Russian Revolution · World History
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विश्व इतिहास · रूस

रूस की क्रांति (1917)

मुख्य विषय: निरंकुश जारशाही, सामाजिक-आर्थिक संकट, 1905 की क्रांति, प्रथम विश्व युद्ध, फरवरी एवं अक्टूबर क्रांति, लेनिन की नीतियाँ और वैश्विक प्रभाव।

7 अध्याय ~35 मिनट 3 सारणियाँ 40 MCQ

01 राजनीतिक एवं सामाजिक कारण

  • निरंकुश राजतंत्र: 1917 तक रूस में निरंकुश और स्वेच्छाचारी राजतंत्र कायम था (बिल्कुल 1789 से पूर्व के फ्रांस की तरह)।
  • सामाजिक विभाजन: रूसी समाज मुख्य रूप से दो वर्गों में विभाजित था— कुलीन वर्ग और दास (कृषक) वर्ग।
  • दास प्रथा की समाप्ति (1861): 1861 में ज़ार अलेक्जेंडर द्वितीय द्वारा दास प्रथा (Serfdom) को समाप्त कर दिया गया, परंतु भूमि का पुनर्वितरण नहीं हुआ। इसके परिणामस्वरूप कृषकों की स्थिति में कोई वास्तविक आर्थिक सुधार नहीं आया और उनमें भारी असंतोष बना रहा।
  • अल्पसंख्यकों की समस्या: जार निकोलस द्वितीय द्वारा 'रूसीकरण' (Russification) की दमनकारी नीति अपनाई गई, जिसने गैर-रूसी राष्ट्रीयताओं (Non-Russian nationalities) में गहरा आक्रोश पैदा किया।

02 आर्थिक एवं औद्योगिक कारण

  • कृषि सुधार (स्टोलिपिन की नीतियां): अर्थशास्त्री स्टोलिपिन (Stolypin) के अंतर्गत कृषि सुधार लागू किए गए। इसका मुख्य उद्देश्य धनी किसानों (कुलक) का एक ऐसा वर्ग तैयार करना था जो बढ़ते उद्योगों के लिए बाज़ार उपलब्ध करा सके। हालाँकि, इससे छोटे और गरीब किसानों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
  • औद्योगीकरण की कमियाँ:
    • अर्थव्यवस्था और उद्योगों में राज्य का अत्यधिक हस्तक्षेप था।
    • औद्योगीकरण का विस्तार पूरे देश में न होकर कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित था।
    • राज्य का खर्च चलाने के लिए किसानों पर अत्यधिक करों का बोझ डाल दिया गया।
  • परिणाम: इन आर्थिक विसंगतियों के कारण सर्वहारा (श्रमिक) वर्ग के अंतर्गत वर्गीय चेतना उत्पन्न हुई और तत्कालीन राजतंत्र कमज़ोर पड़ने लगा।

राजनीतिक दलों का उदय

क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार करने में दो प्रमुख राजनीतिक दलों का महत्वपूर्ण योगदान रहा:

दल का नामस्थापना वर्षजनाधार (Base)प्रमुख बिंदु / विभाजन
Social Democratic Party1898 (लगभग)औद्योगिक मज़दूर1903 में इस दल का विभाजन दो गुटों में हो गया: 1. मेंशेविक (Menshevik) और 2. बोल्शेविक (Bolshevik)।
Social Revolutionary Party1901किसान वर्गकृषकों के अधिकारों और भूमि सुधार पर केंद्रित।

03 1905 की घटनाएँ एवं प्रथम विश्व युद्ध

1905 की घटनाएँ एवं ड्यूमा (Duma)

  • रूस-जापान युद्ध (1905): 1905 में जापान जैसे छोटे एशियाई देश द्वारा विशाल रूसी साम्राज्य की पराजय ने राजतंत्र की प्रतिष्ठा को भारी ठेस पहुँचाई।
  • ड्यूमा का गठन (1905): बढ़ते दबाव के कारण 1905 में एक प्रतिनिधित्व संस्था 'ड्यूमा' (Duma) का गठन किया गया।
  • राजतंत्र का अलगाव: इन घटनाओं के बाद राजतंत्र पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गया:
    • मध्यम वर्ग: सरकारी नीतियों से परेशान था।
    • किसान वर्ग: भयंकर आर्थिक तंगी से जूझ रहा था।
    • कुलीन वर्ग: यह भी ड्यूमा और राज्य की आर्थिक तंगी के कारण असंतुष्ट था।

