उत्तराखंड की जनजातियाँ · लेख 2

थारू जनजाति

उत्तराखंड की सर्वाधिक जनसंख्या वाली जनजाति—तराई क्षेत्र, कुरी व्यवस्था, विवाह की विशिष्ट शब्दावली, महिला-संबंधी सामाजिक प्रथाएँ, देवी-देवता, त्योहार और बिरादरी पंचायत के परीक्षा-योग्य तथ्य।

09 अध्ययन खंड02/06 श्रृंखलाUKPSC · UKSSSC

01 जनसंख्या एवं उत्पत्ति

सर्वाधिकराज्य की सर्वाधिक जनसंख्या वाली जनजाति
32%कुल ST जनसंख्या में हिस्सा
लगभग 90%आबादी ऊधम सिंह नगर में
उत्पत्ति एवं वंश
ये ‘किरात वंशी’ हैं और मंगोल प्रजाति के निकट माने जाते हैं।
पुरुषों की मान्यता
अपने को महाराणा प्रताप का वंशज मानते हैं।
महिलाओं की मान्यता
अपने को महारानी पद्मावती की वंशज मानती हैं।

02 सामाजिक व्यवस्था

गोत्र
थारू समाज कई गोत्रों में बँटा है, जिन्हें ‘कुरी’ कहा जाता है।
प्रमुख गोत्र
बड़वायक (सबसे उच्च गोत्र), बट्टा, रावत, महतो और डहैत।
उल्टहवा उपजाति
थारू की एक उपजाति, जिसके पुरुष हिंदुत्व प्रतीक के रूप में सिर पर चोटी रखते हैं।

03 विवाह प्रथाएँ एवं शब्दावली

मजपतिया
विवाह की मध्यस्थता (बिचौलिया) कराने वाला व्यक्ति।
पक्की पोढ़ी
दोनों पक्षों में विवाह पक्का होने की रस्म।
बदला विवाह
पूर्व में प्रचलित प्रथा, जिसमें दोनों परिवारों के बीच बहनों का आदान-प्रदान होता था।
तीन टिकठी विवाह
वर्तमान में प्रचलित प्रथा, जिसमें बहन की जगह किसी भी रिश्तेदार की लड़की से विवाह किया जाता है।

04 विवाह के प्रमुख चरण

01
पक्की पोढ़ी: विवाह की बात पक्की होना।
02
अपना पराया: सगाई की रस्म।
03
बात कट्टी: शादी का दिन तय करना।
04
दिखनौरी प्रथा: विवाह से एक दिन पहले वर पक्ष के लोग लड़की पक्ष के घर जाकर शादी का सामान देते हैं।
05
विवाह: मुख्य रूप से माघ या फाल्गुन (फुलरा दूज) के महीने में होता है।
06
चाला: लड़की विवाह के बाद चैत्र व वैशाख में (2–3 महीने) मायके में रहती है।

05 विधवा विवाह एवं महिला अधिकार

समाज व्यवस्था
यह मातृसत्तात्मक समाज है, जहाँ महिलाओं को पुरुषों से अधिक अधिकार प्राप्त हैं।
तलाक
महिलाओं को तलाक देने का अधिकार है, जिसे ‘उरारी’ कहा जाता है।
विधवा विवाह

इनमें विधवा विवाह का प्रचलन है।

गुदना
महिलाएँ अपने शरीर पर ‘गुदना’ (Tattoo) गुदवाने की शौकीन होती हैं।

06 वेशभूषा व खान-पान

मुख्य भोजन
मछली व चावल
जाड़
चावल से निर्मित मदिरा।
रसोई संबंधी प्रथा
पुरुषों को भोजनालय (रसोई) में जाने का अधिकार नहीं होता है।

07 धर्म एवं देवी-देवता

प्रमुख देवता
खड़गाभूत, पछावन, कोरोदेव, काली, कलुवा और राकत।
भूमिया देवता
प्रत्येक थारू परिवार के घर के सामने इनका निवास स्थान माना जाता है।

विशिष्ट रक्षक देवियाँ

पशुओं की रक्षा हेतुढोर चाँदी देवी (या नगराई देवी)
बीमारियों (चेचक) से रक्षा हेतुशीतला देवी
फसलों की रक्षा हेतुजगमथिया देवी
शिकार (आखेट) में सफलता हेतुवाघेश्वरी देवी
बच्चों की रक्षा हेतुअखरिया देवी

08 त्योहार एवं नृत्य

बजहर
इनका मुख्य त्यौहार है, जो वैशाख व ज्येष्ठ महीनों में मनाया जाता है।
होली
होली को 1 महीने 8 दिन तक मनाते हैं। इसमें ‘उजली होली’ और ‘बैठकी होली’ शामिल हैं। होली के अवसर पर स्त्री-पुरुषों द्वारा ‘खिचड़ी नृत्य’ किया जाता है।
दिवाली
थारू लोग दिवाली को शोक पर्व (Mourning festival) के रूप में मनाते हैं।
झुमड़ा
थारू जनजाति का प्रमुख नृत्य-गीत
लहचारी
थारू जनजाति का प्रमुख नृत्य

09 राजनैतिक एवं न्याय व्यवस्था

पंचायत
थारुओं की पंचायत को ‘बिरादरी’ कहते हैं, जिसका प्रमुख ‘चौधरी’ या ‘महतो’ कहलाता है।
अन्य पंचायत पद
भलेमानस, चौकीदार और बडघर
न्याय प्रणाली
इनमें ‘मध्यपंचगण प्रथा’ प्रचलित है, जिसमें मदिरा की घूंट के साथ न्याय किया जाता है।

अन्य शब्दावली

भरड़ा
थारू समाज में ओझा या तांत्रिक व्यक्ति।
'खाबर' (या खाबड़)
वनों में आखेट (शिकार) करने की पारंपरिक प्रथा।
श्रृंखलाउत्तराखंड की प्रमुख जनजातियाँ
अंतिम संरचनात्मक अपडेट20 अगस्त 2026
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