आधुनिक भारत · Governor-General Series · 12

लॉर्ड हार्डिंग प्रथम

सामाजिक और शिक्षा सुधारों से रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध, तीन निर्णायक संधियों और जन-आंदोलनों तक की पूर्ण अध्ययन सामग्री।

कार्यकाल1844–1848
शिक्षा प्रस्ताव1844
सिख युद्ध1845–1846
रुड़की कॉलेज1847
01

चरण 1: सामाजिक सुधार, 1844 का शिक्षा प्रस्ताव और रुड़की

Meriah Agency · Education Resolution 1844 · Roorkee Engineering College 1847
1. कुप्रथाओं का कठोर दमन VVIP Social Reforms
VVIP
मरिहा प्रथा (नरबलि) का पूर्ण दमन
  • उड़ीसा, मद्रास और मध्य भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में 'खोंड' (Khond) जनजाति कृषि देवता को खुश करने के लिए इंसानों की बलि (Meriah) देती थी।
  • हार्डिंग ने विशेष 'मरिहा एजेंसी' (Meriah Agency) बनाई।
  • नेतृत्व: मेजर जॉन कैंपबेल (Major John Campbell) और कैप्टन मैकफर्सन।
  • कैंपबेल के कठोर सैन्य अभियानों ने इस प्रथा को हमेशा के लिए समाप्त किया।
उत्तर भारत
कन्या शिशु वध (Female Infanticide) पर प्रतिबंध
  • मुख्यतः राजपूताना, पंजाब और मालवा में जन्म लेते ही बच्चियों को मारने की प्रथा थी।
  • हार्डिंग ने दोषी राजपूत/जाट सरदारों को भारी दंड दिया।
देशी रियासतें
सती प्रथा का विस्तार — रियासतों में भी बैन
  • बेंटिक ने सती प्रथा केवल ब्रिटिश भारत में बैन की थी।
  • हार्डिंग ने कूटनीतिक दबाव से कई देशी रियासतों के राजाओं को भी अपने राज्यों में सती प्रथा अवैध घोषित करने पर विवश किया।
2. 1844 का ऐतिहासिक शिक्षा प्रस्ताव Game-Changer Masterstroke
वह प्रस्ताव जिसने भारत की शिक्षा की दिशा बदल दी

1844 में हार्डिंग ने घोषणा की: सरकारी नौकरियों में उन भारतीयों को अनिवार्य प्राथमिकता दी जाएगी जिन्होंने अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त की है।

Memory Link — मैकाले की डूबती नीति को बचाया

बेंटिक-मैकाले ने 1835 में Downward Filtration Theory बनाई, पर वह फ्लॉप थी — लोग अपने बच्चे अंग्रेजी स्कूलों में नहीं भेज रहे थे। हार्डिंग ने समझा कि जब तक शिक्षा को 'पेट' (नौकरी) से नहीं जोड़ा जाएगा, भारतीय इसे नहीं अपनाएंगे। 1844 के आदेश ने अंग्रेजी को 'Passport to Government Service' बना दिया।

बेंटिक-मैकाले (1835)
नीति बनाई — फ्लॉप
हार्डिंग (1844)
नौकरी से जोड़ा — सफल!
3. रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज (1847) UKPSC Mega Fact
1847
रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज — भारत का पहला इंजीनियरिंग कॉलेज
आज: IIT Roorkee (Indian Institute of Technology)
पृष्ठभूमि
गंगा नहर और इंजीनियरों की ज़रूरत
  • ऑकलैंड के समय से गंगा नहर (Ganges Canal — हरिद्वार से कानपुर) का निर्माण जोरों पर था।
  • नहर बनाने वाले: कर्नल प्रोबी कॉटले (Colonel Proby Cautley)
  • इंग्लैंड से इंजीनियर लाना बेहद खर्चीला था — सस्ते इंजीनियर/ड्राफ्ट्समैन चाहिए थे।
1847
कॉलेज की स्थापना — जेम्स थॉमसन का योगदान
  • स्थापना: लॉर्ड हार्डिंग प्रथम के कार्यकाल में।
  • प्रमुख श्रेय: NWP के Lt. Governor जेम्स थॉमसन (James Thomason) को।
  • 1854 में नाम: 'थॉमसन कॉलेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग' (Thomason College of Civil Engineering)
  • आज: IIT Roorkee
Memory Link — कॉटले का विज़न, थॉमसन का कॉलेज

