श्लेष अलंकार
'श्लिष्ट' का अर्थ होता है— 'चिपका हुआ'। जहाँ काव्य में कोई शब्द केवल एक ही बार प्रयुक्त हो, परंतु प्रसंग-भेद के कारण उसके अनेक अर्थ निकलते हों, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।
पानी गए न ऊबरैं, मोती मानुष चून।
| पानी — किसके लिए | अर्थ |
|---|---|
| मोती के लिए | चमक / कांति |
| मनुष्य के लिए | आत्मसम्मान / इज्जत |
| चून के लिए | जल |
| सुबरन — किसके लिए | अर्थ |
|---|---|
| कवि के लिए | सुंदर अक्षर / अच्छे शब्द |
| व्यभिचारी के लिए | सुंदर रूप / यौवन |
| चोर के लिए | स्वर्ण / सोना |
| शब्द | प्रथम अर्थ | द्वितीय अर्थ |
|---|---|---|
| पट | वस्त्र — भिक्षुक को वस्त्र दान करना | किवाड़ / दरवाज़ा — भिक्षुक को देखकर दरवाज़ा बंद कर लेना |
बारे उजियारो करै, बढ़े अँधेरो होय॥
| शब्द | दीपक के लिए | कुपुत्र के लिए |
|---|---|---|
| बारे | प्रज्वलित करने पर | बचपन में |
| बढ़े | बुझ जाने पर | युवा / बड़ा होने पर |
| शब्द | प्रथम अर्थ | द्वितीय अर्थ |
|---|---|---|
| सिलीमुख | बाण / तीर — जो श्रीराम संधान कर रहे हैं | भ्रमर / भौंरा — जो कमल-रूपी रावण के सिरों पर मंडरा रहे हैं |
| शब्द | प्रथम अर्थ | द्वितीय अर्थ |
|---|---|---|
| घनश्याम | काले बादल — जो वर्षा द्वारा प्रकृति को नवजीवन देते हैं | भगवान श्रीकृष्ण — जो भक्तों का उद्धार करते हैं |
| शब्द | प्रथम अर्थ | द्वितीय अर्थ |
|---|---|---|
| तिरगुन | सत्व, रज, और तम (दर्शनशास्त्र के तीन गुण) | तीन धागों वाली रस्सी |
प्रियतम बतला दो लाल मेरा कहाँ है?
| शब्द | प्रथम अर्थ | द्वितीय अर्थ |
|---|---|---|
| लाल | एक बहुमूल्य रत्न (Ruby) | बेटा / पुत्र |
को घटि ये वृषभानुजा, वे हलधर के बीर॥
| शब्द | प्रथम अर्थ (राधा-कृष्ण) | द्वितीय अर्थ (गाय-बैल) |
|---|---|---|
| वृषभानुजा | वृषभानु + जा (पुत्री) = राधा जी | वृषभ (बैल) + अनुजा (छोटी बहन) = गाय |
| हलधर के बीर | हलधर (बलराम जी) के भाई = श्री कृष्ण | हलधर (हल खींचने वाला बैल) के भाई = बैल |
पहला अर्थ (राधा-कृष्ण के संदर्भ में): कवि बिहारीलाल जी कहते हैं कि राधा और कृष्ण की यह जोड़ी चिरंजीवी हो (युगों-युगों तक बनी रहे)। इन दोनों के बीच गहरा प्रेम क्यों न हो! इनमें से कोई भी किसी से कम नहीं है। यदि ये (राधा जी) राजा 'वृषभानु' की पुत्री हैं, तो वे (श्री कृष्ण) भी 'हलधर' (बलराम जी) के भाई हैं।
दूसरा अर्थ (गाय-बैल के संदर्भ में): कवि कहते हैं कि इस जोड़ी की आयु लंबी हो, इनमें गहरा लगाव क्यों न हो! इनमें कोई किसी से कम नहीं है, अगर एक वृषभ (बैल) की अनुजा (गाय) है, तो दूसरा भी हल को धारण करने वाले का भाई (अर्थात् बैल) ही है।