आधुनिक भारत · Governor-General Series · 11

लॉर्ड एलनबरो

अफगान युद्ध के प्रतिशोध और सोमनाथ द्वार विवाद से सिंध विजय, ग्वालियर अभियान, दास प्रथा उन्मूलन और बर्खास्तगी तक की पूर्ण अध्ययन सामग्री।

कार्यकाल1842–1844
सिंध विजय1843
मुख्य सेनापतिचार्ल्स नेपियर
दास प्रथाAct V, 1843
01

चरण 1: अफगान युद्ध का औपचारिक समापन और सोमनाथ विवाद

Army of Retribution · Char Chatta Bazaar · Proclamation of the Gates · 1842
1. नियुक्ति की पृष्ठभूमि — ऑकलैंड के बाद क्यों एलनबरो?
ऑकलैंड की विरासत — काबुल से विनाशकारी वापसी

प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध की विनाशकारी वापसी में Dr. William Brydon पीछे हटते दल से जलालाबाद पहुँचने वाले अकेले यूरोपीय थे; कुछ अन्य ब्रिटिश बंदी बाद में बचाए गए। इस पराजय से London में Court of Directors सदमे में था और ऑकलैंड को Disgrace में वापस बुलाया गया।

एलनबरो का स्पष्ट Mandate

एलनबरो को एक ही काम दिया गया था: अफगानिस्तान से ब्रिटिश सेना की "सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी" (Honorable Extraction) सुनिश्चित करो — लेकिन 'हारे हुए' दिखे बिना।

2. प्रतिशोध की सेना — Army of Retribution (1842) VVIP Fact
नीति
वापसी से पहले 'प्रतिशोध' की योजना
  • एलनबरो जानता था कि सीधे वापस लौटना = अंग्रेजों की हार मानना।
  • इसलिए उसने 'Policy of Retribution' (प्रतिशोध की नीति) अपनाई।
  • जनरल पोलक (General Pollock) और जनरल नॉट (General Nott) को काबुल पर दोबारा हमले का आदेश।
1842 · प्रतिशोध
चार छत्ता बाज़ार का ध्वंस — काबुल में ब्रिटिश बदला
  • ब्रिटिश सेना ने काबुल के ऐतिहासिक 'चार छत्ता' (Char Chatta) बाज़ार को बारूद से उड़ा दिया।
  • यह बाज़ार मुग़ल काल में अली मर्दान खान द्वारा बनवाया गया था।
  • यहीं पर बर्न्स और मैकनॉटन के कटे सिर टांगे गए थे — अंग्रेजों ने इसका बदला इस क्रूरता से लिया।
  • इसके बाद 1842 में प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध का औपचारिक समापन घोषित किया।
परिणाम
दोस्त मुहम्मद की वापसी — ब्रिटिश नीति का 180° उलटाव
  • शाह शुजा (जिसे ऑकलैंड ने बैठाया था) की 1842 में अफगानों ने हत्या कर दी थी।
  • एलनबरो ने उसी दोस्त मुहम्मद को अफगानिस्तान वापस आने दिया जिसे ऑकलैंड ने हटाया था।
  • यह ऑकलैंड की Forward Policy का पूर्ण पराभव था।
3. सोमनाथ के दरवाज़ों का विवाद — Proclamation of the Gates (1842) Master Trap
ऐतिहासिक दावा — जो झूठ निकला

एलनबरो ने जनरल नॉट को आदेश दिया: अफगानिस्तान से लौटते समय गजनी में महमूद गजनवी के मकबरे से वे चंदन के दरवाज़े लाओ, जिनके बारे में मान्यता थी कि गजनवी उन्हें 11वीं सदी में सोमनाथ मंदिर (गुजरात) से लूटकर ले गया था।

राजनीतिक चाल — Divide and Rule का प्रयोग

एलनबरो ने भारत के हिंदू राजाओं को "Proclamation of the Gates" पत्र लिखा — कहा कि हिंदुओं के 800 साल पुराने अपमान का बदला ले लिया। यह पूरी तरह Appeasement और हिंदू-मुस्लिम में फूट डालने की चाल थी।

