अलंकार
दृष्टांत अलंकार

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दृष्टांत अलंकार

दृष्टांत अलंकार की परिभाषा, पहचान और उदाहरण

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दृष्टांत अलंकार

दृष्टांत अलंकार की परिभाषा, पहचान और उदाहरण

'दृष्टांत' का अर्थ है 'उदाहरण' या 'प्रमाण'। जहाँ किसी बात को स्पष्ट करने के लिए उसी के समान कोई दूसरी बात (उदाहरण के रूप में) कही जाए, और दोनों बातों में बिंब-प्रतिबिंब भाव (परछाईं जैसा संबंध) हो, बिना किसी वाचक शब्द के — वहाँ दृष्टांत अलंकार होता है।

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काव्य पंक्ति में दो अलग-अलग बातें होंगी जो अर्थ के स्तर पर एक जैसी लगेंगी (पहली लाइन थ्योरी, दूसरी लाइन उसका उदाहरण)। सबसे बड़ी पहचान — इसमें उपमा की तरह वाचक शब्द (जैसे, ज्यों, जिमि, सम, सा) का प्रयोग बिल्कुल नहीं होता, दोनों पंक्तियाँ स्वतंत्र होती हैं।

कोई वाचक शब्द नहींबिंब-प्रतिबिंब भावदो स्वतंत्र पंक्तियाँ
1
उदाहरण UPPCS & UKPSC PYQ
एक म्यान में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं।
किसी और पर प्रेम नारियाँ, पति का क्या सह सकती हैं॥
कथन (बिंब)उदाहरण (प्रतिबिंब)
स्त्रियाँ पति का किसी अन्य के प्रति प्रेम सहन नहीं करतींएक म्यान में दो तलवारें नहीं समातीं

व्याख्या: यह दृष्टांत का सबसे विख्यात उदाहरण है — पहली पंक्ति के कथन को सिद्ध करने के लिए दूसरी पंक्ति में ठीक वैसा ही बिंब दिया गया है, कोई 'जैसे/ज्यों' शब्द नहीं है।

2
उदाहरण UP RO/ARO PYQ
सबै सहायक सबल के, कोउ न निबल सहाय।
पवन जगावत आग को, दीपहिं देत बुझाय॥
कथन (बिंब)उदाहरण (प्रतिबिंब)
बलवान की सब सहायता करते हैं, निर्बल का कोई नहींहवा आग को भड़काती है, दीपक को बुझा देती है

व्याख्या: पहली पंक्ति में सामाजिक सत्य बताया गया है, दूसरी पंक्ति में हवा और आग के उदाहरण से उसका प्रतिबिंब प्रस्तुत किया गया है।

3
उदाहरण UKSSSC VDO & Patwari PYQ
जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चंदन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥
कथन (बिंब)उदाहरण (प्रतिबिंब)
उत्तम स्वभाव वाले को बुरी संगति कुछ नहीं बिगाड़तीचंदन के पेड़ पर साँप लिपटे रहते हैं, पर विष नहीं फैलता

व्याख्या: सज्जन की प्रकृति (पहली पंक्ति) का प्रतिबिंब चंदन के पेड़ (दूसरी पंक्ति) से दिखाया गया है, बिना किसी तुलनात्मक शब्द के।

4
उदाहरण TGT Hindi & UP SI PYQ
बिगड़ी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय।
रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय॥
कथन (बिंब)उदाहरण (प्रतिबिंब)
बिगड़ी बात लाख कोशिश करने पर भी नहीं बनतीफटे दूध को मथने से मक्खन नहीं निकलता

व्याख्या: बिगड़े हुए काम की तुलना फटे दूध से करके बिंब-प्रतिबिंब भाव उत्पन्न किया गया है। परीक्षाओं में यह दोहा बार-बार पूछा जाता है।

5
उदाहरण State Exams One-Liner PYQ
करत-करत अभ्यास ते, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात ते, सिल पर परत निसान॥
कथन (बिंब)उदाहरण (प्रतिबिंब)
निरंतर अभ्यास से मूर्ख भी बुद्धिमान बन जाता हैकोमल रस्सी के बार-बार आने-जाने से पत्थर पर निशान पड़ जाते हैं

व्याख्या: अभ्यास के महत्त्व (कथन) को रस्सी और पत्थर के सुंदर उदाहरण (दृष्टांत) से पुष्ट किया गया है।

6
उदाहरण UPTET/CTET PYQ
सठ सुधरहिं सतसंगति पाई।
पारस परस कुधात सुहाई॥
कथन (बिंब)उदाहरण (प्रतिबिंब)
दुष्ट मनुष्य भी संतों की संगति पाकर सुधर जाते हैंपारस पत्थर के स्पर्श से लोहा भी सोना बन जाता है

व्याख्या: तुलसीदास जी की इस चौपाई में पहली पंक्ति के दावे को दूसरी पंक्ति में पारस पत्थर के उदाहरण से सिद्ध किया गया है।

7
उदाहरण UKPSC PCS Mains PYQ
रहिमन अंसुवा नयन ढरि, जिय दुख प्रगट करेइ।
जाहि निकारौ गेह ते, कस न भेद कहि देइ॥
कथन (बिंब)उदाहरण (प्रतिबिंब)
आँसू मन के छिपे दुःख को बाहर प्रकट कर देते हैंघर से निकाला गया व्यक्ति घर का भेद क्यों न बताए

व्याख्या: यहाँ आँसुओं को आँख (घर) से निकाला गया सदस्य माना गया है — घर से निकाले गए व्यक्ति के उदाहरण से आँसुओं की स्थिति प्रमाणित की गई है।

8
उदाहरण Practice Mock Question
पापी मनुज भी आज मुख से राम नाम निकालते।
देखो भयंकर भेड़िये भी आज आँसू ढालते॥
कथन (बिंब)उदाहरण (प्रतिबिंब)
पापी मनुष्य आज (स्वार्थवश) राम का नाम जप रहे हैंखूँखार भेड़िये शिकार के बाद घड़ियाली आँसू बहाते हैं

व्याख्या: पापी मनुष्य के कृत्य का प्रतिबिंब भयंकर भेड़िये के कृत्य से दिखाया गया है।

9
उदाहरण UP RO/ARO PYQ
ओछे नर के पेट में, रहे न मोटी बात।
आध सेर के पात्र में, कैसे सेर समात॥
कथन (बिंब)उदाहरण (प्रतिबिंब)
ओछे व्यक्ति के पेट में कोई गंभीर बात नहीं पचतीआधे सेर के बर्तन में एक सेर वस्तु नहीं समाती

व्याख्या: व्यक्ति की क्षमता (कथन) का दृष्टांत बर्तन की क्षमता (उदाहरण) से प्रस्तुत किया गया है।

10
उदाहरण Practice Mock Question
सुख-दुख के मधुर मिलन से यह जीवन हो परिपूरन।
फिर घन में ओझल हो शशि, फिर शशि में ओझल हो घन॥
कथन (बिंब)उदाहरण (प्रतिबिंब)
सुख और दुःख दोनों के मिलन से जीवन पूर्ण होता हैकभी बादलों के पीछे चाँद छिपता है, कभी चाँद के प्रकाश में बादल

व्याख्या: मानव जीवन के सुख-दुख (उपमेय वाक्य) का दृष्टांत चाँद-बादलों की लुकाछिपी (उपमान वाक्य) के माध्यम से दिया गया है।