मुख्य सामग्री पर जाएँ

लेखक: · अंतिम समीक्षा:

🌾

उत्तराखंड में भूमि बंदोबस्त

चंद व गोरखा पूर्व-व्यवस्था सहित
12कुल बंदोबस्त (1815–1964)
1823अस्सी साला (5वां) — V.V.I.P.
1840/44बैटन — 8वां (गढ़वाल/कुमाऊं)
1863–73बेकेट — 9वां (वैज्ञानिक)
1960–6412वां — स्वतंत्र भारत का पहला

1परिचय व क्रम (Overview)

🌾
भूमि बंदोबस्त क्या है?
भूमि बंदोबस्त (Land Settlement) वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत सरकार किसी क्षेत्र की भूमि का सर्वेक्षण/आकलन करके उस पर देय लगान (राजस्व) तय करती है। उत्तराखंड में यह परंपरा चंद शासकों से शुरू होकर गोरखा व ब्रिटिश काल से गुज़रते हुए स्वतंत्र भारत तक चली — कुल 12 प्रमुख बंदोबस्त ब्रिटिश व स्वतंत्र भारत काल में हुए।
बंदोबस्तों का कालानुक्रमिक सार
क्रमवर्षअवधि-प्रकारअधिकारीमुख्य बात
1–21815–16, 1817एकसाला (1 वर्ष)ट्रेलगोरखाकालीन रिकॉर्ड पर आधारित
3–41818, 1820त्रिसाला (3 वर्ष)ट्रेलपहला स्थायित्व
5–71823 ⭐, 1828, 1833पंचसाला (5 वर्ष)ट्रेल'अस्सी साला' (1823) सर्वाधिक महत्वपूर्ण
81840 (गढ़वाल) / 1844 (कुमाऊं)बीस साला (20 वर्ष)बैटन'वजीब-उल-अर्ज'
91863–73तीस साला (30 वर्ष)बेकेटपहला वैज्ञानिक (प्लेन टेबल) बंदोबस्त
101893 / 1899पॉ (गढ़वाल) / गूज (कुमाऊं)
111928इबटसनकेवल गढ़वाल में; अंतिम ब्रिटिश बंदोबस्त
121960–64स्वतंत्र भारत का पहला व एकमात्र बंदोबस्त (केवल मैदानी/तराई क्षेत्र)

2चंद कालीन भूमि व्यवस्था (Chand Period)

प्रथम नियमित बंदोबस्तकर्ता
रतन चंद — कुमाऊं में पहला नियमित भूमि बंदोबस्त
मापन का आधार
कोई जंजीर/फीता नहीं — 'बीज की मात्रा' (Seed Capacity) पर आधारित मापन
भूमि संबंधित मापतौल — उत्तराखंड की इकाइयाँ
इकाई तुल्यता (समकक्ष) क्षेत्रफल (वर्ग फुट / वर्ग मीटर)
1 मुट्ठी1 मुट्ठी बीज बोने लायक ज़मीन135 वर्ग फुट (लगभग 12.5 वर्ग मीटर)
1 नाली16 मुट्ठी ज़मीन (1 पाथा बीज के बराबर)2,160 वर्ग फुट (200 वर्ग मीटर)
1 बीसी20 नाली ज़मीन (20 पाथा बीज)4,000 वर्ग मीटर
1 बीघा20 बिस्वा (मैदानी क्षेत्रों का मानक)
1 एकड़20.16 नाली (लगभग 1 बीसी)लगभग 4,047 वर्ग मीटर
1 हेक्टेयर50 नाली (आधुनिक राजस्व रिकॉर्ड मानक)10,000 वर्ग मीटर
अनाज संबंधित मापतौल — पारंपरिक इकाइयाँ
इकाई तुल्यता (समकक्ष) ग्राम / किलोग्राम
1 मुट्ठी62.5 ग्राम
1 सेर8 मुट्ठी500 ग्राम
1 कूड़ी1 किलोग्राम
1 पाथा2 किलोग्राम (अजयपाल द्वारा 'धूली पाथा' के रूप में मानकीकृत)
1 डाल16 किलोग्राम
1 दूण (द्रोण)32 किलोग्राम
1 विशत20 किलोग्राम
1 मण40 किलोग्राम
1 खार (खारी)640 किलोग्राम
कृषक वर्ग (Land Rights / Classes)
वर्गस्वरूपअधिकार / दायित्व
थातवान (Thatwan)जमीन का असली मालिकबेचने/दान देने का पूर्ण अधिकार
खायकर (Khaykar)स्थायी काश्तकारराजा को 'कूत' (अनाज) देते थे; बेदखल नहीं किया जा सकता था
सीरतान (Sirtan)अस्थायी काश्तकारकेवल 'सिरती' (नकद कर) देते थे; बेदखल किया जा सकता था
⛓️
'कैनी' वर्ग (Kaini) — सबसे निचला वर्ग
थातवान, खायकर और सीरतान के अलावा भू-व्यवस्था में सबसे निचला वर्ग 'कैनी' (Kaini) का था।
ये थातवानों के खेतों में पुश्तैनी रूप से काम करने वाले कृषि दास या बंधुआ मजदूर होते थे।
इनका जमीन पर कोई अधिकार नहीं होता था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि अगर थातवान अपनी जमीन बेचता था, तो कैनी भी उस जमीन के साथ नए मालिक को हस्तांतरित हो जाते थे।
📋
भूमि का वर्गीकरण
तराई व मुगलों के संपर्क में आने के बाद चंद शासकों ने भूमि को 4 श्रेणियोंअव्वल, दोयम, सोयम, चहार — में दर्ज करना शुरू किया।