पोल खुलना — Master Fact (UPPCS Favourite)
  • जांच में पता चला: दरवाज़े देवदार की लकड़ी के थे, चंदन के नहीं।
  • उन पर नक्काशी इस्लामी शैली की थी — यानी वे सोमनाथ के थे ही नहीं!
  • लॉर्ड मैकाले ने इसे "मूर्खता की विजय" (A triumph of stupidity) कहा।
  • ब्रिटिश संसद में भारी आलोचना हुई।
  • दरवाज़े आज भी आगरा किले के एक गोदाम में पड़े हैं।
Memory Link — Masterly Inactivity की नींव

अफगानिस्तान की इस शर्मनाक विफलता ने अंग्रेजों को सबक दिया। एलनबरो के बाद से जो नई नीति अपनाई गई, उसे आगे चलकर जॉन लॉरेंस ने 'Masterly Inactivity' (कुशल अकर्मण्यता) नाम दिया — जब तक अफगानिस्तान हमला न करे, उसके मामलों में दखल मत दो।

पुनरावर्तन
02

चरण 2: सिंध विलय, ग्वालियर, दास प्रथा अंत और बर्खास्तगी

Battle of Miani · Peccavi · Maharajpur · Act V of 1843 · Recall 1844
1. सिंध का बेशर्म विलय — Annexation of Sindh (1843) VVIP
विलय का असली कारण — अपमान की भरपाई

अफगानिस्तान में हार के बाद ब्रिटिश सेना की 'अजेयता' का भ्रम टूट गया था। एलनबरो यह अपमान किसी भी कीमत पर मिटाना चाहता था। सिंधु नदी (Indus River) पर व्यापारिक एकाधिकार भी लक्ष्य था।

ब्रिटिश सेनापति
सर चार्ल्स नेपियर
पहली लड़ाई
मियानी (फरवरी 1843)
दूसरी लड़ाई
डब्बा (मार्च 1843)
नियुक्ति
मेजर आउट्रम की जगह नेपियर — आक्रामक चाल
  • एलनबरो ने नैतिकतावादी मेजर जेम्स आउट्रम (James Outram) को हटाया।
  • सर चार्ल्स नेपियर को पूर्ण सैन्य और राजनीतिक शक्तियां दी गईं।
  • नेपियर ने सिंध के अमीरों (बलोच शासकों) पर संधि तोड़ने का झूठा आरोप लगाया।
फरवरी 1843
मियानी का युद्ध (Battle of Miani)
  • सिंध के अमीरों की पहली बड़ी पराजय। नेपियर की सेना की निर्णायक जीत।
मार्च 1843
डब्बा का युद्ध (Battle of Dubba)
  • अमीरों की दूसरी और अंतिम पराजय।
  • सिंध पूरी तरह ब्रिटिश के अधीन। अगस्त 1843 में बंबई प्रेसीडेंसी में औपचारिक विलय।
  • चार्ल्स नेपियर सिंध का प्रथम ब्रिटिश गवर्नर बना।
PECCAVI
लोकप्रिय किंतु अप्रमाणित कथन — Punch में प्रकाशित wordplay
"I have sinned" = "मैंने पाप किया है" ≈ "I have Sindh"

Exam note: इसे अक्सर नेपियर का संदेश बताया जाता है, पर इसका कोई प्रमाणित telegram नहीं मिला; यह Catherine Winkworth से जुड़ा Punch का व्यंग्यात्मक शब्द-खेल माना जाता है। नेपियर ने अपनी डायरी में लिखा: "हमें सिंध पर कब्ज़ा करने का कोई अधिकार नहीं है, फिर भी हम ऐसा करेंगे, क्योंकि यह एक बहुत ही लाभदायक Piece of Rascality होगी।"

Memory Link — बुलिंग द वीक

इतिहासकार कहते हैं: "सिंध का विलय उसी तरह था जैसे किसी गुंडे (अफगान) से पिटने के बाद, व्यक्ति घर आकर अपनी कमज़ोर पत्नी (सिंध) पर भड़ास निकाल दे।" अंग्रेजों ने अपनी 'अजेयता' वापस पाने के लिए ही सिंध को शिकार बनाया।

सिंध में नेपियर का पुलिस मॉडल — Added Fact

चार्ल्स नेपियर ने सिंध में आयरिश कॉन्स्टेबुलरी (Irish Constabulary) की तर्ज पर पुलिस व्यवस्था स्थापित की — यह भारत में आधुनिक पुलिस प्रणाली का पहला सफल प्रयोग था।

