उत्तराखंड वन एवं वन्यजीव · लेख 5

उत्तराखंड के प्रमुख पर्यावरणविद्

उत्तराखंड के प्रमुख पर्यावरणविदों के जीवन, आंदोलनों, संस्थागत योगदान, पर्यावरण संरक्षण कार्यों और महत्वपूर्ण पुरस्कारों को व्यक्तित्ववार पढ़ें।

7 अध्ययन खंडलेख 5 / 5UKPSC · UKSSSC

01 डॉ. अनिल प्रकाश जोशी

संस्थागत योगदान

  • HESCO — Himalayan Environmental Studies and Conservation Organisation
  • स्थापना/गठन: 1979
  • पंजीकरण: 1983
  • स्थान: शुक्लापुर, देहरादून।
  • उद्देश्य: स्थानीय संसाधनों एवं विज्ञान-तकनीक के उपयोग से पर्वतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना।

प्रमुख अवधारणाएँ एवं कार्य

  • सकल पर्यावरण उत्पाद (GEP — Gross Environmental Product):
    • डॉ. अनिल प्रकाश जोशी इसके प्रमुख प्रवर्तक हैं।
    • GDP के साथ पर्यावरणीय संसाधनों और पारिस्थितिक सेवाओं के मूल्यांकन की अवधारणा।
    • 5 जून 2021 — उत्तराखंड ने GEP को विकास के मापक के रूप में अपनाने की घोषणा की।
    • 19 जुलाई 2024 — उत्तराखंड ने GEP Index जारी किया और ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना।
  • गाँव बचाओ आन्दोलन:
    • पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चलाया गया।

प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान

  • 2006 — पद्मश्री
  • 2006 — जमनालाल बजाज पुरस्कार — ग्रामीण विकास में विज्ञान एवं तकनीक के अनुप्रयोग हेतु।
  • 2020 — पद्म भूषण

02 सुंदरलाल बहुगुणा

प्रारंभिक जीवन एवं परिचय

  • जन्म: 9 जनवरी 1927, मरोड़ा गाँव, टिहरी गढ़वाल।
  • संस्था: पत्नी विमला बहुगुणा के साथ 1956 में सिल्यारा, टिहरी में पर्वतीय नवजीवन मंडल स्थापित किया।
  • पहचान: गांधीवादी पर्यावरणविद् एवं हिमालयी पर्यावरण संरक्षण के प्रमुख समर्थक।
  • निधन: 21 मई 2021, एम्स ऋषिकेश।

प्रमुख आन्दोलन एवं कार्य

  • चिपको आन्दोलन: प्रमुख प्रचारक एवं वैचारिक नेता; आंदोलन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका।
  • प्रसिद्ध विचार: “Ecology is Permanent Economy” — “पारिस्थितिकी ही स्थायी अर्थव्यवस्था है।”
  • हिमालयी पदयात्रा: 1981–83, कश्मीर से कोहिमा — लगभग 4,800–5,000 किमी
  • टिहरी बाँध विरोध आन्दोलन: प्रमुख नेता।
    • 1991 — गंगासागर से गंगोत्री साइकिल यात्रा। UKPSC PYQ
    • 1992 — 45 दिन का उपवास
    • 1995 — 49 दिन का उपवास
    • 1996 — 74 दिन का उपवास।

प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान

  • 1981 — पद्मश्री: स्वीकार करने से इनकार।
  • 1986 — जमनालाल बजाज पुरस्कार — रचनात्मक सामाजिक कार्य।
  • 2009 — पद्म विभूषण

03 चण्डी प्रसाद भट्ट

जीवन-परिचय

  • जन्म: 23 जून 1934, गोपेश्वर (चमोली)।
  • पहचान: गांधीवादी पर्यावरणविद्, सामाजिक कार्यकर्ता एवं चिपको आन्दोलन के प्रमुख प्रारंभिक नेता।
  • प्रमुख संस्था: दशोली ग्राम स्वराज्य संघ / मण्डल।