3गोरखा कालीन भूमि व्यवस्था (Gorkha Period)

🏔️
कुमाऊं · 1791–92
सूबेदार जोगामल्ल शाह — प्रथम बंदोबस्तकर्ता (कुमाऊं)
⚔️
गढ़वाल · 1812
कमांडर अमर सिंह थापा — प्रथम बंदोबस्तकर्ता (गढ़वाल)
📜
1811–12
काजी बहादुर शाह का ऐतिहासिक बंदोबस्त
  • गढ़वाल का अंतिम गोरखा सूबेदार काजी बहादुर शाह (भंडारी) व सहयोगी दशरथ खत्री — 1812 में अमर सिंह थापा के बंदोबस्त का वास्तविक आधार इन्होंने ही तैयार किया।
  • बाद में ब्रिटिश कमिश्नर ट्रेल (G.W. Traill) ने भी अपने शुरुआती बंदोबस्त में इन्हीं रिकॉर्ड्स को आधार माना।
भूमि की 5 श्रेणियां (उर्वरता आधार पर) — स्रोत: डॉ. शिव प्रसाद डबराल 'चारण'
क्रमश्रेणीविवरण
1अव्वलप्रथम श्रेणी — सबसे उच्च कोटि व उपजाऊ भूमि
2दोयमद्वितीय श्रेणी — मध्यम उपजाऊ भूमि
3सोयमतृतीय श्रेणी — कम उपजाऊ भूमि
4चहारचतुर्थ श्रेणी — बंजर/सबसे खराब गुणवत्ता
5 ⭐सुखवासीआवासीय भूमि (जहाँ बस्तियां/घर बसे हुए थे)
प्रमुख भू-राजस्व व कर (Taxes)
पुगाड़ी — मुख्य भूमि कर; इससे गोरखा सैनिकों को वेतन (तलव) मिलता था मांगा — युद्ध के समय लिया जाने वाला अतिरिक्त कर सलामी — गोरखा अधिकारियों को दिया जाने वाला अनिवार्य नज़राना
⚠️
Exam Trap
यदि विकल्पों में केवल 4 श्रेणियां (अव्वल, दोयम, सोयम, चहार) हों तो वह चंद/मुगल प्रभाव है। यदि 5वीं श्रेणी 'सुखनासी/सुखवासी' भी विकल्प में है, तो वह शत-प्रतिशत गोरखा व्यवस्था (काजी बहादुर शाह) का तथ्य है।

4ट्रेल के 7 बंदोबस्त (1815–1833)

