लेखक: Deepak Singh Jethi · अंतिम समीक्षा:
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UKPSC / UKSSSC स्पेशल
1915 – 1946
परीक्षा उपयोगी मास्टर-नोट्स
महात्मा गांधी की उत्तराखंड यात्राएं
6कुल यात्राएं
1915–46कालखंड
1929सर्वाधिक महत्वपूर्ण
कौसानी'भारत का स्विट्जरलैंड'
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चरण 1 · 1915 – 1916
प्रारंभिक यात्राएं — हरिद्वार व देहरादून
1प्रथम एवं द्वितीय यात्रा
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5 अप्रैल 1915 · हरिद्वार कुंभ मेला
प्रथम यात्रा
दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद हरिद्वार आगमन। उद्देश्य: गोपाल कृष्ण गोखले की 'सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी' के स्वयंसेवक के रूप में तीर्थयात्रियों की सेवा। पैदल ऋषिकेश गए — 'स्वर्ग आश्रम' व अन्य अखाड़ों का भ्रमण किया।
- दो प्रतिज्ञाएं: कुंभ में पाखंड और गंदगी देखकर — (1) 24 घंटे में केवल 5 खाद्य पदार्थ, (2) सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं। (वर्णन: आत्मकथा 'सत्य के प्रयोग' में)
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'महात्मा' उपाधि सर्वप्रथम कब मिली?
गुरुकुल कांगड़ी में स्वामी श्रद्धानंद (महात्मा मुंशीराम) ने गांधी जी की सेवा-भावना से प्रभावित होकर उन्हें सबसे पहले 'महात्मा' की उपाधि दी।
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1916 · देहरादून व हरिद्वार
द्वितीय यात्रा
देहरादून और हरिद्वार की यात्रा। हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी में स्वामी श्रद्धानंद से पुनः भेंट कर छात्रों को संबोधित किया।
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चरण 2 · 1929
कुमाऊँ व गढ़वाल की ऐतिहासिक यात्राएं
2ऐतिहासिक कुमाऊँ यात्रा (सर्वाधिक महत्वपूर्ण)
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14 जून – 2 जुलाई 1929
⭐ कुमाऊँ यात्रा — साथी: कस्तूरबा गांधी, देवदास गांधी, मीराबहन, प्यारेलाल, जमनालाल बजाज
- नैनीताल व भवाली (14–15 जून): जी.बी. पंत द्वारा स्वागत। भवाली में जनसभा; ताकुला में प्रवास।
- अल्मोड़ा (18 जून): विभिन्न समुदायों को संबोधन; कुमाऊँ परिषद के नेताओं ने बेगार समाप्ति और वन समस्याओं की जानकारी दी।
- ताड़ीखेत (20 जून): 'प्रेम विद्यालय' में प्रवास। (स्थापना: 1921 में देवकीनंदन पांडे और भगीरथ पांडे द्वारा, उद्देश्य: राष्ट्रीय शिक्षा व खादी)
- बागेश्वर (22 जून): 'स्वराज भवन' का ऐतिहासिक शिलान्यास — निर्माता: विक्टर मोहन जोशी ('देशभक्त')।
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विक्टर मोहन जोशी के बारे में गांधी जी का कथन
गांधी जी ने उन्हें "ईसाई धर्म का उत्कृष्ट बंदा" कहकर संबोधित किया।
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कौसानी प्रवास (24 जून – 2 जुलाई)
चाय बागान के डाक बंगले में — अब 'अनासक्ति आश्रम'। यहाँ रहकर गांधी जी ने श्रीमद्भगवद्गीता पर प्रसिद्ध टीका 'अनासक्ति योग' की प्रस्तावना लिखी। अपने 'यंग इंडिया' पत्र में कौसानी को "भारत का स्विट्जरलैंड" की उपाधि दी।
3गढ़वाल यात्रा
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16 – 24 अक्टूबर 1929
गढ़वाल यात्रा
उद्देश्य: खादी प्रचार, छुआछूत निवारण व जनसमर्थन।
- देहरादून: विशाल जनसभा; 'कन्या गुरुकुल' का भ्रमण कर बालिकाओं को शिक्षा और चरखा चलाने के लिए प्रेरित किया।
- मसूरी: यूरोपीय समुदाय व स्थानीय जनता को संबोधित कर स्वराज फंड जुटाया।
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चरण 3 · 1931 – 1946
राजनीतिक कूटनीति व अंतिम यात्रा
4नैनीताल यात्रा — राजनीतिक कूटनीति
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18 – 22 मई 1931
नैनीताल यात्रा
उद्देश्य: 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' के दौरान राजनीतिक कूटनीति।
- ऐतिहासिक भेंट: संयुक्त प्रांत के तत्कालीन अंग्रेज गवर्नर सर मैल्कम हेली (Sir Malcolm Hailey) से मुलाकात — (यह बैठक जी.बी. पंत के प्रयासों से तय हुई थी)
- चर्चा के बिंदु: गांधी-इरविन समझौता लागू करना, वन अधिकारों की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई।
5अंतिम यात्रा — मसूरी (बिड़ला हाउस)
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मई – जून 1946
अंतिम यात्रा
उद्देश्य: स्वास्थ्य लाभ व शांति। निवास: मसूरी के 'बिड़ला हाउस' में ठहरे।
- खराब स्वास्थ्य के बावजूद गांधी जी ने हर शाम प्रार्थना सभाएं आयोजित कीं — स्थानीय नेता व जनता मार्गदर्शन के लिए आते थे।
⟂शीघ्र स्मरण — सभी यात्राएं एक नज़र में
| # | वर्ष | स्थान | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|---|
| 1 | 1915 | हरिद्वार | कुंभ सेवा; 'महात्मा' उपाधि मिली |
| 2 | 1916 | देहरादून/हरिद्वार | गुरुकुल कांगड़ी पुनः भेंट |
| 3 | 1929 (जून–जुलाई) | कुमाऊँ (नैनीताल→कौसानी) | 'अनासक्ति योग' लेखन; कौसानी = 'भारत का स्विट्जरलैंड' |
| 4 | 1929 (अक्टूबर) | गढ़वाल (देहरादून/मसूरी) | खादी प्रचार व छुआछूत निवारण |
| 5 | 1931 | नैनीताल | गवर्नर हेली से राजनीतिक भेंट |
| 6 | 1946 | मसूरी (बिड़ला हाउस) | अंतिम यात्रा — स्वास्थ्य लाभ |