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लेखक: · अंतिम समीक्षा:

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UKPSC / UKSSSC स्पेशल 1875 – 1952 संस्थाओं का उदय व पत्रकारिता का युग

तारादत्त गैरोला

1875गैरोला — जन्म वर्ष
1901हितकारिणी सभा
05.1905'गढ़वाली' पत्र शुरुआत
1917नैथानी — 'पुरुषार्थ'
1952चंदोला — 47 वर्ष त्याग पूर्ण
1
चरण 1 · 1901 – 1914
संस्थाओं का उदय और तारादत्त गैरोला

1तारादत्त गैरोला: संपूर्ण परिचय एवं उपाधियाँ

प्रमुख उपाधियाँ — परीक्षा में सर्वाधिक पूछे जाने वाले तथ्य
"
गढ़वाल का महर्षि
"
गढ़वाल जन-जागरण का पितामह Father of Garhwal Awakening
"
आधुनिक गढ़वाली कविता का प्रणेता
📎 संदर्भ तथ्य
जन्म1875 पेशागढ़वाल के प्रथम आधुनिक वकील ब्रिटिश सम्मान'रायबहादुर' — 1917
साहित्यिक रचनाएँ (Compositions)
📜
सदेई (Sadei)
प्रसिद्ध गढ़वाली काव्य, जिसमें 'कफू चौहान' का वर्णन किया गया है।
📖
हिमालयन फोकलोर (Himalayan Folklore)
E. Sherman Oakley (एडविन शेरमन ओकले) के साथ सह-लेखन।
🌄
हिमालयन मिस्टिक
(Himalayan Mystic)
🎶
द सॉन्ग्स ऑफ दादू
(The Songs of Dadu)
💞
मेरी लाडली
गैरोला जी की रचनाओं में से एक।
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सेलेक्टेड लैंड रेवेन्यू डिसीजन ऑफ कुमाऊँ
(Selected Land Revenue Decisions of Kumaun)
गढ़वाली कवितावली (1932)
गढ़वाल के कवियों की रचनाओं का संकलन।
राजनीतिक योगदान व कुली बेगार का विरोध
कुली एजेंसी (1908)
इसकी स्थापना पौड़ी में जोध सिंह नेगी द्वारा की गई थी। इस एजेंसी में तारादत्त गैरोला जी ने 'प्रमुख सचिव' (Chief Secretary) के रूप में कार्य किया।
कुमाऊं परिषद (द्वितीय अधिवेशन — 1918)
हल्द्वानी में आयोजित इस अधिवेशन की अध्यक्षता की और कुली बेगार के विरुद्ध पहला प्रस्ताव पास करवाया।
कुमाऊं परिषद (तृतीय अधिवेशन — 1919)
कोटद्वार में आयोजित इस अधिवेशन में गैरोला जी 'स्वागताध्यक्ष' (Reception President) थे।
"सभ्य समाज के लिए कलंक"
तारादत्त गैरोला — कुली बेगार प्रथा का कड़ा विरोध करते हुए

2प्रारंभिक संस्थाएं और उनका क्रमिक विकास (1901 – 1906)

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A · 1901
गढ़वाल हितकारिणी सभा
  • सटीक स्थापना तिथि: 19 अगस्त 1901
  • स्थान: देहरादून
  • संस्थापक: तारादत्त गैरोला fact - [तारादत्त गैरोला, बिशम्भर दत्त चन्दोला और चंद्रमोहन रतूड़ी - (संस्थापक 'त्रिमूर्ति')]
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B · 1904
गढ़वाल यूनियन / गढ़वाल हित प्रचारिणी सभा
  • गठन का आधार: 1901 की 'हितकारिणी सभा' का ही नाम बदलकर व विस्तार करके इसे 'गढ़वाल यूनियन' बनाया गया।
  • प्रमुख उद्देश्य: जनता को जागरूक/शिक्षित करना और कुप्रथाओं (कन्या विक्रय, मदिरा सेवन) को दूर करना।
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C · 1904
सरोला सभा — गढ़वाल की प्रथम जातिगत संस्था
  • स्थापना: 1904 (मुख्यालय: टिहरी), संस्थापक: तारादत्त गैरोला।
  • विशेष नियम: सभापति सदैव बद्रीनाथ धाम के रावल (मुख्य पुजारी) होते थे।
ब्राह्मणों का उत्थान करना मादक पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध सरोला ब्राह्मणों के हल जोतने पर निषेध निम्न स्तर विवाह पर रोक
  • 6वां अधिवेशन: 1911, कर्णप्रयाग।
  • 10वां ऐतिहासिक अधिवेशन: 1914, कर्णप्रयाग। (प्रस्ताव: 'कन्या-विक्रय' पर पूर्ण प्रतिबंध और प्रांतीय काउंसिल में कुमाऊँ के प्रतिनिधित्व की मांग)।

