प्रथम विश्व युद्ध (1914 - 1918)
प्रथम विश्व युद्ध के प्रमुख गुट, कारण, घटनाक्रम, युद्ध-विराम, पेरिस शांति सम्मेलन और युद्धोत्तर संधियों का क्रमबद्ध अध्ययन।
अवधि28 जुलाई 1914 से 11 नवंबर 1918।
अन्य नाममहान युद्ध (The Great War)।
01 युद्धरत प्रमुख गुट
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान विश्व मुख्य रूप से दो शक्तिशाली सैन्य गठबंधनों में विभाजित हो गया था:
| गुट का नाम | सम्मिलित प्रमुख राष्ट्र | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| केंद्रीय शक्तियां (Central Powers) | जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, बुल्गारिया और ओटोमन साम्राज्य। | |
| मित्र राष्ट्र (Allied Powers) | फ्रांस, ब्रिटेन और रूस। | वर्ष 1917 में संयुक्त राज्य अमेरिका भी मित्र राष्ट्रों के गुट में शामिल हुआ। |
02 युद्ध के कारण एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
फ्रैंकफर्ट की संधि (1871)
- 1871 की इस संधि के द्वारा जर्मनी ने फ्रांस के महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों—अल्सेस और लॉरेन—पर अधिकार कर लिया था।
बिस्मार्क की गुप्त संधि प्रणाली
- जर्मनी के शासक/चांसलर बिस्मार्क द्वारा यूरोप में गुप्त संधियों की एक जटिल प्रणाली की शुरुआत की गई।
- 1873 (तीन सम्राटों का गुट): बिस्मार्क ने जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी और रूस को मिलाकर एक गुट का निर्माण किया।
- परिणाम: कालांतर में ऑस्ट्रिया-हंगरी और रूस के बीच बाल्कन क्षेत्र के नियंत्रण को लेकर भारी तनाव उत्पन्न हो गया।
- 1878 (बर्लिन कांग्रेस): इस सम्मेलन में जर्मनी का कूटनीतिक झुकाव ऑस्ट्रिया की ओर अधिक रहा।
- परिणाम: इससे रूस के राष्ट्रीय हितों को खतरा महसूस हुआ।
- 1879 (ऑस्ट्रिया-हंगरी व जर्मनी की संधि): इन दोनों देशों के बीच एक रक्षात्मक समझौता हुआ जिसमें यह तय किया गया कि यदि कोई भी अन्य राष्ट्र इन पर हमला करता है, तो दूसरा राष्ट्र उसकी सैन्य सहायता करेगा।
साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्द्धा और त्रिपक्षीय गठबंधन
- फ्रांस द्वारा अफ्रीकी राष्ट्र ट्यूनीशिया पर कब्ज़ा कर लिया गया।
- परिणाम: भूमध्यसागरीय हितों के टकराव के कारण इटली, फ्रांस से अत्यंत नाराज़ हो गया।
- 1882 (त्रिपक्षीय संधि): इटली की नाराज़गी का लाभ उठाते हुए एक त्रिपक्षीय गठबंधन बनाया गया, जिसमें जर्मनी, इटली और ऑस्ट्रिया-हंगरी शामिल हुए।
- 1887 (पुनर्आश्वासन संधि - Reinsurance Treaty): कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए यह संधि जर्मनी और रूस के मध्य संपन्न हुई।
- उद्देश्य: जर्मनी की विदेश नीति का मुख्य लक्ष्य यह था कि वह किसी भी परिस्थिति में रूस और फ्रांस के बीच मित्रता नहीं होने देना चाहता था (ताकि जर्मनी को दो मोर्चों पर युद्ध न करना पड़े)।
03 कैसर विल्हेम द्वितीय की आक्रामक नीतियां और ध्रुवीकरण
जर्मनी में सत्ता परिवर्तन के बाद नए शासक कैसर विल्हेम द्वितीय ने बिस्मार्क की संतुलित कूटनीति को त्याग दिया:
