विश्व इतिहास · वैश्विक संघर्ष

प्रथम विश्व युद्ध (1914 - 1918)

प्रथम विश्व युद्ध के प्रमुख गुट, कारण, घटनाक्रम, युद्ध-विराम, पेरिस शांति सम्मेलन और युद्धोत्तर संधियों का क्रमबद्ध अध्ययन।

8 सेक्शन ~46 मिनट 2 सारणी 45 MCQ
अवधि28 जुलाई 1914 से 11 नवंबर 1918।
अन्य नाममहान युद्ध (The Great War)।

01 युद्धरत प्रमुख गुट

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान विश्व मुख्य रूप से दो शक्तिशाली सैन्य गठबंधनों में विभाजित हो गया था:

गुट का नामसम्मिलित प्रमुख राष्ट्रविशेष तथ्य
केंद्रीय शक्तियाँ (Central Powers)जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, उस्मानी साम्राज्य और बुल्गारिया।बुल्गारिया 1915 में केंद्रीय शक्तियों में शामिल हुआ।
मित्र राष्ट्र (Allied Powers)ब्रिटेन, फ्रांस और रूस; बाद में इटली और संयुक्त राज्य अमेरिकाइटली 1915 में और अमेरिका 1917 में मित्र राष्ट्रों की ओर से शामिल हुआ।

1915 Trap: इटली → मित्र राष्ट्र | बुल्गारिया → केंद्रीय शक्तियाँ।

गुटों में अंतर: 1882 का Triple Alliance (जर्मनी + ऑस्ट्रिया-हंगरी + इटली) युद्धकालीन Central Powers के समान नहीं था।

02 युद्ध के कारण एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

फ्रैंकफर्ट की संधि (1871)

  • 1871 की इस संधि के द्वारा जर्मनी ने फ्रांस के महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों—अल्सेस और लॉरेन—पर अधिकार कर लिया था।

बिस्मार्क की गुप्त संधि प्रणाली

  • जर्मनी के चांसलर बिस्मार्क द्वारा यूरोप में गुप्त संधियों की एक जटिल प्रणाली की शुरुआत की गई।
  • 1873 (तीन सम्राटों का गुट): बिस्मार्क ने जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी और रूस को मिलाकर एक गुट का निर्माण किया।
    • परिणाम: कालांतर में ऑस्ट्रिया-हंगरी और रूस के बीच बाल्कन क्षेत्र के नियंत्रण को लेकर भारी तनाव उत्पन्न हो गया।
  • 1878 (बर्लिन कांग्रेस): इस सम्मेलन में जर्मनी का कूटनीतिक झुकाव ऑस्ट्रिया की ओर अधिक रहा।
    • परिणाम: इससे रूस के राष्ट्रीय हितों को खतरा महसूस हुआ।
  • 1879 (द्विगुट संधि): जर्मनी और ऑस्ट्रिया-हंगरी ने रूस के आक्रमण पर परस्पर सैन्य सहायता तथा किसी अन्य शक्ति के आक्रमण पर सामान्यतः तटस्थता तय की।

साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्द्धा और त्रिपक्षीय गठबंधन

  • फ्रांस द्वारा अफ्रीकी राष्ट्र ट्यूनीशिया पर कब्ज़ा कर लिया गया।
    • परिणाम: भूमध्यसागरीय हितों के टकराव के कारण इटली, फ्रांस से अत्यंत नाराज़ हो गया।
  • 1882 (त्रिपक्षीय संधि): इटली की नाराज़गी का लाभ उठाते हुए एक त्रिपक्षीय गठबंधन बनाया गया, जिसमें जर्मनी, इटली और ऑस्ट्रिया-हंगरी शामिल हुए।
  • 1887 (पुनर्आश्वासन संधि - Reinsurance Treaty): कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए यह संधि जर्मनी और रूस के मध्य संपन्न हुई।
    • उद्देश्य: जर्मनी की विदेश नीति का मुख्य लक्ष्य यह था कि वह किसी भी परिस्थिति में रूस और फ्रांस के बीच मित्रता नहीं होने देना चाहता था (ताकि जर्मनी को दो मोर्चों पर युद्ध न करना पड़े)।

03 कैसर विल्हेम द्वितीय की आक्रामक नीतियां और ध्रुवीकरण

जर्मनी में सत्ता परिवर्तन के बाद नए शासक कैसर विल्हेम द्वितीय ने बिस्मार्क की संतुलित कूटनीति को त्याग दिया:

  • उन्होंने बिस्मार्क की रूस समर्थक नीति को उलटते हुए रूस की घोर अवहेलना की।
  • नौसैनिक विस्तार के कारण इंग्लैंड के साथ जर्मनी के तनाव में भारी वृद्धि हुई।

यूरोप का पूर्ण विभाजन (मित्र राष्ट्रों का उदय)