3गढ़वाल भ्रातृ मंडल (1907)

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1907
स्थापना — लखनऊ
संस्थापक: मथुरा प्रसाद नैथानी
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1908
प्रथम अधिवेशन — कोटद्वार
अध्यक्ष: कुलानंद बड़थ्वाल
30 दिसंबर 1913
⭐ छठा अधिवेशन
इसमें दक्षिण अफ्रीका (S.A.) में भारतीयों पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध ऐतिहासिक 'क्षोभ प्रस्ताव' पारित किया गया।

4'गढ़वाल सभा' का महा-विलय (1914)

तिथि व स्थान
16 फरवरी 1914, दुगड्डा ('एकता सम्मेलन')
अध्यक्षता
सरदार बहादुर
प्रथम अध्यक्ष
नारायण सिंह
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महा-विलय
तारादत्त गैरोला की 'गढ़वाल यूनियन' + मथुरा प्रसाद नैथानी के 'गढ़वाल भ्रातृ मंडल' का ऐतिहासिक विलय।
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प्रमुख प्रस्ताव
पत्रिकाओं व समाचार पत्रों का एकीकरण करना (जिसका परिणाम 1915 में दिखा)।

5विविध व बोनस तथ्य (चरण 1)

🚩
गढ़वाल का प्रथम राजनैतिक सम्मेलन
यह ऐतिहासिक सम्मेलन दुगड्डा में आयोजित हुआ था।
2
चरण 2 · 1902 – 1952
पत्रकारिता का युग और प्रेस का विकास

1पत्रकारिता के प्रमुख स्तंभ (Key Figures)

📰
A · गिरिजा दत्त नैथानी
'गढ़वाल में पत्रकारिता का जनक'
व्यक्तिगत रूप से गढ़वाल में पत्रकारिता के जनक। अपनी वैचारिक स्वतंत्रता के लिए इन्होंने कई संस्थाएं छोड़ीं।
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B · विशम्भर दत्त चंदोला
'गढ़वाल पत्रकारिता के भीष्म पितामह'
जन्म स्थान: थापली गाँव, पौड़ी जनपद। अभूतपूर्व त्याग: 'गढ़वाली' पत्रिका को 47 वर्षों (1905 – 1952) तक जिंदा रखा। इसके लिए अपनी निजी बंदूक, प्रेस मशीनें और गाँव की ज़मीन तक बेच दी।

2प्रमुख समाचार पत्र और पत्रिकाएं (ऐतिहासिक कालक्रमानुसार)