रुड़की कॉलेज किसी 'शैक्षिक महानता' से नहीं बल्कि गंगा नहर की मजबूरी (सस्ते ड्राफ्ट्समैन की ज़रूरत) से जन्मा था। कॉटले ने नहर बनाई, थॉमसन ने उसके लिए इंजीनियर बनाने वाला कॉलेज खोला।

4. अन्य प्रशासनिक पहल Added Facts
प्राचीन स्मारकों का संरक्षण

हार्डिंग प्रथम वह पहला गवर्नर-जनरल था जिसने भारत की प्राचीन ऐतिहासिक इमारतों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त की और उनके संरक्षण के लिए धन आवंटित करने की दिशा में पहला कदम उठाया। इसका पूर्ण वैधानिक स्वरूप लॉर्ड कर्जन के समय 'Ancient Monuments Preservation Act 1904' के रूप में आया।

रविवार का साप्ताहिक अवकाश — 1846

हार्डिंग प्रथम ने 1846 में सरकारी कार्यालयों और प्रतिष्ठानों में रविवार को साप्ताहिक अवकाश लागू किया। यह State PSC परीक्षाओं में पूछा जाने वाला सीधा तथ्य है।

पुनरावर्तन
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चरण 2: प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845–46) और पंजाब का पतन

4 Battles · Treaty of Lahore · Sale of Kashmir · Bhairowal Treaty
1. युद्ध की पृष्ठभूमि — सिखों की आंतरिक कमज़ोरी
रणजीत सिंह के बाद — Power Vacuum

महाराजा रणजीत सिंह की 1839 में मृत्यु के बाद पंजाब में राजनीतिक हत्याओं और गुटबाज़ी का दौर शुरू हुआ। 5 वर्षीय महाराजा दलीप सिंह गद्दी पर, रानी जिन्दां राजमाता/संरक्षिका बनीं। वास्तविक ताकत 80,000 की खालसा सेना के हाथ में थी।

हार्डिंग का उकसावा — जानबूझकर भड़काया

हार्डिंग ने सतलज के पास फिरोजपुर और लुधियाना में ब्रिटिश सेना 17,000 से 40,000 कर दी। ब्रिटिश एजेंट Major Broadfoot के भड़काऊ बयानों ने सिखों को यकीन दिला दिया कि अंग्रेज पंजाब पर हमला करेंगे। नतीजन 11 दिसंबर 1845 को सिख सेना ने सतलज पार की।

2. चार निर्णायक लड़ाइयां UPPCS Priority Order
18 दिसंबर 1845
1 मुदकी (Mudki)
पहली लड़ाई — सिख नेतृत्व: लाल सिंह (जो युद्ध से भाग गया)
21–22 दिसंबर 1845
2 फिरोजशाह (Ferozeshah)
सबसे भयंकर। ब्रिटेन हारने वाला था — लाल सिंह + तेजा सिंह की गद्दारी ने ब्रिटेन को बचाया
28 जनवरी 1846
3 अलीवाल (Aliwal)
रणजोध सिंह मजीठिया ने कड़ा मुकाबला किया — General Harry Smith की जीत
10 फरवरी 1846
4 सोबराओं (Sobraon) VVIP
अंतिम और निर्णायक — लाल सिंह ने Pontoon Bridge तोड़ा, सिखों का नरसंहार
गद्दारी का इतिहास — सोबराओं की असली कहानी
  • लाल सिंह (वज़ीर) और तेजा सिंह (सेनापति) ने युद्ध की पूरी रणनीति और कमज़ोर मोर्चों की जानकारी पहले ही अंग्रेजों को दे दी।
  • युद्ध के दौरान सतलज नदी का Pontoon Bridge तोड़ा — सिपाही पीछे न लौट सकें।
  • 20 फरवरी 1846 को अंग्रेजों ने लाहौर पर कब्ज़ा कर लिया।
  • "सिखों को अंग्रेजों ने नहीं, उनके अपने नेताओं ने हराया।"
3. तीन ऐतिहासिक संधियां — लाहौर, अमृतसर, भैरोवाल VVIP
लाहौर की संधि (Treaty of Lahore — 9 मार्च 1846)
  • जालंधर दोआब (सतलज-व्यास के बीच का उपजाऊ क्षेत्र) ब्रिटिश साम्राज्य में मिला।
  • युद्ध हर्जाना: 1.5 करोड़ रुपये — सिखों ने 50 लाख नकद दिए।
  • बचे 1 करोड़ रुपये के बदले कश्मीर + हज़ारा अंग्रेजों ने छीन लिए।
  • खालसा सेना को घटाकर 12,000 घुड़सवार + 20,000 पैदल किया।
  • प्रथम ब्रिटिश रेजीडेंट: सर हेनरी लॉरेंस (Sir Henry Lawrence)
अमृतसर की संधि — कश्मीर की बिक्री (16 मार्च 1846) Master Trap

