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अपह्नुति अलंकार

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अपह्नुति अलंकार

अपह्नुति अलंकार की परिभाषा, पहचान और रूपक से अंतर

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अपह्नुति अलंकार

अपह्नुति अलंकार की परिभाषा, पहचान और रूपक से अंतर

जहाँ उपमेय (प्रस्तुत/जिसकी बात हो रही हो) का निषेध (नकार) करके उसमें उपमान (अप्रस्तुत/जिससे तुलना की जा रही हो) की स्थापना की जाए, वहाँ अपह्नुति अलंकार होता है। (उपमेय का निषेध + उपमान की स्थापना — दोनों ज़रूरी हैं)

💡 पहचान ट्रिक + रूपक vs अपह्नुति

वाचक शब्द (निषेधात्मक):

नहींनहिं नाहिंजिनिमिष (बहाने)

⚡ अपह्नुति = निषेध + स्थापना। किसी वस्तु को झुठलाकर किसी और वस्तु को सच बताना।

रूपक अलंकार: उपमेय को सीधे उपमान मान लिया जाए (यह मुख चन्द्रमा है) → रूपक।
अपह्नुति: उपमेय को 'नकार' कर उपमान माना जाए (यह मुख नहीं, चन्द्रमा है) → अपह्नुति।

1
उदाहरण पलाश के फूल + जंगल की आग
नाहिं पलास के पुहुप ये, हैं प्रमुदित वन-ज्वाल।
उपमेय (निषेध)उपमान (स्थापना)वाचक
पलास के पुहुपवन-ज्वाल (जंगल की आग)नाहिं

व्याख्या: यहाँ खिले हुए लाल पलाश के फूलों (उपमेय) को देखकर सीधे तौर पर यह नकार दिया गया है कि ये पलाश के फूल 'नहीं' हैं, बल्कि यह तो जंगल में लगी हुई आग (उपमान) है।

2
उदाहरण सुग्रीव का कथन + बालि
मैं जो कहा रघुबीर कृपाला।
बंधु न होय मोर यह काला॥
उपमेय (निषेध)उपमान (स्थापना)वाचक
बंधु (भाई बालि)काल (मृत्यु/यमराज)

व्याख्या: सुग्रीव श्रीराम से कहते हैं कि हे कृपालु! यह बालि मेरा भाई 'नहीं' है, यह तो साक्षात् मेरा 'काल' है। यहाँ भाई होने का निषेध कर काल (मृत्यु) की स्थापना की गई है।

3
उदाहरण आँसू + सच्चे मोती
ये नहिं आँसू नीर हैं, ये तो हैं मुक्ताहल।
उपमेय (निषेध)उपमान (स्थापना)वाचक
आँसू नीर (जल)मुक्ताहल (सच्चे मोती)नहिं

व्याख्या: यहाँ आँखों से गिर रहे आँसुओं (जल) को नकार कर उन्हें सच्चे मोती बताया गया है। पानी को झुठलाकर मोती को सच माना गया है।

4
उदाहरण होठ + कोमल पत्ते
अधर नहीं पल्लव हैं ये, लाल-लाल सुकुमार।
उपमेय (निषेध)उपमान (स्थापना)वाचक
अधर (होंठ)पल्लव (कोमल पत्ते)नहीं

व्याख्या: यहाँ नायिका के सुंदर लाल होठों को 'नहीं' कहकर नकारा गया है और उनके स्थान पर उन्हें लाल और कोमल पत्ते मान लिया गया है।

5
उदाहरण अपनी वाणी + भवानी का अस्त्र
सुनहु नाथ यह नहिं निज बानी।
प्रगट करहिं निज अस्त्र भवानी॥
उपमेय (निषेध)उपमान (स्थापना)वाचक
निज बानी (वाणी)भवानी का अस्त्रनहिं

व्याख्या: यहाँ वक्ता अपनी सामान्य वाणी को नकार रहा है और कह रहा है कि यह जो शब्द निकल रहे हैं, वे मेरी वाणी नहीं हैं, बल्कि यह तो देवी भवानी का अस्त्र प्रकट हो रहा है।

6
उदाहरण कैतव अपह्नुति
समय-समय पर आँसू के मिष, रोती है मेरी तरुणाई।
उपमेय (निषेध)उपमान (स्थापना)वाचक
आँसू गिरनातरुणाई (युवावस्था) का रोनामिष (बहाने)

व्याख्या: उच्च स्तरीय अपह्नुति (कैतव अपह्नुति) में 'नहीं' की जगह 'मिष' या 'बहाने' शब्द आता है। इसका अर्थ है कि ये आँसू नहीं गिर रहे हैं, बल्कि आँसुओं के बहाने मेरी युवावस्था रो रही है।