विल्हेम द्वितीय की आक्रामक नीतियों के प्रतिउत्तर में यूरोप के अन्य देशों ने अपने बचाव के लिए नए गठबंधन बनाए:

  • 1894: सुरक्षा के दृष्टिगत रूस और फ्रांस के मध्य एक ऐतिहासिक संधि संपन्न हुई।
  • 1904: आपसी औपनिवेशिक विवादों को सुलझाते हुए इंग्लैंड और फ्रांस के मध्य संधि हुई।
  • 1905: इस वर्ष एक छोटे एशियाई देश जापान द्वारा विशाल रूसी साम्राज्य की पराजय हुई, जिसने यूरोपीय समीकरणों को प्रभावित किया।
  • 1907 (त्रिदेशीय मैत्री / Triple Entente): जर्मनी-ऑस्ट्रिया केंद्रित गुट के संतुलन में ब्रिटेन, फ्रांस और रूस का समूह बना।

04 युद्ध का तात्कालिक कारण

1. सर्बिया व ऑस्ट्रिया के मध्य तनाव की पृष्ठभूमि

प्रथम विश्व युद्ध भड़कने से पूर्व बाल्कन क्षेत्र में ऑस्ट्रिया-हंगरी और सर्बिया के मध्य कूटनीतिक और रणनीतिक तनाव अपने चरम पर था:

  • सर्व-स्लाव आंदोलन: स्लाव एकता का व्यापक आंदोलन; रूस इसका प्रमुख समर्थक था और यह सर्बियाई राष्ट्रवाद से भी जुड़ा था। इससे बहुजातीय ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य को खतरा महसूस हुआ।
  • 1908 का बोस्निया संकट: ऑस्ट्रिया द्वारा बोस्निया और हर्जेगोविना को अपने प्रत्यक्ष नियंत्रण में ले लिया गया। इस कदम से सर्बिया के राष्ट्रीय हितों को गहरा आघात पहुँचा।
  • अल्बानिया: 28 नवंबर 1912 को स्वतंत्रता घोषित की; 1913 में महाशक्तियों ने मान्यता दी। ऑस्ट्रिया-हंगरी और इटली के समर्थन से सर्बिया की एड्रियाटिक सागर तक पहुँच रुकी।

2. साराजेवो हत्याकांड — तात्कालिक कारण

  • 28 जून 1914 — साराजेवो हत्याकांड: गैवरिलो प्रिंसिप ने ऑस्ट्रिया-हंगरी के उत्तराधिकारी फ्रांज फर्डिनेंड और उनकी पत्नी सोफी की हत्या की।
  • प्रिंसिप यंग बोस्निया से जुड़ा था; ब्लैक हैंड — सर्बियाई गुप्त राष्ट्रवादी संगठन ने षड्यंत्र को सहायता दी। यही घटना प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण बनी।

05 युद्ध का आरंभ और प्रमुख घटनाक्रम

युद्ध कैसे फैला?

साराजेवो हत्याकांड के बाद ऑस्ट्रिया-हंगरी और सर्बिया के बीच तनाव युद्ध में बदल गया। यूरोप पहले से दो बड़े गुटों में बँटा हुआ था, इसलिए एक देश के युद्ध में उतरते ही उसके सहयोगी देश भी शामिल होते गए।

  • 28 जुलाई 1914 — ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध घोषित किया। यहीं से प्रथम विश्व युद्ध का आरंभ माना जाता है।
  • 1 अगस्त 1914 — सर्बिया का समर्थक रूस सक्रिय हुआ, तो जर्मनी ने रूस के विरुद्ध युद्ध घोषित किया
  • 3 अगस्त 1914 — जर्मनी ने रूस के सहयोगी फ्रांस के विरुद्ध युद्ध घोषित किया
  • 4 अगस्त 1914 — जर्मनी ने फ्रांस पर आक्रमण के लिए तटस्थ बेल्जियम में प्रवेश किया; इसके बाद ब्रिटेन ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध घोषित किया
  • परीक्षा तथ्य: बेल्जियम को “Cockpit of Europe” कहा जाता है।

1917–18: युद्ध में बड़ा बदलाव

अमेरिका युद्ध में आया — 1917

  • 6 अप्रैल 1917 — अमेरिका ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध घोषित किया
  • मुख्य कारण:
    • जर्मनी की असीमित पनडुब्बी युद्ध नीति
    • जिम्मरमैन तार
  • 1915 में लुसिटानिया जहाज के डूबने से अमेरिका में जर्मनी-विरोधी भावना पहले ही बढ़ चुकी थी।

रूस युद्ध से बाहर हुआ — 1918

  • 1917 की बोल्शेविक क्रांति के बाद नई रूसी सरकार युद्ध से बाहर निकलना चाहती थी।
  • 3 मार्च 1918 — ब्रेस्ट-लिटोव्स्क की संधि के बाद रूस प्रथम विश्व युद्ध से औपचारिक रूप से बाहर हो गया।

