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लेखक: · अंतिम समीक्षा:

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UKPSC / UKSSSC स्पेशल 9 अग. – 5 सितं. 1942 अल्मोड़ा छात्र हड़ताल से सल्ट कांड तक

भारत छोड़ो आंदोलन — उत्तराखंड

1942भारत छोड़ो वर्ष
9 अग.छात्र हड़ताल (अल्मोड़ा)
4प्रमुख कांड (18अग.–5सितं.)
499अल्मोड़ा जेल — क्रांतिवीर बंदी

1ऐतिहासिक पृष्ठभूमि — चिंगारी

  • ऑपरेशन जीरो आवर: 8 अगस्त 1942 को बंबई में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित होने के अगले ही दिन ब्रिटिश प्रशासन ने प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया, जिससे देशभर में जनाक्रोश भड़क उठा।
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अल्मोड़ा जेल — क्रांति का केंद्र
अगस्त 1942 में यहाँ कुल 499 क्रांतिवीर बंदी थे — इसी जेल से ब्रिटिश हुकूमत उखाड़ फेंकने की गुप्त रणनीतियां बनती थीं।

2घटनाक्रम — चार प्रमुख कांड (18 अग. – 5 सितं.)

18 अग.
देघाट कांड
25 अग.
सालम कांड
2 सितं.
चनौदा सील
5 सितं.
सल्ट कांड
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9 अगस्त 1942
आंदोलन का शंखनाद — अल्मोड़ा
बद्रीदत्त पांडे (कुमाऊं केसरी) ने उत्तराखंड में 'भारत छोड़ो आंदोलन' की औपचारिक शुरुआत की।
📍 स्थान: नंदा देवी मंदिर परिसर, अल्मोड़ा
इसी दिन अल्मोड़ा इंटर कॉलेज के बाहर छात्रों की 'हड़ताल' — कुमाऊं में ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध पहला संगठित छात्र विद्रोह
🪨 एक्टन पर पथराव: नंदा देवी मंदिर सभा में छात्रों ने कुमाऊं कमिश्नर टी.सी. एक्टन पर पथराव कर उसे घायल किया — ब्रिटिश शासन ने इसे बड़ा अपमान माना।
💰 सामूहिक जुर्माना: प्रतिशोध में एक्टन ने अल्मोड़ा पर ₹6,000 का जुर्माना लगाया।
🔥 जनता का जवाब: नगरवासियों ने जुर्माना भुगतान से इनकार कर कचहरी के बाहर नोटिस ही जला दिया — ब्रिटिश दमन का मुँहतोड़ उत्तर।
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प्रथम नज़रबंद — उत्तराखंड (UKSSSC Fact)
उत्तराखंड से नज़रबंद (House Arrest) होने वाले प्रथम व्यक्ति → हरगोविंद पंत ('अल्मोड़ा कांग्रेस की रीढ़')
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18 अगस्त 1942
देघाट गोलीकांड
अल्मोड़ा के छात्र-प्रदर्शनों व पुलिस-दमन के बाद आक्रोश ग्रामीण क्षेत्रों तक फैला। राष्ट्रवादियों के गढ़ देघाट (चौकोट) में लोग 'सामूहिक जुर्माना' नीति का कड़ा विरोध कर रहे थे — 18 अगस्त को जनसमूह विनोद नदी के पास एकत्रित हुआ, जिसे ब्रिटिश प्रशासन ने पुलिस बल से दबाया।
शहीद: हरिकृष्ण उप्रेती, हीरामणि बडोला।
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सुनियोजित दमन
यह स्वतःस्फूर्त नहीं, एक सुनियोजित प्रदर्शन था — ब्रिटिश मजिस्ट्रेट ने 'धारा 144' उल्लंघन के नाम पर इसे कुचलने का आदेश दिया। यहीं से कुमाऊं के ग्रामीण इलाकों में सशस्त्र (पत्थर-लाठी) प्रतिरोध शुरू हुआ।
25 अगस्त 1942
सालम कांड (जनक्रांति)
'करो या मरो' आंदोलन के तहत ब्रिटिश प्रशासन ने सालम के प्रमुख नेताओं — दुर्गादत्त शास्त्री, रेवाधर पांडे, नयन सिंह बिष्ट — को गिरफ्तार/नज़रबंद कर लिया था; इसके विरोध में विशाल जनसभा बुलाई गई।
निहत्थी जनसभा पर गोली चलाने का आदेश डिप्टी कलेक्टर मेहरबान सिंह ने दिया — ब्रिटिश सेना व स्थानीय आंदोलनकारियों के बीच यह टकराव इतिहास में 'पत्थर बनाम गोली' की लड़ाई के रूप में दर्ज है। कुमाऊं में सल्ट के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी घटना मानी जाती है।
शहीद: नर सिंह धानक (चौकुना), टीका सिंह कन्याल (कांडे)।
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'सालम का शेर' — राम सिंह आज़ाद
