अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार

अर्थालंकार

उत्प्रेक्षा अलंकार

उत्प्रेक्षा अलंकार की परिभाषा, वाचक शब्द और उदाहरण

उत्प्रेक्षा अलंकार

उत्प्रेक्षा अलंकार की परिभाषा, वाचक शब्द और उदाहरण

जहाँ उपमेय (प्रस्तुत) में उपमान (अप्रस्तुत) की 'संभावना' या 'कल्पना' की जाए — वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। जब एक वस्तु को दूसरी वस्तु मान लिया जाए या वैसा होने की कल्पना की जाए, तो वह उत्प्रेक्षा है।

💡 एग्जाम मास्टर ट्रिक — वाचक शब्द देखो, उत्प्रेक्षा लिखो!

इनमें से कोई भी दिखे → तुरंत उत्प्रेक्षा:

मनु मनहु मानो मनो जनु जनहु जानो जनो ज्यों यों

⚡ उपमा से अंतर: उपमा में सा/सी/से/सम → तुलना होती है। उत्प्रेक्षा में मनो/जनु → कल्पना/संभावना होती है।

1
UKPSC RO-ARO
सोहत ओढ़े पीत पट, स्याम सलोने गात।
मनो नीलमनि सैल पर, आतप परयो प्रभात॥
उपमेयउपमानवाचकभावार्थ / कल्पना
स्याम गात (श्याम शरीर)नीलमणि पर्वतमनोकृष्ण के सांवले तन पर पीले वस्त्र — मानो नीलमणि पर्वत पर सुबह की पीली धूप पड़ रही हो।
2
UPSSSC VDO
उस काल मारे क्रोध के, तन काँपने उसका लगा।
मानो हवा के ज़ोर से, सोता हुआ सागर जगा॥
उपमेयउपमानवाचकभावार्थ / कल्पना
काँपता शरीरजागता सागरमानोक्रोध से शरीर काँपा — मानो तेज हवा से सोया हुआ सागर जाग गया हो।
3
UKSSSC
सिर फट गया उसका वहीं, मानो अरुण रंग का घड़ा।
उपमेयउपमानवाचकभावार्थ / कल्पना
फटा सिरलाल घड़ामानोफटे सिर से बहता खून — मानो लाल रंग का घड़ा फूट गया हो।
4
TGT/PGT Hindi
कहती हुई यों उत्तरा के, नेत्र जल से भर गए।
हिम के कणों से पूर्ण मानो, हो गए पंकज नए॥
उपमेयउपमानवाचकभावार्थ / कल्पना
आँसुओं भरी आँखेंओस युक्त नए कमलमानोउत्तरा की आँखों में आँसू भर गए — मानो नए कमल पर ओस की बूँदें जम गई हों।
5
BPSC
चमचमात चंचल नयन, बिच घूँघट पट झीन।
मानहुँ सुरसरिता बिमल, जल उछरत जुग मीन॥
उपमेयउपमानवाचकभावार्थ / कल्पना
चंचल आँखें (घूँघट में)गंगा में उछलती दो मछलियाँमानहुँझीने घूँघट में चमकती आँखें — मानो गंगाजल में दो मछलियाँ उछल रही हों।
6
UKPSC VDO
लता भवन ते प्रगट भे, तेहि अवसर दोउ भाइ।
निकसे जनु जुग बिमल बिधु, जलद पटल बिलगाइ॥
उपमेयउपमानवाचकभावार्थ / कल्पना
दोनों भाई (राम-लक्ष्मण)दो चंद्रमाजनुलताओं से राम-लक्ष्मण निकले — मानो बादलों को हटाकर दो चंद्रमा प्रकट हो गए हों।
7
Sub-Inspector
ले चला साथ मैं तुझे कनक,
ज्यों भिक्षुक लेकर स्वर्ण झनक।
उपमेयउपमानवाचकभावार्थ / कल्पना
धतूरा (कनक)सोना (स्वर्ण)ज्योंकनक (धतूरे) को ले जाना — मानो भिखारी सोना पाकर उसे झंकार सहित ले जा रहा हो।
8
UPPSC
पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के।
मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के॥
उपमेयउपमानवाचकभावार्थ / कल्पना
सजे हुए मेघ (बादल)सज-धज कर आया पाहुन (दामाद)ज्योंसजे बादल ऐसे आए — मानो शहर का दामाद गाँव में सज-धज कर आया हो।
9
UPTET
अति कटु बचन कहति कैकेयी।
मानहु लोन जरे पर देई॥
उपमेयउपमानवाचकभावार्थ / कल्पना
कैकेयी के कड़वे वचनजले पर नमक छिड़कनामानहुकैकेयी के कड़वे वचन ऐसे थे — मानो जले हुए घाव पर नमक छिड़क दिया हो।
10
UKSSSC
फूले कास सकल महि छाई।
जनु बरषा रितु प्रगट बुढ़ाई॥
उपमेयउपमानवाचकभावार्थ / कल्पना
धरती पर कास के सफेद फूलवर्षा ऋतु का बुढ़ापा (सफेद बाल)जनुधरती पर कास के सफेद फूल — मानो वर्षा ऋतु का बुढ़ापा (सफेद बाल) प्रकट हो गया हो।
11
MPPSC
जान पड़ता है नेत्र देख बड़े-बड़े।
हीरों में गोल नीलम हैं जड़े॥
उपमेयउपमानवाचकभावार्थ / कल्पना
बड़े-बड़े नेत्रहीरों में जड़े नीलमजान (जानो)बड़े नेत्रों को देख — लगता है मानो हीरों में गोल नीलम जड़ दिए गए हों।
12
TGT/PGT
दादुर धुनि चहु दिशा सुहाई।
बेद पढ़हिं जनु बटु समुदाई॥
उपमेयउपमानवाचकभावार्थ / कल्पना
चारों दिशाओं में मेंढकों की ध्वनिविद्यार्थियों का वेद-पाठजनुमेंढकों की सुहावनी टर्र-टर्र — मानो विद्यार्थी समूह वेद के मंत्र पढ़ रहा हो।