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A · 1902
गढ़वाल समाचार (प्रथम चरण)
  • प्रकाशन तिथि: 5 मई 1902 (यह गढ़वाल का प्रथम हिंदी मासिक पत्र था)।
  • संपादक: गिरिजा दत्त नैथानी (व्यक्तिगत प्रयास)।
  • प्रकाशन स्थल: लैंसडौन (पौड़ी)।
  • मुद्रण स्थल: मुरादाबाद (संसाधनों के अभाव में 18 महीने बाद बंद)।
B · मई 1905
'गढ़वाली' पत्रिका एवं 'गढ़वाल यूनियन' से अलगाव (1910)
  • प्रकाशन तिथि: 5 मई 1905 ('गढ़वाल यूनियन' के मुखपत्र के रूप में)।
  • प्रकाशन स्थल: देहरादून।
  • संपादक:
    1. गिरिजा दत्त नैथानी (1905 – 1910)
    2. विशम्भर दत्त चंदोला (1912 – 1952)
  • मुद्रण स्थल: पहला अंक (16 पृष्ठ) आगरा की 'आर्य भाष्कर प्रेस' से छपा।
  • मुख्य विषय: जन-जागरण एवं "मानवीय नैतिकता"।
  • ऐतिहासिक मोड़ (अलगाव — 1910): वैचारिक मतभेदों के चलते गिरिजा दत्त नैथानी 1910 में 'गढ़वाल यूनियन' के संचालक मंडल से अलग हो गए।
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C · फरवरी 1913
गढ़वाल समाचार (द्वितीय चरण)
  • प्रकाशन तिथि: 10 फरवरी 1913
  • प्रकाशन व मुद्रण: दुगड्डा (नैथानी जी द्वारा स्थापित 'स्टोवल प्रेस' से)।
  • संपादक: गिरिजा दत्त नैथानी (बाद में चंदोला जी ने भी इसका संपादन किया)।
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D · 1913
विशाल कीर्ति
  • प्रकाशन वर्ष: 1913 (पौड़ी से प्रकाशित मासिक पत्र)।
  • प्रकाशक: सदानंद कुकरेती।
  • विशेष तथ्य: यह गढ़वाली भाषा का प्रथम पत्र था। इसमें 'गढ़वाली ठाठ' नाम से एक विशेष स्तंभ (Column) छपता था।
🔗
E · 1915
समाचार पत्रों का ऐतिहासिक एकीकरण
  • पृष्ठभूमि: 1914 के दुगड्डा 'एकता सम्मेलन' (प्रेरणा: स्वामी सत्यदेव परिव्राजक) में संसाधनों के बिखराव को रोकने हेतु एकीकरण का प्रस्ताव पारित हुआ।
  • वास्तविक एकीकरण (1915): गिरिजा दत्त नैथानी के 'गढ़वाल समाचार' का विलय 'गढ़वाली' पत्रिका में कर दिया गया। ('विशाल कीर्ति' का विलय नहीं हुआ — वह 1915 में स्वतः बंद हो गया था।)
  • स्वरूप परिवर्तन: इसी विलय के साथ 1915 में 'गढ़वाली' पत्रिका मासिक से साप्ताहिक (Weekly) हो गई — नाम 'गढ़वाली' ही रहा।
  • संपादक: विशम्भर दत्त चंदोला।
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F · 1916 – 1923
⭐ 'गढ़वाल सभा' से अलगाव (1916) एवं 'पुरुषार्थ' का प्रकाशन (1917 – 1923)
  • ऐतिहासिक मोड़ (अलगाव — 1916): वैचारिक स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए गिरिजा दत्त नैथानी 1916 में 'गढ़वाल सभा' से भी पूर्णतः अलग हो गए।
  • 'पुरुषार्थ' का प्रारंभ (1917): 'गढ़वाल सभा' से अलग होने के बाद नैथानी जी ने 1917 में अपने दम पर नया पत्र निकाला।
  • कार्यकाल व स्वरूप: 1917 से 1923 तक संचालित मासिक (Monthly) पत्र।
  • संपादक: गिरिजा दत्त नैथानी।
  • प्रकाशन स्थल: दुगड्डा और नैथणा गाँव।
  • मुद्रण स्थल: बिजनौर।
📌
कनेक्शन — अल्मोड़ा अखबार से ऐतिहासिक व्यंग्य (1918)
1918 में ब्रिटिश कमिश्नर 'लोमश' ने बेगार मजदूरों पर गोली चलाई — बद्रीदत्त पांडे ने 'अल्मोड़ा अखबार' में इसकी कड़ी आलोचना की, जिसके कारण अंग्रेजों ने 1918 में अल्मोड़ा अखबार को हमेशा के लिए बंद करवा दिया। इस पर गिरिजा दत्त नैथानी ने अपने 'पुरुषार्थ' पत्र में लोमश पर करारा व्यंग्य लिखा।
"एक फायर में तीन शिकार— कुली, मुर्गी और अल्मोड़ा अखबार।"
गिरिजा दत्त नैथानी, 'पुरुषार्थ' (1918), कमिश्नर लोमश पर व्यंग्य
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G · 1918 – 1922
स्वामी विचारानन्द सरस्वती — राष्ट्रीय गतिविधियाँ
1918
होमरूल लीग:देहरादून में होमरूल लीग की एक शाखा स्थापित की और राष्ट्रीय चेतना जगाई।
1922
अभय पत्रिका: देहरादून में 'अभय प्रेस' स्थापित कर इन्होंने 'अभय' नामक राष्ट्रवादी साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया।