- उन्होंने बिस्मार्क की रूस समर्थक नीति को उलटते हुए रूस की घोर अवहेलना की।
- नौसैनिक विस्तार के कारण इंग्लैंड के साथ जर्मनी के तनाव में भारी वृद्धि हुई।
यूरोप का पूर्ण विभाजन (मित्र राष्ट्रों का उदय)
विल्हेम द्वितीय की आक्रामक नीतियों के प्रतिउत्तर में यूरोप के अन्य देशों ने अपने बचाव के लिए नए गठबंधन बनाए:
- 1894: सुरक्षा के दृष्टिगत रूस और फ्रांस के मध्य एक ऐतिहासिक संधि संपन्न हुई।
- 1904: आपसी औपनिवेशिक विवादों को सुलझाते हुए इंग्लैंड और फ्रांस के मध्य संधि हुई।
- 1905: इस वर्ष एक छोटे एशियाई देश जापान द्वारा विशाल रूसी साम्राज्य की पराजय हुई, जिसने यूरोपीय समीकरणों को प्रभावित किया।
- 1907 (त्रिपक्षीय सौहार्द): अंततः यूरोप में केंद्रीय शक्तियों के खिलाफ एक नया और शक्तिशाली गुट अस्तित्व में आया, जिसमें रूस, फ्रांस और इंग्लैंड एक साथ आ गए।
04 युद्ध का तात्कालिक कारण
1. सर्बिया व ऑस्ट्रिया के मध्य तनाव की पृष्ठभूमि
प्रथम विश्व युद्ध भड़कने से पूर्व बाल्कन क्षेत्र में ऑस्ट्रिया-हंगरी और सर्बिया के मध्य कूटनीतिक और रणनीतिक तनाव अपने चरम पर था:
- सर्व-स्लाव आंदोलन: सर्बिया के अधीन एक 'सर्व-स्लाव' आंदोलन चलाया जा रहा था, जिसका मुख्य उद्देश्य बाल्कन प्रायद्वीप के सभी स्लाव लोगों को एक झंडे के नीचे लाना था। इससे ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य (जहाँ कई स्लाव अल्पसंख्यक थे) को खतरा महसूस हुआ।
- 1908 का बोस्निया संकट: ऑस्ट्रिया द्वारा बोस्निया और हर्जेगोविना को अपने प्रत्यक्ष नियंत्रण में ले लिया गया। इस कदम से सर्बिया के राष्ट्रीय हितों को गहरा आघात पहुँचा।
- अल्बानिया राष्ट्र का गठन: 1912-13 के बाल्कन युद्धों के पश्चात्, ऑस्ट्रिया के कूटनीतिक इशारे और दबाव पर 'अल्बानिया' नामक एक नए राष्ट्र का गठन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य सर्बिया को समुद्र तट तक पहुँचने से रोकना था।
2. सेराजेवो हत्याकांड (जून 1914) - युद्ध का ट्रिगर बिंदु
- घटनाक्रम: जून 1914 में ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य के उत्तराधिकारी आर्कड्यूक फ्रांज फर्डिनेंड अपनी पत्नी के साथ बोस्निया की राजधानी सेराजेवो के दौरे पर थे।
- हत्या: सेराजेवो में सर्बिया समर्थित एक उग्रवादी/गुप्त संस्था 'ब्लैक हैंड' के सदस्यों द्वारा आर्कड्यूक फ्रांज फर्डिनेंड की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
- परिणाम: इसी हत्याकांड ने यूरोप के बारूद के ढेर पर चिंगारी का काम किया और ऑस्ट्रिया द्वारा सर्बिया पर हमले के साथ ही प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हो गई।
05 युद्ध का आरंभ और प्रमुख घटनाक्रम
युद्ध की घोषणाएँ
- 28 जुलाई 1914: ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध घोषित किया। इसी से प्रथम विश्व युद्ध का आरंभ माना जाता है।
- कुल भागीदारी: युद्ध में कुल 37 देशों ने भाग लिया।
- 1 अगस्त 1914: जर्मनी ने रूस के विरुद्ध युद्ध घोषित किया।
- 3 अगस्त 1914: जर्मनी ने फ्रांस के विरुद्ध युद्ध घोषित किया।