2. ग्वालियर का सैन्य अभियान (1843) Gwalior Campaign
पृष्ठभूमि — सिखों का डर और मराठा ताकत

1843 में ग्वालियर में जनकोजी राव सिंधिया की मृत्यु के बाद अल्पवयस्क जयाजीराव सिंधिया गद्दी पर बैठे। एलनबरो को डर था कि ग्वालियर की 40,000 की फ्रांसीसी-प्रशिक्षित सेना कहीं पंजाब के सिखों से हाथ न मिला ले।

महाराजपुर का युद्ध
29 दिसंबर 1843
पुन्नियार का युद्ध
29 दिसंबर 1843 (same day!)
UPPCS Micro-Fact — एक ही दिन, दो युद्ध

29 दिसंबर 1843 को एक ही दिन दो अलग-अलग स्थानों पर युद्ध हुए: महाराजपुर + पुन्नियार। मराठा सेना बहादुरी से लड़ी लेकिन हार गई। ग्वालियर की सेना घटाकर 9,000 की गई और Council of Regency के तहत अंग्रेज नियंत्रण स्थापित हुआ।

3. दास प्रथा का वैधानिक उन्मूलन — Act V of 1843 Master Fact
सबसे सकारात्मक और सर्वाधिक पूछा जाने वाला तथ्य

1833 के Charter Act में दास प्रथा समाप्त करने का निर्देश (Directive) दिया गया था। दस वर्ष बाद Act V of 1843 ने दास पर स्वामित्व के न्यायिक प्रवर्तन को समाप्त किया, व्यक्ति की बिक्री रोकी और दास अवस्था को हिंसा या संपत्ति छीनने का कानूनी आधार मानने से इनकार किया।

UPPCS Classic Trap — 1833 vs 1843
  • गलत: "दास प्रथा 1833 के एक्ट में ही खत्म हो गई थी।"
  • सही: 1833 = Directive (निर्देश)। 1843 का Act V = दास-स्वामित्व को अदालतों से लागू कराने और व्यक्ति को दास मानकर बेचने पर रोक।
  • किसने किया: लॉर्ड एलनबरो ने Act V of 1843 पारित किया।
4. अन्य सुधार और एलनबरो की बर्खास्तगी (1844)
राज्य लॉटरी पर प्रतिबंध

एलनबरो ने सरकारी राजस्व के लिए चलाई जाने वाली State Lotteries को अनैतिक मानकर पूरी तरह बंद किया।

बर्खास्तगी — Recall (अगस्त 1844)

Court of Directors ने अपनी विशेष शक्ति का प्रयोग करके एलनबरो को अगस्त 1844 में पद से हटाया। कारण: बिना अनुमति सिंध और ग्वालियर पर आक्रमण।

Memory Link — बाँटो और राज करो का बीज

सोमनाथ के दरवाज़ों का नाटक कोई धार्मिक श्रद्धा नहीं था। अफगान युद्ध में जनहानि के बाद एलनबरो भारतीय सेना (बहुसंख्यक हिंदू सिपाही) का मनोबल बढ़ाना और मुसलमानों के खिलाफ भड़काना चाहता था। यह 1857 से बहुत पहले 'Divide and Rule' का सूक्ष्म प्रयोग था।

पुनरावर्तन
03

अंतिम सार-सारणी

परीक्षा-प्राथमिकता — Key Facts
विषयपरीक्षा-योग्य तथ्य
पहचानकार्यकाल 1842–1844; ऑकलैंड के बाद और हार्डिंग प्रथम से पहले
अफगान युद्ध1842 में प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध का औपचारिक अंत; पोलक और नॉट की प्रतिशोध सेना
सोमनाथ द्वार विवादProclamation of the Gates, 1842 — गजनी से लाए द्वार सोमनाथ के नहीं निकले
सिंध विजय1843 — मियानी और डब्बा; चार्ल्स नेपियर प्रथम ब्रिटिश गवर्नर
PeccaviI have sinned/I have Sindh — Punch का प्रसिद्ध, नेपियर से अप्रमाणित wordplay
ग्वालियर अभियानमहाराजपुर और पुन्नियार — 29 दिसंबर 1843
दास प्रथाAct V of 1843 द्वारा ब्रिटिश भारत में दासता को कानूनी मान्यता से वंचित किया गया
अंतCourt of Directors ने 1844 में वापस बुलाया
पुनरावर्तन