06 युद्ध का अंत और जर्मनी में परिवर्तन

1918 तक केंद्रीय शक्तियाँ लगातार कमजोर होने लगीं और एक-एक करके युद्ध से बाहर होती गईं।

  • अक्टूबर 1918 — उस्मानी साम्राज्य ने युद्धविराम स्वीकार किया।
  • नवंबर 1918 — ऑस्ट्रिया-हंगरी ने युद्धविराम स्वीकार किया।
  • 11 नवंबर 1918 — जर्मनी ने युद्धविराम स्वीकार किया और प्रथम विश्व युद्ध की लड़ाई समाप्त हो गई।
  • जर्मनी के सम्राट कैसर विल्हेम द्वितीय ने पद त्याग दिया; राजतंत्र समाप्त हुआ और वाइमर गणराज्य की स्थापना हुई।
याद रखें: 11 नवंबर 1918 = युद्धविराम, जबकि 28 जून 1919 = वर्साय की संधि

07 पेरिस शांति सम्मेलन — 1919

प्रथम विश्व युद्ध के बाद विजेता राष्ट्रों ने यूरोप की नई व्यवस्था तय करने और पराजित देशों के साथ शांति-संधियाँ करने के लिए पेरिस शांति सम्मेलन आयोजित किया।

  • आरंभ — 18 जनवरी 1919
  • अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन के चौदह सूत्र शांति-व्यवस्था के महत्वपूर्ण आधारों में से एक थे।
  • सम्मेलन में सीमाओं का पुनर्निर्धारण, क्षतिपूर्ति और भविष्य में युद्ध रोकने की व्यवस्था पर विचार किया गया।

चार प्रमुख नेता

  • वुडरो विल्सन — अमेरिका
  • डेविड लॉयड जॉर्ज — ब्रिटेन
  • जॉर्ज क्लेमेंसो — फ्रांस
  • विटोरियो ऑरलैंडो — इटली

राष्ट्र संघ

  • उद्देश्य — अंतरराष्ट्रीय शांति और सहयोग बनाए रखना।
  • 10 जनवरी 1920 — राष्ट्र संघ ने औपचारिक रूप से कार्य आरंभ किया।
  • मुख्यालय — जिनेवा, स्विट्जरलैंड
  • प्रमुख समर्थक — वुडरो विल्सन
  • महत्वपूर्ण तथ्य — अमेरिका स्वयं राष्ट्र संघ का सदस्य नहीं बना।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन

  • स्थापना — 1919
  • वर्साय की संधि से संबंधित।
  • मुख्यालय — जिनेवा

08 प्रथम विश्व युद्ध के बाद की संधियाँ

युद्ध के बाद प्रत्येक प्रमुख पराजित राष्ट्र के साथ अलग-अलग शांति-संधियाँ की गईं।

वर्साय की संधि — जर्मनी

28 जून 1919 — मित्र राष्ट्रों और जर्मनी के बीच वर्साय की संधि हुई।

मुख्य शर्तें:

  • अल्सास-लोरेन फ्रांस को वापस मिला।
  • जर्मन थलसेना को अधिकतम 1 लाख सैनिकों तक सीमित किया गया।
  • जर्मनी और उसके सहयोगियों पर युद्ध से हुई हानि की जिम्मेदारी डाली गई तथा भारी क्षतिपूर्ति लगाई गई।
  • राइनलैंड का विसैन्यीकरण किया गया।
  • सार क्षेत्र को 15 वर्षों के लिए राष्ट्र संघ के प्रशासन में रखा गया; इसकी कोयला खदानों का अधिकार फ्रांस को दिया गया।
  • जर्मनी के उपनिवेश और कई यूरोपीय क्षेत्र उससे छीन लिए गए।

अन्य प्रमुख संधियाँ

संधितिथिकिसके साथमुख्य तथ्य
सेंट-जर्मेन10 सितंबर 1919ऑस्ट्रियाऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य के विघटन को मान्यता
न्यूई27 नवंबर 1919बुल्गारियाक्षेत्रीय हानि एवं क्षतिपूर्ति
त्रियानोन4 जून 1920हंगरीहंगरी की नई सीमाएँ निर्धारित
सेव्र10 अगस्त 1920उस्मानी साम्राज्यउसके क्षेत्रों के विभाजन की व्यवस्था; बाद में लॉज़ान संधि, 1923 ने इसका स्थान लिया

एक-पंक्ति पुनरावृत्ति

जर्मनी–वर्साय | ऑस्ट्रिया–सेंट-जर्मेन | बुल्गारिया–न्यूई | हंगरी–त्रियानोन | उस्मानी साम्राज्य–सेव्र

अध्याय अभ्यास परीक्षा

संपूर्ण अध्याय पर आधारित 45 UKPSC/UKSSSC-पैटर्न प्रश्न।