संस्थागत योगदान

  • 1964 — गोपेश्वर, चमोली: दशोली ग्राम स्वराज्य संघ (DGSS/DGSM) की स्थापना की।
    • उद्देश्य: स्थानीय लोगों को वन-आधारित रोजगार, ग्रामोद्योग एवं ग्राम स्वावलंबन से जोड़ना।
    • यही संस्था आगे चलकर चिपको आन्दोलन की प्रमुख आधार संस्था बनी।
  • परीक्षा तथ्य: ‘डालियों का डगरिया’ → चण्डी प्रसाद भट्ट ⭐ UKSSSC PYQ

चिपको आन्दोलन में भूमिका

  • मंडल आन्दोलन — 1973
    • पृष्ठभूमि · 24 अप्रैल 1973: मंडल गाँव, चमोली में स्थानीय DGSS को कृषि उपकरणों हेतु 10 अंगू (Ash) वृक्ष नहीं दिए गए, जबकि इलाहाबाद की Symonds Sports Goods Company को 300 अंगू वृक्षों के व्यावसायिक कटान की अनुमति दी गई।
    • रणनीति: चण्डी प्रसाद भट्ट ने ग्रामीणों को संगठित कर पेड़ों से चिपकने की अहिंसक रणनीति से वृक्ष कटान का विरोध किया।
  • आन्दोलन–नेता मिलान:
    • मंडल, 14 अप्रैल 1973 → चण्डी प्रसाद भट्ट
    • रेणी, 26 मार्च 1974 → गौरा देवी

प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान

  • 1982 — रेमन मैग्सेसे पुरस्कार
    • श्रेणी: Community Leadership।
    • वर्तमान उत्तराखण्ड क्षेत्र से यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम व्यक्ति। ⭐ UKSSSC PYQ
  • 1986 — पद्मश्री
  • 2005 — पद्म भूषण
  • 2013 — गांधी शांति पुरस्कार
    • पुरस्कार वर्ष 2013; प्रदान 2014 में किया गया।

प्रमुख रचनाएँ (पुस्तकें)

  • पर्वत-पर्वत, बस्ती-बस्ती
  • चिपको के अनुभव
  • हिमालय में बड़ी परियोजनाओं का भविष्य
  • मध्य हिमालय का पारिस्थितिकी तंत्र

04 विश्वेश्वर दत्त सकलानी

जीवन-परिचय

  • जन्म: 2 जून 1922, सकलाना क्षेत्र (टिहरी गढ़वाल)।
  • उपनाम: ‘वृक्ष मानव’ / Tree Man of Uttarakhand।
  • निधन: 18 जनवरी 2019।

प्रमुख पर्यावरणीय योगदान

  • जीवनकाल में 50 लाख से अधिक वृक्ष लगाने के लिए प्रसिद्ध।
  • अपने बड़े भाई नागेन्द्र दत्त सकलानी की स्मृति में विकसित वन को ‘नागेन्द्र दत्त सकलानी वन’ नाम दिया।
  • उत्तराखण्ड का ‘वृक्ष मानव’ → विश्वेश्वर दत्त सकलानी। ⭐ UKSSSC PYQ

प्रमुख सम्मान

  • 1986 — इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र पुरस्कार

05 बसंती देवी

जीवन-परिचय

  • जन्म: 1958, पिथौरागढ़।
  • संस्था: लक्ष्मी आश्रम, कौसानी।
  • मुख्य कार्यक्षेत्र: कोसी नदी संरक्षण।

प्रमुख पर्यावरणीय योगदान

  • 2003 से कोसी नदी के गिरते जलस्तर और वन कटान के विरुद्ध सक्रिय अभियान चलाया।
  • स्थानीय महिलाओं को संगठित कर हरे वृक्षों की कटाई रोकने और जंगल संरक्षण का कार्य किया।
  • वन संरक्षण को कोसी नदी एवं उसके जलस्रोतों के पुनर्जीवन से जोड़ा।
  • महिला समूहों को वृक्षारोपण, वन संरक्षण और जंगल की आग रोकने के लिए संगठित किया।