- 4 अगस्त 1914: बेल्जियम की तटस्थता के उल्लंघन के बाद ब्रिटेन ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध घोषित किया।
1917 के निर्णायक परिवर्तन
- रूस का अलग होना: 1917 की बोल्शेविक क्रांति के बाद रूस ने युद्ध से हटने की प्रक्रिया शुरू की। मार्च 1918 की ब्रेस्ट-लिटोव्स्क संधि से उसका युद्ध से औपचारिक अलगाव हुआ।
- अमेरिका का प्रवेश: राष्ट्रपति वुडरो विल्सन के नेतृत्व में अमेरिका ने 6 अप्रैल 1917 को जर्मनी के विरुद्ध युद्ध घोषित किया।
- मुख्य कारण: जर्मनी की असीमित पनडुब्बी युद्ध नीति और जिमरमैन टेलीग्राम निर्णायक कारण बने। 1915 में लूसितानिया के डूबने से अमेरिकी जनमत पहले ही जर्मनी के विरुद्ध प्रभावित हो चुका था।
06 युद्ध का अंत और सत्ता परिवर्तन
- अक्टूबर 1918: ओटोमन साम्राज्य ने युद्ध-विराम स्वीकार किया।
- नवंबर 1918: ऑस्ट्रिया-हंगरी ने युद्ध-विराम स्वीकार किया।
- 11 नवंबर 1918: जर्मनी द्वारा युद्ध-विराम पर हस्ताक्षर करने के साथ प्रथम विश्व युद्ध समाप्त हुआ।
- जर्मनी में परिवर्तन: कैसर विल्हेम द्वितीय ने पद त्याग दिया, राजतंत्र समाप्त हुआ और वाइमर गणतंत्र की स्थापना हुई।
07 पेरिस शांति सम्मेलन
आरंभ18 जनवरी 1919
भागीदारी27 विजेता व संबद्ध देश
- वैचारिक आधार: अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन के चौदह सूत्रों ने सम्मेलन को महत्वपूर्ण वैचारिक आधार दिया।
- राष्ट्र संघ: भविष्य के युद्ध रोकने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए राष्ट्र संघ की स्थापना का निर्णय हुआ।
- अन्य उद्देश्य: राष्ट्रीय आत्मनिर्णय, अल्पसंख्यक सुरक्षा, सीमाओं का पुनर्निर्धारण और पराजित देशों से क्षतिपूर्ति तय करना।
08 प्रथम विश्व युद्ध के बाद की संधियाँ
वर्साय की संधि
- 28 जून 1919: मित्र राष्ट्रों और जर्मनी के बीच वर्साय की संधि हुई।
- क्षेत्रीय हानि: जर्मनी से उसके उपनिवेश और अनेक यूरोपीय क्षेत्र छीन लिए गए।
- सैन्य प्रतिबंध: जर्मन थलसेना अधिकतम एक लाख सैनिकों तक सीमित कर दी गई।
- युद्ध-दोष और क्षतिपूर्ति: जर्मनी और उसके सहयोगियों पर युद्ध की जिम्मेदारी डाली गई तथा जर्मनी पर भारी क्षतिपूर्ति लगाई गई।
- राइनलैंड: क्षेत्र का विसैन्यीकरण किया गया और मित्र राष्ट्रों ने अस्थायी सैन्य कब्जा रखा।
- सार क्षेत्र: 15 वर्षों के लिए राष्ट्र संघ के प्रशासन में रखा गया; इसकी कोयला खदानों का अधिकार फ्रांस को मिला।
अन्य प्रमुख संधियाँ
| संधि | तिथि | पराजित देश | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|---|
| सेंट जर्मेन | 10 सितंबर 1919 | ऑस्ट्रिया | ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य के विघटन को मान्यता मिली। |
| न्यूली | 27 नवंबर 1919 | बुल्गारिया | क्षेत्रीय हानि और क्षतिपूर्ति स्वीकार करनी पड़ी। |
| त्रियानों | 4 जून 1920 | हंगरी | हंगरी की नई सीमाएँ निर्धारित हुईं। |
| सेवर्स | 10 अगस्त 1920 | ओटोमन साम्राज्य | ओटोमन क्षेत्रों के विभाजन की व्यवस्था की गई। |
अध्याय अभ्यास परीक्षा
संपूर्ण अध्याय पर आधारित 45 UKPSC/UKSSSC-पैटर्न प्रश्न।