11 अगस्त 1942 को पुलिस इनके गाँव 'सांगड़' पहुँची — इन्होंने पुलिस को चाय-नाश्ता करवाया और शौच का बहाना बनाकर फरार हो गए, इसी साहस के कारण 'आज़ाद' कहलाए। अंततः बद्रीनाथ में गिरफ्तारी दी — सज़ा: कालापानी (अंडमान); वकील गोपाल स्वरूप पाठक, अपील इंद्र सिंह नयाल।
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'कुमाऊं टाईगर' — मदन मोहन उपाध्याय
पुलिस दो बार पकड़ने के करीब पहुँची, पर ग्रामीणों के सहयोग से वे भूमिगत रहे।
भूमिगत रहने के दौरान अंग्रेजों ने उन्हें जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए ₹10,000 का इनाम घोषित किया था।
बाद में मुंबई जाकर जयप्रकाश नारायण व अरुणा आसफ अली के साथ गुप्त 'कांग्रेस रेडियो' से प्रसारण किया।
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29 अगस्त 1942
श्रीदेव सुमन गिरफ्तार
आंदोलन में सक्रिय भागीदारी पर श्रीदेव सुमन को देवप्रयाग से गिरफ्तार कर टिहरी जेल भेजा गया।
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2 सितंबर 1942
चनौदा गांधी आश्रम सील
1937 में शांतिलाल त्रिवेदी द्वारा स्थापित यह आश्रम मूलतः खादी, स्वदेशी शिक्षा व ग्रामोद्योग हेतु बना था, पर 1942 तक कुमाऊं में राष्ट्रवाद का मुख्य केंद्र बन गया। 2 सितंबर 1942 को ब्रिटिश प्रशासन ने योजनाबद्ध ढंग से आश्रम को घेरकर सील (ताला) कर दिया; त्रिवेदी व सभी प्रमुख कार्यकर्ता गिरफ्तार।
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ब्रेन और लॉजिस्टिक सेंटर
कमिश्नर एक्टन व खुफिया विभाग के अनुसार यह आश्रम 1942 के आंदोलन का "ब्रेन और लॉजिस्टिक सेंटर" था — सूचना, रणनीति व रसद का मुख्य हब। इसे सील करना ठीक 3 दिन बाद होने वाले सल्ट गोलीकांड की भूमिका थी।
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5 सितंबर 1942
सल्ट कांड
तत्कालीन एसडीएम जॉनसन (SDM Johnson) — जो सल्ट को कुमाऊं कांग्रेस का सबसे शक्तिशाली गढ़ मानता था — नेतृत्व कुचलने की पूरी तैयारी से आया और खुमाड़ (Khumad) में अंधाधुंध फायरिंग का आदेश दिया।
शहीद: गंगाराम, खीमदेव, चूड़ामणि, बहादुर सिंह।
"कुमाऊं का बारदोली"
महात्मा गांधी — सल्ट क्षेत्र के अदम्य साहस से प्रभावित होकर
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तिरंगे की रक्षा
गंगाराम व खीमदेव (सगे भाई) ने तिरंगा उतारने के पुलिस-आदेश को मानने से इनकार किया — तिरंगे की रक्षा करते हुए सीने पर गोलियां खाईं और मौके पर ही वीरगति को प्राप्त हुए। चनौदा सील किए जाने के ठीक 3 दिन बाद हुआ यह हमला एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा था।
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1942 — गढ़वाल
गुजड़ू — गढ़वाल का बारदोली
📍 स्थान: गुजड़ू पट्टी, बीरोंखाल ब्लॉक, पौड़ी गढ़वाल
मुख्य कारण: ब्रिटिश सरकार व स्थानीय थोकदारों/पधानों को लगान (Land Tax) देने से पूर्ण इनकार (लगान-बंदी)।
नेतृत्व: रामप्रसाद नौटियाल (प्रणेता) · कैप्टन राम सिंह · नारायण सिंह · केसर सिंह
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रामप्रसाद नौटियाल — उपनाम (UKSSSC Personality Fact)
'कप्तान नौटियाल' · 'शेर-ए-गढ़वाल' · 'गढ़वाल का लौह पुरुष'
1930: संयुक्त प्रांत के गवर्नर मैल्कम हेली को पौड़ी दौरे पर 'काले झंडे' दिखाए — 'गवर्नर गो बैक' के नारे लगाए।
जी.बी. पंत का कथन: "यह वह लोहा है जिससे समय आने पर हथौड़ा भी बनाया जा सकता है और बंदूक भी।"
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मास्टरप्लान — Deep Facts
गुप्त बैठक: 500+ क्रांतिकारियों के साथ 'ढोरीं डबरालस्यूं' में।
मुख्य लक्ष्य: गढ़वाल में ब्रिटिश सत्ता के केंद्र 'लैंसडौन कोर्ट' पर कब्ज़ा।
समानांतर सरकार: ब्रिटिश प्रशासन को पंगु बनाकर जनता की Parallel Government चलाने का ऐतिहासिक प्रयास।