प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918) का प्रभाव

प्रथम विश्व युद्ध रूसी क्रांति का एक तात्कालिक और सबसे विनाशकारी कारण साबित हुआ:

  • बिना तैयारी के युद्ध में प्रवेश: रूस बिना किसी ठोस सैन्य तैयारी के युद्ध में कूद पड़ा, जिससे देश में आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी हो गई।
  • आर्थिक पतन: युद्ध का खर्च निकालने के लिए बाज़ार में अतिरिक्त मुद्रा छापी गई, जिसके परिणामस्वरूप भयंकर मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ी।
  • आत्मघाती सैन्य नीतियां: जार निकोलस द्वितीय द्वारा 'स्कोर्च्ड द अर्थ' (Scorched Earth Policy - सब कुछ नष्ट कर पीछे हटने की नीति) अपनाई गई, जो देश के लिए आत्मघाती सिद्ध हुई।
  • सत्ता का केंद्रीकरण और षड्यंत्र: जार निकोलस ने सेना की कमान स्वयं अपने हाथों में ले ली। राजधानी से उसकी अनुपस्थिति में सत्ता की बागडोर उसकी पत्नी ज़रीना (Tsarina) और उसके रहस्यवादी गुरु रासपुतिन (Rasputin) के हाथों में आ गई, जिससे दरबार में भारी षड्यंत्र शुरू हो गए।

04 राजतंत्र का अंत और लेनिन का आगमन

15 मार्च 1917बढ़ते जन-आक्रोश और सेना के विद्रोह के कारण जार निकोलस द्वितीय की सरकार का पतन हो गया। (इसे फरवरी क्रांति भी कहा जाता है)।
अप्रैल 1917जर्मन सहायता से व्लादिमीर लेनिन निर्वासन से वापस लौटकर रूस में अवतरित हुए और उन्होंने बोल्शेविकों का नेतृत्व संभालते हुए अगली क्रांति (अक्टूबर क्रांति) की रूपरेखा तैयार की।

क्रांति का नेतृत्व और राजनीतिक दलों का दृष्टिकोण

रूस की क्रांति की रूपरेखा में विभिन्न राजनीतिक दलों की विचारधाराओं में स्पष्ट अंतर था:

दलआधार / नेतृत्वक्रांति संबंधी दृष्टिकोण
सोशल रिवोल्यूशनरी पार्टीकिसान वर्गइनके अनुसार क्रांति का नेतृत्व किसान वर्ग के हाथों में होना चाहिए था।
मेंशेविक पार्टीऔद्योगिक मज़दूरक्रांति दो चरणों में होगी — प्रथम चरण का नेतृत्व बुर्जुआ (पूंजीपति) वर्ग करेगा, और द्वितीय चरण का नेतृत्व सर्वहारा (श्रमिक) वर्ग करेगा।
बोल्शेविक पार्टीसर्वहारा वर्ग; लेनिन द्वारा मजबूतक्रांति का नेतृत्व केवल सर्वहारा वर्ग को ही करना चाहिए। इनका मानना था कि प्रथम चरण में यूरोप के अन्य सर्वहारा वर्ग के साथ मिलकर और द्वितीय चरण में किसानों के साथ मिलकर क्रांति की जाएगी।

05 व्लादिमीर लेनिन: विचारधारा, नीतियाँ और सफलता

कार्ल मार्क्स के अनुसार सर्वहारा क्रांति सबसे पहले औद्योगिक देश में होगी, लेकिन लेनिन ने इसे रूस की परिस्थिति के अनुसार ढाला। लेनिन के अनुसार— "पूंजीवादी व्यवस्था एक सशक्त जंजीर है, तथा सर्वहारा वर्ग को इसके सबसे कमज़ोर भाग पर चोट करनी चाहिए।"

प्रमुख दस्तावेजTwo Tactics of Social Democracy [April Theses]: यह लेनिन द्वारा 16 अप्रैल 1917 में जारी की गई।

लेनिन की सफलता के प्रमुख कारण

  1. उचित समय पर निर्णय: इसी कारण अक्टूबर 1917 में लेनिन द्वारा बोल्शेविक पार्टी का रूस पर नियंत्रण स्थापित हो सका।
  2. अवसरवादी दृष्टिकोण।
  3. प्रतिपक्ष के खिलाफ आक्रामक नीति।