लाहौर संधि के एक हफ्ते बाद! अंग्रेजों ने पहाड़ी कश्मीर संभालने में रुचि नहीं थी — उन्हें पैसा चाहिए था।

  • डोगरा सेनापति गुलाब सिंह (जो युद्ध में तटस्थ रहे थे) को जम्मू-कश्मीर का स्वतंत्र महाराजा मान लिया।
  • कीमत: सिखों से छीना गया कश्मीर गुलाब सिंह को मात्र 75 लाख नानकशाही रुपये में बेचा!
भैरोवाल की संधि (Treaty of Bhairowal — 22 दिसंबर 1846)
  • रानी जिन्दां को Regency से हटाया — शेखपुरा (Sheikhupura) में 1.5 लाख/वर्ष की पेंशन पर भेजा।
  • 8 सिख सरदारों की Council of Regency बनाई — अध्यक्षता ब्रिटिश रेजीडेंट (हेनरी लॉरेंस) को।
  • लाहौर में स्थायी ब्रिटिश सेना — 22 लाख रुपये वार्षिक खर्च पंजाब के खजाने पर डाला।
Memory Link — द्वितीय सिख युद्ध की नींव

भैरोवाल की संधि ने पंजाब की बची-खुची आज़ादी छीन ली। रानी जिन्दां के अपमान और ब्रिटिश रेजीडेंट की तानाशाही से सिख सैनिक अंदर ही अंदर उबल रहे थे। यही अपमान 2 साल बाद (1848) लॉर्ड डलहौजी के समय द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध के रूप में फूटा — जिसके बाद पंजाब का पूर्ण विलय हुआ।

पुनरावर्तन
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चरण 3: डेनिश बस्तियां, गडकरी विद्रोह और नमक आंदोलन

Danish Possessions 1845 · Gadkari Revolt 1844 · Surat Salt Agitation 1844
1. डेनिश बस्तियों की खरीद (1845) Mega Exam Fact
यूरोपीय कंपनियों का भारत छोड़ना — कब और कैसे?

1845 में लॉर्ड हार्डिंग प्रथम के कार्यकाल में डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी शेष सभी भारतीय बस्तियां ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बेच दीं।

बस्ती 1 — तमिलनाडु
ट्रेंक्यूबार (Tranquebar)
बस्ती 2 — बंगाल (मुख्य केंद्र)
श्रीरामपुर (Serampore)
Memory Link — यूरोपीय कंपनियों का पलायन क्रम
  • डच: 1759 में बेदरा के युद्ध में अंग्रेजों ने मार भगाया।
  • डेनमार्क (Danes): 1845 में शांतिपूर्वक बस्तियां बेचकर चले गए। एकमात्र जिन्होंने खून-खराबे के बजाय 'बेचकर' निकले।
  • पुर्तगाली और फ्रांसीसी: 1947 के बाद भी डटे रहे।
2. कोल्हापुर का गडकरी विद्रोह (1844) Pre-1857 Revolt
कौन थे गडकरी?