1
प्रथम बंदोबस्त · 1815–16 (एकसाला)
कुमाऊं (1815) व गढ़वाल (1816)
  • कुमाऊं में नाम कमिश्नर एडवर्ड गार्डनर से जारी हुआ, पर व्यावहारिक काम सहायक जी.डब्ल्यू. ट्रेल ने किया।
  • गढ़वाल का बंदोबस्त (1816) पूर्णतः ट्रेल द्वारा (गार्डनर तब नेपाल जा चुके थे)।
  • कोई नई नाप-जोख नहीं — केवल गोरखाकालीन राजस्व अभिलेखों को आधार माना गया।
2
द्वितीय बंदोबस्त · 1817 (एकसाला)
संपूर्ण कुमाऊं + गढ़वाल — पहली बार एक साथ
  • कमिश्नर ट्रेल द्वारा; पहली बार दोनों मंडलों में एक साथ बंदोबस्त लागू हुआ; कोई नई मापन तकनीक नहीं।
3
तृतीय बंदोबस्त · 1818 (त्रिसाला — पहला)
राज्य का पहला 3-वर्षीय बंदोबस्त
  • लगातार दो एकसाला बंदोबस्तों की कठिनाई के बाद अवधि 3 वर्ष की गई — किसानों को पहली बार स्थायित्व का भरोसा मिला।
4
चतुर्थ बंदोबस्त · 1820 (त्रिसाला — दूसरा)
1818 की व्यवस्थाओं की निरंतरता
  • कोई बड़ा बदलाव नहीं; ट्रेल का क्षेत्र में सघन दौरा — गाँव की सीमाओं व किसानों की क्षमता का गहरा ज्ञान, जिसने 5वें बंदोबस्त की आधारशिला रखी।
5⭐
पंचम बंदोबस्त · 1823 — 'अस्सी साला बंदोबस्त'
राज्य का प्रथम 5-वर्षीय बंदोबस्त — सर्वाधिक महत्वपूर्ण (विस्तार आगे टैब में)
6
छठा बंदोबस्त · 1828 (पंचसाला — दूसरा)
1823 की सफल व्यवस्था की निरंतरता
  • 1823 के नियम इतने सटीक थे कि दरों/सीमाओं में कोई फेरबदल नहीं हुआ; 1819 में शुरू पटवारी व्यवस्था को और मजबूत किया गया।
7
सातवां बंदोबस्त · 1833 (पंचसाला — तीसरा, ट्रेल का अंतिम)
'पंचसाला' परंपरा की निरंतरता
  • ट्रेल के कार्यकाल का अंतिम भूमि बंदोबस्त (1835 में ट्रेल रिटायर हुए)।
  • राजस्व वसूली की जिम्मेदारी गाँव के प्रधान व परगना स्तर पर थोकदार/स्याणा के पास ही रही।

5'अस्सी साला बंदोबस्त' (1823) — गहराई से

राज्य के प्रशासनिक इतिहास का सबसे सफल व मील का पत्थर बंदोबस्त
कमिश्नर जी.डब्ल्यू. ट्रेल
नाम का कारण
सन् 1823 में विक्रम संवत 1880 चल रहा था (1823+57=1880)। पहाड़ों में संवत का प्रचलन होने से इसे संवत 80 के आधार पर 'अस्सी साला' कहा गया।
अवधि
राज्य का प्रथम पंचसाला (5-वर्षीय) बंदोबस्त
मुख्य विशेषताएं
🗺️
गाँवों की सीमाओं का प्रथम निर्धारण
  • पहली बार प्रत्येक गाँव की सीमा तय हुई; सीमा-चिह्न के रूप में पत्थर गाड़े गए — स्थानीय भाषा में 'चैक-चलाख'/'सनातनी सीमा'। इससे गाँवों के बीच जमीनी/चरागाह विवाद काफी कम हुए।
📒
मुंतखब (Muntakhab) / गाँव का रजिस्टर
  • हर गाँव की जमीन, पैदावार व लगान का लिखित विवरण ('बही'/'मुंतखब') तैयार हुआ
🚫
बिना वैज्ञानिक उपकरणों के सफलता
  • इतनी बड़ी व्यवस्था में भी कोई जंजीर/प्लेन टेबल नहीं — पूर्णतः ट्रेल के व्यक्तिगत अनुमान, जन-सहमति व 'बीसों' (बीज क्षमता) प्रणाली पर आधारित।
📜
26 परगने व पटवारी संख्या में क्रमिक वृद्धि
  • सुदृढ़ स्थायी बंदोबस्त स्थापित करने हेतु ट्रेल ने सन् 1823 में कुमाऊं को 26 परगनों में बांट दिया।
  • प्रारंभ में 1819 में समस्त कुमाऊं के लिए केवल 9 पटवारी नियुक्त किए गए थे।
  • 26 परगनों के लिए 9 पटवारी पर्याप्त नहीं थे, इसलिए 1825 में संख्या बढ़ाकर 17 कर दी गई।
  • 5 वर्षों में ही पटवारियों की जिम्मेदारी व कार्य-भार अत्यधिक बढ़ गया, जिससे संख्या में पुनः वृद्धि की गई और 1830 तक यह बढ़कर 63 हो गई।

68वां भूमि बंदोबस्त — 'बैटन का बंदोबस्त'