3उत्तराखंड की प्रारंभिक प्रेस

प्रेस का नामस्थापना वर्षस्थानसंस्थापकविशेष तथ्य
बदरी केदार प्रेस1906पौड़ीविशालमणि थपलियालदेशभक्ति से ओतप्रोत प्रकाशन।
स्टोवल प्रेस1912दुगड्डागिरिजा दत्त नैथानी1913 में 'गढ़वाल समाचार' यहीं से छपा। 1916 से यहाँ से 'गढ़वाली साहित्य' का प्रकाशन भी प्रारंभ हुआ।

4परीक्षा दृष्टि: 'डोंट कंफ्यूज' तुलनात्मक चार्ट

पत्रिका का नामवर्षप्रकार / प्रयासप्रकाशन स्थलमुद्रण (छपाई) का स्थान
गढ़वाल समाचार (I)1902मासिक / व्यक्तिगतलैंसडौन (पौड़ी)मुरादाबाद
गढ़वाली1905मासिक (बाद में साप्ताहिक) / संस्थागतदेहरादूनआगरा (आर्य भाष्कर प्रेस)
विशाल कीर्ति1913गढ़वाली भाषा का प्रथम मासिकपौड़ी
गढ़वाल समाचार (II)1913मासिक / व्यक्तिगतदुगड्डादुगड्डा (स्टोवल प्रेस)
गढ़वाली (साप्ताहिक)1915साप्ताहिक (एकीकरण के बाद — नाम 'गढ़वाली' ही रहा)देहरादून
पुरुषार्थ1917मासिक (1917–1923) / व्यक्तिगतदुगड्डा/नैथणाबिजनौर

परीक्षा के लिए Quick Recap

बिंदुविवरण
तारादत्त गैरोला — जन्म1875; उपाधियाँ: 'गढ़वाल का महर्षि', 'गढ़वाल जन-जागरण का पितामह', रायबहादुर (1917)
1901'गढ़वाल हितकारिणी सभा' — देहरादून
1904'गढ़वाल यूनियन' (नामांतरण) व 'सरोला सभा' — टिहरी
1907'गढ़वाल भ्रातृ मंडल' — लखनऊ (मथुरा प्रसाद नैथानी)
16 फरवरी 1914'गढ़वाल सभा' महा-विलय — दुगड्डा (प्रथम अध्यक्ष: नारायण सिंह)
पत्रकारिता के प्रमुख स्तंभगिरिजा दत्त नैथानी ('गढ़वाल में पत्रकारिता का जनक') व विशम्भर दत्त चंदोला ('गढ़वाल पत्रकारिता के भीष्म पितामह')
1902'गढ़वाल समाचार' (I) — लैंसडौन — गढ़वाल का प्रथम हिंदी मासिक पत्र
मई 1905'गढ़वाली' पत्र — गढ़वाल यूनियन का मुखपत्र, देहरादून
1913'गढ़वाल समाचार' (II) — दुगड्डा; 'विशाल कीर्ति' — पौड़ी (गढ़वाली भाषा का प्रथम पत्र)
1915'गढ़वाल समाचार' (II) का 'गढ़वाली' में विलय → 'गढ़वाली' साप्ताहिक हुई ('विशाल कीर्ति' बंद, विलय नहीं); संपादक: विशम्भर दत्त चंदोला
1917 – 1923'पुरुषार्थ' — गिरिजा दत्त नैथानी का स्वतंत्र पत्र
'गढ़वाली' का भीष्म पितामहविशम्भर दत्त चंदोला (1905–1952, 47 वर्ष)
कुमाऊं परिषद 1918हल्द्वानी अधिवेशन — गैरोला की अध्यक्षता — कुली बेगार पर प्रथम प्रस्ताव
प्रसिद्ध कथनकुली बेगार — "सभ्य समाज के लिए कलंक" (तारादत्त गैरोला)
1932'गढ़वाली कवितावली' का संपादन — तारादत्त गैरोला