जौनसारी जनजाति
जौनसारी उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल की सबसे बड़ी और राज्य की दूसरी सबसे बड़ी (थारू के बाद) जनजाति है।
01 भौगोलिक विस्तार एवं उत्पत्ति
यह जनजाति मुख्य रूप से राज्य के पश्चिमी भाग में निवास करती है।
जनसंख्या स्थिति
- गढ़वाल मंडल: जौनसारी यहाँ की सबसे बड़ी जनजाति है।
- उत्तराखंड: यह दूसरी सबसे बड़ी जनजाति है।
- राज्य में प्रथम: थारू जनजाति।
प्रमुख निवास क्षेत्र
- देहरादून: चकराता, कालसी और त्यूणी तहसीलें।
- टिहरी: जौनपुर क्षेत्र।
- उत्तरकाशी: परगना रंवाई क्षेत्र।
उत्पत्ति
- जौनसारी स्वयं को पांडवों का वंशज मानते हैं।
02 सामाजिक व्यवस्था एवं वर्ग विभाजन
जौनसारी समाज मूल रूप से पितृसत्तात्मक है।
समाज के तीन प्रमुख वर्ग
- खसासब्राह्मण और राजपूत।
- कारीगरसोनार, लोहार और बढ़ई।
- हरिजन खसासमोची, कोल्टा और कोली।
परीक्षा तथ्य — कोल्टा (डोम)समाज के सबसे निम्न स्तर पर माने जाते हैं।
स्त्रियों से संबंधित शब्दावली
- ध्यांति: मायके में रहने वाली अविवाहित महिला।
- रयन्ती: विवाहित महिला, जो ससुराल चली गई हो।
03 विवाह परंपरा
बहुपति प्रथा (Polyandry)
- पहले जौनसारी समाज में बहुपति प्रथा का अत्यधिक प्रचलन था।
- अब यह प्रथा धीरे-धीरे समाप्त हो गई है।
वर्तमान में प्रमुख विवाह प्रकार
- बाजदियाशान-शौकत वाला विवाह; प्रायः संपन्न परिवारों में।
- बोईदोदीकीमध्यम स्तर का विवाह।
- बेबाकीसबसे साधारण प्रकार का विवाह।
अन्य महत्वपूर्ण प्रथाएँ
- दहेज प्रथा: पारंपरिक रूप से दहेज में गाय देने की प्रथा थी।
- तलाक का नाम: जौनसारी जनजाति में तलाक को ‘छूट’ कहा जाता है।
- विवाह-विच्छेद: इसकी प्रक्रिया काफी सरल है।
04 राजनैतिक एवं पारंपरिक न्याय व्यवस्था
क्षेत्रीय प्रशासनिक ढाँचा
- राजस्व ग्राम: कुल 358।
- खत व पट्टियाँ: कुल 39।
- आधुनिक पंचायती राज से पूर्व यहाँ एक सुदृढ़ पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था थी।
ग्राम स्तर की पंचायत — खुमरी
- स्वरूप: खुमरी ग्राम पंचायत के समान संस्था थी।
- मुखिया: ग्राम सयाणा।
- सदस्यता: प्रत्येक परिवार का मुखिया खुमरी का सदस्य होता था।
- कार्य: गाँव के आंतरिक विवादों का समाधान करना।
पट्टी स्तर की पंचायत — खत खुमरी
- खत: एक से अधिक ग्राम मिलकर एक ‘खत’ बनाते हैं।
- मुखिया: खत सयाणा।
- कार्य: दो या दो से अधिक गाँवों के बीच के मामलों का समाधान करना।
नालस: खुमरी में शिकायत दर्ज कराने हेतु दिया जाने वाला पारंपरिक शुल्क।
05 धर्म एवं देवी-देवता
महासू देवता
- प्रमुख आराध्य: जौनसारी समाज के प्रमुख एवं सर्वमान्य आराध्य देवता।
- देव-स्वरूप: भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है।
- विशेष पहचान: न्याय के देवता माने जाते हैं।
चार महासू देव-भाई
- बाशिक / वासिक महासू
- पबासिक / पवासी महासू
- बौठा / बोठा महासू
- चालदा महासूविशेषता: भ्रमणशील / घुमक्कड़ी प्रकृति के लिए प्रसिद्ध।