🏆
ऐतिहासिक महत्व
ब्रिटिश उत्तराखंड के प्रशासनिक इतिहास का 'स्वर्ण युग' — राजस्व प्रणाली को कहीं अधिक मानवीय, पारदर्शी व किसान-अनुकूल बनाया।
वर्ष
गढ़वाल — 1840; कुमाऊं — 1844
अधिकारी
जे.एच. बैटन (तब केवल बंदोबस्त अधिकारी — कमिश्नर तब जी.टी. लुशिंगटन थे; बैटन 1848 में कमिश्नर बने)
अवधि
20 वर्ष — 'बीस साला बंदोबस्त'
गहराई वाले महत्वपूर्ण तथ्य
📏
खसरा सर्वेक्षण
  • इस बंदोबस्त में खसरा सर्वेक्षण प्रमुख विशेषता थी।
🌱
भूमि की गुणवत्ता को महत्व
  • ट्रेल के समय लगान 'बीजों की मात्रा' (बिसी) पर तय होता था। बैटन ने पहली बार भूमि की उत्पादकता व किस्म को गंभीरता से लिया।
📜
'वजीब-उल-अर्ज' (Wajib-ul-Arz)
  • गाँव के अधिकारों का लिखित 'स्वघोषणा पत्र' (Record of Rights), जिसमें सीमाएं तथा जल/जंगल/चरागाह/जमीन अधिकार स्पष्ट दर्ज थे।
तुलनात्मक विश्लेषण: ट्रेल बनाम बैटन
विशेषताट्रेल के बंदोबस्त (1–7)बैटन का 8वां बंदोबस्त
मुख्य उद्देश्यत्वरित व अधिकतम राजस्व वसूलीराजस्व प्रशासन में स्थिरता व सुधार
अवधिअल्पकालिक (1/3/5 वर्ष)दीर्घकालिक (20 वर्ष)
प्राथमिक अभिलेख'मुंतखब''वजीब-उल-अर्ज'
राजस्व का आधारगोरखाकालीन रिकॉर्ड + बीजों का अनुमानभूमि की किस्म व वास्तविक उत्पादकता
⚠️
UKSSSC/UKPSC Exam Traps
"बंदोबस्त किसने किया?" → बैटन (वे तब केवल Settlement Officer थे, कमिश्नर नहीं)।
वर्ष भ्रम: प्रश्न में 'गढ़वाल' हो तो 1840, 'कुमाऊं' हो तो 1844
बैटन को उनके मानवीय सुधारों के कारण "कुमाऊं का दूसरा संस्थापक" भी कहा जाता है।

79वां भूमि बंदोबस्त — 'बेकेट का बंदोबस्त'

📐
ऐतिहासिक महत्व
ब्रिटिश उत्तराखंड का पहला वैज्ञानिक भूमि बंदोबस्त (First Scientific Land Settlement)।
तत्कालीन कमिश्नर
सर हेनरी रैमजे (1856–1884 — 'कुमाऊं का बेताज बादशाह')
बंदोबस्त अधिकारी
जी.ई. बेकेट; गढ़वाल में सहायक — जे.ओ.बी. इबटसन
समय / लागू अवधि
प्रक्रिया: 1863–1873 (10 वर्ष); लागू: 30 वर्ष — 'तीस साला बंदोबस्त'
क्रांतिकारी व तकनीकी विशेषताएं
पहली बार 'प्लेन टेबल' सर्वे — सटीक नक्शा तैयार बीजों के अनुमान के बजाय सिंचाई-सुविधा व मिट्टी की गुणवत्ता पर आधार
भूमि का वैज्ञानिक वर्गीकरण (5 श्रेणियां)
श्रेणीभूमि की विशेषता
1. तलाव (Talaon)घाटी के निचले हिस्से की सर्वोत्तम सिंचित भूमि (सर्वाधिक उपजाऊ)
2. उपरांव अव्वलपहाड़ी ढलानों पर असिंचित भूमि — मिट्टी 'अव्वल' (प्रथम दर्जे) की
3. उपरांव दोयमपहाड़ी ढलानों पर असिंचित भूमि — मिट्टी 'दोयम' (दूसरे दर्जे) की
4. इजरान (Ijjran)खराब, कंटीली/झाड़ीदार भूमि — 3–4 साल में एक बार खेती
5. कटील (Katil)जंगल काटकर/खड़ी ढलान पर तैयार कच्ची/नई भूमि
⚠️
Exam Traps
"9वां बंदोबस्त किसने किया?" → बेकेट। "किस कमिश्नर के काल में हुआ?" → हेनरी रैमजे
'तलाव' = सिंचित भूमि; 'उपरांव' = असिंचित (सूखी) भूमि।
अवधियों का क्रम: अस्सी साला (ट्रेल — 5वां) → बीस साला (बैटन — 8वां) → तीस साला (बेकेट — 9वां)।

