हिंदी साहित्य · छायावाद

जयशंकर प्रसाद

जीवन, रचनाएँ और प्रमुख पंक्तियाँ — तेज revision और active recall के लिए क्रमबद्ध नोट्स।

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व्यक्तिगत परिचय

जन्म
30 जनवरी 1889 ई., काशी (वाराणसी)।
मृत्यु
15 नवंबर 1937 ई।
परिवार / घराना
‘सुँघनी साहू’ घराना — काशी का प्रसिद्ध वैश्य परिवार।
पत्रिका संपादन
‘इन्दु’ मासिक (1909 ई.) — भांजे अम्बिकाप्रसाद गुप्त के साथ।
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उपनाम एवं उपाधियाँ

नाम / उपनाम

  • कलाधरशुरुआती ब्रजभाषा कविताओं का उपनाम।
  • झारखंडीबचपन का स्थानीय नाम।

प्रमुख उपाधियाँ

  • छायावाद का प्रवर्तक
  • छायावाद का ब्रह्मा
  • हिंदी ऐतिहासिक नाटकों का सम्राट
  • आधुनिक कविता के सुमेरु
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काव्य रचनाएँ

ब्रजभाषा

चित्राधार — आरंभिक ब्रजभाषा संग्रह; ‘अयोध्या का उद्धार’ और ‘वन मिलन’ इसकी प्रमुख कविताएँ हैं।

खड़ी बोली · कालक्रम

  1. कानन कुसुम — खड़ी बोली का प्रथम काव्य संग्रह।

  2. करुणालय

  3. प्रेम पथिक — पहले ब्रजभाषा में, बाद में खड़ी बोली अनुवाद।

  4. महाराणा का महत्त्व

  5. झरना — “छायावाद की प्रथम प्रयोगशाला”।

  6. आँसू — ‘हिंदी का मेघदूत’

    “जो घनीभूत पीड़ा थी, मस्तक में स्मृति-सी छाई…”
  7. लहर

    “बीती विभावरी जाग री…”

कामायनी · 1935 ई.

  • शांतिप्रिय द्विवेदी — “छायावाद का उपनिषद”।
  • सुमित्रानंदन पंत — “हिंदी में ताजमहल के समान”।
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नाटक

  1. सज्जन — प्रथम नाटक।

  2. कल्याणी परिणय · प्रायश्चित

  3. राज्यश्री — प्रथम ऐतिहासिक नाटक।

  4. विशाख · अजातशत्रु

  5. कामना

  6. स्कंदगुप्त — देवसेना का गीत।

    “आह! वेदना मिली विदाई…”
  7. एक घूँट — हिंदी की प्रथम एकांकी।

  8. चंद्रगुप्त — कार्नेलिया का गीत।

    “अरुण यह मधुमय देश हमारा…”
  9. ध्रुवस्वामिनी — अंतिम नाटक; विषय: नारी सशक्तिकरण।

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कहानियाँ एवं उपन्यास

कहानियाँ

प्रथम कहानी
‘ग्राम’ — 1911 ई., ‘इन्दु’ पत्रिका।
अंतिम कहानी
सालवती।

कहानी संग्रह · अलग-अलग याद करें

  1. छाया — हिंदी का प्रथम कहानी संग्रह।
  2. प्रतिध्वनि
  3. आकाशदीप
  4. आँधी
  5. इंद्रजाल

प्रसिद्ध कहानियाँपुरस्कार · गुण्डा (नन्हकू सिंह) · ममता · छोटा जादूगर · बिसाती

उपन्यास

  1. कंकाल
  2. तितली
  3. इरावती — अपूर्ण; निधन के कारण अधूरा रहा।
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प्रमुख पंक्तियाँ परीक्षा उपयोगी

  1. “अरुण यह मधुमय देश हमारा...”

    कार्नेलिया का गीत — नाटक ‘चंद्रगुप्त’ से।

  2. “हिमाद्रि तुंग शृंग से, प्रबुद्ध शुद्ध भारती।”
  3. “बीती विभावरी जाग री, अम्बर पनघट में डुबो रही, तारा घट उषा नागरी।”

    ‘लहर’ संग्रह से।

  4. “नारी! तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास-रजत-नग पगतल में।”

    ‘कामायनी’ से।

  5. “अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन है!”
  6. “इस करुणा कलित हृदय में, अब विकल रागिनी बजती।”
  7. “आह वेदना मिली विदाई! मैंने भ्रमवश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई।”

    देवसेना का विदाई गीत — नाटक ‘स्कंदगुप्त’ से।

  8. “मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी।”
  9. “ले चल वहाँ भुलावा देकर, मेरे नाविक! धीरे-धीरे।”