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तुलसीदास
सगुण — रामभक्ति शाखा · दास्य भाव · रामचरितमानस रचयिता
रामभक्ति
दास्य भाव
अवधी + ब्रज
कलिकाल का वाल्मीकि
जन्म / मृत्यु
1532 ई. / 1623 ई. (काशी, अस्सी घाट)
गुरु / पत्नी
नरहरिदास / रत्नावली
वैराग्य का कारण
पत्नी की फटकार — "लाज न लागत आपको..."
समकालीन
अकबर + जहाँगीर (दोनों)
भक्ति मार्ग
दास्य भाव (ईश्वर के दास)
उपाधियाँ / उपनाम
📜 कलिकाल का वाल्मीकि
🎶 अनुप्रास का बादशाह
🏆 हिंदी का जातीय कवि — आचार्य रामचंद्र शुक्ल
🦢 मानस का हंस — अमृतलाल नागर के उपन्यास का शीर्षक
👑 कवि शिरोमणि
🌍 लोकनायक
रचनाएँ — भाषा के अनुसार
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ट्रिक: अवधी = "राम-राम-बरवै-जानकी-पार्वती-हनुमान"
रामचरितमानस · रामलला नहछू · बरवै रामायण · जानकी मंगल · पार्वती मंगल · हनुमान चालीसा
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रामचरितमानस रचना-काल: 1574 ई. (विक्रमी संवत् 1631) — अयोध्या में आरम्भ। उस समय मुगल सम्राट अकबर का शासन था (1556–1605)।
तुलसीदास ने स्वयं लिखा — "संवत सोरह सौ इकतीसा। करउँ कथा हरिपद धरि सीसा।।"
तुलसीदास ने स्वयं लिखा — "संवत सोरह सौ इकतीसा। करउँ कथा हरिपद धरि सीसा।।"
🏔️ अवधी भाषा में रचनाएँ
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रामचरितमानस ⭐
रामलला नहछू
बरवै रामायण
जानकी मंगल
पार्वती मंगल
हनुमान चालीसा ⭐
हनुमान बाहुक ⭐
📌 हनुमान बाहुक — तुलसीदास ने बाहु (भुजा) के रोग से मुक्ति के लिए रचा; यह मुक्तक काव्य है और अवधी भाषा में लिखा गया है।
🌸 ब्रज भाषा में रचनाएँ
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कवितावली ⭐
गीतावली
दोहावली
श्रीकृष्ण गीतावली
विनय पत्रिका ⭐
वैराग्य संदीपनी ⭐
रामाज्ञा प्रश्नावली ⭐
📌 वैराग्य संदीपनी — 48 दोहे-सोरठे + 14 चौपाई; विषय: वैराग्योपदेश, सन्तों के लक्षण और शान्ति-निर्देश। भाषा: अवधी मिश्रित ब्रजभाषा। रचनाकाल संवत् 1614। तुलसी की ख्याति के पाँच प्रमुख आधारों में शामिल।
📌 रामाज्ञा प्रश्नावली — एक ज्योतिष ग्रन्थ है जिसमें शकुन-अपशकुन और रामायण-कथा के आधार पर भविष्य-विचार किया गया है। रचनाकाल संवत् 1621।
🃏 Active Recall — फ्लैशकार्ड
तुलसी · उपनाम (परीक्षा में ★★★)
"तुलसीदास के प्रमुख उपनाम / उपाधियाँ कौन-कौन सी हैं? किसने क्या कहा?"
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✓ उत्तर
① हिंदी का जातीय कवि — रामचंद्र शुक्ल
② कलिकाल का वाल्मीकि
③ मानस का हंस — अमृतलाल नागर (उपन्यास)
④ कवि शिरोमणि
⑤ लोकनायक
② कलिकाल का वाल्मीकि
③ मानस का हंस — अमृतलाल नागर (उपन्यास)
④ कवि शिरोमणि
⑤ लोकनायक
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तुलसी · रामचरितमानस काल
"रामचरितमानस कब लिखी गई? उस समय भारत पर किसका शासन था?"