गडकरी (Gadkari) — महाराष्ट्र के कोल्हापुर राज्य में मराठा किलों के वंशानुगत रक्षक और सैनिक थे। इन्हें उनकी सेवाओं के बदले कर-मुक्त ज़मीनें (Tax-free lands) मिली थीं।

विद्रोह का कारण और परिणाम
  • अंग्रेजों ने नए दीवान 'दाजी कृष्ण पंडित' को नियुक्त किया जिसने गडकरियों की ज़मीनों पर भारी भू-राजस्व लगाया।
  • 1844 में सशस्त्र विद्रोह — गडकरियों ने सामंतगढ़ और भूदरगढ़ के किलों पर कब्ज़ा किया।
  • हार्डिंग को विशाल ब्रिटिश सेना भेजनी पड़ी।
Memory Link — 1857 का पूर्वाभ्यास

गडकरी विद्रोह प्रमाण है कि 1857 की क्रांति रातोरात नहीं हुई — जब अंग्रेजों ने रियासतों की पुरानी व्यवस्था (वंशानुगत सैनिक, कर-मुक्त ज़मीनें) तोड़ी, तो वे सैनिक 1857 से बहुत पहले ही हथियार उठाने लगे थे।

3. सूरत का नमक आंदोलन (Surat Salt Agitation — 1844) People's Victory!
1844 — ट्रिगर
नमक कर में 100% वृद्धि
  • ब्रिटिश सरकार ने नमक कर 50 पैसे से बढ़ाकर 1 रुपये प्रति मन किया — 100% वृद्धि!
  • सूरत (गुजरात) की जनता ने भयंकर जन-आंदोलन किया।
परिणाम — जनता जीती!
सरकार को झुकना पड़ा
  • लोगों ने अदालतों का बहिष्कार किया, ब्रिटिश संस्थानों पर हमले किए।
  • विद्रोह इतना उग्र था कि हार्डिंग की सरकार ने दबाव में आकर बढ़ा हुआ कर वापस लिया।
  • यह 1857 से पहले एक सफल mass agitation का उदाहरण है।
Connection — गांधी जी से 86 साल पहले!

1844 का सूरत नमक आंदोलन और 1930 का गांधी जी का डांडी मार्च — दोनों नमक पर, दोनों गुजरात में, दोनों जन-आंदोलन। 86 साल पहले सूरत की जनता ने वही किया जो 1930 में गांधी जी ने।

4. सैन्य तैयारी — Soldier-Statesman की दूरदर्शिता
वाटरलू से भारत तक

हार्डिंग नेपोलियन के खिलाफ वाटरलू के युद्ध (1815) में भाग ले चुका अनुभवी सैनिक था। भारत आते ही उसने उत्तर-पश्चिमी सीमा पर ब्रिटिश सेना की संख्या और हथियारों में भारी वृद्धि की — यही आगे चलकर प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध में जीत का एक बड़ा कारण बना।

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अंतिम सार-सारणी

परीक्षा-प्राथमिकता — Key Facts
विषयपरीक्षा-योग्य तथ्य
पहचानकार्यकाल 1844–1848; एलनबरो के बाद और डलहौजी से पहले
शिक्षा प्रस्ताव 1844अंग्रेजी-शिक्षित भारतीयों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता
रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज1847 — भारत का पहला इंजीनियरिंग कॉलेज; वर्तमान IIT रुड़की
साप्ताहिक अवकाश1846 — सरकारी कार्यालयों में रविवार का अवकाश
प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध1845–1846 — मुदकी → फिरोजशाह → अलीवाल → सोबराओं
लाहौर की संधि9 मार्च 1846 — जालंधर दोआब और 1.5 करोड़ रुपये हर्जाना
अमृतसर की संधि16 मार्च 1846 — गुलाब सिंह को कश्मीर, 75 लाख नानकशाही रुपये
भैरोवाल की संधि22 दिसंबर 1846 — हेनरी लॉरेंस के अधीन Council of Regency
डेनिश बस्तियाँ1845 में ट्रेंक्यूबार और श्रीरामपुर ब्रिटिशों को बेची गईं
मरिहा प्रथाखोंड नरबलि के दमन हेतु Meriah Agency
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