उत्तराखंड की प्रमुख जनजातियाँ
अनुसूचित जनजाति दर्जे से जुड़े प्रमुख अधिनियम और समितियाँ, पाँच जनजातियों का जनसंख्या क्रम तथा राज्य के ST जनसंख्या-संबंधी प्रमुख तथ्य।
01 अधिनियम और समितियाँ
1950
उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम।
1960
कुमाऊँ व उत्तराखंड जमींदारी उन्मूलन एक्ट (कूजा)।
1965
जनजातियों की पहचान हेतु ‘लोकर समिति’ का गठन।
1967
लोकर समिति की सिफारिश पर उत्तराखंड की 5 जनजातियों को ST (अनुसूचित जनजाति) का दर्जा।
नोट: इनमें से केवल दो जनजातियों — राजी (1975) और बोक्सा (1981) — को ‘आदिम जनजाति’ (Primitive Tribe) का दर्जा प्राप्त है।
02 पाँच प्रमुख जनजातियाँ
जनसंख्या के घटते क्रम में
01थारू
02जौनसारी
03बोक्सा
04भोटिया
05राजी
03 ST जनसंख्या के आँकड़े
कुल ST जनसंख्या2,91,903
राज्य की कुल जनसंख्या में हिस्सा2.9%
↑
सर्वाधिक जनसंख्या वाले जिले
- ऊधम सिंह नगर (U.S.N)
- देहरादून
- पिथौरागढ़
↓
न्यूनतम जनसंख्या वाले जिले
- रुद्रप्रयाग
- टिहरी
प्रतिशत (%) की दृष्टि से भीसबसे कम ST जनसंख्या टिहरी जिले में है।
साक्षरता · सर्वाधिक
राज्य में सर्वाधिक शिक्षित ST आबादी रुद्रप्रयाग में है।
साक्षरता · न्यूनतम
राज्य में न्यूनतम शिक्षित ST आबादी हरिद्वार में है।