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✓ उत्तर
रचना-काल: 1574 ई. (विक्रमी संवत् 1631), अयोध्या में आरम्भ
शासक: मुगल सम्राट अकबर (1556–1605)
तुलसी ने लिखा: "संवत सोरह सौ इकतीसा।"
शासक: मुगल सम्राट अकबर (1556–1605)
तुलसी ने लिखा: "संवत सोरह सौ इकतीसा।"
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तुलसी · वैराग्य
"तुलसीदास को वैराग्य का मार्ग किसने और किस फटकार से दिखाया?"
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✓ उत्तर
पत्नी रत्नावली की फटकार — "लाज न लागत आपको..." — ने उन्हें सांसारिक मोह छोड़कर राम भक्ति की ओर मोड़ दिया।
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तुलसी · भाषा
"रामचरितमानस किस भाषा में लिखी? और विनय पत्रिका किस भाषा में?"
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✓ उत्तर
रामचरितमानस → अवधी भाषा | विनय पत्रिका → ब्रज भाषा | तुलसी ने दोनों भाषाओं में लिखा — यही उनकी विशेषता है।
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तुलसी · समकालीन
"तुलसीदास किन दो मुगल शासकों के समकालीन थे? मृत्यु कहाँ हुई?"
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✓ उत्तर
समकालीन: अकबर + जहाँगीर (दोनों) | मृत्यु: 1623 ई., काशी के अस्सी घाट पर।
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✍️ प्रमुख पंक्तियाँ और अर्थ
"परहित सरिस धर्म नहीं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।"
परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं। दूसरों को दुःख देना सबसे बड़ा पाप है। — तुलसी का नैतिक सूत्र।
📌 रामचरितमानस
"सिया राममय सब जग जानी, करहुँ प्रनाम जोरि जुग पानी"
संपूर्ण जगत में सीता-राम का स्वरूप देखकर दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ। — सर्वेश्वरवाद का भाव।
"राम सों बड़ो है कौन मोसों कौन छोटो। राम सो खरो कौन मोसो खोटो।"
राम से बड़ा कोई नहीं, मुझ (तुलसी) से छोटा कोई नहीं। राम जैसा सच्चा (खरा) कोई नहीं, मेरे जैसा पापी (खोटा) कोई नहीं।
📌 विनय पत्रिका — दास्य भाव
"ईश्वर अंस जीव अविनाशी। चेतन अमल सहज सुख राशी।"
जीव (आत्मा) ईश्वर का अंश है, इसलिए अविनाशी है — चेतन, पवित्र और सुख का भंडार।
📌 रामचरितमानस
"का बरखा जब कृषि सुखानी, समय चूकि पुनि का पछतानी"
जब फसल सूख गई तो बारिश का क्या फायदा? सही अवसर निकल जाने के बाद पछताना बेकार है — समय का महत्व।
"गोरख जगायो जोग, भगति भगायो लोग"
गोरखनाथ ने योग-मार्ग का इतना कठिन प्रचार किया कि लोगों ने सहज भक्ति-मार्ग से मुँह मोड़ लिया — नाथ संप्रदाय पर व्यंग्य।
"केसव कहि न जाए का कहिये, देखत तव रचना विचित्र अति समुझि मनहिं मन रहिये"
हे केशव! आपकी इस विचित्र रचना (संसार) को देखकर कुछ कहते नहीं बनता — बस मन ही मन समझकर हैरान रहना पड़ता है।
📌 रामचरितमानस
"खेती न किसान को, भिखारी को न भीख..."
कलयुग की भयावह गरीबी का वर्णन — किसान के पास खेती नहीं, भिखारी को भीख नहीं — समाज की दुर्दशा पर तुलसी का यथार्थ चित्रण।
📌 कवितावली — कलयुग-वर्णन
"हे खग हे मृग मधुकर श्रेनी, तुम देखी सीता मृगनयनी"
सीता-हरण के बाद भगवान राम वन में पशु-पक्षियों से पूछते हैं कि क्या तुमने हिरण जैसी आँखों वाली मेरी सीता को देखा है? — वियोग-श्रृंगार का हृदयस्पर्शी प्रसंग।
📌 रामचरितमानस — अरण्यकाण्ड
"ढोल गंवार सूद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी"
ढोल, अज्ञानी, शूद्र, पशु और नारी — इन सभी को विशेष देख-रेख और अनुशासन की आवश्यकता होती है। (प्रसंग: समुद्र का कथन, रामचरितमानस — सुंदरकाण्ड)
📌 रामचरितमानस — सुंदरकाण्ड (समुद्र का वचन)