3नेता, उपनाम व जेल — एक साथ

नेताउपनाम / पहचानजेल · स्थानविशेष तथ्य
गोविंद बल्लभ पंतअहमदनगर किला (महाराष्ट्र)9 अगस्त 1942 को बंबई से गिरफ्तार कर सीधे नज़रबंद
जवाहरलाल नेहरूअल्मोड़ा जेलबाहरी दुनिया से पूर्ण रूप से कटे; कमरा आज भी 'नेहरू वार्ड' के रूप में संरक्षित
हरगोविंद पंत'अल्मोड़ा कांग्रेस की रीढ़'अल्मोड़ा जेलअल्मोड़ा से गिरफ्तार होने वाले पहले नेता
बद्री दत्त पांडे'कुमाऊं केसरी'अल्मोड़ा / बरेली जेलकुली-बेगार आंदोलन के नायक; 1942 में सक्रिय भागीदारी पर बंदी
नारायण दत्त तिवारीछात्र-नेतानैनीताल / बरेली जेलपिता पूर्णानंद तिवारी के साथ; छात्र जीवन में ही आंदोलन में सक्रिय
श्रीदेव सुमनदेवप्रयाग / टिहरी जेल29 अगस्त 1942 को गिरफ्तार
मदन मोहन उपाध्याय'कुमाऊं टाइगर'भूमिगत (पकड़े जाने पर कालापानी की सज़ा सुनाई गई)₹10,000 का इनाम; गुप्त 'कांग्रेस रेडियो' से प्रसारण
शांतिलाल त्रिवेदीचनौदा आश्रम संस्थापक (1937)गिरफ्तार — 2 सितंबर 1942आश्रम को ब्रिटिश प्रशासन ने "ब्रेन व लॉजिस्टिक सेंटर" माना

4स्मरण व अभ्यास

🧠 याद रखने की तरकीब (Memory Hook)
"देघाट से सालम, चनौदा से सल्ट" — दे-सा-च-स (18 → 25 अगस्त → 2 → 5 सितंबर)
हर अगली घटना पिछली का बदला/परिणाम है: देघाट (पुलिस दमन) → सालम (रणनीति बदली, मदन मोहन भूमिगत) → चनौदा (रसद-केंद्र सील) → सल्ट (रसद कटी, सबसे बड़ा नरसंहार)। तारीखें लगातार बढ़ती क्रम-संख्या में हैं: 18, 25, 2, 5।
सल्ट को गांधी जी ने क्या उपाधि दी?
"कुमाऊं का बारदोली"
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सालम कांड का सूत्रधार कौन था?
पं. मदन मोहन उपाध्याय
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सल्ट में गोली चलाने का आदेश किसने दिया?
एसडीएम जॉनसन (SDM Johnson)
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चनौदा आश्रम के संस्थापक?
शांतिलाल त्रिवेदी (1937)
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देघाट कांड में कितने शहीद हुए?
2 — हरिकृष्ण उप्रेती, हीरामणि बडोला
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सालम में गोली चलाने का आदेश किसने दिया?
डिप्टी कलेक्टर मेहरबान सिंह
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'सालम का शेर' राम सिंह आज़ाद को यह उपाधि क्यों मिली?
11 अगस्त 1942 को सांगड़ गाँव में पुलिस को चाय पिलाकर शौच का बहाना करके फरार हो गए
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'कुमाऊं टाइगर' किसे कहा गया, और क्यों?
मदन मोहन उपाध्याय — गुप्त 'कांग्रेस रेडियो' से प्रसारण; ₹10,000 इनाम घोषित
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परीक्षा के लिए Quick Recap

तिथिघटनास्थानशहीद / प्रमुख तथ्य
9 अगस्त 1942छात्र हड़तालअल्मोड़ा इंटर कॉलेजकुमाऊं में पहला संगठित छात्र विद्रोह।
18 अगस्त 1942देघाट गोलीकांडचौकोट · विनोद नदीहरिकृष्ण उप्रेती, हीरामणि बडोला शहीद।
25 अगस्त 1942सालम कांडधामद्यो · जैंती · सालम पट्टीनर सिंह धानक (चौकुना), टीका सिंह कन्याल (कांडे) शहीद; आदेश — डि.क. मेहरबान सिंह; 'सालम का शेर' — राम सिंह आज़ाद।
29 अगस्त 1942श्रीदेव सुमन गिरफ्तारदेवप्रयागटिहरी जेल भेजे गये।
2 सितंबर 1942चनौदा आश्रम सीलसोमेश्वरसंस्थापक शांतिलाल त्रिवेदी गिरफ्तार; "ब्रेन व लॉजिस्टिक सेंटर"।
5 सितंबर 1942सल्ट कांडसल्ट · खुमाड़गंगाराम, खीमदेव, चूड़ामणि, बहादुर सिंह शहीद; आदेश — एसडीएम जॉनसन; गांधी जी: "कुमाऊं का बारदोली"।