UKPSC / UKSSSC स्पेशल1905 – 1922तिलक की प्रेरणा से राष्ट्रीय विभाजन तक · संपूर्ण इतिहास
उत्तराखंड में होमरूल लीग की स्थापना
स्थापना — 1914, अल्मोड़ा (राष्ट्रीय लीग से 2 वर्ष पूर्व)राष्ट्रीय विभाजन — 1916 (तिलक बनाम बेसेंट)
1914स्थापना — अल्मोड़ा
4संस्थापक सदस्य
4पांडे जी की तिलक से मुलाकातें
1918देहरादून शाखा
1916राष्ट्रीय विभाजन (अप्रैल/सितं.)
1पृष्ठभूमि व स्थापना — अल्मोड़ा, 1914
1914अल्मोड़ाकुमाऊँ में होमरूल लीग की स्थापना — राष्ट्रीय लीग से 2 वर्ष पूर्व
राष्ट्रीय स्तर पर होमरूल आंदोलन 1916 में शुरू हुआ, परन्तु उत्तराखंड (कुमाऊँ) में यह उससे पूरे दो वर्ष पहले, 1914 में ही प्रारम्भ हो गया था।
पूर्व-स्थापना के कारण
कुमाऊँ में 1914 से ही 'कुली बेगार' प्रथा एवं कठोर वन कानूनों (Forest Laws) के विरुद्ध जनता में भारी आक्रोश था; स्थानीय नेताओं को जनता को संगठित करने हेतु एक मंच चाहिए था।
इसी समय एनी बेसेंट के समाचार पत्रों — 'New India' और 'Commonweal' — में स्वशासन (Home Rule) के विचार पढ़कर कुमाऊं के नेता प्रेरित हुए।
अखिल भारतीय लीग के बनने का इंतज़ार किए बिना ही कुमाऊं के नेताओं ने 1914 में अल्मोड़ा में स्वतंत्र रूप से होमरूल लीग स्थापित कर दी।
संस्थापक सदस्य
बद्री दत्त पांडेविक्टर मोहन जोशीचिरंजीलालहेमचंद्र
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परीक्षा ट्रैप: अल्मोड़ा होमरूल लीग को 'राष्ट्रीय लीग की शाखा' न समझें — यह एक स्वतंत्र, स्वप्रेरित स्थापना थी जो अखिल भारतीय लीगों (1916) से 2 वर्ष पहले बनी।
2बद्री दत्त पांडे का कथन व तिलक से वैचारिक निष्ठा
वैचारिक मतभेद'गरम दल' की निष्ठा — एनी बेसेंट के तरीकों का विरोध
बद्री दत्त पांडे जी पूर्ण रूप से 'गरम दल' के नेता थे और बाल गंगाधर तिलक को अपना आदर्श मानते थे। वे कुमाऊँ में एनी बेसेंट (जो नरमपंथी एवं थियोसोफिकल विचारधारा की थीं) के तरीकों को लागू नहीं करना चाहते थे।
"हमने छली बुढ़िया बसंती वाली नहीं, तिलक वाली लीग खोली है।"
बद्री दत्त पांडे — एनी बेसेंट का विरोध करते हुए ('बसंती' शब्द एनी बेसेंट हेतु प्रयुक्त)
तिलक से प्रामाणिक मुलाकातें4 बार व्यक्तिगत भेंट — स्वराज का मंत्र
पांडे जी ने तिलक से व्यक्तिगत रूप से चार बार मुलाकात की और उन्हीं से स्वराज का मंत्र लिया।
कुमाऊँ के बाद गढ़वाल क्षेत्र में राष्ट्रीय चेतना जगाने हेतु 1918 में स्वामी विचारानंद सरस्वती द्वारा देहरादून में होमरूल लीग की एक शाखा स्थापित की गई।
1922देहरादून'अभय' समाचार पत्र का प्रकाशन
जनता के बीच होमरूल व स्वतंत्रता के विचारों को मजबूती से फैलाने हेतु 1922 में स्वामी विचारानंद सरस्वती ने देहरादून से ही 'अभय' नामक समाचार पत्र (पत्रिका) का प्रकाशन शुरू किया।
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याद रखें: एक ही व्यक्ति — स्वामी विचारानंद सरस्वती — देहरादून शाखा (1918) व 'अभय' पत्र (1922), दोनों से जुड़े हैं; बीच में 4 वर्ष का अंतर है।
4राष्ट्रीय स्तर पर होमरूल लीग — दो प्रतिद्वंद्वी लीगें (1916)
अप्रैल 1916बेलगाम (कर्नाटक)बाल गंगाधर तिलक की होमरूल लीग
स्थापना बेलगाम (कर्नाटक) में हुई; मुख्यालय पुणे में था। कार्यक्षेत्र सीमित परन्तु अत्यधिक संगठित था:
महाराष्ट्र (बॉम्बे शहर को छोड़कर)
कर्नाटक
मध्य प्रांत (Central Provinces) और बरार
सितंबर 1916अड्यार (मद्रास)एनी बेसेंट की होमरूल लीग
स्थापना अड्यार (मद्रास) में हुई; मुख्यालय भी मद्रास ही था। कार्यक्षेत्र — भारत का शेष वह पूरा हिस्सा जहाँ तिलक की लीग कार्य नहीं कर रही थी, जिसमें बॉम्बे शहर भी शामिल था।
नेटवर्क बहुत बड़ा था — पूरे भारत में लगभग 200 शाखाएं खोली गई थीं।
जॉर्ज अरुंडेल इसके आयोजन सचिव (Organizing Secretary) थे।
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परीक्षा ट्रैप: दोनों लीगों ने वैचारिक टकराव से बचने हेतु अपना-अपना कार्यक्षेत्र पूरी तरह बांट लिया था — तिलक: महाराष्ट्र (बॉम्बे शहर छोड़कर)+कर्नाटक+मध्य प्रांत+बरार; बेसेंट: शेष पूरा भारत (बॉम्बे शहर सहित)।