हिंदी साहित्य · सगुण धारा — कृष्णभक्ति शाखा

मीराबाई

जीवन-परिचय, उपाधियाँ और प्रमुख रचनाएँ — स्पष्ट, परीक्षा-केंद्रित अध्ययन नोट्स।

01

जीवन-परिचय

जन्म
1498 ई., कुड़की गाँव, राजस्थान।
मृत्यु
1546 ई., द्वारका।
बचपन का नाम
पेमल
पति
कुंवर भोजराज — महाराणा सांगा के ज्येष्ठ पुत्र।
गुरु
संत रैदास (रविदास)
भाषा
राजस्थानी/मारवाड़ी मिश्रित ब्रजभाषा; गुजराती का भी प्रभाव।
02

उपाधियाँ एवं उपनाम

  • राजस्थान की राधा
  • मरु-मंदाकिनीमरुस्थल की मंदाकिनी।
  • प्रेम की दीवानी
03

प्रमुख रचनाएँ

  1. मीराँबाई की पदावली

    मीरा के पदों का प्रमुख संग्रह।

  2. नरसीजी का मायरा
  3. गीतगोविंद की टीका
  4. राग गोविंद
  5. राग सोरठ के पद
  6. मीरा की मल्हार
  7. गरबा गीत
04

महत्त्वपूर्ण पद-पंक्तियाँ

  1. “मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।
    जा के सिर मोर-मुकुट, मेरो पति सोई॥
    छाँड़ि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई?
    संतन ढिग बैठि-बैठि, लोक-लाज खोयी॥
    अँसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी।
    अब त बेलि फैलि गयी, आणंद-फल होयी॥
    दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से बिलोयी।
    दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी॥
    भगत देखि राजी हुयी, जगत देखि रोयी।
    दासि मीराँ लाल गिरधर! तारो अब मोही॥”
  2. “पग घुँघरू बाँधि मीराँ नाची।
    मैं तो मेरे नारायण सूँ, आपहि हो गई साची॥
    लोग कहैं, मीराँ भई बावरी; न्यात कहैं कुल-नासी।
    विस का प्याला राणा भेज्या, पीवत मीराँ हाँसी॥
    मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, सहज मिले अविनासी॥”
  3. “घायल की गत घायल जाणै, हियड़ों अगण सँजोय।
    जौहर की गत जौहरी जाणै, क्या जाण्या जिण खोय।”

    स्रोत: मीराँबाई की पदावली, संपादक—परशुराम चतुर्वेदी।

  4. “हरि आप हरो जन री भीर।
    द्रौपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
    भगत कारण रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर॥”
  5. “स्याम म्हाने चाकर राखो जी।
    गिरधारी लाला म्हाने चाकर राखो जी॥
    चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ, नित उठ दरसण पास्यूँ॥”
  6. “बसो मेरे नैनन में नंदलाल।
    मोहिनी मूरति, साँवरि सूरति, नैना बने विशाल॥
    अधर सुधा-रस मुरली राजति, उर वैजंती माल॥”
  7. “बरसे बदरिया सावन की, सावन की मनभावन की।
    सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की॥
    उमड़-घुमड़ चहुँ दिश से आयो, दामिन दमकै झर लावन की॥”