नेपोलियन को सेंट हेलेना द्वीप भेजा गया, जहाँ उसकी मृत्यु हुई।
  • विएना कांग्रेस (1814–1815):
    • नेपोलियन युद्धों के बाद यूरोप की राजनीतिक व्यवस्था को फिर से संतुलित करने के लिए यह सम्मेलन हुआ।
    • 9 जून 1815: इसका अंतिम समझौता स्वीकार किया गया।
    • इसका मुख्य उद्देश्य शक्ति-संतुलन बनाना, राजवंशीय व्यवस्था बहाल करना और फ्रांस के विस्तार को नियंत्रित करना था।

06 क्रांति की वैश्विक देन

  • फ्रांसीसी क्रांति का आदर्श — स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व: यह क्रांतिकारी आदर्श आधुनिक लोकतांत्रिक और नागरिक आंदोलनों का प्रमुख आधार बना।
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना: स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की प्रेरणा फ्रांसीसी क्रांति से मानी जाती है।
  • वामपंथ और दक्षिणपंथ: राष्ट्रीय सभा में बैठने की व्यवस्था से आधुनिक राजनीतिक शब्दावली विकसित हुई।
  • मार्सिलेज: क्लाउड जोसेफ रूजेट डी लिसले ने 1792 में यह युद्ध-गीत लिखा। मार्सेई के स्वयंसेवकों द्वारा गाए जाने से इसे “ला मार्सिलेज” नाम मिला और बाद में यह फ्रांस का राष्ट्रगान बना।
  • जन-संप्रभुता: शासन की वैधता को राजा के दैवी अधिकार के बजाय राष्ट्र और नागरिकों से जोड़ने का विचार मजबूत हुआ।
  • जनमत-संग्रह: क्रांतिकारी और नेपोलियन काल में जनमत-संग्रह का राजनीतिक वैधता के लिए व्यापक प्रयोग हुआ।
  • अनिवार्य सैन्य भर्ती: राष्ट्र की रक्षा के लिए व्यापक नागरिक सेना और “राष्ट्र के लिए युद्ध” की अवधारणा विकसित हुई।
  • दशमलव माप-तौल: क्रांतिकारी फ्रांस ने मीट्रिक प्रणाली को संस्थागत रूप दिया, जिसने आधुनिक अंतरराष्ट्रीय माप-व्यवस्था को प्रभावित किया।
  • राष्ट्रवाद: राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति फ्रांसीसी क्रांति (1789) मानी जाती है। क्रांति और नेपोलियन युद्धों ने यूरोप में राजनीतिक राष्ट्रवाद फैलाया; हर्डर को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जोड़ा जाता है।
  • दास प्रथा का अंतिम उन्मूलन: 1794 की पहली समाप्ति को 1802 में पलट दिया गया; फ्रांसीसी उपनिवेशों में दास प्रथा का अंतिम उन्मूलन 1848 में हुआ।
अध्याय अभ्यास परीक्षा

28 प्रश्नों से घटनाक्रम, विचारक, राजनीतिक चरण और नेपोलियन का पुनराभ्यास करें।