प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान

  • नारी शक्ति पुरस्कार 2015 — प्रदान: 8 मार्च 2016।
  • 2022 — पद्मश्री — क्षेत्र: Social Work।

06 राधा भट्ट / राधा बहन

जीवन-परिचय

  • जन्म: 16 अक्टूबर 1933।
  • पहचान: गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरणविद् एवं महिला सशक्तिकरण कार्यकर्ता।
  • संस्था: लक्ष्मी आश्रम, कौसानी।

प्रारंभिक एवं संस्थागत योगदान

  • 1951 — लक्ष्मी आश्रम, कौसानी से जुड़ीं; सरला बहन से प्रभावित।
  • 1957–61 — सर्वोदय एवं भूदान आन्दोलन में सक्रिय भागीदारी।
  • 1966 से — शराबबंदी आन्दोलन में कुमाऊँ क्षेत्र की महिलाओं को संगठित किया।
  • 2006 — Gandhi Peace Foundation की प्रथम महिला Chairperson बनीं।

प्रमुख पर्यावरणीय आन्दोलन

  • 1975 से — चिपको आन्दोलन में सक्रिय भागीदारी।
  • खीराकोट खनन-विरोधी आन्दोलन:
    • क्षेत्र: खीराकोट, कुमाऊँ।
    • कारण: खड़िया / Soapstone खनन से जंगल, चरागाह एवं कृषि भूमि को नुकसान।
    • स्थानीय महिलाओं के आन्दोलन का नेतृत्व किया।
    • UKPSC PYQ: खीराकोट की महिलाओं के खनन-विरोधी आन्दोलन का नेतृत्व → राधा बहन एवं मालती देवी
  • टिहरी बाँध विरोध आन्दोलन में सक्रिय भूमिका।
  • 2008 — नदी बचाओ आन्दोलन से जुड़ीं; हिमालयी नदियों एवं जलस्रोतों के संरक्षण पर जोर।

प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान

  • 1991 — जमनालाल बजाज पुरस्कार
  • 1994 — इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार
  • 2025 — पद्मश्री

07 कल्याण सिंह रावत

जीवन-परिचय

  • जन्म: 19 अक्टूबर 1953, बैनोली गाँव, कर्णप्रयाग (चमोली)।
  • पहचान: पर्यावरणविद्, शिक्षक एवं मैती आन्दोलन के प्रणेता

संस्थागत योगदान

  • 1976 — गोपेश्वर, चमोली: हिमालय वन्य जीव संस्थान की स्थापना की।
  • उद्देश्य: हिमालयी वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण।

मैती आन्दोलन

  • 1995 — ग्वालदम, चमोली से मैती आन्दोलन प्रारम्भ किया। ⭐ UKSSSC/UKPSC PYQ
  • ‘मैती’ = मायका / विवाहित महिला का पैतृक घर।
  • विवाह के अवसर पर वर-वधू द्वारा पौधा लगाने की परम्परा शुरू की।
  • लगाए गए पौधे की देखभाल गाँव की ‘मैती बहनों/दीदियों’ द्वारा की जाती है।
  • उद्देश्य: वृक्षारोपण को सामाजिक परम्पराओं से जोड़कर पर्यावरण संरक्षण बढ़ाना।

अन्य प्रमुख कार्य

  • शौर्य वन: कारगिल शहीदों की स्मृति में विकसित वृक्षारोपण क्षेत्र।
  • विभिन्न सामाजिक एवं स्मृति अवसरों को भी वृक्षारोपण से जोड़ा।

प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान

  • 2020 — पद्मश्री
श्रृंखलाउत्तराखंड वन एवं वन्यजीव
अंतिम संरचनात्मक अपडेट16 अगस्त 2026
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