हनोल — महासू देवता का प्रमुख तीर्थस्थल
- स्थान: हनोल, देहरादून, टोंस नदी के निकट।
- मंदिर: महासू देवता का प्रमुख मंदिर; मुख्यतः बौठा महासू से संबंधित।
- धार्मिक एवं न्यायिक महत्त्व: जौनसारी समाज का प्रमुख तीर्थस्थल; इसे प्रमुख न्यायालय भी माना जाता है।
- निर्माण एवं स्थापत्य: लकड़ी एवं पत्थर की मिश्रित हिमालयी शैली — हूण शैली / काठ-कुनी / कोठी-बनाल।
अन्य प्रमुख धार्मिक स्थल
- लाखामंडल
- कालसी
पांडव परंपरा
- वंश परंपरा: जौनसारी स्वयं को पांडवों का वंशज मानते हैं; पाँचों पांडवों और माता कुंती की भी पूजा की जाती है।
06 प्रमुख त्योहार
1. दियाई / बूढ़ी दीपावली
- जौनसार-बावर में सामान्य दीपावली के लगभग एक माह बाद मनाया जाने वाला पाँच दिवसीय पर्व।
- होला / होलड़ा — भीमल की लकड़ी से बनी मशाल; इसे जलाकर होलियात खेली जाती है तथा पारंपरिक रूप से भयलो भी खेला जाता है।
- भिरूड़ी — गांव का स्याणा पंचायती आंगन / देवस्थान में ऊँचे स्थान से अखरोट देव-प्रसाद के रूप में फेंकता है।
- दीपावली के अवसर पर पुरुष पत्तेबाजी नृत्य करते हैं; अंतिम चरण में काठ के हाथी और हिरण नृत्य के साथ पर्व का समापन होता है।
2. माघ / मरोज
- समय — माघ माह / मध्य जनवरी।
- जौनसार-बावर का प्रमुख शीतकालीन पर्व; उत्सव लगभग एक माह तक चलता है।
- पारंपरिक रूप से बकरे की बलि एवं सामूहिक भोज।
- बांटा — मकर संक्रांति के अवसर पर विवाहित बहनों एवं बेटियों के घर भेजा जाता है।
- प्रमुख व्यंजन — गीमा।
3. स्थानीय पर्व-नाम
- अठोई — जौनसार में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का स्थानीय नाम।
- पंचाई / पाँचों — दशहरा काल का पांडवों से संबंधित पर्व।
- पायता — विजयादशमी का स्थानीय नाम।
4. नुणाई
- समय — श्रावण / सावन।
- परंपरागत रूप से ग्रीष्मकाल में बुग्यालों में गए भेड़पालकों की वापसी की खुशी में मनाया जाता है।
- इसी समय से भेड़ों की ऊन उतारने की परंपरा भी जोड़ी जाती है।
- सेरूवा — आटा और गुड़ से बनाया जाने वाला विशेष रोट, जिसे परंपरागत रूप से पहले भेड़पालकों को खिलाया जाता था।
07 प्रमुख मेले एवं लोक संस्कृति
1. बिस्सू मेला
- समय — वैशाख / वैशाखी (अप्रैल)।
- जौनसार-बावर का प्रमुख वसंत एवं फसल-कटाई उत्सव।
- अच्छी फसल के लिए संतूरा देवी को धन्यवाद देने की परंपरा से संबंधित।
- प्रमुख स्थान — चौलीथात, ठाणा डांडा, चौरानी और नागथात।
- जंगबाजी नृत्य — बिस्सू का प्रमुख पारंपरिक नृत्य।
- ठौड़ा / थौड़ा — धनुष-बाण पर आधारित पारंपरिक युद्ध-कौशल / खेल।
- लाडू और शाकुली — चावल से बने पापड़, जो बिस्सू मेले के प्रमुख पारंपरिक पकवान माने जाते हैं।
2. जागड़ा
- समय — भाद्रपद / भादों।
- आराध्य — महासू देवता।
- प्रमुख स्थान — हनोल।
- महासू देवता की मूर्ति को टोंस नदी में स्नान कराया जाता है।
- रात्रि में जागरण एवं देव-स्तुति की जाती है।
3. मौण मेला
मछमौण
- जौनसार का पारंपरिक सामूहिक मत्स्य-आखेट उत्सव।
