बोक्सा (बुक्सा) जनजाति
जनसंख्या एवं विस्तार, उत्पत्ति, सामाजिक व्यवस्था, विवाह प्रथाएँ, धर्म, मेले-त्योहार, बिरादरी पंचायत, बोली और अर्थव्यवस्था।
01 जनसंख्या एवं विस्तार
यह राज्य के तराई और भाबर क्षेत्रों में निवास करने वाली प्रमुख जनजाति है।
- 1. जनसंख्या क्रम
- यह उत्तराखंड की तीसरी सबसे बड़ी जनजाति है।
- 2. सर्वाधिक आबादी
- राज्य में बोक्सा जनजाति की सर्वाधिक आबादी ऊधम सिंह नगर जनपद में निवास करती है।
- 3. प्रमुख निवास क्षेत्र
- ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, पौड़ी (दुगड्डा), देहरादून और हरिद्वार।
- 4. बोक्साड़ क्षेत्र
- ऊधम सिंह नगर व नैनीताल में इनके बाहुल्य क्षेत्र को 'बोक्साड़' कहा जाता है। इस शब्द का ऐतिहासिक प्रयोग 'आइन-ए-अकबरी' में भी मिलता है।
- 5. विशेष दर्जा
- वर्ष 1981 में इन्हें Primitive Tribal Group (PTG) श्रेणी में शामिल किया गया; वर्तमान में यह PVTG (Particularly Vulnerable Tribal Group) के रूप में वर्गीकृत है।
02 उत्पत्ति एवं ऐतिहासिक मत
इनके मूल निवास और उत्पत्ति को लेकर इतिहासकारों व मानवशास्त्रियों में निम्नलिखित मान्यताएँ हैं:
- ऐतिहासिक मानवशास्त्रीय मत
- बुक्सा को मंगोलॉयड (Mongoloid) समूह से संबंधित माना गया है; उनकी उत्पत्ति पर विद्वानों में मतभेद हैं।
- आत्म-पहचान
- बोक्सा स्वयं को धारानगरी (मध्य प्रदेश) के पँवार (परमार) राजपूतों (राजा जगतदेव) का वंशज मानते हैं। प्रसिद्ध मानवशास्त्री विलियम क्रुक ने भी इसी मत का समर्थन किया है।
- बनबसा बसावट
- परंपरागत मत: 16वीं शताब्दी में मुगल आक्रमणों के समय ये चंपावत के 'बनबसा' क्षेत्र में आकर बसे। इसे निश्चित ऐतिहासिक तथ्य की बजाय उत्पत्ति से जुड़ा परंपरागत मत माना जाता है।
- मराठों का संबंध
- कुछ अन्य इतिहासकारों का मानना है कि ये मराठों द्वारा भगाये गए लोगों के वंशज हैं।
- महर बोक्सा
- देहरादून (चकराता, सहसपुर, विकासनगर) में रहने वाले बोक्सा स्वयं को विशिष्ट रूप से 'महर बोक्सा' या 'मेहर बोक्सा' कहते हैं।
03 सामाजिक व्यवस्था एवं उपजातियाँ
- पारिवारिक व्यवस्था
- बोक्सा समाज मूलतः पितृसत्तात्मक (Patriarchal) है और संयुक्त परिवार का प्रचलन है।
- संपत्ति
- पुत्री को भी संपत्ति का उत्तराधिकारी माना जाता है।
प्रमुख उपजातियाँ / गोत्र
परीक्षा के लिए प्रमुख पाँच नाम:
01यदुवंशी
02राजवंशी
03पँवार
04तनवार
05परतजा
04 विवाह प्रथाएँ
- विवाह स्वरूप
- एक-विवाह (Monogamy) का प्रचलन है; पारंपरिक रूप से बहुपत्नी विवाह का भी उल्लेख मिलता है।
- बैठाण विवाह
- यह बोक्सा समाज में प्रचलित एक विशेष विवाह पद्धति है।
- मालगति
- कन्या शुल्क (Bride Price) देने की प्रथा को स्थानीय भाषा में 'मालगति' कहा जाता है।
05 धर्म और तांत्रिक परंपरा
- तंत्र-मंत्र
- बोक्सा जनजाति में जादू-टोना व तंत्र-मंत्र का अत्यधिक प्रचलन है।
- भरारे
- समाज में तंत्र-मंत्र करने वाले विशेषज्ञ व्यक्ति को 'भरारे' / 'भरार' कहा जाता है।
प्रमुख देवी-देवता
- चामुंडा देवी
- चामुंडा देवी बोक्सा समाज की प्रमुख पूजित देवी मानी जाती हैं।
ग्राम देवियाँ और देवता
- खेड़ी देवी
- प्रत्येक गाँव की व्यक्तिगत देवी (ग्राम खेड़ी देवी)।
- साकरिया
- ग्राम देवता।
- अन्य
- हुल्का देवी (बीमारी रक्षक), ज्वाल्पा/साक्षी देवी, भूमिया और साड़ी देवता (फसल रक्षक)।
06 मेले एवं प्रमुख त्योहार
चैती मेला
काशीपुर में माँ बाला सुंदरी के मंदिर से संबंधित चैती मेला चैत्र मास में लगता है और बोक्सा जनजाति का प्रमुख पवित्र मेला माना जाता है।
प्रमुख त्योहार
होंगण, ढल्या और मोरो इनके विशिष्ट त्योहार हैं। इसके अतिरिक्त गोटरे (कुल देवताओं की पूजा), नवरात्र / नवरात्रि और होली भी बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं।
07 राजनैतिक एवं न्याय व्यवस्था (बिरादरी पंचायत)
- गाँव
- बोक्सा समाज में गाँव के लिए 'मंझरा / मझरा' शब्द प्रयुक्त होता है।
- बिरादरी पंचायत
- पारंपरिक सामाजिक विवादों का निपटारा बिरादरी पंचायत करती थी।
पंचायत की प्रशासनिक संरचना
- कुल सदस्य
- पंचायत में कुल 5 सदस्य होते हैं।
- पद
- पंचायत के पद प्रायः वंशानुगत (Hereditary) होते हैं।
- 1. तखत (1 पद)
- पंचायत का सर्वोच्च मुखिया या सरपंच।
- 2. मुंसिफ (1 पद)
- मामले की जाँच / छानबीन से संबंधित पद।
- 3. दरोगा (1 पद)
- सभा की व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने वाला।
- 4. सिपाही (2 पद)
- पंचायत की सूचना पहुँचाने वाले संदेशवाहक।
08 बोली एवं अर्थव्यवस्था
- भाषा/बोली
- भावरी (भाबरी), कुमैय्या और रचभैंसी।
अर्थव्यवस्था
- मुख्य व्यवसाय
- कृषि एवं पशुपालन। ये कुशल कृषक माने जाते हैं और तराई क्षेत्र में धान व गन्ने की उन्नत खेती करते हैं।
- मुख्य भोजन
- मछली और चावल (भात)।