810वां व 11वां भूमि बंदोबस्त

10वां बंदोबस्त — अलग-अलग वर्ष व अधिकारी
क्षेत्रवर्षअधिकारीविशेष तथ्य
गढ़वाल1893ई.के. पॉ (E.K. Pauw)विस्तृत रिपोर्ट — 'Report on the Tenth Settlement of Garhwal District' तैयार की, जो आज भी प्रामाणिक स्रोत है
कुमाऊं1899जे.ई. गूज (J.E. Goudge)9वें (बेकेट) बंदोबस्त के वैज्ञानिक आधार (प्लेन टेबल) पर ही निर्भर; नई कृषि-योग्य भूमि को कर के दायरे में लाया गया
⚠️
Exam Trap
विकल्पों में 'पॉ' व 'गूज' दोनों हों तो प्रश्न में 'गढ़वाल' या 'कुमाऊं' शब्द ज़रूर खोजें — गढ़वाल = पॉ, कुमाऊं = गूज
11वां बंदोबस्त — इबटसन का बंदोबस्त (अंतिम ब्रिटिश बंदोबस्त)
वर्ष / अधिकारी
1928 — इबटसन (Ibbotson)
क्षेत्र
केवल गढ़वाल में — उत्तराखंड का 11वां व अंतिम ब्रिटिश भूमि बंदोबस्त
🔥
सबसे बड़ा कैच — कुमाऊं में 11वां बंदोबस्त क्यों नहीं हुआ?
1920 के दशक में कुमाऊं में भयंकर राजनीतिक जन-जागरण हो चुका था (1921 में कुली बेगार का अंत व उसके बाद उग्र वन आंदोलन)। भारी विरोध-अशांति के भय से अंग्रेजों ने कुमाऊं में यह बंदोबस्त करवाने की हिम्मत नहीं की।

912वां भूमि बंदोबस्त — स्वतंत्र भारत का पहला बंदोबस्त

वर्ष
1960 से 1964 ई. के बीच (उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा — उत्तराखंड तब यूपी का हिस्सा था)
विशेषता
आजादी के बाद का पहला व एकमात्र भूमि बंदोबस्त — 1964 के बाद आज तक कोई नया बंदोबस्त नहीं हुआ
🗺️
क्या यह पूरे उत्तराखंड में हुआ था?
नहीं। पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक कठिनाइयों व पुरानी व्यवस्थाओं के कारण यह केवल कुछ हिस्सों — मुख्यतः मैदानी व तराई क्षेत्रों — तक ही सीमित रहा।
📜
1975 — आगे का कदम
उत्तर प्रदेश सरकार ने 'जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम' को पर्वतीय क्षेत्रों में लागू करके भूमि सुधार का प्रयास किया, परंतु यह कोई नया बंदोबस्त नहीं था।

परीक्षा के लिए Quick Recap — सभी 12 बंदोबस्त

क्रमवर्षअधिकारीअवधि / नाममुख्य तथ्य
11815–16ट्रेल (नाम: गार्डनर)1 वर्षगोरखाकालीन रिकॉर्ड आधारित
21817ट्रेल1 वर्षकुमाऊं+गढ़वाल एक साथ — पहली बार
31818ट्रेल3 वर्षराज्य का पहला त्रिसाला बंदोबस्त
41820ट्रेल3 वर्षदूसरा त्रिसाला
5 ⭐1823ट्रेल5 वर्ष — 'अस्सी साला'सीमा-निर्धारण, मुंतखब रजिस्टर
61828ट्रेल5 वर्ष1823 की व्यवस्था की निरंतरता
71833ट्रेल (अंतिम)5 वर्ष'पंचसाला' परंपरा पूर्ण स्थायी
81840 (गढ़वाल) / 1844 (कुमाऊं)बैटन20 वर्ष — 'बीस साला'वजीब-उल-अर्ज; भूमि-गुणवत्ता आधारित
91863–73बेकेट30 वर्ष — 'तीस साला'प्रथम वैज्ञानिक (प्लेन टेबल) बंदोबस्त
101893 (गढ़वाल) / 1899 (कुमाऊं)पॉ / गूजगढ़वाल=पॉ, कुमाऊं=गूज
111928इबटसनकेवल गढ़वाल; अंतिम ब्रिटिश बंदोबस्त
121960–64उ.प्र. सरकारस्वतंत्र भारत का पहला व एकमात्र; केवल मैदानी/तराई क्षेत्र