- नदी / गाड़ में टिमरू की छाल का चूर्ण डाला जाता है।
- मछलियों के सुस्त होने पर उन्हें सामूहिक रूप से पकड़ा जाता है।
- पारंपरिक रूप से इसमें पुरुषों की भागीदारी प्रमुख रही है।
- प्रसिद्ध मौण — डूंग्यारा, साहिया, पाटे और मीनस।
जतरिया मौण
- कई खतों को मिलाकर आयोजित होने वाला बड़ा मौण।
- लगभग 25–26 वर्ष के लंबे अंतराल पर बड़े आयोजन का उल्लेख मिलता है।
- लोग पारंपरिक हथियार एवं गाजे-बाजे लेकर भाग लेते थे।
- प्रमुख विशेषता — सामुदायिक शक्ति-परीक्षण / शक्ति-प्रदर्शन।
4. जातरा
- समय — सामान्यतः सावन / जुलाई।
- कृषि कार्य एवं धान की रोपाई के बाद मनाया जाने वाला लोकपर्व।
- ग्राम / इष्ट देवता की पूजा की जाती है।
- अच्छी फसल और कृषि-समृद्धि की कामना की जाती है।
5. भिरौली
- जौनसार का पारंपरिक स्थानीय पर्व।
- संतान-कल्याण की कामना से संबंधित।
08 भाषा एवं साहित्य
जौनसारी भाषा
- प्रमुख भाषा: जौनसारी।
- भाषा-समूह: पहाड़ी भाषा-समूह से संबंधित।
A Linguistic Study of Jaunsari
- लेखक: उमादत्त शर्मा ‘सतीश’।
- PYQ: UKSSSC Junior Assistant, 2018।
09 जौनसार के प्रमुख व्यक्तित्व
वीर केसरी चंद
नवम्बर 1920 में क्यावा, चकराता में जन्मे वीर केसरी चंद को ‘जौनसार का श्री देव सुमन’ कहा जाता है।
आजाद हिंद फौज से बलिदान तक
- आजाद हिंद फौजफौज में शामिल होकर इम्फाल के युद्ध में भाग लिया।
- सैन्य कार्रवाईअंग्रेजों के एक पुल को बम से उड़ा दिया था।
- बलिदान — 3 मई 1945दिल्ली में फाँसी दी गई।
स्मृति एवं संबंधित रचना
- वीर केसरी मेला: उनकी स्मृति में प्रतिवर्ष 3 मई को चौलीथात (रामताल गार्डन) में आयोजित किया जाता है।
- ‘वीर केसरी’: पंडित शिवराम द्वारा लिखी गई संबंधित रचना।
अन्य प्रमुख व्यक्तित्व
- गुलाब सिंहजौनसार क्षेत्र में राजनीति के जनक।इस क्षेत्र के पहले मंत्री।
- पंडित शिवरामजौनसार क्षेत्र के पहले कवि (आशुकवि)।सबसे प्रसिद्ध रचना — ‘वीर केसरी’।
- रतन सिंह जौनसारजौनसार क्षेत्र के आधुनिक कवि।
- भाव सिंह चौहान‘Father of Jonsar Bhabar’ (जौनसार-बाबर के पिता) के नाम से जाने जाते हैं।
- नंद लाल भारतीजौनसार में संगीत के जनक।2017 में ‘लोकरत्न सम्मान’ से सम्मानित।
- केदार सिंहजौनसार क्षेत्र में समाजसेवा के अग्रदूत।
- देवीका चौहान व कृपाराम जोशीजौनसार क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी।
10 प्रमुख लोकनृत्य
जौनसारी समाज में अवसरों और मेलों के दौरान अनेक पारंपरिक लोकनृत्य किए जाते हैं।
प्रमुख नृत्य
- हारुल नृत्ययह नृत्य अनिवार्य रूप से ‘रमतुला’ वाद्य यंत्र के साथ किया जाता है।
- परात नृत्य
- पत्तेबाजी / पतेंबाजी नृत्य
- जंगबाजी नृत्यप्रायः बिस्सू मेले में युद्ध कौशल के रूप में।
- अंडे-कांडे नृत्य
- पौणाई नृत्य
- रास / रासो नृत्य
- झुमक्या नृत्य
11 प्रमुख लोकगीत
जौनसार क्षेत्र में गाए जाने वाले प्रमुख पारंपरिक लोकगीत:
- हारुल
- मांगल
- केदारछाया
- विरासू
- रणारात
- छोड़े
- शिलोगु