अक्टूबर 1917 में सत्ता में आने के बाद लेनिन के प्रमुख कार्य

  • जर्मनी के साथ समझौता: रूस ने जर्मनी के साथ समझौता किया, जिसके तहत रूस को अपना 1/4 यूरोपीय भाग जर्मनी को देना पड़ा।
  • भूमि का पुनर्वितरण: किसानों के बीच भूमि बांटी गई, जिससे किसान खुश हुए।
  • आतंक व रियासत की नीति:
    • विरोधियों को कुचलने के लिए "चेका" (Cheka) नामक गुप्त पुलिस संगठन बनाया।
    • रियासत नीति के तहत अल्पसंख्यकों को नई पहचान दिलाई।
  • नई आर्थिक नीति (NEP - 1921): इसके तहत रूस की अर्थव्यवस्था का 99% भाग निजी क्षेत्र (Private sector) के अधीन कर दिया गया।

06 रूस की क्रांति की देन (वैश्विक प्रभाव)

  1. विश्व की पहली सर्वहारा (श्रमिक वर्ग) क्रांति: यह इतिहास की पहली सफल श्रमिक क्रांति थी।
  2. विचारधारा का विभाजन (शीत युद्ध/Cold War का आरंभ): विश्व दो गुटों में बंट गया —
    • पूंजीवादी अर्थव्यवस्था: जिसका लीडर (Leader) अमेरिका बना।
    • समाजवादी अर्थव्यवस्था: जिसका नेतृत्व U.S.S.R. ने किया।
  3. समाजवादी विचारधारा का सर्वाधिक प्रसार: पूरे विश्व में यह विचारधारा तेजी से फैली।
  4. आर्थिक नियोजन व राज्य नियंत्रित अर्थव्यवस्था: इसी का फायदा (Benefit) मिला कि 1929-30 की वैश्विक आर्थिक महामंदी का रूस पर बहुत कम प्रभाव पड़ा।

07 रूस की क्रांति के महत्वपूर्ण तथ्य

प्रमुख विचारक और जनक

विचार / क्षेत्रप्रमुख नाम एवं तथ्य
'समाजवाद' शब्द का जनकरॉबर्ट ओवेन (Robert Owen) — इन्हें आदर्श समाजवाद का प्रवक्ता माना जाता है।
वैज्ञानिक समाजवाद का जनककार्ल मार्क्स (जर्मनी)। पुस्तक: दास कैपिटल (Das Kapital) और कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो (Communist Manifesto - कार्ल मार्क्स + एंगेल)। नारा: "दुनिया के मज़दूरों एक हो जाओ!"
फ्रांसीसी साम्यवाद का जनकसेंट साइमन।
फेबियन सोशलिज्मनेतृत्व: जॉर्ज बर्नार्ड शॉ। फेबियन सोसायटी की स्थापना: लंदन (1884)।
शून्यवाद का जनकतुर्गनेव।

साम्राज्य और क्रांति से जुड़े तथ्य

  • रूस की क्रांति का समय: 1917।
  • ज़ार शाही (Tsar): रूस के शासक 'ज़ार' कहलाते थे। 1917 में ज़ार शाही समाप्त हुई और अंतिम शासक ज़ार निकोलस-II था।
  • "एक ज़ार, एक चर्च, एक रूस": यह नारा जार निकोलस-II का था।
  • स्लाव जनसंख्या: रूस में सर्वाधिक जनसंख्या स्लाव (Slav) लोगों की थी।
  • बोल्शेविक क्रांति का नेतृत्व: लेनिन द्वारा (अक्टूबर-नवंबर 1917) किया गया।
  • लाल सेना का संगठन: रूस में लाल सेना ट्रॉट्स्की ने बनाई थी। (ट्रॉट्स्की को 'स्थायी क्रांति' का भी जनक माना जाता है)।
  • आधुनिक रूस का निर्माता: स्टालिन।

प्रसिद्ध पुस्तकें एवं उनके लेखक

  • अन्ना कैरेनिना (Anna Karenina): लियो टॉलस्टॉय की रचना।
  • मदर (माँ): मैक्सिम गोर्की की पुस्तक।
  • "Rights of Man": थॉमस पेन की पुस्तक।
  • "युद्ध का अंत करो": यह नारा लेनिन ने दिया था।
अध्याय अभ्यास परीक्षा

40 प्रश्नों में सत्यापित सरकारी परीक्षा प्रश्न और UKPSC/UKSSSC स्तर के PYQ-पैटर्न प्रश्न शामिल हैं।

लेखकDeepak Singh Jethi
अंतिम अपडेट27 जुलाई 2026
विश्व इतिहास · अध्याय 04